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“कारागार की दीवारों में गूंजा भागवत का अमृत: कथा श्रवण से कैदियों के जीवन में जागी आत्मशुद्धि और नई उम्मीद" हिंदू नववर्ष और चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर जिला कारागार रोशनाबाद में श्री अखंड परशुराम अखाड़ा द्वारा श्रीमद् भागवत कथा का दिव्य आयोजन हरिद्वार, संवाददाता | स्वतंत्र पत्रकार रामेश्वर गौड़ धर्म की राजधानी कही जाने वाली तीर्थ नगरी हरिद्वार में इस बार हिंदू नववर्ष और चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर एक ऐसा आध्यात्मिक आयोजन हुआ जिसने कारागार की कठोर दीवारों के भीतर भी भक्ति, आत्मचिंतन और सुधार की नई रोशनी जगा दी। श्री अखंड परशुराम अखाड़ा के तत्वावधान में जिला कारागार रोशनाबाद हरिद्वार में सर्वजन कल्याण की भावना से श्रीमद् भागवत कथा सप्ताह का आयोजन किया जा रहा है। कथा के द्वितीय दिवस पर कथा व्यास पंडित पवन कृष्ण शास्त्री ने कैदियों और उपस्थित श्रद्धालुओं को भागवत की अमृतमयी कथा का श्रवण कराया। राजा परीक्षित और कलयुग की कथा से दिया धर्म का संदेश कथा व्यास पंडित पवन कृष्ण शास्त्री ने बताया कि सर्वप्रथम सप्ताह कथा का आयोजन शुक्रताल में हुआ था, जहां सुखदेव मुनि ने राजा परीक्षित को सात दिनों तक श्रीमद् भागवत कथा का श्रवण कराया था। उन्होंने विस्तार से वर्णन करते हुए बताया कि जब राजा परीक्षित को यह ज्ञात हुआ कि पृथ्वी पर कलयुग का आगमन हो चुका है, तब वे स्वयं कलयुग को खोजते हुए गंगा तट तक पहुंचे। वहां उनकी भेंट कलयुग से हुई। राजा परीक्षित ने उसे पृथ्वी से चले जाने का आदेश दिया, लेकिन कलयुग ने निवेदन किया कि जैसे सतयुग, त्रेता और द्वापर को स्थान मिला, वैसे ही उसे भी रहने के लिए स्थान दिया जाए। तब राजा परीक्षित ने चार स्थानों— जहां जुआ खेला जाता हो, जहां निर्दोष पशुओं की हत्या होती हो, जहां मद्यपान होता हो, और जहां पराई स्त्री के साथ दुर्व्यवहार होता हो— वहीं कलयुग को निवास करने की अनुमति दी। परंतु कलयुग ने पुनः निवेदन किया कि राजा के भय से उनके राज्य में ये चारों अधर्म नहीं होते। तब राजा परीक्षित ने उसे स्वर्ण में वास करने की अनुमति दी। कथा के अनुसार, अधर्म से बने जरासंध के स्वर्ण मुकुट को धारण करते ही उसी मुकुट में कलयुग का प्रवेश हो गया और वहीं से अधर्म का प्रभाव आरंभ हुआ। श्राप, पश्चाताप और भागवत कथा का महात्म्य कथा के दौरान शास्त्री जी ने बताया कि एक बार शिकार के दौरान प्यास और थकान से व्याकुल राजा परीक्षित ने ऋषि समिक मुनि के गले में मृत सर्प डाल दिया। यह अपमान देखकर उनके पुत्र श्रृंगी ऋषि ने क्रोधित होकर राजा परीक्षित को श्राप दिया कि सातवें दिन तक्षक नाग के दंश से उनकी मृत्यु हो जाएगी। जब राजा परीक्षित को इस श्राप का ज्ञान हुआ तो उन्होंने अपने पुत्र जनमेजय को राजगद्दी सौंप दी और गंगा तट स्थित शुक्रताल पहुंचकर जीवन के अंतिम सात दिनों में आत्मकल्याण का मार्ग चुना। वहीं वेदव्यास जी के पुत्र सुखदेव जी का आगमन हुआ और उन्होंने सात दिनों तक श्रीमद् भागवत कथा का अमृत सुनाया। कथा श्रवण के पश्चात राजा परीक्षित को परम पद की प्राप्ति हुई और वे भगवान विष्णु के वैकुंठ धाम के अधिकारी बन गए। भागवत कथा: आत्मशुद्धि और मोक्ष का मार्ग कथा व्यास ने कहा कि तभी से अपने जीवन का कल्याण चाहने वाले भक्त भागवत सप्ताह का आयोजन करते हैं। श्रीमद् भागवत कथा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि आत्मशुद्धि, वैराग्य और परमात्मा से जुड़ने का दिव्य माध्यम है, जो मनुष्य को अंततः भगवत धाम का अधिकारी बनाता है। कैदियों के जीवन में सुधार की पहल इस अवसर पर श्री