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गणेश पूजा में दिखा आध्यात्मिक संगम, सुदर्शन न्यूज़ के संस्थापक सुरेश चव्हाणके के साथ गजेंद्र सिंह शेखावत ने किए दर्शन गणेश पूजा में दिखा आध्यात्मिक संगम, सुदर्शन न्यूज़ के संस्थापक सुरेश चव्हाणके के साथ गजेंद्र सिंह शेखावत ने किए दर्शन
Priyanshi Prajapati
गणेश पूजा में दिखा आध्यात्मिक संगम, सुदर्शन न्यूज़ के संस्थापक सुरेश चव्हाणके के साथ गजेंद्र सिंह शेखावत ने किए दर्शन गणेश पूजा में दिखा आध्यात्मिक संगम, सुदर्शन न्यूज़ के संस्थापक सुरेश चव्हाणके के साथ गजेंद्र सिंह शेखावत ने किए दर्शन
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- *भ्रामक और फर्जी वीडियो वायरल करने वालों की खैर नहीं: मानहानि का केस दर्ज कराने और न्यायालय जाने की तैयारी प्रयागराज। सोशल मीडिया पर पिछले कुछ समय से (समूह/संस्था) से संबंधित कुछ फर्जी, मनगढ़ंत और भ्रामक वीडियो वायरल किए जा रहे हैं। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए संस्था की ओर से स्पष्ट किया गया है कि अराजक तत्वों द्वारा जानबूझकर संस्थान की छवि धूमिल करने के उद्देश्य से यह षड्यंत्र रचा जा रहा है। संस्थान के प्रतिनिधियों ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि हमारी पूरी कार्यप्रणाली शत-प्रतिशत मानक और प्रशासनिक पत्रों/दिशा-निर्देशों के अनुरूप पारदर्शी तरीके से संचालित होती रही है। समय-समय पर प्रशासनिक पत्राचार और जांच प्रक्रियाओं के माध्यम से भी यह बात पूरी तरह से प्रमाणित हो चुकी है। इसके बावजूद, कुछ असामाजिक व अराजक तत्व द्वेषभावना के तहत आवारा एवं फर्जी वीडियो बनाकर जनता को गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं आम जनमानस से निवेदन है कि ऐसे किसी भी अनधिकृत, भ्रामक और फर्जी वीडियो पर ध्यान न दें और न ही इसे सोशल मीडिया पर शेयर या फॉरवर्ड करें। फर्जी वीडियो बनाने, उन्हें फैलाने और संस्थान की साख को नुकसान पहुंचाने वाले अराजक तत्वों की पहचान की जा रही है। ऐसे सभी उपद्रवियों के खिलाफ मानहानि का मामला दर्ज कराने के साथ-साथ सख्त से सख्त कानूनी सजा दिलाने हेतु न्यायालय (कोर्ट) की शरण ली जा रही है। > स्पष्ट चेतावनी: यदि कोई भी व्यक्ति बिना किसी ठोस प्रमाण के भ्रामक सामग्री या वीडियो शेयर करता हुआ पाया गया, तो उसके खिलाफ बिना किसी रियायत के कड़ा लीगल नोटिस भेजा जाएगा और पुलिस व साइबर सेल के माध्यम से कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। >1
- शंकरगढ़ क्षेत्र में लोनी नदी में बहाया जा रहा राखड़ जीवन के लिए बना खतरा कार्यवाही की मांग प्रयागराज यमुनानगर के शंकरगढ़ क्षेत्र में लोनी नदी में राखड़ (फ्लाई ऐश) बहाए जाने का मामला सामने आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि आसपास के in औद्योगिक क्षेत्रों और पावर प्लांट से निकलने वाला राखड़ ट्रकों / हाइवा से लाकर सीधे नदी में डाला जा रहा है, जिससे नदी का पानी काला और जहरीला होता जा रहा है।स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार लोनी नदी ही उनके पीने, नहाने, पशुओं और सिंचाई का मुख्य सहारा है। राखड़ मिलने से पानी में बदबू,मछलियों का मरना और खेतों में फसल खराब होने की शिकायतें आ रही हैं।ग्रामीणों ने बताया कि राखड़ में भारी मात्रा में रसायन होते हैं, जो लंबे समय तक पानी में घुले रहने से चर्म रोग, सांस और पेट की बीमारियों का खतरा बढ़ा देते हैं। कई जगह नदी का रंग पूरी तरह बदल गया है। लोगों ने जिलाधिकारी प्रयागराज और प्रदूषण नियंत्रण विभाग से मामले में हस्तक्षेप कर कार्रवाई की मांग की है।1
