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जंगल में मशीन, मजदूर बेरोजगार! रानीपुर टाइगर रिज़र्व में वृक्षारोपण कार्य पर घमासान हरियाली पर जेसीबी’! रानीपुर टाइगर रिज़र्व में वृक्षारोपण की आड़ में बड़ा खेल? जंगल में मशीन, मजदूर बेरोजगार! रानीपुर टाइगर रिज़र्व में वृक्षारोपण कार्य पर घमासान अजय पाण्डेय | राष्ट्रीय मुहिम विशेष रिपोर्ट | चित्रकूट चित्रकूट जनपद की मानिकपुर तहसील अंतर्गत रानीपुर टाइगर रिज़र्व के मानिकपुर वन रेंज में पर्यावरण संरक्षण के नाम पर किए जा रहे कार्यों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि केकरामार प्लांटेशन (भाग-1) और जड़ेरा प्लांटेशन क्षेत्र में वृक्षारोपण के लिए गड्ढा खुदाई का काम मजदूरों से कराने के बजाय जेसीबी मशीनों से कराया जा रहा है, जिससे छोटे-छोटे पौधे और प्राकृतिक वनस्पतियां उखड़ रही हैं। स्थानीय लोगों और पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि जिस कार्य का उद्देश्य जंगल को हरा-भरा बनाना है, वही कार्य अब जंगल की हरियाली को नुकसान पहुंचाता दिखाई दे रहा है। आरोप है कि मशीनों से तेजी में खुदाई कर औपचारिकता पूरी की जा रही है, जबकि इससे वन क्षेत्र की प्राकृतिक संरचना को भारी क्षति पहुंच रही है। *हर साल ‘कागजी हरियाली’, जमीन पर सवाल* जानकारों का कहना है कि वृक्षारोपण अभियान हर साल बड़े-बड़े दावों और आंकड़ों के साथ चलाया जाता है, लेकिन कई बार जमीनी हकीकत इससे अलग दिखाई देती है। सूत्रों का आरोप है कि मशीनों से खुदाई कराकर काम दिखाने की जल्दबाजी में वन क्षेत्र की संवेदनशीलता और संरक्षण मानकों की अनदेखी की जा रही है, जो टाइगर रिज़र्व के मूल उद्देश्य पर ही सवाल खड़े करती है। *अनियमितताओं की चर्चा, जांच की मांग* सूत्रों के अनुसार इस कार्य में जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। आरोप यह भी है कि मशीनों के उपयोग से खर्च और कार्यप्रणाली में अनियमितता की आशंका बन रही है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच होना जरूरी है। *पर्यावरण के साथ रोजगार पर भी चोट* विशेषज्ञों का मानना है कि टाइगर रिज़र्व जैसे संवेदनशील क्षेत्र में भारी मशीनों का इस्तेमाल मिट्टी की संरचना, जैव विविधता और पौध संरक्षण के लिए हानिकारक हो सकता है। इसके साथ ही, यदि यह कार्य मजदूरों से कराया जाता तो स्थानीय ग्रामीणों को रोजगार भी मिलता, लेकिन मशीनों के इस्तेमाल से यह अवसर भी खत्म होता दिखाई दे रहा है। *अब उठ रहे बड़े सवाल* क्या टाइगर रिज़र्व क्षेत्र में जेसीबी से खुदाई की अनुमति है? यदि अनुमति है तो किस स्तर से दी गई? क्या पर्यावरणीय मानकों का पालन किया गया? क्या मजदूरों के बजाय मशीनों के उपयोग के पीछे कोई और कारण है? *कार्रवाई की मांग* स्थानीय लोगों और पर्यावरण प्रेमियों ने वन विभाग के उच्चाधिकारियों से मांग की है कि— पूरे मामले की स्थल निरीक्षण आधारित जांच कराई जाए। मशीनों के उपयोग की अनुमति और प्रक्रिया सार्वजनिक की जाए। यदि अनियमितता पाई जाए तो जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए। भविष्य में वृक्षारोपण कार्यों में मानव श्रम आधारित और पर्यावरण-अनुकूल तरीकों को अनिवार्य किया जाए। *जब ‘हरियाली’ बचाने के नाम पर ही हरियाली उजड़ने लगे, तो सवाल उठना लाजमी है।* उक्त मामले में संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों का पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन समाचार लिखे जाने तक उनका पक्ष प्राप्त नहीं हो सका है। अगले अंक में इस मामले से जुड़े और भी पुख्ता तथ्य सामने लाए जाएंगे।

10 hrs ago
user_अजय पाण्डेय पत्रकार
अजय पाण्डेय पत्रकार
Manikpur, Chitrakoot•
10 hrs ago

