सतना में चित्रकूट पुलिस ने सती अनुसुइया मोड़ के पास हुई एक अज्ञात युवक की हत्या की गुत्थी सुलझाने का दावा किया है। इस हत्याकांड की मुख्य साजिशकर्ता मृतक की पत्नी ही निकली, जिसने अवैध संबंधों के चलते अपने प्रेमी और उसके एक साथी के साथ मिलकर पति की हत्या की योजना बनाई थी। मामला तब सामने आया जब 8 जून को महेंद्र कुमार गुप्ता ने पुलिस को सूचना दी कि सती अनुसुइया मोड़ के पास पुल के किनारे झाड़ियों में एक अज्ञात युवक का शव पड़ा है, जिसके गले पर धारदार हथियार के निशान थे। पुलिस ने तुरंत धारा 103(1), 238(ए) बीएनएस के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की। पुलिस ने शिनाख्त के लिए पम्पलेट और सोशल मीडिया का सहारा लिया। साइबर सेल की मदद से मृतक की पहचान 35 वर्षीय संजीव उर्फ संजू पिता सूर्यपाल पासी, निवासी ग्राम दादूपुर अमिलिया, थाना घूरपुर, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश के रूप में हुई। उसकी पहचान उसकी मां गुलाब बाई और पत्नी अनीता देवी ने की। तकनीकी साक्ष्यों और पत्नी अनीता देवी से कड़ी पूछताछ के बाद यह खुलासा हुआ कि उसके आरोपी अमित सिंह के साथ पिछले 3 साल से अवैध संबंध थे, जिसको लेकर पति से अक्सर विवाद होता रहता था। अनीता ने अपने प्रेमी अमित सिंह उर्फ बडकू (26 वर्ष) और शेरा उर्फ राजू निषाद (32 वर्ष), दोनों निवासी प्रयागराज, के साथ मिलकर पति की हत्या की साजिश रची। 8 जून को अमित और शेरा, संजीव को चित्रकूट घुमाने के बहाने स्प्लेंडर मोटरसाइकिल से सती अनुसुइया रोड पर ले गए। पुल के पास पेशाब करने के बहाने रोककर उन्होंने धारदार चाकू से संजीव का गला रेतकर उसकी हत्या कर दी। आरोपियों ने शव को झाड़ियों में फेंक दिया और पहचान छिपाने के लिए मृतक की जेब से मोबाइल, पैसे और दस्तावेज निकाल लिए। पुलिस अधीक्षक हंसराज सिंह और एएसपी प्रेमलाल कुर्वे के निर्देशानुसार थाना प्रभारी निरीक्षक जी.एस. बाजपेयी की टीम ने साइबर सेल की मदद से तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से हत्या में प्रयुक्त धारदार चाकू, मोटरसाइकिल और मोबाइल फोन जब्त किए हैं। मृतक के अनुसूचित जाति का होने के कारण प्रकरण में धारा 61, 315, 3(5) बीएनएस, 25(बी) आर्म्स एक्ट और 3(2)(5)(1) एससी एसटी एक्ट का भी इजाफा किया गया है। तीनों आरोपियों को न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया गया है।
सतना में चित्रकूट पुलिस ने सती अनुसुइया मोड़ के पास हुई एक अज्ञात युवक की हत्या की गुत्थी सुलझाने का दावा किया है। इस हत्याकांड की मुख्य साजिशकर्ता मृतक की पत्नी ही निकली, जिसने अवैध संबंधों के चलते अपने प्रेमी और उसके एक साथी के साथ मिलकर पति की हत्या की योजना बनाई थी। मामला तब सामने आया जब 8 जून को महेंद्र कुमार गुप्ता ने पुलिस को सूचना दी कि सती अनुसुइया मोड़ के पास पुल के किनारे झाड़ियों में एक अज्ञात युवक का शव पड़ा है, जिसके गले पर धारदार हथियार के निशान थे। पुलिस ने तुरंत धारा 103(1), 238(ए) बीएनएस के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की। पुलिस ने शिनाख्त के लिए