अयोध्या के हैरिंग्टनगंज ब्लॉक के बसवार खुर्द गाँव में सरकार की महत्वाकांक्षी जल संचय और 'अमृत सरोवर' जैसी योजनाएँ विफल होती दिख रही हैं। लाखों रुपये की लागत से बना एक 'आदर्श तालाब' सरकारी तंत्र की घोर लापरवाही और भ्रष्टाचार का शिकार हो गया है। मौजूदा स्थिति यह है कि तालाब पूरी तरह से सूख चुका है, जिसके कारण प्यासे मवेशी और पक्षी पानी की तलाश में दर-दर भटकने को मजबूर हैं। ग्रामीणों ने सीधे तौर पर ग्राम प्रधान और संबंधित अधिकारियों को इस दुर्दशा के लिए जिम्मेदार ठहराया है। उनका आरोप है कि तालाब की सफाई में न केवल कोताही बरती गई, बल्कि उसकी बाउंड्री से अवैध रूप से मिट्टी भी निकाल ली गई, जिसे वे जल स्रोत के अस्तित्व के साथ खिलवाड़ मानते हैं। हालांकि, ग्राम प्रधान स्वामीनाथ ने मिट्टी निकालने के आरोप को तकनीकी रूप से नकारते हुए इसे 'दूसरे नंबर' (गाटा संख्या) का मामला बताया है। वहीं, ग्राम सचिव मिथिलेश के पास भी इस बात का कोई स्पष्ट जवाब नहीं है कि तालाब में पानी क्यों नहीं रुक रहा और उसकी नियमित सफाई क्यों नहीं हुई। उन्होंने जांच कराकर पानी भरवाने का आश्वासन तो दिया है, लेकिन ग्रामीण इसे केवल सरकारी खानापूर्ति मान रहे हैं और उन पर भरोसा नहीं कर रहे हैं। एक ओर भूजल स्तर लगातार गिर रहा है, तो दूसरी ओर जिम्मेदार अधिकारी 'जांच' और 'दूसरे नंबर' की दलीलें देकर अपनी गर्दन बचाने की कोशिश में लगे हैं। ग्रामीणों ने अब जिला प्रशासन से अपील की है कि इन 'आदर्श तालाबों' के लिए आवंटित फंड और उनकी वर्तमान स्थिति की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए, ताकि दोषी सचिव और प्रधान के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई सुनिश्चित हो सके।
अयोध्या के हैरिंग्टनगंज ब्लॉक के बसवार खुर्द गाँव में सरकार की महत्वाकांक्षी जल संचय और 'अमृत सरोवर' जैसी योजनाएँ विफल होती दिख रही हैं। लाखों रुपये की लागत से बना एक 'आदर्श तालाब' सरकारी तंत्र की घोर लापरवाही और भ्रष्टाचार का शिकार हो गया है। मौजूदा स्थिति यह है कि तालाब पूरी तरह से सूख चुका है, जिसके कारण प्यासे मवेशी और पक्षी पानी की तलाश में दर-दर भटकने को मजबूर हैं। ग्रामीणों ने सीधे तौर पर ग्राम प्रधान और संबंधित अधिकारियों को इस दुर्दशा के लिए जिम्मेदार ठहराया है। उनका आरोप है
कि तालाब की सफाई में न केवल कोताही बरती गई, बल्कि उसकी बाउंड्री से अवैध रूप से मिट्टी भी निकाल ली गई, जिसे वे जल स्रोत के अस्तित्व के साथ खिलवाड़ मानते हैं। हालांकि, ग्राम प्रधान स्वामीनाथ ने मिट्टी निकालने के आरोप को तकनीकी रूप से नकारते हुए इसे 'दूसरे नंबर' (गाटा संख्या) का मामला बताया है। वहीं, ग्राम सचिव मिथिलेश के पास भी इस बात का कोई स्पष्ट जवाब नहीं है कि तालाब में पानी क्यों नहीं रुक रहा और उसकी नियमित सफाई क्यों नहीं हुई। उन्होंने जांच कराकर पानी भरवाने
का आश्वासन तो दिया है, लेकिन ग्रामीण इसे केवल सरकारी खानापूर्ति मान रहे हैं और उन पर भरोसा नहीं कर रहे हैं। एक ओर भूजल स्तर लगातार गिर रहा है, तो दूसरी ओर जिम्मेदार अधिकारी 'जांच' और 'दूसरे नंबर' की दलीलें देकर अपनी गर्दन बचाने की कोशिश में लगे हैं। ग्रामीणों ने अब जिला प्रशासन से अपील की है कि इन 'आदर्श तालाबों' के लिए आवंटित फंड और उनकी वर्तमान स्थिति की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए, ताकि दोषी सचिव और प्रधान के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई सुनिश्चित हो सके।
