धौलपुर जिले के अधन्नपुर में आयोजित संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का समापन हो गया। कथा के अंतिम दिन पूज्य संत बाल ब्रह्मचारी अवधूत लोकेशानंद जी महाराज गुफाधाम जारौली टीला वालों ने व्यासपीठ से श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि भागवत कथा केवल आध्यात्मिक मुक्ति का मार्ग ही नहीं, बल्कि मनुष्य को प्रकृति से जुड़ने और पर्यावरण संरक्षण का जीवंत संदेश भी देती है। उन्होंने श्रीमद्भागवत महापुराण के विभिन्न प्रसंगों में प्रकृति को ईश्वर का साक्षात रूप बताया। महाराज श्री ने प्रकृति दर्शन, परीक्षित मोक्ष, उद्धव संवाद और सुदामा चरित्र पर विस्तार से बात की। उन्होंने स्पष्ट किया कि नदी, पर्वत, वृक्ष और पशु-पक्षी सभी भगवान के विराट स्वरूप का अभिन्न हिस्सा हैं। भगवान कृष्ण द्वारा इंद्र की पूजा रुकवाकर गोवर्धन पर्वत की पूजा शुरू कराने का प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने बताया कि यह हमें प्राकृतिक संसाधनों का सम्मान और संरक्षण करने की सीख देता है। परीक्षित मोक्ष प्रसंग का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि मृत्यु अटल है, परंतु ईश्वर भक्ति से इसका भय समाप्त हो जाता है, जैसा कि राजा परीक्षित ने शुकदेव जी के मुख से कथा सुनकर परम पद प्राप्त किया। उन्होंने यह भी बताया कि भगवान कृष्ण ने जब अपने मित्र उद्धव को ब्रज भेजा, तो गोपियों के निश्छल और अनन्य प्रेम को देखकर उद्धव का ज्ञान का अहंकार टूट गया और उन्होंने भक्ति मार्ग को ज्ञान से श्रेष्ठ माना। संगीत कलाकारों के भजनों के माध्यम से जब कृष्ण और सुदामा की दिव्य मित्रता का प्रसंग सुनाया गया, तो पंडाल में उपस्थित श्रद्धालु भावविभोर हो गए। कथा व्यास ने जोर देकर कहा कि भगवान धन-दौलत के नहीं, बल्कि सच्चे भाव और प्रेम के भूखे हैं। इस अवसर पर कथा आयोजक सोबरन सिंह अरेला और भगवंत प्रसाद पीटीआई के साथ राजेश मरैया, पुरुषोत्तम, संतोष, योगेश चौबे, ब्रजमोहन, दिनेश चंद्र रावत, मोतीराम शर्मा, बृजेश उपाध्याय, राजकुमार बित्थरिया, शाशिकांत, भीमसेन, लोकेंद्र, आदित्येन्द्र, कृष्णकांत एवं अन्य श्रद्धालुओं ने व्यासपीठ का पूजन किया। कथा का समापन महाआरती और प्रसाद वितरण के साथ हुआ।
धौलपुर जिले के अधन्नपुर में आयोजित संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का समापन हो गया। कथा के अंतिम दिन पूज्य संत बाल ब्रह्मचारी अवधूत लोकेशानंद जी महाराज गुफाधाम जारौली टीला वालों ने व्यासपीठ से श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि भागवत कथा केवल आध्यात्मिक मुक्ति का मार्ग ही नहीं, बल्कि मनुष्य को प्रकृति से जुड़ने और पर्यावरण संरक्षण का जीवंत संदेश भी देती है। उन्होंने श्रीमद्भागवत महापुराण के विभिन्न प्रसंगों में प्रकृति को ईश्वर का साक्षात रूप बताया। महाराज श्री ने
प्रकृति दर्शन, परीक्षित मोक्ष, उद्धव संवाद और सुदामा चरित्र पर विस्तार से बात की। उन्होंने स्पष्ट किया कि नदी, पर्वत, वृक्ष और पशु-पक्षी सभी भगवान के विराट स्वरूप का अभिन्न हिस्सा हैं। भगवान कृष्ण द्वारा इंद्र की पूजा रुकवाकर गोवर्धन पर्वत की पूजा शुरू कराने का प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने बताया कि यह हमें प्राकृतिक संसाधनों का सम्मान और संरक्षण करने की सीख देता है। परीक्षित मोक्ष प्रसंग का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि मृत्यु अटल है, परंतु ईश्वर भक्ति
