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अमित सैनी रोहतकिया का नया गाना जारी हो गया है, जिसका शीर्षक 'सैनीयो का खेल कभी बेल कभी जेल' है।
Abhishek saini
अमित सैनी रोहतकिया का नया गाना जारी हो गया है, जिसका शीर्षक 'सैनीयो का खेल कभी बेल कभी जेल' है।
More news from उत्तर प्रदेश and nearby areas
- उत्तर प्रदेश के मेरठ स्थित गंगानगर थाने में तैनात 1993 बैच के दारोगा प्रकाश चंद को ₹20,000 की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया है। मेरठ एंटी करप्शन भ्रष्टाचार निरोधक टीम ने इस कार्रवाई को अंजाम देते हुए दारोगा को मौके पर ही धर दबोचा।1
- मध्य प्रदेश के गंजबासौदा नगर में आज फल सब्जी विक्रेताओं ने अनुविभागीय अधिकारी अनुभा जैन को एक ज्ञापन सौंपकर उन्हें स्थायी स्थान आवंटित करने की मांग की है। विक्रेताओं ने ज्ञापन में अपनी समस्याओं का जिक्र करते हुए बताया कि वे पहले पुराने मेला ग्राउंड में अपना व्यापार करते थे, लेकिन प्रशासन ने उन्हें वहां से हटाकर नवीन मेला ग्राउंड में स्थान दिया था। हालांकि, कुछ समय बाद प्रशासन ने उन्हें नवीन मेला ग्राउंड से हटाकर पुराना गल्ला मंडी में व्यापार करने का निर्देश दिया। जब फल सब्जी विक्रेताओं ने पुराना गल्ला मंडी में अपना व्यापार शुरू किया, तो उन्हें एक बार फिर वहां से भी हटने के लिए कहा गया। इसी के चलते, सभी फल सब्जी विक्रेताओं ने अपनी समस्याओं के समाधान और एक स्थायी स्थान के आवंटन की मांग को लेकर यह ज्ञापन प्रस्तुत किया है।1
- मेरठ में इन्वेस्टिगेशन टीम ने छापेमारी की, जिसके दौरान नकली तार पकड़े गए। यह कार्रवाई मेरठ में हुई, जहाँ जांच टीम ने नकली तारों को जब्त किया है।1
- मेरठ के मवाना क्षेत्र स्थित मधुबन में समाजवादी पार्टी (सपा) की एक समीक्षा बैठक के दौरान उस समय गहमागहमी का माहौल बन गया, जब मंच पर स्थान न मिलने को लेकर पार्टी नेताओं के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई। बताया जा रहा है कि सेक्टर प्रभारी सतपाल यादव को मंच पर जगह न मिलने से वे नाराज़ हो गए, जिसके बाद बैठक के दौरान ही गाली-गलौज और विवाद की स्थिति पैदा हो गई। इस घटना के समय जिलाध्यक्ष कर्मवीर गुमी, पूर्व विधायक योगेश वर्मा और प्रभुदयाल वाल्मीकि सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे। बैठक का मुख्य उद्देश्य पार्टी संगठन और PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) अभियान की समीक्षा करना था, लेकिन इस विवाद के कारण पूरा कार्यक्रम ही चर्चा का विषय बन गया। फिलहाल, इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो रहा है, हालांकि पार्टी की ओर से इस मामले पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।1
- एक जाग्रत हेडलाइन ने नरेंद्र मोदी के खिलाफ आवाज़ उठाई है।1
- मुज़फ्फरनगर के भोपा रोड पर सड़क किनारे रेत के ढेर लगाए जाते हैं, जिससे आवागमन में बाधा उत्पन्न होती है। इन ढेरों को लगाने के लिए ट्रक और ट्रैक्टर सड़क पर खड़े करके रेत की अनलोडिंग करते हैं। इस लापरवाही के कारण सड़क पर हर वक्त हादसे का गंभीर खतरा बना रहता है।1
- अयोध्या राम मंदिर में सामने आए चोरी प्रकरण को लेकर कथावाचक धीरेन्द्र शास्त्री ने एक महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा है कि इस चोरी को अंजाम देने वालों का खुलासा होना चाहिए। धीरेन्द्र शास्त्री ने इस बात पर जोर दिया कि राम मंदिर का दान पत्र करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ा है, और इसलिए चोरों की पहचान सार्वजनिक करना बेहद ज़रूरी है।1
- उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में ऑर्किड होटल रुड़की रोड पर ऑल इंडिया स्वर्णकार समाज एवं ज्वेलर्स एसोसिएशन की एक भव्य जनपदीय सभा सफलतापूर्वक संपन्न हुई। इस सभा के दौरान मेधावी छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया गया, साथ ही समाज की एकजुटता और सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गहन मंथन हुआ। स्वर्णकार समाज ने देश के विकास और व्यापारिक हितों को लेकर संकल्प भी लिया।1
- लखनऊ में एक फैक्ट्री में लगी भीषण आग के दौरान सामने आए एक वीडियो ने फायर ब्रिगेड की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वायरल वीडियो में यह दावा किया जा रहा है कि दमकल की गाड़ियाँ मौके पर तो पहुँचीं, लेकिन पानी की तेज़ धार आग पर पड़ने के बजाय इमारत की दूसरी छत पर जाती दिखाई दे रही थी। यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो रहा है, जहाँ कई लोग इस पर अपनी प्रतिक्रियाएँ दे रहे हैं। लोग सवाल उठा रहे हैं कि यदि आग बुझाने के दौरान पानी सही दिशा में नहीं डाला गया, तो इससे आग पर काबू पाने में देरी हो सकती है। इसके चलते फायर ब्रिगेड की कार्यप्रणाली और उनके प्रशिक्षण को लेकर भी चर्चा हो रही है। हालांकि, केवल इस वायरल वीडियो के आधार पर पूरी कार्रवाई का आकलन करना संभव नहीं है, क्योंकि आग बुझाने के दौरान सुरक्षा कारणों, इमारत की संरचना और आग की तीव्रता के अनुसार कई बार अलग-अलग रणनीतियाँ अपनाई जाती हैं। फिलहाल वीडियो को लेकर चर्चा जारी है, और यदि किसी प्रकार की लापरवाही हुई है, तो उसकी जाँच संबंधित विभाग द्वारा की जा सकती है। वास्तविक स्थिति केवल आधिकारिक जाँच के बाद ही स्पष्ट होगी।1