Shuru
Apke Nagar Ki App…
दिनांक 11.06.2026 को सिद्धार्थ नगर के जिलाधिकारी ने राजस्व वादों के संबंध में एक समीक्षा बैठक आयोजित की। इस महत्वपूर्ण बैठक के दौरान, जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों और कर्मियों को राजस्व से जुड़े मामलों के निस्तारण हेतु आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए।
Rashid Malik
दिनांक 11.06.2026 को सिद्धार्थ नगर के जिलाधिकारी ने राजस्व वादों के संबंध में एक समीक्षा बैठक आयोजित की। इस महत्वपूर्ण बैठक के दौरान, जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों और कर्मियों को राजस्व से जुड़े मामलों के निस्तारण हेतु आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए।
More news from उत्तर प्रदेश and nearby areas
- संतकबीरनगर के मेंहदावल में खलीलाबाद कोतवाली पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए एक गुमशुदा बालक को मात्र 12 घंटे के भीतर सकुशल ढूंढ निकाला और उसके परिजनों को सौंप दिया। यह घटना तब सामने आई जब शैलेंद्र कुमार यादव, जो हेडिल कॉलोनी, थाना कोतवाली खलीलाबाद के निवासी हैं, ने अपने लगभग 11 वर्षीय पुत्र रघुराज यादव के लापता होने की सूचना पुलिस को दी। रघुराज यादव 11 जून, 2026, बृहस्पतिवार को दोपहर करीब 12:00 बजे घर से बिना बताए कहीं चला गया था। सूचना मिलते ही थाना कोतवाली खलीलाबाद पुलिस ने तुरंत खोजबीन शुरू कर दी। चौकी प्रभारी तितौवा, हरिकेश बहादुर सिंह, ने अपनी पुलिस टीम के साथ सीसीटीवी फुटेज की जाँच की और प्राप्त मोबाइल नंबर की लोकेशन के आधार पर लगातार प्रयास किए। पुलिस टीम ने त्वरित और प्रभावी कार्रवाई करते हुए सूचनाकर्ता के साथ जनपद गोरखपुर के रामगढ़ताल क्षेत्र में पहुँचकर लापता रघुराज यादव को घटना के लगभग 12 घंटे के अंदर सकुशल बरामद कर लिया। बरामदगी के बाद बालक को उसके पिता को सौंप दिया गया। जाँच के दौरान यह पाया गया कि उसके साथ किसी भी प्रकार की कोई अप्रिय या आपराधिक घटना नहीं हुई थी। परिजनों ने पुलिस की इस तत्परता, संवेदनशीलता और प्रभावी कार्यवाही की सराहना करते हुए आभार व्यक्त किया।1
- सिद्धार्थनगर जिले के रहरा स्थित गंगाधरपुर गांव में काली माता का एक मंदिर है। इस मंदिर में कोई बाउंड्री वॉल नहीं है।1
- नगर पंचायत बेलहर के वार्ड नंबर-1 में लंबे समय से नाला निर्माण न होने से नाराज वार्डवासियों ने गुरुवार को प्रशासन के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया और नारेबाजी की। लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि बरसात शुरू होने से पहले नाले का निर्माण कार्य शुरू नहीं कराया गया, तो नगर पंचायत कार्यालय पर एक बड़ा आंदोलन किया जाएगा। प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे राजेश यादव ने बताया कि वार्ड में वर्षों से जल निकासी की गंभीर समस्या बनी हुई है। नाले के अभाव में बरसात के दिनों में गलियों और सड़कों पर पानी भर जाता है, जिससे स्थानीय लोगों को आवागमन में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि इस समस्या को लेकर नगर पंचायत प्रशासन और अधिशासी अधिकारी (ईओ) को कई बार शिकायतें दी गईं, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकल पाया है। वार्डवासियों ने यह भी बताया कि नाले की कमी के कारण घरों से निकलने वाले गंदे पानी की निकासी की कोई व्यवस्था नहीं है, जिससे महिलाओं और परिवारों को नहाने-धोने में भी परेशानी होती है। उन्हें गड्ढे खोदकर पानी जमा करना पड़ता है और फिर उसे बाहर फेंकना पड़ता है, जो उनकी दिन-रात की मजबूरी बन गई है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगर पंचायत बनने के बाद मूलभूत समस्याओं के समाधान की उम्मीद थी, लेकिन वे आज भी "नारकीय जीवन" जीने को विवश हैं और जनप्रतिनिधियों व जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा समस्या के समाधान के लिए गंभीर प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। राजेश यादव ने यह भी जानकारी दी कि इस मामले को लेकर संपूर्ण समाधान दिवस (तहसील दिवस) में भी प्रार्थना