अफवाहों की आग में झुलस रहा आम आदमी,सोशल मीडिया पर पेट्रोल-डीजल की किल्लत की खबरें निकलीं फर्जी, फारूख हुसैन लेख आज हम एक ऐसे डिजिटल युग में पहुंच चुके हैं जहां आपका सोचना लेश मात्र ही हकीकत के रूप में दिखाई देने लगता है जहां लोग अब सामाजिक रिश्तों को पछाड़कर हाथों में सेल फोन जैसे आधुनिक यंत्र लेकर चल रहे हैं ऐसा लगता है यह मशीन उपकरण इंसान नहीं चला रहे हैं बल्कि खुद यंत्र इंसानों को अपने काबू में किए हुए हैं और यही नहीं डिजिटलयुग में सोशल मीडिया जहाँ सूचनाओं का त्वरित माध्यम बना है, वहीं गैर-जिम्मेदाराना पोस्ट आम जनता के लिए अब मुसीबत का सबब भी बन रही हैं। पिछले कुछ दिनों से इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप और फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म्स पर पेट्रोल और डीजल की भारी किल्लत होने के दावों ने जनजीवन में एक बड़ा भूचाल ला दिया है। आलम यह है कि इन फर्जी खबरों के खौफ में लोग सुबह से लेकर देर रात तक पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारों में खड़े दिखाई दे रहे हैं और इसे दावे की आग राजधानी लखनऊ, कानपुर, वाराणसी, मेरठ और बुंदेलखंड के जिलों सहित अन्य जिलों के साथ-साथ लखीमपुर खीरी जिले सहित पूरे तराई के इलाकों में देखी गई, इस बेतहाशा भीड़ के कारण न केवल कानून-व्यवस्था चरमरा रही है, बल्कि पेट्रोल पंपों पर तैनात सुरक्षाकर्मियों और कर्मचारियों के भी पसीने छूट रहे हैं। लोग समझाने-बुझाने के बावजूद यह मानने को तैयार नहीं हैं कि देश में ईंधन का कोई वास्तविक संकट नहीं है। गौरतलब है कि बाजारों में इस समय स्थिति अत्यंत तनावपूर्ण बनी हुई है। पेट्रोल-डीजल को स्टॉक करने की होड़ में लोग आपस में झगड़ा करने पर भीज्ञउतारू हैं, इसी अफरातफरी का फायदा उठाकर कुछ असामाजिक तत्वों ने ईंधन की कालाबाजारी और ब्लैकमेलिंग शुरू कर दी है।लोग बोतलों और ड्रमों में पेट्रोल भरकर ऊंचे दामों पर बेच रहे हैं,जिससे गरीब और मध्यम वर्ग की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। लेकिन इन सब से ज्यादा परेशानी हमारे अन्नदाता यानी कि किसानों को उठानी पड़ रही है। उत्तर प्रदेश का किसान, जो वर्तमान में खेती के महत्वपूर्ण कार्यों में जुटा है, इस अफवाह के कारण सबसे अधिक मानसिक तनाव में है। लखीमपुर से लेकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गन्ना बेल्ट तक, किसान अपने ट्रैक्टरों और इंजनों के लिए महीनों का स्टॉक जमा करने की जुगत में लगे हैं ताकि भविष्य में उन्हें महंगे दामों पर ईंधन न खरीदना पड़े या उनकी फसल की सिंचाई न रुक जाए। प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा लगातार यह अपील की जा रही है कि लोग इन निराधार अफवाहों पर ध्यान न दें, लेकिन सोशल मीडिया का 'खौफ' कम होने का नाम नहीं ले रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार सरकारी जांच में यह स्पष्ट रूप से पाया गया है कि सोशल मीडिया पर किए जा रहे ये दावे पूरी तरह से मनगढ़ंत और फर्जी हैं। इस पूरे बवाल की जड़ में एक विशेष 'रील' है, जिसमें यह भ्रामक दावा किया गया है कि ईरान