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शंकरगढ़ क्षेत्र में लोनी नदी में बहाया जा रहा राखड़ जीवन के लिए बना खतरा कार्यवाही की मांग प्रयागराज यमुनानगर के शंकरगढ़ क्षेत्र में लोनी नदी में राखड़ (फ्लाई ऐश) बहाए जाने का मामला सामने आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि आसपास के in औद्योगिक क्षेत्रों और पावर प्लांट से निकलने वाला राखड़ ट्रकों / हाइवा से लाकर सीधे नदी में डाला जा रहा है, जिससे नदी का पानी काला और जहरीला होता जा रहा है।स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार लोनी नदी ही उनके पीने, नहाने, पशुओं और सिंचाई का मुख्य सहारा है। राखड़ मिलने से पानी में बदबू,मछलियों का मरना और खेतों में फसल खराब होने की शिकायतें आ रही हैं।ग्रामीणों ने बताया कि राखड़ में भारी मात्रा में रसायन होते हैं, जो लंबे समय तक पानी में घुले रहने से चर्म रोग, सांस और पेट की बीमारियों का खतरा बढ़ा देते हैं। कई जगह नदी का रंग पूरी तरह बदल गया है। लोगों ने जिलाधिकारी प्रयागराज और प्रदूषण नियंत्रण विभाग से मामले में हस्तक्षेप कर कार्रवाई की मांग की है।

1 hr ago
user_पुष्पराज सिंह
पुष्पराज सिंह
Local News Reporter इलाहाबाद, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश•
1 hr ago

शंकरगढ़ क्षेत्र में लोनी नदी में बहाया जा रहा राखड़ जीवन के लिए बना खतरा कार्यवाही की मांग प्रयागराज यमुनानगर के शंकरगढ़ क्षेत्र में लोनी नदी में राखड़ (फ्लाई ऐश) बहाए जाने का मामला सामने आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि आसपास के in औद्योगिक क्षेत्रों और पावर प्लांट से निकलने वाला राखड़ ट्रकों / हाइवा से लाकर सीधे नदी में डाला जा रहा है, जिससे नदी का पानी काला और जहरीला होता जा रहा है।स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार लोनी नदी ही उनके पीने, नहाने, पशुओं और सिंचाई का मुख्य सहारा है। राखड़ मिलने से पानी में बदबू,मछलियों का मरना और खेतों में फसल खराब होने की शिकायतें आ रही हैं।ग्रामीणों ने बताया कि राखड़ में भारी मात्रा में रसायन होते हैं, जो लंबे समय तक पानी में घुले रहने से चर्म रोग, सांस और पेट की बीमारियों का खतरा बढ़ा देते हैं। कई जगह नदी का रंग पूरी तरह बदल गया है। लोगों ने जिलाधिकारी प्रयागराज और प्रदूषण नियंत्रण विभाग से मामले में हस्तक्षेप कर कार्रवाई की मांग की है।

More news from उत्तर प्रदेश and nearby areas
  • मेजा तहसील परिसर में जूनियर अधिवक्ताओं के चैंबर में दिनदहाड़े तोड़फोड़ दस्तावेज फाड़ने और चैंबर में बैठे मुवक्किलों से मारपीट का भी आरोप, पुलिस जांच में जुटी मेजा, प्रयागराज। मेजा तहसील परिसर में मंगलवार को जूनियर अधिवक्ताओं के चैंबर को लेकर विवाद ने गंभीर रूप ले लिया। आरोप है कि कुछ अधिवक्ता सैकड़ों लोगों के साथ तहसील परिसर पहुंचे और जूनियर अधिवक्ताओं द्वारा बनाए गए चैंबर को क्षतिग्रस्त कर दिया। इस दौरान चैंबर में रखे बैग से जरूरी दस्तावेज निकालकर फाड़ने और फेंकने तथा चैंबर में बैठे मुवक्किलों के साथ मारपीट किए जाने का भी आरोप लगाया गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, मेजा तहसील परिसर में पिछड़े एवं दलित वर्ग के जूनियर अधिवक्ताओं द्वारा विधि व्यवसाय करने के लिए चैंबर बनाया गया था। इस चैंबर को लेकर विवाद चल रहा था। आरोप है कि वर्तमान अध्यक्ष एवं मंत्री की ओर से चैंबर को अवैध बताते हुए उसे हटाने के लिए नोटिस दिया गया था। बताया गया कि जूनियर अधिवक्ताओं ने पूर्व में समाधान दिवस के दौरान अधिकारियों को प्रार्थना पत्र देकर पूरे मामले से अवगत कराया था। प्रार्थना पत्र में कथित तौर पर आशंका जताई गई थी कि उनके चैंबर को क्षतिग्रस्त करने की धमकी दी जा रही है। जूनियर अधिवक्ताओं का आरोप है कि शिकायत के बावजूद मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया। मंगलवार को चैंबर क्षतिग्रस्त किए जाने की घटना के बाद तहसील परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। घटना को लेकर अधिवक्ताओं के बीच तनाव की स्थिति बताई जा रही है। जूनियर अधिवक्ताओं का आरोप है कि यदि उनकी पूर्व शिकायत पर समय रहते प्रभावी कार्रवाई की गई होती तो शायद विवाद को इस स्तर तक पहुंचने से रोका जा सकता था। हालांकि, इस संबंध में अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। फिलहाल घटना की सूचना पुलिस को दी गई है और पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। चैंबर किस परिस्थिति में क्षतिग्रस्त हुआ, दस्तावेज फाड़े जाने तथा मारपीट के लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है, यह पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
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    मेजा तहसील परिसर में जूनियर अधिवक्ताओं के चैंबर में दिनदहाड़े तोड़फोड़ दस्तावेज फाड़ने और चैंबर में बैठे मुवक्किलों से मारपीट का भी आरोप, पुलिस जांच में जुटी
मेजा, प्रयागराज। मेजा तहसील परिसर में मंगलवार को जूनियर अधिवक्ताओं के चैंबर को लेकर विवाद ने गंभीर रूप ले लिया। आरोप है कि कुछ अधिवक्ता सैकड़ों लोगों के साथ तहसील परिसर पहुंचे और जूनियर अधिवक्ताओं द्वारा बनाए गए चैंबर को क्षतिग्रस्त कर दिया। इस दौरान चैंबर में रखे बैग से जरूरी दस्तावेज निकालकर फाड़ने और फेंकने तथा चैंबर में बैठे मुवक्किलों के साथ मारपीट किए जाने का भी आरोप लगाया गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मेजा तहसील परिसर में पिछड़े एवं दलित वर्ग के जूनियर अधिवक्ताओं द्वारा विधि व्यवसाय करने के लिए चैंबर बनाया गया था। इस चैंबर को लेकर विवाद चल रहा था। आरोप है कि वर्तमान अध्यक्ष एवं मंत्री की ओर से चैंबर को अवैध बताते हुए उसे हटाने के लिए नोटिस दिया गया था।
बताया गया कि जूनियर अधिवक्ताओं ने पूर्व में समाधान दिवस के दौरान अधिकारियों को प्रार्थना पत्र देकर पूरे मामले से अवगत कराया था। प्रार्थना पत्र में कथित तौर पर आशंका जताई गई थी कि उनके चैंबर को क्षतिग्रस्त करने की धमकी दी जा रही है। जूनियर अधिवक्ताओं का आरोप है कि शिकायत के बावजूद मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया।
मंगलवार को चैंबर क्षतिग्रस्त किए जाने की घटना के बाद तहसील परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। घटना को लेकर अधिवक्ताओं के बीच तनाव की स्थिति बताई जा रही है।
जूनियर अधिवक्ताओं का आरोप है कि यदि उनकी पूर्व शिकायत पर समय रहते प्रभावी कार्रवाई की गई होती तो शायद विवाद को इस स्तर तक पहुंचने से रोका जा सकता था। हालांकि, इस संबंध में अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
फिलहाल घटना की सूचना पुलिस को दी गई है और पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। चैंबर किस परिस्थिति में क्षतिग्रस्त हुआ, दस्तावेज फाड़े जाने तथा मारपीट के लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है, यह पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
    user_विकास कुमार
    विकास कुमार
    इलाहाबाद, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश•
    3 hrs ago
  • मुख्यमंत्री के आश्वासन पर टीजीटी-पीजीटी अभ्यर्थियों का धरना स्थगित मुख्यमंत्री के आश्वासन पर टीजीटी-पीजीटी अभ्यर्थियों का धरना स्थगित लिखित आश्वासन नहीं मिलने पर फिर आंदोलन की चेतावनी, शिक्षा निदेशालय के बाहर जुटे रहे हजारों अभ्यर्थी प्रयागराज। टीजीटी-पीजीटी शिक्षक भर्ती समेत विभिन्न मांगों और भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताओं के आरोपों को लेकर प्रयागराज में कई दिनों से चल रहा अभ्यर्थियों का आंदोलन मुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद बुधवार को स्थगित कर दिया गया। हजारों की संख्या में अभ्यर्थी पिछले कई दिनों से शिक्षा निदेशालय का घेराव कर रहे थे। बीते दो दिनों से अभ्यर्थी शिक्षा निदेशालय के अंदर और बाहर धरने