दौसा जिला अस्पताल में मातृ-शिशु सुरक्षा भगवान भरोसे, आपातकालीन लैब बनी मौत का इंतज़ार घर Dausa: जिला अस्पताल की मातृ एवं शिशु कल्याण इकाई में स्वास्थ्य सेवाओं की हकीकत डराने वाली है। रात्रिकालीन आपात सेवाओं के लिए बनी लैब संख्या-10 उस समय पूरी तरह लावारिस पाई गई, जब लेबर रूम में महिलाएं प्रसव पीड़ा से जूझ रही थीं। प्रत्यक्ष जानकारी के अनुसार, करीब एक घंटे तक लैब में कोई भी स्टाफ मौजूद नहीं था। मजबूरी में लेबर रूम से भेजे गए ब्लड सैंपल को परिजनों को खुद उठाकर ले जाना पड़ा। देरी के चलते सैंपल जम गया और जांच नहीं हो सकी। यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि मां और नवजात की जान के साथ खुला खिलवाड़ है। प्रसव के दौरान जांच न होना मतलब सही इलाज में देरी जटिलताओं का बढ़ता खतरा और हर पल जीवन-मृत्यु की रस्साकशी ऐसे में सरकार की जनकल्याणकारी योजनाएं कागजों तक सीमित रह जाती हैं और जमीनी हकीकत में मरीज भगवान भरोसे छोड़ दिए जाते हैं।सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि पीएमओ का ड्राइवर सैंपल वितरण जैसे तकनीकी और संवेदनशील कार्य में लगाया गया, जबकि जिम्मेदार स्टाफ गायब रहा। यह सीधे-सीधे नियमों की धज्जियां उड़ाने और प्रशासनिक लापरवाही का प्रमाण है। बड़ा सवाल यह है जब सरकार वेतन देती है सेवा के लिए, तो अस्पताल में बेशर्मी की चुप्पी और गैरजिम्मेदारी क्यों? अब सिर्फ जांच नहीं, जवाबदेही तय होनी चाहिए, पीएमओ से इस लापरवाही पर स्पष्टीकरण लिया जाए, और यह तय होना चाहिए कि दौसा जिला अस्पताल में अगली बार किसी मां या बच्चे की जान लैब की गैरहाजिरी की भेंट न चढ़े। क्योंकि यहाँ बात व्यवस्था की नहीं, ज़िंदगियों की है। दौसा जिला अस्पताल में मातृ-शिशु सुरक्षा भगवान भरोसे, आपातकालीन लैब बनी मौत का इंतज़ार घर Dausa: जिला अस्पताल की मातृ एवं शिशु कल्याण इकाई में स्वास्थ्य सेवाओं की हकीकत डराने वाली है। रात्रिकालीन आपात सेवाओं के लिए बनी लैब संख्या-10 उस समय पूरी तरह लावारिस पाई गई, जब लेबर रूम में महिलाएं प्रसव पीड़ा से जूझ रही थीं। प्रत्यक्ष जानकारी के अनुसार, करीब एक घंटे तक लैब में कोई भी स्टाफ मौजूद नहीं था। मजबूरी में लेबर रूम से भेजे गए ब्लड सैंपल को परिजनों को खुद उठाकर ले जाना पड़ा। देरी के चलते सैंपल जम गया और जांच नहीं हो सकी। यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि मां और नवजात की जान के साथ खुला खिलवाड़ है। प्रसव के दौरान जांच न होना मतलब सही इलाज में देरी जटिलताओं का बढ़ता खतरा और हर पल जीवन-मृत्यु की रस्साकशी ऐसे में सरकार की जनकल्याणकारी योजनाएं कागजों तक सीमित रह जाती हैं और जमीनी हकीकत में मरीज भगवान भरोसे छोड़ दिए जाते हैं।सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि पीएमओ का ड्राइवर सैंपल वितरण जैसे तकनीकी और संवेदनशील कार्य में लगाया गया, जबकि जिम्मेदार स्टाफ गायब रहा। यह सीधे-सीधे नियमों की धज्जियां उड़ाने और प्रशासनिक लापरवाही का प्रमाण है। बड़ा सवाल यह है जब सरकार वेतन देती है सेवा के लिए, तो अस्पताल में बेशर्मी की चुप्पी और गैरजिम्मेदारी क्यों? अब सिर्फ जांच नहीं, जवाबदेही तय होनी चाहिए, पीएमओ से इस लापरवाही पर स्पष्टीकरण लिया जाए, और यह तय होना चाहिए कि दौसा जिला अस्पताल में अगली बार किसी मां या बच्चे की जान लैब की गैरहाजिरी की भेंट न चढ़े। क्योंकि यहाँ बात व्यवस्था की नहीं, ज़िंदगियों की है।
दौसा जिला अस्पताल में मातृ-शिशु सुरक्षा भगवान भरोसे, आपातकालीन लैब बनी मौत का इंतज़ार घर Dausa: जिला अस्पताल की मातृ एवं शिशु कल्याण इकाई में स्वास्थ्य सेवाओं की हकीकत डराने वाली है। रात्रिकालीन आपात सेवाओं के लिए बनी लैब संख्या-10 उस समय पूरी तरह लावारिस पाई गई, जब लेबर रूम में महिलाएं प्रसव पीड़ा से जूझ रही थीं। प्रत्यक्ष जानकारी के अनुसार, करीब एक घंटे तक लैब में कोई भी स्टाफ मौजूद नहीं था। मजबूरी में लेबर रूम से भेजे गए ब्लड सैंपल को परिजनों को खुद उठाकर ले जाना पड़ा। देरी के चलते सैंपल जम गया और जांच नहीं हो सकी। यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि मां और नवजात की जान के साथ खुला खिलवाड़ है। प्रसव के दौरान जांच न होना मतलब सही इलाज में देरी जटिलताओं का बढ़ता खतरा और हर पल जीवन-मृत्यु की रस्साकशी ऐसे में सरकार की जनकल्याणकारी योजनाएं कागजों तक सीमित रह जाती हैं और जमीनी हकीकत में मरीज भगवान भरोसे छोड़ दिए जाते हैं।सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि पीएमओ का ड्राइवर सैंपल वितरण जैसे तकनीकी और संवेदनशील कार्य में लगाया गया, जबकि जिम्मेदार स्टाफ गायब रहा। यह सीधे-सीधे नियमों की धज्जियां उड़ाने और प्रशासनिक लापरवाही का प्रमाण है। बड़ा सवाल यह है जब सरकार वेतन देती है सेवा के लिए, तो अस्पताल में बेशर्मी की चुप्पी और गैरजिम्मेदारी क्यों? अब सिर्फ जांच नहीं, जवाबदेही तय होनी चाहिए, पीएमओ से इस लापरवाही पर स्पष्टीकरण लिया जाए, और यह तय होना चाहिए कि दौसा जिला अस्पताल में अगली बार किसी मां या बच्चे की जान लैब की गैरहाजिरी की भेंट न चढ़े। क्योंकि यहाँ बात व्यवस्था की नहीं, ज़िंदगियों की है। दौसा जिला अस्पताल में मातृ-शिशु सुरक्षा भगवान भरोसे, आपातकालीन लैब बनी मौत का इंतज़ार घर Dausa: जिला अस्पताल की मातृ एवं शिशु कल्याण इकाई में स्वास्थ्य सेवाओं की हकीकत डराने वाली है। रात्रिकालीन आपात सेवाओं के लिए बनी लैब संख्या-10 उस समय पूरी तरह लावारिस पाई गई, जब लेबर रूम में महिलाएं प्रसव पीड़ा से जूझ रही थीं। प्रत्यक्ष जानकारी के अनुसार, करीब एक घंटे तक लैब में कोई भी स्टाफ मौजूद नहीं था। मजबूरी में लेबर रूम से भेजे गए ब्लड सैंपल को परिजनों को खुद उठाकर ले जाना पड़ा। देरी के चलते सैंपल जम गया और जांच नहीं हो सकी। यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि मां और नवजात की जान के साथ खुला खिलवाड़ है। प्रसव के दौरान जांच न होना मतलब सही इलाज में देरी जटिलताओं का बढ़ता खतरा और हर पल जीवन-मृत्यु की रस्साकशी ऐसे में सरकार की जनकल्याणकारी योजनाएं कागजों तक सीमित रह जाती हैं और जमीनी हकीकत में मरीज भगवान भरोसे छोड़ दिए जाते हैं।सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि पीएमओ का ड्राइवर सैंपल वितरण जैसे तकनीकी और संवेदनशील कार्य में लगाया गया, जबकि जिम्मेदार स्टाफ गायब रहा। यह सीधे-सीधे नियमों की धज्जियां उड़ाने और प्रशासनिक लापरवाही का प्रमाण है। बड़ा सवाल यह है जब सरकार वेतन देती है सेवा के लिए, तो अस्पताल में बेशर्मी की चुप्पी और गैरजिम्मेदारी क्यों? अब सिर्फ जांच नहीं, जवाबदेही तय होनी चाहिए, पीएमओ से इस लापरवाही पर स्पष्टीकरण लिया जाए, और यह तय होना चाहिए कि दौसा जिला अस्पताल में अगली बार किसी मां या बच्चे की जान लैब की गैरहाजिरी की भेंट न चढ़े। क्योंकि यहाँ बात व्यवस्था की नहीं, ज़िंदगियों की है।
- दौसा जिला अस्पताल में मातृ-शिशु सुरक्षा भगवान भरोसे, आपातकालीन लैब बनी मौत का इंतज़ार घर Dausa: जिला अस्पताल की मातृ एवं शिशु कल्याण इकाई में स्वास्थ्य सेवाओं की हकीकत डराने वाली है। रात्रिकालीन आपात सेवाओं के लिए बनी लैब संख्या-10 उस समय पूरी तरह लावारिस पाई गई, जब लेबर रूम में महिलाएं प्रसव पीड़ा से जूझ रही थीं। प्रत्यक्ष जानकारी के अनुसार, करीब एक घंटे तक लैब में कोई भी स्टाफ मौजूद नहीं था। मजबूरी में लेबर रूम से भेजे गए ब्लड सैंपल को परिजनों को खुद उठाकर ले जाना पड़ा। देरी के चलते सैंपल जम गया और जांच नहीं हो सकी। यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि मां और नवजात की जान के साथ खुला खिलवाड़ है। प्रसव के दौरान जांच न होना मतलब सही इलाज में देरी जटिलताओं का बढ़ता खतरा और हर पल जीवन-मृत्यु की रस्साकशी ऐसे में सरकार की जनकल्याणकारी योजनाएं कागजों तक सीमित रह जाती हैं और जमीनी हकीकत में मरीज भगवान भरोसे छोड़ दिए जाते हैं।सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि पीएमओ का ड्राइवर सैंपल वितरण जैसे तकनीकी और संवेदनशील कार्य में लगाया गया, जबकि जिम्मेदार स्टाफ गायब रहा। यह सीधे-सीधे नियमों की धज्जियां उड़ाने और प्रशासनिक लापरवाही का प्रमाण है। बड़ा सवाल यह है जब सरकार वेतन देती है सेवा के लिए, तो अस्पताल में बेशर्मी की चुप्पी और गैरजिम्मेदारी क्यों? अब सिर्फ जांच नहीं, जवाबदेही तय होनी चाहिए, पीएमओ से इस लापरवाही पर स्पष्टीकरण लिया जाए, और यह तय होना चाहिए कि दौसा जिला अस्पताल में अगली बार किसी मां या बच्चे की जान लैब की गैरहाजिरी की भेंट न चढ़े। क्योंकि यहाँ बात व्यवस्था की नहीं, ज़िंदगियों की है।1
