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मध्य प्रदेश के उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल के शहडोल जिले के बाणसागर सर्किट हाउस पहुंचने पर उनका जोरदार स्वागत किया गया। इस अवसर पर जन प्रतिनिधियों और अधिकारियों ने पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका अभिनंदन किया।

7 hrs ago
user_Angad Tiwari
Angad Tiwari
पत्रकार जयसिंहनगर, शहडोल, मध्य प्रदेश•
7 hrs ago

मध्य प्रदेश के उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल के शहडोल जिले के बाणसागर सर्किट हाउस पहुंचने पर उनका जोरदार स्वागत किया गया। इस अवसर पर जन प्रतिनिधियों और अधिकारियों ने पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका अभिनंदन किया।

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  • मध्य प्रदेश के उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल के शहडोल जिले के बाणसागर सर्किट हाउस पहुंचने पर उनका जोरदार स्वागत किया गया। इस अवसर पर जन प्रतिनिधियों और अधिकारियों ने पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका अभिनंदन किया।
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    मध्य प्रदेश के उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल के शहडोल जिले के बाणसागर सर्किट हाउस पहुंचने पर उनका जोरदार स्वागत किया गया। इस अवसर पर जन प्रतिनिधियों और अधिकारियों ने पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका अभिनंदन किया।
    user_Angad Tiwari
    Angad Tiwari
    पत्रकार जयसिंहनगर, शहडोल, मध्य प्रदेश•
    7 hrs ago
  • मानपुर में नल-जल योजना बनी सरकारी खजाने पर बोझ? सड़कों पर बह रहा पानी, लाखों का भुगतान फिर भी व्यवस्था बदहाल जिम्मेदारों की कार्यशैली कटघरे में* *मानपुर में नल-जल योजना बनी सरकारी खजाने पर बोझ? सड़कों पर बह रहा पानी, लाखों का भुगतान फिर भी व्यवस्था बदहाल जिम्मेदारों की कार्यशैली कटघरे में* मानपुर। नगर परिषद मानपुर में करोड़ों रुपये की नल-जल योजना अब आमजन को राहत देने के बजाय सरकारी धन की बर्बादी और अव्यवस्था का बड़ा उदाहरण बनती जा रही है। लगभग एक वर्ष पूर्व जल निगम द्वारा योजना नगर परिषद मानपुर को हैंडओवर कर दी गई थी, लेकिन एक साल बाद भी नगर परिषद व्यवस्था संभालने की बुनियादी तैयारी तक नहीं कर सकी। नतीजा यह है कि नगर के कई हिस्सों में पाइपलाइन लीकेज, खराब वाल्व और बिना टोटी वाले नलों से हजारों लीटर पानी लगातार सड़कों और नालियों में बह रहा है। एक ओर गर्मी में लोग पर्याप्त पानी के लिए परेशान हैं, वहीं दूसरी ओर जनता के टैक्स का पैसा पानी के साथ बहता नजर आ रहा है। जल निगम के डिप्टी मैनेजर शुभम गुप्ता ने स्पष्ट किया कि नल-जल योजना पूरी तरह नगर परिषद मानपुर को हैंडओवर की जा चुकी है और अब जल निगम का कार्य केवल टंकियों में पानी भरना है। सप्लाई, मेंटेनेंस, लीकेज सुधार, वसूली, नए कनेक्शन और पाइपलाइन विस्तार सहित सभी जिम्मेदारियां नगर परिषद के अधीन हैं। उन्होंने बताया कि टंकियों से सप्लाई होने वाले पानी की रीडिंग के आधार पर जल निगम नगर परिषद को बिल भेजता है और नगर परिषद उसका भुगतान करती है। यानी पानी घरों तक पहुंचे या रास्ते में लीकेज होकर बह जाए, भुगतान पूरा किया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक नगर परिषद हर माह करीब 7 से 8 लाख रुपये जल निगम को भुगतान कर रही है, जबकि आमजन से पानी शुल्क के रूप में केवल 2 से ढाई लाख रुपये की ही वसूली हो पाती है। बाकी राशि नगर परिषद को अन्य राजस्व स्रोतों से वहन करनी पड़ रही है। ऐसे में स्थानीय लोगों का