राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने हाल ही में राष्ट्रपति भवन के गणतंत्र मंडप में आयोजित दूसरे नागरिक सम्मान समारोह में 65 हस्तियों को प्रतिष्ठित पद्म पुरस्कारों से सम्मानित किया। इस समारोह में झारखंड की पहचान के लिए किए गए ऐतिहासिक योगदान के लिए शिबू सोरेन को मरणोपरांत पद्म भूषण से नवाजा गया, जिनका लंबी बीमारी के बाद 4 अगस्त 2025 को निधन हो गया था। यह सम्मान उनके संघर्षपूर्ण जीवन, आदिवासी समाज के प्रति समर्पण और राष्ट्रव्यापी पहचान का प्रतीक है, जिनकी विरासत आज भी जीवित है। पद्म पुरस्कार भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से हैं, जो विभिन्न क्षेत्रों में असाधारण योगदान के लिए प्रदान किए जाते हैं। इन्हें पद्म विभूषण (असाधारण और विशिष्ट सेवा), पद्म भूषण (उच्च क्रम की विशिष्ट सेवा) और पद्म श्री (किसी भी क्षेत्र में विशिष्ट सेवा) जैसी तीन श्रेणियों में बांटा गया है, जिनकी घोषणा हर साल गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर की जाती है। इस वर्ष के समारोह में, राष्ट्रपति ने उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश केटी थॉमस को जन-सेवा के लिए और मलयालम पत्रकार पी. नारायणन को साहित्य और शिक्षा में योगदान के लिए पद्म विभूषण से सम्मानित किया। इसके अतिरिक्त, पार्श्व गायिका अलका याग्निक, अभिनेता ममूटी, अमेरिकी डॉक्टर दत्तात्रेयडु नोरी, टेनिस खिलाड़ी विजय अमृतराज, उद्योगपति एसकेएम माएलानंदन और समाजसेवी व शिक्षाविद वी नटेसन को पद्म भूषण प्रदान किया गया। क्रिकेटर रोहित शर्मा और अभिनेता सतीश शाह भी उन हस्तियों में शामिल थे जिन्हें पद्म पुरस्कारों से नवाजा गया, जो खेल, कला, विज्ञान, समाज सेवा और उद्योग जैसे विविध क्षेत्रों में भारत की समृद्ध प्रतिभा और योगदान को दर्शाते हैं। शिबू सोरेन का जीवन और उनका कार्य झारखंड के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय है। उनका संघर्ष, समर्पण और दूरदर्शिता आज भी लाखों लोगों को प्रेरित करती है, और यह मरणोपरांत पद्म भूषण सम्मान उनकी उस विरासत को चिरस्थायी बनाता है। यह सम्मान न केवल उनके असाधारण जीवन को श्रद्धांजलि है, बल्कि उन सभी के लिए प्रेरणा है जो समाज के हाशिए पर पड़े वर्गों के उत्थान के लिए कार्य करते हैं। यह दर्शाता है कि राष्ट्र उन व्यक्तियों को कभी नहीं भूलता जिन्होंने अपने जीवन को बड़े उद्देश्यों के लिए समर्पित किया है, और यह एक व्यक्ति का नहीं बल्कि एक पूरे आंदोलन का सम्मान है जिसने एक नए राज्य को जन्म दिया और लाखों आदिवासियों के जीवन में उम्मीद की किरण जलाई।