पम्पलेट और सोशल मीडिया का सहारा लिया। साइबर सेल की मदद से मृतक की पहचान 35 वर्षीय संजीव उर्फ संजू पिता सूर्यपाल पासी, निवासी ग्राम दादूपुर अमिलिया, थाना घूरपुर, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश के रूप में हुई। उसकी पहचान उसकी मां गुलाब बाई और पत्नी अनीता देवी ने की। तकनीकी साक्ष्यों और पत्नी अनीता देवी से कड़ी पूछताछ के बाद यह खुलासा हुआ कि उसके आरोपी अमित सिंह के साथ पिछले 3 साल से अवैध संबंध थे, जिसको लेकर पति से अक्सर विवाद होता रहता था। अनीता ने अपने प्रेमी अमित सिंह उर्फ बडकू (26 वर्ष) और शेरा उर्फ राजू निषाद (32 वर्ष), दोनों निवासी प्रयागराज, के साथ मिलकर पति की हत्या की साजिश रची। 8 जून को अमित और शेरा, संजीव को चित्रकूट घुमाने के बहाने स्प्लेंडर मोटरसाइकिल से सती अनुसुइया रोड पर ले गए। पुल के पास पेशाब करने के बहाने रोककर उन्होंने धारदार चाकू से संजीव का गला रेतकर उसकी हत्या कर दी। आरोपियों ने शव को झाड़ियों में फेंक दिया और पहचान छिपाने के लिए मृतक की जेब से मोबाइल, पैसे और दस्तावेज निकाल लिए। पुलिस अधीक्षक हंसराज सिंह और एएसपी प्रेमलाल कुर्वे के निर्देशानुसार थाना प्रभारी निरीक्षक जी.एस. बाजपेयी की टीम ने साइबर सेल की मदद से तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से हत्या में प्रयुक्त धारदार चाकू, मोटरसाइकिल और मोबाइल फोन जब्त किए हैं। मृतक के अनुसूचित जाति का होने के कारण प्रकरण में धारा 61, 315, 3(5) बीएनएस, 25(बी) आर्म्स एक्ट और 3(2)(5)(1) एससी एसटी एक्ट का भी इजाफा किया गया है। तीनों आरोपियों को न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया गया है।
- सतना में चित्रकूट पुलिस ने सती अनुसुइया मोड़ के पास हुई एक अज्ञात युवक की हत्या की गुत्थी सुलझाने का दावा किया है। इस हत्याकांड की मुख्य साजिशकर्ता मृतक की पत्नी ही निकली, जिसने अवैध संबंधों के चलते अपने प्रेमी और उसके एक साथी के साथ मिलकर पति की हत्या की योजना बनाई थी। मामला तब सामने आया जब 8 जून को महेंद्र कुमार गुप्ता ने पुलिस को सूचना दी कि सती अनुसुइया मोड़ के पास पुल के किनारे झाड़ियों में एक अज्ञात युवक का शव पड़ा है, जिसके गले पर धारदार हथियार के निशान थे। पुलिस ने तुरंत धारा 103(1), 238(ए) बीएनएस के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की। पुलिस ने शिनाख्त के लिए पम्पलेट और सोशल मीडिया का सहारा लिया। साइबर सेल की मदद से मृतक की पहचान 35 वर्षीय संजीव उर्फ संजू पिता सूर्यपाल पासी, निवासी ग्राम दादूपुर अमिलिया, थाना घूरपुर, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश के रूप में हुई। उसकी पहचान उसकी मां गुलाब बाई और पत्नी अनीता देवी ने की। तकनीकी साक्ष्यों और पत्नी अनीता देवी से कड़ी पूछताछ के बाद यह खुलासा हुआ कि उसके आरोपी अमित सिंह के साथ पिछले 3 साल से अवैध संबंध थे, जिसको लेकर पति से अक्सर विवाद होता रहता था। अनीता ने अपने प्रेमी अमित सिंह उर्फ बडकू (26 वर्ष) और शेरा उर्फ राजू निषाद (32 वर्ष), दोनों निवासी प्रयागराज, के साथ मिलकर पति की हत्या की साजिश रची। 