जंगल में मशीन, मजदूर बेरोजगार! रानीपुर टाइगर रिज़र्व में वृक्षारोपण कार्य पर घमासान हरियाली पर जेसीबी’! रानीपुर टाइगर रिज़र्व में वृक्षारोपण की आड़ में बड़ा खेल? जंगल में मशीन, मजदूर बेरोजगार! रानीपुर टाइगर रिज़र्व में वृक्षारोपण कार्य पर घमासान अजय पाण्डेय | राष्ट्रीय मुहिम विशेष रिपोर्ट | चित्रकूट चित्रकूट जनपद की मानिकपुर तहसील अंतर्गत रानीपुर टाइगर रिज़र्व के मानिकपुर वन रेंज में पर्यावरण संरक्षण के नाम पर किए जा रहे कार्यों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि केकरामार प्लांटेशन (भाग-1) और जड़ेरा प्लांटेशन क्षेत्र में वृक्षारोपण के लिए गड्ढा खुदाई का काम मजदूरों से कराने के बजाय जेसीबी मशीनों से कराया जा रहा है, जिससे छोटे-छोटे पौधे और प्राकृतिक वनस्पतियां उखड़ रही हैं। स्थानीय लोगों और पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि जिस कार्य का उद्देश्य जंगल को हरा-भरा बनाना है, वही कार्य अब जंगल की हरियाली को नुकसान पहुंचाता दिखाई दे रहा है। आरोप है कि मशीनों से तेजी में खुदाई कर औपचारिकता पूरी की जा रही है, जबकि इससे वन क्षेत्र की प्राकृतिक संरचना को भारी क्षति पहुंच रही है। *हर साल ‘कागजी हरियाली’, जमीन पर सवाल* जानकारों का कहना है कि वृक्षारोपण अभियान हर साल बड़े-बड़े दावों और आंकड़ों के साथ चलाया जाता है, लेकिन कई बार जमीनी हकीकत इससे अलग दिखाई देती है। सूत्रों का आरोप है कि मशीनों से खुदाई कराकर काम दिखाने की जल्दबाजी में वन क्षेत्र की संवेदनशीलता और संरक्षण मानकों की अनदेखी की जा रही है, जो टाइगर रिज़र्व के मूल उद्देश्य पर ही सवाल खड़े करती है। *अनियमितताओं की चर्चा, जांच की मांग* सूत्रों के अनुसार इस कार्य में जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। आरोप यह भी है कि मशीनों के उपयोग से खर्च और कार्यप्रणाली में अनियमितता की आशंका बन रही है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच होना जरूरी है। *पर्यावरण के साथ रोजगार पर भी चोट* विशेषज्ञों का मानना है कि टाइगर रिज़र्व जैसे संवेदनशील क्षेत्र में भारी मशीनों का इस्तेमाल मिट्टी की संरचना, जैव विविधता और पौध संरक्षण के लिए हानिकारक हो सकता है। इसके साथ ही, यदि यह कार्य मजदूरों से कराया जाता तो स्थानीय ग्रामीणों को रोजगार भी मिलता, लेकिन मशीनों के इस्तेमाल से यह अवसर भी खत्म होता दिखाई दे रहा है। *अब उठ रहे बड़े सवाल* क्या टाइगर रिज़र्व क्षेत्र में जेसीबी से खुदाई की अनुमति है? यदि अनुमति है तो किस स्तर से दी गई? क्या पर्यावरणीय मानकों का पालन किया गया? क्या मजदूरों के बजाय मशीनों के उपयोग के पीछे कोई और कारण है? *कार्रवाई की मांग* स्थानीय लोगों और पर्यावरण प्रेमियों ने वन विभाग के उच्चाधिकारियों से मांग की है कि— पूरे मामले की स्थल निरीक्षण आधारित जांच कराई जाए। मशीनों के उपयोग की अनुमति और प्रक्रिया सार्वजनिक की जाए। यदि अनियमितता पाई जाए तो जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए। भविष्य में वृक्षारोपण कार्यों में मानव श्रम आधारित और पर्यावरण-अनुकूल तरीकों को अनिवार्य किया जाए। *जब ‘हरियाली’ बचाने के नाम पर ही हरियाली उजड़ने लगे, तो सवाल उठना लाजमी है।* उक्त मामले में संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों का पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन समाचार लिखे जाने तक उनका पक्ष प्राप्त नहीं हो सका है। अगले अंक में इस मामले से जुड़े और भी पुख्ता तथ्य सामने लाए जाएंगे।

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    हरियाली पर जेसीबी’! रानीपुर टाइगर रिज़र्व में वृक्षारोपण की आड़ में बड़ा खेल?
