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निर्जला एकादशी के पावन अवसर पर, यमुनानगर स्थित त्यागी गार्डन के श्री सत्य साईं सेवा सदन में श्रद्धालुओं के लिए ठंडे और मीठे पानी की छबील लगाई गई। इस सेवा कार्य में बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया, जिससे उन्होंने पुण्य लाभ अर्जित किया।
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निर्जला एकादशी के पावन अवसर पर, यमुनानगर स्थित त्यागी गार्डन के श्री सत्य साईं सेवा सदन में श्रद्धालुओं के लिए ठंडे और मीठे पानी की छबील लगाई गई। इस सेवा कार्य में बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया, जिससे उन्होंने पुण्य लाभ अर्जित किया।
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- निर्जला एकादशी के पावन अवसर पर, यमुनानगर स्थित त्यागी गार्डन के श्री सत्य साईं सेवा सदन में श्रद्धालुओं के लिए ठंडे और मीठे पानी की छबील लगाई गई। इस सेवा कार्य में बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया, जिससे उन्होंने पुण्य लाभ अर्जित किया।1
- कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के जिला उप निदेशक डॉ. आदित्य प्रताप डबास ने यमुनानगर में बताया कि धान की सीधी बिजाई (डीएसआर) तकनीक किसानों के लिए पिछले कई वर्षों से अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो रही है। इस तकनीक से न केवल पानी की भारी बचत होती है, बल्कि किसानों की लागत, श्रम और अन्य संसाधनों में भी कमी आती है। सरकार जल संरक्षण को लेकर लगातार जागरूकता अभियान चला रही है और इसी क्रम में धान की सीधी बिजाई को प्रोत्साहित किया जा रहा है। डॉ. डबास ने पारंपरिक धान रोपण विधि की तुलना करते हुए बताया कि पहले किसान धान की पौध तैयार कर खेतों में रोपाई करते थे, जिसमें बहुत अधिक पानी की आवश्यकता पड़ती थी और खेतों को लंबे समय तक पानी से भरा रखना पड़ता था, जिससे भूजल स्तर पर प्रतिकूल असर पड़ता था। अब बड़ी संख्या में किसान सीधी बिजाई की ओर बढ़ रहे हैं, जिसमें धान के बीज सीधे खेत में बोए जाते हैं, जिससे पानी की खपत काफी कम हो जाती है। उन्होंने जानकारी दी कि एक एकड़ में धान की सीधी बिजाई करने से लगभग 12 लाख लीटर पानी की बचत होती है। इसके अतिरिक्त, धान की सीधी बिजाई करने वाले किसानों को सरकार की ओर से प्रति एकड़ 4500 रुपये की अनुदान राशि भी प्रदान की जाती है, जिससे उन्हें आर्थिक सहायता मिलती है और वे नई तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित होते हैं। विभाग हर वर्ष प्रदर्शनियों और जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन करता है, जिसमें सफलतापूर्वक सीधी बिजाई करने वाले किसानों के खेतों पर अन्य किसानों को ले जाकर फसल दिखाई जाती है। इससे किसानों का भरोसा बढ़ता है और वे इस तकनीक को अपनाने के लिए प्रेरित होते हैं। डॉ. डबास ने किसानों की इस प्रारंभिक चिंता को भी दूर किया कि कहीं फसल का उत्पादन कम न हो जाए, उन्होंने कहा कि विभाग द्वारा किए गए परीक्षणों और किसानों के अनुभवों से यह साबित हुआ है कि इस विधि से भी अच्छी पैदावार प्राप्त होती है। उन्होंने किसानों से अपील की कि पानी बचाने के लिए आधुनिक तकनीकों को अपनाना समय की आवश्यकता है। धान की सीधी बिजाई से न केवल बिजली और पानी की बचत होती है, बल्कि किसानों की मेहनत और खर्च भी कम होता है। डॉ. डबास ने जोर देकर कहा कि आने वाले समय में यह तकनीक खेती को अधिक लाभकारी और पर्यावरण के अनुकूल बनाने में अहम भूमिका निभाएगी।2
