सासाराम में जिला प्रशासन और नगर निगम ने शहर को अतिक्रमण मुक्त बनाने तथा फुटपाथी दुकानदारों को व्यवस्थित स्थान उपलब्ध कराने के उद्देश्य से पुराने बस पड़ाव परिसर में एक वेंडर जोन का निर्माण कराया था। इस परियोजना पर लाखों रुपये खर्च किए गए थे और इसे शहर के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया गया था। हालांकि, शुरुआती दिनों में उत्साह के बावजूद, यह योजना कुछ ही समय बाद लगभग असफल साबित हो गई है। प्रशासन ने शुरुआत में शहर के विभिन्न चौक-चौराहों और सड़कों पर दुकान लगाने वाले ठेला, खोमचा और सब्जी विक्रेताओं को इस वेंडर जोन में स्थानांतरित किया था। लेकिन दुकानदारों का कहना है कि वेंडर जोन में ग्राहकों की आवाजाही बेहद कम है, क्योंकि लोगों की खरीदारी की आदतें और बाजार की गतिविधियां अभी भी शहर के मुख्य क्षेत्रों तक ही सीमित हैं। इससे उनकी बिक्री बुरी तरह प्रभावित हुई है, जिससे उनकी रोजी-रोटी पर संकट खड़ा हो गया है। दुकानदारों का आरोप है कि वेंडर जोन का चयन व्यावहारिक नहीं था, क्योंकि यह शहर के मुख्य बाजार और भीड़भाड़ वाले इलाकों से दूर है, जिसके कारण ग्राहक वहां पहुंचने से बचते हैं। नतीजतन, अधिकांश दुकानदार धीरे-धीरे अपने पुराने स्थानों पर लौट गए और फिर से प्रमुख सड़कों एवं चौक-चौराहों पर दुकानें सजाने लगे, जिससे शहर में अतिक्रमण की समस्या एक बार फिर बढ़ गई है। वर्तमान स्थिति यह है कि पुराने बस पड़ाव स्थित वेंडर जोन लगभग खाली पड़ा हुआ है, और जिस उद्देश्य से इसका निर्माण किया गया था, वह पूरा नहीं हो सका। स्थानीय लोगों का मानना है कि योजना बनाते समय जमीनी हकीकत और दुकानदारों की जरूरतों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया। अब वे प्रशासन से इस समस्या का स्थायी और व्यावहारिक समाधान निकालने की मांग कर रहे हैं, ताकि सरकारी धन का सदुपयोग हो सके और फुटपाथी दुकानदारों को भी रोजगार के लिए उपयुक्त स्थान मिल सके। इस संबंध में, सासाराम नगर निगम के नगर आयुक्त विकास कुमार ने बताया कि नगर निगम लगातार सड़क जाम की समस्या और शहर को अतिक्रमण मुक्त बनाने को लेकर सक्रिय है, और सासाराम नगर वासियों को जल्द ही जाम की समस्या से निजात मिलेगी।
सासाराम में जिला प्रशासन और नगर निगम ने शहर को अतिक्रमण मुक्त बनाने तथा फुटपाथी दुकानदारों को व्यवस्थित स्थान उपलब्ध कराने के उद्देश्य से पुराने बस पड़ाव परिसर में एक वेंडर जोन का निर्माण कराया था। इस परियोजना पर लाखों रुपये खर्च किए गए थे और इसे शहर के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया गया था। हालांकि, शुरुआती दिनों में उत्साह के बावजूद, यह योजना कुछ ही समय बाद लगभग असफल साबित हो गई है। प्रशासन ने शुरुआत में शहर के विभिन्न चौक-चौराहों और सड़कों पर दुकान लगाने वाले ठेला, खोमचा और सब्जी विक्रेताओं को इस वेंडर जोन में स्थानांतरित किया था। लेकिन दुकानदारों का कहना है कि वेंडर जोन में ग्राहकों की आवाजाही बेहद कम है, क्योंकि लोगों की खरीदारी की आदतें और बाजार की गतिविधियां अभी भी शहर के मुख्य क्षेत्रों तक ही सीमित हैं। इससे उनकी बिक्री बुरी तरह प्रभावित हुई है, जिससे उनकी रोजी-रोटी पर संकट खड़ा हो गया है। दुकानदारों का आरोप है कि वेंडर जोन का चयन व्यावहारिक नहीं था, क्योंकि यह शहर के मुख्य बाजार और भीड़भाड़ वाले इलाकों से दूर है, जिसके कारण ग्राहक वहां पहुंचने से बचते