*मत्स्य बीज (स्पॉन) संचयन से पूर्व तालाब प्रबंधन एवं सावधानियाँ* मत्स्य पालन में अछे मुनाफे और मछली के स्पान की बेहतर सर्वाइवल रेट के लिए सही शुरुआत अत्यंत आवश्यक है। बीज डालने से पहले तालाब की उचित तैयारी और वैज्ञानिक प्रबंधन ही सफल पैदावार की मजबूत नींव रखता है। विशेषज्ञों के अनुसार, सुव्यवस्थित रणनीति अपनाकर ही किसान मछली पालन के जोखिम को कम कर सकते हैं। शुरुआती दौर में की गई सावधानी और मेहनत ही अंतत मत्स्य पालकों को श्रेष्ठ आर्थिक लाभ सुनिश्चित करती है। ऐसे मे कृषि विज्ञान केंद्र माधोपुर के विषय वस्तु विशेषज्ञ मत्स डॉ जगपाल एव वरीय वैज्ञानिक एव प्रधान डॉ अभिषेक प्रताप के अनुसार मत्स्य पालकों को मत्स्य स्पॉन संचयन से पहले कुछ महत्वपूर्ण कार्य करने की जरूरत होती है । जिनमें से मत्स्य तालाब प्रबंधन, मत्स्य स्पॉन संचयन और पूरक आहार प्रबंधन । मत्स्य तालाब को यदि संभव ह तो सुखा लें और उसके तल की जुताई या गोड़ाई कर डालें । तालाब के तल से ऊपर के बाँध को चारों तरफ खरपतवार सफाई कर दें । यदि तालाब वर्ष भर जल से भरा रहता है तो है तो उसकी सफाई में 1000 कि.ग्रा./एकड़/ मी. की दर से महुआ की खल्ली के प्रयोग कर सकते अगर आसानी से उपलबद्ध हो तो । रासायनिक विष के रूप में ब्लीचिंग पाउडर 140 कि.ग्रा./एकड़/मी.की दर से अथवा 40 कि.ग्रा.,यूरिया,गोबर के साथ मिलाकर देने एवं एक दिन बाद ब्लीचिंग पाउडर 75 कि.ग्रा./एकड़/मी. की दर से प्रयोग करने पर अवांछित मछलियों का खतम कर सकते है । रासायनिक तत्वों का प्रभाव 10 से 15 दिनों तक रहता है । इसके बाद तालाब में चूना 200-250 कि.ग्रा./एकड़/मी. जलक्षेत्र की दर से छिड़काव कर दिया जाता है इस मात्रा को पी.एच. के अनुसार घटिए बड़ाही जा सकती है । मत्स्य उत्पादन के लिये 7.5 से 8.5 तक का पी.एच. अनुकूल माना जाता है। स्पान संचयन की संभावित तिथि से 15-20 दिन पूर्व तालाब में 2000 किग्रा कच्चा गोबर/एकड़/ मी. की दर से प्रयोग किया जाता है । रासायनिक खाद के रूप में यूरिया 10-12 किग्रा सिंगल सुपर फास्फेट 10-12 किग्रा एवं म्यूरेट ऑफ पोटाश 2 किग्रा/ एकड़/ माह की दर से प्रयोग किया जा सकता है। स्पान संचयन से एक दिन पूर्व नर्सरी तालाब में फ्राई कैचिंग नेट दो तीन बार कर मेढंक के बच्चे, केकड़ा या कीड़े-मकोड़ों को निकाल दिया जाता है। उसके उपरांत तालाब में 25-30 ली. डीजल/एकड़/मी. में 30 मि.