जंगल में मशीन, मजदूर बेरोजगार! रानीपुर टाइगर रिज़र्व में वृक्षारोपण कार्य पर घमासान
अजय पाण्डेय | राष्ट्रीय मुहिम विशेष रिपोर्ट | चित्रकूट
चित्रकूट जनपद की मानिकपुर तहसील अंतर्गत रानीपुर टाइगर रिज़र्व के मानिकपुर वन रेंज में पर्यावरण संरक्षण के नाम पर किए जा रहे कार्यों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि केकरामार प्लांटेशन (भाग-1) और जड़ेरा प्लांटेशन क्षेत्र में वृक्षारोपण के लिए गड्ढा खुदाई का काम मजदूरों से कराने के बजाय जेसीबी मशीनों से कराया जा रहा है, जिससे छोटे-छोटे पौधे और प्राकृतिक वनस्पतियां उखड़ रही हैं।
स्थानीय लोगों और पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि जिस कार्य का उद्देश्य जंगल को हरा-भरा बनाना है, वही कार्य अब जंगल की हरियाली को नुकसान पहुंचाता दिखाई दे रहा है। आरोप है कि मशीनों से तेजी में खुदाई कर औपचारिकता पूरी की जा रही है, जबकि इससे वन क्षेत्र की प्राकृतिक संरचना को भारी क्षति पहुंच रही है।
*हर साल ‘कागजी हरियाली’, जमीन पर सवाल*
जानकारों का कहना है कि वृक्षारोपण अभियान हर साल बड़े-बड़े दावों और आंकड़ों के साथ चलाया जाता है, लेकिन कई बार जमीनी हकीकत इससे अलग दिखाई देती है।
सूत्रों का आरोप है कि मशीनों से खुदाई कराकर काम दिखाने की जल्दबाजी में वन क्षेत्र की संवेदनशीलता और संरक्षण मानकों की अनदेखी की जा रही है, जो टाइगर रिज़र्व के मूल उद्देश्य पर ही सवाल खड़े करती है।
*अनियमितताओं की चर्चा, जांच की मांग*
सूत्रों के अनुसार इस कार्य में जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। आरोप यह भी है कि मशीनों के उपयोग से खर्च और कार्यप्रणाली में अनियमितता की आशंका बन रही है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच होना जरूरी है।
*पर्यावरण के साथ रोजगार पर भी चोट*
विशेषज्ञों का मानना है कि टाइगर रिज़र्व जैसे संवेदनशील क्षेत्र में भारी मशीनों का इस्तेमाल मिट्टी की संरचना, जैव विविधता और पौध संरक्षण के लिए हानिकारक हो सकता है।
इसके साथ ही, यदि यह कार्य मजदूरों से कराया जाता तो स्थानीय ग्रामीणों को रोजगार भी मिलता, लेकिन मशीनों के इस्तेमाल से यह अवसर भी खत्म होता दिखाई दे रहा है।
*अब उठ रहे बड़े सवाल*
क्या टाइगर रिज़र्व क्षेत्र में जेसीबी से खुदाई की अनुमति है?
