बिकता हुआ सच और झारखंड की अनसुनी चीखें ,,,,,,,,,,,,,,, आज के दौर में अगर लोकतंत्र का सबसे बड़ा कोई शोरूम है, तो वह है मीडिया का बाजार। यहाँ हर चीज बिकती है—बहस की सुइयां, स्टूडियो का तापमान और प्राइम टाइम की चीख-पुकार। लेकिन हैरानी की बात यह है कि इस बाजार में आज भी कुछ चीजें "आउट ऑफ स्टॉक" हैं, और वह है झारखंड की अव्यवस्था पर एक अदद गंभीर चर्चा। जब तक फंडिंग नहीं, तब तक स्क्रीन पर झारखंड नहीं! जरा सोचिए, एक राज्य जिसकी नसों में खनिज संपदा दौड़ती है, जिसकी गोद में देश का पेट भरने वाले कोयले और स्टील के भंडार हैं, और जिसकी जमीन पर आदिवासियों की अस्मिता दांव पर लगी है... वहां की विफलताएं आज नेशनल न्यूज रूम्स के डस्टबिन में क्यों पड़ी हैं? इसका गणित बहुत सीधा और बाजारू है: जिधर फंडिंग, उधर हेडिंग: जिस मुद्दे पर विज्ञापनों का चौतरफा छप्परफाड़ अनुदान नहीं मिलता, उसे स्क्रीन पर जगह देना "बिजनेस के खिलाफ" माना जाता है। दलाली का सूखा: जिस खबर को चलाने से कोई "सौदा" या "राजनीतिक पैकेज" सेट नहीं होता, उस पर एंकरों के गले की नसें अचानक शांत क्यों पड़ जाती हैं? पत्रकारिता के तीन नए रंग: दरबारी, निष्पक्ष और इंफ्लूएंसर आज की इस चमकदार डिजिटल दुनिया में पत्रकारिता और विचारों के ठेकेदारों की तीन मुख्य प्रजातियां पाई जाती हैं: दरबारी पत्रकार: इनकी रीढ़ की हड्डी में ब्लूटूथ सॉफ्टवेयर इंस्टॉल होता है, जो ऊपर से आदेश मिलते ही अपने आप झुक जाती है। झारखंड में कुशासन हो, भ्रष्टाचार का नंगा नाच हो या प्रशासनिक नाकामी—इनकी नजरों में सब चकाचक रहता है। इन्हें बस इतना पता है कि सरकार की थाली में चम्मच कैसे बजाना है। "निष्पक्ष" मीडिया (ब्रांडेड न्यूट्रल): ये वो महाशय हैं जो दिनभर न्यूट्रॅलिटी का चोला पहनकर घूमते हैं, लेकिन इनका रिमोट किसी अदृश्य एसी कमरे से चलता है। झारखंड की बदहाली पर जब इनसे पूछो, तो ये बोलेंगे— "हम दोनों पक्षों की बात सुनेंगे।" अरे भाई, एक पक्ष जनता का है जो रो रहा है, और दूसरा पक्ष कुर्सी का है जो सो रहा है—इसमें बीच का रास्ता कौन सा होता है? सोशल मीडिया के आधुनिक "इंफ्लूएंसर": इनकी दुनिया रील्स और लाइक्स तक सीमित है। झारखंड के सुदूर गांवों में भुखमरी या बेरोजगारी पर वीडियो बनाने से ज्यादा रीच इन्हें किसी वायरल ट्रेंड पर ठुमके लगाने या सनसनीखेज मीम्स बनाने से मिलती है। जब तक किसी मुद्दे पर "हजार लाइक्स और ब्रांड स्पॉन्सरशिप" की गारंटी न हो, तब तक गरीबों के आंसू उनके एल्गोरिदम में फिट नहीं बैठते। सोशल मीडिया का कड़वा सच आज सोशल मीडिया वह मंच बन गया है जहां हर कोई अपनी जेब में एक अदद स्टूडियो लेकर घूम रहा है। हर कोई खुद को क्रांतिकारी समझता है, बशर्ते उसका मोबाइल कैमरा ऑन हो और पीछे कोई ट्रेंडिंग बैकग्राउंड म्यूजिक बज रहा हो। लेकिन जब बात झारखंड जैसे राज्यों की आती है, जहां की व्यवस्था की सांसे एम्बुलेंस के इंतजार में दम तोड़ रही हैं, तो सारे "डिजिटल योद्धा" अचानक मौन व्रत धारण कर लेते हैं। क्योंकि साहब, 'टीआरपी' और 'एंगेजमेंट' से पेट भरता है, और झारखंड के गांवों की बेबसी से सिर्फ धूल उड़ती है। अंत में... झारखंड की अव्यवस्था किसी पैकेज की मोहताज नहीं है, लेकिन मीडिया के बाजार ने तय कर लिया है कि बिना दाम के कोई पैगाम नहीं जाएगा। जब तक कुशासन के खिलाफ खड़े होने पर चेकबुक नहीं खुलेगी, तब तक स्टूडियो के एसी कमरों में झारखंड सिर्फ एक अदृश्य नक्शा बना रहेगा—जिसे न कोई देखना चाहता है, और न जिसके लिए किसी को कोई फंडिंग मिल रही है।