से इसका भय समाप्त हो जाता है, जैसा कि राजा परीक्षित ने शुकदेव जी के मुख से कथा सुनकर परम पद प्राप्त किया। उन्होंने यह भी बताया कि भगवान कृष्ण ने जब अपने मित्र उद्धव को ब्रज भेजा, तो गोपियों के निश्छल और अनन्य प्रेम को देखकर उद्धव का ज्ञान का अहंकार टूट गया और उन्होंने भक्ति मार्ग को ज्ञान से श्रेष्ठ माना। संगीत कलाकारों के भजनों के माध्यम से जब कृष्ण और सुदामा की दिव्य मित्रता का प्रसंग सुनाया गया, तो
पंडाल में उपस्थित श्रद्धालु भावविभोर हो गए। कथा व्यास ने जोर देकर कहा कि भगवान धन-दौलत के नहीं, बल्कि सच्चे भाव और प्रेम के भूखे हैं। इस अवसर पर कथा आयोजक सोबरन सिंह अरेला और भगवंत प्रसाद पीटीआई के साथ राजेश मरैया, पुरुषोत्तम, संतोष, योगेश चौबे, ब्रजमोहन, दिनेश चंद्र रावत, मोतीराम शर्मा, बृजेश उपाध्याय, राजकुमार बित्थरिया, शाशिकांत, भीमसेन, लोकेंद्र, आदित्येन्द्र, कृष्णकांत एवं अन्य श्रद्धालुओं ने व्यासपीठ का पूजन किया। कथा का समापन महाआरती और प्रसाद वितरण के साथ हुआ।
- राजाखेड़ा क्षेत्र के खोड़ गाँव, पंचायत बरेठा में दो दिन पहले हुई एक भीषण आगजनी की घटना में एक परिवार को भारी नुकसान का सामना करना पड़ा है। इस हादसे में कप्तान सिंह पुत्र रामचरण कुशवाह के घर में बंधी चार भैंस, एक बकरा, अनाज और पूरा घरेलू सामान जलकर खाक हो गया, जिससे परिवार के सामने एक गंभीर आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया है। घटना की जानकारी मिलने के बाद राजाखेड़ा विधायक रोहित बोहरा पीड़ित परिवार से मिलने गाँव पहुँचे। उन्होंने मौके पर जाकर स्थिति का जायजा लिया और परिवार को तत्काल आर्थिक सहायता प्रदान की। इसके साथ ही, विधायक ने प्रशासनिक अधिकारियों से भी बात की और उन्हें निर्देश दिए कि पीड़ित परिवार को जल्द से जल्द सरकारी सहायता उपलब्ध कराई जाए। विधायक ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रशासन इस संकट की घड़ी में पीड़ित परिवार के साथ खड़ा है और उन्हें हर संभव मदद दिलाने का पूरा प्रयास किया जाएगा। इस दौरान, ग्रामीणों ने भी पीड़ित परिवार को सहायता मुहैया कराने की मांग उठाई।2
- धौलपुर के अधन्नपुर में आयोजित संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का अंतिम दिन था, जहाँ गुफाधाम जारौली टीला वाले पूज्य संत बाल ब्रह्मचारी अवधूत लोकेशानंद जी महाराज ने श्रद्धालुओं को संबोधित किया। उन्होंने अपने वक्तव्य में कहा कि भागवत कथा केवल आध्यात्मिक मुक्ति का मार्ग ही नहीं है, बल्कि यह मनुष्य को प्रकृति से जुड़ने और पर्यावरण संरक्षण का एक जीवंत संदेश भी देती है। श्रीमद्भागवत महापुराण में प्रकृति को ईश्वर का ही साक्षात रूप माना गया है। महाराज ने प्रकृति दर्शन, परीक्षित मोक्ष, उद्धव संवाद और सुदामा चरित्र जैसे प्रसंगों पर विस्तार से बताया। उन्होंने नदियों, पर्वतों, वृक्षों और पशु-पक्षियों को भगवान के विराट स्वरूप का हिस्सा बताया। भगवान कृष्ण द्वारा इंद्र की पूजा रुकवाकर गोवर्धन पर्वत की पूजा शुरू कराने का जिक्र करते हुए उन्होंने प्राकृतिक संसाधनों के सम्मान और संरक्षण का महत्व समझाया। परीक्षित मोक्ष प्रसंग में उन्होंने कहा कि राजा परीक्षित ने तक्षक नाग के डसने से पूर्व शुकदेव जी के मुख से कथा सुनकर परम पद प्राप्त किया, जो यह सिद्ध करता है कि ईश्वर भक्ति से मृत्यु का भय समाप्त हो जाता है। भगवान कृष्ण ने जब अपने परम ज्ञानी मित्र उद्धव को ब्रज भेजा, तो गोपियों के निश्छल प्रेम को देखकर उद्धव