सवाल है कि जब पानी की हर बूंद का भुगतान करना पड़ रहा है, तो फिर लीकेज रोकने और व्यवस्था सुधारने पर गंभीरता क्यों नहीं दिखाई जा रही। मामला सिर्फ आर्थिक नुकसान तक सीमित नहीं है। लगातार हो रहे पाइपलाइन लीकेज के कारण कई स्थानों पर गंदा और दूषित पानी सप्लाई होने की शिकायतें भी सामने आ रही हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि लीकेज वाली पाइपलाइन से बाहरी गंदगी और नालियों का दूषित पानी लाइन में मिलने का खतरा बना रहता है, जिससे जलजनित बीमारियों का जोखिम बढ़ गया है। ऐसे में यह लापरवाही अब केवल पानी की बर्बादी नहीं, बल्कि नगरवासियों के स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा बनती जा रही है। हैरानी की बात यह है कि पानी शुल्क वसूली के लिए नगर परिषद द्वारा लगभग 10 कर्मचारियों की भर्ती की गई है, लेकिन मेंटेनेंस और लीकेज रोकने के लिए पर्याप्त तकनीकी स्टाफ उपलब्ध नहीं कराया गया। जानकारी के अनुसार नगर परिषद क्षेत्र के खुटार, बरबसपुर, मानपुर, बैगांव, गोवरदे और सिगुड़ी में सप्लाई संचालन के लिए पूर्व से 6 वाल्व ऑपरेटर कार्यरत हैं, जिनका काम टंकियां भरना और पानी सप्लाई देना है। योजना हैंडओवर होने के बावजूद नगर परिषद ने इन अनुभवी कर्मचारियों को अपने अधीन नहीं लिया, जिससे व्यवस्था और अधिक प्रभावित हुई है। बताया जाता है कि ये कर्मचारी आज भी बेहद कम मानदेय पर कार्य कर रहे हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि समय रहते खराब वाल्व, पाइपलाइन लीकेज और बिना टोटी वाले नलों की मरम्मत कराई जाती, तो हर माह लगभग 2 से 3 लाख रुपये तक की बचत संभव थी। लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों की उदासीनता के कारण सरकारी धन लगातार व्यर्थ बह रहा है। इस पूरे मामले पर नगर परिषद मानपुर के सीएमओ राजेंद्र कुशवाहा ने कहा कि टोटियों के लिए ऑर्डर दिया जा चुका है तथा जल्द ही मिस्त्री और कर्मचारियों की भर्ती की जाएगी। हालांकि जनता का सवाल है कि जब योजना को हैंडओवर हुए लगभग एक वर्ष बीत चुका है, तो अब तक केवल आश्वासन ही क्यों दिए जा रहे हैं। मानपुर में अब नल-जल योजना विकास से ज्यादा प्रशासनिक लापरवाही, वित्तीय अव्यवस्था और जनस्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर विषय बन चुकी है। जनता पूछ रही है कि आखिर कब तक सरकारी खजाने का पैसा नालियों में बहते पानी के रूप में भुगतान किया जाता रहेगा और नगर परिषद व्यर्थ बहते पानी की रोकथाम व स्वच्छ पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए कब ठोस कदम उठाएगी। स्थानीय नागरिकों ने जिले की नवागत संवेदनशील कलेक्टर महोदया से मांग की है कि नगर परिषद मानपुर में नल-जल योजना की जमीनी स्थिति का गंभीरता से परीक्षण कराया जाए। लगातार हो रही पानी की बर्बादी, लीकेज, दूषित पेयजल आपूर्ति और हर माह हो रहे आर्थिक नुकसान की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए। नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो यह समस्या आगे चलकर जल संकट के साथ जनस्वास्थ्य संकट का भी रूप ले सकती है। आमजन को उम्मीद है कि जिला प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर त्वरित हस्तक्षेप कर नगरवासियों को राहत दिलाएगा।
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    मानपुर में नल-जल योजना बनी सरकारी खजाने पर बोझ? सड़कों पर बह रहा पानी, लाखों का भुगतान फिर भी व्यवस्था बदहाल जिम्मेदारों की कार्यशैली कटघरे में*

*मानपुर में नल-जल योजना बनी सरकारी खजाने पर बोझ? सड़कों पर बह रहा पानी, लाखों का भुगतान फिर भी व्यवस्था बदहाल जिम्मेदारों की कार्यशैली कटघरे में*