द्वारा 'हॉर्मुज स्ट्रेट' को बंद कर दिया गया है, जिससे भारत में कच्चे तेल की सप्लाई पूरी तरह ठप हो जाएगी। साथ ही, पानीपत रिफाइनरी के कुछ पुराने और असंबद्ध वीडियो को वर्तमान की 'हड़ताल' बताकर पेश किया जा रहा है। इन भ्रामक सूचनाओं ने प्रदेश के हर जिले में एक 'पैनिक बाइंग' (घबराहट में खरीदारी) की स्थिति पैदा कर दी है। इस स्थिति पर स्पष्टीकरण देते हुए इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन ने आधिकारिक तौर पर कहा है कि वितरण नेटवर्क में कोई बाधा नहीं है और पानीपत रिफाइनरी का संचालन सुचारु रूप से जारी है। कंपनी ने अपने आधिकारिक 'X' (ट्विटर) हैंडल पर कड़े शब्दों में स्पष्ट किया है कि ईंधन की कमी को लेकर फैल रही खबरें पूरी तरह से बेबुनियाद हैं और भारत के पास अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त सामरिक तेल रिजर्व मौजूद है। इसके साथ-साथ भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी दिग्गज कंपनियों ने भी संयुक्त रूप से इस बात की पुष्टि की है कि सप्लाई चेन पूरी तरह सामान्य है और आने वाले समय में भी किसी प्रकार की कमी की कोई आशंका नहीं है। अधिकारियों के द्वारा भी सख्त लहजे में चेतावनी दी जा रही है कि जो भी व्यक्ति या डिजिटल प्लेटफॉर्म ऐसी भ्रामक खबरें फैलाएगा, उसके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। और लगातार लोगों को सोशल मीडिया के माध्यम से समझाया अभी जा रहा है और बताया भी जा रहा है कि पेट्रोल और डीजल की कमी होने की खबर पूरी तरीके से गलत है। अक्सर देखा जाता है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में मामूली उतार-चढ़ाव की खबरों को कुछ लोग अपने फायदे के लिए तोड़-मरोड़कर पेश करते हैं, जिससे आम जनता पैनिक में आ जाती है। अब समय आ गया है कि ऐसी फर्जी खबरें फैलाने वाले तत्वों पर नकेल कसी जाए, क्योंकि ऐसी अफवाहें न केवल व्यक्तिगत स्तर पर लोगों को शारीरिक और मानसिक कष्ट पहुँचाती हैं, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था और कानून-व्यवस्था को भी गहरी चोट पहुँचाती हैं। मासूम नागरिक अक्सर इन डिजिटल साजिशों का शिकार बन जाते हैं, जिससे बचने के लिए जागरूक होना ही एकमात्र विकल्प है।
अफवाहों की आग में झुलस रहा आम आदमी,सोशल मीडिया पर पेट्रोल-डीजल की किल्लत की खबरें निकलीं फर्जी, फारूख हुसैन लेख आज हम एक ऐसे डिजिटल युग में पहुंच चुके हैं जहां आपका सोचना लेश मात्र ही हकीकत के रूप में दिखाई देने लगता है जहां लोग अब सामाजिक रिश्तों को पछाड़कर हाथों में सेल फोन जैसे आधुनिक यंत्र लेकर चल रहे हैं ऐसा लगता है यह मशीन उपकरण इंसान नहीं चला रहे हैं बल्कि खुद यंत्र इंसानों को अपने काबू में किए हुए हैं और यही नहीं डिजिटलयुग में सोशल मीडिया जहाँ सूचनाओं का त्वरित माध्यम बना है, वहीं गैर-जिम्मेदाराना पोस्ट आम जनता के लिए अब मुसीबत का सबब भी बन रही हैं। पिछले कुछ दिनों से इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप और फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म्स पर पेट्रोल और डीजल की भारी किल्लत होने के दावों ने