पर बैठे हुए थे। अभ्यर्थियों का कहना है कि शिक्षक भर्ती से जुड़े मामलों के समाधान और उनकी मांगों को लेकर मुख्यमंत्री की ओर से आश्वासन दिया गया है। इसी आश्वासन के बाद फिलहाल धरना स्थगित करने का निर्णय लिया गया है। हालांकि अभ्यर्थियों ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांगों के संबंध में लिखित प्रमाण या ठोस आदेश नहीं मिलता, तब तक आंदोलन को केवल स्थगित माना जाएगा। अभ्यर्थियों ने चेतावनी दी कि यदि तय समय में लिखित आश्वासन नहीं मिलता है अथवा उनकी मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होती है तो वे दोबारा आंदोलन शुरू करेंगे। अभ्यर्थियों का कहना है कि लंबे समय से भर्ती प्रक्रिया को लेकर वे संघर्ष कर रहे हैं और सरकार से पारदर्शी एवं निष्पक्ष कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। बताया गया कि शिक्षक भर्ती से जुड़े विभिन्न मामलों को लेकर अभ्यर्थी करीब 20 दिनों से प्रयागराज के गिरजाघर के समीप भी धरने पर बैठे थे। इसके बाद आंदोलन ने शिक्षा निदेशालय का रुख किया, जहां बड़ी संख्या में अभ्यर्थी जुटे और लगातार धरना-प्रदर्शन किया। मंगलवार देर रात समाजवादी पार्टी के युवा सांसद पुष्पेंद्र सरोज भी आंदोलनरत छात्रों से मुलाकात करने पहुंचे और उनकी समस्याओं को सुना। इसके बाद मुख्यमंत्री की ओर से मिले आश्वासन के बाद बुधवार को शिक्षा निदेशालय के सामने चल रहा धरना फिलहाल स्थगित कर दिया गया। अभ्यर्थियों ने कहा कि उनका आंदोलन समाप्त नहीं हुआ है, बल्कि मांगों के लिखित समाधान तक इसे स्थगित किया गया है। लिखित प्रमाण नहीं मिलने पर वे पुनः शिक्षा निदेशालय के सामने धरना शुरू करेंगे।
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    मुख्यमंत्री के आश्वासन पर टीजीटी-पीजीटी अभ्यर्थियों का धरना स्थगित
मुख्यमंत्री के आश्वासन पर टीजीटी-पीजीटी अभ्यर्थियों का धरना स्थगित
लिखित आश्वासन नहीं मिलने पर फिर आंदोलन की चेतावनी, शिक्षा निदेशालय के बाहर जुटे रहे हजारों अभ्यर्थी
प्रयागराज। टीजीटी-पीजीटी शिक्षक भर्ती समेत विभिन्न मांगों और भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताओं के आरोपों को लेकर प्रयागराज में कई दिनों से चल रहा अभ्यर्थियों का आंदोलन मुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद बुधवार को स्थगित कर दिया गया। हजारों की संख्या में अभ्यर्थी पिछले कई दिनों से शिक्षा निदेशालय का घेराव कर रहे थे। बीते दो दिनों से अभ्यर्थी शिक्षा निदेशालय के अंदर और बाहर धरने पर बैठे हुए थे।
अभ्यर्थियों का कहना है कि शिक्षक भर्ती से जुड़े मामलों के समाधान और उनकी मांगों को लेकर मुख्यमंत्री की ओर से आश्वासन दिया गया है। इसी आश्वासन के बाद फिलहाल धरना स्थगित करने का निर्णय लिया गया है। हालांकि अभ्यर्थियों ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांगों के संबंध में लिखित प्रमाण या ठोस आदेश नहीं मिलता, तब तक आंदोलन को केवल स्थगित माना जाएगा।
अभ्यर्थियों ने चेतावनी दी कि यदि तय समय में लिखित आश्वासन नहीं मिलता है अथवा उनकी मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होती है तो वे दोबारा आंदोलन शुरू करेंगे। अभ्यर्थियों का कहना है कि लंबे समय से भर्ती प्रक्रिया को लेकर वे संघर्ष कर रहे हैं और सरकार से पारदर्शी एवं निष्पक्ष कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
बताया गया कि शिक्षक भर्ती से जुड़े विभिन्न मामलों को लेकर अभ्यर्थी करीब 20 दिनों से प्रयागराज के गिरजाघर के समीप भी धरने पर बैठे थे। इसके बाद आंदोलन ने शिक्षा निदेशालय का रुख किया, जहां बड़ी संख्या में अभ्यर्थी जुटे और लगातार धरना-प्रदर्शन किया।
मंगलवार देर रात समाजवादी पार्टी के युवा सांसद पुष्पेंद्र सरोज भी आंदोलनरत छात्रों से मुलाकात करने पहुंचे और उनकी समस्याओं को सुना। इसके बाद मुख्यमंत्री की ओर से मिले आश्वासन के बाद बुधवार को शिक्षा निदेशालय के सामने चल रहा धरना फिलहाल स्थगित कर दिया गया।