- मोटिवेशनल स्पीकर अनुभूति दीक्षित ने बताया सफलता की कुँजी1
- मेजा तहसील परिसर में जूनियर अधिवक्ताओं के चैंबर में दिनदहाड़े तोड़फोड़ दस्तावेज फाड़ने और चैंबर में बैठे मुवक्किलों से मारपीट का भी आरोप, पुलिस जांच में जुटी मेजा, प्रयागराज। मेजा तहसील परिसर में मंगलवार को जूनियर अधिवक्ताओं के चैंबर को लेकर विवाद ने गंभीर रूप ले लिया। आरोप है कि कुछ अधिवक्ता सैकड़ों लोगों के साथ तहसील परिसर पहुंचे और जूनियर अधिवक्ताओं द्वारा बनाए गए चैंबर को क्षतिग्रस्त कर दिया। इस दौरान चैंबर में रखे बैग से जरूरी दस्तावेज निकालकर फाड़ने और फेंकने तथा चैंबर में बैठे मुवक्किलों के साथ मारपीट किए जाने का भी आरोप लगाया गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, मेजा तहसील परिसर में पिछड़े एवं दलित वर्ग के जूनियर अधिवक्ताओं द्वारा विधि व्यवसाय करने के लिए चैंबर बनाया गया था। इस चैंबर को लेकर विवाद चल रहा था। आरोप है कि वर्तमान अध्यक्ष एवं मंत्री की ओर से चैंबर को अवैध बताते हुए उसे हटाने के लिए नोटिस दिया गया था। बताया गया कि जूनियर अधिवक्ताओं ने पूर्व में समाधान दिवस के दौरान अधिकारियों को प्रार्थना पत्र देकर पूरे मामले से अवगत कराया था। प्रार्थना पत्र में कथित तौर पर आशंका जताई गई थी कि उनके चैंबर को क्षतिग्रस्त करने की धमकी दी जा रही है। जूनियर अधिवक्ताओं का आरोप है कि शिकायत के बावजूद मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया। मंगलवार को चैंबर क्षतिग्रस्त किए जाने की घटना के बाद तहसील परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। घटना को लेकर अधिवक्ताओं के बीच तनाव की स्थिति बताई जा रही है। जूनियर अधिवक्ताओं का आरोप है कि यदि उनकी पूर्व शिकायत पर समय रहते प्रभावी कार्रवाई की गई होती तो शायद विवाद को इस स्तर तक पहुंचने से रोका जा सकता था। हालांकि, इस संबंध में अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। फिलहाल घटना की सूचना पुलिस को दी गई है और पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। चैंबर किस परिस्थिति में क्षतिग्रस्त हुआ, दस्तावेज फाड़े जाने तथा मारपीट के लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है, यह पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।1
- टीजीटी पीजीटी के छात्रों को योगी आदित्यनाथ ने दिया आश्वासन1
- गणेश पूजा में दिखा आध्यात्मिक संगम, सुदर्शन न्यूज़ के संस्थापक सुरेश चव्हाणके के साथ गजेंद्र सिंह शेखावत ने किए दर्शन गणेश पूजा में दिखा आध्यात्मिक संगम, सुदर्शन न्यूज़ के संस्थापक सुरेश चव्हाणके के साथ गजेंद्र सिंह शेखावत ने किए दर्शन1
- prayagraj ghantaghar chauk mein jaam Janata pareshan ho rahi hai prayagraj chauk ghantaghar jaam ka jaam Janata jujh rahi hai1
