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भीषण गर्मी के मद्देनजर विद्युत विभाग पूरी तरह से अलर्ट मोड पर आ गया है। इसी क्रम में, विभाग के XEN गोविंद सिंह की अध्यक्षता में बाड़ी में एक समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक में बाड़ी, बसेड़ी, सैंपऊ और सरमथुरा के सहायक अभियंता उपस्थित रहे, जहाँ उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने, समय पर नए कनेक्शन जारी करने और बिजली संबंधी शिकायतों का त्वरित समाधान करने के महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए। उपभोक्ताओं की विद्युत समस्याओं के समाधान के लिए बाड़ी में एक विशेष कंट्रोल रूम भी स्थापित किया गया है। विभाग ने शिकायतों के पंजीकरण हेतु दो संपर्क नंबर भी जारी किए हैं, जिनमें एक स्थानीय नंबर 05647-299055 और एक टोल-फ्री नंबर 18001806507 शामिल है।
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भीषण गर्मी के मद्देनजर विद्युत विभाग पूरी तरह से अलर्ट मोड पर आ गया है। इसी क्रम में, विभाग के XEN गोविंद सिंह की अध्यक्षता में बाड़ी में एक समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक में बाड़ी, बसेड़ी, सैंपऊ और सरमथुरा के सहायक अभियंता उपस्थित रहे, जहाँ उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने, समय पर नए कनेक्शन जारी करने और बिजली संबंधी शिकायतों का त्वरित समाधान करने के महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए। उपभोक्ताओं की विद्युत समस्याओं के समाधान के लिए बाड़ी में एक विशेष कंट्रोल रूम भी स्थापित किया गया है। विभाग ने शिकायतों के पंजीकरण हेतु दो संपर्क नंबर भी जारी किए हैं, जिनमें एक स्थानीय नंबर 05647-299055 और एक टोल-फ्री नंबर 18001806507 शामिल है।
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- धौलपुर के बाड़ी उपखंड पर युवा वर्ग और विद्यार्थी वर्ग ने पूरे राजस्थान में मारवाड़ी भाषा को थोपने का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने उच्च न्यायालय के आदेश का सम्मान करने की बात कहते हुए भी छात्रों के भविष्य को देखते हुए यह कदम उठाया। इस दौरान छात्रसंघ अध्यक्ष पुष्पेंद्र गुर्जर ने बताया कि पूर्वी राजस्थान में ब्रज भाषा का प्रचलन है, और यदि मारवाड़ी भाषा को जबरन थोपा जाता है तो यह इस क्षेत्र के जिलों के साथ अन्याय होगा और ब्रज भाषा के अस्तित्व को खत्म करने का प्रयास भी होगा। शेर गुर्जर ने इस संदर्भ में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 29(1) का हवाला दिया, जो नागरिकों को उनकी भाषा, लिपि और संस्कृति के संरक्षण का अधिकार देता है, तथा अनुच्छेद 350A का भी उल्लेख किया, जो मातृभाषा आधारित प्राथमिक शिक्षा पर विशेष ध्यान देने की अपेक्षा करता है। उन्होंने तर्क दिया कि यदि किसी क्षेत्र की वास्तविक भाषाई परिस्थिति का अध्ययन किए बिना भाषा नीति लागू की जाती है, तो इसका विद्यार्थियों की सीखने की प्रक्रिया, परीक्षा परिणाम और विद्यालयी अनुकूलन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा, विशेषकर