अभ्यर्थियों ने कहा कि उनका आंदोलन समाप्त नहीं हुआ है, बल्कि मांगों के लिखित समाधान तक इसे स्थगित किया गया है। लिखित प्रमाण नहीं मिलने पर वे पुनः शिक्षा निदेशालय के सामने धरना शुरू करेंगे।
    user_Journalist Satish Chandra
    Journalist Satish Chandra
    इलाहाबाद, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश•
    3 hrs ago
  • टीजीटी पीजीटी के छात्रों को योगी आदित्यनाथ ने दिया आश्वासन
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    टीजीटी पीजीटी के छात्रों को योगी आदित्यनाथ ने दिया आश्वासन
    user_Anjali Mishra
    Anjali Mishra
    Graphic designer इलाहाबाद, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश•
    4 hrs ago
  • गणेश पूजा में दिखा आध्यात्मिक संगम, सुदर्शन न्यूज़ के संस्थापक सुरेश चव्हाणके के साथ गजेंद्र सिंह शेखावत ने किए दर्शन गणेश पूजा में दिखा आध्यात्मिक संगम, सुदर्शन न्यूज़ के संस्थापक सुरेश चव्हाणके के साथ गजेंद्र सिंह शेखावत ने किए दर्शन
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    गणेश पूजा में दिखा आध्यात्मिक संगम, सुदर्शन न्यूज़ के संस्थापक सुरेश चव्हाणके के साथ गजेंद्र सिंह शेखावत ने किए दर्शन
गणेश पूजा में दिखा आध्यात्मिक संगम, सुदर्शन न्यूज़ के संस्थापक सुरेश चव्हाणके के साथ गजेंद्र सिंह शेखावत ने किए दर्शन
    user_Priyanshi Prajapati
    Priyanshi Prajapati
    इलाहाबाद, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश•
    4 hrs ago
  • राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर लगाए गए विवादित पोस्टर से नाराज़ सपा MLC मानसिंह यादव ने किया पलटवार प्रयागराज में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को लेकर विवादित पोस्टर जिसमें माफिया के अखिलेश लिखकर जगह-जगह लगाए गए हैं जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है उनको लेकर एम एलसी स्नातक मानसिंह यादव का पलटवार बोले जब चुनाव नजदीक आते है भाजपा के लोग इस तरह के विवादित पोस्टर बैनर लगाकर सांप्रदायिक सौहार्द खराब करने का काम करते हैं राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की साफ सुथरी छवि है लेकिन जिस तरह से माफियाओं के साथ जोड़कर उनके पोस्टर लगाए गए हैं यह बहुत ही शर्मनाक है सरकार के पास चुनाव में जनता के पास जाने का कोई मौका नहीं है इसलिए इस तरह के हथकंडे अपनाए जा रहे हैं प्रदेश की योगी सरकार और केंद्र की मोदी सरकार उत्तरप्रदेश में डबल इंजन की सरकार में महंगाई चरम पर है बेरोजगारी सबसे ज्यादा है सरकारी नौकरियों को खत्म कर आउटसोर्सिंग ठेका पर नौकरी युवाओं के लिए किए जाने से जनता काफी नाराज़ हैं विकास के नाम पर महाकुंभ में करोड़ों करोड़ रुपए भाजपा के लोगों ने डकार लिए अपने ठेकेदार नेताओं के जरिए जिसमें सभी ने अपना अपना कमिशन खाया है जो जनता का पैसा था थोड़ी सी बारिश से प्रयागराज की सड़कें पानी से लबालब भर जाती है जिससे लोगों के घरों में बरसाती व सीवर का पानी घुसने से काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा यह कैसा विकास है जिससे आमजन को परेशानी उठानी पड़ रही हो, जनता के सामने कोई विकास की बात न कर पाने वाली भाजपा सरकार इस तरह से विवादित पोस्टर लगाकर जनता को मुद्दे से गुमराह करना चाहती है जिससे चुनाव में भाजपा को फायदा पहुंचे। मानसिंह यादव,एमएलसी, स्नातक,झांसी-प्रयागराज। पवनदेव,लोकप्रिय,टीवी पत्रकार,प्रयागराज।
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    राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर लगाए गए विवादित पोस्टर से नाराज़ सपा MLC मानसिंह यादव ने किया पलटवार