हैं। नतीजतन, अधिकांश दुकानदार धीरे-धीरे अपने पुराने स्थानों पर लौट गए और फिर से प्रमुख सड़कों एवं चौक-चौराहों पर दुकानें सजाने लगे, जिससे शहर में अतिक्रमण की समस्या एक बार फिर बढ़ गई है। वर्तमान स्थिति यह है कि पुराने बस पड़ाव स्थित वेंडर जोन लगभग खाली पड़ा हुआ है, और जिस उद्देश्य से इसका निर्माण किया गया था, वह पूरा नहीं हो सका। स्थानीय लोगों का मानना है कि योजना बनाते समय जमीनी हकीकत और दुकानदारों की जरूरतों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया। अब वे प्रशासन से इस समस्या का स्थायी और व्यावहारिक समाधान निकालने की मांग कर रहे हैं, ताकि सरकारी धन का सदुपयोग हो सके और फुटपाथी दुकानदारों को भी रोजगार के लिए उपयुक्त स्थान मिल सके। इस संबंध में, सासाराम नगर निगम के नगर आयुक्त विकास कुमार ने बताया कि नगर निगम लगातार सड़क जाम की समस्या और शहर को अतिक्रमण मुक्त बनाने को लेकर सक्रिय है, और सासाराम नगर वासियों को जल्द ही जाम की समस्या से निजात मिलेगी।
- रोहतास जिले के करगहर थाना क्षेत्र के बालापुर गाँव में एक महिला ने दहेज प्रताड़ना और घरेलू हिंसा का आरोप लगाते हुए पुलिस प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई है। पीड़िता दुर्गा देवी ने एक वीडियो जारी कर अपनी आपबीती सुनाई है, जिसमें उसने बताया कि शादी के बाद से ही उसे दहेज के लिए लगातार प्रताड़ित किया जा रहा है। दुर्गा देवी के अनुसार, उसकी सास और ननद उस पर लगातार मारपीट करती हैं और उसे मानसिक रूप से उत्पीड़ित करती हैं। हालांकि, उसने अपने पति के व्यवहार को उसके प्रति ठीक बताया है। दहेज प्रताड़ना से परेशान यह महिला इस वक्त अस्पताल में भर्ती है। महिला ने बताया कि इस मामले को सुलझाने के लिए कई बार ग्रामीणों और सामाजिक लोगों की मौजूदगी में पंचायतें भी हुईं, लेकिन इसके बावजूद स्थिति में कोई सुधार नहीं आया और प्रताड़ना जारी रही। दुर्गा देवी ने प्रशासन से इस मामले की निष्पक्ष जाँच कराने और दोषियों के विरुद्ध उचित कानूनी कार्रवाई करने की पुरज़ोर मांग की है। इस मामले में अभी तक पुलिस का पक्ष सामने नहीं आ सका है और पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जाँच के बाद ही मामले की सत्यता की पुष्टि हो पाएगी।1
- अभिषेक कुमार eMedia ने दो महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं। उनका पहला प्रश्न 'गुड मॉर्निंग' अभिवादन की शुरुआत से संबंधित है, जिसमें यह जानकारी माँगी गई है कि इस प्रथा का आरंभ कब हुआ। वहीं, दूसरा प्रश्न इस बात पर केंद्रित है कि क्या 'गुड मॉर्निंग' के स्थान पर 'जय श्री राम' कहना उचित या स्वीकार्य है।1
- कुछ ही सेकंड के भीतर मौसम में आए एक अविश्वसनीय और अचानक बदलाव को दर्शाते हुए, एक वीडियो पोस्ट किया गया है। इस वीडियो में ऐसा भीषण आंधी-तूफान दिखाया गया है कि उसकी तीव्रता का वर्णन करना मुश्किल है। यह स्थिति उस पिछली गर्मी के ठीक विपरीत है, जब कुछ देर पहले एक अन्य वीडियो में बताया गया था कि अत्यधिक गर्मी के कारण एक भी पेड़ की पत्तियाँ हिल नहीं रही थीं। अब दर्शक यह जानने को उत्सुक हैं कि इस तेज तूफान के साथ बारिश भी आएगी या यह सिर्फ आकर ही चला जाएगा।1
- Post by Sharda Singh1