पूर्वी राजस्थान के लगभग 20 प्रतिशत छात्र-छात्राओं पर जो प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। इसलिए, स्थानीय भाषाई अध्ययन को आवश्यक बताया गया। समरथ गुर्जर और मनोज राजावत ने राजस्थान के पूर्वी जिलों जैसे धौलपुर, भरतपुर, डीग, करौली, सवाई माधोपुर, अलवर और दौसा की वास्तविक भाषाई स्थिति का अध्ययन करने के लिए जिला या संभाग स्तरीय विशेषज्ञ समिति गठित करने की मांग की। मानवेंद्र बैंसला और देशराज कंसाना ने भी कहा कि इन पूर्वी जिलों में ब्रज और हिंदी का प्रचलन पहले से ही है, ऐसे में अचानक से इस प्रकार का भाषा का बोझ थोपना अनुचित है। इस विरोध प्रदर्शन के दौरान ऋषभ शर्मा, अजय कंसाना, चेतन शर्मा, बंटू प्रजापति, अमन गुर्जर, आदित्य, विपिन, ललित दर्शन गुर्जर, प्रदीप, हंसराम, तन्वेश, तनवी, यश, शिवा, विक्रम, रिहान, शिवानी, अदिति, आर्यन, लोकेश, संदीप, मोहित, राहुल गुर्जर, बबलू, हिमांक, प्रियांशी, भयांश जाट, सचिन योगेश मीना, हेमंत, पायल सहित सैकड़ों युवा मौजूद रहे। इस संबंध में बाड़ी के उपखंड अधिकारी को ज्ञापन भी सौंपा गया।3
- धौलपुर में साइबर अपराध पुलिस थाना ने एक ठगी के मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए पीड़ित के बैंक खाते से निकाले गए 60 हजार 848 रुपये की पूरी राशि मात्र 24 घंटे के भीतर वापस दिलवा दी। सरमथुरा निवासी प्रेम सिंह के व्हाट्सएप पर एक एपीके फाइल भेजी गई थी, जिसे इंस्टॉल करते ही बिना किसी ओटीपी के उनके खाते से कुल 60,848 रुपये निकाल लिए गए। ठगी का पता चलते ही पीड़ित प्रेम सिंह ने एक घंटे के भीतर राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलने के तुरंत बाद, साइबर अपराध पुलिस थाना धौलपुर में तैनात कांस्टेबल अमित शर्मा ने संबंधित बैंकों और वॉलेट कंपनियों के नोडल अधिकारियों से संपर्क साधा। इस त्वरित समन्वय और कार्रवाई के परिणामस्वरूप, ठगी की गई संपूर्ण राशि 24 घंटे के भीतर पीड़ित के बैंक खाते में सफलतापूर्वक वापस कर दी गई। साइबर थाना पुलिस ने आमजन से अपील की है कि वे किसी भी अनजान लिंक, एपीके फाइल या संदिग्ध मोबाइल ऐप को डाउनलोड या इंस्टॉल न करें। पुलिस ने यह भी सलाह दी है कि साइबर ठगी का शिकार होने पर तुरंत 1930 हेल्पलाइन नंबर पर या अपने नजदीकी साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराएं।1
- धौलपुर के राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय में रैगिंग मुक्त परिसर और भय मुक्त शिक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने हाथों में बैनर और तख्तियां लेकर एक रैली निकाली, जिसके माध्यम से सभी उपस्थित विद्यार्थियों को एंटी-रैगिंग के प्रति जागरूक किया गया। छात्र-छात्राओं ने एंटी-रैगिंग संबंधी पोस्टर भी तैयार किए। कार्यक्रम में एंटी-रैगिंग के दुष्प्रभावों को दर्शाने वाला एक नाटक भी मंचित किया गया। यह आयोजन प्रधानाचार्य डॉ. दीपक कुमार दुबे की अध्यक्षता में, और सहायक आचार्य एनाटॉमी डॉ. संतोष कुमार एवं सहायक आचार्य माइक्रोबायोलॉजी डॉ. आशीष सारस्वत के निर्देशन