का ज्ञान का अहंकार चूर हो गया और उन्होंने भक्ति को ज्ञान से श्रेष्ठ माना। संगीत कलाकारों के भजनों के माध्यम से जब कृष्ण और सुदामा की दिव्य मित्रता का प्रसंग सुनाया गया, तो पंडाल में उपस्थित श्रद्धालु भावविभोर हो गए। कथा व्यास ने जोर देकर कहा कि भगवान धन-दौलत के नहीं, बल्कि सच्चे भाव और प्रेम के भूखे हैं। कथा के आयोजक सोबरन सिंह अरेला और भगवंत प्रसाद पीटीआई सहित राजेश मरैया, पुरुषोत्तम, संतोष, योगेश चौबे, ब्रजमोहन, दिनेश चंद्र रावत, मोतीराम शर्मा, बृजेश उपाध्याय, राजकुमार बित्थरिया, शाशिकांत, भीमसेन, लोकेंद्र, आदित्येन्द्र और कृष्णकांत जैसे श्रद्धालुओं ने व्यासपीठ का पूजन किया। कथा के समापन पर महाआरती की गई और महाप्रसाद का वितरण किया गया।4
- धौलपुर में नौतपा की प्रचंड गर्मी और आग उगलती दोपहर के बीच बेजुबान पशु-पक्षियों की पीड़ा को समझते हुए अधिवक्ताओं, पत्रकारों और स्थानीय नागरिकों ने मिलकर सामाजिक सरोकार की मिसाल पेश की है। मई-जून की तपती गर्मी में पक्षियों के सूखते गले और पानी की तलाश में भटकते आवारा पशुओं के लिए इन लोगों ने पानी की व्यवस्था का बीड़ा उठाया है। इस पहल के तहत, शहर के विभिन्न चौराहों, सार्वजनिक स्थानों, मोहल्लों और घनी आबादी वाले क्षेत्रों में पेड़ों पर मिट्टी के परिंडे बांधे जा रहे हैं, जिनमें प्रतिदिन ताजा पानी भरा जा रहा है ताकि चिड़िया, कबूतर और अन्य पक्षी अपनी प्यास बुझा सकें। इसके साथ ही, सड़कों, मंदिरों के पास और सुनसान इलाकों में बेसहारा गाय, कुत्ते, बंदर जैसे जानवरों के लिए बड़ी पानी की टंकियां रखवाई गई हैं, जिनमें नियमित रूप से पानी भरा जाता है, जिससे सैकड़ों बेजुबान जानवरों को राहत मिल रही है। पूर्व अभिभाषक संघ अध्यक्ष प्रशांत हुंडावाल ने अपने संबोधन में कहा कि न्यायालय में इंसानों के अधिकारों की बात होती है, पर प्रकृति और उसके जीवों का भी हम पर उतना ही हक है, और नौतपा में एक बर्तन पानी रखना सबसे बड़ा पुण्य का काम है। उन्होंने अधिवक्ता समुदाय से भी इस सेवा कार्य में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की। एडवोकेट प्रमोद शर्मा ने भी कानून द्वारा सिखाई गई दया और करुणा का जिक्र करते हुए कहा कि यह संयुक्त प्रयास पूरे समाज को नई दिशा देगा और हर नागरिक को अपने स्तर पर एक परिंडा जरूर लगाना चाहिए। अधिवक्ताओं, पत्रकारों और स्थानीय लोगों का कहना है कि नौतपा के 9 दिन धरती का तापमान सबसे ज्यादा होता है, जिससे जीव-जंतुओं का जीवन संकट में पड़ जाता है। इस दौरान प्रशासन के साथ-साथ समाज की भी जिम्मेदारी है कि वो इन बेजुबानों के लिए पानी की व्यवस्था करे। आमजन से भी अपील की गई है कि वे अपने घर की छत, बालकनी, दुकान या मोहल्ले में एक मिट्टी का बर्तन पानी से भरकर रखें, क्योंकि एक छोटा सा प्रयास किसी पक्षी की जान बचा सकता है। स्थानीय युवा, अधिवक्ता और पत्रकार एवं आमजन प्रतिदिन सुबह-शाम परिंडों और टंकियों की सफाई कर उन्हें फिर से भर रहे हैं। यह सेवा अभियान गर्मी कम होने तक लगातार जारी रहेगा। रमा पंडित, सचिन पाराशर, सार्थक उपाध्याय, हिमांशु, धीरेंद्र कुशवाह, मीनेश मीना, अनिल मीणा, हेमंत सिंह, अनुराग कटारा, अजीत, रजित शर्मा, रमाकांत शर्मा, अजीत परिहार, हरवीर शर्मा, भानु शर्मा सहित कई लोग इस कार्य में सक्रिय रूप से शामिल हैं, जो इसे बेजुबानों के लिए जीवनदान और इंसानियत की सबसे बड़ी मिसाल बना रहा है।1