ली. “नुभान” कीटनाशक दवा मिलकर छिड़काव किया जाता है। साबुन अथवा सर्फ़ को डीजल के साथ घोलकर देने से पानी की सतह पर फिल्म तेजी से बनती है जिस से कीड़े-मकोड़ों मार जाते है । स्पान का संचयन नर्सरी में 16 से 20 लाख स्पान/एकड़/मी. की दर से संचयन किया जाना चाहिये । संचयन सुबह या शाम में किया जाना उचित होता है संचयन के पूर्व मत्स्य स्पान को अनुकूलन के लिए पैकेट/कंटेनर सहित तालाब में दस से पंद्रह मिनट स्थिर रहने देना चाहिए । इसके बाद पैकेट का मुहं खोलकर धीरे से स्पान को पानी में छोड़ देना चाहिये। अच्छी बढ़त के लिए नर्सरी तालाब में उपलब्ध प्राकृतिक भोजन का अलावा मछलियों को ऊपर से भी आहार देना जरूरी होता है । पूरक आहार के रूप में बारीक़ पीसा हुआ सरसों की खल्ली और चावल का कुंडा का मिश्रण बारीक कपडे में छान कर, सुखा प्रयोग किया जाता है। पीसा हुआ खल्ली उपलब्ध नहीं होने पर इस मिश्रण की आवश्यक मात्रा को रात भर फुला कर सुबह पानी में पतला घोल कर छिड़काव किया जा सकता है ।पूरक आहार सुबह में या शाम में प्रयोग करना चाहिये । बेहतर परिणाम पाने के लिए प्रथम दो/ चार दिन मत्स्य पालक बेसन, सरसों का तेल, अंडा, गुड़ आदि का मिश्रण भी पूरक आहार के रूप में प्रयोग सकते है । एक लाख स्पान के लिए संचयन की तिथि से सात दिनों तक 600 ग्रा. दुसरे सप्ताह में 1200 ग्रा. एवं तीसरे सप्ताह में 1800 ग्रा. पूरक आहार प्रतिदिन की दर से प्रयोग किया जाना चाहिये । पूरक आहार में कुल मात्रा का एक % खनिज लवण का प्रयोग फायदेमंद रहता है। 20वें दिन मत्स्य बीज का आकार 1 इंच – 1.5 इंच हो जाता है और यह बड़े तालाब में या अंगुलिकाओं को तैयार करने वाले तालाब में छोड़ने योग्य हो जाता है ।यदि मत्स्य बीज निष्कासन में विलम्ब हो तो नर्सरी में उपलब्ध बीज की अनुमानित वजन का 2 प्रतिशत वजन के बराबर पूरक आहार का प्रयोग तब तक करते रहना चाहिये जब तक मत्स्य बीज दूसरे तालाब में संचयन ना कर दें ।
*मत्स्य बीज (स्पॉन) संचयन से पूर्व तालाब प्रबंधन एवं सावधानियाँ* मत्स्य पालन में अछे मुनाफे और मछली के स्पान की बेहतर सर्वाइवल रेट के लिए सही शुरुआत अत्यंत आवश्यक है। बीज डालने से पहले तालाब की उचित तैयारी और वैज्ञानिक प्रबंधन ही सफल पैदावार की मजबूत नींव रखता है। विशेषज्ञों के अनुसार, सुव्यवस्थित रणनीति अपनाकर ही किसान मछली पालन के जोखिम को कम कर सकते हैं। शुरुआती दौर में की गई सावधानी और मेहनत ही अंतत मत्स्य पालकों को श्रेष्ठ आर्थिक लाभ सुनिश्चित करती है। ऐसे मे कृषि विज्ञान केंद्र माधोपुर के विषय वस्तु विशेषज्ञ मत्स डॉ जगपाल एव वरीय वैज्ञानिक एव प्रधान डॉ अभिषेक प्रताप के अनुसार मत्स्य पालकों को मत्स्य स्पॉन संचयन से पहले कुछ महत्वपूर्ण कार्य करने की जरूरत होती है । जिनमें से मत्स्य तालाब प्रबंधन, मत्स्य स्पॉन संचयन और पूरक आहार प्रबंधन । मत्स्य तालाब को यदि संभव ह तो सुखा लें और उसके तल की जुताई या गोड़ाई कर डालें । तालाब के तल से ऊपर के बाँध को चारों तरफ खरपतवार सफाई कर दें । यदि तालाब वर्ष भर जल से भरा रहता है तो है तो उसकी सफाई में 1000 कि.ग्रा./एकड़/ मी. की दर से महुआ की खल्ली के प्रयोग कर सकते अगर आसानी से उपलबद्ध हो तो । रासायनिक विष के रूप में ब्लीचिंग पाउडर 140 कि.ग्रा./एकड़/मी.की दर से अथवा 40 कि.ग्रा.,यूरिया,गोबर के साथ मिलाकर देने एवं एक दिन बाद ब्लीचिंग पाउडर 75 कि.ग्रा./एकड़/मी. की दर से प्रयोग करने पर अवांछित मछलियों का खतम कर सकते