8 जून को अमित और शेरा, संजीव को चित्रकूट घुमाने के बहाने स्प्लेंडर मोटरसाइकिल से सती अनुसुइया रोड पर ले गए। पुल के पास पेशाब करने के बहाने रोककर उन्होंने धारदार चाकू से संजीव का गला रेतकर उसकी हत्या कर दी। आरोपियों ने शव को झाड़ियों में फेंक दिया और पहचान छिपाने के लिए मृतक की जेब से मोबाइल, पैसे और दस्तावेज निकाल लिए। पुलिस अधीक्षक हंसराज सिंह और एएसपी प्रेमलाल कुर्वे के निर्देशानुसार थाना प्रभारी निरीक्षक जी.एस. बाजपेयी की टीम ने साइबर सेल की मदद से तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से हत्या में प्रयुक्त धारदार चाकू, मोटरसाइकिल और मोबाइल फोन जब्त किए हैं। मृतक के अनुसूचित जाति का होने के कारण प्रकरण में धारा 61, 315, 3(5) बीएनएस, 25(बी) आर्म्स एक्ट और 3(2)(5)(1) एससी एसटी एक्ट का भी इजाफा किया गया है। तीनों आरोपियों को न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया गया है।1
- सतना जिले के बिरला अस्पताल में सिक्योरिटी गार्ड्स की गुंडई का मामला सामने आया है। जानकारी के अनुसार, अस्पताल के सिक्योरिटी गार्ड्स ने मिलकर एक मरीज के परिजन को बेरहमी से पीटा।1
- सतना के थाना कोलगवां क्षेत्र अंतर्गत डिलौरा स्थित एक गोदाम पर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। दिनांक 13 जून 2026 को एसटीएफ भोपाल की टीम ने पुलिस रिमांड पर चल रहे आरोपी नवाब खान से मिली जानकारी के आधार पर इस गोदाम पर छापा मारा। आरोपी ने बताया था कि उसने पूर्व में इस गोदाम में अवैध कफ सिरप उतारा था। इस कार्रवाई में लगभग 2.60 क्विंटल (260 किलोग्राम) गांजा और 7200 सीसी ऑनरेक्स कफ सिरप बरामद की गई है, जिसकी कुल अनुमानित कीमत लगभग 28 लाख रुपये आंकी गई है। एसटीएफ टीम ने स्थानीय पुलिस की उपस्थिति में गोदाम का निरीक्षण किया और गोदाम मालिक से पूछताछ कर आवश्यक पंचनामा कार्रवाई की। गोदाम मालिक ने बताया कि गोदाम रीवा निवासी अजय पटेल और रोहित जैसवाल को किराए पर दिया गया है और उन्हीं के ताले लगे थे। किरायेदारों से संपर्क का प्रयास किया गया, लेकिन सफलता नहीं मिली। सूचना के सत्यापन और पंचनामा कार्रवाई के बाद, एसटीएफ भोपाल टीम ने आगे की वैधानिक कार्रवाई के लिए मामला स्थानीय कोलगवां पुलिस को सौंप दिया और वापस लौट गई। कोलगवां पुलिस ने सूचना की गंभीरता को समझते हुए स्वतंत्र साक्षियों को बुलाकर नियमानुसार कार्रवाई शुरू की। परिस्थितियों और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर यह संदेह उत्पन्न हुआ कि गोदाम के भीतर अवैध मादक पदार्थ या प्रतिबंधित सामग्री हो सकती है, और देरी होने पर उसे हटाए या नष्ट किए जाने की संभावना थी। इसलिए, वैधानिक प्रक्रिया का पालन करते हुए स्वतंत्र साक्षियों की उपस्थिति में गोदाम का ताला खुलवाकर तलाशी ली गई। तलाशी के दौरान प्लास्टिक बोरियों और कार्टूनों की जांच करने पर कुल 7200 सीसी ऑनरेक्स कफ सिरप बरामद हुई। प्रत्येक शीशी 100 एमएल की थी और सभी पर कोडीन फॉस्फेट युक्त कफ सिरप अंकित था। इसके अतिरिक्त, गोदाम में रखे विभिन्न बोरों से लगभग 