चैनपुर दुर्गा मंदिर के पीछे कचरे का अंबार, आस्था के आंगन में पसरी गंद अंबार, आस्था के आंगन में पसरी गंदगी चैनपुर: एक ओर जहाँ पूरा देश स्वच्छता अभियान के तहत सुंदर और स्वच्छ भारत का सपना देख रहा है, वहीं दूसरी ओर चैनपुर स्थित प्रसिद्ध दुर्गा मंदिर के पीछे की तस्वीरें बेहद चिंताजनक हैं। मंदिर के ठीक पीछे के क्षेत्र को स्थानीय लोगों और अज्ञात तत्वों ने कचरा डंपिंग यार्ड बना दिया है। दृश्य जो कर रहे विचलित हाल ही में सामने आए वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि मंदिर के पवित्र वातावरण के ठीक पीछे गंदगी का साम्राज्य है प्लास्टिक का सैलाब: भारी मात्रा में प्लास्टिक की थैलियाँ, खाली बोतलें और पन्नियों के ढेर लगे हैं। सड़ता कूड़ा: गीला कचरा और पुराने फटे कपड़ों के कारण पूरे क्षेत्र में दुर्गंध फैली हुई है, जिससे यहाँ से गुजरना भी दूभर हो गया है। स्वास्थ्य पर खतरा: खुले में पड़े इस कचरे से मच्छरों और संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। यह गंदगी न केवल श्रद्धालुओं की आस्था को ठेस पहुँचा रही है, बल्कि पास रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य के साथ भी खिलवाड़ है।
चैनपुर दुर्गा मंदिर के पीछे कचरे का अंबार, आस्था के आंगन में पसरी गंद अंबार, आस्था के आंगन में पसरी गंदगी चैनपुर: एक ओर जहाँ पूरा देश स्वच्छता अभियान के तहत सुंदर और स्वच्छ भारत का सपना देख रहा है, वहीं दूसरी ओर चैनपुर स्थित प्रसिद्ध दुर्गा मंदिर के पीछे की तस्वीरें बेहद चिंताजनक हैं। मंदिर के ठीक पीछे के क्षेत्र को स्थानीय लोगों और अज्ञात तत्वों ने कचरा डंपिंग यार्ड बना दिया है। दृश्य जो कर रहे विचलित हाल ही में सामने आए वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि मंदिर के पवित्र वातावरण के ठीक पीछे गंदगी का साम्राज्य है प्लास्टिक का सैलाब: भारी मात्रा में प्लास्टिक की थैलियाँ, खाली बोतलें और पन्नियों के ढेर लगे हैं। सड़ता कूड़ा: गीला कचरा और पुराने फटे कपड़ों के कारण पूरे क्षेत्र में दुर्गंध फैली हुई है, जिससे यहाँ से गुजरना भी दूभर हो गया है। स्वास्थ्य पर खतरा: खुले में पड़े इस कचरे से मच्छरों और संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। यह गंदगी न केवल श्रद्धालुओं की आस्था को ठेस पहुँचा रही है, बल्कि पास रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य के साथ भी खिलवाड़ है।
- अंबार, आस्था के आंगन में पसरी गंदगी चैनपुर: एक ओर जहाँ पूरा देश स्वच्छता अभियान के तहत सुंदर और स्वच्छ भारत का सपना देख रहा है, वहीं दूसरी ओर चैनपुर स्थित प्रसिद्ध दुर्गा मंदिर के पीछे की तस्वीरें बेहद चिंताजनक हैं। मंदिर के ठीक पीछे के क्षेत्र को स्थानीय लोगों और अज्ञात तत्वों ने कचरा डंपिंग यार्ड बना दिया है। दृश्य जो कर रहे विचलित हाल ही में सामने आए वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि मंदिर के पवित्र वातावरण के ठीक पीछे गंदगी का साम्राज्य है प्लास्टिक का सैलाब: भारी मात्रा में प्लास्टिक की थैलियाँ, खाली बोतलें और पन्नियों के ढेर लगे हैं। सड़ता कूड़ा: गीला कचरा और पुराने फटे कपड़ों के कारण पूरे क्षेत्र में दुर्गंध फैली हुई है, जिससे यहाँ से गुजरना भी दूभर हो गया है। स्वास्थ्य पर खतरा: खुले में पड़े इस कचरे से मच्छरों और संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। यह गंदगी न केवल श्रद्धालुओं की आस्था को ठेस पहुँचा रही है, बल्कि पास रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य के साथ भी खिलवाड़ है।1
- Post by आजाद जमावादी1
- Post by Aliyar Aliyar1
- सेवा में, माननीय मुखिया / पंचायत सचिव महोदय, ग्राम पंचायत – (अपने पंचायत का नाम) विषय: गाँव में नाली एवं गली निर्माण/मरम्मत हेतु आवेदन महोदय, सविनय निवेदन है कि मैं जयप्रकाश कुमार, ग्राम पनापुर, थाना मोहनिया, जिला कैमूर (भभुआ) का निवासी हूँ। हमारे गाँव में नाली एवं गली की स्थिति बहुत खराब है। नाली नहीं होने के कारण गंदा पानी सड़कों पर फैल जाता है, जिससे कीचड़ एवं बदबू की समस्या बनी रहती है। साथ ही, गली (सड़क) भी टूटी-फूटी है, जिससे आने-जाने में ग्रामीणों को काफी कठिनाई होती है। इस समस्या के कारण बीमारियों का खतरा भी बढ़ रहा है। अतः आपसे निवेदन है कि गाँव में नाली एवं गली का निर्माण/मरम्मत जल्द से जल्द कराया जाए, ताकि ग्रामीणों को राहत मिल सके। धन्यवाद। भवदीय नाम: जयप्रकाश कुमार पता: ग्राम पनापुर, थाना मोहनिया, जिला कैमूर मोबाइल: XXXXXXXX तिथि: ________3
