कस्बा शाहपुर थाने में पुलिस का अजीब फरमान गिरफ्तार लोगों के लिए समोसे कूड़े में फेकें डिंडोरी -- कस्बा शाहपुर थाना एक बार फिर अपने व्यवहार को लेकर चर्चा में है। यहां गिरफ्तार लोगों के परिजन जब उनके लिए नाश्ते के तौर पर समोसे लेकर पहुंचे तो पुलिस का रवैया हैरान करने वाला रहा। आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने समोसे अंदर देने से साफ इनकार कर दिया और देखते ही देखते उन समोसों को बाहर ही फेंक दिया। परिजनों का कहना है कि उन्होंने सिर्फ मानवता के नाते अपने परिजनों के लिए खाना पहुंचाया था, लेकिन पुलिस का व्यवहार बेहद कठोर और अपमानजनक रहा। सवाल यह उठ रहा है कि अगर खाने को लेकर किसी तरह की आशंका थी तो पुलिस जांच करवाकर उसे अंदर भेज सकती थी, लेकिन इस तरह से खाना फेंक देना क्या इंसानियत के दायरे में आता है? घटना के बाद स्थानीय लोगों में भी नाराजगी देखने को मिली। लोगों का कहना है कि कानून की रक्षा करने वाली पुलिस से इस तरह के असंवेदनशील व्यवहार की उम्मीद नहीं की जाती। अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या थाने में बंद लोगों को अपने परिजनों द्वारा दिया गया भोजन भी नसीब नहीं होगा, या फिर पुलिस का यही रवैया आगे भी जारी रहेगा
कस्बा शाहपुर थाने में पुलिस का अजीब फरमान गिरफ्तार लोगों के लिए समोसे कूड़े में फेकें डिंडोरी -- कस्बा शाहपुर थाना एक बार फिर अपने व्यवहार को लेकर चर्चा में है। यहां गिरफ्तार लोगों के परिजन जब उनके लिए नाश्ते के तौर पर समोसे लेकर पहुंचे तो पुलिस का रवैया हैरान करने वाला रहा। आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने समोसे अंदर देने से साफ इनकार कर दिया और देखते ही देखते उन समोसों को बाहर ही फेंक दिया। परिजनों का कहना है कि उन्होंने सिर्फ मानवता के नाते अपने परिजनों के लिए खाना पहुंचाया था, लेकिन पुलिस का व्यवहार बेहद कठोर और अपमानजनक रहा। सवाल यह उठ रहा है कि अगर खाने को लेकर किसी तरह की आशंका थी तो पुलिस जांच करवाकर उसे अंदर भेज सकती थी, लेकिन इस तरह से खाना फेंक देना क्या इंसानियत के दायरे में आता है? घटना के बाद स्थानीय लोगों में भी नाराजगी देखने को मिली। लोगों का कहना है कि कानून की रक्षा करने वाली पुलिस से इस तरह के असंवेदनशील व्यवहार की उम्मीद नहीं की जाती। अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या थाने में बंद लोगों को अपने परिजनों द्वारा दिया गया भोजन भी नसीब नहीं होगा, या फिर पुलिस का यही रवैया आगे भी जारी रहेगा
- डिंडोरी -- कस्बा शाहपुर थाना इन दिनों एक नए विवाद को लेकर चर्चा में है। बताया जा रहा है कि थाना परिसर में एक पुलिसकर्मी खुलेआम बिना वर्दी के खड़ा होकर ड्यूटी करता नजर आया। इस दृश्य को देखकर लोगों में सवाल उठने लगे कि जब आम नागरिकों को कानून का पालन करने की नसीहत दी जाती है, तो फिर खुद पुलिस नियमों से ऊपर कैसे हो सकती है? स्थानीय लोगों का कहना है कि थाने में आने वाले फरियादी पुलिस को वर्दी में देखने की उम्मीद करते हैं, क्योंकि वर्दी ही पुलिस की पहचान और अनुशासन का प्रतीक मानी जाती है। ऐसे में बिना वर्दी ड्यूटी करना नियमों और अनुशासन दोनों पर सवाल खड़े करता है। लोगों का यह भी कहना है कि अगर कोई विशेष जांच या गुप्त ड्यूटी नहीं थी, तो आखिर किस आदेश के तहत पुलिसकर्मी बिना वर्दी थाने में ड्यूटी करता रहा? इस मामले को लेकर अब जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। अब देखना यह होगा कि पुलिस विभाग इस मामले को गंभीरता से लेकर जांच करता है या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में ही दबकर रह जाएगा।1