है । रासायनिक तत्वों का प्रभाव 10 से 15 दिनों तक रहता है । इसके बाद तालाब में चूना 200-250 कि.ग्रा./एकड़/मी. जलक्षेत्र की दर से छिड़काव कर दिया जाता है इस मात्रा को पी.एच. के अनुसार घटिए बड़ाही जा सकती है । मत्स्य उत्पादन के लिये 7.5 से 8.5 तक का पी.एच. अनुकूल माना जाता है। स्पान संचयन की संभावित तिथि से 15-20 दिन पूर्व तालाब में 2000 किग्रा कच्चा गोबर/एकड़/ मी. की दर से प्रयोग किया जाता है । रासायनिक खाद के रूप में यूरिया 10-12 किग्रा सिंगल सुपर फास्फेट 10-12 किग्रा एवं म्यूरेट ऑफ पोटाश 2 किग्रा/ एकड़/ माह की दर से प्रयोग किया जा सकता है। स्पान संचयन से एक दिन पूर्व नर्सरी तालाब में फ्राई कैचिंग नेट दो तीन बार कर मेढंक के बच्चे, केकड़ा या कीड़े-मकोड़ों को निकाल दिया जाता है। उसके उपरांत तालाब में 25-30 ली. डीजल/एकड़/मी. में 30 मि.ली. “नुभान” कीटनाशक दवा मिलकर छिड़काव किया जाता है। साबुन अथवा सर्फ़ को डीजल के साथ घोलकर देने से पानी की सतह पर फिल्म तेजी से बनती है जिस से कीड़े-मकोड़ों मार जाते है । स्पान का संचयन नर्सरी में 16 से 20 लाख स्पान/एकड़/मी. की दर से संचयन किया जाना चाहिये । संचयन सुबह या शाम में किया जाना उचित होता है संचयन के पूर्व मत्स्य स्पान को अनुकूलन के लिए पैकेट/कंटेनर सहित तालाब में दस से पंद्रह मिनट स्थिर रहने देना चाहिए । इसके बाद पैकेट का मुहं खोलकर धीरे से स्पान को पानी में छोड़ देना चाहिये।
अच्छी बढ़त के लिए नर्सरी तालाब में उपलब्ध प्राकृतिक भोजन का अलावा मछलियों को ऊपर से भी आहार देना जरूरी होता है । पूरक आहार के रूप में बारीक़ पीसा हुआ सरसों की खल्ली और चावल का कुंडा का मिश्रण बारीक कपडे में छान कर, सुखा प्रयोग किया जाता है। पीसा हुआ खल्ली उपलब्ध नहीं होने पर इस मिश्रण की आवश्यक मात्रा को रात भर फुला कर सुबह पानी में पतला घोल कर छिड़काव किया जा सकता है ।पूरक आहार सुबह में या शाम में प्रयोग करना चाहिये । बेहतर परिणाम पाने के लिए प्रथम दो/ चार दिन मत्स्य पालक बेसन, सरसों का तेल, अंडा, गुड़ आदि का मिश्रण भी पूरक आहार के रूप में प्रयोग सकते है । एक लाख स्पान के लिए संचयन की तिथि से सात दिनों तक 600 ग्रा. दुसरे सप्ताह में 1200 ग्रा. एवं तीसरे सप्ताह में 1800 ग्रा. पूरक आहार प्रतिदिन की दर से प्रयोग किया जाना चाहिये । पूरक आहार में कुल मात्रा का एक % खनिज लवण का प्रयोग फायदेमंद रहता है। 20वें दिन मत्स्य बीज का आकार 1 इंच – 1.5 इंच हो जाता है और यह बड़े तालाब में या अंगुलिकाओं को तैयार करने वाले तालाब में छोड़ने योग्य हो जाता है ।यदि मत्स्य बीज निष्कासन में विलम्ब हो तो नर्सरी में उपलब्ध बीज की अनुमानित वजन का 2 प्रतिशत वजन के बराबर पूरक आहार का प्रयोग तब तक करते रहना चाहिये जब तक मत्स्य बीज दूसरे तालाब में संचयन ना कर दें ।