- मुख्यमंत्री के आश्वासन पर टीजीटी-पीजीटी अभ्यर्थियों का धरना स्थगित मुख्यमंत्री के आश्वासन पर टीजीटी-पीजीटी अभ्यर्थियों का धरना स्थगित लिखित आश्वासन नहीं मिलने पर फिर आंदोलन की चेतावनी, शिक्षा निदेशालय के बाहर जुटे रहे हजारों अभ्यर्थी प्रयागराज। टीजीटी-पीजीटी शिक्षक भर्ती समेत विभिन्न मांगों और भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताओं के आरोपों को लेकर प्रयागराज में कई दिनों से चल रहा अभ्यर्थियों का आंदोलन मुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद बुधवार को स्थगित कर दिया गया। हजारों की संख्या में अभ्यर्थी पिछले कई दिनों से शिक्षा निदेशालय का घेराव कर रहे थे। बीते दो दिनों से अभ्यर्थी शिक्षा निदेशालय के अंदर और बाहर धरने पर बैठे हुए थे। अभ्यर्थियों का कहना है कि शिक्षक भर्ती से जुड़े मामलों के समाधान और उनकी मांगों को लेकर मुख्यमंत्री की ओर से आश्वासन दिया गया है। इसी आश्वासन के बाद फिलहाल धरना स्थगित करने का निर्णय लिया गया है। हालांकि अभ्यर्थियों ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांगों के संबंध में लिखित प्रमाण या ठोस आदेश नहीं मिलता, तब तक आंदोलन को केवल स्थगित माना जाएगा। अभ्यर्थियों ने चेतावनी दी कि यदि तय समय में लिखित आश्वासन नहीं मिलता है अथवा उनकी मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होती है तो वे दोबारा आंदोलन शुरू करेंगे। अभ्यर्थियों का कहना है कि लंबे समय से भर्ती प्रक्रिया को लेकर वे संघर्ष कर रहे हैं और सरकार से पारदर्शी एवं निष्पक्ष कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। बताया गया कि शिक्षक भर्ती से जुड़े विभिन्न मामलों को लेकर अभ्यर्थी करीब 20 दिनों से प्रयागराज के गिरजाघर के समीप भी धरने पर बैठे थे। इसके बाद आंदोलन ने शिक्षा निदेशालय का रुख किया, जहां बड़ी संख्या में अभ्यर्थी जुटे और लगातार धरना-प्रदर्शन किया। मंगलवार देर रात समाजवादी पार्टी के युवा सांसद पुष्पेंद्र सरोज भी आंदोलनरत छात्रों से मुलाकात करने पहुंचे और उनकी समस्याओं को सुना। इसके बाद मुख्यमंत्री की ओर से मिले आश्वासन के बाद बुधवार को शिक्षा निदेशालय के सामने चल रहा धरना फिलहाल स्थगित कर दिया गया। अभ्यर्थियों ने कहा कि उनका आंदोलन समाप्त नहीं हुआ है, बल्कि मांगों के लिखित समाधान तक इसे स्थगित किया गया है। लिखित प्रमाण नहीं मिलने पर वे पुनः शिक्षा निदेशालय के सामने धरना शुरू करेंगे।2
- गौहनिया के होटल में कथित देह व्यापार का खुला खेल! पुलिस पहुंचने से पहले खाली हुआ परिसर, घूरपुर पुलिस की निगरानी पर सवाल वायरल वीडियो और खबर से मचा हाहाकार, चारों तरफ एक ही सवाल—इतने दिनों से कथित गतिविधियां पुलिस की निगाहों से कैसे बची रहीं? प्रयागराजयमुनानगर क्षेत्र के घूरपुर थाना अंतर्गत गौहनिया के बुदावां गांव में स्थित एक होटल को लेकर कथित देह व्यापार का मामला सामने आने के बाद इलाके में हड़कंप मचा हुआ है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और इस प्रकरण से जुड़ी खबर सामने आने के बाद चारों तरफ एक ही सवाल चर्चा में है कि यदि होटल परिसर में लंबे समय से ऐसी गतिविधियां संचालित होने के आरोप हैं तो आखिर इतने दिनों तक यह सब घूरपुर पुलिस की निगाहों से कैसे बचा रहा? आरोप है कि ‘इलाहाबाद प्रॉपर्टी एंड