प्रयागराज में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को लेकर विवादित पोस्टर जिसमें माफिया के अखिलेश लिखकर जगह-जगह लगाए गए हैं जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है उनको लेकर एम एलसी स्नातक मानसिंह यादव का पलटवार बोले जब चुनाव नजदीक आते है भाजपा के लोग इस तरह के विवादित पोस्टर बैनर लगाकर सांप्रदायिक सौहार्द खराब करने का काम करते हैं राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की साफ सुथरी छवि है लेकिन जिस तरह से माफियाओं के साथ जोड़कर उनके पोस्टर लगाए गए हैं यह बहुत ही शर्मनाक है सरकार के पास चुनाव में जनता के पास जाने का कोई मौका नहीं है इसलिए इस तरह के हथकंडे अपनाए जा रहे हैं प्रदेश की योगी सरकार और केंद्र की मोदी सरकार उत्तरप्रदेश में डबल इंजन की सरकार में महंगाई चरम पर है बेरोजगारी सबसे ज्यादा है सरकारी नौकरियों को खत्म कर आउटसोर्सिंग ठेका पर नौकरी युवाओं के लिए किए जाने से जनता काफी नाराज़ हैं विकास के नाम पर महाकुंभ में करोड़ों करोड़ रुपए भाजपा के लोगों ने डकार लिए अपने ठेकेदार नेताओं के जरिए जिसमें सभी ने अपना अपना कमिशन खाया है जो जनता का पैसा था थोड़ी सी बारिश से प्रयागराज की सड़कें पानी से लबालब भर जाती है जिससे लोगों के घरों में बरसाती व सीवर का पानी घुसने से काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा यह कैसा विकास है जिससे आमजन को परेशानी उठानी पड़ रही हो, जनता के सामने कोई विकास की बात न कर पाने वाली भाजपा सरकार इस तरह से विवादित पोस्टर लगाकर जनता को मुद्दे से गुमराह करना चाहती है जिससे चुनाव में भाजपा को फायदा पहुंचे।
मानसिंह यादव,एमएलसी, स्नातक,झांसी-प्रयागराज।
पवनदेव,लोकप्रिय,टीवी पत्रकार,प्रयागराज।
    user_पवनदेव,रिपोर्टर,टीवी पत्रकार
    पवनदेव,रिपोर्टर,टीवी पत्रकार
    Local News Reporter इलाहाबाद, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश•
    4 hrs ago
  • गौहनिया के होटल में कथित देह व्यापार का खुला खेल! पुलिस पहुंचने से पहले खाली हुआ परिसर, घूरपुर पुलिस की निगरानी पर सवाल वायरल वीडियो और खबर से मचा हाहाकार, चारों तरफ एक ही सवाल—इतने दिनों से कथित गतिविधियां पुलिस की निगाहों से कैसे बची रहीं? प्रयागराजयमुनानगर क्षेत्र के घूरपुर थाना अंतर्गत गौहनिया के बुदावां गांव में स्थित एक होटल को लेकर कथित देह व्यापार का मामला सामने आने के बाद इलाके में हड़कंप मचा हुआ है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और इस प्रकरण से जुड़ी खबर सामने आने के बाद चारों तरफ एक ही सवाल चर्चा में है कि यदि होटल परिसर में लंबे समय से ऐसी गतिविधियां संचालित होने के आरोप हैं तो आखिर इतने दिनों तक यह सब घूरपुर पुलिस की निगाहों से कैसे बचा रहा? आरोप है कि ‘इलाहाबाद प्रॉपर्टी एंड होटल ग्रुप’ के परिसर में संदिग्ध गतिविधियां संचालित हो रही थीं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। मामले की जानकारी मिलने पर बजरंग दल के कार्यकर्ताओं द्वारा पुलिस को सूचना दिए जाने की बात सामने आ रही है। बताया जाता है कि सूचना के बाद जब लोग मौके पर पहुंचे तो होटल परिसर में अफरा-तफरी का माहौल दिखाई दिया। इसी दौरान बनाए गए वायरल वीडियो में कुछ महिलाएं और युवतियां होटल परिसर से बाहर निकलती हुई दिखाई दे रही हैं। वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इसके सामने आने के बाद मामले की निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो गई है। सबसे बड़ा सवाल पुलिस की कार्रवाई और सूचना तंत्र को लेकर खड़ा हो रहा है। यदि पुलिस को पहले ही सूचना दी गई थी तो पुलिस के मौके पर पहुंचने से पहले होटल परिसर कथित रूप से खाली कैसे हो गया? सूचना मिलने से लेकर पुलिस के पहुंचने तक कितना समय बीता? क्या सूचना समय रहते संबंधित पुलिसकर्मियों तक पहुंची थी? और यदि पहुंची थी तो मौके पर कार्रवाई से पहले कथित रूप से लोग वहां से कैसे निकल गए? सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और खबर के बाद इलाके में तरह-तरह की चर्चाएं हैं। लोगों के बीच यह अंदेशा भी उठ रहा है कि यदि जांच में होटल में लंबे समय से ऐसी गतिविधियां संचालित होने की बात सामने आती है