अखंड परशुराम अखाड़ा के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंडित अधीर कौशिक ने कहा कि समाज के प्रत्येक समर्थ व्यक्ति को संकल्प लेकर समय-समय पर कारागारों में धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करने चाहिए। इससे बंदियों के मन में सकारात्मक परिवर्तन आता है और वे अपने जीवन की गलतियों को सुधारने की प्रेरणा प्राप्त करते हैं। उन्होंने कहा कि यदि कैदियों के भीतर आध्यात्मिक चेतना जागृत हो जाए तो वे समाज में लौटकर एक नया और बेहतर जीवन जी सकते हैं। जेल प्रशासन ने जताया आभार जिला कारागार के अधीक्षक मनोज आर्य ने श्री अखंड परशुराम अखाड़ा का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि अखाड़े द्वारा समय-समय पर कारागार में इस प्रकार के आध्यात्मिक और सामाजिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिससे कैदियों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिलता है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि भविष्य में भी ऐसे आयोजन निरंतर होते रहेंगे। भागवत पूजन के साथ सम्पन्न हुआ कार्यक्रम कार्यक्रम के दौरान समाजसेवी जलज कौशिक द्वारा विधिवत श्रीमद् भागवत का पूजन किया गया। इस अवसर पर पंडित सतीश तिवारी, पंडित सचिन पैन्यूली, पंडित आदित्य जागुड़ी, बलविंदर चौधरी, कुलदीप शर्मा, मनोज ठाकुर, बृजमोहन शर्मा, संजू अग्रवाल सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे और सभी ने मिलकर भागवत पूजन सम्पन्न कराया। कारागार में भक्ति का संदेश कारागार जैसी जगह, जहां आमतौर पर अपराध और दंड की कहानियां लिखी जाती हैं, वहीं श्रीमद् भागवत कथा के माध्यम से पश्चाताप, आत्मशुद्धि और मोक्ष की नई कहानी लिखी जा रही है। यह आयोजन इस बात का प्रमाण है कि जब धर्म का दीपक जलता है तो उसकी रोशनी सबसे अंधेरी जगहों तक भी पहुंच जाती है। — स्वतंत्र पत्रकार रामेश्वर गौड़

3 hrs ago
user_रामेश्वर गौड़ स्वतंत्र पत्रकार
रामेश्वर गौड़ स्वतंत्र पत्रकार
हरिद्वार, हरिद्वार, उत्तराखंड•
3 hrs ago

“कारागार की दीवारों में गूंजा भागवत का अमृत: कथा श्रवण से कैदियों के जीवन में जागी आत्मशुद्धि और नई उम्मीद" हिंदू नववर्ष और चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर जिला कारागार रोशनाबाद में श्री अखंड परशुराम अखाड़ा द्वारा श्रीमद् भागवत कथा का दिव्य आयोजन हरिद्वार, संवाददाता | स्वतंत्र पत्रकार रामेश्वर गौड़ धर्म की राजधानी कही जाने वाली तीर्थ नगरी हरिद्वार में इस बार हिंदू नववर्ष और चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर एक ऐसा आध्यात्मिक आयोजन हुआ जिसने कारागार की कठोर दीवारों के भीतर भी भक्ति, आत्मचिंतन और सुधार की नई रोशनी जगा दी। श्री अखंड परशुराम अखाड़ा के तत्वावधान में जिला कारागार रोशनाबाद हरिद्वार में सर्वजन कल्याण की भावना से श्रीमद् भागवत कथा सप्ताह का आयोजन किया जा रहा है। कथा के द्वितीय दिवस पर कथा व्यास पंडित पवन कृष्ण शास्त्री ने कैदियों और उपस्थित श्रद्धालुओं को भागवत की अमृतमयी कथा का श्रवण कराया। राजा परीक्षित और कलयुग की कथा से दिया धर्म का संदेश कथा व्यास पंडित पवन कृष्ण शास्त्री ने बताया कि सर्वप्रथम सप्ताह कथा का आयोजन शुक्रताल में हुआ था, जहां सुखदेव मुनि ने राजा परीक्षित को सात दिनों तक श्रीमद् भागवत कथा का श्रवण कराया था। उन्होंने विस्तार से वर्णन करते हुए बताया कि जब राजा परीक्षित को यह ज्ञात हुआ कि पृथ्वी पर कलयुग का आगमन हो चुका है, तब वे स्वयं कलयुग को खोजते हुए गंगा तट तक पहुंचे। वहां उनकी भेंट कलयुग से हुई। राजा परीक्षित ने उसे पृथ्वी से चले जाने का आदेश दिया, लेकिन कलयुग ने निवेदन किया कि जैसे सतयुग, त्रेता और द्वापर को स्थान मिला, वैसे ही उसे भी रहने के लिए स्थान दिया जाए। तब राजा परीक्षित ने चार स्थानों— जहां जुआ खेला जाता हो, जहां निर्दोष