यदि अनुमति है तो किस स्तर से दी गई?
क्या पर्यावरणीय मानकों का पालन किया गया?
क्या मजदूरों के बजाय मशीनों के उपयोग के पीछे कोई और कारण है?
*कार्रवाई की मांग*
स्थानीय लोगों और पर्यावरण प्रेमियों ने वन विभाग के उच्चाधिकारियों से मांग की है कि—
पूरे मामले की स्थल निरीक्षण आधारित जांच कराई जाए।
मशीनों के उपयोग की अनुमति और प्रक्रिया सार्वजनिक की जाए।
यदि अनियमितता पाई जाए तो जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।
भविष्य में वृक्षारोपण कार्यों में मानव श्रम आधारित और पर्यावरण-अनुकूल तरीकों को अनिवार्य किया जाए।
*जब ‘हरियाली’ बचाने के नाम पर ही हरियाली उजड़ने लगे, तो सवाल उठना लाजमी है।*
उक्त मामले में संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों का पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन समाचार लिखे जाने तक उनका पक्ष प्राप्त नहीं हो सका है।
अगले अंक में इस मामले से जुड़े और भी पुख्ता तथ्य सामने लाए जाएंगे।
    user_अजय पाण्डेय पत्रकार
    अजय पाण्डेय पत्रकार
    Manikpur, Chitrakoot•
    10 hrs ago
  • उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा जनपद चित्रकूट के विकासखण्ड मानिकपुर की ग्राम पंचायत अगरहुंडा (जरैया-बोड़ी, पोखरी, कौबरा गांगो) में मुख्यमंत्री मॉडल कम्पोजिट विद्यालय (प्री-प्राइमरी से कक्षा-12 तक) की स्थापना हेतु ₹2440.63 लाख की धनराशि स्वीकृत की गई है। इस आधुनिक विद्यालय में लगभग 1500 छात्र-छात्राओं को गुणवत्तापूर्ण एवं आधुनिक शैक्षिक वातावरण उपलब्ध कराया जाएगा। विद्यालय परिसर में लगभग 30 कक्षाओं के साथ खेल मैदान एवं कौशल विकास से जुड़े संसाधनों का भी विकास किया जाएगा। नई शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप प्री-प्राइमरी से कक्षा-12 तक शिक्षण की व्यवस्था के साथ कक्षा-11 एवं 12 के लिए विज्ञान, कला एवं वाणिज्य विषयों की पढ़ाई सुनिश्चित की जाएगी। विद्यालय में स्मार्ट क्लास, डिजिटल एजुकेशन प्लेटफॉर्म, आधुनिक विज्ञान प्रयोगशाला, कंप्यूटर लैब एवं डिजिटल लाइब्रेरी जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी, जिससे विद्यार्थियों को आधुनिक एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का लाभ मिल सकेगा। #dmchitrakooot #Chitrakoot
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    उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा जनपद चित्रकूट के विकासखण्ड मानिकपुर की ग्राम पंचायत अगरहुंडा (जरैया-बोड़ी, पोखरी, कौबरा गांगो) में मुख्यमंत्री मॉडल कम्पोजिट विद्यालय (प्री-प्राइमरी से कक्षा-12 तक) की स्थापना हेतु ₹2440.63 लाख की धनराशि स्वीकृत की गई है। 
इस आधुनिक विद्यालय में लगभग 1500 छात्र-छात्राओं को गुणवत्तापूर्ण एवं आधुनिक शैक्षिक वातावरण उपलब्ध कराया जाएगा। विद्यालय परिसर में लगभग 30 कक्षाओं के साथ खेल मैदान एवं कौशल विकास से जुड़े संसाधनों का भी विकास किया जाएगा।
नई शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप प्री-प्राइमरी से कक्षा-12 तक शिक्षण की व्यवस्था के साथ कक्षा-11 एवं 12 के लिए विज्ञान, कला एवं वाणिज्य विषयों की पढ़ाई सुनिश्चित की जाएगी।