जनजीवन में एक बड़ा भूचाल ला दिया है। आलम यह है कि इन फर्जी खबरों के खौफ में लोग सुबह से लेकर देर रात तक पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारों में खड़े दिखाई दे रहे हैं और इसे दावे की आग राजधानी लखनऊ, कानपुर, वाराणसी, मेरठ और बुंदेलखंड के जिलों सहित अन्य जिलों के साथ-साथ लखीमपुर खीरी जिले सहित पूरे तराई के इलाकों में देखी गई, इस बेतहाशा भीड़ के कारण न केवल कानून-व्यवस्था चरमरा रही है, बल्कि पेट्रोल पंपों पर तैनात सुरक्षाकर्मियों और कर्मचारियों के भी पसीने छूट रहे हैं। लोग समझाने-बुझाने के बावजूद यह मानने को तैयार नहीं हैं कि देश में ईंधन का कोई वास्तविक संकट नहीं है। गौरतलब है कि बाजारों में इस समय स्थिति अत्यंत तनावपूर्ण बनी हुई है। पेट्रोल-डीजल को स्टॉक करने की होड़ में लोग आपस में झगड़ा करने पर भीज्ञउतारू हैं, इसी अफरातफरी का फायदा उठाकर कुछ असामाजिक तत्वों ने ईंधन की कालाबाजारी और ब्लैकमेलिंग शुरू कर दी है।लोग बोतलों और ड्रमों में पेट्रोल भरकर ऊंचे दामों पर बेच रहे हैं,जिससे गरीब और मध्यम वर्ग की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। लेकिन इन सब से ज्यादा परेशानी हमारे अन्नदाता यानी कि किसानों को उठानी पड़ रही है। उत्तर प्रदेश का किसान, जो वर्तमान में खेती के महत्वपूर्ण कार्यों में जुटा है, इस अफवाह के कारण सबसे अधिक मानसिक तनाव में है। लखीमपुर से लेकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गन्ना बेल्ट तक, किसान अपने ट्रैक्टरों और इंजनों के लिए महीनों का स्टॉक जमा करने की जुगत में लगे हैं ताकि भविष्य में उन्हें महंगे दामों पर ईंधन न खरीदना पड़े या उनकी फसल की सिंचाई न रुक जाए। प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा लगातार यह अपील की जा रही है कि लोग इन निराधार अफवाहों पर ध्यान न दें, लेकिन सोशल मीडिया का 'खौफ' कम होने का नाम नहीं ले रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार सरकारी जांच में यह स्पष्ट रूप से पाया गया है कि सोशल मीडिया पर किए जा रहे ये दावे पूरी तरह से मनगढ़ंत और फर्जी हैं। इस पूरे बवाल की जड़ में एक विशेष 'रील' है, जिसमें यह भ्रामक दावा किया गया है कि ईरान द्वारा 'हॉर्मुज स्ट्रेट' को बंद कर दिया गया है, जिससे भारत में कच्चे तेल की सप्लाई पूरी तरह ठप हो जाएगी। साथ ही, पानीपत रिफाइनरी के कुछ पुराने और असंबद्ध वीडियो को वर्तमान की 'हड़ताल' बताकर पेश किया जा रहा है। इन भ्रामक सूचनाओं ने प्रदेश के हर जिले में एक 'पैनिक बाइंग' (घबराहट में खरीदारी) की स्थिति पैदा कर दी है। इस स्थिति पर स्पष्टीकरण देते हुए इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन ने आधिकारिक तौर पर कहा है कि वितरण नेटवर्क में कोई बाधा नहीं है और पानीपत रिफाइनरी का संचालन सुचारु रूप से जारी है। कंपनी ने अपने आधिकारिक 'X' (ट्विटर) हैंडल पर कड़े शब्दों में स्पष्ट किया है कि ईंधन की कमी को लेकर फैल रही खबरें पूरी तरह से बेबुनियाद हैं और भारत के पास अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त सामरिक तेल रिजर्व मौजूद