तो स्थानीय पुलिस की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है। आखिर बीट पुलिसकर्मी की निगरानी कहां थी? क्या होटल की गतिविधियों पर कभी नजर रखी गई? क्या आसपास के लोगों से कभी जानकारी जुटाई गई? या फिर पुलिस की निगाहों से यह पूरा मामला लगातार बचता रहा? यही अंदेशा अब कई सवालों की ओर इशारा कर रहा है, जिनका जवाब जांच के बाद ही सामने आएगा। मामला केवल होटल तक सीमित था या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क था, यह भी जांच का विषय है। पुलिस को होटल परिसर के सीसीटीवी फुटेज, प्रवेश-निकास से संबंधित अभिलेख, कर्मचारियों और संचालक से पूछताछ तथा वायरल वीडियो में दिखाई दे रहे घटनाक्रम की सत्यता की जांच करनी चाहिए। साथ ही यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम कितने समय में मौके पर पहुंची। बुदावां और आसपास के ग्रामीणों में मामले को लेकर नाराजगी बताई जा रही है। लोगों का कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो ग्रामीण क्षेत्र में ऐसी गतिविधियों को किसी भी स्थिति में नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। वहीं यदि वायरल वीडियो अथवा लगाए गए आरोपों में तथ्य नहीं हैं तो पुलिस की जांच से स्थिति भी साफ होनी चाहिए, ताकि किसी निर्दोष व्यक्ति या प्रतिष्ठान के खिलाफ गलत धारणा न बने। अब निगाहें घूरपुर थाना पुलिस और उच्च पुलिस अधिकारियों की जांच पर टिकी हैं। इस पूरे प्रकरण में सबसे अहम सवाल यही है कि आखिर इतने दिनों से कथित गतिविधियां चलने की बात सामने आ रही है तो स्थानीय पुलिस की निगरानी व्यवस्था कहां थी और पुलिस को सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुंचने से पहले ही परिसर कथित रूप से कैसे खाली हो गया? इन सवालों का निष्पक्ष जवाब ही पूरे मामले की असल तस्वीर सामने ला सकता है।
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    गौहनिया के होटल में कथित देह व्यापार का खुला खेल! पुलिस पहुंचने से पहले खाली हुआ परिसर, घूरपुर पुलिस की निगरानी पर सवाल

वायरल वीडियो और खबर से मचा हाहाकार, चारों तरफ एक ही सवाल—इतने दिनों से कथित गतिविधियां पुलिस की  निगाहों से कैसे बची रहीं?
प्रयागराजयमुनानगर क्षेत्र के घूरपुर थाना अंतर्गत गौहनिया के बुदावां गांव में स्थित एक होटल को लेकर कथित देह व्यापार का मामला सामने आने के बाद इलाके में हड़कंप मचा हुआ है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और इस प्रकरण से जुड़ी खबर सामने आने के बाद चारों तरफ एक ही सवाल चर्चा में है कि यदि होटल परिसर में लंबे समय से ऐसी गतिविधियां संचालित होने के आरोप हैं तो आखिर इतने दिनों तक यह सब घूरपुर पुलिस की निगाहों से कैसे बचा रहा? आरोप है कि ‘इलाहाबाद प्रॉपर्टी एंड होटल ग्रुप’ के परिसर में संदिग्ध गतिविधियां संचालित हो रही थीं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। मामले की जानकारी मिलने पर बजरंग दल के कार्यकर्ताओं द्वारा पुलिस को सूचना दिए जाने की बात सामने आ रही है। बताया जाता है कि सूचना के बाद जब लोग मौके पर पहुंचे तो होटल परिसर में अफरा-तफरी का माहौल दिखाई दिया। इसी दौरान बनाए गए वायरल वीडियो में कुछ महिलाएं और युवतियां होटल परिसर से बाहर निकलती हुई दिखाई दे रही हैं। वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इसके सामने आने के बाद मामले की निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो गई है। सबसे बड़ा सवाल पुलिस की कार्रवाई और सूचना तंत्र को लेकर खड़ा हो रहा है। यदि पुलिस को पहले ही सूचना दी गई थी तो पुलिस के मौके पर पहुंचने से पहले होटल परिसर कथित रूप से खाली कैसे हो गया? सूचना मिलने से लेकर पुलिस के पहुंचने तक कितना समय बीता? क्या सूचना समय रहते संबंधित पुलिसकर्मियों तक पहुंची थी? और यदि पहुंची थी तो मौके पर कार्रवाई से पहले कथित रूप से लोग वहां से कैसे निकल गए? सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और