आचार्य श्री सुनील सागर महाराज : युग-प्रवर्तक जैन चेतना का प्रकाशस्तंभ आज के भौतिकवादी और विचलित समय में जहाँ आध्यात्मिक मूल्य पीछे छूटते जा रहे हैं, वहीं आचार्य श्री सुनील सागर महाराज जैसे संत मानव समाज को आत्मबोध, संयम और सांस्कृतिक चेतना की ओर पुनः लौटने का मार्ग दिखा रहे हैं। वे केवल जैन समाज के ही नहीं, बल्कि सम्पूर्ण भारतीय आध्यात्मिक परंपरा के लिए प्रेरणास्रोत बन चुके हैं। मध्यप्रदेश के सागर जिले के तिगोड़ा ग्राम में 7 अक्टूबर 1977 को जन्मे आचार्य श्री ने मात्र 20 वर्ष की आयु में 1997 में आचार्य सन्मति सागर महाराज से दीक्षा लेकर संसारिक मोह से ऊपर उठकर त्याग, तप और साधना का व्रत ग्रहण किया। दस वर्षों की कठोर तपस्या के पश्चात 2007 में औरंगाबाद में उन्हें आचार्य पद से विभूषित किया गया। यह केवल पद नहीं था, बल्कि आध्यात्मिक नेतृत्व की एक नई जिम्मेदारी थी, जिसे उन्होंने असाधारण निष्ठा से निभाया। आचार्य श्री की सबसे बड़ी विशेषता है — प्राकृत भाषा में प्रवचन देने की विलक्षण क्षमता। आज जब प्राचीन भाषाएँ लुप्तप्राय होती जा रही हैं, आचार्य श्री ने प्राकृत को जन-जन की भाषा बना दिया। उनके प्रवचनों में शास्त्र, विज्ञान, संस्कृति और आधुनिक जीवन के प्रश्नों का अद्भुत समन्वय दिखाई देता है। उनका प्रसिद्ध सिद्धांत "3T – टाइमिंग, ट्यूनिंग, ट्रेनिंग" आज के युवा वर्ग के लिए जीवन प्रबंधन का सशक्त सूत्र बन चुका है। वे बताते हैं कि जीवन में सफलता केवल परिश्रम से नहीं, बल्कि सही समय, सही सोच और सही प्रशिक्षण से प्राप्त होती है। यह विचारधारा उन्हें पारंपरिक संत से आगे ले जाकर आधुनिक युग का मार्गदर्शक बनाती है। आचार्य श्री न केवल आध्यात्मिक उन्नयन पर बल देते हैं, बल्कि सांस्कृतिक धरोहर और इतिहास के संरक्षण को भी राष्ट्रधर्म मानते हैं। उनके प्रवचन भारत की आत्मा को जागृत करते हैं और समाज को अपनी जड़ों से जोड़ते हैं। उनकी विराट साधना यात्रा का प्रभाव उनके संघ में भी दृष्टिगोचर होता है, जहाँ आज 146 साध्वियाँ और 85 साधु तप, संयम और सेवा के मार्ग पर अग्रसर हैं। यह केवल संख्या नहीं, बल्कि उनके विचारों की जीवंत धारा है। उनकी अद्वितीय उपलब्धियों को Royal Sunsex International Book of Record में भी दर्ज किया जाना इस बात का प्रमाण है कि उनका योगदान केवल धार्मिक नहीं, बल्कि ऐतिहासिक महत्व का है। निष्कर्षतः, आचार्य श्री सुनील सागर महाराज हमारे समय के उन दुर्लभ संतों में हैं जो परंपरा और आधुनिकता के बीच सेतु बनकर मानवता को नैतिकता, आत्मशुद्धि और शांति के पथ पर ले जा रहे हैं। वे वास्तव में जैन चेतना के युग-प्रवर्तक प्रकाशस्तंभ हैं।