में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में भविष्य में किसी भी प्रकार की रैगिंग न करने की हिदायत दी गई। अधिकारियों ने बताया कि यदि कोई सीनियर छात्र-छात्रा किसी जूनियर छात्र-छात्रा के साथ रैगिंग करता है, तो इसकी शिकायत नेशनल एंटी रैगिंग हेल्प लाइन नंबर 18001805522 पर की जा सकती है। इस जागरूकता कार्यक्रम में डॉ. माधुरी गुप्ता, डॉ. हेमलता गुप्ता, अनिल गोयल, ध्रुव सिंह सिकरवार, मुकेश यादव और प्रेमराज सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।3
- धौलपुर में नौतपा की भीषण गर्मी और आग उगलती दोपहरी के बीच बेजुबान पशु-पक्षियों की पीड़ा को समझते हुए एडवोकेट, पत्रकार और आमजन ने मिलकर एक महत्वपूर्ण सामाजिक सरोकार निभाया है। मई-जून की तपती गर्मी से पक्षियों के गले सूख रहे हैं और आवारा पशु पानी की तलाश में भटक रहे हैं, ऐसे में शहर के अधिवक्ताओं, पत्रकारों और स्थानीय नागरिकों ने एकजुट होकर इन बेजुबानों के लिए पानी की व्यवस्था का बीड़ा उठाया है। इस पहल के तहत, अधिवक्ताओं, पत्रकारों और आमजन द्वारा शहर के विभिन्न चौराहों, सार्वजनिक स्थानों, मोहल्लों और घनी आबादी वाले क्षेत्रों के पेड़ों पर मिट्टी के परिंडे बांधे जा रहे हैं, जिनमें रोजाना ताजा पानी भरा जाता है ताकि चिड़िया, कबूतर और अन्य पक्षी अपनी प्यास बुझा सकें। वहीं, सड़कों, मंदिरों के पास और सुनसान इलाकों में बेसहारा गाय, कुत्ते, बंदर जैसे जानवरों के लिए लोगों ने अपनी ओर से बड़ी पानी की टंकियां रखवाई हैं। इन टंकियों में भी रोजाना पानी भरा जाता है, जिससे सैकड़ों बेजुबान जानवरों को बड़ी राहत मिल रही है। पूर्व अभिभाषक संघ अध्यक्ष प्रशांत हुंडावाल ने इस अवसर पर कहा कि न्यायालय में हम इंसानों के अधिकारों की बात करते हैं, लेकिन प्रकृति और उसके जीवों का भी हम पर उतना ही हक है, और नौतपा में एक बर्तन पानी रख देना सबसे बड़ा पुण्य का काम है। उन्होंने अधिवक्ता समुदाय से भी इस सेवा कार्य में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की। एडवोकेट प्रमोद शर्मा ने बताया कि कानून हमें दया और करुणा सिखाता है, और जब इंसान अपने स्वार्थ में अंधा होता है, तो ये बेजुबान जानवर सबसे पहले पीड़ित होते हैं। उन्होंने इस संयुक्त प्रयास को समाज को नई दिशा देने वाला बताया और हर नागरिक से अपने स्तर पर एक परिंडा लगाने का आह्वान किया। अधिवक्ताओं, पत्रकारों और स्थानीय लोगों का कहना है कि नौतपा के 9 दिन धरती का तापमान सबसे अधिक होता है, जिससे प्रकृति और जीव-जंतुओं का जीवन संकट में पड़ जाता है। उनका मानना है कि प्रशासन के साथ-साथ समाज की भी जिम्मेदारी है कि वह इन बेजुबानों के लिए पानी की व्यवस्था करे। आमजन से भी अपील की गई है कि वे अपने घर की छत, बालकनी, दुकान या मोहल्ले में एक मिट्टी का बर्तन पानी से भरकर रखें, क्योंकि एक छोटा सा प्रयास किसी पक्षी की जान बचा सकता है। स्थानीय युवा, अधिवक्ता, पत्रकार और आमजन प्रतिदिन सुबह-शाम परिंडे और टंकियों की सफाई कर उन्हें फिर से भर रहे हैं, और यह सेवा अभियान गर्मी कम होने तक लगातार जारी रहेगा। रमा पंडित, सचिन पाराशर, सार्थक उपाध्याय, हिमांशु, धीरेंद्र कुशवाह, मीनेश मीना, अनिल मीणा, हेमंत सिंह, अनुराग कटारा, अजीत, रजित शर्मा, रमाकांत शर्मा, अजीत परिहार, हरवीर शर्मा और भानु शर्मा सहित कई लोग इस कार्य में सक्रिय रूप से शामिल हैं, जो नौतपा की इस तपिश में पशु-पक्षियों के लिए जीवनदान और इंसानियत की सबसे बड़ी मिसाल बन रहा है।4
