पलामू में खाद की भारी कालाबाजारी: थोक विक्रेताओं की मनमानी से किसान बेहाल, युवा समाजसेवी अजय कुमार गुप्ता ने उपायुक्त को सौंपा ज्ञापन। पलामू में खाद की भारी कालाबाजारी: थोक विक्रेताओं की मनमानी से किसान बेहाल, युवा समाजसेवी अजय कुमार गुप्ता ने उपायुक्त को सौंपा ज्ञापन। ऊंटारी रोड / पलामू: पलामू जिले में यूरिया और DAP खाद की कालाबाजारी चरम पर है, जिससे किसानों पर आर्थिक बोझ असहनीय हो गया है। थोक विक्रेताओं और एजेंसियों द्वारा निर्धारित प्रिंट रेट से काफी अधिक दर पर खाद बेचे जाने के खिलाफ युवा समाजसेवी सह पूर्व जिला परिषद् प्रत्याशी अजय कुमार गुप्ता ने मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने पलामू उपायुक्त को ज्ञापन सौंपकर इस पूरी धांधली की उच्चस्तरीय जांच कराने और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। प्रिंट रेट से अधिक वसूली, किसान पस्त मिली जानकारी के अनुसार, थोक विक्रेता खुदरा दुकानदारों (रिटेलर्स) को ही यूरिया ₹320 प्रति बोरी तथा DAP (18:46) ₹1900 प्रति बोरी की दर से उपलब्ध करा रहे हैं। इसके कारण खुदरा व्यापारी मजबूरी में किसानों को यूरिया ₹380 से ₹400 और DAP ₹2200 तक बेचने को विवश हैं। सरकार द्वारा किसानों को दी जाने वाली सब्सिडी का सीधा लाभ बिचौलियों और थोक व्यापारियों की जेब में जा रहा है। ज्ञापन सौंपकर मांग: 'खाता जांच से सामने आएगी पूरी धांधली' उपायुक्त पलामू को सौंपे ज्ञापन में अजय कुमार गुप्ता ने कहा कि जिले के किसानों का शोषण किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि जिले की सभी थोक खाद एजेंसियों के बिक्री रजिस्टर, बिल बुक और बैंक खातों की निष्पक्ष जांच (Audit) कराई जाए। अजय गुप्ता ने कहा, "यदि थोक विक्रेताओं के खातों की जांच होगी, तो यह सच तुरंत उजागर हो जाएगा कि रिटेलर्स को किस दर पर खाद दी जा रही है। अवैध वसूली करने वाली एजेंसियों का लाइसेंस रद्द कर उन पर 'आवश्यक वस्तु अधिनियम' के तहत मामला दर्ज किया जाना चाहिए।" उन्होंने जिला प्रशासन से अविलंब प्रखंड स्तर पर सरकारी दर पर यूरिया और DAP की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने की अपील की है, ताकि किसानों को राहत मिल सके। उपायुक्त पलामू ने बातों को गंभीरता से सुनते हुए आवश्यक कार्रवाई करने का भरोसा दिया हैं। उपायुक्त पलामू ने कहां हैं कि ये बहुत बड़ी गंभीर विषय हैं इस पर हम उच्चस्तरीय जांच जरूर करेंगे।
पलामू में खाद की भारी कालाबाजारी: थोक विक्रेताओं की मनमानी से किसान बेहाल, युवा समाजसेवी अजय कुमार गुप्ता ने उपायुक्त को सौंपा ज्ञापन। पलामू में खाद की भारी कालाबाजारी: थोक विक्रेताओं की मनमानी से किसान बेहाल, युवा समाजसेवी अजय कुमार गुप्ता ने उपायुक्त को सौंपा ज्ञापन। ऊंटारी रोड / पलामू: पलामू जिले में यूरिया और DAP खाद की कालाबाजारी चरम पर है, जिससे किसानों पर आर्थिक बोझ असहनीय हो गया है। थोक विक्रेताओं और एजेंसियों द्वारा निर्धारित प्रिंट रेट से काफी अधिक दर पर खाद बेचे जाने के खिलाफ युवा समाजसेवी सह पूर्व जिला परिषद् प्रत्याशी