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लोहरदगा में तूफान जैसी विपरीत परिस्थिति भी हमारे बुलंद हौसले को नहीं रोक सकी। इस कठिन चुनौती के बीच भी हमारा जज्बा और साहस पूरी तरह से अडिग बना हुआ है।
AAM JANATA
लोहरदगा में तूफान जैसी विपरीत परिस्थिति भी हमारे बुलंद हौसले को नहीं रोक सकी। इस कठिन चुनौती के बीच भी हमारा जज्बा और साहस पूरी तरह से अडिग बना हुआ है।
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- गुमला के सिसई में रेफरल अस्पताल का पुराना भवन जर्जर होने और शिफ्ट किए गए स्थान पर जगह की भारी कमी के कारण मरीजों तथा स्वास्थ्य कर्मियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. ललिता कुमारी मिंज ने बताया कि अस्पताल का मुख्य भवन लगभग 50 वर्ष पुराना होने के कारण पूरी तरह जर्जर हो चुका है। भवन निर्माण विभाग से नए भवन की मंजूरी मिलने के बाद अब इस पुराने भवन को खाली कराया जा रहा है, जिससे अस्पताल के सामान को सुरक्षित रखने में काफी समस्या आ रही है। कमरों की भारी किल्लत के कारण एक्स-रे सेवा को अभी भी पुरानी जर्जर बिल्डिंग में ही चलाया जा रहा है। इसके अलावा पुराने कार्यालय वाले स्थान पर ओपीडी सेवा चलाई जा रही है। मुख्य द्वार के दाहिनी ओर स्थित बीपीएचयू (BPHU) भवन में ओपीडी पर्ची काउंटर, महिला वार्ड और प्रसव कक्ष (लेबर रूम) को शिफ्ट किया गया है, जबकि मुख्य द्वार के बाईं तरफ वाले हिस्से से दवा वितरण केंद्र और जांच घर (लैब) का संचालन किया जा रहा है। जगह की बेहद कमी होने के कारण मरीजों को अस्पताल में भर्ती करने और उनकी सही ढंग से देख-रेख करने में गंभीर समस्या खड़ी हो गई है। इसके साथ ही, अस्पताल के मुख्य कार्यालय को अस्पताल से लगभग 10 किलोमीटर दूर पंडरानी में शिफ्ट कर दिया गया है। कार्यालय इतनी दूर जाने की वजह से प्रखंड के 18 पंचायतों के ग्रामीणों और मरीजों को अपने जरूरी कागजी कामों के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है।1
- लातेहार में नक्सलवाद के बाद अब सबसे बड़ी जंग लातेहार जिला प्रशासन और आम जनता की थैलेसीमिया बीमारी से हो रही है। इस जंग को जिला प्रशासन और आम जनता मिलकर स्वेच्छा से रक्तदान कर जीत सकती है और किसी बच्चे की मौत बेमौत होने से बचा सकती है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, लातेहार में थैलेसीमिया के 100 से अधिक मरीज हैं जो रक्तदान के अभाव में प्रत्येक दिन विभिन्न रक्त के लिए तड़प रहे हैं।1
- लातेहार में भगवान श्रीजगन्नाथ की पावन रथयात्रा अपार श्रद्धा, भारी उत्साह और कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच संपन्न हुई। ठाकुरबाड़ी स्थित महावीर मंदिर से पारंपरिक विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ इस भव्य रथयात्रा की शुरुआत की गई, जिससे पूरे शहर में पूरी तरह से भक्तिमय माहौल देखने को मिला। इस पावन रथयात्रा का शुभारंभ राज्यसभा सांसद बैद्यनाथ राम, भाजपा के वरिष्ठ नेता राजधानी प्रसाद यादव, अशोक महलका और मुख्य यजमान योगेश प्रसाद ने संयुक्त रूप से रथ की पवित्र रस्सी खींचकर किया। रथयात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा की सुसज्जित प्रतिमाओं के दर्शन पाने के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। इस दौरान सभी श्रद्धालु "जय जगन्नाथ" के जयघोष के साथ भक्ति के रंग में डूबे नजर आए। इस पावन अवसर पर अंकित पांडेय, रवि कुमार, बिपिन कुमार सहित बड़ी संख्या में अन्य श्रद्धालु भी मौजूद रहे। सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए प्रशासन द्वारा शहर के सभी प्रमुख चौक-चौराहों पर कड़े पुलिस बल की तैनाती की गई थी। पुलिस की मुस्तैदी के कारण ही पूरी रथयात्रा पूरी तरह से शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हुई।1
- झारखंड के रांची जिला अंतर्गत दलादिली पीओपी नगड़ी थाना क्षेत्र के सपारोम से फिरौती के उद्देश्य से अगवा की गई 5 वर्षीय नाबालिग बच्ची को पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 12 घंटे के भीतर सकुशल बरामद कर लिया है। राँची पुलिस ने बच्ची को बिहार के गया जी के पास स्थित एक होटल से छुड़ाया है। इस अपहरण और चोरी की घटना में संलिप्त तीन अभियुक्तों—रमेश कुमार मिश्रा, सचिन कुमार और मोनु कुमार—को गिरफ्तार कर लिया गया है, जिनके कब्जे से तीन मोबाइल भी बरामद हुए हैं। इस संबंध में नगड़ी थाना में प्राथमिकी दर्ज कर आगे की विधिक कार्रवाई शुरू कर दी गई है। वर्तमान में बच्ची पूरी तरह सुरक्षित है और अपनी माता के साथ है। इस सफल छापामारी दल में पुलिस उपाधीक्षक अजय आर्यन सहित तकनीकी व सशस्त्र बल और स्थानीय टीओपी की टीम शामिल थी।1
- गुमला में भ्रष्टाचार अब होनहार प्रतिभाओं का सीधा कातिल बन चुका है। यहाँ लगातार योग्यता का बेरहमी से कत्ल किया जा रहा है और युवाओं के सुनहरे सपनों का खुलेआम सौदा हो रहा है, जिसने पूरे सिस्टम के काले और घिनौने चेहरे का पर्दाफाश कर दिया है।1
- गुमला के करौंदी मेला में आयोजित आर्केस्ट्रा प्रोग्राम में पहुंचे लोग जमकर मस्ती कर रहे हैं। इस कार्यक्रम में भाई लोग मस्ती के माहौल का पूरा आनंद लेते हुए दिखाई दे रहे हैं।1
- लोहरदगा में तूफान जैसी विपरीत परिस्थिति भी हमारे बुलंद हौसले को नहीं रोक सकी। इस कठिन चुनौती के बीच भी हमारा जज्बा और साहस पूरी तरह से अडिग बना हुआ है।1
- लोहर्दगा और झारखंड को लेकर सोशल मीडिया पर यह जानने की उत्सुकता पैदा की गई है कि आखिर इस क्षेत्र को झारखंड क्यों कहा जाता है। इस पोस्ट में लोगों से इसे देखने और समझने के लिए कहा गया है।1