- नवनिर्मित राम-जानकी मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा को लेकर विष्णु महायज्ञ शुरू चिलचिलाती धूप पर भारी पड़ा श्रद्धालुओं का उत्साह, 3 किमी लंबी कतार बेतिया से जापान साह की रिपोर्ट बेतिया। बरवां सेमरा घाट पंचायत के बरवां वार्ड संख्या 08 स्थित नवनिर्मित राम जानकी मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा को लेकर सोमवार को भव्य कलश यात्रा के साथ विष्णु महायज्ञ का शुभारंभ हुआ। लगभग 38 लाख रुपये की लागत से बने इस मंदिर के आयोजन में भारी संख्या में श्रद्धालुओं की भागीदारी रही। कलश यात्रा में 5001 कुंवारी कन्याओं सहित हजारों श्रद्धालु शामिल हुए। चिलचिलाती धूप के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बन रहा था। करीब 3 किलोमीटर तक श्रद्धालुओं की लंबी कतार लगी रही, जो आस्था और भक्ति का अद्भुत दृश्य प्रस्तुत कर रही थी। यात्रा के दौरान रमपुरवा महानवा पंचायत के मुखिया पुत्र उपेंद्र कुमार द्वारा रमपुरवा चौक पर श्रद्धालुओं के लिए शीतल जल, शरबत एवं फलाहार की व्यवस्था की गई। वहीं हरपुर गढ़वा में जिला पार्षद मो. जियाउद्दीन ने पक्की सड़क पर पानी का छिड़काव कर राह को सुगम बनाया। महायज्ञ समिति के अध्यक्ष परमानंद यादव एवं कोषाध्यक्ष दिलीप कुमार चौरसिया ने बताया कि 23 अप्रैल को मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा होगी, जबकि 29 अप्रैल को महायज्ञ का समापन किया जाएगा। इस आयोजन में मिथलेश श्रीवास्तव, सिधेश्वर मिश्र, नित्यानंद मिश्र समेत कुल 11 यजमान शामिल हैं। श्रद्धालुओं ने करीब 5 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर सिकरहना नदी के बथना घाट से जल भरकर यज्ञ स्थल तक पहुंचकर विधिवत पूजा-अर्चना की। आयोजन स्थल पर विशाल भंडारा का भी आयोजन किया गया है। यज्ञ के अध्यक्ष गुड्डू मिश्रा ने बताया कि विश्व शांति की कामना से जनसहयोग से इस मंदिर का निर्माण कराया गया है। 29 अप्रैल तक यहां लगातार धार्मिक कार्यक्रम, प्रवचन एवं रामलीला का आयोजन किया जाएगा। कलश यात्रा को सफल बनाने में मधुसूदन श्रीवास्तव, रविकांत रमन, गुड्डू श्रीवास्तव, सरपंच फिरोज अंसारी सहित मझौलिया पुलिस की महत्वपूर्ण भूमिका रही। आयोजन के दौरान एम्बुलेंस सेवा भी मुस्तैद रही। पूरे आयोजन में कुंवारी कन्याओं, महिलाओं, बच्चों एवं बुजुर्गों का उत्साह देखते ही बन रहा था, जिसने इस धार्मिक आयोजन को और भी भव्य बना दिया।1