आचार्य श्री सुनील सागर महाराज : युग-प्रवर्तक जैन चेतना का प्रकाशस्तंभ आज के भौतिकवादी और विचलित समय में जहाँ आध्यात्मिक मूल्य पीछे छूटते जा रहे हैं, वहीं आचार्य श्री सुनील सागर महाराज जैसे संत मानव समाज को आत्मबोध, संयम और सांस्कृतिक चेतना की ओर पुनः लौटने का मार्ग दिखा रहे हैं। वे केवल जैन समाज के ही नहीं, बल्कि सम्पूर्ण भारतीय आध्यात्मिक परंपरा के लिए प्रेरणास्रोत बन चुके हैं। मध्यप्रदेश के सागर जिले के तिगोड़ा ग्राम में 7 अक्टूबर 1977 को जन्मे आचार्य श्री ने मात्र 20 वर्ष की आयु में 1997 में आचार्य सन्मति सागर महाराज से दीक्षा लेकर संसारिक मोह से ऊपर उठकर त्याग, तप और साधना का व्रत ग्रहण किया। दस वर्षों की कठोर तपस्या के पश्चात 2007 में औरंगाबाद में उन्हें आचार्य पद से विभूषित किया गया। यह केवल पद नहीं था, बल्कि आध्यात्मिक नेतृत्व की एक नई जिम्मेदारी थी, जिसे उन्होंने असाधारण निष्ठा से निभाया। आचार्य श्री की सबसे बड़ी विशेषता है — प्राकृत भाषा में प्रवचन देने की विलक्षण क्षमता। आज जब प्राचीन भाषाएँ लुप्तप्राय होती जा रही हैं, आचार्य श्री ने प्राकृत को जन-जन की भाषा बना दिया। उनके प्रवचनों में शास्त्र, विज्ञान, संस्कृति और आधुनिक जीवन के प्रश्नों का अद्भुत समन्वय दिखाई देता है। उनका प्रसिद्ध सिद्धांत "3T – टाइमिंग, ट्यूनिंग, ट्रेनिंग" आज के युवा वर्ग के लिए जीवन प्रबंधन का सशक्त सूत्र बन चुका है। वे बताते हैं कि जीवन में सफलता केवल परिश्रम से नहीं, बल्कि सही समय, सही सोच और सही प्रशिक्षण से प्राप्त होती है। यह विचारधारा उन्हें पारंपरिक संत से आगे ले जाकर आधुनिक युग का मार्गदर्शक बनाती है। आचार्य श्री न केवल आध्यात्मिक उन्नयन पर बल देते हैं, बल्कि सांस्कृतिक धरोहर और इतिहास के संरक्षण को भी राष्ट्रधर्म मानते हैं। उनके प्रवचन भारत की आत्मा को जागृत करते हैं और समाज को अपनी जड़ों से जोड़ते हैं। उनकी विराट साधना यात्रा का प्रभाव उनके संघ में भी दृष्टिगोचर होता है, जहाँ आज 146 साध्वियाँ और 85 साधु तप, संयम और सेवा के मार्ग पर अग्रसर हैं। यह केवल संख्या नहीं, बल्कि उनके विचारों की जीवंत धारा है। उनकी अद्वितीय उपलब्धियों को Royal Sunsex International Book of Record में भी दर्ज किया जाना इस बात का प्रमाण है कि उनका योगदान केवल धार्मिक नहीं, बल्कि ऐतिहासिक महत्व का है। निष्कर्षतः, आचार्य श्री सुनील सागर महाराज हमारे समय के उन दुर्लभ संतों में हैं जो परंपरा और आधुनिकता के बीच सेतु बनकर मानवता को नैतिकता, आत्मशुद्धि और शांति के पथ पर ले जा रहे हैं। वे वास्तव में जैन चेतना के युग-प्रवर्तक प्रकाशस्तंभ हैं।