विद्यालय में स्मार्ट क्लास, डिजिटल एजुकेशन प्लेटफॉर्म, आधुनिक विज्ञान प्रयोगशाला, कंप्यूटर लैब एवं डिजिटल लाइब्रेरी जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी, जिससे विद्यार्थियों को आधुनिक एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का लाभ मिल सकेगा।
#dmchitrakooot #Chitrakoot
    user_स्वतंत्र भारत संदेश
    स्वतंत्र भारत संदेश
    Newspaper advertising department मानिकपुर, चित्रकूट, उत्तर प्रदेश•
    17 hrs ago
  • Post by Abhay TV News
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    Post by Abhay TV News
    user_Abhay TV News
    Abhay TV News
    Reporter Karwi, Chitrakoot•
    8 hrs ago
  • Post by जितेंद्र राय
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    Post by जितेंद्र राय
    user_जितेंद्र राय
    जितेंद्र राय
    रघुराजनगर नगरीय, सतना, मध्य प्रदेश•
    5 hrs ago
  • मैहर । गर्मी शुरू होते ही आइसक्रीम कारोबार चमक उठा है, लेकिन मुनाफे की दौड़ में कुछ संचालक कानून को ठेंगा दिखाते नजर आ रहे हैं। शहर की सड़कों पर मोडिफाइड मोटरसाइकिल रिक्शा तेज रफ्तार से दौड़ रहे हैं, जो किसी भी वक्त हादसे की वजह बन सकते हैं। कटनी रोड पर पोड़ी गांव के पास एक ऐसे ही आइसक्रीम रिक्शा को रोका गया तो चालक ने दावा किया कि गाड़ी मैहर में पदस्थ पुलिसकर्मी संतोष पटेल की है। इस दावे के बाद सवाल उठ रहे हैं कि क्या वर्दी की आड़ में परिवहन नियमों की अनदेखी हो रही है? अब नजरें पुलिस अधीक्षक और आरटीओ की कार्रवाई पर टिकी हैं।
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    मैहर । गर्मी शुरू होते ही आइसक्रीम कारोबार चमक उठा है, लेकिन मुनाफे की दौड़ में कुछ संचालक कानून को ठेंगा दिखाते नजर आ रहे हैं। शहर की सड़कों पर मोडिफाइड मोटरसाइकिल रिक्शा तेज रफ्तार से दौड़ रहे हैं, जो किसी भी वक्त हादसे की वजह बन सकते हैं। कटनी रोड पर पोड़ी गांव के पास एक ऐसे ही आइसक्रीम रिक्शा को रोका गया तो चालक ने दावा किया कि गाड़ी मैहर में पदस्थ पुलिसकर्मी संतोष पटेल की है। इस दावे के बाद सवाल उठ रहे हैं कि क्या वर्दी की आड़ में परिवहन नियमों की अनदेखी हो रही है? अब नजरें पुलिस अधीक्षक और आरटीओ की कार्रवाई पर टिकी हैं।
    user_प्रखर प्रवक्ता न्यूज
    प्रखर प्रवक्ता न्यूज
    Newspaper publisher रघुराजनगर नगरीय, सतना, मध्य प्रदेश•
    20 hrs ago
  • *खड़ी फसल में दबंगों ने शुरू किया कब्जा, बंटवारे का मुकदमा एसडीएम कोर्ट में विचाराधीन* *कौशांबी संदेश* कोखराज कोखराज थाना क्षेत्र के टिकरा गांव में जमीन को लेकर विवाद का मामला सामने आया है। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि उनकी खड़ी गेहूं की फसल के बीच दबंगों द्वारा जबरन कब्जा कर मकान निर्माण कराया जा रहा है, जबकि जमीन के बंटवारे का मामला उपजिलाधिकारी (एसडीएम) सिराथू की अदालत में विचाराधीन है।