- सोमवार के दिन प्रखंड क्षेत्र के हरपुर गढ़वा पंचायत स्थित वार्ड नंबर 08 में लाखों के लागत से राम जानकी मंदिर बन कर तैयार है।इसी के निमित विष्णु महायज्ञ का आयोजन किया गया है।उक्त बातों की जानकारी महायज्ञ पूजा समिति के कोषाध्यक्ष दिलीप चौरसिया ने दी।उन्होंने बताया कि हजारों की संख्या में कुंवारी कन्याओं ने यज्ञ स्थल से हरपुर , विरवा,गढ़वा बाजार ,सेमरा होते हुए बथना घाट से सिकरहना नदी से जल भरकर यज्ञ स्थल पर लाया गया।जहां आचार्यों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के साथ नव दिवसीय विष्णु महायज्ञ का शुभारंभ हो गया।उन्होंने बताया कि इस यज्ञ में यजमान सिद्धेश्वर मिश्र,नित्यानंद मिश्र सहित ग्यारह यजमान है।इस जल यात्रा में जनप्रतिनिधियों ,समाजसेवियों तथा ग्रामीणों ने जगह जगह पर ठंडा पानी तथा मिष्ठान की व्यवस्था की गई थी।इसी कड़ी में रमपुरवा महानवा पंचायत के समाजसेवी उपेंद्र कुमार के सौजन्य से कुंवारी कन्याओं तथा श्रद्धालु भक्तों के लिए ठंडा शर्बत व मिष्ठान का प्रबंध किया गया था।सुरक्षा के दृष्टि कोण से पुलिस पदाधिकारी भी तैनात रहे ।आचार्य श्री पंडित तथा सहयोगियों के साथ यज्ञ स्थल पर बौद्धिक मंत्रोच्चार के साथ नव दिवसीय महायज्ञ का शुभारंभ कर दिया गया।बतादे की 23 अप्रैल को नवनिर्मित राम जानकी मंदिर का प्राण प्रतिष्ठा किया जाएगा ।4
- बैरिया प्रखंड के फुलियाखांड पंचायत अंतर्गत बैरा टोला गांव में शुक्रवार रात हुई हत्या की घटना से इलाके में सनसनी फैल गई। जानकारी के अनुसार 4-5 बाइक पर सवार करीब 20 हमलावरों ने राधेश्याम यादव पर हमला कर चाकू मारकर उनकी हत्या कर दी। घटना के बाद गांव में भय और तनाव का माहौल बना हुआ है। रविवार दोपहर करीब दो बजे नौतन विधानसभा के विधायक सह आपदा प्रबंधन मंत्री नारायण प्रसाद पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे और गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने पुलिस प्रशासन को निर्देश दिया कि मामले में त्वरित और सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। मंत्री ने कहा कि दोषियों को जल्द गिरफ्तार कर कड़ी सजा दिलाई जाएगी। वहीं पुलिस आरोपियों की तलाश में लगातार छापेमारी कर रही है।1
- नौतन स्थानीय प्रखंड के पूर्वी नौतन पंचायत स्थित बेली माई स्थान के प्रांगण में आयोजित रुद्र महायज्ञ सह शिव परिवार प्राण प्रतिष्ठा को लेकर रविवार को भव्य कलश यात्रा निकाली गई, जिसने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय माहौल में डुबो दिया। इस कलश यात्रा का शुभारंभ पायनियर कोचिंग के संस्थापक सह पूर्व कांग्रेस प्रत्याशी अमित गिरी ने फीता काटकर किया। इस भव्य आयोजन में 1001 कन्याओं सहित हजारों की संख्या में महिला-पुरुष