खबर के बाद इलाके में तरह-तरह की चर्चाएं हैं। लोगों के बीच यह अंदेशा भी उठ रहा है कि यदि जांच में होटल में लंबे समय से ऐसी गतिविधियां संचालित होने की बात सामने आती है तो स्थानीय पुलिस की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है। आखिर बीट पुलिसकर्मी की निगरानी कहां थी? क्या होटल की गतिविधियों पर कभी नजर रखी गई? क्या आसपास के लोगों से कभी जानकारी जुटाई गई? या फिर पुलिस की निगाहों से यह पूरा मामला लगातार बचता रहा? यही अंदेशा अब कई सवालों की ओर इशारा कर रहा है, जिनका जवाब जांच के बाद ही सामने आएगा। मामला केवल होटल तक सीमित था या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क था, यह भी जांच का विषय है। पुलिस को होटल परिसर के सीसीटीवी फुटेज, प्रवेश-निकास से संबंधित अभिलेख, कर्मचारियों और संचालक से पूछताछ तथा वायरल वीडियो में दिखाई दे रहे घटनाक्रम की सत्यता की जांच करनी चाहिए। साथ ही यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम कितने समय में मौके पर पहुंची। बुदावां और आसपास के ग्रामीणों में मामले को लेकर नाराजगी बताई जा रही है। लोगों का कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो ग्रामीण क्षेत्र में ऐसी गतिविधियों को किसी भी स्थिति में नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। वहीं यदि वायरल वीडियो अथवा लगाए गए आरोपों में तथ्य नहीं हैं तो पुलिस की जांच से स्थिति भी साफ होनी चाहिए, ताकि किसी निर्दोष व्यक्ति या प्रतिष्ठान के खिलाफ गलत धारणा न बने। अब निगाहें घूरपुर थाना पुलिस और उच्च पुलिस अधिकारियों की जांच पर टिकी हैं। इस पूरे प्रकरण में सबसे अहम सवाल यही है कि आखिर इतने दिनों से कथित गतिविधियां चलने की बात सामने आ रही है तो स्थानीय पुलिस की निगरानी व्यवस्था कहां थी और पुलिस को सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुंचने से पहले ही परिसर कथित रूप से कैसे खाली हो गया? इन सवालों का निष्पक्ष जवाब ही पूरे मामले की असल तस्वीर सामने ला सकता है।
    user_पुष्पराज सिंह
    पुष्पराज सिंह
    Local News Reporter इलाहाबाद, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश•
    4 hrs ago
  • हत्या के सम्बंध में डीसीपी गंगा नगर ने दी बाईट,देखे खबर प्रयागराज: थाना हण्डिया क्षेत्रान्तर्गत कस्बा हण्डिया में मोटरसाइकिल सवार अज्ञात बदमाशों द्वारा ग्राम मुगरहा निवासी पवन कुमार यादव को गोली मारकर घायल कर देने व ईलाज के दौरान मृत्यु हो जाने पर पुलिस द्वारा कृत कार्यवाही के सम्बन्ध में पुलिस उपायुक्त गंगानगर कुलदीप गुनावत द्वारा दी गई बाईट!
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    हत्या के सम्बंध में डीसीपी गंगा नगर ने दी बाईट,देखे खबर
प्रयागराज: थाना हण्डिया क्षेत्रान्तर्गत कस्बा हण्डिया में मोटरसाइकिल सवार अज्ञात बदमाशों द्वारा ग्राम मुगरहा निवासी पवन कुमार यादव को गोली मारकर घायल कर देने व ईलाज के दौरान मृत्यु हो जाने पर पुलिस द्वारा कृत कार्यवाही के सम्बन्ध में पुलिस उपायुक्त गंगानगर कुलदीप गुनावत द्वारा दी गई बाईट!
    user_अजय सरोज~पत्रकार
    अजय सरोज~पत्रकार
    Media house इलाहाबाद, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश•
    7 hrs ago
  • पूर्व प्रधान व समाजवादी पार्टी के नेता की गोली मारकर हत्या प्रयागराज: हंडिया मे पूर्व ग्राम प्रधान और समाज वादी पार्टी के जिला सचिव पवन यादव की गोली मार कर हत्या कर दी गई,पवन यादव सड़क पर किसी काम से रुके थे तभी अज्ञात बाइक सवार बदमाशों नें उनके ऊपर फायरिंग कर दी,गोली लगनें से पवन सड़क पर गिर गए,स्थानीय लोग उन्हें तुरंत अस्पताल ले गए,लेकिन तब तक पवन की मौत हो चुकी थीं,पवन यादव प्रयागराज के हंडिया के मुंगराव गाँव के रहने वाले थे,सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी हैं,पुलिस सीसीटीवी और अन्य माध्यमो से गोली चलाने वालो की पहचान करने की कोशिश कर रही हैं!