मानपुर। नगर परिषद मानपुर में करोड़ों रुपये की नल-जल योजना अब आमजन को राहत देने के बजाय सरकारी धन की बर्बादी और अव्यवस्था का बड़ा उदाहरण बनती जा रही है। लगभग एक वर्ष पूर्व जल निगम द्वारा योजना नगर परिषद मानपुर को हैंडओवर कर दी गई थी, लेकिन एक साल बाद भी नगर परिषद व्यवस्था संभालने की बुनियादी तैयारी तक नहीं कर सकी। नतीजा यह है कि नगर के कई हिस्सों में पाइपलाइन लीकेज, खराब वाल्व और बिना टोटी वाले नलों से हजारों लीटर पानी लगातार सड़कों और नालियों में बह रहा है। एक ओर गर्मी में लोग पर्याप्त पानी के लिए परेशान हैं, वहीं दूसरी ओर जनता के टैक्स का पैसा पानी के साथ बहता नजर आ रहा है।
जल निगम के डिप्टी मैनेजर शुभम गुप्ता ने स्पष्ट किया कि नल-जल योजना पूरी तरह नगर परिषद मानपुर को हैंडओवर की जा चुकी है और अब जल निगम का कार्य केवल टंकियों में पानी भरना है। सप्लाई, मेंटेनेंस, लीकेज सुधार, वसूली, नए कनेक्शन और पाइपलाइन विस्तार सहित सभी जिम्मेदारियां नगर परिषद के अधीन हैं। उन्होंने बताया कि टंकियों से सप्लाई होने वाले पानी की रीडिंग के आधार पर जल निगम नगर परिषद को बिल भेजता है और नगर परिषद उसका भुगतान करती है। यानी पानी घरों तक पहुंचे या रास्ते में लीकेज होकर बह जाए, भुगतान पूरा किया जा रहा है। 
सूत्रों के मुताबिक नगर परिषद हर माह करीब 7 से 8 लाख रुपये जल निगम को भुगतान कर रही है, जबकि आमजन से पानी शुल्क के रूप में केवल 2 से ढाई लाख रुपये की ही वसूली हो पाती है। बाकी राशि नगर परिषद को अन्य राजस्व स्रोतों से वहन करनी पड़ रही है। ऐसे में स्थानीय लोगों का सवाल है कि जब पानी की हर बूंद का भुगतान करना पड़ रहा है, तो फिर लीकेज रोकने और व्यवस्था सुधारने पर गंभीरता क्यों नहीं दिखाई जा रही।
मामला सिर्फ आर्थिक नुकसान तक सीमित नहीं है। लगातार हो रहे पाइपलाइन लीकेज के कारण कई स्थानों पर गंदा और दूषित पानी सप्लाई होने की शिकायतें भी सामने आ रही हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि लीकेज वाली पाइपलाइन से बाहरी गंदगी और नालियों का दूषित पानी लाइन में मिलने का खतरा बना रहता है, जिससे जलजनित बीमारियों का जोखिम बढ़ गया है। ऐसे में यह लापरवाही अब केवल पानी की बर्बादी नहीं, बल्कि नगरवासियों के स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा बनती जा रही है।
हैरानी की बात यह है कि पानी शुल्क वसूली के लिए नगर परिषद द्वारा लगभग 10 कर्मचारियों की भर्ती की गई है, लेकिन मेंटेनेंस और लीकेज रोकने के लिए पर्याप्त तकनीकी स्टाफ उपलब्ध नहीं कराया गया। जानकारी के अनुसार नगर परिषद क्षेत्र के खुटार, बरबसपुर, मानपुर, बैगांव, गोवरदे और सिगुड़ी में सप्लाई संचालन के लिए पूर्व से 6 वाल्व ऑपरेटर कार्यरत हैं, जिनका काम टंकियां भरना और पानी सप्लाई देना है। योजना हैंडओवर होने के बावजूद नगर परिषद ने इन अनुभवी कर्मचारियों को अपने अधीन नहीं लिया, जिससे व्यवस्था और अधिक प्रभावित हुई है। बताया जाता है कि ये कर्मचारी आज भी बेहद कम मानदेय पर कार्य कर रहे हैं।
स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि समय रहते खराब वाल्व, पाइपलाइन लीकेज और बिना टोटी वाले नलों की मरम्मत कराई जाती, तो हर माह लगभग 2 से 3 लाख रुपये तक की बचत संभव थी। लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों की उदासीनता के कारण सरकारी धन लगातार व्यर्थ बह रहा है। इस पूरे मामले पर नगर परिषद मानपुर के सीएमओ राजेंद्र कुशवाहा ने कहा कि टोटियों के लिए ऑर्डर दिया जा चुका है तथा जल्द ही मिस्त्री और कर्मचारियों की भर्ती की जाएगी। हालांकि जनता का सवाल है कि जब योजना को हैंडओवर हुए लगभग एक वर्ष बीत चुका है, तो अब तक केवल आश्वासन ही क्यों दिए जा रहे हैं।