है। इसके साथ-साथ भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी दिग्गज कंपनियों ने भी संयुक्त रूप से इस बात की पुष्टि की है कि सप्लाई चेन पूरी तरह सामान्य है और आने वाले समय में भी किसी प्रकार की कमी की कोई आशंका नहीं है। अधिकारियों के द्वारा भी सख्त लहजे में चेतावनी दी जा रही है कि जो भी व्यक्ति या डिजिटल प्लेटफॉर्म ऐसी भ्रामक खबरें फैलाएगा, उसके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। और लगातार लोगों को सोशल मीडिया के माध्यम से समझाया अभी जा रहा है और बताया भी जा रहा है कि पेट्रोल और डीजल की कमी होने की खबर पूरी तरीके से गलत है। अक्सर देखा जाता है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में मामूली उतार-चढ़ाव की खबरों को कुछ लोग अपने फायदे के लिए तोड़-मरोड़कर पेश करते हैं, जिससे आम जनता पैनिक में आ जाती है। अब समय आ गया है कि ऐसी फर्जी खबरें फैलाने वाले तत्वों पर नकेल कसी जाए, क्योंकि ऐसी अफवाहें न केवल व्यक्तिगत स्तर पर लोगों को शारीरिक और मानसिक कष्ट पहुँचाती हैं, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था और कानून-व्यवस्था को भी गहरी चोट पहुँचाती हैं। मासूम नागरिक अक्सर इन डिजिटल साजिशों का शिकार बन जाते हैं, जिससे बचने के लिए जागरूक होना ही एकमात्र विकल्प है।
- Post by Mandeep Singh1
- ब्रेकिंग लखीमपुर खीरी बाघ ने किसान को बनाया अपना निवाला, संपूर्ण नगर बन रेंज के चीमा फार्म की घटना अधखाया हुआ शव गन्ने के खेत से बरामद, वन विभाग की लापरवाही आई सामने3
- दिनांक:- 05/03/२०२६ को पलिया कला में अंकित गुप्ता उर्फ माल्या जिला बदर के आरोपी जिसको पुलिस जिला बदलकर दूसरे जिले में छोड़कर आई थी वह कैसे पहुंचा अपने जिले और अपने घर पुलिस को इसकी कानों कान खबर नहीं पीड़ित अनमोल गुप्ता के पिता ने क्या कुछ कहा मीडिया के सामने और गोलीकांड कितना सच कितना झूठ सुनते हैं इनकी जुबानी गोली कांड के बारे में क्या कुछ कहा अनमोल के पिता शिवकुमार गुप्ता ने4
- पलिया (खीरी): भारत का दिल कहे जाने वाले गाँवों की स्थिति आज भी बदहाल बनी हुई है। हालांकि सरकार ग्रामीण विकास के लिए तमाम महत्वाकांक्षी योजनाएं चला रही है, लेकिन अधिकारियों की लापरवाही और हीलाहवाली के चलते ये योजनाएं धरातल पर आने से पहले ही दम तोड़ देती हैं। ऐसा ही एक मामला पलिया तहसील के ग्राम पट्टी पटवारा से सामने आया है। यहाँ ग्रामीणों को स्वच्छ जल उपलब्ध कराने के लिए सरकार ने लाखों रुपये की लागत से पानी की टंकी का निर्माण तो कराया, लेकिन देखरेख के अभाव में यह शो-पीस बनकर रह गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले कई महीनों से जलापूर्ति ठप है और जिम्मेदार अधिकारी मौन साधे बैठे हैं। यह पहली बार नहीं है जब यहाँ की जनता बूंद-बूंद पानी को तरस रही है। पूर्व में भी महीनों तक सप्लाई बाधित रही थी, जिसे काफी मशक्कत के बाद सुचारू किया गया था। चंद दिनों की राहत के बाद आपूर्ति फिर से ठप हो गई। इस संबंध में ग्राम प्रधान पुत्र मनोज कुमार ने बताया कि गाँव में दो जगहों पर मेन सप्लाई पाइपलाइन खुली होने के कारण पूरे गाँव में पानी नहीं पहुँच पा रहा है। उन्होंने कहा, "इस समस्या को लेकर कई बार उच्च अधिकारियों को अवगत कराया गया है, लेकिन परिणाम अब तक शून्य रहा है।"1