पशुओं की हत्या होती हो, जहां मद्यपान होता हो, और जहां पराई स्त्री के साथ दुर्व्यवहार होता हो— वहीं कलयुग को निवास करने की अनुमति दी। परंतु कलयुग ने पुनः निवेदन किया कि राजा के भय से उनके राज्य में ये चारों अधर्म नहीं होते। तब राजा परीक्षित ने उसे स्वर्ण में वास करने की अनुमति दी। कथा के अनुसार, अधर्म से बने जरासंध के स्वर्ण मुकुट को धारण करते ही उसी मुकुट में कलयुग का प्रवेश हो गया और वहीं से अधर्म का प्रभाव आरंभ हुआ। श्राप, पश्चाताप और भागवत कथा का महात्म्य कथा के दौरान शास्त्री जी ने बताया कि एक बार शिकार के दौरान प्यास और थकान से व्याकुल राजा परीक्षित ने ऋषि समिक मुनि के गले में मृत सर्प डाल दिया। यह अपमान देखकर उनके पुत्र श्रृंगी ऋषि ने क्रोधित होकर राजा परीक्षित को श्राप दिया कि सातवें दिन तक्षक नाग के दंश से उनकी मृत्यु हो जाएगी। जब राजा परीक्षित को इस श्राप का ज्ञान हुआ तो उन्होंने अपने पुत्र जनमेजय को राजगद्दी सौंप दी और गंगा तट स्थित शुक्रताल पहुंचकर जीवन के अंतिम सात दिनों में आत्मकल्याण का मार्ग चुना। वहीं वेदव्यास जी के पुत्र सुखदेव जी का आगमन हुआ और उन्होंने सात दिनों तक श्रीमद् भागवत कथा का अमृत सुनाया। कथा श्रवण के पश्चात राजा परीक्षित को परम पद की प्राप्ति हुई और वे भगवान विष्णु के वैकुंठ धाम के अधिकारी बन गए। भागवत कथा: आत्मशुद्धि और मोक्ष का मार्ग कथा व्यास ने कहा कि तभी से अपने जीवन का कल्याण चाहने वाले भक्त भागवत सप्ताह का आयोजन करते हैं। श्रीमद् भागवत कथा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि आत्मशुद्धि, वैराग्य और परमात्मा से जुड़ने का दिव्य माध्यम है, जो मनुष्य को अंततः भगवत धाम का अधिकारी बनाता

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है। कैदियों के जीवन में सुधार की पहल इस अवसर पर श्री अखंड परशुराम अखाड़ा के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंडित अधीर कौशिक ने कहा कि समाज के प्रत्येक समर्थ व्यक्ति को संकल्प लेकर समय-समय पर कारागारों में धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करने चाहिए। इससे बंदियों के मन में सकारात्मक परिवर्तन आता है और वे अपने जीवन की गलतियों को सुधारने की प्रेरणा प्राप्त करते हैं। उन्होंने कहा कि यदि कैदियों के भीतर आध्यात्मिक चेतना जागृत हो जाए तो वे समाज में लौटकर एक नया और बेहतर जीवन जी सकते हैं। जेल प्रशासन ने जताया आभार जिला कारागार के अधीक्षक मनोज आर्य ने श्री अखंड परशुराम अखाड़ा का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि अखाड़े द्वारा समय-समय पर कारागार में इस प्रकार के आध्यात्मिक और सामाजिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिससे कैदियों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिलता है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि भविष्य में भी ऐसे आयोजन निरंतर होते रहेंगे। भागवत पूजन के साथ सम्पन्न हुआ कार्यक्रम कार्यक्रम के दौरान समाजसेवी जलज कौशिक द्वारा विधिवत श्रीमद् भागवत का पूजन किया गया। इस अवसर पर पंडित सतीश तिवारी, पंडित सचिन पैन्यूली, पंडित आदित्य जागुड़ी, बलविंदर चौधरी, कुलदीप शर्मा, मनोज ठाकुर, बृजमोहन शर्मा, संजू अग्रवाल सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे और सभी ने मिलकर भागवत पूजन सम्पन्न कराया। कारागार में भक्ति का संदेश कारागार जैसी जगह, जहां आमतौर पर अपराध और दंड की कहानियां लिखी जाती हैं, वहीं श्रीमद् भागवत कथा के माध्यम से पश्चाताप, आत्मशुद्धि और मोक्ष की नई कहानी लिखी जा रही है। यह आयोजन इस बात का प्रमाण है कि जब धर्म का दीपक जलता है तो उसकी रोशनी सबसे अंधेरी जगहों तक भी पहुंच जाती है। — स्वतंत्र पत्रकार रामेश्वर गौड़