मानपुर में अब नल-जल योजना विकास से ज्यादा प्रशासनिक लापरवाही, वित्तीय अव्यवस्था और जनस्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर विषय बन चुकी है। जनता पूछ रही है कि आखिर कब तक सरकारी खजाने का पैसा नालियों में बहते पानी के रूप में भुगतान किया जाता रहेगा और नगर परिषद व्यर्थ बहते पानी की रोकथाम व स्वच्छ पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए कब ठोस कदम उठाएगी।
स्थानीय नागरिकों ने जिले की नवागत संवेदनशील कलेक्टर महोदया से मांग की है कि नगर परिषद मानपुर में नल-जल योजना की जमीनी स्थिति का गंभीरता से परीक्षण कराया जाए। लगातार हो रही पानी की बर्बादी, लीकेज, दूषित पेयजल आपूर्ति और हर माह हो रहे आर्थिक नुकसान की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए। नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो यह समस्या आगे चलकर जल संकट के साथ जनस्वास्थ्य संकट का भी रूप ले सकती है। आमजन को उम्मीद है कि जिला प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर त्वरित हस्तक्षेप कर नगरवासियों को राहत दिलाएगा।
    user_Ashutosh tripathi
    Ashutosh tripathi
    Court reporter मानपुर, उमरिया, मध्य प्रदेश•
    1 hr ago
  • मध्य प्रदेश में नदी किनारे नकली नोटों का बड़ा जखीरा बरामद हुआ है। इस घटना से इंदौर समेत पूरे प्रदेश में हड़कंप मच गया है और पुलिस जांच में जुट गई है।
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    मध्य प्रदेश में नदी किनारे नकली नोटों का बड़ा जखीरा बरामद हुआ है। इस घटना से इंदौर समेत पूरे प्रदेश में हड़कंप मच गया है और पुलिस जांच में जुट गई है।
    user_Sumit Singh Chandel
    Sumit Singh Chandel
    Classified ads newspaper publisher गोहपारू, शहडोल, मध्य प्रदेश•
    21 hrs ago
  • Post by SHEKHAR SINGH THAKUR
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    Post by SHEKHAR SINGH THAKUR
    user_SHEKHAR SINGH THAKUR
    SHEKHAR SINGH THAKUR
    मानपुर, उमरिया, मध्य प्रदेश•
    22 hrs ago
  • मध्यप्रदेश के उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल का शहडोल जिले के बाणसागर सर्किट हाउस में आगमन हुआ। जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका भव्य स्वागत किया।
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    मध्यप्रदेश के उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल का शहडोल जिले के बाणसागर सर्किट हाउस में आगमन हुआ। जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका भव्य स्वागत किया।
    user_Durgesh Kumar Gupta
    Durgesh Kumar Gupta
    Electrician Beohari, Shahdol•
    6 hrs ago
  • मध्य प्रदेश प्रशासनिक पुनर्गठन आयोग की जिला एवं तहसील स्तरीय बैठक उमरिया में संपन्न हुई। इसका उद्देश्य जनसुविधा और पारदर्शिता को केंद्र में रखकर प्रशासन को प्रभावी बनाना है, जिसमें जनता भी ऑनलाइन सुझाव दे सकेगी। यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों तक सरकारी सेवाओं की पहुंच बढ़ाकर शासन-प्रशासन को अधिक मजबूत करेगी।
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    मध्य प्रदेश प्रशासनिक पुनर्गठन आयोग की जिला एवं तहसील स्तरीय बैठक उमरिया में संपन्न हुई। इसका उद्देश्य जनसुविधा और पारदर्शिता को केंद्र में रखकर प्रशासन को प्रभावी बनाना है, जिसमें जनता भी ऑनलाइन सुझाव दे सकेगी। यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों तक सरकारी सेवाओं की पहुंच बढ़ाकर शासन-प्रशासन को अधिक मजबूत करेगी।