पत्र दिया गया था। शिकायत के बाद लेखपाल और कानूनगो ने मौके पर पहुंचकर जांच भी की, लेकिन उस जांच के बाद भी नाला निर्माण का कार्य शुरू नहीं किया गया, जिससे क्षेत्र के लोगों में आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। प्रदर्शन में राहुल यादव, संजीव देवी, अनीता देवी, शारदा देवी, उर्मिला देवी, जगदीश गौड़ और इंद्रजीत गौड़ सहित अन्य कई लोग शामिल थे, जिन्होंने यह भी कहा कि नगर पंचायत प्रशासन इस समस्या के समाधान को लेकर बिल्कुल भी गंभीर नहीं है। उनका मानना है कि बरसात का मौसम नजदीक है और यदि समय रहते नाला निर्माण नहीं कराया गया तो जलभराव की समस्या और अधिक विकराल रूप ले लेगी। नगरवासियों ने प्रशासन से तत्काल नाला निर्माण कार्य शुरू कराने की मांग की है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो एक व्यापक जन आंदोलन किया जाएगा और इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। इस संबंध में पूछे जाने पर ईओ अमित कुमार सिंह ने बताया कि मामला उनके संज्ञान में है और इसे जल्द से जल्द निस्तारित किया जाएगा।2
- उत्तर प्रदेश के महाराजगंज जिले के फरेन्दा क्षेत्र में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर सरकारी भूमि पर बुलडोजर की कार्रवाई की गई है। यह एक्शन पुलिस की उपस्थिति में हुआ, जिसमें सरकारी संपत्ति पर हुए अतिक्रमण को हटाया गया।1
- गोरखपुर जिले के कैंपियरगंज ब्लॉक अंतर्गत ग्राम सभा मछलीगांव बरगदही स्थित साधन सहकारी समिति लिमिटेड पर खाद वितरण में भारी अनियमितता के आरोपों को लेकर किसानों में जबरदस्त नाराजगी है। किसानों का कहना है कि उन्हें खाद पाने के लिए कई दिनों से समिति के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं, लेकिन वितरण व्यवस्था में कोई पारदर्शिता नहीं दिख रही है। किसानों के मुताबिक, खाद वितरण की सूचना मिलने पर बड़ी संख्या में किसान आधी रात के बाद ही समिति परिसर में लाइन में लग गए थे। सुबह लगभग 10 बजे समिति के कर्मचारियों और सचिव के आने के बाद वितरण प्रक्रिया को लेकर विवाद खड़ा हो गया। किसानों ने आरोप लगाया कि कुछ लोग खाद वितरण कार्ड लेकर पहुंचे और उनके कार्ड पहले से लाइन में लगे किसानों के कार्डों के बीच शामिल कर दिए गए। इस प्रक्रिया के कारण सुबह से इंतजार कर रहे किसानों का क्रम पीछे चला गया, जबकि बाद में आए लोगों को प्राथमिकता मिल गई, जिससे उनमें आक्रोश फैल गया। किसानों ने खाद वितरण में पक्षपात और मनमानी का आरोप लगाया है, साथ ही यह भी कहा कि यदि प्रक्रिया निष्पक्ष नहीं हुई तो जरूरतमंद किसानों को समय पर खाद नहीं मिल पाएगी। किसानों ने समिति के जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यशैली को अव्यवस्था का कारण बताया है, जिसके चलते उन्हें अनावश्यक परेशानी झेलनी पड़ रही है। वहीं, समिति के सचिव ने आरोपों पर सीधा जवाब देने से बचते हुए कहा कि समिति पर पर्याप्त खाद उपलब्ध है और इसे आवश्यकतानुसार वितरित किया जा रहा है। हालांकि, उन्होंने कार्डों के क्रम में बदलाव या पक्षपातपूर्ण वितरण के आरोपों पर कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया। इस मामले पर जिला कृषि अधिकारी राजमंगल चौधरी ने कहा कि समितियों पर खाद उपलब्ध होने पर उसका वितरण नियमानुसार किया जाता है, जो सदस्य किसानों को उनकी खतौनी और फार्मर रजिस्ट्री के आधार पर दिया जाता है। उन्होंने यह भी बताया कि यदि कोई शिकायत मिलती है, तो उसकी जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। किसान प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि मामले की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई हो और खाद वितरण को पूरी तरह पारदर्शी व व्यवस्थित बनाया जाए, ताकि पात्र किसानों को समय पर खाद मिल सके और उन्हें घंटों लाइन में खड़े रहने के बाद निराश न लौटना पड़े।1
- 🤔1
- ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन (एआईपीईएफ) की संघीय कार्यकारिणी की बैठक 12 जून को बेंगलुरु में संपन्न हुई, जिसमें उत्तर प्रदेश के बिजली कर्मियों एवं अभियंताओं के आंदोलन तथा प्रस्तावित विद्युत (संशोधन) विधेयक-2025 के विरोध में सर्वसम्मति से महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए गए। फेडरेशन ने उत्तर प्रदेश में चल रहे निजीकरण विरोधी आंदोलन को पूर्ण समर्थन देने की घोषणा की है। संघर्ष समिति के पदाधिकारी रंजन कुमार ने एआईपीईएफ द्वारा दिए गए समर्थन का स्वागत करते हुए कहा कि इससे प्रदेश के बिजली कर्मियों और अभियंताओं का मनोबल और मजबूत हुआ है। एआईपीईएफ ने अपने प्रस्ताव में इस बात पर जोर दिया कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के विरोध में पिछले 562 दिनों से बिजली कर्मी एवं अभियंता शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन कर रहे हैं। बिजली पंचायतों, महापंचायतों, रैलियों और जनसभाओं के माध्यम से यह आंदोलन अब एक व्यापक जन आंदोलन का स्वरूप ले चुका है। फेडरेशन ने आंदोलन के दौरान कर्मचारियों के स्थानांतरण, संविदा कर्मियों की सेवाएं समाप्त करने तथा अनुशासनात्मक कार्रवाई के नाम पर किए गए कदमों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए इन्हें लोकतांत्रिक अधिकारों के दमन का प्रयास बताया। संघर्ष समिति के पदाधिकारी राघवेंद्र सिंह ने मांग की है कि निजीकरण का निर्णय तत्काल वापस लिया जाए तथा आंदोलन के दौरान बिजली कर्मियों और अभियंताओं के विरुद्ध की गई सभी दमनात्मक कार्रवाइयों को बिना शर्त समाप्त किया जाए। बैठक में पारित दूसरे प्रस्ताव में, एआईपीईएफ ने प्रस्तावित विद्युत (संशोधन) विधेयक-2025 का कड़ा विरोध करते हुए इसे बिजली क्षेत्र के निजीकरण को बढ़ावा देने वाला बताया। फेडरेशन का कहना है कि विधेयक के प्रावधान सार्वजनिक वितरण कंपनियों को कमजोर कर निजी कंपनियों को लाभ पहुंचाएंगे, जिससे किसानों, घरेलू उपभोक्ताओं, छोटे व्यापारियों और कमजोर वर्गों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। एआईपीईएफ ने चेतावनी दी कि यदि आगामी मानसून सत्र में यह विधेयक संसद में प्रस्तुत किया गया, तो राष्ट्रीय समन्वय समिति (एनसीसीओईईई) एवं अन्य संगठनों के साथ मिलकर देशव्यापी विरोध कार्यक्रम चलाया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर राष्ट्रव्यापी "लाइटनिंग स्ट्राइक" सहित अन्य आंदोलनात्मक कदम भी उठाए जाएंगे। संघर्ष समिति की पदाधिकारी दीक्षा श्रीवास्तव ने जोर दिया कि उत्तर प्रदेश में निजीकरण के खिलाफ चल रहा आंदोलन अब राष्ट्रीय स्वरूप ग्रहण कर चुका है और यह सार्वजनिक बिजली क्षेत्र, उपभोक्ताओं, किसानों तथा बिजली कर्मियों के हितों की रक्षा का एक महत्वपूर्ण अभियान बन गया है। इसी क्रम में, शुक्रवार को संतकबीरनगर में भी बिजली कर्मियों ने अपना विरोध प्रदर्शन किया, जिसमें सहायक लेखाकार प्रिंस गुप्ता, संतोष गुप्ता, कार्यकारी सहायक अमरनाथ यादव, दिलीप सिंह, राघवेंद्र सिंह, दीक्षा श्रीवास्तव, सूरज प्रजापति, अशोक कुमार, सत्येंद्र सिंह, रंजन कुमार, वीरेंद्र मौर्य, प्रदुम्न कुमार और संजय यादव समेत अन्य विद्युत कर्मी मौजूद रहे।1
- संतकबीरनगर के नाथनगर स्थित महुली थाने की पुलिस टीम ने, थानाध्यक्ष के नेतृत्व में, थाना क्षेत्र के विभिन्न स्थानों पर दबिश देकर न्यायालय द्वारा जारी गैर जमानती वारंट से संबंधित दो अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई इलाहाबाद उच्च न्यायालय में लंबित क्रिमिनल अपील नंबर 947/1985, हरनरायण अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य प्रकरण में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, संतकबीरनगर के आदेश के अनुपालन में की गई। गिरफ्तार किए गए अभियुक्तों में दादर हरदो निवासी अखिलानंद (पुत्र हरनरायण) और गौराखुर्द निवासी सीताराम (पुत्र रामविलास) शामिल हैं, जिन्हें नियमानुसार न्यायालय मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, संतकबीरनगर भेजा गया। इस गिरफ्तारी अभियान में उपनिरीक्षक अजय कुमार भारती, हेड कांस्टेबल आनंद दुबे और कांस्टेबल सुनील सिंह की टीम शामिल थी। महुली पुलिस ने स्पष्ट किया है कि अपराधों और अपराधियों के विरुद्ध उनकी प्रभावी कार्यवाही आगे भी लगातार जारी रहेगी।3