होटल ग्रुप’ के परिसर में संदिग्ध गतिविधियां संचालित हो रही थीं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। मामले की जानकारी मिलने पर बजरंग दल के कार्यकर्ताओं द्वारा पुलिस को सूचना दिए जाने की बात सामने आ रही है। बताया जाता है कि सूचना के बाद जब लोग मौके पर पहुंचे तो होटल परिसर में अफरा-तफरी का माहौल दिखाई दिया। इसी दौरान बनाए गए वायरल वीडियो में कुछ महिलाएं और युवतियां होटल परिसर से बाहर निकलती हुई दिखाई दे रही हैं। वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इसके सामने आने के बाद मामले की निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो गई है। सबसे बड़ा सवाल पुलिस की कार्रवाई और सूचना तंत्र को लेकर खड़ा हो रहा है। यदि पुलिस को पहले ही सूचना दी गई थी तो पुलिस के मौके पर पहुंचने से पहले होटल परिसर कथित रूप से खाली कैसे हो गया? सूचना मिलने से लेकर पुलिस के पहुंचने तक कितना समय बीता? क्या सूचना समय रहते संबंधित पुलिसकर्मियों तक पहुंची थी? और यदि पहुंची थी तो मौके पर कार्रवाई से पहले कथित रूप से लोग वहां से कैसे निकल गए? सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और खबर के बाद इलाके में तरह-तरह की चर्चाएं हैं। लोगों के बीच यह अंदेशा भी उठ रहा है कि यदि जांच में होटल में लंबे समय से ऐसी गतिविधियां संचालित होने की बात सामने आती है तो स्थानीय पुलिस की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है। आखिर बीट पुलिसकर्मी की निगरानी कहां थी? क्या होटल की गतिविधियों पर कभी नजर रखी गई? क्या आसपास के लोगों से कभी जानकारी जुटाई गई? या फिर पुलिस की निगाहों से यह पूरा मामला लगातार बचता रहा? यही अंदेशा अब कई सवालों की ओर इशारा कर रहा है, जिनका जवाब जांच के बाद ही सामने आएगा। मामला केवल होटल तक सीमित था या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क था, यह भी जांच का विषय है। पुलिस को होटल परिसर के सीसीटीवी फुटेज, प्रवेश-निकास से संबंधित अभिलेख, कर्मचारियों और संचालक से पूछताछ तथा वायरल वीडियो में दिखाई दे रहे घटनाक्रम की सत्यता की जांच करनी चाहिए। साथ ही यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम कितने समय में मौके पर पहुंची। बुदावां और आसपास के ग्रामीणों में मामले को लेकर नाराजगी बताई जा रही है। लोगों का कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो ग्रामीण क्षेत्र में ऐसी गतिविधियों को किसी भी स्थिति में नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। वहीं यदि वायरल वीडियो अथवा लगाए गए आरोपों में तथ्य नहीं हैं तो पुलिस की जांच से स्थिति भी साफ होनी चाहिए, ताकि किसी निर्दोष व्यक्ति या प्रतिष्ठान के खिलाफ गलत धारणा न बने। अब निगाहें घूरपुर थाना पुलिस और उच्च पुलिस अधिकारियों की जांच पर टिकी हैं। इस पूरे प्रकरण में सबसे अहम सवाल यही है कि आखिर इतने दिनों से कथित गतिविधियां चलने की बात सामने आ रही है तो स्थानीय पुलिस की निगरानी व्यवस्था कहां थी और पुलिस को सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुंचने से पहले ही परिसर कथित रूप से कैसे खाली हो गया? इन सवालों का निष्पक्ष जवाब ही पूरे मामले की असल तस्वीर सामने ला सकता है।1