    user_Umaria News 24
    Umaria News 24
    Local News Reporter बांधवगढ़, उमरिया, मध्य प्रदेश•
    18 hrs ago
  • सिंहपुर में कानून का 'चीरहरण': महिला जन-प्रतिनिधि को अधमरा कर क्या साबित करना चाहते हैं दबंग? जिले के सिंहपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत लालपुर गाँव में मानवता को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है। जहाँ एक पूर्व जनपद सदस्य और पूर्व जिला मंत्री, मीना कुशवाहा पर जानलेवा हमला कर उनकी कमर की पसली तोड़ दी गई। अस्पताल के बिस्तर पर लाचार पड़ी मीना कुशवाहा की हालत दबंगों के बेखौफ हौसलों की गवाही दे रही है। ​विवाद की असली जड़: आम का पेड़ या करोड़ों की जमीन? ​दिखने में यह विवाद खेत में लगे एक आम के पेड़ से फल तोड़ने जैसा मामूली नजर आ रहा है, लेकिन गहराई में जाने पर कहानी कुछ और ही बयां करती है। ​पुरानी रंजिश: सूत्रों की मानें तो जिस जमीन को मीना कुशवाहा ने खरीदा है, उस पर भू-माफियाओं की गिद्ध दृष्टि काफी समय से है। अवैध उत्खनन का साया: क्या यह हमला मीना जी की जमीन से लगी नदी में चल रहे अवैध रेत उत्खनन के विरोध की सजा है? क्या दबंगों को डर था कि एक सक्रिय महिला जन प्रतिनिधि उनके काले कारोबार में बाधा बन सकती है? ​बेखौफ आरोपी: कानून का भय या सत्ता का संरक्षण? ​घटना के वक्त जब मीना कुशवाहा ने आम तोड़ने का विरोध किया, तो आरोपियों ने उन पर लाठियों और पत्थरों से हमला कर दिया। इस हमले में उनकी कमर की हड्डी (पसली) टूट गई है। पुलिस ने आरोपी कुलदीप पाण्डेय , धर्मेन्द्र पाण्डेय , पुष्पेन्द्र पाण्डेय और मंदीप पाण्डेय के खिलाफ BNS की विभिन्न धाराओं (296, 115(2), 351(3), 3(5)) के तहत मामला तो दर्ज कर लिया है, लेकिन सवाल अभी भी बरकरार हैं। ​"सिंहपुर में अपराधियों के हौसले इतने बुलंद क्यों हैं? क्या प्रशासन का इकबाल खत्म हो चुका है, या फिर इन गुंडों को किसी सफेदपोश का वरदहस्त प्राप्त है?" ​प्रशासनिक बयान ​शिवाली चतुर्वेदी (DSP): "पीड़िता की शिकायत पर 4 व्यक्तियों के विरुद्ध FIR दर्ज कर जांच की जा रही है।" ​आशीष झारिया (थाना प्रभारी): "आवेदन के आधार पर मामला दर्ज कर लिया गया है, जल्द ही अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।" ​खंपरिया का चश्मा 👓 (नजरिया) ​महज आम तोड़ने के लिए किसी की पसली तोड़ देना गले नहीं उतरता। यह सीधा-सीधा जमीन कब्जाने और अवैध उत्खनन के रास्ते से 'कांटा' हटाने की साजिश प्रतीत होती है। अगर एक पूर्व जनपद सदस्य सुरक्षित नहीं है, तो आम जनता का क्या होगा? सिंहपुर पुलिस को अब 'कागजी कार्रवाई' से आगे बढ़कर 'कड़ी कार्रवाई' करनी होगी, ताकि अपराधियों के मन में कानून का खौफ दोबारा पैदा हो सके। ​- शिवनारायण द्विवेदी शहडोल | खमपरिया का चश्मा 👓 रिपोर्ट: शिवनारायण द्विवेदी ​शहडोल जिले के सिंहपुर थाना क्षेत्र से मानवता को शर्मसार करने वाली एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने न केवल कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि समाज की उस लाचारी को भी उजागर किया है जहाँ एक महिला जन-प्रतिनिधि सुरक्षित नहीं है। ​क्रूरता की सारी हदें पार: लात-घूंसे और पत्थरों से हमला ​पूर्व जनपद सदस्य और पूर्व जिला मंत्री मीना कुशवाहा को जिस बेरहमी से पीटा गया, वह रूह कंपा देने वाला है। आरोपियों ने महिला को केवल मारा ही नहीं, बल्कि उनके निजी अंगों पर वार किए, जिससे उनकी हालत अत्यंत नाजुक हो गई है। प्रत्यक्षदर्शियों और परिजनों के अनुसार, मारपीट इतनी भीषण थी कि महिला को खून की उल्टियां होने लगीं और उनकी कमर