अजय कुमार गुप्ता ने मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने पलामू उपायुक्त को ज्ञापन सौंपकर इस पूरी धांधली की उच्चस्तरीय जांच कराने और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। प्रिंट रेट से अधिक वसूली, किसान पस्त मिली जानकारी के अनुसार, थोक विक्रेता खुदरा दुकानदारों (रिटेलर्स) को ही यूरिया ₹320 प्रति बोरी तथा DAP (18:46) ₹1900 प्रति बोरी की दर से उपलब्ध करा रहे हैं। इसके कारण खुदरा व्यापारी मजबूरी में किसानों को यूरिया ₹380 से ₹400 और DAP ₹2200 तक बेचने को विवश हैं। सरकार द्वारा किसानों को दी जाने वाली सब्सिडी का
सीधा लाभ बिचौलियों और थोक व्यापारियों की जेब में जा रहा है। ज्ञापन सौंपकर मांग: 'खाता जांच से सामने आएगी पूरी धांधली' उपायुक्त पलामू को सौंपे ज्ञापन में अजय कुमार गुप्ता ने कहा कि जिले के किसानों का शोषण किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि जिले की सभी थोक खाद एजेंसियों के बिक्री रजिस्टर, बिल बुक और बैंक खातों की निष्पक्ष जांच (Audit) कराई जाए। अजय गुप्ता ने कहा, "यदि थोक विक्रेताओं के खातों की जांच होगी, तो यह सच तुरंत उजागर हो जाएगा कि रिटेलर्स को किस दर पर खाद दी जा रही है। अवैध वसूली करने वाली एजेंसियों का लाइसेंस रद्द कर उन पर 'आवश्यक वस्तु अधिनियम' के तहत मामला दर्ज किया जाना चाहिए।" उन्होंने जिला प्रशासन से अविलंब प्रखंड स्तर पर सरकारी दर पर यूरिया और DAP की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने की अपील की है, ताकि किसानों को राहत मिल सके। उपायुक्त पलामू ने बातों को गंभीरता से सुनते हुए आवश्यक कार्रवाई करने का भरोसा दिया हैं। उपायुक्त पलामू ने कहां हैं कि ये बहुत बड़ी गंभीर विषय हैं इस पर हम उच्चस्तरीय जांच जरूर करेंगे।
- भाजपा नेता किशोर पांडेय ने विश्रामपुर में चलाया जनसंपर्क अभियान भाजपा के वरिष्ठ नेता सह सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता किशोर पांडेय ने विश्रामपुर विधानसभा क्षेत्र के कई गांवों का दौरा किया। इस क्रम में वे रेहला,बी-मोड़, गोदरमा,शंखा,कुड़ी,कमता,कधवन सहित दर्जन भर गांवों के लोगों से मिलकर उन्हें अभियान से जुड़ने की अपील की।1
- सलोनी कुमारी का सबसे पहला नशा मुक्ति (शराबबंदी) से जुड़ा गाना सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसके बोल "नशा छोड़ के ना... दारू ना पीना भैया" (2) वायरल गर्ल सलोनी कुमारी (Viral Girl Saloni Kumari) का दूसरा सबसे ज्यादा चर्चा में आया और वायरल हुआ गीत "पापा के पगड़िया" (Gire Mat Diha Beti, Papa Ke Pagadiya) है। वायरल होने की कहानी स्कूली जीवन: बिहार के रोहतास जिले की रहने वाली सलोनी कुमारी सबसे पहले अपने सरकारी स्कूल में सुरीली आवाज़ में सामाजिक और नशा-मुक्ति गीत गाकर चर्चा में आई थीं। पहला वीडियो: उनका स्कूल और स्थानीय परिवेश में गाया गया नशा-मुक्ति गीत लोगों को बहुत पसंद आया और वह रातों-रात इंटरनेट पर वायरल हो गईं। अन्य प्रसिद्ध गीत: इसके बाद उनके अन्य गीत जैसे "गिरे मत दिहा बेटी, पापा के पगड़िया" ने भी बहुत लोकप्रियता हासिल की। (2) गीत की मुख्य जानकारीगीत का नाम: पापा के पगड़िया (Papa Ke Pagadiya)गायक: सलोनी कुमारीगीतकार: समुंदर सिंहविषय: यह गीत बेटियों को समाज में संभलकर चलने और पिता की पगड़ी (इज्जत) का हमेशा मान रखने का संदेश देता है।1
