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जालौन में सीबीआई की छापेमारी, सीबीआई ने रेलवे के 3 कर्मचारियों
इंडिया न्यूज यूपी एक्सप्रेस
जालौन में सीबीआई की छापेमारी, सीबीआई ने रेलवे के 3 कर्मचारियों
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- जालौन में सीबीआई की छापेमारी, सीबीआई ने रेलवे के 3 कर्मचारियों1
- #Apkiawajdigital बांदा/चित्रकूट | इंसानियत को शर्मसार करने वाले बांदा के बहुचर्चित 'चाइल्ड एब्यूज' मामले में शुक्रवार को विशेष पॉक्सो अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया। कोर्ट ने 34 मासूम बच्चों का यौन शोषण करने और उनके अश्लील वीडियो पोर्न साइट्स पर बेचने के दोषी मुख्य अभियुक्त रामभवन और उसकी सहयोगी पत्नी दुर्गावती को फांसी की सजा सुनाई है। अदालत के इस फैसले ने समाज में एक कड़ा संदेश दिया है कि बच्चों के खिलाफ होने वाले जघन्य अपराधों के लिए कानून में कोई माफी नहीं है। साक्ष्यों से छेड़छाड़ पर पत्नी को भी सजा-ए-मौत चित्रकूट में सिंचाई विभाग में तैनात रहा रामभवन पिछले कुछ वर्षों से निलंबित चल रहा था। सीबीआई ने 2020 में इस मामले की कमान संभाली थी और चार्जशीट दाखिल की थी। जांच में पाया गया कि रामभवन मासूमों को अपनी हवस का शिकार बनाता था, वहीं उसकी पत्नी दुर्गावती साक्ष्यों को मिटाने और गवाहों को धमकाने में बराबर की साझीदार थी। अदालत ने दोनों की भूमिका को अक्षम्य मानते हुए फांसी के फंदे तक पहुँचाया। प्रमुख बिंदु: एक नजर में दोषी: रामभवन (निलंबित कनिष्ठ सहायक, सिंचाई विभाग) और उसकी पत्नी दुर्गावती। जुर्म: 34 मासूमों से कुकर्म, अश्लील वीडियो बनाना और उन्हें डार्क वेब/पोर्न साइट्स पर बेचना। मुआवजा: माननीय न्यायालय ने उत्तर प्रदेश सरकार को आदेश दिया है कि प्रत्येक पीड़ित बच्चे को 10-10 लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान की जाए। CBI की भूमिका: दिल्ली से आई सीबीआई टीम ने वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर इस पूरे सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया था। न्यायालय की टिप्पणी मामले की गंभीरता और दरिंदगी की सीमा को देखते हुए, पॉक्सो कोर्ट ने इसे 'रेयरेस्ट ऑफ रेयर' श्रेणी के करीब माना। अधिवक्ताओं के अनुसार, ट्रायल के दौरान पेश किए गए साक्ष्य इतने पुख्ता थे कि बचाव पक्ष के पास कोई ठोस दलील नहीं बची थी।1
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- बांदा की विशेष पॉक्सो अदालत ने आज एक ऐतिहासिक और कठोर फैसला सुनाते हुए बच्चों के खिलाफ जघन्य अपराध करने वाले सिंचाई विभाग के जूनियर इंजीनियर (जेई) रामभवन और उनकी पत्नी दुर्गावती को फांसी की सजा सुनाई है। यह फैसला न केवल न्याय की जीत है, बल्कि समाज को यह संदेश भी देता है कि मासूम बच्चों के साथ हैवानियत करने वालों को कोई बख्शीश नहीं मिलेगी। 