की पसलियां तक टूट गई हैं। एक महिला को इस तरह लहूलुहान कर देना यह दर्शाता है कि हमलावरों के मन में कानून का रत्ती भर भी खौफ नहीं है। ​आम तोड़ने का बहाना या जमीन हड़पने की गहरी साजिश? ​दिखने में यह विवाद केवल 'आम तोड़ने' जैसी छोटी बात से शुरू हुआ लगता है, लेकिन इसकी जड़ें कहीं गहरी हैं। चर्चा है कि यह हमला मीना जी द्वारा खरीदी गई कीमती जमीन पर नजर गड़ाए बैठे दबंगों की एक सोची-समझी साजिश है। ​क्या यह हमला उस जमीन को हड़पने के लिए डराने का एक तरीका है? ​या फिर मामला नदी में चल रहे अवैध उत्खनन से जुड़ा है, जिसका विरोध करना भारी पड़ा? ​पुराना इतिहास: पहले भी घर में घुसकर कर चुके हैं मारपीट ​ये आरोपी कोई नए नहीं हैं। बताया जा रहा है कि लगभग एक वर्ष पूर्व भी पुष्पेंद्र, धर्मेंद्र और यादवेन्द्र पांडेय ने अशोक तिवारी के घर में घुसकर इसी तरह तांडव मचाया था। जब अपराधी बार-बार अपराध करके भी खुलेआम घूमते हैं, तो उनके हौसले बुलंद होना लाजिमी है। सिंहपुर पुलिस द्वारा कुलदीप, धर्मेंद्र, पुष्पेंद्र और मंदीप पांडेय के विरुद्ध धाराएं तो दर्ज कर ली गई हैं, लेकिन क्या ये धाराएं उस लाचार महिला के साथ हुए अन्याय का हिसाब कर पाएंगी? ​सवाल गहरा है: आखिर सिंहपुर क्षेत्र में इन दबंगों को किसका संरक्षण प्राप्त है? क्या एक महिला को अधमरा कर देना ही 'शक्ति प्रदर्शन' है? पुलिस प्रशासन की ढिलाई ही है जो आज एक जन-प्रतिनिधि अस्पताल के बिस्तर पर अपनी जिंदगी की जंग लड़ रही है। ​अब समय है कि प्रशासन केवल FIR दर्ज न करे, बल्कि ऐसी कठोर कार्रवाई करे कि भविष्य में किसी भी महिला की तरफ हाथ उठाने से पहले अपराधियों की रूह कांप जाए। ​#JusticeForMeenaKushwaha #ShahdolNews #CrimeAgainstWomen #PoliceAction #MPNews
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    सिंहपुर में कानून का 'चीरहरण': महिला जन-प्रतिनिधि को अधमरा कर क्या साबित करना चाहते हैं दबंग?


जिले के सिंहपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत लालपुर गाँव में मानवता को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है। जहाँ एक पूर्व जनपद सदस्य और पूर्व जिला मंत्री, मीना कुशवाहा पर जानलेवा हमला कर उनकी कमर की पसली तोड़ दी गई। अस्पताल के बिस्तर पर लाचार पड़ी मीना कुशवाहा की हालत दबंगों के बेखौफ हौसलों की गवाही दे रही है।
​विवाद की असली जड़: आम का पेड़ या करोड़ों की जमीन?
​दिखने में यह विवाद खेत में लगे एक आम के पेड़ से फल तोड़ने जैसा मामूली नजर आ रहा है, लेकिन गहराई में जाने पर कहानी कुछ और ही बयां करती है।
​पुरानी रंजिश: सूत्रों की मानें तो जिस जमीन को मीना कुशवाहा ने खरीदा है, उस पर भू-माफियाओं की गिद्ध दृष्टि काफी समय से है।
अवैध उत्खनन का साया: क्या यह हमला मीना जी की जमीन से लगी नदी में चल रहे अवैध रेत उत्खनन के विरोध की सजा है? क्या दबंगों को डर था कि एक सक्रिय महिला जन प्रतिनिधि उनके काले कारोबार में बाधा बन सकती है?
​बेखौफ आरोपी: कानून का भय या सत्ता का संरक्षण?
​घटना के वक्त जब मीना कुशवाहा ने आम तोड़ने का विरोध किया, तो आरोपियों ने उन पर लाठियों और पत्थरों से हमला कर दिया। इस हमले में उनकी कमर की हड्डी (पसली) टूट गई है। पुलिस ने आरोपी कुलदीप पाण्डेय , धर्मेन्द्र पाण्डेय , पुष्पेन्द्र पाण्डेय और मंदीप पाण्डेय के खिलाफ BNS की विभिन्न धाराओं (296, 115(2), 351(3), 3(5)) के तहत मामला तो दर्ज कर लिया है, लेकिन सवाल अभी भी बरकरार हैं।
​"सिंहपुर में अपराधियों के हौसले इतने बुलंद क्यों हैं? क्या प्रशासन का इकबाल खत्म हो चुका है, या फिर इन गुंडों को किसी सफेदपोश का वरदहस्त प्राप्त है?"