मिली जानकारी के अनुसार टिकरा गांव निवासी मानिक चन्द्र पुत्र स्वर्गीय सूरज पाल की जमीन पीडब्ल्यूडी रोड के किनारे स्थित है। उक्त भूमि का गाटा संख्या 76 है, जिसका कुल रकबा 1.623 हेक्टेयर बताया जा रहा है। पीड़ित का कहना है कि जमीन के उनके हिस्से में इस समय गेहूं की फसल खड़ी है, लेकिन विपक्षी इंद्रपाल अपने करीब दो दर्जन मजदूरों के साथ वहां जबरन मकान निर्माण करवा रहा है। पीड़ित मानिक चन्द्र ने बताया कि इस मामले में उन्होंने पहले ही लिखित शिकायत संबंधित अधिकारियों को दी थी, लेकिन आरोप है कि लेखपाल और थाना पुलिस की मिलीभगत से निर्माण कार्य लगातार जारी है। उन्होंने बताया कि जमीन के बंटवारे को लेकर उपजिलाधिकारी सिराथू की अदालत में धारा 116 के तहत वाद दायर किया गया है, जिसकी अगली सुनवाई 20 मार्च 2026 को निर्धारित है।पीड़ित पक्ष का आरोप है कि मामले की सूचना लेखपाल और कोखराज थाना पुलिस को देने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई और खड़ी फसल के बीच ही निर्माण कार्य कराया जा रहा है। बताया गया कि इंद्रपाल और उसका पुत्र रमेश अपने समर्थकों के साथ मौके पर निर्माण कार्य करा रहे हैं। इस मामले को लेकर पीड़ित परिवार ने उपजिलाधिकारी सिराथू से शिकायत कर खड़ी गेहूं की फसल को बचाने और जबरन हो रहे निर्माण कार्य को रुकवाने की गुहार लगाई है। परिवार का कहना है कि जब तक जमीन का हिस्सा स्पष्ट रूप से चिन्हित नहीं हो जाता, तब तक निर्माण कार्य पर रोक लगाई जाए। बताया जा रहा है कि उपजिलाधिकारी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच कर कार्रवाई का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा है कि यदि खड़ी फसल के बीच जबरन निर्माण कराया जा रहा है तो जांच कर मुकदमा दर्ज करते हुए सख्त कार्रवाई की जाएगी। हालांकि खबर लिखे जाने तक मौके पर कोई भी संबंधित कर्मचारी जांच के लिए नहीं पहुंचा था।
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    *खड़ी फसल में दबंगों ने शुरू किया कब्जा, बंटवारे का मुकदमा एसडीएम कोर्ट में विचाराधीन*
*कौशांबी संदेश*
कोखराज कोखराज थाना क्षेत्र के टिकरा गांव में जमीन को लेकर विवाद का मामला सामने आया है। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि उनकी खड़ी गेहूं की फसल के बीच दबंगों द्वारा जबरन कब्जा कर मकान निर्माण कराया जा रहा है, जबकि जमीन के बंटवारे का मामला उपजिलाधिकारी (एसडीएम) सिराथू की अदालत में विचाराधीन है।मिली जानकारी के अनुसार टिकरा गांव निवासी मानिक चन्द्र पुत्र स्वर्गीय सूरज पाल की जमीन पीडब्ल्यूडी रोड के किनारे स्थित है। उक्त भूमि का गाटा संख्या 76 है, जिसका कुल रकबा 1.623 हेक्टेयर बताया जा रहा है। पीड़ित का कहना है कि जमीन के उनके हिस्से में इस समय गेहूं की फसल खड़ी है, लेकिन विपक्षी इंद्रपाल अपने करीब दो दर्जन मजदूरों के साथ वहां जबरन मकान निर्माण करवा रहा है।
पीड़ित मानिक चन्द्र ने बताया कि इस मामले में उन्होंने पहले ही लिखित शिकायत संबंधित अधिकारियों को दी थी, लेकिन आरोप है कि लेखपाल और थाना पुलिस की मिलीभगत से निर्माण कार्य लगातार जारी है। उन्होंने बताया कि जमीन के बंटवारे को लेकर उपजिलाधिकारी सिराथू की अदालत में धारा 116 के तहत वाद दायर किया गया है, जिसकी अगली सुनवाई 20 मार्च 2026 को निर्धारित है।पीड़ित पक्ष का आरोप है कि मामले की सूचना लेखपाल और कोखराज थाना पुलिस को देने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई और खड़ी फसल के बीच ही निर्माण कार्य कराया जा रहा है। बताया गया कि इंद्रपाल और उसका पुत्र रमेश अपने समर्थकों के साथ मौके पर निर्माण कार्य करा रहे हैं।