2.60 क्विंटल गांजा भी बरामद किया गया। बरामद गांजा और कफ सिरप की गणना, तौल, सीलबंदी और जब्ती की कार्रवाई स्वतंत्र साक्षियों की उपस्थिति में संपन्न की गई। गोदाम से संबंधित दस्तावेजों और पूछताछ के आधार पर, प्रथम दृष्टया यह सामने आया है कि अजय पटेल और रोहित जैसवाल ने यह गोदाम किराए पर लेकर अवैध रूप से मादक पदार्थों और प्रतिबंधित कफ सिरप का भंडारण किया था। इस संबंध में अजय पटेल और रोहित जैसवाल के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट और अन्य प्रासंगिक वैधानिक प्रावधानों के अंतर्गत अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना शुरू कर दी गई है। प्रकरण में संलिप्त अन्य व्यक्तियों, मादक पदार्थों के स्रोत, परिवहन और वितरण नेटवर्क के संबंध में विस्तृत जांच जारी है, और फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीमें लगाई गई हैं।2
- पीड़ित की कहानी उसके भाई की जुबानी?पीड़ित की कहानी उसके भाई की जुबानी?पीड़ित की कहानी उसके भाई की जुबानी?पीड़ित की कहानी उसके भाई की जुबानी?पीड़ित की कहानी उसके भाई की जुबानी?1
- केंद्र सरकार के '12 वर्ष विकास, विश्वास और जनकल्याण के' उपलक्ष्य में आयोजित 'विकसित भारत संकल्प' कार्यक्रमों की कड़ी में, भुज के ऐतिहासिक हमीरसर तालाब क्षेत्र में एक व्यापक स्वच्छता अभियान चलाया गया। इस दौरान, कच्छ के माननीय सांसद विनोदभाई चावड़ा और जिला प्रभारी व राज्यमंत्री कांतिभाई अमृतिया सहित अन्य शीर्ष पदाधिकारियों ने व्यक्तिगत रूप से झाड़ू थामकर और श्रमदान करके स्थानीय निवासियों को स्वच्छता का संदेश दिया। प्रभारी मंत्री कांतिभाई अमृतिया ने नागरिकों से आह्वान किया कि जिस तरह वे अपने घरों की दैनिक सफाई करते हैं, उसी जिम्मेदारी के साथ पूरे वर्ष अपने शहर और सार्वजनिक स्थलों को भी स्वच्छ रखने में सक्रिय योगदान दें। इस अभियान के तहत, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा राज्यमंत्री त्रिकमभाई छांगा ने सभी से 'स्वच्छाग्रही' बनने का आग्रह किया और भुज को 'प्लास्टिक मुक्त शहर' बनाने पर जोर दिया। जन-जागरूकता बढ़ाने के लिए, आरोग्य पथ वॉक-वे से स्मृतिवन मेमोरियल तक एक विशेष 'सायक्लोथॉन' (साइकिल रैली) का भी आयोजन किया गया, जिसे अतिथियों ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। तालाब के किनारे एकत्र हुए लोगों और जनप्रतिनिधियों ने कचरा साफ करने के साथ ही शहर को सुंदर और स्वच्छ बनाए रखने का सामूहिक संकल्प लिया। इस जन-भागीदारी कार्यक्रम में भुज के विधायक केशुभई पटेल, नगर पालिका अध्यक्ष शीतलभाई शाह, जिला कलेक्टर अनिल राणावासिया, स्थानीय वरिष्ठ नेता देवजीभाई वरचंद, फलजीभाई चौधरी, धवलभाई आचार्य, भीमजीभाई जोधाणी, हितेशभाई खंडोल, मीत ठक्कर के अलावा डीआरडीए के निदेशक निकुंज पारिख, प्रांत अधिकारी अनिल जाधव और भुज मुख्य नगर पालिका अधिकारी ट्विंकल पटेल भी उपस्थित थे। स्थानीय पार्षद और प्रशासनिक अमला भी बड़ी संख्या में इस अभियान का हिस्सा बने।1