​प्रशासनिक बयान
​शिवाली चतुर्वेदी (DSP): "पीड़िता की शिकायत पर 4 व्यक्तियों के विरुद्ध FIR दर्ज कर जांच की जा रही है।"
​आशीष झारिया (थाना प्रभारी): "आवेदन के आधार पर मामला दर्ज कर लिया गया है, जल्द ही अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।"
​खंपरिया का चश्मा 👓 (नजरिया)
​महज आम तोड़ने के लिए किसी की पसली तोड़ देना गले नहीं उतरता। यह सीधा-सीधा जमीन कब्जाने और अवैध उत्खनन के रास्ते से 'कांटा' हटाने की साजिश प्रतीत होती है। अगर एक पूर्व जनपद सदस्य सुरक्षित नहीं है, तो आम जनता का क्या होगा? सिंहपुर पुलिस को अब 'कागजी कार्रवाई' से आगे बढ़कर 'कड़ी कार्रवाई' करनी होगी, ताकि अपराधियों के मन में कानून का खौफ दोबारा पैदा हो सके।
​- शिवनारायण द्विवेदी
शहडोल | खमपरिया का चश्मा 👓
रिपोर्ट: शिवनारायण द्विवेदी
​शहडोल जिले के सिंहपुर थाना क्षेत्र से मानवता को शर्मसार करने वाली एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने न केवल कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि समाज की उस लाचारी को भी उजागर किया है जहाँ एक महिला जन-प्रतिनिधि सुरक्षित नहीं है।
​क्रूरता की सारी हदें पार: लात-घूंसे और पत्थरों से हमला
​पूर्व जनपद सदस्य और पूर्व जिला मंत्री मीना कुशवाहा को जिस बेरहमी से पीटा गया, वह रूह कंपा देने वाला है। आरोपियों ने महिला को केवल मारा ही नहीं, बल्कि उनके निजी अंगों पर वार किए, जिससे उनकी हालत अत्यंत नाजुक हो गई है। प्रत्यक्षदर्शियों और परिजनों के अनुसार, मारपीट इतनी भीषण थी कि महिला को खून की उल्टियां होने लगीं और उनकी कमर की पसलियां तक टूट गई हैं। एक महिला को इस तरह लहूलुहान कर देना यह दर्शाता है कि हमलावरों के मन में कानून का रत्ती भर भी खौफ नहीं है।
​आम तोड़ने का बहाना या जमीन हड़पने की गहरी साजिश?
​दिखने में यह विवाद केवल 'आम तोड़ने' जैसी छोटी बात से शुरू हुआ लगता है, लेकिन इसकी जड़ें कहीं गहरी हैं। चर्चा है कि यह हमला मीना जी द्वारा खरीदी गई कीमती जमीन पर नजर गड़ाए बैठे दबंगों की एक सोची-समझी साजिश है।
​क्या यह हमला उस जमीन को हड़पने के लिए डराने का एक तरीका है?
​या फिर मामला नदी में चल रहे अवैध उत्खनन से जुड़ा है, जिसका विरोध करना भारी पड़ा?
​पुराना इतिहास: पहले भी घर में घुसकर कर चुके हैं मारपीट
​ये आरोपी कोई नए नहीं हैं। बताया जा रहा है कि लगभग एक वर्ष पूर्व भी पुष्पेंद्र, धर्मेंद्र और यादवेन्द्र पांडेय ने अशोक तिवारी के घर में घुसकर इसी तरह तांडव मचाया था। जब अपराधी बार-बार अपराध करके भी खुलेआम घूमते हैं, तो उनके हौसले बुलंद होना लाजिमी है। सिंहपुर पुलिस द्वारा कुलदीप, धर्मेंद्र, पुष्पेंद्र और मंदीप पांडेय के विरुद्ध धाराएं तो दर्ज कर ली गई हैं, लेकिन क्या ये धाराएं उस लाचार महिला के साथ हुए अन्याय का हिसाब कर पाएंगी?