- मुंबई की एक लोकल ट्रेन में हुए हत्याकांड के आरोपी को अब सलाखों के पीछे कर दिया गया है।1
- बरेली में आपराधिक गतिविधियों और समाज विरोधी कार्यों के आरोपों में सेवा से बर्खास्त किए जा चुके सिपाही सुरकेश शर्मा के खिलाफ पुलिस को नए साक्ष्य मिले हैं। भमोरा थाना पुलिस के अनुसार, उसके मोबाइल फोन से ऐसे रिकॉर्ड प्राप्त हुए हैं, जिनसे गाँव की राजनीति में दखलअंदाज़ी, महिलाओं को आगे कर झूठे मुकदमे दर्ज कराने और बाद में समझौते के नाम पर कथित वसूली जैसे मामलों के संकेत मिलते हैं। इसी कड़ी में, भमोरा थाना पुलिस ने शुक्रवार को सुरकेश शर्मा, उसकी पत्नी और अधिवक्ता कृतिका शर्मा, तथा उनके सहयोगी ओमवीर को गिरफ्तार किया। सुरकेश शर्मा के खिलाफ पहले से ही 17 मुकदमे दर्ज थे, और भमोरा थाने में दर्ज इस नए मामले के साथ अब उनके खिलाफ मामलों की कुल संख्या 18 हो गई है। पुलिस के अनुसार, सुरकेश शर्मा को चंदौली में तैनाती के दौरान लंबे समय तक अनुपस्थित रहने और आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त पाए जाने पर पहले निलंबित किया गया था, और बाद में सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। वर्ष 2024 में तत्कालीन एसएसपी अनुराग आर्य ने उस पर 15 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था, जिसे बाद में बढ़ाकर 25 हजार रुपये कर दिया गया। पुलिस का दावा है कि सुरकेश के फोन से मिले व्हाट्सएप कॉल और अन्य रिकॉर्ड से कथित रंगदारी और अवैध गतिविधियों से जुड़े महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं। पुलिस का यह भी आरोप है कि अधिवक्ता कृतिका शर्मा इन गतिविधियों में कानूनी सहायता प्रदान कर रही थीं। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, सुरकेश शर्मा के खिलाफ रंगदारी, हत्या के प्रयास, अपहरण, मारपीट, धमकी और पॉक्सो एक्ट सहित कई गंभीर धाराओं में मामले दर्ज हैं। हाल ही में पुलिस ने उनकी क्लास-बी हिस्ट्रीशीट भी खोली थी। एसएसपी अनुराग आर्य ने इस विषय पर कहा कि कानून के तहत होने वाली कार्रवाई इस बात से प्रभावित नहीं होगी कि कोई व्यक्ति पहले पुलिस विभाग का हिस्सा रहा हो, और कानून-व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। दूसरी ओर, रंगदारी और संगठित अपराध से जुड़े मामलों में आरोपी अधिवक्ता कृतिका शर्मा की गिरफ्तारी के बाद अदालत परिसर में वकीलों ने विरोध प्रदर्शन किया और पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए। हालांकि, एसीजेएम (जूनियर डिवीजन) की अदालत ने कृतिका शर्मा की जमानत याचिका खारिज करते हुए उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया।1
- हरियाणा के करनाल जिले के बड़ागांव में जमीन के बंटवारे से जुड़े एक पारिवारिक कलह ने दुखद मोड़ ले लिया है, जहाँ एक बुजुर्ग व्यक्ति की गोली मारकर हत्या कर दी गई है। इस मामले में परिवार का ही एक सदस्य मुख्य संदिग्ध बताया जा रहा है। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस और फोरेंसिक टीम तत्काल घटनास्थल पर पहुँची और गहन जाँच शुरू की। पुलिस ने घटनास्थल से महत्वपूर्ण साक्ष्य एकत्रित किए हैं और आरोपी की तलाश जारी है। इस संबंध में आगे की कानूनी कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है।1