- शहडोल। जिला काँग्रेस कमेटी शहडोल के जिलाध्यक्ष अजय अवस्थी के नेतृत्व मे, जिले मे व्याप्त रसोई गैस की किल्लत,कालाबाजारी, शहडोल से निकाल कर फूलपुर गैस भेजने व पाइप द्वारा घर घर गैस पहुंचने मे हो रहे विलंब के विरुद्ध जिला काँग्रेस द्वारा किया गया धरना-प्रदर्शन। काँग्रेस ने देश के सम्मानित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बताए अनुसार बर्तन मे पाइप लगा कर नाले मे डाल कर गैस निकाल कर चाय बनाने की कोशिश की लेकिन गैस चूल्हा नहीं जला, यह भी मोदी जी का जुमला मात्र साबित हुआ। जिला कांग्रेस कमेटी शहडोल के जिलाध्यक्ष अजय अवस्थी ने जिले में लगातार बनी हुई रसोई गैस सिलेंडर की किल्लत को लेकर केंद्र एवं राज्य सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि शहडोल जिले की आम जनता इन दिनों रसोई गैस सिलेंडर के लिए गैस एजेंसियों के चक्कर लगाने को मजबूर है। कई-कई दिनों तक इंतजार करने के बाद भी उपभोक्ताओं को समय पर सिलेंडर उपलब्ध नहीं हो पा रहा है, जिससे घरों की रसोई व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो रही है। अजय अवस्थी ने कहा कि सरकार द्वारा घर-घर पाइपलाइन के माध्यम से घरेलू गैस पहुंचाने की योजना भी जिले में वर्षों से अधूरी पड़ी हुई है। उन्होंने मांग की कि जनहित को ध्यान में रखते हुए इस कार्य को शीघ्र पूरा कराया जाए, ताकि जिलेवासियों को इसका लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि यह अत्यंत विडंबनापूर्ण स्थिति है कि शहडोल जिले से प्राकृतिक संसाधनों का दोहन किया जा रहा है, लेकिन उसी जिले के लोगों को मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कृपापात्र रिलायंस कंपनी द्वारा शहडोल क्षेत्र से प्राकृतिक गैस का दोहन कर उसे फूलपुर जैसे अन्य स्थानों पर भेजा जा रहा है, जबकि स्थानीय जनता को गैस सिलेंडर की भारी किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। जिलाध्यक्ष ने कहा कि यह स्थिति “चिराग तले अंधेरा” की कहावत को पूरी तरह चरितार्थ करती है। जिस जिले की धरती से प्राकृतिक संसाधन निकल रहे हैं, उसी जिले की जनता को रसोई गैस जैसी बुनियादी आवश्यकता के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है। अजय अवस्थी ने केंद्र और राज्य सरकार से मांग की कि इस गंभीर समस्या पर तत्काल ध्यान दिया जाए तथा जिले में गैस सिलेंडरों की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित की जाए, ताकि आम नागरिकों को राहत मिल सके। साथ ही उन्होंने प्रशासन से भी मांग की कि जिले की सभी गैस एजेंसियों की आपूर्ति व्यवस्था की जांच कराई जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि उपभोक्ताओं को समय पर गैस सिलेंडर उपलब्ध हो। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जल्द ही गैस सिलेंडर की समस्या का समाधान नहीं किया गया तो जिला कांग्रेस कमेटी शहडोल आम जनता के साथ मिलकर आंदोलन करने के लिए बाध्य होगी। उक्त जानकारी जिला काँग्रेस कमेटी शहडोल के मुख्य प्रवक्ता पीयूष शुक्ला ने प्रदान की। धरना-प्रदर्शन के दौरान मुख्य रूप से जिलाध्यक्ष अजय अवस्थी,पूर्व जिलाध्यक्ष नीरज द्विवेदी,पूर्व नगर पालिका उपाध्यक्ष कुलदीप निगम, वरिष्ठ कांग्रेसी सुनील खरे, नगर अध्यक्ष प्रभात पाण्डेय, जिला मुख्य प्रवक्ता पीयूष शुक्ला, जिला उपाध्यक्ष अनुज मिश्रा, युवा कांग्रेस जिला उपाध्यक्ष आशीष तिवारी, सोशल मीडिया जिलाध्यक्ष प्रीतेश द्विवेदी, एनएसयूआई जिलाध्यक्ष सौरभ तिवारी, सोहागपुर ब्लाक अध्यक्ष प्रीतमदास सोनी, पूर्व पार्षद जितेंद्र सिंह, पूर्व ब्लाक अध्यक्ष शिव शंकर शुक्ला, पार्षद हीरालाल प्रजापती, नीरज सराफ, पूर्व ब्लाक अध्यक्ष बुढ़ार राजीव शर्मा, सिंधपुर ब्लॉक अध्यक्ष अजीत सोनी, राजेश सोंधिया, पिछड़ा वर्ग जिलाध्यक्ष सत्यनारायण साहू, कुंजबिहारी द्विवेदी, जवाहर राव, हरिशंकर तिवारी, , रवि शेखर राव, आशीष द्विवेदी, महेंद्र यादव, हर्ष गौतम,सबी खान, मोहसिन खान, प्रमोद जैन, शाकिर फारूकी, जसवीर सिंह, धन्नू बर्मन, अशोक तिवारी, भैय्यालाल गुप्ता, वरुण पाल, राजेश बैगा, अजय सनपाल आदि काँग्रेसजन उपस्थित रहे।*4
- शहडोल जिले के जमुआ गांव में दिनदहाड़े अवैध कोयला उत्खनन, कोल माफिया सक्रिय1
- मंडला, कलेक्टर श्री सोमेश मिश्रा के आदेशानुसार तथा अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) नैनपुर के निर्देशन में प्रशासनिक टीम द्वारा नैनपुर नगर में खाद्य प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया गया। इसी क्रम में नैनपुर स्थित कादरी बिरयानी सेंटर पर भी जांच की कार्रवाई की गई। निरीक्षण के दौरान प्रतिष्ठान में घरेलू उपयोग के गैस सिलेंडरों का व्यावसायिक कार्य में उपयोग पाया गया। जांच में कुल पाँच घरेलू गैस सिलेंडर मौके पर पाए गए, जिन्हें नियमों के विरुद्ध उपयोग किए जाने पर अधिकारियों द्वारा तत्काल जप्त कर लिया गया। अधिकारियों ने मौके पर ही नियमानुसार जप्ती पंचनामा तैयार करते हुए आवश्यक वैधानिक कार्रवाई की। साथ ही प्रतिष्ठान संचालक को गैस सिलेंडरों के उपयोग से संबंधित नियमों का पालन करने के निर्देश दिए गए।1
- सड़क सुरक्षा समिति की बैठक आयोजित, दुर्घटना पीड़ितों को योजनाओं का लाभ दिलाने पर जोर सड़क सुरक्षा को लेकर जिला स्तर पर सड़क सुरक्षा समिति की बैठक कलेक्टर सोमेश मिश्रा की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक में सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम, यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने तथा दुर्घटना पीड़ितों को शासन की योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराने के संबंध में चर्चा की गई। बैठक में कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि सड़क दुर्घटनाओं में घायल या मृत व्यक्तियों के परिजनों को शासन द्वारा संचालित योजनाओं का समय पर लाभ दिलाया जाए। विशेष रूप से प्रधानमंत्री राहत योजना के अंतर्गत पात्र हितग्राहियों को सहायता राशि उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को प्राथमिकता से पूर्ण करने के निर्देश दिए गए। पीएम राहत योजना (विशेषकर सड़क दुर्घटना पीड़ितों के लिए) दुर्घटना के पात्र पीड़ितों को कैशलेस इलाज प्रदान करती है। यह योजना दुर्घटना के पहले ’गोल्डन ऑवर’ में त्वरित चिकित्सा सुनिश्चित करती है और इसका उद्देश्य समय पर इलाज न मिलने से होने वाली मौतों को रोकना है। कलेक्टर