- Post by Om Prakash Tiwari1
- कैमूर। जिले के कुदरा थाना क्षेत्र में इन दिनों रसोई गैस (भारत गैस) की किल्लत ने आम जनता का जीना मुहाल कर दिया है। गैस सिलेंडर के लिए मची हाहाकार के बीच स्थानीय लोगों का धैर्य अब जवाब देने लगा है। विशेष रूप से गृहणियों के लिए यह स्थिति किसी मुसीबत से कम नहीं है। सुबह की पहली किरण के साथ लगती हैं कतारें मिली जानकारी के अनुसार बताया जाता है कि कुदरा स्थित गैस एजेंसी पर नजारा किसी मेले जैसा होता है, लेकिन यहाँ उत्साह नहीं बल्कि आक्रोश और बेबसी दिखती है। सिलेंडर पाने की उम्मीद में महिलाएं और बुजुर्ग सुबह तड़के ही लाइन में लग जाते हैं। घंटों चिलचिलाती धूप और लंबी कतारों में खड़े रहने के बावजूद, शाम तक कई उपभोक्ताओं को बिना सिलेंडर के ही वापस घर लौटना पड़ रहा है। रसोई का बिगड़ा बजट और स्वास्थ्य पर संकट गैस न मिलने के कारण ग्रामीण क्षेत्रों और कस्बों में रसोई का काम पूरी तरह ठप पड़ गया है। स्थानीय महिलाओं ने अपना दर्द साझा करते हुए बताया कि "सिलेंडर खत्म होने से हमें फिर से पुराने दौर की तरह लकड़ी और उपलों पर खाना बनाना पड़ रहा है। इससे न केवल समय ज्यादा लगता है, बल्कि धुएं के कारण आंखों और सेहत पर भी बुरा असर पड़ रहा है।" प्रशासन और विभाग की चुप्पी पर सवाल ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि गैस की सप्लाई नियमित नहीं की जा रही है। लोगों में इस बात को लेकर भी नाराजगी है कि आखिर आपूर्ति में इस कदर बाधा क्यों आ रही है? ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और संबंधित विभाग के अधिकारियों से अविलंब हस्तक्षेप की मांग की है। प्रमुख मांगें: • गैस की आपूर्ति को तत्काल सुचारू बनाया जाए। • वितरण प्रणाली में पारदर्शिता लाई जाए ताकि कालाबाजारी की संभावना न रहे। • उपभोक्ताओं के लिए एजेंसी पर बुनियादी सुविधाएं (छाया और पानी) उपलब्ध हों। फिलहाल, कुदरा की जनता टकटकी लगाए प्रशासन की ओर देख रही है कि कब उनकी रसोई में फिर से गैस चूल्हा जलेगा और उन्हें इन लंबी कतारों से मुक्ति मिलेगी।2
- उत्तर प्रदेश के चन्दौली जिले के बबुरी थाना क्षेत्र में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। जहाँ एक पत्नी ने अपने ननदोई के साथ मिलकर अपने ही पति की गला घोंटकर हत्या कर दी और इसे आत्महत्या का रूप देने की कोशिश की। पुलिस की तत्परता और गहन पूछताछ में दोनों आरोपियों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है। देखिये पूरी ख़बर1
- कैमूर। जिले के कुदरा नगर पंचायत क्षेत्र में मंगलवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब स्थानीय नगरवासी राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा बनाए जा रहे नाले की दिशा और गुणवत्ता को लेकर सड़कों पर उतर आए। कुदरा थाना के समीप चल रहे इस निर्माण कार्य को गलत बताते हुए लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया और काम को बीच में ही रुकवा दिया। निर्माण की दिशा पर उठे सवाल बता दें कि ग्रामीणों का आरोप है कि नाले का निर्माण गलत दिशा में कराया जा रहा है, जिससे भविष्य में जलजमाव और अन्य समस्याएं पैदा हो सकती हैं। प्रदर्शन के दौरान जब लोगों ने मौके पर मौजूद सुपरवाइजर से तकनीकी जानकारी मांगी, तो वह कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सके, जिससे नागरिकों का आक्रोश और बढ़ गया। मौके पर पहुँचे जनप्रतिनिधि वही हंगामे की सूचना मिलते ही नगर अध्यक्ष सुरेंद्र पाल घटनास्थल पर पहुंचे और आक्रोशित लोगों को शांत कराया। इस दौरान उनके साथ पूर्व मुखिया अशोक कुमार, संजू पाण्डेय और विभिन्न वार्डों के सदस्य भी मौजूद रहे। सभी जनप्रतिनिधियों ने एक सुर में निर्माण कार्य की प्रक्रिया पर आपत्ति जताई। अधिकारियों को दी गई चेतावनी वही मामले की गंभीरता को देखते हुए पूर्व मुखिया अशोक कुमार ने NHAI के वरीय अधिकारियों से फोन पर बात कर उन्हें स्थिति से अवगत कराया और तुरंत कार्रवाई की मांग की। वहीं, नगर अध्यक्ष सुरेंद्र पाल ने प्रशासन पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि "इस संबंध में जिलाधिकारी को पहले ही लिखित आवेदन दिया जा चुका है। इसके बावजूद बिना जांच के काम शुरू करना गलत है। अगर बिना सुधार के दोबारा काम शुरू हुआ, तो हम जन आंदोलन को और उग्र करेंगे।" फिलहाल निर्माण कार्य बंद है और स्थानीय लोग अब जिला प्रशासन के हस्तक्षेप तथा तकनीकी जांच का इंतजार कर रहे हैं।2