- राजस्थान के बाड़ी में युवाओं और छात्रों ने मारवाड़ी भाषा को राजस्थानी भाषा बनाए जाने के प्रस्ताव के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रदर्शनकारी उपखंड अधिकारी कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गए और मुख्यमंत्री के नाम उपखंड अधिकारी को एक ज्ञापन सौंपा। पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष पुष्पेंद्र गुर्जर के नेतृत्व में हुए इस प्रदर्शन में स्पष्ट किया गया कि पूर्वी राजस्थान किसी भी स्थिति में मारवाड़ी भाषा को स्वीकार नहीं करेगा। प्रदर्शनकारियों ने ब्रज भाषा को ही क्षेत्र की पहचान बनाए रखने की पुरजोर मांग की है। इसके साथ ही उन्होंने चेतावनी दी है कि इस विरोध प्रदर्शन को आगे जिला और संभाग मुख्यालयों तक ले जाया जाएगा।2
- पश्चिम बंगाल के नॉर्थ 24 परगना जिले में एक टीएमसी नेता के विभिन्न ठिकानों पर की गई कार्रवाई के दौरान ₹80 लाख नकद और राहत सामग्री बरामद की गई है। यह वही राहत सामग्री है जो बाढ़ और तूफान से तड़पते हुए गरीब लोगों तक पहुँचनी थी। इस घटना ने टीएमसी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि बंगाल की जनता ने जिस भरोसे के साथ पार्टी को वोट दिया था, उसे टीएमसी ने अपनी तिजोरियों में बंद कर दिया। इस भ्रष्टाचार के चलते गरीब जनता का दर्द भी अनदेखा किया गया, जिससे एक ओर जहाँ बंगाल खोखला होता रहा, वहीं दूसरी ओर टीएमसी के नेताओं की तिजोरियां भरती रहीं। यह कार्रवाई केवल एक सामान्य घटना नहीं, बल्कि हिसाब की शुरुआत बताई जा रही है। जोर देकर कहा गया है कि बंगाल की जनता की हर पाई का हिसाब होगा और टीएमसी को अपने हर भ्रष्टाचार का जवाब देना पड़ेगा।1
- सड़क के किनारे कूड़ा डाला हुआ है, जिसकी वजह से प्रतिदिन दुर्घटनाएँ होती हैं।1
- पूर्वी राजस्थान में मारवाड़ी भाषा को अनिवार्य रूप से लागू किए जाने के विरोध में बुधवार को बाड़ी उपखंड कार्यालय पर युवाओं एवं विद्यार्थियों ने प्रदर्शन किया और उपखंड अधिकारी को एक ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शनकारियों ने उच्च न्यायालय के आदेश का सम्मान करते हुए, पूर्वी राजस्थान की भाषाई परिस्थितियों को ध्यान में रखकर निर्णय लेने की मांग की है। छात्रसंघ अध्यक्ष पुष्पेंद्र गुर्जर ने इस दौरान कहा कि पूर्वी राजस्थान में लंबे समय से हिंदी एवं बृज भाषा का प्रचलन है, ऐसे में सम्पूर्ण राजस्थान में एक ही भाषा को लागू करना इस क्षेत्र के जिलों के साथ अन्याय होगा। उन्होंने आशंका जताई कि इससे बृज भाषा के अस्तित्व पर भी संकट खड़ा हो सकता है। गुर्जर ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि हजारों विद्यार्थी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं, और भाषा परिवर्तन का सीधा असर उनकी शिक्षा व परीक्षा परिणामों पर पड़ेगा। शेर गुर्जर ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 29(1) और 350A का हवाला देते हुए कहा कि स्थानीय भाषाई परिस्थितियों का अध्ययन किए बिना शिक्षा संबंधी भाषा नीति लागू करना विद्यार्थियों के हित में नहीं होगा, क्योंकि ये अनुच्छेद नागरिकों को उनकी भाषा के संरक्षण का अधिकार और मातृभाषा आधारित प्राथमिक शिक्षा पर ध्यान देने की बात करते हैं। समरथ गुर्जर एवं मनोज राजावत ने मांग की कि धौलपुर, भरतपुर, डीग, करौली, सवाई माधोपुर, अलवर एवं दौसा जिलों की वास्तविक भाषाई स्थिति का अध्ययन करने के लिए जिला अथवा संभाग स्तरीय विशेषज्ञ समिति गठित की जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मारवाड़ी