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    user_Dpk Chauhan
    Dpk Chauhan
    Farmer हरिद्वार, हरिद्वार, उत्तराखंड•
    13 min ago
  • हिंदू नववर्ष और चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर जिला कारागार रोशनाबाद में श्री अखंड परशुराम अखाड़ा द्वारा श्रीमद् भागवत कथा का दिव्य आयोजन हरिद्वार, संवाददाता | स्वतंत्र पत्रकार रामेश्वर गौड़ धर्म की राजधानी कही जाने वाली तीर्थ नगरी हरिद्वार में इस बार हिंदू नववर्ष और चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर एक ऐसा आध्यात्मिक आयोजन हुआ जिसने कारागार की कठोर दीवारों के भीतर भी भक्ति, आत्मचिंतन और सुधार की नई रोशनी जगा दी। श्री अखंड परशुराम अखाड़ा के तत्वावधान में जिला कारागार रोशनाबाद हरिद्वार में सर्वजन कल्याण की भावना से श्रीमद् भागवत कथा सप्ताह का आयोजन किया जा रहा है। कथा के द्वितीय दिवस पर कथा व्यास पंडित पवन कृष्ण शास्त्री ने कैदियों और उपस्थित श्रद्धालुओं को भागवत की अमृतमयी कथा का श्रवण कराया। राजा परीक्षित और कलयुग की कथा से दिया धर्म का संदेश कथा व्यास पंडित पवन कृष्ण शास्त्री ने बताया कि सर्वप्रथम सप्ताह कथा का आयोजन शुक्रताल में हुआ था, जहां सुखदेव मुनि ने राजा परीक्षित को सात दिनों तक श्रीमद् भागवत कथा का श्रवण कराया था। उन्होंने विस्तार से वर्णन करते हुए बताया कि जब राजा परीक्षित को यह ज्ञात हुआ कि पृथ्वी पर कलयुग का आगमन हो चुका है, तब वे स्वयं कलयुग को खोजते हुए गंगा तट तक पहुंचे। वहां उनकी भेंट कलयुग से हुई। राजा परीक्षित ने उसे पृथ्वी से चले जाने का आदेश दिया, लेकिन कलयुग ने निवेदन किया कि जैसे सतयुग, त्रेता और द्वापर को स्थान मिला, वैसे ही उसे भी रहने के लिए स्थान दिया जाए। तब राजा परीक्षित ने चार स्थानों— जहां जुआ खेला जाता हो, जहां निर्दोष पशुओं की हत्या होती हो, जहां मद्यपान होता हो, और जहां पराई स्त्री के साथ दुर्व्यवहार होता हो— वहीं कलयुग को निवास करने की अनुमति दी। परंतु कलयुग ने पुनः निवेदन किया कि राजा के भय से उनके राज्य में ये चारों अधर्म नहीं होते। तब राजा परीक्षित ने उसे स्वर्ण में वास करने की अनुमति दी। कथा के अनुसार, अधर्म से बने जरासंध के स्वर्ण मुकुट को धारण करते ही उसी मुकुट में कलयुग का प्रवेश हो गया और वहीं से अधर्म का प्रभाव आरंभ हुआ। श्राप, पश्चाताप और भागवत कथा का महात्म्य कथा के दौरान शास्त्री जी ने बताया कि एक बार शिकार के दौरान प्यास और थकान से व्याकुल राजा परीक्षित ने ऋषि समिक मुनि के गले में मृत सर्प डाल दिया। यह अपमान देखकर उनके पुत्र श्रृंगी ऋषि ने क्रोधित होकर राजा परीक्षित को श्राप दिया कि सातवें दिन तक्षक नाग के दंश से उनकी मृत्यु हो जाएगी। जब राजा परीक्षित को इस श्राप का ज्ञान हुआ तो उन्होंने अपने पुत्र जनमेजय को राजगद्दी सौंप दी और गंगा तट स्थित शुक्रताल पहुंचकर जीवन के अंतिम सात दिनों में आत्मकल्याण का मार्ग चुना। वहीं वेदव्यास जी के पुत्र सुखदेव जी का आगमन हुआ और उन्होंने सात दिनों तक श्रीमद् भागवत कथा का अमृत सुनाया। कथा श्रवण के पश्चात राजा परीक्षित को परम पद की प्राप्ति हुई और वे भगवान विष्णु के वैकुंठ धाम के अधिकारी बन गए। भागवत कथा: आत्मशुद्धि और मोक्ष का मार्ग कथा व्यास ने कहा कि तभी से अपने जीवन का कल्याण चाहने वाले भक्त भागवत सप्ताह का आयोजन करते