जौनपुर जिले की केराकत तहसील के चंदवक थाना क्षेत्र में पुल के पास बीती रात करीब 9 बजे हुए एक भीषण सड़क हादसे में एक युवक की मौत हो गई, जबकि बाइक पर पीछे बैठे दूसरे युवक का पैर बुरी तरह कुचल गया। यह दुर्घटना तब हुई जब दोनों युवक वाराणसी से घर लौट रहे थे। इसी दौरान पीछे से आ रहे एक ट्रक ने उनकी होंडा शाइन बाइक को जोरदार टक्कर मार दी। हादसे में सूरज प्रजापति उर्फ पिंकू (पुत्र तुलसी प्रजापति) की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं, बाइक पर पीछे बैठे सुभाष प्रजापति (पुत्र महेंद्र प्रजापति) गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें इलाज के लिए वाराणसी के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया है। सूरज प्रजापति की मौत की खबर मिलते ही केराकत नगर में मातम छा गया। स्थानीय लोगों के अनुसार, सूरज के पिता तुलसी प्रजापति को बीते महीने पैरालिसिस (लकवा) मार गया था, जिससे उनका एक हाथ और एक पैर काम नहीं करता है। सूरज अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था और उसकी तीन बहनें हैं, जिनमें से एक बहन की शादी होना अभी बाकी है। सूरज मुंबई में रहकर फोर-व्हीलर गाड़ी चलाता था और अपने बीमार पिता को दवा दिलाने के लिए ही घर आया था। अविवाहित सूरज की इस असामयिक मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है और उसकी मां व बहनों का रो-रोकर बुरा हाल है, जो बार-बार बेहोश हो जा रही हैं।
जौनपुर जिले की केराकत तहसील के चंदवक थाना क्षेत्र में पुल के पास बीती रात करीब 9 बजे हुए एक भीषण सड़क हादसे में एक युवक की मौत हो गई, जबकि बाइक पर पीछे बैठे दूसरे युवक का पैर बुरी तरह कुचल गया। यह दुर्घटना तब हुई जब दोनों युवक वाराणसी से घर लौट रहे थे। इसी दौरान पीछे से आ रहे एक ट्रक ने उनकी होंडा शाइन बाइक को जोरदार टक्कर मार दी। हादसे में सूरज प्रजापति उर्फ पिंकू (पुत्र तुलसी प्रजापति) की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं, बाइक पर पीछे बैठे सुभाष प्रजापति (पुत्र महेंद्र प्रजापति) गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें इलाज के लिए वाराणसी के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया
है। सूरज प्रजापति की मौत की खबर मिलते ही केराकत नगर में मातम छा गया। स्थानीय लोगों के अनुसार, सूरज के पिता तुलसी प्रजापति को बीते महीने पैरालिसिस (लकवा) मार गया था, जिससे उनका एक हाथ और एक पैर काम नहीं करता है। सूरज अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था और उसकी तीन बहनें हैं, जिनमें से एक बहन की शादी होना अभी बाकी है। सूरज मुंबई में रहकर फोर-व्हीलर गाड़ी चलाता था और अपने बीमार पिता को दवा दिलाने के लिए ही घर आया था। अविवाहित सूरज की इस असामयिक मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है और उसकी मां व बहनों का रो-रोकर बुरा हाल है, जो बार-बार बेहोश हो जा रही हैं।
- वाराणसी के जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने अपने आवास पर अपने दोनों बच्चों के साथ मिलकर वृक्षारोपण किया।1
- जौनपुर के सुरेरी थाना परिसर में शासन की महत्वाकांक्षी "एक पेड़ मां के नाम 2.0" अभियान के तहत वृहद स्तर पर वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस सराहनीय पहल के तहत सुरेरी थाना परिसर, डम्पिंग यार्ड एवं कस्बा चौकी परिसर में कुल 900 पौधे रोपित किए गए, जिससे सुरेरी थाना हरियाली की एक अनूठी मिसाल बनकर उभरा है। इस विशेष कार्यक्रम में उपजिलाधिकारी नवीन कुमार, क्षेत्राधिकारी विजय चौधरी तथा थानाध्यक्ष दिव्य प्रकाश सिंह की उपस्थिति में पौधरोपण किया गया। अधिकारियों ने पर्यावरण संरक्षण और हरियाली बढ़ाने के उद्देश्य से अधिक से अधिक पौधे लगाने तथा उनकी नियमित देखभाल करने का आह्वान किया। इस अवसर पर पुलिसकर्मियों, पत्रकारों एवं अन्य उपस्थित लोगों ने भी पौधे लगाकर पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया। वक्ताओं ने जोर देकर कहा कि वृक्ष केवल पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में ही नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए भी अत्यंत आवश्यक हैं।1