- लालसोट उपखंड में विराट हिंदू सम्मेलन श्याम सरोवर गार्डन में आयोजित हुआ।। महा काली मंदिर लालसोट से एक विशाल शोभायात्रा एवं विशाल कलश यात्रा दोपहर 12:00 निकाली गई । जिसमें 2100 महिलाओं द्वारा सिर पर कलश रखकर मंगल गीत गाते हुए। शोभायात्रा में शामिल हुई। जिसके कारण 1 किलोमीटर तक यातायात अवरुद्ध सा हो गया।जिसमें भगवान एवं महापुरुषों की अनेकों जीवंत झांकियां शामिल हुई। जिनका प्रदर्शन दिल्ली के मशहूर कलाकारों द्वारा किया गया। शोभायात्रा जवाहरगंज सर्कल, बडाया धर्मशाला, ज्योतिबा फूले सर्किल, महाकाली मंदिर से खटवा रोड लक्ष्मी गार्डन होकर श्याम सरोवर पहुंची। मुख्य वक्ता बाबूलाल प्रांत प्रचारक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा अपना उद्बोधन प्रस्तुत किया गया। एवं संत समागम आयोजित हुआ। इस कार्यक्रम में विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ताओं व हिंदुस्तान स्काउट गाइड के बालकों का पूर्ण सहयोग रहा। इस शोभा यात्रा में समस्त हिंदू समाज में बढ़-चढ़कर भाग लिया।3
- पहल मानव सेवा संस्थान द्वारा खटवा रोड लक्ष्मी मैरिज गार्डन में रविवार को 16 वां विशाल रक्तदान शिविर आयोजित किया गया जिसमें अनुभवी चिकित्सा टीम द्वारा रक्त संग्रहित किया गया। इस अवसर पर रक्तदाताओं ने बढ चढ़कर रक्तदान किया ,वहीं चिकित्सा टीम ने रक्तदान महादान और रक्तदान करने से होने वाले फायदे के बारे में बताया । इस अवसर पर लालसोट विधायक रामविलास मीणा की गरिमा मयी उपस्थिति रही।4
- Post by Radhe Meena1
- yah hmare Patan Gav me nichla bass Bairwa mohalla me yah kachra ho rha h hme yha se aane Jane me paresani aati h2
- Tonk road per gaddhe1
- फिल्म बार्डर 23
- लालसोट: पहल मानव सेवा संस्थान लालसोट द्वारा लक्ष्मी मैरिज गार्डन लालसोट में 16 वें विशाल स्वैच्छिक रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। रक्तदान शिविर में राजकीय जिला चिकित्सालय दौसा व एसएमएस अस्पताल जयपुर की टीमों द्वारा रक्त संग्रहण का कार्य किया जाएगा। रक्तदान शिविर में रक्तदाताओं में बढ़-चढ़ हिस्सा लिया। सुबह 10:00 बजे से 3:00 तक रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। दौसा जिला अस्पताल व एसएमएस हॉस्पिटल जयपुर द्वारा कुल 76 यूनिट रक्त संग्रह किया गया। रक्तदान दाताओं का संस्था द्वारा अल्पाहार की भी व्यवस्था की गई। रक्तदान शिविर में लालसोट विधायक रामविलास मीणा डूंगरपुर ने भी शिरकत की साथ ही रक्तदान दाताओं का प्रशस्ति पत्र व मोमोटो देकर संस्था द्वारा सम्मान किया गया। वही पहला मानव सेवा संस्था द्वारा आये हुए पत्रकारों का मोमोटो तो देकर सम्मानित किया गया। इस दौरान पहला मानव सेवा संस्थान को सभी सदस्य गण रहे मौजूद।3