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने हाल ही में राष्ट्रपति भवन के गणतंत्र मंडप में आयोजित दूसरे नागरिक सम्मान समारोह में 65 हस्तियों को प्रतिष्ठित पद्म पुरस्कारों से सम्मानित किया। इस समारोह में झारखंड की पहचान के लिए किए गए ऐतिहासिक योगदान के लिए शिबू सोरेन को मरणोपरांत पद्म भूषण से नवाजा गया, जिनका लंबी बीमारी के बाद 4 अगस्त 2025 को निधन हो गया था। यह सम्मान उनके संघर्षपूर्ण जीवन, आदिवासी समाज के प्रति समर्पण और राष्ट्रव्यापी पहचान का प्रतीक है, जिनकी विरासत आज भी जीवित है। पद्म पुरस्कार भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से हैं, जो विभिन्न क्षेत्रों में असाधारण योगदान के लिए प्रदान किए जाते हैं। इन्हें पद्म विभूषण (असाधारण और विशिष्ट सेवा), पद्म भूषण (उच्च क्रम की विशिष्ट सेवा) और पद्म श्री (किसी भी क्षेत्र में विशिष्ट सेवा) जैसी तीन श्रेणियों में बांटा गया है, जिनकी घोषणा हर साल गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर की जाती है। इस वर्ष के समारोह में, राष्ट्रपति ने उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश केटी थॉमस को जन-सेवा के लिए और मलयालम पत्रकार पी. नारायणन को साहित्य और शिक्षा में योगदान के लिए पद्म विभूषण से सम्मानित किया। इसके अतिरिक्त, पार्श्व गायिका अलका याग्निक, अभिनेता ममूटी, अमेरिकी डॉक्टर दत्तात्रेयडु नोरी, टेनिस खिलाड़ी विजय अमृतराज, उद्योगपति एसकेएम माएलानंदन और समाजसेवी व शिक्षाविद वी नटेसन को पद्म भूषण प्रदान किया गया। क्रिकेटर रोहित शर्मा और अभिनेता सतीश शाह भी उन हस्तियों में शामिल थे जिन्हें पद्म पुरस्कारों से नवाजा गया, जो खेल, कला, विज्ञान, समाज सेवा और उद्योग जैसे विविध क्षेत्रों में भारत की समृद्ध प्रतिभा और योगदान को दर्शाते हैं। शिबू सोरेन का जीवन और उनका कार्य झारखंड के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय है। उनका संघर्ष, समर्पण और दूरदर्शिता आज भी लाखों लोगों को प्रेरित करती है, और यह मरणोपरांत पद्म भूषण सम्मान उनकी उस विरासत को चिरस्थायी बनाता है। यह सम्मान न केवल उनके असाधारण जीवन को श्रद्धांजलि है, बल्कि उन सभी के लिए प्रेरणा है जो समाज के हाशिए पर पड़े वर्गों के उत्थान के लिए कार्य करते हैं। यह दर्शाता है कि राष्ट्र उन व्यक्तियों को कभी नहीं भूलता जिन्होंने अपने जीवन को बड़े उद्देश्यों के लिए समर्पित किया है, और यह एक व्यक्ति का नहीं बल्कि एक पूरे आंदोलन का सम्मान है जिसने एक नए राज्य को जन्म दिया और लाखों आदिवासियों के जीवन में उम्मीद की किरण जलाई।
- User8143Simri Bakhtiarpur, Saharsa🤝5 hrs ago
- User8143Simri Bakhtiarpur, Saharsa😤5 hrs ago
- हजारीबाग झील का स्वरूप बदलने की तैयारी चल रही है। इस कार्य के लिए झील से जलकुंभी हटाने के लिए एक अत्याधुनिक मशीन को उतारा गया है।1
- गिरिडीह जिले के बगोदर थाना क्षेत्र के खेतको गाँव निवासी महेंद्र महतो पिछले पाँच माह से सऊदी अरब में फँसे हुए हैं। उनके स्वदेश न लौट पाने के कारण घर पर उनकी पत्नी, बुजुर्ग माता-पिता और तीन बच्चों के सामने गहरा आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। महेंद्र की पत्नी ने बताया है कि पति से लगातार बातचीत हो रही है, लेकिन वे वहाँ बेहद कठिन परिस्थितियों में हैं और किसी भी तरह भारत लौटना चाहते हैं। इस मामले पर स्थानीय समाजसेवी सिकंदर अली और टेकलाल महतो ने महेंद्र महतो की सुरक्षित वतन वापसी की सरकार से माँग की है और तत्काल हस्तक्षेप करने की अपील की है। इसके साथ ही, उन्होंने क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ाने पर भी जोर दिया है ताकि पलायन पर रोक लगाई जा सके।2