इस मामले को लेकर पीड़ित परिवार ने उपजिलाधिकारी सिराथू से शिकायत कर खड़ी गेहूं की फसल को बचाने और जबरन हो रहे निर्माण कार्य को रुकवाने की गुहार लगाई है। परिवार का कहना है कि जब तक जमीन का हिस्सा स्पष्ट रूप से चिन्हित नहीं हो जाता, तब तक निर्माण कार्य पर रोक लगाई जाए।
बताया जा रहा है कि उपजिलाधिकारी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच कर कार्रवाई का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा है कि यदि खड़ी फसल के बीच जबरन निर्माण कराया जा रहा है तो जांच कर मुकदमा दर्ज करते हुए सख्त कार्रवाई की जाएगी। हालांकि खबर लिखे जाने तक मौके पर कोई भी संबंधित कर्मचारी जांच के लिए नहीं पहुंचा था।
    user_पत्रकार गणेश कश्यप
    पत्रकार गणेश कश्यप
    Social Media Manager कौशांबी, कौशाम्बी, उत्तर प्रदेश•
    4 hrs ago
  • चित्रकूट में ईरान-इजराइल महायुद्ध के बीच गैस सिलेंडर की किल्लत का मामला सामने आया है। आरोप है कि चित्रकूट गैस एजेंसी इंडेन गैस ग्राहकों के साथ ठगी कर रही है। 1 महीने पूर्व बुक की गई गैस की डिलीवरी नहीं दी गई है, जबकि ऑफिस में अंदर सजी दुकान से सीधा डील करने वालों को गैस सिलेंडर उपलब्ध करवाया जा रहा है। इससे उपभोक्ताओं में खासा रोष है। सीएम और डीएम के दावों के बावजूद ऐसा हो रहा है। आप खुद भी देख सकते हैं या ऑनलाइन सर्च करके और जानकारी पा सकते हैं।
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    चित्रकूट में ईरान-इजराइल महायुद्ध के बीच गैस सिलेंडर की किल्लत का मामला सामने आया है। आरोप है कि चित्रकूट गैस एजेंसी इंडेन गैस ग्राहकों के साथ ठगी कर रही है। 1 महीने पूर्व बुक की गई गैस की डिलीवरी नहीं दी गई है, जबकि ऑफिस में अंदर सजी दुकान से सीधा डील करने वालों को गैस सिलेंडर उपलब्ध करवाया जा रहा है। इससे उपभोक्ताओं में खासा रोष है। सीएम और डीएम के दावों के बावजूद ऐसा हो रहा है। आप खुद भी देख सकते हैं या ऑनलाइन सर्च करके और जानकारी पा सकते हैं।
    user_Chitrakootnewslive
    Chitrakootnewslive
    News Anchor मानिकपुर, चित्रकूट, उत्तर प्रदेश•
    19 hrs ago
  • Post by Abhay TV News
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    Post by Abhay TV News
    user_Abhay TV News
    Abhay TV News
    Reporter Karwi, Chitrakoot•
    9 hrs ago
  • सतना लालता चौक स्थित बांके बिहारी वाली गली में आज उस वक्त हड़कंप मच गया, जब एक अज्ञात महिला को बेसुध अवस्था में सड़क किनारे पड़ा देखा गया। स्थानीय लोगों के अनुसार, महिला संभवतः नशे की हालत में है और पिछले कई घंटों से वहीं पड़ी हुई है।
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    सतना लालता चौक स्थित बांके बिहारी वाली गली में आज उस वक्त हड़कंप मच गया, जब एक अज्ञात महिला को बेसुध अवस्था में सड़क किनारे पड़ा देखा गया। स्थानीय लोगों के अनुसार, महिला संभवतः नशे की हालत में है और पिछले कई घंटों से वहीं पड़ी हुई है।
    user_प्रखर प्रवक्ता न्यूज
    प्रखर प्रवक्ता न्यूज
    Newspaper publisher रघुराजनगर नगरीय, सतना, मध्य प्रदेश•
    20 hrs ago
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