- फारूख हुसैन लेख आज हम एक ऐसे डिजिटल युग में पहुंच चुके हैं जहां आपका सोचना लेश मात्र ही हकीकत के रूप में दिखाई देने लगता है जहां लोग अब सामाजिक रिश्तों को पछाड़कर हाथों में सेल फोन जैसे आधुनिक यंत्र लेकर चल रहे हैं ऐसा लगता है यह मशीन उपकरण इंसान नहीं चला रहे हैं बल्कि खुद यंत्र इंसानों को अपने काबू में किए हुए हैं और यही नहीं डिजिटलयुग में सोशल मीडिया जहाँ सूचनाओं का त्वरित माध्यम बना है, वहीं गैर-जिम्मेदाराना पोस्ट आम जनता के लिए अब मुसीबत का सबब भी बन रही हैं। पिछले कुछ दिनों से इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप और फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म्स पर पेट्रोल और डीजल की भारी किल्लत होने के दावों ने जनजीवन में एक बड़ा भूचाल ला दिया है। आलम यह है कि इन फर्जी खबरों के खौफ में लोग सुबह से लेकर देर रात तक पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारों में खड़े दिखाई दे रहे हैं और इसे दावे की आग राजधानी लखनऊ, कानपुर, वाराणसी, मेरठ और बुंदेलखंड के जिलों सहित अन्य जिलों के साथ-साथ लखीमपुर खीरी जिले सहित पूरे तराई के इलाकों में देखी गई, इस बेतहाशा भीड़ के कारण न केवल कानून-व्यवस्था चरमरा रही है, बल्कि पेट्रोल पंपों पर तैनात सुरक्षाकर्मियों और कर्मचारियों के भी पसीने छूट रहे हैं। लोग समझाने-बुझाने के बावजूद यह मानने को तैयार नहीं हैं कि देश में ईंधन का कोई वास्तविक संकट नहीं है। गौरतलब है कि बाजारों में इस समय स्थिति अत्यंत तनावपूर्ण बनी हुई है। पेट्रोल-डीजल को स्टॉक करने की होड़ में लोग आपस में झगड़ा करने पर भीज्ञउतारू हैं, इसी अफरातफरी का फायदा उठाकर कुछ असामाजिक तत्वों ने ईंधन की कालाबाजारी और ब्लैकमेलिंग शुरू कर दी है।लोग बोतलों और ड्रमों में पेट्रोल भरकर ऊंचे दामों पर बेच रहे हैं,जिससे गरीब और मध्यम वर्ग की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। लेकिन इन सब से ज्यादा परेशानी हमारे अन्नदाता यानी कि किसानों को उठानी पड़ रही है। उत्तर प्रदेश का किसान, जो वर्तमान में खेती के महत्वपूर्ण कार्यों में जुटा है, इस अफवाह के कारण सबसे अधिक मानसिक तनाव में है। लखीमपुर से लेकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गन्ना बेल्ट तक, किसान अपने ट्रैक्टरों और इंजनों के लिए महीनों का स्टॉक जमा करने की जुगत में लगे हैं ताकि भविष्य में उन्हें महंगे दामों पर ईंधन न खरीदना पड़े या उनकी फसल की सिंचाई न रुक जाए। प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा लगातार यह अपील की जा रही है कि लोग इन निराधार अफवाहों पर ध्यान न दें, लेकिन सोशल मीडिया का 'खौफ' कम होने का नाम नहीं ले रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार सरकारी जांच में यह स्पष्ट रूप से पाया गया है कि सोशल मीडिया पर किए जा रहे ये दावे पूरी तरह से मनगढ़ंत और फर्जी हैं। इस पूरे बवाल की जड़ में एक