- हजारीबाग स्टेडियम में आयोजित चार दिवसीय सुनील सिंह जिला राइफल चैंपियनशिप का सोमवार को भव्य समापन हुआ। इस समापन समारोह में झारखंड के पूर्व डीजीपी अजय कुमार सिंह ने मुख्य अतिथि के तौर पर शिरकत की। उनके साथ पूर्व विधायक किशुन दास, लेफ्टिनेंट कर्नल आशिक रिशव, झारखंड शूटिंग एसोसिएशन के स्टेट सेक्रेटरी उत्तम चांद और डिप्टी मेयर अविनाश यादव सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे, जिनका स्वागत शॉल और बुके देकर किया गया। मुख्य अतिथि अजय कुमार सिंह ने इस अवसर पर अपने संबोधन में कहा कि निशानेबाजी केवल एक खेल नहीं है, बल्कि यह बच्चों में आत्मविश्वास, मानसिक संतुलन और उनकी प्रतिभा को निखारने का एक प्रभावी माध्यम भी है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इस खेल में सफलता प्राप्त करने के लिए कड़ी मेहनत, धैर्य और समर्पण की आवश्यकता होती है। प्रतियोगिता में विभिन्न वर्गों के विजेता खिलाड़ियों को मेडल और प्रमाण पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। 50 मीटर जूनियर वर्ग में आस्तिक सिंह ने पहला स्थान हासिल किया, वहीं सीनियर वर्ग में ध्रुव प्रताप सिंह विजेता घोषित किए गए। इसके अतिरिक्त, 10 मीटर एयर राइफल, पिस्तौल और महिला वर्गों में भी खिलाड़ियों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। कार्यक्रम के अंत में, एनसीसी के एएनओ शत्रुघ्न पांडेय ने सभी प्रतिभागियों को उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।1
- मोहर्रम के खलीफाओं का भव्य इस्तकबाल किया गया। इस अवसर पर सरफराज अहमद ने खलीफाओं को पगड़ी और लाठी भेंट कर सम्मानित किया।1
- एक गंभीर फैसले में, 14 गौ रक्षकों को आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई गई है। इस चौंकाने वाली घटना के बाद, दक्ष चौधरी ने उन सभी गौ रक्षकों के परिवारों से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात की है, जो इस सज़ा से प्रभावित हुए हैं। इन मुलाकातों के बाद, अब इस मामले में 'पूरी सच्चाई' सामने लाने और कथित अन्याय के खिलाफ 'न्याय की लड़ाई' शुरू कर दी गई है।1
- चैनपुर टाटा डीएवी स्कूल को मर्ज किए जाने के निर्णय से अभिभावकों में तीव्र नाराजगी देखी गई है। इस फैसले के विरोध में, बड़ी संख्या में महिला और पुरुष अभिभावकों ने स्कूल परिसर के बाहर धरना दिया। अभिभावक लगातार इस विलय के निर्णय का विरोध कर रहे हैं।1
- झारखंड के हजारीबाग जिले की सड़कों पर चल रहे कार्यों को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। सड़कों पर मौजूद गड्ढों में मलबे की भराई की जा रही है, जिसे लेकर यह प्रश्न उठाया जा रहा है कि यह वास्तविक विकास है या केवल एक दिखावा मात्र।1