31 अक्टूबर 2020 को चित्रकूट जिले में सिंचाई विभाग में तैनात जेई रामभवन पर 3 से 18 वर्ष के कम से कम 33 मासूम बच्चों के साथ दुष्कर्म करने, उनके अश्लील वीडियो बनाकर डार्क वेब और इंटरनेशनल प्लेटफॉर्म्स पर अपलोड करने का मामला सामने आया था। आरोपी ने इन वीडियो को लगभग 47 देशों में बेचकर और प्रसारित करके अपराध की कमाई की थी। जांच में बड़ा खुलासा हुआ कि इस क्रूर कृत्य में उसकी पत्नी दुर्गावती भी पूरी तरह शामिल थी। सीबीआई ने इस संवेदनशील मामले की जांच संभाली, इंटरपोल और विदेशी एजेंसियों से प्राप्त जानकारी के आधार पर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया। सीबीआई ने 79 गवाहों (जिनमें 29 पीड़ित बच्चे शामिल) के बयान दर्ज किए, डिजिटल साक्ष्य जब्त किए और घटनास्थल से महत्वपूर्ण सबूत बरामद किए। चार्जशीट दाखिल होने के बाद बांदा की विशेष पॉक्सो अदालत में लंबी सुनवाई चली। विशेष न्यायाधीश प्रदीप कुमार मिश्रा ने फैसला सुनाते हुए कहा कि यह अपराध "सबसे दुर्लभ में दुर्लभ" श्रेणी का है। अदालत ने दोनों पति-पत्नी को मौत की सजा सुनाई और आदेश दिया कि उन्हें "मरते दम तक फंदे पर लटकाया जाए"। साथ ही, राज्य सरकार को निर्देश दिए गए कि प्रत्येक पीड़ित बच्चे को 10-10 लाख रुपये की अनुग्रह राशि दी जाए। आरोपी के पास से बरामद धनराशि भी पीड़ित बच्चों में वितरित की जाए। यह फैसला पिछले 6 महीनों में इस अदालत द्वारा सुनाई गई तीसरी फांसी की सजा है, जो बच्चों के खिलाफ अपराधों पर न्यायपालिका के सख्त रवैये को दर्शाता है। सीबीआई के अधिकारी और उनके अधिवक्ता फैसले के समय मौजूद रहे। शासकीय अधिवक्ता सौरभ सिंह ने पैरवी में अहम भूमिका निभाई। यह फैसला उन 33 निर्दोष बच्चों के लिए न्याय की एक किरण है, जिनकी मासूमियत को कुचलने की कोशिश की गई थी। समाज को ऐसे राक्षसों से सतर्क रहने और बच्चों की सुरक्षा को सर्वोपरि बनाने की जरूरत है।1
- Post by Mamta chaurasiya4
- ग्राम सभाओं की अनुमति के पाँचवी अनुसूचित क्षेत्रों में प्लांट स्थापित कर पीढ़ियों से रहने वाले आदिवासियों को उनकी जमीनों से जबरन विस्थापित करने के डर से ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखने को मिला। सरकार आदिवासियों की जमीन औद्योगिक परियोजनाओं के लिए, वाइल्ड लाइफ सेंचुरी के लिए जमीन लेकर आदिवासियों को जबरन विस्थापित करने का काम कर रही है। उसी का नतीजा है आज ग्रामीण इलाकों में सरकार के खिलाफ आक्रोश देखने को मिल रहा है।1
- Post by Hari Singh1
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- माननीय मुख्यमंत्री श्री MYogiAdityanath जी द्वारा शिक्षामित्रों एवं अनुदेशकों के मानदेय बढ़ाने का निर्णय निश्चय ही अत्यंत सराहनीय एवं ऐतिहासिक है। आगामी अप्रैल माह से शिक्षामित्रों को ₹18,000 तथा अनुदेशकों को ₹17,000 मानदेय प्रदान किया जाएगा। यह निर्णय प्रदेश के लाखों शिक्षामित्रों एवं अनुदेशकों के अथक परिश्रम, समर्पण तथा शिक्षा के प्रति उनकी अटूट निष्ठा का सम्मान है। इस महत्वपूर्ण, जनहितकारी एवं प्रेरणादायी निर्णय के लिए माननीय मुख्यमंत्री जी का सादर धन्यवाद एवं उनका हार्दिक अभिनंदन।1