श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। गाजे-बाजे और भगवा ध्वज के साथ निकली यह यात्रा मंदिर परिसर से प्रारंभ होकर बलुआ, नौतन बाजार और पांडेय टोला होते हुए बथना गंडक घाट तक पहुंची, जहां हर कदम पर श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ता रहा। पूरे मार्ग में “हर हर महादेव” के जयघोष से वातावरण पूरी तरह भक्तिमय और ऊर्जावान बना रहा, वहीं जगह-जगह श्रद्धालुओं ने यात्रा का भव्य स्वागत किया। कलश यात्रा से पूर्व अयोध्या से पधारे आचार्य पंडित आदित्य शरण शास्त्री, कृष्णा शास्त्री, गोलु शास्त्री, चुन्नू शास्त्री, मैथुन शास्त्री, बब्लू शास्त्री एवं मिथलेश शास्त्री के वैदिक मंत्रोच्चार के बीच यजमानों द्वारा यज्ञभूमि का विधिवत पूजन कराया गया। इसके बाद भगवा ध्वज के साथ कलश यात्रा बथना घाट पहुंची, जहां विद्वान आचार्यों ने वैदिक विधि से कन्याओं से कलश में पवित्र जल भरवाया। जल भरने के उपरांत यात्रा पुनः यज्ञ स्थल लौटकर विधि-विधान के साथ कलशों को यज्ञमंडप में स्थापित किया गया। महायज्ञ समिति के अध्यक्ष राकेश कुमार वर्मा ने जानकारी दी कि प्रतिदिन प्रातः अयोध्या से आए कथावाचकों द्वारा प्रवचन का आयोजन होगा, जबकि प्रत्येक रात्रि 8 बजे से 12 बजे तक रामलीला का भव्य मंचन किया जाएगा। 24 अप्रैल को शिव परिवार प्राण प्रतिष्ठा का मुख्य कार्यक्रम संपन्न होगा, जबकि 29 अप्रैल को पूर्णाहुति एवं विशाल महाभंडारा आयोजित किया जाएगा। इस महायज्ञ को सफल बनाने में समिति के शिकारी यादव, नंदलाल यादव, राम क्षत्री यादव, जिला परिषद सदस्य अरशद राजा, मुखिया प्रतिनिधि यादों लाल बैठा, उपेंद्र सिंह, बच्चा ठाकुर, बच्चा साह, उमेश सिंह, मनोज गिरी सहित अनेक गणमान्य लोगों का सक्रिय योगदान रहा। वहीं श्रद्धालुओं के मनोरंजन हेतु झूला, मौत का कुआं, ब्रेक डांस सहित विभिन्न खेल-तमाशों की भी व्यवस्था की गई है, जो लोगों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।1
- बेतिया राज श्री नवदुर्गा जोड़ा शिवालय मंदिर से निकला खाटू श्याम बाबा का निशान शोभा रथ यात्रा। यह रथयात्रा लाल बाजार में घुमते हुए श्री गोपीनाथ पंचायत मंदिर के उपर श्याम बाबा के मंदिर में पहुंचा। 19.04.20261
- गांव में एक्साइज विभाग की टीम पर ग्रामीणों ने हमला कर दिया। ग्रामीणों का आरोप है कि जब्त की गई शराब को नष्ट नहीं किया जाता। आरोप के मुताबिक वही शराब दोबारा बाजार में भेज दी जाती है। इसको लेकर ग्रामीणों में लंबे समय से आक्रोश था। छापेमारी के दौरान ही स्थिति अचानक बिगड़ गई। ग्रामीणों ने विभाग की कार्रवाई पर सवाल उठाए। मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया।1