- मोहर्रम के अवसर पर, हजारीबाग के उपविजेता महापौर सरफराज अहमद और उनकी टीम ने मंगलवार को रॉयल बैंक्वेट, खिरगांव में एक भव्य सम्मान समारोह का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में शहर और ग्रामीण इलाकों के करीब 40 अखाड़ा धारियों सहित सभी खलीफाओं को पगड़ी, माला और लाठी देकर सम्मानित किया गया। समारोह में बड़ी संख्या में अखाड़ा धारियों और मोहर्रम कमेटियों के पदाधिकारियों ने भाग लिया। सरफराज अहमद ने इस अवसर पर कहा कि मोहर्रम केवल एक धार्मिक अवसर नहीं, बल्कि भाईचारे, कुर्बानी और इंसानियत का पैगाम देने वाला पर्व है। उन्होंने सभी खलीफाओं और अखाड़ा धारियों के समाज में महत्वपूर्ण योगदान की सराहना की। सम्मान समारोह के दौरान छड़वा मोहर्रम कमेटी के अध्यक्ष नौशाद खान उर्फ डिस्को, सचिव बाबर अंसारी और कमेटी के अन्य सदस्यों को भी विशेष रूप से सम्मानित किया गया। इसके अतिरिक्त, ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के लगभग 40 अखाड़ा धारियों को एक-एक दर्जन लाठियां भी भेंट की गईं। इस दौरान बालियंद, गदोखर, पेलावल, रोमी, पगमिल, हाशमिया कॉलोनी, लोहसिंघना, मंडई, कोलघाट्टी, नूरा, अमृत नगर, लाखे, मटवारी, बाबूगांव, सरदार रोड, चिश्तिया मोहल्ला, कुरैशी मोहल्ला, बूचर टोली, लेपो रोड, काजी मोहल्ला, खिरगांव अंसारी रोड, खान रोड, हबीबी नगर, खिरगांव इमामबाड़ा, कूद, दामोडीह, डेंगुरा, मसरातू, पसई, सुल्ताना, रसूलीगंज, बंहा, हरहद, बड़ा बाजार, गौस नगर और लालपुर चौक सहित विभिन्न क्षेत्रों के खलीफाओं को सम्मानित किया गया। कुरबान, अयान खान, गुलाम खान, अल्ताफ, शमशेर, मुन्ना खान, शहज़ादा, रूकू, आजाद, हसीब, सुजल, हसन, यूसुफ, आदिल, एजाज और महमूद सोनू सहित कई लोगों ने इस आयोजन को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाई। कार्यक्रम में आपसी एकता, भाईचारे और मोहर्रम की तैयारियों को लेकर भी विस्तृत चर्चा की गई।1
- झारखंड के गोमिया में सोमवार सुबह एक युवती गोमिया थाना क्षेत्र के ढेंढे गांव स्थित मोबाइल टॉवर पर चढ़ गई। वह अपने प्रेमी को जेल से रिहा करने की मांग पर अड़ी थी और उसका कहना था कि जब तक उसके प्रेमी को जेल से नहीं छोड़ा जाएगा, वह नीचे नहीं उतरेगी। बताया जाता है कि यह पूरा घटनाक्रम कुछ दिन पहले हुई एक घटना से जुड़ा है। युवती के परिजनों ने उसके अपहरण की शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके बाद पुलिस ने युवती को रांची से बरामद किया था। इस मामले में पुलिस ने युवती के प्रेमी युवक को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था, और इसी के विरोध में युवती ने यह कदम उठाया। घटना की सूचना मिलने पर गोमिया और ललपनिया थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने युवती को काफी समझाने-बुझाने का प्रयास किया, लेकिन वह नीचे उतरने को तैयार नहीं हुई और कूदने की धमकी देने लगी। एहतियात के तौर पर पुलिस ने टॉवर के चारों ओर सुरक्षा जाल (नेट) लगाने की व्यवस्था की। प्रेम, कानून और मोबाइल टॉवर के बीच फंसी इस घटना ने इलाके में घंटों तक लोगों का ध्यान खींचे रखा, जिससे एक हाई वोल्टेज ड्रामा चलता रहा।1