बिकता हुआ सच और झारखंड की अनसुनी चीखें ,,,,,,,,,,,,,,, आज के दौर में अगर लोकतंत्र का सबसे बड़ा कोई शोरूम है, तो वह है मीडिया का बाजार। यहाँ हर चीज बिकती है—बहस की सुइयां, स्टूडियो का तापमान और प्राइम टाइम की चीख-पुकार। लेकिन हैरानी की बात यह है कि इस बाजार में आज भी कुछ चीजें "आउट ऑफ स्टॉक" हैं, और वह है झारखंड की अव्यवस्था पर एक अदद गंभीर चर्चा। जब तक फंडिंग नहीं, तब तक स्क्रीन पर झारखंड नहीं! जरा सोचिए, एक राज्य जिसकी नसों में खनिज संपदा दौड़ती है, जिसकी गोद में देश का पेट भरने वाले कोयले और स्टील के भंडार हैं, और जिसकी जमीन पर आदिवासियों की अस्मिता दांव पर लगी है... वहां की विफलताएं आज नेशनल न्यूज रूम्स के डस्टबिन में क्यों पड़ी हैं? इसका गणित बहुत सीधा और बाजारू है: जिधर फंडिंग, उधर हेडिंग: जिस मुद्दे पर विज्ञापनों का चौतरफा छप्परफाड़ अनुदान नहीं मिलता, उसे स्क्रीन पर जगह देना "बिजनेस के खिलाफ" माना जाता है। दलाली का सूखा: जिस खबर को चलाने से कोई "सौदा" या "राजनीतिक पैकेज" सेट नहीं होता, उस पर एंकरों के गले की नसें अचानक शांत क्यों पड़ जाती हैं? पत्रकारिता के तीन नए रंग: दरबारी, निष्पक्ष और इंफ्लूएंसर आज की इस चमकदार डिजिटल दुनिया में पत्रकारिता और विचारों के ठेकेदारों की तीन मुख्य प्रजातियां पाई जाती हैं: दरबारी पत्रकार: इनकी रीढ़ की हड्डी में ब्लूटूथ सॉफ्टवेयर इंस्टॉल होता है, जो ऊपर से आदेश मिलते ही अपने आप झुक जाती है। झारखंड में कुशासन हो, भ्रष्टाचार का नंगा नाच हो या प्रशासनिक नाकामी—इनकी नजरों में सब चकाचक रहता है। इन्हें बस इतना पता है कि सरकार की थाली में चम्मच कैसे बजाना है। "निष्पक्ष" मीडिया (ब्रांडेड न्यूट्रल): ये वो महाशय हैं जो दिनभर न्यूट्रॅलिटी का चोला पहनकर घूमते हैं, लेकिन इनका रिमोट किसी अदृश्य एसी कमरे से चलता है। झारखंड की बदहाली पर जब इनसे पूछो, तो ये बोलेंगे— "हम दोनों पक्षों की बात सुनेंगे।" अरे भाई, एक पक्ष जनता का है जो रो रहा है, और दूसरा पक्ष कुर्सी का है जो सो रहा है—इसमें बीच का रास्ता कौन सा होता है? सोशल मीडिया के आधुनिक "इंफ्लूएंसर": इनकी दुनिया रील्स और लाइक्स तक सीमित है। झारखंड के सुदूर गांवों में भुखमरी या बेरोजगारी पर वीडियो बनाने से ज्यादा रीच इन्हें किसी वायरल ट्रेंड पर ठुमके लगाने या सनसनीखेज मीम्स बनाने से मिलती है। जब तक किसी मुद्दे पर "हजार लाइक्स और ब्रांड स्पॉन्सरशिप" की गारंटी न हो, तब तक गरीबों के आंसू उनके एल्गोरिदम में फिट नहीं बैठते। सोशल मीडिया का कड़वा सच आज सोशल मीडिया वह मंच बन गया है जहां हर कोई अपनी जेब में एक अदद स्टूडियो लेकर घूम रहा है। हर कोई खुद को क्रांतिकारी समझता है, बशर्ते उसका मोबाइल कैमरा ऑन हो और पीछे कोई ट्रेंडिंग बैकग्राउंड म्यूजिक बज रहा हो। लेकिन जब बात झारखंड जैसे राज्यों की आती है, जहां की व्यवस्था की सांसे एम्बुलेंस के इंतजार में दम तोड़ रही हैं, तो सारे "डिजिटल योद्धा" अचानक मौन व्रत धारण कर लेते हैं। क्योंकि साहब, 'टीआरपी' और 'एंगेजमेंट' से पेट भरता है, और झारखंड के गांवों की बेबसी से सिर्फ धूल उड़ती है। अंत में... झारखंड की अव्यवस्था किसी पैकेज की मोहताज नहीं है, लेकिन मीडिया के बाजार ने तय कर लिया है कि बिना दाम के कोई पैगाम नहीं जाएगा। जब तक कुशासन के खिलाफ खड़े होने पर चेकबुक नहीं खुलेगी, तब तक स्टूडियो के एसी कमरों में झारखंड सिर्फ एक अदृश्य नक्शा बना रहेगा—जिसे न कोई देखना चाहता है, और न जिसके लिए किसी को कोई फंडिंग मिल रही है।
- पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीना ने पहले जवानों संग दौड़कर बढ़ाया मनोबल, फिर सड़क सुरक्षा के लिए दो इंटरसेप्टर वाहनों को दिखाई हरी झंडी फिटनेस, अनुशासन और हाईटेक पुलिसिंग पर एसपी संदीप कुमार मीना का जोर संतकबीरनगर, 31 जुलाई। जनपद में अनुशासित, फिट और तकनीक से लैस पुलिसिंग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीना ने शुक्रवार को कई महत्वपूर्ण पहल कीं। एक ओर उन्होंने रिजर्व पुलिस लाइन में आयोजित साप्ताहिक शुक्रवार परेड का निरीक्षण कर स्वयं जवानों के साथ दौड़ लगाकर उनका उत्साहवर्धन किया, वहीं दूसरी ओर सड़क सुरक्षा को नई मजबूती देने के लिए दो नए दोपहिया इंटरसेप्टर वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।रिजर्व पुलिस लाइन स्थित परेड ग्राउंड में आयोजित साप्ताहिक शुक्रवार परेड की सलामी लेने के बाद पुलिस अधीक्षक ने अधिकारी एवं कर्मचारियों के टर्नआउट, अनुशासन, वर्दी की गुणवत्ता, ड्रिल तथा शारीरिक दक्षता का गहन निरीक्षण किया। उन्होंने सभी पुलिसकर्मियों को साफ-सुथरी वर्दी पहनने, अनुशासित कार्यशैली अपनाने तथा आमजन के साथ विनम्र, संवेदनशील और सम्मानजनक व्यवहार बनाए रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अनुशासन, शारीरिक दक्षता और उत्कृष्ट व्यवहार ही पुलिस की सबसे बड़ी पहचान हैं।परेड के उपरांत पुलिस अधीक्षक स्वयं जवानों के साथ दौड़ में शामिल हुए और नियमित व्यायाम व फिटनेस का संदेश दिया। साथ ही टोलीवार ड्रिल का अभ्यास कराते हुए समन्वय, एकरूपता और टीम भावना पर विशेष बल दिया। इसके बाद उन्होंने पुलिस लाइन परिसर का भ्रमण कर मेस, शस्त्रागार, डायल-112 कार्यालय, यातायात कार्यालय, आर्मी बैरक सहित विभिन्न शाखाओं का निरीक्षण किया तथा साफ-सफाई, अभिलेखों के रखरखाव और सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।इसके बाद पुलिस अधीक्षक ने पुलिस लाइन्स परिसर में उत्तर प्रदेश शासन द्वारा उपलब्ध कराए गए दो नए दोपहिया इंटरसेप्टर वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इन वाहनों को प्राप्त करने के लिए नामित यातायात पुलिसकर्मियों को सुरक्षित यात्रा एवं निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन करने के निर्देश दिए गए। एसपी संदीप कुमार मीना ने कहा कि इंटरसेप्टर वाहनों के जनपद में शामिल होने से ओवरस्पीडिंग, यातायात नियमों के उल्लंघन और सड़क दुर्घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने में मदद मिलेगी। साथ ही सड़क सुरक्षा अभियान को नई गति मिलेगी और आमजन को सुरक्षित एवं सुगम यातायात व्यवस्था उपलब्ध कराना और अधिक आसान होगा। फिटनेस, अनुशासन और आधुनिक तकनीक को एक साथ जोड़ते हुए संतकबीरनगर पुलिस की यह पहल बेहतर पुलिसिंग और जनसुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।1