- धौलपुर के बाड़ी उपखंड और तहसील कार्यालयों पर 26 मई को कर्मचारियों ने अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ (एकीकृत) के आह्वान पर एक घंटे का सामूहिक कार्य बहिष्कार कर सांकेतिक प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन राजस्थान सरकार द्वारा कर्मचारी हितों पर किए जा रहे कथित कुठाराघात के विरोध में था, जिसमें कर्मचारियों का तीखा आक्रोश देखने को मिला। महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष गजेंद्र सिंह राठौड़ और प्रदेश संगठन महामंत्री डॉ. रनजीत मीणा के नेतृत्व में यह कार्रवाई की गई। कर्मचारी महासंघ एकीकृत के प्रदेश संगठन महामंत्री डॉ. रनजीत मीणा ने आरोप लगाया कि सरकार कर्मचारियों के लोकतांत्रिक अधिकारों और सुविधाओं पर लगातार चोट कर रही है। कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में आरजीएचएस (RGHS) योजना का निजीकरण रोकना, बीमा कंपनियों के प्रवेश को रोकना और समर्पित अवकाश (सरेंडर लीव) के भुगतान पर लगी अघोषित रोक को तत्काल हटाना शामिल है। इसके अतिरिक्त, महासंघ के 25 सूत्री मांग पत्र को पूरा करने की भी मांग की गई है। कर्मचारियों ने दुख व्यक्त किया कि उन्हें अपने स्वयं के जीपीएफ से पैसा निकालने के लिए 6-6 महीने तक इंतजार करना पड़ रहा है, जिसे उन्होंने कर्मचारियों के साथ कुठाराघात बताया। इस सामूहिक कार्य बहिष्कार और प्रदर्शन में विभिन्न कर्मचारी संगठनों के प्रमुख पदाधिकारी और भारी संख्या में कर्मचारी उपस्थित रहे। इनमें जिला अध्यक्ष चंद्रभान चौधरी, कर्मचारी नेता डॉ. वीरेंद्र सिंह यादव (जिला आयुर्वेद चिकित्सक संघ अध्यक्ष), गोपाल कृष्ण शर्मा (आयुर्वेद संघर्ष समिति अध्यक्ष), टीकम सिंह जाट (शिक्षक संघ महामंत्री), आईएलआर सुनील कुमार परमार, जितेंद्र सिंह मीणा, हृदेश पाठक, हितेंद्र कुमार व्यास, टीएलआई ब्रजराज मीणा, सूचना सहायक प्रकाश सामरिया, वरिष्ठ सहायक सोनू शर्मा, कनिष्ठ सहायक महेश कुमार मीणा, और अध्यापक अशोक कुमार मीणा जैसे अनेक पदाधिकारियों ने भाग लिया और कर्मचारियों की आवाज बुलंद की। प्रदर्शन के दौरान सभी पदाधिकारियों ने एकजुट होकर सरकार की कर्मचारी-विरोधी नीतियों की घोर निंदा की। उन्होंने साफ शब्दों में सरकार को चेतावनी दी कि वह जल्द से जल्द कर्मचारी हितों को ध्यान में रखते हुए सकारात्मक कदम उठाए और 25 सूत्री मांग पत्र को पूरा करे। नेताओं ने स्पष्ट किया कि यदि मांगें नहीं मानी गईं, तो इस आंदोलन को और अधिक तेज व उग्र किया जाएगा, जिसकी समस्त जिम्मेदारी शासन की होगी।1