हैं। श्रीमद् भागवत कथा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि आत्मशुद्धि, वैराग्य और परमात्मा से जुड़ने का दिव्य माध्यम है, जो मनुष्य को अंततः भगवत धाम का अधिकारी बनाता है। कैदियों के जीवन में सुधार की पहल इस अवसर पर श्री अखंड परशुराम अखाड़ा के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंडित अधीर कौशिक ने कहा कि समाज के प्रत्येक समर्थ व्यक्ति को संकल्प लेकर समय-समय पर कारागारों में धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करने चाहिए। इससे बंदियों के मन में सकारात्मक परिवर्तन आता है और वे अपने जीवन की गलतियों को सुधारने की प्रेरणा प्राप्त करते हैं। उन्होंने कहा कि यदि कैदियों के भीतर आध्यात्मिक चेतना जागृत हो जाए तो वे समाज में लौटकर एक नया और बेहतर जीवन जी सकते हैं। जेल प्रशासन ने जताया आभार जिला कारागार के अधीक्षक मनोज आर्य ने श्री अखंड परशुराम अखाड़ा का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि अखाड़े द्वारा समय-समय पर कारागार में इस प्रकार के आध्यात्मिक और सामाजिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिससे कैदियों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिलता है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि भविष्य में भी ऐसे आयोजन निरंतर होते रहेंगे। भागवत पूजन के साथ सम्पन्न हुआ कार्यक्रम कार्यक्रम के दौरान समाजसेवी जलज कौशिक द्वारा विधिवत श्रीमद् भागवत का पूजन किया गया। इस अवसर पर पंडित सतीश तिवारी, पंडित सचिन पैन्यूली, पंडित आदित्य जागुड़ी, बलविंदर चौधरी, कुलदीप शर्मा, मनोज ठाकुर, बृजमोहन शर्मा, संजू अग्रवाल सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे और सभी ने मिलकर भागवत पूजन सम्पन्न कराया। कारागार में भक्ति का संदेश कारागार जैसी जगह, जहां आमतौर पर अपराध और दंड की कहानियां लिखी जाती हैं, वहीं श्रीमद् भागवत कथा के माध्यम से पश्चाताप, आत्मशुद्धि और मोक्ष की नई कहानी लिखी जा रही है। यह आयोजन इस बात का प्रमाण है कि जब धर्म का दीपक जलता है तो उसकी रोशनी सबसे अंधेरी जगहों तक भी पहुंच जाती है। — स्वतंत्र पत्रकार रामेश्वर गौड़
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    हिंदू नववर्ष और चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर जिला कारागार रोशनाबाद में श्री अखंड परशुराम अखाड़ा द्वारा श्रीमद् भागवत कथा का दिव्य आयोजन
हरिद्वार, संवाददाता | स्वतंत्र पत्रकार रामेश्वर गौड़
धर्म की राजधानी कही जाने वाली तीर्थ नगरी हरिद्वार में इस बार हिंदू नववर्ष और चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर एक ऐसा आध्यात्मिक आयोजन हुआ जिसने कारागार की कठोर दीवारों के भीतर भी भक्ति, आत्मचिंतन और सुधार की नई रोशनी जगा दी।
श्री अखंड परशुराम अखाड़ा के तत्वावधान में जिला कारागार रोशनाबाद हरिद्वार में सर्वजन कल्याण की भावना से श्रीमद् भागवत कथा सप्ताह का आयोजन किया जा रहा है। कथा के द्वितीय दिवस पर कथा व्यास पंडित पवन कृष्ण शास्त्री ने कैदियों और उपस्थित श्रद्धालुओं को भागवत की अमृतमयी कथा का श्रवण कराया।
राजा परीक्षित और कलयुग की कथा से दिया धर्म का संदेश
कथा व्यास पंडित पवन कृष्ण शास्त्री ने बताया कि सर्वप्रथम सप्ताह कथा का आयोजन शुक्रताल में हुआ था, जहां सुखदेव मुनि ने राजा परीक्षित को सात दिनों तक श्रीमद् भागवत कथा का श्रवण कराया था।
उन्होंने विस्तार से वर्णन करते हुए बताया कि जब राजा परीक्षित को यह ज्ञात हुआ कि पृथ्वी पर कलयुग का आगमन हो चुका है, तब वे स्वयं कलयुग को खोजते हुए गंगा तट तक पहुंचे। वहां उनकी भेंट कलयुग से हुई। राजा परीक्षित ने उसे पृथ्वी से चले जाने का आदेश दिया, लेकिन कलयुग ने निवेदन किया कि जैसे सतयुग, त्रेता और द्वापर को स्थान मिला, वैसे ही उसे भी रहने के लिए स्थान दिया जाए।