- न्याय व्यवस्था पर गहरा असंतोष व्यक्त करते हुए एक तीखी टिप्पणी की गई है, जिसमें मौजूदा 'सिस्टम' पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। बताया गया है कि एक बेगुनाह व्यक्ति ने 20 साल तक जेल में रहकर अपनी जवानी, परिवार और पूरा जीवन गँवा दिया, जिसे अंततः अदालत ने निर्दोष करार दिया और कहा कि उसका कोई गुनाह नहीं था। वहीं, दूसरी तरफ एक ऐसा शख्स है जिसका गुनाह साबित हो चुका है और जिसे बलात्कार के एक मामले में सजा भी मिली है। इसके बावजूद, वह जेल से बाहर आकर शान से काफिला निकालता है, दरबार लगाता है और अपने समर्थकों से जयकारे लगवाता है। इस विरोधाभासी स्थिति पर तीखी टिप्पणी करते हुए पूछा गया है कि क्या कानून गरीब के लिए लोहे की जंजीर है और रसूखदार के लिए रबर की तरह काम करता है। इस पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई है कि यदि यही न्याय है, तो आम आदमी अदालत पर कैसे भरोसा कर पाएगा। देश भर से यह सवाल पूछा जा रहा है कि क्या इंसाफ सिर्फ ताकतवरों की जागीर बन गया है, जो न्याय प्रणाली में व्याप्त विसंगतियों और असमानता को उजागर करता है। यह टिप्पणी न्याय की सच्ची भावना और सार्वजनिक विश्वास की बहाली की मांग करती है।1
- प्रभारी मंत्री मो. ज़मा खान ने आगामी संभावित बाढ़ और सुखाड़-2026 की तैयारियों की समीक्षा के लिए आयोजित एक बैठक की अध्यक्षता की।1
- रोहतास जिले और सासाराम शहर में पिछले कई दिनों से जारी भीषण गर्मी, लू और तेज़ धूप ने जनजीवन को पूरी तरह प्रभावित कर रखा था, जहाँ तापमान लगातार 45 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना हुआ था, जिससे लोगों का घरों से निकलना मुश्किल हो गया था। हालाँकि, मंगलवार शाम को मौसम ने अचानक करवट ली, जिससे लोगों को भारी राहत मिली। शाम करीब 4 बजे के बाद सासाराम शहर और आसपास के इलाकों में तेज़ आंधी के साथ बारिश शुरू हो गई। देखते ही देखते आसमान में काले बादल छा गए और दिन में ही अंधेरा छा गया, जबकि तेज़ हवाओं से पेड़ों की डालियाँ झूमती नज़र आईं और सड़कों पर चल रहे लोगों ने सुरक्षित स्थानों पर शरण ली। बारिश शुरू होते ही, भीषण गर्मी और उमस से परेशान लोगों ने राहत की सांस ली, क्योंकि पिछले कई दिनों से लू के कारण बाज़ारों में सन्नाटा पसरा था और दोपहर में सड़कों पर आवाजाही बहुत कम हो गई थी। बारिश के बाद मौसम सुहावना हो गया और तापमान में भी गिरावट दर्ज की गई। मौसम में आए इस बदलाव से किसानों और आम लोगों के चेहरों पर खुशी देखी गई। बच्चों ने बारिश का आनंद लिया, तो वहीं दुकानदारों और राहगीरों ने भी गर्मी से मिली राहत पर संतोष जताया। हालांकि, तेज़ आंधी के कारण कुछ समय के लिए लोगों को परेशानी भी हुई, लेकिन बारिश ने मौसम को पूरी तरह बदल दिया। फ़िलहाल, सासाराम और रोहतास जिले के लोगों को भीषण गर्मी और लू से बड़ी राहत मिली है। मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले दिनों में भी मौसम में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।3
- बक्सर जिले में इस समय अत्यधिक गर्मी का माहौल बना हुआ है, जहाँ तापमान बहुत ज्यादा है और गर्मी थमने का नाम नहीं ले रही है। आज का मौसम यह संकेत दे रहा है कि पूरे क्षेत्र में आंधी-तूफान आने वाला है और यह तुरंत आ सकता है, जिससे हर जगह मौसम खराब बना हुआ है।1
- eMedia के अभिषेक कुमार ने पटना के एक अस्पताल में चल रही कथित गतिविधियों पर सवाल उठाया है। उनकी रिपोर्ट के अनुसार, पटना के अस्पताल में कुछ ऐसा 'खेल' चल रहा है, जिस पर ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है।1