- जौनपुर के रहने वाले सोशल मीडिया के वायरल बॉय अभिषेक जाटव अब उत्तर प्रदेश के सहारनपुर (यूपी 11) के देवबंद में हैं। जो भी भाई उनसे मिलना चाहता है, वह देवबंद के पते पर जाकर उनसे मुलाकात कर सकता है। जौनपुर और दिल्ली से जुड़े अभिषेक जाटव के इस संदेश के साथ 'जय भीम' और 'जय संविधान' के नारे भी साझा किए गए हैं।1
- उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर में पूजा-अर्चना और गौ सेवा करने के बाद 'एक पेड़ मां के नाम' पौधारोपण महायज्ञ 2026 का शुभारंभ किया। इस महाअभियान के तहत उन्होंने प्रदेशवासियों को 35 करोड़ पौधे रोपने का संकल्प दिलाया है। राज्य भर में इस अभियान को जनता का जबरदस्त समर्थन मिल रहा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, सुबह 8 बजे तक उत्तर प्रदेश के 11,206 स्थलों पर एक करोड़ पौधे रोपे जा चुके थे, जो सुबह 10 बजे तक और तेजी से बढ़कर एक करोड़ 40 लाख पौधों तक पहुंच गए। इस महाअभियान में विभिन्न सरकारी विभागों, स्वयंसेवी संस्थाओं, स्कूल-कॉलेजों और आम नागरिकों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ मां के नाम पर पेड़ लगाकर प्रकृति के प्रति सम्मान प्रकट करना है। इस मौके पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान केवल एक पौधारोपण कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वच्छ और हरित उत्तर प्रदेश बनाने का हमारा संकल्प है।1
- जौनपुर के सिकरारा विकासखंड क्षेत्र के अंतर्गत रामलीला मैदान हनुमान मंदिर गुलजारगंज में 'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान के तहत वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण का संरक्षण करना और आने वाले सुरक्षित कल की मजबूत नींव रखना है। कार्यक्रम के दौरान क्षेत्र संयोजक माननीय पूर्णेन्द जी का प्रवास रहा, जहां उन्होंने उपस्थित लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करते हुए अपना मार्गदर्शन प्रदान किया। इस वृक्षारोपण कार्यक्रम में प्रांत मिलन केंद्र प्रमुख आशुतोष सिंह, जिला सह संयोजक शिवम जी, रईया के प्रधान पंकज जयसवाल, कुबेर जी, प्रखंड संयोजक जितेन्द्र अग्रहरि जी, जिला पंचायत सदस्य अंकुश यादव, आदर्श मिश्रा और रासु सिंह सहित अन्य लोग प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम के माध्यम से सभी से अपील की गई है कि वे अपनी माँ के नाम पर एक पौधा अवश्य लगाएं, उसका पूर्ण संरक्षण करें और सुरक्षित कल की मजबूत नींव रखने में अपना बहुमूल्य योगदान दें।1
- जौनपुर जिले की केराकत तहसील के चंदवक थाना क्षेत्र में पुल के पास बीती रात करीब 9 बजे हुए एक भीषण सड़क हादसे में एक युवक की मौत हो गई, जबकि बाइक पर पीछे बैठे दूसरे युवक का पैर बुरी तरह कुचल गया। यह दुर्घटना तब हुई जब दोनों युवक वाराणसी से घर लौट रहे थे। इसी दौरान पीछे से आ रहे एक ट्रक ने उनकी होंडा शाइन बाइक को जोरदार टक्कर मार दी। हादसे में सूरज प्रजापति उर्फ पिंकू (पुत्र तुलसी प्रजापति) की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं, बाइक पर पीछे बैठे सुभाष प्रजापति (पुत्र महेंद्र प्रजापति) गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें इलाज के लिए वाराणसी के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया है। सूरज प्रजापति की मौत की खबर मिलते ही केराकत नगर में मातम छा गया। स्थानीय लोगों के अनुसार, सूरज के पिता तुलसी प्रजापति को बीते महीने पैरालिसिस (लकवा) मार गया था, जिससे उनका एक हाथ और एक पैर काम नहीं करता है। सूरज अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था और उसकी तीन बहनें हैं, जिनमें से एक बहन की शादी होना अभी बाकी है। सूरज मुंबई में रहकर फोर-व्हीलर गाड़ी चलाता था और अपने बीमार पिता को दवा दिलाने के लिए ही घर आया था। अविवाहित सूरज की इस असामयिक मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है और उसकी मां व बहनों का रो-रोकर बुरा हाल है, जो बार-बार बेहोश हो जा रही हैं।2