- गढ़वा। हाइड्रोलिक मशीन द्वारा कार को ऊपर उठाकर आधुनिक तरीके से कार वॉशिंग सेंटर — मझिआंव रोड, गढ़वा। हाइड्रोलिक मशीन द्वारा कार को ऊपर उठाकर आधुनिक तरीके से कार वॉशिंग सेंटर — मझिआंव रोड, गढ़वा।1
- भीषण सड़क हादसा: बिजली पोल से टकराई बाइक, दो बच्चे गंभीर हेमंत कुमारकी रिपोर्ट चिनिया थाना क्षेत्र के चिनिया-रंका मुख्य सड़क पर बड़का नाला से कुछ दूरी ऊपर मंगलवार की सुबह करीब 11 बजे भीषण मोटरसाइकिल दुर्घटना में दो बच्चे गंभीर रूप से घायल हो गए। मिली जानकारी के अनुसार डंडई थाना क्षेत्र के बालेखाड़ गांव निवासी दयाशंकर सिंह अपने बहनोई चिनिया थाना क्षेत्र के सरोइदोहर निवासी सुरेश सिंह और अपने भांजे के साथ मोटरसाइकिल से जा रहे थे। इसी दौरान बाइक अनियंत्रित होकर सड़क किनारे बिजली के पोल से जा टकराई। हादसे में बाइक सवार सभी लोग घायल हो गए, जबकि दो बच्चे मनीष कुमार उम्र 4 वर्ष तथा अंशु कुमारी 3 वर्ष की स्थिति गंभीर बताई जा रही है, दोनों के सर पर गंभीर चोटे आई हैं। स्थानीय लोगों की मदद से सभी घायलों को चिनिया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद दोनों बच्चों को बेहतर इलाज के लिए गढ़वा सदर अस्पताल रेफर कर दिया गया। घटना की सूचना मिलते ही चिनिया थाना प्रभारी विकु कुमार रजक के निर्देश पर एएसआई काशी भूषण पुलिस बल के साथ अस्पताल पहुंचे और घायलों को बेहतर इलाज के लिए गढ़वा भेजने में सहयोग किया।1
- तेज बारिश से रंका के जोलंगा में दो महिलाओं के घर गिरे, बाल-बाल बचे परिवार रंका प्रखंड के तमगा पंचायत अंतर्गत जोलंगा गांव में तेज बारिश के कारण दो ग्रामीण महिलाओं के कच्चे मकान अचानक धराशायी हो गए। गनीमत रही कि घटना के समय परिवार के सभी सदस्य घर से बाहर थे, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया। घर गिरने के बाद दोनों परिवारों के सामने अब रहने और सिर छुपाने की गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई है। इस संबंध में मंगलवार को दोपहर करीब 3 बजे पीड़ित रुबीया देवी ने बताया कि तेज बारिश के दौरान वह अपने परिवार के साथ घर से बाहर थीं। इसी दौरान अचानक उनका घर भरभरा कर गिर गया। उन्होंने कहा कि यदि परिवार के सदस्य उस समय घर के अंदर होते तो मलबे में दबकर जान जाने की आशंका थी। इसी तरह चंद्रावती देवी का घर भी बारिश के कारण गिर गया। घटना के बाद दोनों परिवारों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है और फिलहाल दूसरे लोगों के घर में रहने को मजबूर हैं। पीड़ित परिवारों ने आवास की मांग को लेकर पंचायत के मुखिया से भी मुलाकात की। मुखिया ने जल्द ही आवास उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया है। वहीं दक्षिणी भाजपा महामंत्री मनोज कुमार ठाकुर ने भी दोनों पीड़ित महिलाओं को भरोसा दिलाया कि उन्हें जल्द प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिलाने के लिए प्रयास किया जाएगा, ताकि दोनों परिवारों को सुरक्षित छत मिल सके और वे अपने घर में सम्मानपूर्वक रह सकें।1
