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gram pradhan ki laparvahi ki vajah se nahin Ban Pai sadak Jo ke gram pradhan ki laparvahi se Aaj Tak nahin Ban Pai 15 sal ke karyakal mein aisa hai gaon ka Hal Adhikari bhi hai najar band Karen hue yah sadak Hai Khai khedi kamalpur ki
Nahid Malik
gram pradhan ki laparvahi ki vajah se nahin Ban Pai sadak Jo ke gram pradhan ki laparvahi se Aaj Tak nahin Ban Pai 15 sal ke karyakal mein aisa hai gaon ka Hal Adhikari bhi hai najar band Karen hue yah sadak Hai Khai khedi kamalpur ki
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- कोटद्वार: श्री गुरु गोरखनाथ टैक्सी-मैक्सी कल्याण समिति में हर्षोल्लास से मनाया गया 80वां स्वतंत्रता दिवस* कोटद्वार: श्री गुरु गोरखनाथ टैक्सी-मैक्सी कल्याण समिति में हर्षोल्लास से मनाया गया 80वां स्वतंत्रता दिवस* --- *कोटद्वार (पौड़ी गढ़वाल)।* देशभर के साथ ही *15 अगस्त 2026* कोटद्वार में भी 80वां स्वतंत्रता दिवस पूरे उत्साह और देशभक्ति के साथ मनाया गया। *श्री गुरु गोरखनाथ टैक्सी-मैक्सी कल्याण समिति (रजि0)* के कार्यालय में भी स्वतंत्रता दिवस का कार्यक्रम आयोजित किया गया। समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों ने कार्यालय में ध्वजारोहण कर राष्ट्रगान गाया और शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर समिति के *संरक्षक सुमन कोटनाला, अध्यक्ष महेन्द्र सिंह नेगी और सचिव मुकेश भट्ट* सहित सभी पदाधिकारी और टैक्सी-मैक्सी चालक उपस्थित रहे। सभी ने हाथों में तिरंगा लेकर "भारत माता की जय" और "वंदे मातरम" के नारे लगाए। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अध्यक्ष महेन्द्र सिंह नेगी ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस हमें देश की एकता, अखंडता और भाईचारे का संदेश देता है। उन्होंने सभी चालकों से यातायात नियमों का पालन करने और देशसेवा में अपना योगदान देने की अपील की। कार्यालय को तिरंगे के रंगों से सजाया गया था। कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित लोगों में मिष्ठान वितरित किया गया।4
- gram pradhan ki laparvahi ki vajah se nahin Ban Pai sadak Jo ke gram pradhan ki laparvahi se Aaj Tak nahin Ban Pai 15 sal ke karyakal mein aisa hai gaon ka Hal Adhikari bhi hai najar band Karen hue yah sadak Hai Khai khedi kamalpur ki1
- रामपुरहाट,पश्चिम बंगाल:पूर्व डिप्टी स्पीकर आशीष बनर्जी का निधन, TMC कार्यालय में मिला शव पश्चिम बंगाल विधानसभा के पूर्व डिप्टी स्पीकर और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ नेता आशीष बनर्जी का रविवार सुबह रामपुरहाट स्थित पार्टी कार्यालय में शव मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई। पुलिस के अनुसार, उनका शव कार्यालय में फंदे से लटका हुआ मिला। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस ने घटनास्थल से एक सुसाइड नोट बरामद किए जाने की भी जानकारी दी है। हालांकि, नोट में क्या लिखा है और उनकी मौत के पीछे वास्तविक वजह क्या थी, इसकी आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। आशीष बनर्जी रामपुरहाट विधानसभा क्षेत्र से पांच बार विधायक रह चुके थे। वह तृणमूल कांग्रेस के प्रमुख नेताओं में शामिल थे और पार्टी के भीतर लंबे समय तक महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाते रहे। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार में आशीष बनर्जी ने डिप्टी स्पीकर के अलावा शिक्षा एवं कृषि मंत्री की जिम्मेदारी भी संभाली थी। पश्चिम बंगाल की राजनीति में उनका लंबा अनुभव रहा और वह पार्टी के संगठनात्मक कामकाज में भी सक्रिय रहे। इस साल की शुरुआत में हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में आशीष बनर्जी को रामपुरहाट सीट पर भाजपा प्रत्याशी ध्रुबा साहा के हाथों हार का सामना करना पड़ा था। चुनाव में हार के बाद भी वह स्थानीय स्तर पर तृणमूल कांग्रेस की राजनीति से जुड़े हुए थे। आशीष बनर्जी के निधन की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में TMC कार्यकर्ता और समर्थक पार्टी कार्यालय के बाहर पहुंच गए। घटना के बाद इलाके में शोक का माहौल है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट तथा अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पुलिस की जांच जारी है। मौत की परिस्थितियों और सुसाइड नोट की सत्यता से जुड़े सभी पहलुओं की जांच के बाद ही मामले की पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी।1
- भारत देश के तिरंगे के सम्मान को कम नही होने दिया पत्रकार ने जिला बिजनोर क्षेत्र स्योहारा से पत्रकार अर्शी जुबेर ने सम्मान वाला कार्य किया1
- लकसर में किसान यूनियन तोमर ने हजारों किसानों के साथ निकाली तिरंगा यात्रा किसान यूनियन तोमर ने निकाली तिरंगा यात्रा हजारों कि1
- गंगनहर के तेज बहाव में फंसे व्यक्ति की SDRF ने बचाई जान गंगनहर के तेज बहाव में फंसे व्यक्ति की SDRF ने बचाई जान1
- 🇮🇳 गल्लाखेड़ी में मुकंदी सिंह इंटर कॉलेज से निकाली गई भव्य तिरंगा यात्रा, देशभक्ति के नारों से गूंजा गांव 🇮🇳 #स्वतंत्रतादिवस #15अगस्त #तिरंगायात्रा #गल्लाखेड़ी #मुकंदीसिंहइंटरकॉलेज #देशभक्ति #तिरंगा #भारत_माता_की_जय #IndependenceDay #ViralNews 🇮🇳 गल्लाखेड़ी में मुकंदी सिंह इंटर कॉलेज से निकाली गई भव्य तिरंगा यात्रा, देशभक्ति के नारों से गूंजा गांव 🇮🇳 #स्वतंत्रतादिवस #15अगस्त #तिरंगायात्रा #गल्लाखेड़ी #मुकंदीसिंहइंटरकॉलेज #देशभक्ति #तिरंगा #भारत_माता_की_जय #IndependenceDay #ViralNews1
- दो किलोमीटर की सड़क, गिट्टी सिर्फ तीन सौ मीटर! बाकी हिस्से में डामरीकरण की तैयारी, भिलोर में निर्माण कार्य ने खड़े किए बड़े सवाल स्वीकृत धनराशि से लेकर तकनीकी मानक तक सवालों के घेरे में—ग्रामीण बोले, पहले पूरी सड़क की गिट्टी बिछे, फिर हो डामरीकरण; जिम्मेदार विभाग बताए आखिर बाकी सड़क का हिसाब क्या है?* भिलोर/बारा, प्रयागराज। लालापुर से प्रतापपुर मार्ग से भिलोर गांव की ओर जाने वाली करीब दो किलोमीटर लंबी सड़क के निर्माण को लेकर मौके की स्थिति ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शनिवार को मीडिया की पड़ताल में जो तस्वीर सामने आई, उसके मुताबिक करीब दो किलोमीटर की सड़क में आधार तैयार करने के लिए बड़ी गिट्टी का कार्य महज लगभग तीन सौ मीटर के आसपास ही दिखाई दे रहा है, जबकि शेष हिस्से में पूरी सड़क पर एकसमान गिट्टी बिछी नजर नहीं आती। कहीं गड्ढों में थोड़ी-थोड़ी गिट्टी डाली गई है तो कहीं पुरानी डामर की परत को उखाड़कर उसी सतह पर नया डामरीकरण कराने की तैयारी दिखाई दे रही है। यही अंतर अब सड़क निर्माण की गुणवत्ता से आगे बढ़कर स्वीकृत प्राक्कलन, कार्य की वास्तविक मात्रा और सरकारी धनराशि के इस्तेमाल पर सवाल खड़ा कर रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि करीब दो किलोमीटर सड़क का निर्माण स्वीकृत है और निर्माण में गिट्टी की निर्धारित परत का प्रावधान है तो फिर गिट्टी का काम केवल लगभग तीन सौ मीटर तक सीमित क्यों दिखाई दे रहा है? बाकी लगभग एक किलोमीटर सात सौ मीटर सड़क के लिए निर्धारित निर्माण प्रक्रिया कहां है? क्या उस हिस्से में पहले से मौजूद सड़क की सतह को ही आधार मानकर सीधे डामरीकरण कराया जाएगा? यदि ऐसा है तो क्या यह तकनीकी रूप से स्वीकृत है? और यदि स्वीकृति में पूरी सड़क को निर्धारित स्तर तक तैयार करने का प्रावधान है तो फिर मौके पर उसका पालन क्यों नहीं दिख रहा? ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने ठेकेदार से स्पष्ट रूप से कहा कि पहले पूरी सड़क पर आवश्यक गिट्टी डलवाई जाए और उसके बाद डामरीकरण कराया जाए, लेकिन उनकी आपत्ति के बावजूद निर्माण कार्य आगे बढ़ाया जा रहा है। सबसे बड़ा सवाल उस सूचना-पट्ट का भी है, जिससे जनता को यह पता चल सके कि सड़क किस योजना से स्वीकृत हुई, इसकी कुल लागत कितनी है, लंबाई कितनी स्वीकृत है, कार्यदायी संस्था कौन है, ठेकेदार कौन है, कार्य प्रारंभ और पूर्ण होने की तिथि क्या है तथा इसकी निगरानी किस तकनीकी अधिकारी के जिम्मे है। मौके पर यदि ऐसा बोर्ड नहीं है तो इसकी पारदर्शिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। ग्रामीणों के अनुसार सड़क फरवरी महीने में स्वीकृत होने की बात सामने आई थी, लेकिन लगभग छह महीने तक निर्माण शुरू नहीं हुआ। अब जब काम शुरू हुआ है तो करीब दो किलोमीटर की सड़क में महज लगभग तीन सौ मीटर हिस्से में गिट्टी बिछाने और शेष हिस्से में पुराने आधार पर काम बढ़ाने की स्थिति ने ग्रामीणों की नाराजगी बढ़ा दी है। ऐसे में अब सवाल केवल ठेकेदार की कार्यशैली का नहीं, बल्कि कार्यदायी संस्था, संबंधित अवर अभियंता, सहायक अभियंता, अधिशासी अभियंता और निगरानी करने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी का भी है। यदि कार्य की माप पुस्तिका में पूरी सड़क का काम दर्ज होता है तो मौके पर उसकी भौतिक स्थिति से मिलान होना चाहिए। यदि अभी भुगतान नहीं हुआ है तो भुगतान से पहले तकनीकी जांच और माप सत्यापन होना चाहिए, और यदि भुगतान की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है तो स्वीकृत प्राक्कलन के प्रत्येक मद का मौके पर भौतिक सत्यापन कराया जाना चाहिए। इस मामले में जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा, मुख्य विकास अधिकारी हर्षिका सिंह, उप जिलाधिकारी बारा, तहसीलदार बारा, संबंधित खंड विकास अधिकारी तथा संबंधित निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता और तकनीकी अधिकारियों के स्तर से स्थलीय जांच कराया जाना आवश्यक है। जांच में सड़क की वास्तविक लंबाई, चौड़ाई, गिट्टी की मोटाई, गिट्टी की मात्रा, डामर की मोटाई, प्रयुक्त सामग्री, स्वीकृत लागत, कार्य की माप पुस्तिका और मौके पर हुए निर्माण का मिलान कराया जाए तो स्थिति स्वतः स्पष्ट हो सकती है। यदि दो किलोमीटर की सड़क के लिए पूरा बजट और पूरा निर्माण स्वीकृत है तो लगभग तीन सौ मीटर में ही आधार सामग्री का काम दिखाई देने और बाकी हिस्से में सीधे डामरीकरण की तैयारी का कारण क्या है—इसका जवाब अब ग्रामीण ही नहीं, संबंधित विभाग से भी मांगा जा रहा है। यदि निर्माण नियम और स्वीकृत मानक के अनुसार हो रहा है तो विभाग को दस्तावेजों के साथ स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, लेकिन यदि स्वीकृत कार्य और जमीन पर हुए कार्य में अंतर पाया जाता है तो जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई भी होनी चाहिए। भिलोर की सड़क अब सिर्फ आवागमन का रास्ता नहीं रह गई है, बल्कि यह सवाल बन गई है कि सरकारी निर्माण में कागज पर दर्ज मात्रा और जमीन पर दिखाई देने वाले काम के बीच आखिर कितना फासला है?1