​सवाल गहरा है: आखिर सिंहपुर क्षेत्र में इन दबंगों को किसका संरक्षण प्राप्त है? क्या एक महिला को अधमरा कर देना ही 'शक्ति प्रदर्शन' है? पुलिस प्रशासन की ढिलाई ही है जो आज एक जन-प्रतिनिधि अस्पताल के बिस्तर पर अपनी जिंदगी की जंग लड़ रही है।
​अब समय है कि प्रशासन केवल FIR दर्ज न करे, बल्कि ऐसी कठोर कार्रवाई करे कि भविष्य में किसी भी महिला की तरफ हाथ उठाने से पहले अपराधियों की रूह कांप जाए।
​#JusticeForMeenaKushwaha #ShahdolNews #CrimeAgainstWomen #PoliceAction #MPNews
    user_Shivnarayan Dwivedi
    Shivnarayan Dwivedi
    Local News Reporter सोहागपुर, शहडोल, मध्य प्रदेश•
    46 min ago
  • लगेज वाहन पिकअप में ठूंस ठूंस कर ढोई जा रही बारात-तेज रफ्तार वाहन दे रहे हादसे को निमंत्रण(मालवाहक में जानलेवा सफर) *ओवरलोड बारात वाहन बना हादसे का न्योता, तेज रफ्तार पिकअप में जान जोखिम में डालकर सफर करते दिखे लोग* मानपुर-उमरिया उमरिया जिले के मानपुर तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत बल्हौंड़ क्षेत्र में गुरुवार रात एक तेज रफ्तार ओवरलोड पिकअप वाहन लोगों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता नजर आया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार दिनांक 07 मई 2026 को रात लगभग 8:45 बजे एक पिकअप वाहन में क्षमता से कई गुना अधिक बाराती सवार थे, जिनमें युवक और बच्चे वाहन के चारों ओर लटककर जान जोखिम में डालते हुए सफर कर रहे थे। बताया जा रहा है कि वाहन लगभग 80 से 90 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ब्यौहारी मार्ग की ओर बढ़ रहा था। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस तरह खुलेआम ओवरलोड और तेज रफ्तार से दौड़ रहे वाहनों पर परिवहन विभाग एवं संबंधित अधिकारियों की नजर नहीं पड़ रही है, जिससे कभी भी बड़ा सड़क हादसा हो सकता है। लोगों ने सवाल उठाया कि जहां एक ओर बिना हेलमेट बाइक चलाने वालों पर तत्काल कार्रवाई की जाती है, वहीं दूसरी ओर क्षमता से अधिक सवारी लेकर तेज गति से दौड़ रहे बड़े वाहनों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होना चिंता का विषय बनता जा रहा है। ग्रामीणों और राहगीरों का कहना है कि शादी-ब्याह के मौसम में इस प्रकार के ओवरलोड वाहन लगातार सड़कों पर दौड़ते दिखाई देते हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग द्वारा इनके खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं की जाती। इससे न केवल यात्रियों की जान खतरे में पड़ती है बल्कि सड़क पर चलने वाले अन्य लोगों के लिए भी दुर्घटना का खतरा बना रहता है। स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन और परिवहन विभाग से मांग की है कि ऐसे वाहनों के खिलाफ विशेष अभियान चलाकर कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में किसी बड़े हादसे से बचा जा सके। फिलहाल यह मामला क्षेत्र में चर्चा और चिंता का विषय बना हुआ है।
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    लगेज वाहन पिकअप में ठूंस ठूंस कर ढोई जा रही बारात-तेज रफ्तार वाहन दे रहे हादसे को निमंत्रण(मालवाहक में जानलेवा सफर)
*ओवरलोड बारात वाहन बना हादसे का न्योता, तेज रफ्तार पिकअप में जान जोखिम में डालकर सफर करते दिखे लोग*
मानपुर-उमरिया 
उमरिया जिले के मानपुर तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत बल्हौंड़ क्षेत्र में गुरुवार रात एक तेज रफ्तार ओवरलोड पिकअप वाहन लोगों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता नजर आया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार दिनांक 07 मई 2026 को रात लगभग 8:45 बजे एक पिकअप वाहन में क्षमता से कई गुना अधिक बाराती सवार थे, जिनमें युवक और बच्चे वाहन के चारों ओर लटककर जान जोखिम में डालते हुए सफर कर रहे थे। बताया जा रहा है कि वाहन लगभग 80 से 90 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ब्यौहारी मार्ग की ओर बढ़ रहा था।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस तरह खुलेआम ओवरलोड और तेज रफ्तार से दौड़ रहे वाहनों पर परिवहन विभाग एवं संबंधित अधिकारियों की नजर नहीं पड़ रही है, जिससे कभी भी बड़ा सड़क हादसा हो सकता है। लोगों ने सवाल उठाया कि जहां एक ओर बिना हेलमेट बाइक चलाने वालों पर तत्काल कार्रवाई की जाती है, वहीं दूसरी ओर क्षमता से अधिक सवारी लेकर तेज गति से दौड़ रहे बड़े वाहनों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होना चिंता का विषय बनता जा रहा है।
ग्रामीणों और राहगीरों का कहना है कि शादी-ब्याह के मौसम में इस प्रकार के ओवरलोड वाहन लगातार सड़कों पर दौड़ते दिखाई देते हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग द्वारा इनके खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं की जाती। इससे न केवल यात्रियों की जान खतरे में पड़ती है बल्कि सड़क पर चलने वाले अन्य लोगों के लिए भी दुर्घटना का खतरा बना रहता है।
स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन और परिवहन विभाग से मांग की है कि ऐसे वाहनों के खिलाफ विशेष अभियान चलाकर कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में किसी बड़े हादसे से बचा जा सके। फिलहाल यह मामला क्षेत्र में चर्चा और चिंता का विषय बना हुआ है।
    user_Ashutosh tripathi
    Ashutosh tripathi
    Court reporter मानपुर, उमरिया, मध्य प्रदेश•
    5 hrs ago
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