- श्रावण के अंतिम सोमवार को शिवभक्ति में सराबोर रहा महुली-विंढमगंज क्षेत्र श्रावण के अंतिम सोमवार को शिवभक्ति में सराबोर रहा महुली-विंढमगंज क्षेत्र1
- राष्ट्रीय महिला फुटबॉल फेडरेशन की वार्षिक आम सभा जमशेदपुर में हुआ सम्पन्न,कांग्रेसी नेता सह पूर्व विस प्रत्याशी हुये शामिल राष्ट्रीय महिला फुटबॉल फेडरेशन की वार्षिक सामान्य सभा की बैठक जमशेदपुर में पूरे हर्षोल्लास एवं गरिमामय माहौल में संपन्न हुआ। सभा में विश्रामपुर विधानसभा के पूर्व विस प्रत्याशी सह वरीय कांग्रेसी नेता सुधीर कुमार चंद्रवंशी शामिल हुये।1
- मकई के खेत में मिला राजेंद्र यादव का शव, हत्या की आशंका के बीच दो मासूम बेटियों के भविष्य पर सवाल गांव निवासी राजेंद्र यादव का शव सोमवार को उनके घर से करीब 200 मीटर की दूरी पर स्थित मकई के खेत के बीच से बरामद हुआ। शव मिलने की सूचना के बाद गांव में सनसनी फैल गई। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लिया और मामले की जांच शुरू कर दी है। बताया जाता है कि राजेंद्र यादव मानसिक रूप से कुछ कमजोर थे। उनके माता-पिता का पहले ही निधन हो चुका है। परिवार में उनका एक बड़ा भाई कन्हाई यादव है, जो फिलहाल रायपुर में मजदूरी करने गए हुए थे। घटना की सूचना मिलने के बाद कन्हाई यादव गांव के लिए रवाना हो गए हैं। राजेंद्र यादव की पत्नी का भी करीब पांच से सात वर्ष पहले बीमारी के कारण निधन हो चुका है। उनकी दो बेटियां हैं, जिनके पालन-पोषण और देखभाल का एकमात्र सहारा उनके पिता राजेंद्र यादव ही थे। ऐसे में राजेंद्र यादव की मौत के बाद दोनों मासूम बेटियों के सामने सबसे बड़ा सवाल उनके भविष्य और देखभाल का खड़ा हो गया है। पुलिस ने सोमवार शाम मौके पर पहुंचकर शव को अपने कब्जे में लिया और जांच शुरू की। शव पर चोट के निशान बताए जा रहे हैं। नाक से खून निकलने और जीभ बाहर निकली होने की बात भी सामने आई है। इन परिस्थितियों को देखते हुए प्रथम दृष्टया मामला संदिग्ध माना जा रहा है और हत्या की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि, मौत का वास्तविक कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस की जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। जानकारी के अनुसार आज सुबह करीब 10 बजे तक पोस्टमार्टम के बाद शव के गांव पहुंचने की उम्मीद है, जिसके बाद अंतिम संस्कार किया जाएगा। लेकिन सवाल सिर्फ अंतिम संस्कार तक सीमित नहीं है। राजेंद्र यादव की मौत के बाद उनकी दोनों बेटियों का क्या होगा? उनकी देखभाल कौन करेगा? इस घटना के पीछे कौन है? राजेंद्र यादव की मौत कब और किन परिस्थितियों में हुई? उनका मोबाइल फोन कहां है और इस समय किसके पास है? इन तमाम सवालों के जवाब मिलना जरूरी है। ग्रामीणों की मांग है कि पुलिस मामले की निष्पक्ष और गहन जांच करे तथा यदि यह हत्या है तो इसके