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गोड्डा जिले के महागामा प्रखंड अंतर्गत जटामा और मोहानी के बीच तीन मासूम बच्चे लावारिस हालत में मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई है। यह एक बेहद संवेदनशील और दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। लावारिस मिले बच्चों में एक मासूम की उम्र करीब डेढ़ माह, दूसरे की लगभग डेढ़ साल और तीसरे बच्चे की उम्र करीब ढाई से तीन साल बताई जा रही है। स्थानीय लोगों के अनुसार, इन बच्चों के साथ एक बुजुर्ग महिला को देखा गया था, जो सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक तीनों बच्चों को वहीं छोड़कर चली गई। बच्चों के पास से एक फोटो भी बरामद हुई है, जिसे असोता का बताया जा रहा है। हालांकि, इस फोटो और पूरे मामले की असली हकीकत क्या है, इसका अभी तक पता नहीं चल पाया है।
रिपोर्टर- संजीव कुमार [ग्लोबल
गोड्डा जिले के महागामा प्रखंड अंतर्गत जटामा और मोहानी के बीच तीन मासूम बच्चे लावारिस हालत में मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई है। यह एक बेहद संवेदनशील और दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। लावारिस मिले बच्चों में एक मासूम की उम्र करीब डेढ़ माह, दूसरे की लगभग डेढ़ साल और तीसरे बच्चे की उम्र करीब ढाई से तीन साल बताई जा रही है। स्थानीय लोगों के अनुसार, इन बच्चों के साथ एक बुजुर्ग महिला को देखा गया था, जो सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक तीनों बच्चों को वहीं छोड़कर चली गई। बच्चों के पास से एक फोटो भी बरामद हुई है, जिसे असोता का बताया जा रहा है। हालांकि, इस फोटो और पूरे मामले की असली हकीकत क्या है, इसका अभी तक पता नहीं चल पाया है।
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- साल 2010 में कांग्रेस सरकार की महंगाई को 'डायन' बताने वाले और 'पंचायत' के जरिये बीजेपी का प्रचार करने वाले रघुबीर यादव की बातें सुनकर पत्थर दिल इंसान भी रो पड़ेगा। इस संदर्भ में तंज कसते हुए कहा गया है कि धीरे-धीरे सभी के भ्रम टूटेंगे। इसके साथ ही यह तीखा सवाल भी उठाया गया है कि क्या अब ED और सीबीआई इनके यहाँ भी जाएगी।1
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- दिल्ली के बाद अब पटना की सड़कों पर भी अहंकारी सत्ता की तानाशाही का प्रदर्शन शुरू हो गया है। पेपर लीक के खिलाफ और नाकाम शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की जायज मांग को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पटना के जेपी गोलंबर और गांधी मैदान में बर्बरता से लाठीचार्ज किया गया, वॉटर कैनन की बौछारें छोड़ी गईं और आंसू गैस के गोले दागे गए। अपने अधिकारों के लिए आवाज उठा रहे नौजवानों पर इस तरह पुलिसिया गुंडाराज का इस्तेमाल करना सीधे तौर पर लोकतंत्र की हत्या है। शिक्षा माफियाओं के सामने घुटने टेकने वाले बड़बोले सत्ताधीश अब पुलिस बल के दम पर युवाओं की आवाज को कुचलना चाहते हैं। सत्ता के नशे में चूर बीजेपी और एनडीए की सरकार को कान खोलकर सुन लेना चाहिए कि छात्रों के तीखे सवालों का जवाब उनकी लाठियां और पानी की बौछारें कभी नहीं बन सकतीं। इतिहास गवाह है कि युवाओं की जिस आवाज को लाठियों और दमन से दबाने की कोशिश की जा रही है, वही आक्रोश का सैलाब बहुत जल्द इस सत्ता के अहंकार और गुरूर को चकनाचूर कर देगा।1