- मैहर नगर के वार्ड क्रमांक 9 स्थित मुक्तिधाम मार्ग पर चल रही सीवर लाइन परियोजना पिछले लगभग आठ माह से अधर में लटकी हुई है, जिससे यह विकास कार्य कम और प्रशासनिक अव्यवस्था का प्रतीक अधिक दिखाई देने लगा है। महीनों पहले खोदे गए विशाल गड्ढे आज भी वैसे ही पड़े हैं, और कार्य की गति लगभग ठप है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए मैहर नगर कांग्रेस अध्यक्ष प्रभात द्विवेदी ने जिला प्रशासन और नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कलेक्टर से पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। अपने निरीक्षण के बाद जारी वीडियो बयान में श्री द्विवेदी ने बताया कि मुक्तिधाम मार्ग पर सीवर लाइन के नाम पर बड़े-बड़े गड्ढे खोद दिए गए हैं, लेकिन न तो काम पूरा हुआ है और न ही नागरिकों की सुरक्षा के लिए कोई प्रभावी प्रबंध किए गए हैं। मार्ग का एक हिस्सा लगभग अवरुद्ध हो चुका है, जिससे स्थानीय रहवासियों, बुजुर्गों, स्कूली बच्चों और वाहन चालकों को रोज मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सुरक्षा के नाम पर सिर्फ हरे रंग की साधारण जाली लगाकर जिम्मेदार एजेंसी अपनी जवाबदेही से बचना चाहती है। द्विवेदी ने सवाल उठाया कि अगर रात के अंधेरे में या बारिश में कोई राहगीर, बुजुर्ग या दोपहिया वाहन चालक इन गड्ढों में गिरकर दुर्घटना का शिकार होता है, तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? प्रभात द्विवेदी ने चिंता व्यक्त की कि इतने लंबे समय से कार्य अधूरा होने के बावजूद, नगर पालिका स्तर पर कोई प्रभावी निगरानी या नियंत्रण नहीं दिख रहा है। उन्होंने जनता की ओर से पूछा कि यह लापरवाही आखिर किसकी है – कार्यदायी एजेंसी की, तकनीकी अधिकारियों की, या परियोजना की निगरानी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की। उन्होंने आगे आरोप लगाया कि करोड़ों की परियोजनाओं में यदि समयसीमा, गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों का पालन नहीं हो रहा है, तो यह केवल प्रशासनिक शिथिलता नहीं, बल्कि जनता के विश्वास के साथ खिलवाड़ है, क्योंकि विकास कार्यों का उद्देश्य सुविधा देना होता है, न कि भय और असुरक्षा पैदा करना। नगर कांग्रेस अध्यक्ष ने कलेक्टर मैहर से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, आठ माह से कार्य अधूरा रहने के लिए जिम्मेदार व्यक्ति या एजेंसी का पता लगाया जाए और परियोजना की निगरानी में हुई चूक के लिए दोषी अधिकारियों व संबंधित एजेंसी के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही, कार्यस्थलों पर तुरंत मजबूत बैरिकेडिंग, चेतावनी संकेत और सुरक्षा व्यवस्था लागू करने की मांग भी की गई, ताकि किसी भी संभावित दुर्घटना को रोका जा सके। श्री द्विवेदी ने चेतावनी दी कि प्रशासन को किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार करने के बजाय समय रहते कार्रवाई करनी चाहिए, और जनता जानना चाहती है कि यह काम आठ महीने से क्यों रुका है और इसकी जवाबदेही किसकी है। क्षेत्र के नागरिकों में भी स्थिति में सुधार न होने को लेकर गहरा आक्रोश है और वे जिला प्रशासन से इस जनहित के मुद्दे पर संज्ञान लेने की उम्मीद लगाए बैठे हैं।1