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Atul Kashyap
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- बदायूं जनपद के थाना हजरतपुर पुलिस ने भैंस चोरी की एक घटना का सफलतापूर्वक अनावरण करते हुए एक शातिर और गैंगस्टर अभियुक्त को पुलिस मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने गिरफ्तार आरोपी के कब्जे से चोरी की भैंसों को बेचकर मिले 5,200 रुपये नकद, एक अवैध तमंचा 315 बोर, एक जिंदा कारतूस और एक खोखा कारतूस 315 बोर बरामद किया है। यह कार्रवाई वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बदायूं के निर्देशानुसार अपराध एवं अपराधियों के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के तहत की गई। पुलिस अधीक्षक नगर के कुशल निर्देशन और क्षेत्राधिकारी दातागंज के पर्यवेक्षण में थाना प्रभारी निरीक्षक पुष्पेंद्र सिंह के नेतृत्व में गठित हजरतपुर पुलिस टीम ने इस अभियान को अंजाम दिया। पुलिस के अनुसार, ग्राम रैपुरा में 17/18 मई 2026 की रात हुई भैंस चोरी की घटना का खुलासा करते हुए पप्पू उर्फ पापू उर्फ साजन पुत्र सिकंदर उर्फ पटवारी, निवासी ग्राम नदरई, थाना कासगंज, जनपद कासगंज को 02 जून 2026 को रात्रि 12:58 बजे ग्राम जमालपुर से गढ़िया शाहपुर रोड पर नदी की ओर जाने वाले कच्चे रास्ते से मुठभेड़ के दौरान गिरफ्तार किया गया। पुलिस पूछताछ में अभियुक्त पप्पू उर्फ पापू उर्फ साजन ने स्वीकार किया है कि उसने अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर इस भैंस चोरी की वारदात को अंजाम दिया था। पुलिस फिलहाल फरार अन्य साथियों की तलाश में जुटी हुई है। मुठभेड़ के दौरान अभियुक्त घायल हो गया, जबकि पुलिस टीम के आरक्षी जितेंद्र सिंह भी घायल हुए। उपचार के लिए दोनों को जिला अस्पताल बदायूं भेजा गया है। पुलिस अभिलेखों के अनुसार, गिरफ्तार अभियुक्त थाना सैदनगली, जनपद अमरोहा का गैंगस्टर है और उसके विरुद्ध पूर्व में कई संगीन आपराधिक मुकदमे, जिनमें धारा 399/402 भादवि, धारा 413/414/420 भादवि और गैंगस्टर एक्ट के तहत दर्ज मुकदमे शामिल हैं। थाना प्रभारी निरीक्षक पुष्पेंद्र सिंह ने बताया कि अपराधियों के विरुद्ध यह अभियान लगातार जारी रहेगा और क्षेत्र में चोरी व अन्य आपराधिक गतिविधियों में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। इस गिरफ्तारी को अंजाम देने वाली पुलिस टीम में थाना प्रभारी निरीक्षक पुष्पेंद्र सिंह के साथ उपनिरीक्षक मुनेश कुमार, आरक्षी जितेंद्र सिंह, आरक्षी सुरेंद्र चौधरी, आरक्षी सुमित भाटी और थाना हजरतपुर पुलिस टीम के अन्य सदस्य शामिल थे। हजरतपुर पुलिस की इस कार्रवाई से क्षेत्र में पशु चोरी करने वाले गिरोहों में हड़कंप मच गया है और क्षेत्रीय लोगों ने पुलिस की इस कार्यवाही की सराहना की है।4
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- बदायूं जिले में पुलिस ने दो अलग-अलग थाना क्षेत्रों में बड़ी कार्रवाई करते हुए बदमाशों के साथ मुठभेड़ की, जिसके परिणामस्वरूप दो अपराधियों को पकड़ा गया। एक मुठभेड़ हजरतपुर थाना क्षेत्र में हुई, जबकि दूसरी बिनावर थाना क्षेत्र में हुई। हजरतपुर थाना पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि भैंस चोरी की वारदात में शामिल एक युवक क्षेत्र में मौजूद है। सूचना पर घेराबंदी करने के बाद बदमाश ने पुलिस टीम पर फायरिंग कर दी, जिसके जवाब में हुई कार्रवाई में आरोपी घायल हो गया और उसे गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार युवक कासगंज जनपद का रहने वाला है और वह भैंस चोरी की घटना को अंजाम देने के इरादे से आया था। उसके कब्जे से एक अवैध तमंचा और जिंदा कारतूस बरामद किए गए हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी पहले भी हजरतपुर थाना क्षेत्र से भैंस चोरी की वारदात को अंजाम दे चुका था। पुलिस आरोपी के आपराधिक रिकॉर्ड की जानकारी जुटा रही है और मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। इसी के साथ, बिनावर थाना क्षेत्र में भी पुलिस और एक अन्य बदमाश के बीच मुठभेड़ हुई, जिसमें पुलिस ने आरोपी को दबोच लिया। दोनों मामलों में पुलिस की इस कार्रवाई से क्षेत्र के अपराधियों में हड़कंप मचा हुआ है।1
- उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के भुता स्थित ग्राम पंचायत रियोना सलेमपुर में सरकारी सस्ती गल्ला विक्रेता के चयन को लेकर आयोजित खुली बैठक के बाद गहरा विवाद खड़ा हो गया है। पीड़ित पक्ष ने चयन प्रक्रिया में पक्षपात और नियमों की अनदेखी का गंभीर आरोप लगाते हुए फरीदपुर एसडीएम से निष्पक्ष जांच की मांग की है। यह मामला 2 जून को हुई खुली बैठक से जुड़ा है, जहाँ सस्ती गल्ला दुकान के लिए दो आवेदिकाएँ—उपासना देवी पत्नी प्रकाश सिंह और अंजना देवी पत्नी अनूप सिंह—उपस्थित थीं। अभिलेखों की जांच के दौरान अंजना देवी के आवेदन में चरित्र प्रमाण पत्र नहीं होने का मुद्दा उठाया गया। चौंकाने वाली बात यह है कि उन्हें यह प्रमाण पत्र उपलब्ध कराने के लिए मात्र 10 से 15 मिनट का ही समय दिया गया, जिसे ग्रामीणों ने किसी भी अभ्यर्थी के लिए अपर्याप्त बताया। ग्रामीणों का कहना है कि यदि उचित समय मिलता तो आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत किए जा सकते थे। आरोप है कि अधिकारियों ने जल्दबाजी में अंजना देवी के आवेदन को अयोग्य घोषित कर दिया और दूसरी आवेदिका के पक्ष में चयन प्रक्रिया पूरी कर दी। इस एकतरफा फैसले का बैठक में मौजूद ग्रामीणों और पीड़ित पक्ष ने कड़ा विरोध किया और प्रक्रिया पर पुनर्विचार की मांग की। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि उनकी बात को गंभीरता से नहीं सुना गया। इस पूरे मामले से आक्रोशित अंजना देवी और उनके समर्थक न्याय की मांग को लेकर फरीदपुर स्थित एसडीएम कार्यालय पहुँचे और लिखित शिकायत दर्ज कराई, जिसमें निष्पक्ष जांच और चयन प्रक्रिया की समीक्षा की अपील की गई है। ग्रामीणों ने इस बात पर जोर दिया है कि सरकारी योजनाओं और जनहित से जुड़े चयन में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है। गाँव में अब इस मामले को लेकर गहमागहमी का माहौल है और लोग प्रशासन से निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाने की मांग कर रहे हैं। हालाँकि, प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, पर एसडीएम कार्यालय में शिकायत पहुँचने के बाद इस मामले के तूल पकड़ने की संभावना बढ़ गई है।2
- प्रयागराज में एक ही परिवार के चार सदस्यों की बेरहमी से हत्या कर दी गई है, जिनमें पति-पत्नी और उनके बेटा-बेटी शामिल हैं। इस नृशंस घटना का खुलासा मंगलवार दोपहर उस समय हुआ, जब घर से दुर्गंध आने पर पड़ोसियों को शक हुआ। पड़ोसियों ने दरवाजा खटखटाया और आवाज लगाई, लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं मिलने पर पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस ने गेट तोड़कर घर में प्रवेश किया, जहां कमरे के अंदर बेड पर 70 वर्षीय वीरेंद्र कुमार वैश्य, उनकी 65 वर्षीय पत्नी अनीता और 40 वर्षीय बेटी मीनाक्षी के शव मिले। तीनों के सिर पर गहरे जख्म थे और आसपास फैला खून सूख चुका था। 38 वर्षीय बेटे अभिषेक का शव घर के ग्राउंड फ्लोर पर बनी दुकान में मिला। घटना साउथ मलाका में हीवेट रोड चौराहा पर हुई है। वीरेंद्र कुमार वैश्य की चौराहे पर ही उनके दो मंजिला मकान के निचले हिस्से में 14 दुकानें थीं, जिनमें से 13 किराए पर थीं। वे अपने परिवार के साथ मकान के ऊपरी हिस्से में रहते थे। परिवार में पत्नी, बेटी-बेटे के अलावा एक छोटा बेटा अश्विनी भी है, जो धोखाधड़ी के एक मामले में कौशांबी जेल में बंद है। बेटी मीनाक्षी एक गिफ्ट की दुकान चलाती थी, जहां वीरेंद्र वैश्य भी बैठते थे, जबकि बेटा अभिषेक फ्लोर क्लीनिंग के काम से जुड़ा था। मीनाक्षी और अभिषेक दोनों अविवाहित थे।1