- यमुनानगर में नगर निगम की टीम ने प्रतिबंधित पॉलिथीन के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए छापेमारी की। इस दौरान छह दुकानदारों के पास से प्रतिबंधित पॉलिथीन बरामद की गई, जिसके बाद उनके चालान काटे गए और कुल 32 हजार रुपये का जुर्माना वसूला गया। स्थानीय रिपोर्ट में इस कार्रवाई पर कटाक्ष किया गया है कि फैक्ट्रियों पर कोई असर नहीं पड़ रहा, लेकिन दुकानदार इसका खामियाजा भुगत रहे हैं। यह छापेमारी जिला प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड और निगम की संयुक्त टीम द्वारा जगाधरी वर्कशॉप रोड और शादीपुर रोड पर की गई, जहाँ पाँच दुकानदारों के पास से प्रतिबंधित पॉलिथीन मिली। निगम अधिकारियों ने सभी दुकानदारों को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि दोबारा उनके पास प्रतिबंधित पॉलिथीन पाई जाती है, तो उनकी कमाई बंद हो जाएगी। इसका सीधा अर्थ है कि सिंगल यूज प्लास्टिक का इस्तेमाल करने पर चालान के साथ-साथ उनका सामान भी निगम के गोदाम में जब्त कर लिया जाएगा। बता दें कि जुलाई 2020 से सिंगल यूज प्लास्टिक, जैसे पॉलीथिन, प्लास्टिक के चम्मच, डोने, गिलास और आइसक्रीम की स्टिक सहित कुल 19 प्लास्टिक आइटम के इस्तेमाल पर पूर्ण प्रतिबंध है। निगम की टीम ऐसे किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए प्रतिबद्ध है, जो इन प्रतिबंधित वस्तुओं को बेचता हुआ पाया जाता है। निगम की टीम ने यह भी साफ किया है कि यह कार्रवाई भविष्य में भी जारी रहेगी और आमजन से अपील की है कि वे सुधर जाएं, अन्यथा अगली बार फिर से कार्रवाई के लिए तैयार रहें। निगम की टीम ने अपने अभियान का नारा दिया है, "हम कोई वक्त नहीं है हमदम, जब करोगे पॉलीथिन यूज चले आयेंगे।"1
- यमुनानगर जिले में प्रदूषण फैलाने वालों के खिलाफ जिला प्रशासन ने एक बड़ा एक्शन प्लान तैयार कर लिया है, जिसके तहत अब हर स्तर पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी। जिला सचिवालय में हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के एक्शन प्लान को लेकर हुई एक महत्वपूर्ण बैठक में अतिरिक्त उपायुक्त नवीन आहूजा ने अधिकारियों के साथ प्रदूषण नियंत्रण की पूरी रणनीति की समीक्षा की। इस बैठक में यमुना और ड्रेनों को प्रदूषण से बचाने पर सबसे ज्यादा जोर दिया गया। प्रशासन ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि यमुना नदी में गंदा पानी, ड्रेनों में कचरा, खुले में जलता कूड़ा और धुआं फैलाने वालों पर सख्ती से कार्रवाई होगी। विशेष रूप से, बिना ट्रीट किए औद्योगिक गंदे पानी को जल स्रोतों में छोड़ने वालों पर कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा, निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल, खुले में कचरा जलाने की घटनाओं, फैक्ट्रियों से निकलने वाले प्रदूषण और पराली जलाने पर भी विशेष निगरानी रखी जाएगी। प्रशासन ने कहा है कि अब केवल सफाई का नहीं, बल्कि जिम्मेदारी तय करने का समय है, जिसके लिए नगर निकाय, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, परिवहन और कृषि विभाग को मिलकर काम करने के निर्देश दिए गए हैं। बैठक में ड्रेनों में प्लास्टिक वेस्ट को रोकने, गांवों और शहरों की सीवरेज व्यवस्था सुधारने, और तालाबों में जा रहे गंदे पानी का समाधान करने के निर्देश भी दिए गए। अधिकारियों को यह भी साफ तौर पर कहा गया है कि केवल बैठकें न हों, बल्कि जमीन पर काम दिखना चाहिए। जिन कार्यों के लिए अनुमति और टेंडर की आवश्यकता है, उन्हें जल्द से जल्द पूरा कर प्रदूषण नियंत्रण के कार्यों में तेजी लाई जाए। इस पूरे अभियान में एनजीटी की गाइडलाइन के अनुसार कार्रवाई की जाएगी और प्रत्येक विभाग को अपनी प्रगति रिपोर्ट भी प्रस्तुत करनी होगी। यमुनानगर में प्रदूषण के खिलाफ प्रशासन का यह एक बड़ा अभियान है, और अब यह देखना बाकी है कि ये आदेश धरातल पर कितना असर दिखा पाते हैं।1