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    पूर्व प्रधान व समाजवादी पार्टी के नेता की गोली मारकर हत्या
प्रयागराज: हंडिया मे पूर्व ग्राम प्रधान और समाज वादी पार्टी के जिला सचिव पवन यादव की गोली मार कर हत्या कर दी गई,पवन यादव सड़क पर किसी काम से रुके थे तभी अज्ञात बाइक सवार बदमाशों नें उनके ऊपर फायरिंग कर दी,गोली लगनें से पवन सड़क पर गिर गए,स्थानीय लोग उन्हें तुरंत अस्पताल ले गए,लेकिन तब तक पवन की मौत हो चुकी थीं,पवन यादव प्रयागराज के हंडिया के मुंगराव गाँव के रहने वाले थे,सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी हैं,पुलिस सीसीटीवी और अन्य माध्यमो से गोली चलाने वालो की पहचान करने की कोशिश कर रही हैं!
    user_अजय सरोज~पत्रकार
    अजय सरोज~पत्रकार
    Media house इलाहाबाद, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश•
    7 hrs ago
  • 14 वर्षीय किशोर की संदिग्ध मौत से आक्रोश, हत्या का आरोप 14 वर्षीय किशोर की संदिग्ध मौत से आक्रोश, हत्या का आरोप पोस्टमार्टम के बाद घर पहुंचा शव, कार्रवाई की मांग को लेकर अंतिम संस्कार रोका प्रयागराज। औद्योगिक क्षेत्र थाना क्षेत्र के पिपरांव रामपुर गांव में 14 वर्षीय किशोर अरुण गौड़ की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत को लेकर मंगलवार को परिजनों और ग्रामीणों में आक्रोश देखने को मिला। बीते 21 सितंबर को अरुण का शव गांव के ही एक गड्ढे में पड़ा मिला था। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया था। मंगलवार को पोस्टमार्टम के बाद जब किशोर का शव घर पहुंचा तो बड़ी संख्या में परिजन और ग्रामीण एकत्र हो गए। परिजनों का आरोप है कि अरुण के बाएं हाथ, मुंह और कमर पर चोट के निशान मिले हैं। परिवार की ओर से आशंका जताई गई है कि किशोर को करंट लगाकर उसकी हत्या की गई और बाद में शव को गड्ढे में फेंक दिया गया। मृतक के परिजन राजू गौड़ ने पुलिस को तहरीर देकर गांव के ही चार लोगों पर पुरानी रंजिश के चलते हत्या किए जाने का आरोप लगाया है। परिजनों का कहना है कि तहरीर देने के बावजूद अभी तक मुकदमा दर्ज नहीं किया गया है, जिससे परिवार में नाराजगी है। शव घर पहुंचने के बाद परिजनों ने पुलिस से मामले की निष्पक्ष जांच और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। कार्रवाई की मांग को लेकर फिलहाल किशोर का अंतिम संस्कार नहीं किया गया है। मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस जांच के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों का स्पष्ट पता चल सकेगा।
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    14 वर्षीय किशोर की संदिग्ध मौत से आक्रोश, हत्या का आरोप

14 वर्षीय किशोर की संदिग्ध मौत से आक्रोश, हत्या का आरोप
पोस्टमार्टम के बाद घर पहुंचा शव, कार्रवाई की मांग को लेकर अंतिम संस्कार रोका
प्रयागराज। औद्योगिक क्षेत्र थाना क्षेत्र के पिपरांव रामपुर गांव में 14 वर्षीय किशोर अरुण गौड़ की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत को लेकर मंगलवार को परिजनों और ग्रामीणों में आक्रोश देखने को मिला। बीते 21 सितंबर को अरुण का शव गांव के ही एक गड्ढे में पड़ा मिला था। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया था।
मंगलवार को पोस्टमार्टम के बाद जब किशोर का शव घर पहुंचा तो बड़ी संख्या में परिजन और ग्रामीण एकत्र हो गए। परिजनों का आरोप है कि अरुण के बाएं हाथ, मुंह और कमर पर चोट के निशान मिले हैं। परिवार की ओर से आशंका जताई गई है कि किशोर को करंट लगाकर उसकी हत्या की गई और बाद में शव को गड्ढे में फेंक दिया गया।
मृतक के परिजन राजू गौड़ ने पुलिस को तहरीर देकर गांव के ही चार लोगों पर पुरानी रंजिश के चलते हत्या किए जाने का आरोप लगाया है। परिजनों का कहना है कि तहरीर देने के बावजूद अभी तक मुकदमा दर्ज नहीं किया गया है, जिससे परिवार में नाराजगी है।
शव घर पहुंचने के बाद परिजनों ने पुलिस से मामले की निष्पक्ष जांच और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। कार्रवाई की मांग को लेकर फिलहाल किशोर का अंतिम संस्कार नहीं किया गया है। मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस जांच के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों का स्पष्ट पता चल सकेगा।
    user_Sudha Srivastava manvadhikar M
    Sudha Srivastava manvadhikar M
    Media and information sciences faculty इलाहाबाद, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश•
    8 hrs ago
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