तब राजा परीक्षित ने चार स्थानों—
जहां जुआ खेला जाता हो,
जहां निर्दोष पशुओं की हत्या होती हो,
जहां मद्यपान होता हो,
और जहां पराई स्त्री के साथ दुर्व्यवहार होता हो—
वहीं कलयुग को निवास करने की अनुमति दी।
परंतु कलयुग ने पुनः निवेदन किया कि राजा के भय से उनके राज्य में ये चारों अधर्म नहीं होते। तब राजा परीक्षित ने उसे स्वर्ण में वास करने की अनुमति दी। कथा के अनुसार, अधर्म से बने जरासंध के स्वर्ण मुकुट को धारण करते ही उसी मुकुट में कलयुग का प्रवेश हो गया और वहीं से अधर्म का प्रभाव आरंभ हुआ।
श्राप, पश्चाताप और भागवत कथा का महात्म्य
कथा के दौरान शास्त्री जी ने बताया कि एक बार शिकार के दौरान प्यास और थकान से व्याकुल राजा परीक्षित ने ऋषि समिक मुनि के गले में मृत सर्प डाल दिया। यह अपमान देखकर उनके पुत्र श्रृंगी ऋषि ने क्रोधित होकर राजा परीक्षित को श्राप दिया कि सातवें दिन तक्षक नाग के दंश से उनकी मृत्यु हो जाएगी।
जब राजा परीक्षित को इस श्राप का ज्ञान हुआ तो उन्होंने अपने पुत्र जनमेजय को राजगद्दी सौंप दी और गंगा तट स्थित शुक्रताल पहुंचकर जीवन के अंतिम सात दिनों में आत्मकल्याण का मार्ग चुना। वहीं वेदव्यास जी के पुत्र सुखदेव जी का आगमन हुआ और उन्होंने सात दिनों तक श्रीमद् भागवत कथा का अमृत सुनाया। कथा श्रवण के पश्चात राजा परीक्षित को परम पद की प्राप्ति हुई और वे भगवान विष्णु के वैकुंठ धाम के अधिकारी बन गए।
भागवत कथा: आत्मशुद्धि और मोक्ष का मार्ग
कथा व्यास ने कहा कि तभी से अपने जीवन का कल्याण चाहने वाले भक्त भागवत सप्ताह का आयोजन करते हैं। श्रीमद् भागवत कथा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि आत्मशुद्धि, वैराग्य और परमात्मा से जुड़ने का दिव्य माध्यम है, जो मनुष्य को अंततः भगवत धाम का अधिकारी बनाता है।
कैदियों के जीवन में सुधार की पहल
इस अवसर पर श्री अखंड परशुराम अखाड़ा के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंडित अधीर कौशिक ने कहा कि समाज के प्रत्येक समर्थ व्यक्ति को संकल्प लेकर समय-समय पर कारागारों में धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करने चाहिए। इससे बंदियों के मन में सकारात्मक परिवर्तन आता है और वे अपने जीवन की गलतियों को सुधारने की प्रेरणा प्राप्त करते हैं।
उन्होंने कहा कि यदि कैदियों के भीतर आध्यात्मिक चेतना जागृत हो जाए तो वे समाज में लौटकर एक नया और बेहतर जीवन जी सकते हैं।
जेल प्रशासन ने जताया आभार
जिला कारागार के अधीक्षक मनोज आर्य ने श्री अखंड परशुराम अखाड़ा का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि अखाड़े द्वारा समय-समय पर कारागार में इस प्रकार के आध्यात्मिक और सामाजिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिससे कैदियों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिलता है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि भविष्य में भी ऐसे आयोजन निरंतर होते रहेंगे।
भागवत पूजन के साथ सम्पन्न हुआ कार्यक्रम
कार्यक्रम के दौरान समाजसेवी जलज कौशिक द्वारा विधिवत श्रीमद् भागवत का पूजन किया गया। इस अवसर पर पंडित सतीश तिवारी, पंडित सचिन पैन्यूली, पंडित आदित्य जागुड़ी, बलविंदर चौधरी, कुलदीप शर्मा, मनोज ठाकुर, बृजमोहन शर्मा, संजू अग्रवाल सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे और सभी ने मिलकर भागवत पूजन सम्पन्न कराया।
कारागार में भक्ति का संदेश