- आज दिनांक 16/01/26 को रहली उपसंभाग अंतर्गत ग्राम पटना बुजुर्ग के पंचायत भवन में एवं गढ़ाकोटा उपसंभाग के ग्राम खेजरा के पंचायत भवन में ऊर्जा विभाग की समाधान योजना के कैंप का आयोजन किया गया. जिसमे ग्राम के समस्त उपभोक्ताओं को समाधान योजना में बिजली बिलों में सरचार्ज छूट की जानकारी दी गई. कैंप में सागर वृत की अधीक्षण अभियंता श्रीमति चन्द्ररेखा प्रभाकर, रहली कार्यपालन अभियंता श्री पंकज डेहरिया, सहायक अभियंता सी एस पटेल, ओम प्रकाश अग्रवाल , कनिष्ठ अभियंता शैलेन्द्र चौबे, सुरेश मरावी , पटना बुजुर्ग पंचायत सरपंच प्रतिनिधि श्री आशीष जैन के साथ मुख्यालय कर्मचारी एवं ग्राम की जनता उपस्थित रही. कैंप में कैनॉपी टैंट लगाया गया था. जिसमे म. प्र. पूर्व क्षेत्र विधुत वितरण कंपनी लि जबलपुर की विभिन्न सेवायों की जानकारी उल्लेखित थी एवं समाधान योजना 2025-25 हितग्राही सेल्फी पॉइंट बनाया गया था जिसमे हितग्राही सेल्फी लेते रहे. अधीक्षण अभियंता मैडम द्वारा कैनॉपी टेंट एवं हितग्राही सेल्फी पॉइंट नवाचार की सराहना की गई एवं समस्त उपभोक्ताओं से समाधान योजना का लाभ लेने का अनुरोध किया गया. ग्राम पटना बुजुर्ग में मोके पर 40 उपभोक्ताओं से समाधान योजना का लाभ लिया एवं ग्राम खेजरा में 35 उपभोक्ताओं ने समाधान योजना का लाभ लिया.4
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- 78986092211
- *जैसीनगर में हुआ मंत्री क्रिकेट महाकुंभ का भव्य शुभारंभ* क्रिकेट महाकुंभ का उद्घाटन जैसीनगर में युवा शक्ति संगठन के जिला अध्यक्ष आकाश सिंह राजपूत, मंत्री प्रतिनिधि शैलेंद्र सिंह राजपूत ने किया शुभारंभ अवसर पर खेल प्रेमियों और युवाओं में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। जैसीनगर में मंत्री क्रिकेट महाकुंभ का पहला मुकाबला रॉयल इलेवन बिछुआ एवं बजरंग जेरा के बीच खेला गया। टॉस जीतकर रॉयल इलेवन बिछुआ ने पहले गेंदबाजी करने का निर्णय लिया। बल्लेबाजी करते हुए बजरंग जेरा की टीम ने 3 विकेट खोकर 75 रन बनाए। लक्ष्य का पीछा करते हुए रॉयल इलेवन बिछुआ ने 6 विकेट खोकर 76 रन बनाकर मैच अपने नाम किया। इस मुकाबले में शानदार प्रदर्शन के लिए अजय को प्लेयर ऑफ द मैच घोषित किया गया। युवा शक्ति संगठन में 500 युवाओं ने ली सदस्यता युवा शक्ति संगठन की विचारधारा से प्रभावित होकर 500 से अधिक लोगों ने संगठन की सदस्यता ग्रहण की, जो युवाओं के बीच संगठन की बढ़ती लोकप्रियता को दर्शाता है। युवा शक्ति संगठन द्वारा आयोजित मंत्री क्रिकेट महाकुंभ निरंतर जारी है और क्षेत्र में खेलों के प्रति नई ऊर्जा का संचार कर रहा है। युवा शक्ति संगठन की पूरी टीम क्रिकेट महाकुंभ को सफल बनाने में निरंतर सक्रिय भूमिका निभा रही है।1
- बंडा के पाटन में एक जंगली जानवर का किया शिकार, वन विभाग की टीम जांच में जुटी।1
- सुरखी जिला सागर में हुए आज चक्काजाम के बाद क्या निकला निष्कस र्पुलिस अधिकारी ने बताया यह प1
- जिला कांग्रेस महिला उत्पीड़न निवारण प्रकोष्ठ का धरना–प्रदर्शन, राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन1
- जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम 🙏🙏🙏🙏🙏🌹🌹🌹🌹1