- 📚 जिलाधिकारी ने वड्डूपुर स्थित डिजिटल लाइब्रेरी का किया निरीक्षण जनपद अम्बेडकर नगर की जिलाधिकारी ने ग्राम पंचायत भवन वड्डूपुर में संचालित डिजिटल लाइब्रेरी का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने वहां अध्ययन कर रही छात्राओं से बातचीत कर उनकी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, अध्ययन सामग्री तथा उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी ली। जिलाधिकारी ने छात्राओं का उत्साहवर्धन करते हुए नियमित अध्ययन, अनुशासन और लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने की प्रेरणा दी। साथ ही संबंधित अधिकारियों को डिजिटल लाइब्रेरी में सभी आवश्यक सुविधाएं सुचारु रूप से उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। शिक्षा और डिजिटल संसाधनों से सशक्त होगा युवा भविष्य। 📖💻1
- गोरखपुर में ट्रक ने ऑटो को मारी टक्कर, एक वृद्ध की मौत, परिवार के तीन सदस्य घायल गोरखपुर में ट्रक ने ऑटो को मारी टक्कर, एक वृद्ध की मौत, परिवार के तीन सदस्य घायल गोरखपुर में शुक्रवार को एक दर्दनाक सड़क हादसे में तेज रफ्तार ट्रक ने ऑटो को टक्कर मार दी। हादसे में एक वृद्ध की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक ही परिवार के तीन अन्य सदस्य गंभीर रूप से घायल हो गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, टक्कर इतनी जोरदार थी कि ऑटो बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। स्थानीय लोगों ने तुरंत घायलों को बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया और पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने वृद्ध के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। घायलों का अस्पताल में इलाज जारी है। पुलिस ने ट्रक को कब्जे में लेकर चालक की तलाश शुरू कर दी है तथा दुर्घटना के कारणों की जांच की जा रही है। प्रशासन ने लोगों से सड़क पर यातायात नियमों का पालन करने और सावधानी बरतने की अपील की है।1
- w20 क्या है 😂🤣 कॉमेडी वायरल वीडियो ! एकदम नई कॉमेडी वीडियो1
- सहजनवा बाल विकास परियोजना कार्यालय में मुख्य सेविका यशवंता देवी को भावभीनी विदाई, नम आंखों से दी गई शुभकामनाएं सहजनवा बाल विकास परियोजना कार्यालय में मुख्य सेविका यशवंता देवी को भावभीनी विदाई, नम आंखों से दी गई शुभकामनाएं सहजनवा, गोरखपुर। बाल विकास परियोजना कार्यालय सहजनवा में शुक्रवार को मुख्य सेविका यशवंता देवी के विदाई अवसर पर भावभीना विदाई समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में अधिकारियों, कर्मचारियों और आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों ने उन्हें अंगवस्त्र, पुष्पगुच्छ एवं स्मृति-चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया तथा उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सीडीपीओ ऋचा पांडेय ने कहा कि यशवंता देवी ने अपने कार्यकाल के दौरान पूरी निष्ठा, ईमानदारी और समर्पण के साथ विभागीय दायित्वों का निर्वहन किया। उनका सहज, सरल और सहयोगी स्वभाव सभी के लिए प्रेरणास्रोत रहा। उन्होंने नव नियुक्त मुख्य सेविकाओं का मार्गदर्शन कर उन्हें कार्य के प्रति दक्ष बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बताया गया कि यशवंता देवी वर्ष 2019 से बाल विकास परियोजना कार्यालय सहजनवा में मुख्य सेविका के रूप में कार्यरत थीं। इससे पूर्व उन्होंने आंगनबाड़ी कार्यकत्री के रूप में अपनी सेवाएं दीं और पदोन्नति के बाद मुख्य सेविका बनीं। अपने उत्कृष्ट कार्य, अनुशासन और मिलनसार व्यक्तित्व के कारण वे आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों एवं