विशेष 'रील' है, जिसमें यह भ्रामक दावा किया गया है कि ईरान द्वारा 'हॉर्मुज स्ट्रेट' को बंद कर दिया गया है, जिससे भारत में कच्चे तेल की सप्लाई पूरी तरह ठप हो जाएगी। साथ ही, पानीपत रिफाइनरी के कुछ पुराने और असंबद्ध वीडियो को वर्तमान की 'हड़ताल' बताकर पेश किया जा रहा है। इन भ्रामक सूचनाओं ने प्रदेश के हर जिले में एक 'पैनिक बाइंग' (घबराहट में खरीदारी) की स्थिति पैदा कर दी है। इस स्थिति पर स्पष्टीकरण देते हुए इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन ने आधिकारिक तौर पर कहा है कि वितरण नेटवर्क में कोई बाधा नहीं है और पानीपत रिफाइनरी का संचालन सुचारु रूप से जारी है। कंपनी ने अपने आधिकारिक 'X' (ट्विटर) हैंडल पर कड़े शब्दों में स्पष्ट किया है कि ईंधन की कमी को लेकर फैल रही खबरें पूरी तरह से बेबुनियाद हैं और भारत के पास अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त सामरिक तेल रिजर्व मौजूद है। इसके साथ-साथ भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी दिग्गज कंपनियों ने भी संयुक्त रूप से इस बात की पुष्टि की है कि सप्लाई चेन पूरी तरह सामान्य है और आने वाले समय में भी किसी प्रकार की कमी की कोई आशंका नहीं है। अधिकारियों के द्वारा भी सख्त लहजे में चेतावनी दी जा रही है कि जो भी व्यक्ति या डिजिटल प्लेटफॉर्म ऐसी भ्रामक खबरें फैलाएगा, उसके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। और लगातार लोगों को सोशल मीडिया के माध्यम से समझाया अभी जा रहा है और बताया भी जा रहा है कि पेट्रोल और डीजल की कमी होने की खबर पूरी तरीके से गलत है। अक्सर देखा जाता है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में मामूली उतार-चढ़ाव की खबरों को कुछ लोग अपने फायदे के लिए तोड़-मरोड़कर पेश करते हैं, जिससे आम जनता पैनिक में आ जाती है। अब समय आ गया है कि ऐसी फर्जी खबरें फैलाने वाले तत्वों पर नकेल कसी जाए, क्योंकि ऐसी अफवाहें न केवल व्यक्तिगत स्तर पर लोगों को शारीरिक और मानसिक कष्ट पहुँचाती हैं, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था और कानून-व्यवस्था को भी गहरी चोट पहुँचाती हैं। मासूम नागरिक अक्सर इन डिजिटल साजिशों का शिकार बन जाते हैं, जिससे बचने के लिए जागरूक होना ही एकमात्र विकल्प है।1
- Lakhimpur Kheri Uttar Pradesh1
- वन विभाग को मिली सफलता,तेंदुए को पिंजड़े में किया कैद निघासन खीरी दक्षिण निघासन रेंज में बिहारीपुरवा गांव के अलावा गोविंदपुर फार्म में लगातार तेंदुए का आतंक ग्रामीणों को सता रहा था,कई पालतू जानवरों को निगलने के बाद वन दरोगा अखिलेश रावत ने ठीक निशाने पर तेंदुए को पकड़ने का बिछाया जाल,आखिरकार वन दरोगा अखिलेश रावत की टीम को मिली सफलता,दो घंटे के भीतर ही तेंदुआ पिंजड़े में हुआ कैद,आस पास के ग्रामीणों को मिली राहत,वन विभाग अपने दावे पर खरा उतरा,वन दरोगा अखिलेश रावत समेत वन कर्मियों की सराहना कर रहे ग्रामीण।1
- लखीमपुर खीरी के निघासन क्षेत्र की दक्षिण वन रेंज के अंतर्गत गोविंदपुर फार्म में पिछले कई दिनों से तेंदुए का आतंक बना हुआ था। बन विभाग n किया रेस्क्यू1