कारागार जैसी जगह, जहां आमतौर पर अपराध और दंड की कहानियां लिखी जाती हैं, वहीं श्रीमद् भागवत कथा के माध्यम से पश्चाताप, आत्मशुद्धि और मोक्ष की नई कहानी लिखी जा रही है। यह आयोजन इस बात का प्रमाण है कि जब धर्म का दीपक जलता है तो उसकी रोशनी सबसे अंधेरी जगहों तक भी पहुंच जाती है।
— स्वतंत्र पत्रकार
रामेश्वर गौड़
    user_रामेश्वर गौड़ स्वतंत्र पत्रकार
    रामेश्वर गौड़ स्वतंत्र पत्रकार
    हरिद्वार, हरिद्वार, उत्तराखंड•
    3 hrs ago
  • Post by A Bharat News 10
    1
    Post by A Bharat News 10
    user_A Bharat News 10
    A Bharat News 10
    Local News Reporter हरिद्वार, हरिद्वार, उत्तराखंड•
    4 hrs ago
  • देहरादून से मंत्री पद की शपथ लेकर हरिद्वार लौटने के बाद हरिद्वार विधायक मदन कौशिक का समर्थकों ने जोरदार स्वागत किया।इस दौरान उनके कार्यालय पर बधाई देने वालों का तांता लगा रहा। रानीपुर विधायक आदेश चौहान व नगर मेयर किरण जैसल ने भी उन्हें बधाई दी।इस मौके पर मदन कौशिक ने कहा उनपर जो भरोसा जताया गया है उसपर वह खरे उतरेंगे, उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार का कार्यकाल काफी कम रह गया है लेकिन वह इस समय का सदुपयोग करते हुए जनता और सरकार के लिए काम करेंगे। उन्होंने कहा कि हरिद्वार की प्रस्तावित योजनाओं से किसी को नुक्सान न हो इसका ध्यान रखा जाएगा साथ ही शासन की भावना के अनुरूप कुंभ को भव्य और दिव्य बनाया जाएगा।उधर भाजपा प्रदेश सह प्रवक्ता विकास तिवारी ने कहा कि मदन कौशिक के मंत्री बनने से हरिद्वार विधानसभा क्षेत्र में लंबित परियोजनाओं और स्थानीय योजनाओं को नई दिशा मिलेगी। (-कुमार दुष्यंत)
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    देहरादून से मंत्री पद की शपथ लेकर हरिद्वार लौटने के बाद हरिद्वार विधायक मदन कौशिक का समर्थकों ने जोरदार स्वागत किया।इस दौरान उनके कार्यालय पर बधाई देने वालों का तांता लगा रहा। रानीपुर विधायक आदेश चौहान व नगर मेयर किरण जैसल ने भी उन्हें बधाई दी।इस मौके पर मदन कौशिक ने कहा उनपर जो भरोसा जताया गया है उसपर वह खरे उतरेंगे, उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार का कार्यकाल काफी कम रह गया है लेकिन वह इस समय का सदुपयोग करते हुए जनता और सरकार के लिए काम करेंगे। उन्होंने कहा कि हरिद्वार की प्रस्तावित योजनाओं से किसी को नुक्सान न हो इसका ध्यान रखा जाएगा साथ ही शासन की भावना के अनुरूप कुंभ को भव्य और दिव्य बनाया जाएगा।उधर भाजपा प्रदेश सह प्रवक्ता विकास तिवारी ने कहा कि
मदन कौशिक के मंत्री बनने से हरिद्वार विधानसभा क्षेत्र में लंबित परियोजनाओं और स्थानीय योजनाओं को नई दिशा मिलेगी।
(-कुमार दुष्यंत)
    user_लोकल न्यूज़ हरिद्वार  शहर की खबर शहर को खबर
    लोकल न्यूज़ हरिद्वार शहर की खबर शहर को खबर
    Journalist हरिद्वार, हरिद्वार, उत्तराखंड•
    5 hrs ago
  • हरिद्वार में भीम आर्मी का हल्ला बोल, जया मैक्सवेल अस्पताल के खिलाफ सड़कों पर जोरदार प्रदर्शन
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    हरिद्वार में भीम आर्मी का हल्ला बोल, जया मैक्सवेल अस्पताल के खिलाफ सड़कों पर जोरदार प्रदर्शन
    user_SAGAR
    SAGAR
    हरिद्वार, हरिद्वार, उत्तराखंड•
    16 hrs ago
  • The Aman Times पुष्कर सिंह धामी हल्द्वानी पहुंचे और एमबी इंटर कॉलेज में होने वाले बड़े कार्यक्रम की तैयारियों का जायजा लिया। शनिवार को राजनाथ सिंह यहां विशाल जनसभा को संबोधित करेंगे। CM धामी ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए—सुरक्षा और सभी व्यवस्थाएं आज ही पूरी हों। 👉 बोले—4 साल में सरकार ने किए ऐतिहासिक काम 👉 समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर कहा—उत्तराखंड की पहल अब दूसरे राज्यों तक पहुंच रही