विभागीय कर्मचारियों के बीच काफी लोकप्रिय रहीं। विदाई समारोह के दौरान सीडीपीओ सहित समस्त कर्मचारियों और आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों ने उनके साथ बिताए गए अनुभव साझा किए। भावुक माहौल में सभी ने उनके स्वस्थ, सुखद एवं सफल भविष्य की कामना की। इस अवसर पर सीडीपीओ ऋचा पांडेय, मुख्य सेविका सरिता यादव, साधना सिंह, प्रियदर्शिनी, पूजा, संजली जायसवाल, कार्यालय सहायक शैलेंद्र, धर्मदेव यादव, बीपीएम अनिल मिश्रा, आंगनबाड़ी कार्यकत्री पुष्पा शुक्ला, कंचनपति, रीना यादव, इंदु शुक्ला, मधु सिंह, सावित्री देवी, निर्मला देवी, पद्मावती शुक्ला सहित बड़ी संख्या में अधिकारी, कर्मचारी एवं आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां उपस्थित रहीं। समारोह का समापन यशवंता देवी के सम्मान में तालियों की गड़गड़ाहट और उनके उज्ज्वल भविष्य की मंगलकामनाओं के साथ हुआ।4
- हजरतगंज का ‘प्रेस’नामा: जब क्लीनर भाई बने ‘चौथी दुनिया’ के सिपहसालार! लखनऊ के पॉश इलाके हजरतगंज की सड़क पर इन दिनों एक अजीबोगरीब ‘महाभारत’ छिड़ी हुई है। ट्रैफिक पुलिस या प्रशासन नहीं, बल्कि खुद को पत्रकार बताने वाले कुछ संभ्रांत मुंशी टाइप लोग सड़कों पर उतर आए हैं और फर्जी ‘प्रेस’ लिखे वाहनों की ऐसी हवा निकाल रहे हैं कि अच्छे-अच्छों का पसीना छूट जाए। वीडियो का नजारा कुछ ऐसा है कि मानो सड़क पर कोई ‘प्रेस कॉन्फ्रेंस’ कम और यूपीएससी का इंटरव्यू चल रहा हो। एक भाई साहब अपनी हीरो स्पलेंडर बाइक (UP32 DT 4938) पर ऐसे शान से बैठे हैं, जैसे कल ही उन्होंने ‘दैनिक भ्रष्टाचार टाइम्स’ में कोई खूंखार इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट छापी हो। तभी हमारे मुख्य अन्वेषक (जांचकर्ता) साहब प्रकट होते हैं और बड़े ही शालीनता से पूछते हैं— "भैया, काम क्या करते हो?" भाई साहब थोड़ा झिझकते हुए कहते हैं— "जी, क्लीनर का..." बस, फिर क्या था! हमारे जर्नलिज्म के ठेकेदार भड़क उठे— "क्लीनर का काम करते हो और आगे ‘प्रेस’ लिखकर घूमते हो? बर्फ बेचने वाले भी अब प्रेस लिखेंगे क्या?!" अब जरा सोचिए! बेचारी बर्फ और क्लीनर की सफाई का इस महान प्रेस की स्वतंत्रता से क्या लेना-देना? लेकिन जनाब मानने को तैयार कहां। वे तो मौके पर ही चालान काटने और तुरंत बाइक से ‘प्रेस’ का स्टीकर खुरचवाने पर अड़े हैं। बेचारे क्लीनर भाई हाथ जोड़कर, गिड़गिड़ाकर ‘सॉरी-सॉरी’ बोल रहे हैं, मानों उन्होंने लखनऊ की जगह सीधे अमेरिका के व्हाइट हाउस में सेंध लगा दी हो। आलम यह है कि वाहन पर ‘प्रेस’ लिखा होना अब लखनऊ में किसी आर्म्स लाइसेंस से कम खतरनाक नहीं रह गया है। ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन हो न हो, लेकिन अगर गाड़ी पर गलती से भी ‘प्रेस’ चिपक गया, तो मुंशी जी आकर आपकी गाड़ी का ऐसा ‘पोस्टमॉर्टम’ करेंगे कि आप जीवनभर भूल जाएंगे कि प्रेस आखिर होता क्या बला है! खैर, अंततः जनता यही सोच रही है कि भाईसाहब असली पत्रकार कौन हैं और नकली कौन—यह तय करने का ठेका आखिर इन जनाब को किसने दिया? तब तक के लिए हजरतगंज की सड़क पर यह ‘प्रेस प्रेम’ यूं ही बपौती बना घूम रहा है!1
