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77 वे गणतंत्र दिवस पर अवधूत भगवान राम विद्यालय के बच्चों को किया गया पुरस्कृत
संजय श्रीवास्तव ( ब्यूरो चीफ)
77 वे गणतंत्र दिवस पर अवधूत भगवान राम विद्यालय के बच्चों को किया गया पुरस्कृत
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- Post by Men of jharkhand1
- लापरवाही की भेंट चढ़ा तिरंगा! डंडई पशुपालन विभाग में ध्वज फहराने में गंभीर चूक हेमंत कुमार की रिपोर्ट डंडई प्रखंड के पशुपालन विभाग कार्यालय में राष्ट्रीय पर्व के अवसर पर तिरंगा फहराने को लेकर गंभीर लापरवाही सामने आई। ध्वज पहले ऊपर लटका हुआ रहा, फिर उसे उतारकर दोबारा फहराया गया। यह घटना न केवल विभागीय उदासीनता को दर्शाती है, बल्कि राष्ट्रीय सम्मान के साथ खिलवाड़ भी मानी जा रही है। मंगलवार सुबह 10:00 बजे स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों के अनुसार, इस पूरे मामले पर BDO देवलाल करमाली और CO जयशंकर पाठक ने कोई तत्काल संज्ञान नहीं लिया, जिससे प्रशासनिक संवेदनशीलता पर सवाल उठ रहे हैं। भारतीय ध्वज संहिता के अनुसार तिरंगे को पूरे सम्मान और तय प्रक्रिया के तहत फहराना अनिवार्य है, लेकिन यहां नियमों की अनदेखी साफ दिखी। घटना को लेकर जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों में नाराज़गी है। उनका कहना है कि यह चूक केवल एक कार्यालय तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़े करती है। मौके पर मुखिया धनवंती देवी, मुखिया प्रतिनिधि महेश्वर राम, विधायक प्रतिनिधि जितेंद्र ठाकुर, जिला परिषद सदस्य मोहन पासवान, नंदगोपाल सिंह, BDC प्रतिनिधि मिथलेश कुमार, शिला देवी, JMM प्रखंड प्रतिनिधि नकछेदी कांत राम, प्रखंड अध्यक्ष तेज बहादुर सिंह समेत बड़ी संख्या में लोग और थाना प्रभारी अनिमेष शांतिकारी दल-बल के साथ मौजूद थे।1
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- https://youtube.com/shorts/8LrXy7eZxfA?si=nufEVTAaktnBVL5e1
- RIMS RANCHI: आज रांची स्थित रिम्स अस्पताल के डी-2 वार्ड में एक अत्यंत दर्दनाक और भावुक कर देने वाली स्थिति देखने को मिली। एक गरीब मुस्लिम महिला, जिनकी हालत बेहद नाजुक थी, उन्हें गंभीर अवस्था में भर्ती तो किया गया था, लेकिन लंबे समय तक बेड उपलब्ध नहीं कराया जा रहा था।महिला की बिगड़ती हालत देखकर उनके भाई मुझसे मिले और रोते हुए बताया कि यदि आज इलाज नहीं हुआ तो उनकी बहन शायद कल तक जीवित नहीं बच पाएगी। यह सुनकर मैं भीतर से बेहद आहत और भावुक हो गया। ऐसी स्थिति में चुप रहना मेरे लिए संभव नहीं था।मैंने तुरंत नर्सिंग स्टाफ से बात की और मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए बेड उपलब्ध कराने की जोरदार मांग की। इस दौरान बहस भी हुई, लेकिन मैंने साफ शब्दों में कहा कि इलाज और जीवन से बड़ा कोई नियम नहीं होता। इसके बाद वहां मौजूद वार्ड इंचार्ज को भी पूरी स्थिति समझाई और मानवता के आधार पर तत्काल निर्णय लेने को कहा।अंततः उस गरीब महिला को बेड उपलब्ध कराया गया और इलाज शुरू हो सका। आज यह स्पष्ट हुआ कि इंसान की जान के आगे न धर्म होता है, न जाति, न अमीरी-गरीबी—सिर्फ मानवता होती है।मैं मानता हूँ कि सरकारी अस्पतालों में संसाधनों की कमी एक चुनौती है, लेकिन ऐसी परिस्थितियों में संवेदनशीलता और इंसानियत सबसे पहले होनी चाहिए। एक जनप्रतिनिधि और समाजसेवी होने के नाते, जरूरतमंद की आवाज़ बनना मेरा कर्तव्य है, और मैं आगे भी हर पीड़ित के लिए इसी तरह खड़ा रहूँगा।1