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    The Aman Times 
पुष्कर सिंह धामी हल्द्वानी पहुंचे और एमबी इंटर कॉलेज में होने वाले बड़े कार्यक्रम की तैयारियों का जायजा लिया।
शनिवार को राजनाथ सिंह यहां विशाल जनसभा को संबोधित करेंगे।
CM धामी ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए—सुरक्षा और सभी व्यवस्थाएं आज ही पूरी हों।
👉 बोले—4 साल में सरकार ने किए ऐतिहासिक काम
👉 समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर कहा—उत्तराखंड की पहल अब दूसरे राज्यों तक पहुंच रही
    user_राजकुमार अग्रवाल डोईवाला रिपोर
    राजकुमार अग्रवाल डोईवाला रिपोर
    Lawyer डोईवाला, देहरादून, उत्तराखंड•
    6 hrs ago
  • सोशल मीडिया पर हो रही वीडियो वायरल शूटिंग के दौरान गई जान
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    सोशल मीडिया पर हो रही वीडियो वायरल शूटिंग के दौरान गई जान
    user_रवि कुमार आजाद
    रवि कुमार आजाद
    नरसन, हरिद्वार, उत्तराखंड•
    15 min ago
  • *ईद के दौरान शांति/सुरक्षा व्यवस्था एवं धार्मिक सद्भाव दुरुस्त रखने के लिए एसएसपी हरिद्वार ने सभी पुलिस राजपत्रित अधिकारियों एवं थाना प्रभारी। ko को ऑनलाइन वीसी के माध्यम से दिए गए आवश्यक दिशा निर्देश-* *किसी भी स्तर पर ना हो कोई लापरवाही सभी अधिकारी रहेंगे सतर्क* *सभी पुलिस अधिकारी रहेंगे अपने अपने क्षेत्र में राउंड पर* 1- सभी थाना प्रभारी नमाज एवं पर्व के दौरान सरकारी वाहन के साथ लगातार राउंड पर रहेंगे। 2- ईदगाह एवं आसपास के स्थलों की लगातार निगरानी व चैकिंग की जाए। 3- नमाज से पूर्व वाहनों को सही तरीके से खड़ा करवाया जाए ताकी यातायात संबंधी कोई परेशानी न हो। 4- संवेदनशील स्थानों पर लगातार पुलिस पार्टी गश्त पर रहें एवं शरारती तत्वों पर नजर बनाए रखें। 5- पर्व के दौरान सभी सर्किल ऑफिसर्स थाना प्रभारियों के संपर्क में रहेंगे व कोई भी लॉ एंड ऑर्डर की समस्या होने पर मौके पर पहुंच समस्या का निस्तारण करेंगे। 6- सुनिश्चित किया जाए कि ईद के दौरान पालतू पशु विशेषकर सुअर सार्वजनिक स्थलों पर न घूमें। उक्त संबंध में समय से संबंधित से मीटिंग कर लें।
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    *ईद के दौरान शांति/सुरक्षा व्यवस्था एवं धार्मिक सद्भाव दुरुस्त रखने के लिए एसएसपी हरिद्वार ने सभी पुलिस राजपत्रित अधिकारियों एवं थाना प्रभारी। ko को ऑनलाइन वीसी के माध्यम से दिए गए आवश्यक दिशा निर्देश-*
*किसी भी स्तर पर ना हो कोई लापरवाही सभी अधिकारी रहेंगे सतर्क*
*सभी पुलिस अधिकारी रहेंगे अपने अपने क्षेत्र में राउंड पर*
1-	सभी थाना प्रभारी नमाज एवं पर्व के दौरान सरकारी वाहन के साथ लगातार राउंड पर रहेंगे।
2-	ईदगाह एवं आसपास के स्थलों की लगातार निगरानी व चैकिंग की जाए।
3-	नमाज से पूर्व वाहनों को सही तरीके से खड़ा करवाया जाए ताकी यातायात संबंधी कोई परेशानी न हो।
4-	संवेदनशील स्थानों पर लगातार पुलिस पार्टी गश्त पर रहें एवं शरारती तत्वों पर नजर बनाए रखें।
5-	पर्व के दौरान सभी सर्किल ऑफिसर्स थाना प्रभारियों के संपर्क में रहेंगे व कोई भी लॉ एंड ऑर्डर की समस्या होने पर मौके पर पहुंच समस्या का निस्तारण करेंगे।
6-	सुनिश्चित किया जाए कि ईद के दौरान पालतू पशु विशेषकर सुअर सार्वजनिक स्थलों पर न घूमें। उक्त संबंध में समय से संबंधित से मीटिंग कर लें।
    user_Dpk Chauhan
    Dpk Chauhan
    Farmer हरिद्वार, हरिद्वार, उत्तराखंड•
    2 hrs ago
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