- मिर्जा टोला छावनी बेतिया आमना उर्दू हाई स्कूल के सामने 2022 में पक्के नल बनाने के वादे करके मिट्टी का खुदाई किया गया लेकिन 2026 हो गया अभी तक कोई नाला बनाने नहीं आया हम लोगों ने दो-चार बार स्थानीय महापौर को भी सूचना दिया था लिखित में कि यहां कृपया करके नाला बनवाई है लेकिन अभी वह भी कोई एक्शन नहीं ले पाए और नहीं नगर निगम के कोई पदाधिकारी इसको सीरियस लेता है । रोड छावनी से जीएमसी तक को जोड़ता है यहां कई बार लोग गड्ढे में गिर गए हैं कितना बार बच्चे गिर गया है हमेशा पानी जमा रहता है मच्छर लगे रहते हैं नाले से बदबू आती है लेकिन किसी को कुछ लेना-देना नहीं है कृपा करके अगर कोई वैसा हो तो कृपया करके नाला का काम पूर्ण कराएं।1
- मकानों को नंबर देना व नजरी नक्शा तैयार करने का गुर सीखा प्रगणकों ने जनगणना लोकतंत्र का आधार: बीडीओ 671 प्रगणक व 117 पर्यवेक्षकों के प्रशिक्षण का अधिकारियों ने लिया जायजा बेतिया से सत्यम श्रीवास्तव की रिपोर्ट बेतिया। सोमवार को कन्या मध्य विद्यालय, मझौलिया में भारत की जनगणना 2027 के तहत प्रगणकों के तीसरे चरण के प्रशिक्षण का निरीक्षण किया गया। इस दौरान बीडीओ सह चार्ज ऑफिसर डॉ. राजीव रंजन एवं प्रखंड कृषि पदाधिकारी मो. अबुलैस अनवर ने संयुक्त रूप से प्रशिक्षण कार्यक्रम का जायजा लिया। प्रशिक्षण के दौरान प्रगणकों को भवनों और जनगणना मकानों को नंबर देने तथा नजरी नक्शा तैयार करने की विधि की विस्तृत जानकारी दी गई। अधिकारियों ने विशेष रूप से निर्देश दिया कि नजरी नक्शा बनाते समय दिशा का सही ध्यान रखा जाए, ताकि आंकड़ों में किसी प्रकार की त्रुटि न हो। एईओ परीक्षा में शामिल होने के कारण अनुपस्थित शिक्षकों के लिए प्रशिक्षण की वैकल्पिक व्यवस्था भी की गई है। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने प्रशिक्षणार्थियों के लिए तैयार भोजन का स्वाद चखा और संतोष व्यक्त किया। बीडीओ डॉ. राजीव रंजन ने बताया कि इस कार्य में कुल 671 प्रगणक और 117 पर्यवेक्षक लगाए गए हैं। उन्होंने कहा कि जनगणना लोकतंत्र की आधारशिला है, जो सामाजिक, सांस्कृतिक एवं जनसांख्यिकीय आंकड़ों का सबसे विश्वसनीय स्रोत प्रदान करती है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि एईओ परीक्षा के कारण अनुपस्थित प्रगणकों के लिए अलग से प्रशिक्षण की व्यवस्था की गई है, ताकि पूरी प्रक्रिया प्रभावित न हो। प्रखंड आईटी मैनेजर अरविंद ठाकुर एवं कार्यपालक सहायक अजय कुमार पंडित ने बताया कि 17 अप्रैल से 01 मई तक स्व-गणना का ऑनलाइन कार्य शुरू हो चुका है, जिसका सत्यापन प्रगणक घर-घर जाकर करेंगे। इस प्रशिक्षण में कुल दस प्रखंड स्तरीय ट्रेनर शामिल हैं, जिनमें शम्से आलम, अनिल कुमार सिंह, अक्षय कुमार एवं शशि रंजन चौबे प्रमुख हैं। निरीक्षण के दौरान प्रखंड नाजिर जितेंद्र कुमार और प्रखंड सहायक सुमंत श्रीवास्तव भी मौजूद रहे।1