सोमेश मिश्रा ने लोगों को इस योजना के बारे में जानकारी देने के निर्देश दिए। इसके साथ ही उन्होंने अधिकारियों को यह भी सुनिश्चित करने के लिए कहा कि सड़क दुर्घटना में प्रभावित व्यक्तियों एवं उनके परिवारों को राहवीर योजना के अंतर्गत मिलने वाली सहायता का लाभ भी समय पर प्रदान किया जाए। इसके लिए संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिए गए। जिला अंतर्गत चिन्हित 10 ब्लैक स्पॉट एवं चिन्हित 34 रेड स्पॉट पर संबंधित सड़क निर्माता विभागों को 7 दिवस के अंदर स्थल निरीक्षण कर सुधारात्मक कार्यवाही करने के लिए निर्देशित किया गया जिससे दुर्घटना पर अंकुश लगाया जा सके। हिट एंड रन प्रकरणों के निराकरण के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया गया। सड़कों पर बने स्पीड ब्रेकर का पुनः निरीक्षण करने एवं स्पीड ब्रेकर पर रंग रोधन का कार्य करने के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देश जारी किये गये। नियमित रूप से चैकिंग अभियान चलाकर बिना हेलमेट एवं बिना सीटबेल्ट लगाए वाहन चलाने वाले वाहन चालकों के विरूद्ध कार्यवाही करने के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया गया। शहर में अतिक्रमण हटाने के लिए लगातार अतिक्रमण दस्ता को कार्यवाही करने के लिए निर्देशित किया गया। बैठक में पुलिस अधीक्षक रजत सकलेचा, डीएफओ पश्चिम एमएस मौर्य, डीएफओ पूर्व प्रीता एमएस, सीईओ जिला पंचायत शाश्वत सिंह मीना, अपर कलेक्टर राजेन्द्र कुमार सिंह, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक शिवकुमार वर्मा, सभी एसडीएम एवं संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।1
- मंडला जिला अस्पताल में एक बार फिर लापरवाही गर्माया मामला परिजनों का आरोप - गलती #इंजेक्शन लगाने से हुई #मौत !! आए दिन मरीजों और परिजनों द्वारा डॉक्टरों पर लापरवाही और धमकी देने के आरोप लगते रहते हैं। आख़िर कब सुधरेगी स्वास्थ्य व्यवस्था? #मंडला #जिला_अस्पताल_मंडला #स्वास्थ्य_व्यवस्था #लापरवाही #Mandla #News #मंडला #जिला_अस्पताल #स्वास्थ्य_व्यवस्था1
- मंडला जिला अस्पताल में मरीज की मौत पर हंगामा, गलत इंजेक्शन लगाने का आरोप1
- डिंडोरी -- कस्बा शाहपुर थाना एक बार फिर अपने व्यवहार को लेकर चर्चा में है। यहां गिरफ्तार लोगों के परिजन जब उनके लिए नाश्ते के तौर पर समोसे लेकर पहुंचे तो पुलिस का रवैया हैरान करने वाला रहा। आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने समोसे अंदर देने से साफ इनकार कर दिया और देखते ही देखते उन समोसों को बाहर ही फेंक दिया। परिजनों का कहना है कि उन्होंने सिर्फ मानवता के नाते अपने परिजनों के लिए खाना पहुंचाया था, लेकिन पुलिस का व्यवहार बेहद कठोर और अपमानजनक रहा। सवाल यह उठ रहा है कि अगर खाने को लेकर किसी तरह की आशंका थी तो पुलिस जांच करवाकर उसे अंदर भेज सकती थी, लेकिन इस तरह से खाना फेंक देना क्या इंसानियत के दायरे में आता है? घटना के बाद स्थानीय लोगों में भी नाराजगी देखने को मिली। लोगों का कहना है कि कानून की रक्षा करने वाली पुलिस से इस तरह के असंवेदनशील व्यवहार की उम्मीद नहीं की जाती। अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या थाने में बंद लोगों को अपने परिजनों द्वारा दिया गया भोजन भी नसीब नहीं होगा, या फिर पुलिस का यही रवैया आगे भी जारी रहेगा1