- 🚩 कांवड़ यात्रा को लेकर जनपद अम्बेडकर नगर में तैयारियां पूरी – जिलाधिकारी ईशा प्रिया श्रावण मास एवं कांवड़ यात्रा-2026 को सकुशल, सुरक्षित और व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए जिला प्रशासन ने सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली हैं। जिलाधिकारी ईशा प्रिया एवं पुलिस अधीक्षक प्राची सिंह ने कांवड़ मार्गों, प्रमुख शिवालयों और घाटों का स्थलीय निरीक्षण कर सुरक्षा, साफ-सफाई, पेयजल, प्रकाश व्यवस्था, बैरिकेडिंग, यातायात प्रबंधन तथा चिकित्सा सुविधाओं का जायजा लिया। जनपद में 78 सेक्टर और 9 विशेष स्टैटिक सेक्टर बनाए गए हैं। प्रत्येक सेक्टर में मजिस्ट्रेट की तैनाती, कंट्रोल रूम की स्थापना, घाटों पर गोताखोर, सीसीटीवी निगरानी, एम्बुलेंस, मेडिकल टीम तथा कांवड़ियों के लिए सभी मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित की गई हैं। प्रशासन ने संबंधित विभागों को सभी व्यवस्थाएं समयबद्ध ढंग से बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। हर हर महादेव! 🚩🔱1
- जिला गोरखपुर लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) का प्रतिनिधिमंडल पीड़ित परिवार से मिला** लोक जनशक्ति पार्टी **जिला गोरखपुर लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) का प्रतिनिधिमंडल पीड़ित परिवार से मिला** लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं भारत सरकार के केंद्रीय मंत्री परम आदरणीय श्री चिराग पासवान जी के निर्देशानुसार तथा उत्तर प्रदेश प्रभारी सह सांसद आदरणीय श्री अरुण भारती एवं उत्तर प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष आदरणीय श्री राजीव पासवान जी के निर्देशानुसार पार्टी का एक प्रतिनिधिमंडल 10 वर्षीय पीड़ित बच्ची के परिजनों से मिलने पहुँचा। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व प्रदेश उपाध्यक्ष **सौरभ त्रिपाठी** ने किया। प्रतिनिधिमंडल में जिला अध्यक्ष **हिमांशु सिंह**, महानगर वरिष्ठ उपाध्यक्ष **अनुराग तिवारी**, जिला महासचिव **विभास कुमार पासवान**, ब्लॉक अध्यक्ष सहजनवा **भानु प्रताप मिश्रा**, **अनिल साहनी**, **युवराज**, **विशाल**, **अजय दुबे**, **अतुलेश्वर पांडेय** तथा **श्रवण**संदीप सिंह सहित अन्य पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे। प्रतिनिधिमंडल ने पीड़ित परिवार को सांत्वना देते हुए आश्वासन दिया कि लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) न्याय की इस लड़ाई में उनके साथ मजबूती से खड़ी है। पार्टी ने मांग की कि पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा, सुरक्षा तथा हर संभव सरकारी सहायता तत्काल उपलब्ध कराई जाए। साथ ही, मामले की निष्पक्ष एवं त्वरित जांच कर दोषी के विरुद्ध कठोरतम कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।2
- गोरखपुर ब्रेकिंग न्यूज़ गोरखपुर दस साल की बच्ची के साथ डायल 112 के सिपाही अभिषेक यादव द्वारा हत्या किए जाने के बाद,मेडिकल परीक्षण कराने गए जिला अस्पताल में जनता में दिखा गुस्सा। गुस्साई भीड़ ने आरोपी को मारने के लिए दौड़ाया। पुलिस ने किया बीच बचाव गोरखपुर ब्रेकिंग न्यूज़ गोरखपुर दस साल की बच्ची के साथ डायल 112 के सिपाही अभिषेक यादव द्वारा हत्या किए जाने के बाद,मेडिकल परीक्षण कराने गए जिला अस्पताल में जनता में दिखा गुस्सा। गुस्साई भीड़ ने आरोपी को मारने के लिए दौड़ाया। पुलिस ने किया बीच बचाव #खबरसंदेश #ViralNews #TrendingNow #HindiNews #NewsUpdate #Breaking #Gorakhpur #GorakhpurNews #BreakingNews #UPNews #CrimeNews #Dial112 #UPPolice #GorakhpurPolice #UPGovt1