भाषा अनिवार्य रूप से लागू की गई तो पूर्वी राजस्थान के विद्यार्थी प्रतियोगी परीक्षाओं एवं सरकारी नौकरियों में पिछड़ सकते हैं। मानवेंद्र बैंसला एवं देशराज कंसाना ने बृज क्षेत्र में भगवान श्रीकृष्ण के समय से ही बृज भाषा के प्रचलन और कवियों द्वारा इसके उपयोग का उल्लेख करते हुए क्षेत्र में हिंदी एवं बृज भाषा की परंपरा को बनाए रखने की वकालत की। ज्ञापन सौंपने के दौरान छात्रसंघ अध्यक्ष पुष्पेंद्र गुर्जर, शेरा गुर्जर, मनोज राजावत, समरथ गुर्जर, मानवेंद्र बैंसला, देशराज कंसाना, ऋषभ शर्मा, अजय कंसाना, चेतन शर्मा, बन्टू प्रजापति, अमन गुर्जर, आदित्य, विपिन, ललित, दर्शन गुर्जर, प्रदीप, हंसराम, तन्वेश, तनवी, यश, शिवा, विक्रम, रिहान, शिवानी, अदिति, आर्यन, लोकेश, संदीप, कप्तान, धीरज, हर्षल, करन, मोहित, राहुल गुर्जर, बबलू, हिमांक, प्रियांशी, भयांश जाट, सचिन, योगेश मीणा, हनी, रिजवान खान, अमित कुशवाह, निहारिका, हेमंत, कांता शर्मा, पायल सहित बड़ी संख्या में युवा एवं विद्यार्थी मौजूद रहे।1
- भीषण गर्मी के मद्देनजर विद्युत विभाग पूरी तरह से अलर्ट मोड पर आ गया है। इसी क्रम में, विभाग के XEN गोविंद सिंह की अध्यक्षता में बाड़ी में एक समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक में बाड़ी, बसेड़ी, सैंपऊ और सरमथुरा के सहायक अभियंता उपस्थित रहे, जहाँ उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने, समय पर नए कनेक्शन जारी करने और बिजली संबंधी शिकायतों का त्वरित समाधान करने के महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए। उपभोक्ताओं की विद्युत समस्याओं के समाधान के लिए बाड़ी में एक विशेष कंट्रोल रूम भी स्थापित किया गया है। विभाग ने शिकायतों के पंजीकरण हेतु दो संपर्क नंबर भी जारी किए हैं, जिनमें एक स्थानीय नंबर 05647-299055 और एक टोल-फ्री नंबर 18001806507 शामिल है।1
- धौलपुर जिले के मरेना कस्बे में भगवान परशुराम जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में एक भव्य शोभायात्रा और वाहन रैली का आयोजन बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ किया गया। यह यात्रा मरेना इंद्रावली मोड़ से शुरू हुई, जिसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालु और धर्मप्रेमी शामिल हुए, जिससे पूरे क्षेत्र में भक्तिमय माहौल बन गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि पागल बाबा 1008 उपस्थित रहे, जिन्होंने भगवान परशुराम की पूजा-अर्चना करने के बाद शोभायात्रा और रैली को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर नीरजा शर्मा, प्रिंस होडवाल, अनुराग मुदगल, अनुपम तिवारी, महेश बोहरे और पवन चंसोरिया जैसे अन्य अतिथि भी मौजूद रहे। आयोजक समिति ने सभी अतिथियों का माला, साफा और भगवान परशुराम जी की तस्वीर भेंट कर स्वागत-सम्मान किया। संयोजक रिंकू उपाध्याय ने बताया कि शोभायात्रा में आकर्षक झांकियां, डोला और वाहन रैली विशेष आकर्षण का केंद्र रही। यात्रा का मरेना, पहाड़ी मछरिया चौराहा, मछरिया और सिहोली में श्रद्धालुओं द्वारा पुष्पवर्षा कर भव्य स्वागत किया गया। शोभायात्रा का समापन हनुमान पुरा स्थित भगवान परशुराम मंदिर पर हुआ, जहाँ सभी धर्मप्रेमियों ने भगवान परशुराम जी के दर्शन किए और प्रसादी ग्रहण की। इस आयोजन में कोषाध्यक्ष रामू मुदगल, उपाध्यक्ष अमित लहचोरिया, हरेश शर्मा, राजू पहलवान, अनिकेत, कृष्णकांत शुक्ला और अमन दीक्षित सहित हजारों धर्मप्रेमी उपस्थित रहे।4