पीछे शामिल लोगों की पहचान कर उन्हें कानून के दायरे में लाया जाए। साथ ही प्रशासन को राजेंद्र यादव की दोनों बेटियों के भविष्य और सुरक्षा को लेकर भी तत्काल पहल करनी चाहिए। सिर्फ शव का अंतिम संस्कार कर देना इस घटना का समाधान नहीं है। असली सवाल यह है कि राजेंद्र यादव की मौत की सच्चाई सामने कब आएगी और उनके पीछे छूट गईं दो मासूम बेटियों को न्याय और सहारा कौन देगा? मकई के खेत में मिला राजेंद्र यादव का शव, हत्या की आशंका के बीच दो मासूम बेटियों के भविष्य पर सवाल गांव निवासी राजेंद्र यादव का शव सोमवार को उनके घर से करीब 200 मीटर की दूरी पर स्थित मकई के खेत के बीच से बरामद हुआ। शव मिलने की सूचना के बाद गांव में सनसनी फैल गई। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लिया और मामले की जांच शुरू कर दी है। बताया जाता है कि राजेंद्र यादव मानसिक रूप से कुछ कमजोर थे। उनके माता-पिता का पहले ही निधन हो चुका है। परिवार में उनका एक बड़ा भाई कन्हाई यादव है, जो फिलहाल रायपुर में मजदूरी करने गए हुए थे। घटना की सूचना मिलने के बाद कन्हाई यादव गांव के लिए रवाना हो गए हैं। राजेंद्र यादव की पत्नी का भी करीब पांच से सात वर्ष पहले बीमारी के कारण निधन हो चुका है। उनकी दो बेटियां हैं, जिनके पालन-पोषण और देखभाल का एकमात्र सहारा उनके पिता राजेंद्र यादव ही थे। ऐसे में राजेंद्र यादव की मौत के बाद दोनों मासूम बेटियों के सामने सबसे बड़ा सवाल उनके भविष्य और देखभाल का खड़ा हो गया है। पुलिस ने सोमवार शाम मौके पर पहुंचकर शव को अपने कब्जे में लिया और जांच शुरू की। शव पर चोट के निशान बताए जा रहे हैं। नाक से खून निकलने और जीभ बाहर निकली होने की बात भी सामने आई है। इन परिस्थितियों को देखते हुए प्रथम दृष्टया मामला संदिग्ध माना जा रहा है और हत्या की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि, मौत का वास्तविक कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस की जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। जानकारी के अनुसार आज सुबह करीब 10 बजे तक पोस्टमार्टम के बाद शव के गांव पहुंचने की उम्मीद है, जिसके बाद अंतिम संस्कार किया जाएगा। लेकिन सवाल सिर्फ अंतिम संस्कार तक सीमित नहीं है। राजेंद्र यादव की मौत के बाद उनकी दोनों बेटियों का क्या होगा? उनकी देखभाल कौन करेगा? इस घटना के पीछे कौन है? राजेंद्र यादव की मौत कब और किन परिस्थितियों में हुई? उनका मोबाइल फोन कहां है और इस समय किसके पास है? इन तमाम सवालों के जवाब मिलना जरूरी है। ग्रामीणों की मांग है कि पुलिस मामले की निष्पक्ष और गहन जांच करे तथा यदि यह हत्या है तो इसके पीछे शामिल लोगों की पहचान कर उन्हें कानून के दायरे में लाया जाए। साथ ही प्रशासन को राजेंद्र यादव की दोनों बेटियों के भविष्य और सुरक्षा को लेकर भी तत्काल पहल करनी चाहिए। सिर्फ शव का अंतिम संस्कार कर देना इस घटना का समाधान नहीं है। असली सवाल यह है कि राजेंद्र यादव की मौत की सच्चाई सामने कब आएगी और उनके पीछे छूट गईं दो मासूम बेटियों को न्याय और सहारा कौन देगा?1