- धौलपुर जिले की बाड़ी में बिजली चोरों के खिलाफ डिस्कॉम का अभियान लगातार जारी है। इसी क्रम में विभाग ने चार मोहल्लों में बड़ी कार्रवाई की है। इस अभियान के तहत, हरिजन बस्ती में लोगों से बिजली कनेक्शन लेने की अपील भी की गई है, ताकि वे वैध तरीके से बिजली का उपयोग करें। डिस्कॉम ने ग्रामीण क्षेत्रों से चार ट्रांसफार्मर भी हटा दिए हैं। इस कार्रवाई के बीच, एक्सईएन गोविंद सिंह ने अधिकारियों के साथ एक बैठक की और बिजली से संबंधित शिकायतों के लिए एक हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया है।2
- बाड़ी उपखंड पर समस्त युवा वर्ग और विद्यार्थी वर्ग ने उच्च न्यायालय के आदेश का सम्मान करते हुए भी पूरे राजस्थान में मारवाड़ी भाषा को थोपने का पुरजोर विरोध किया है। उन्होंने छात्रों के भविष्य को देखते हुए इस कदम को पूर्वी राजस्थान के जिलों के साथ अन्याय और दुर्व्यवहार बताया। इस दौरान उपखंड अधिकारी बाड़ी को एक ज्ञापन भी सौंपा गया। छात्रसंघ अध्यक्ष पुष्पेंद्र गुर्जर ने स्पष्ट किया कि हालांकि वे उच्च न्यायालय का सम्मान करते हैं, लेकिन पूर्वी राजस्थान में बृज भाषा का प्रचलन है। उनका कहना था कि यदि मारवाड़ी भाषा को पूरे राजस्थान में थोपा गया, तो यह पूर्वी राजस्थान के जिलों के साथ अन्याय होगा और बृज भाषा के अस्तित्व को खत्म करने का प्रयास भी होगा। इसी क्रम में, शेर गुर्जर ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 29(1) का उल्लेख किया, जो नागरिकों को उनकी भाषा, लिपि और संस्कृति के संरक्षण का अधिकार देता है, तथा अनुच्छेद 350A का भी जिक्र किया, जो मातृभाषा आधारित प्राथमिक शिक्षा पर विशेष ध्यान देने की अपेक्षा करता है। उन्होंने चेताया कि यदि किसी क्षेत्र की वास्तविक भाषाई परिस्थिति का समुचित अध्ययन किए बिना शिक्षा संबंधी भाषा नीति लागू की जाती है, खासकर जब पूर्वी राजस्थान से लगभग 20 प्रतिशत छात्र-छात्राएं प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हों, तो यह विद्यार्थियों की सीखने की प्रक्रिया, परीक्षा परिणाम और विद्यालयी अनुकूलन पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। इसलिए, स्थानीय भाषाई अध्ययन आवश्यक है। समरथ गुर्जर और मनोज राजावत ने धौलपुर, भरतपुर, डीग, करौली, सवाई माधोपुर, अलवर और दौसा जैसे पूर्वी राजस्थान के जिलों की वास्तविक भाषाई परिस्थिति के अध्ययन के लिए जिला अथवा संभाग स्तरीय विशेषज्ञ समिति गठित करने की मांग की। उन्होंने आशंका जताई कि यदि मारवाड़ी भाषा को जबरन थोपा गया, तो पूर्वी राजस्थान के विद्यार्थी प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रश्नों को हल नहीं कर पाएंगे और सरकारी नौकरी से वंचित रह जाएंगे। उनका मुख्य उद्देश्य यह है कि माननीय उच्च न्यायालय को अपना फैसला बदलना चाहिए और पूर्वी राजस्थान की भाषा हिंदी एवं बृज भाषा ही रहने देनी चाहिए, जिससे भविष्य में न तो विद्यार्थियों को कोई परेशानी आए और न ही बृज भाषा का अस्तित्व खत्म हो। मानवेंद्र बैंसला और देशराज कंसाना ने भी बताया कि इन पूर्वी जिलों में भगवान श्री कृष्ण के समय से ही बृज और हिंदी का प्रचलन रहा है, और कई कवियों ने भी बृज भाषा में रचनाएं लिखी हैं। उनके अनुसार, अचानक से इस तरह भाषा का बोझ थोपना गलत है, और यदि पूरे क्षेत्र में मारवाड़ी भाषा को राजस्थानी भाषा के रूप में लागू किया गया, तो यह क्षेत्र पूरी तरह पिछड़ जाएगा। इस विरोध प्रदर्शन में शेरा गुर्जर, मनोज राजावत, समरथ गुर्जर, छात्रसंघ अध्यक्ष पुष्पेंद्र गुर्जर, मानवेंद्र बैंसला, देशराज कंसाना, ऋषभ शर्मा, अजय कंसाना, चेतन शर्मा, बन्टू प्रजापति, अमन गुर्जर, आदित्य, विपिन, ललित, दर्शन गुर्जर, प्रदीप, हंसराम, तन्वेश, तनवी, यश, शिवा, विक्रम, रिहान, शिवानी, अदिति, आर्यन, लोकेश, संदीप, कप्तान, धीरज, हर्षल, करन, मोहित, चेतन शर्मा, राहुल गुर्जर, बबलू, हिमांक, प्रियांशी, भयांश जाट, सचिन, योगेश मीना, हनी, रिजवान खान, अमित कुशवाह, निहारिका, हेमन्त, कांता शर्मा, पायल सहित सैकड़ों युवा और छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।4
- धौलपुर जिले के अधन्नपुर में आयोजित संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का समापन हो गया। कथा के अंतिम दिन पूज्य संत बाल ब्रह्मचारी अवधूत लोकेशानंद जी महाराज गुफाधाम जारौली टीला वालों ने व्यासपीठ से श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि भागवत कथा केवल आध्यात्मिक मुक्ति का मार्ग ही नहीं, बल्कि मनुष्य को प्रकृति से जुड़ने और पर्यावरण संरक्षण का जीवंत संदेश भी देती है। उन्होंने श्रीमद्भागवत महापुराण के विभिन्न प्रसंगों में प्रकृति को ईश्वर का साक्षात रूप बताया। महाराज श्री ने प्रकृति दर्शन, परीक्षित मोक्ष, उद्धव संवाद और सुदामा चरित्र पर विस्तार से बात की। उन्होंने स्पष्ट किया कि नदी, पर्वत, वृक्ष और पशु-पक्षी सभी भगवान के विराट स्वरूप का अभिन्न हिस्सा हैं। भगवान कृष्ण द्वारा इंद्र की पूजा रुकवाकर गोवर्धन पर्वत की पूजा शुरू कराने का प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने बताया कि यह हमें प्राकृतिक संसाधनों का सम्मान और संरक्षण करने की सीख देता है। परीक्षित मोक्ष प्रसंग का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि मृत्यु अटल है, परंतु ईश्वर भक्ति से इसका भय समाप्त हो जाता है, जैसा कि राजा परीक्षित ने शुकदेव जी के मुख से कथा सुनकर परम पद प्राप्त किया। उन्होंने यह भी बताया कि भगवान कृष्ण ने जब अपने मित्र उद्धव को ब्रज भेजा, तो गोपियों के निश्छल और अनन्य प्रेम को देखकर उद्धव का ज्ञान का अहंकार टूट गया और उन्होंने भक्ति मार्ग को ज्ञान से श्रेष्ठ माना। संगीत कलाकारों के भजनों के माध्यम से जब कृष्ण और सुदामा की दिव्य मित्रता का प्रसंग सुनाया गया, तो पंडाल में उपस्थित श्रद्धालु भावविभोर हो गए। कथा व्यास ने जोर देकर कहा कि भगवान धन-दौलत के नहीं, बल्कि सच्चे भाव और प्रेम के भूखे हैं। इस अवसर पर कथा आयोजक सोबरन सिंह अरेला और भगवंत प्रसाद पीटीआई के साथ राजेश मरैया, पुरुषोत्तम, संतोष, योगेश चौबे, ब्रजमोहन, दिनेश चंद्र रावत, मोतीराम शर्मा, बृजेश उपाध्याय, राजकुमार बित्थरिया, शाशिकांत, भीमसेन, लोकेंद्र, आदित्येन्द्र, कृष्णकांत एवं अन्य श्रद्धालुओं ने व्यासपीठ का पूजन किया। कथा का समापन महाआरती और प्रसाद वितरण के साथ हुआ।4