पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुख्यात गैंगस्टर योगेश भदौड़ा की 'सेफ लैंडिंग' यानी आसान गिरफ्तारी कराने वाले खाकी वर्दीवाले अफसर विक्रम राठौड़ को लाइन हाजिर कर दिया गया है। हमेशा फॉर्च्यूनर के काफिले और दर्जनों शूटर्स की सुरक्षा में चलने वाले इस ₹1 लाख के इनामी गैंगस्टर को विक्रम राठौड़ पुलिस की स्क्रिप्ट के तहत 'खंडहर में जाकर पेड़ के नीचे से' पकड़ कर लाए थे। हमेशा ऑटोमेटिक हथियारों से पश्चिमी यूपी की धरती को लाल करने वाले इस कुख्यात गैंगस्टर के पास से दरोगा को केवल एक जंक लगा तमंचा और 3 कारतूस ही बरामद हुए थे। उत्तर प्रदेश पुलिस और यूपीएसटीएफ (UPSTF) लगातार इस गैंगस्टर के पीछे पड़ी हुई थी, लेकिन विक्रम राठौड़ ने अपने 'फीलगुड' के चक्कर में यूपी पुलिस को 'बेड फील' करा दिया, जिससे उत्तराखंड पुलिस भी शर्मसार हुई है। दोनों राज्यों के बड़े अधिकारियों के बीच जानकारी और तथ्यों के आदान-प्रदान के बाद यह कार्रवाई की गई है। आने वाले दिनों में राठौड़ साहब के खिलाफ विभागीय जांच की जाएगी और उनके गैंगस्टर कनेक्शन की भी तलाश होगी। इस पूरे मामले ने कुछ साल पहले सतना में नमकीन खाते हुए डकैतों की हुई सेफ लैंडिंग के मामले की यादें ताजा कर दी हैं।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुख्यात गैंगस्टर योगेश भदौड़ा की 'सेफ लैंडिंग' यानी आसान गिरफ्तारी कराने वाले खाकी वर्दीवाले अफसर विक्रम राठौड़ को लाइन हाजिर कर दिया गया है। हमेशा फॉर्च्यूनर के काफिले और दर्जनों शूटर्स की सुरक्षा में चलने वाले इस ₹1 लाख के इनामी गैंगस्टर को विक्रम राठौड़ पुलिस की स्क्रिप्ट के तहत 'खंडहर में जाकर पेड़ के नीचे से' पकड़ कर लाए थे। हमेशा ऑटोमेटिक हथियारों से पश्चिमी यूपी की धरती को लाल करने वाले इस कुख्यात गैंगस्टर के पास से दरोगा को केवल एक जंक लगा तमंचा और 3 कारतूस ही बरामद हुए थे। उत्तर प्रदेश पुलिस और यूपीएसटीएफ (UPSTF) लगातार इस गैंगस्टर के पीछे पड़ी हुई थी, लेकिन विक्रम राठौड़ ने अपने 'फीलगुड' के चक्कर में यूपी पुलिस को 'बेड फील' करा दिया, जिससे उत्तराखंड पुलिस भी शर्मसार हुई है। दोनों राज्यों के बड़े अधिकारियों के बीच जानकारी और तथ्यों के आदान-प्रदान के बाद यह कार्रवाई की गई है। आने वाले दिनों में राठौड़ साहब के खिलाफ विभागीय जांच की जाएगी और उनके गैंगस्टर कनेक्शन की भी तलाश होगी। इस पूरे मामले ने कुछ साल पहले सतना में नमकीन खाते हुए डकैतों की हुई सेफ लैंडिंग के मामले की यादें ताजा कर दी हैं।
- वाराणसी के जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने अपने आवास पर अपने दोनों बच्चों के साथ मिलकर वृक्षारोपण किया।1
- उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर में पूजा-अर्चना और गौ सेवा करने के बाद 'एक पेड़ मां के नाम' पौधारोपण महायज्ञ 2026 का शुभारंभ किया। इस महाअभियान के तहत सीएम योगी ने प्रदेशवासियों को 35 करोड़ पौधे रोपने का संकल्प दिलाया। इस अभियान को राज्य भर में जनता का जबरदस्त समर्थन मिल रहा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, सुबह 8 बजे तक उत्तर प्रदेश के 11,206 स्थलों पर एक करोड़ पौधे रोपे जा चुके थे, जो सुबह 10 बजे तक बढ़कर एक करोड़ 40 लाख पौधों तक पहुंच गए। इस महाअभियान में विभिन्न सरकारी विभागों, स्वयंसेवी संस्थाओं, स्कूल-कॉलेजों और आम नागरिकों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ मां के नाम पर पेड़ लगाकर प्रकृति के प्रति सम्मान प्रकट करना है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान केवल एक पौधारोपण कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वच्छ और हरित उत्तर प्रदेश बनाने का हमारा संकल्प है।1
- वाराणसी के सदर में एडीसीपी नृपेंद्र कुमार ने पौधरोपण किया है। इस दौरान उन्होंने लोगों को पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।1
- वाराणसी के रामनगर में गंगा रेती पर पतंग उड़ाने वाले युवकों के खिलाफ स्थानीय लोगों ने पुलिस से शिकायत की है। इस शिकायत के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए कई युवकों को हिरासत में ले लिया और उनका मांझा भी जब्त कर लिया।2
- जौनपुर जिले की केराकत तहसील के चंदवक थाना क्षेत्र में पुल के पास बीती रात करीब 9 बजे हुए एक भीषण सड़क हादसे में एक युवक की मौत हो गई, जबकि बाइक पर पीछे बैठे दूसरे युवक का पैर बुरी तरह कुचल गया। यह दुर्घटना तब हुई जब दोनों युवक वाराणसी से घर लौट रहे थे। इसी दौरान पीछे से आ रहे एक ट्रक ने उनकी होंडा शाइन बाइक को जोरदार टक्कर मार दी। हादसे में सूरज प्रजापति उर्फ पिंकू (पुत्र तुलसी प्रजापति) की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं, बाइक पर पीछे बैठे सुभाष प्रजापति (पुत्र महेंद्र प्रजापति) गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें इलाज के लिए वाराणसी के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया है। सूरज प्रजापति की मौत की खबर मिलते ही केराकत नगर में मातम छा गया। स्थानीय लोगों के अनुसार, सूरज के पिता तुलसी प्रजापति को बीते महीने पैरालिसिस (लकवा) मार गया था, जिससे उनका एक हाथ और एक पैर काम नहीं करता है। सूरज अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था और उसकी तीन बहनें हैं, जिनमें से एक बहन की शादी होना अभी बाकी है। सूरज मुंबई में रहकर फोर-व्हीलर गाड़ी चलाता था और अपने बीमार पिता को दवा दिलाने के लिए ही घर आया था। अविवाहित सूरज की इस असामयिक मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है और उसकी मां व बहनों का रो-रोकर बुरा हाल है, जो बार-बार बेहोश हो जा रही हैं।2