- अयोध्या के थाना इनायतनगर क्षेत्र के पलिया लोहानी गांव निवासी एक युवक की सड़क हादसे में मौत हो गई है, जिसके बाद पुलिस ने आरोपी पिकअप चालक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। मृतक के परिजनों में इस घटना के बाद शोक की लहर है। यह घटना 22 मई 2026 की सुबह करीब 7:15 बजे हुई, जब ग्राम पलिया लोहानी निवासी राम जियावन पुत्र राजाराम मिल्कीपुर पेट्रोल टंकी के पास मिल्कीपुर-खजुरहट रोड पर सवारी का इंतजार कर रहा था। उसी दौरान फैजाबाद की तरफ से तेज रफ्तार में आ रही पिकअप संख्या UP 42 CT 3734 के चालक ने लापरवाही से वाहन चलाते हुए युवक को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि राम जियावन गंभीर रूप से घायल हो गया। स्थानीय लोगों की मदद से उसे 108 एंबुलेंस द्वारा जिला अस्पताल अयोध्या पहुंचाया गया, जहाँ चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम कराया और परिजनों को सौंप दिया। मृतक के भाई राम प्रताप की तहरीर पर थाना इनायतनगर पुलिस ने आरोपी चालक के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने बताया है कि इस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।3
- रामनगरी अयोध्या के मिल्कीपुर विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत गदुरही नामक स्थान पर स्थित महापुरुष बाबा का स्थान अपनी विशेष महिमा के लिए जाना जाता है।1
- अयोध्या जिले के तारुन थाना क्षेत्र के विद्यापुर गाँव में एक घर में घुसकर चोरी की घटना को अंजाम दिया गया, जहां चोरों ने सामान बिखेर दिया। माधुरी, पत्नी अर्जुन पांडे, ने आरोप लगाया है कि 23 मार्च 2026 की रात जब वह अपने बरामदे में सो रही थीं, तब लगभग रात 12:00 बजे उन्हें खटपट की आवाज सुनाई दी। जब प्रार्थिनी उठकर देखी तो उन्हें अंदर कुछ लोगों के होने का अहसास हुआ, जिसके बाद उन्होंने तत्काल 112 डायल कर पुलिस को सूचना दी। पुलिस के मौके पर पहुंचने से पहले ही चोर सामान लेकर फरार हो चुके थे। मौके पर पुलिस द्वारा वीडियोग्राफी कराई गई और संबंधित थाने की पुलिस भी इकट्ठा हुई। पीड़िता ने बताया कि चोरों ने घर में अकेली सो रही उनकी बेटी को मारा-पीटा था, जिसका पुलिस द्वारा मेडिकल भी करा दिया गया है। हालांकि, इस चोरी की घटना का मुकदमा अभी तक दर्ज नहीं किया गया है। प्रार्थिनी ने ऑनलाइन शिकायत दर्ज की है और मीडिया से रूबरू होते हुए अपनी पूरी आपबीती बताई है। उन्होंने पुलिस प्रशासन से चोरी का मुकदमा दर्ज करने की अपील की है। इंडिया न्यूज़ दर्पण से दलजीत नागवंशी की रिपोर्ट सवाल उठाती है कि क्या पुलिस प्रशासन चोरी का मुकदमा दर्ज करेगा या इस मामले को 'राम भरोसे' छोड़ दिया जाएगा।2
- 5 जून को आने वाले पर्यावरण दिवस के अवसर पर, 'आज सुबह टाइम्स टीम' ने लाल चंद सोनी की रिपोर्टिंग के माध्यम से लोगों से सुबह उठकर पेड़-पौधे लगाने और पर्यावरण का संरक्षण करने का आह्वान किया है ताकि शुद्ध हवा मिल सके। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 5 जून 1972 को विश्व पर्यावरण दिवस मनाने का जो उपहार दुनिया को दिया था, उसे आज संपूर्ण भारतवर्ष समेत पूरे विश्व में मनाने के लिए हमेशा बेताबी रहती है। यह संदेश देश को मजबूत बनाने, उसे विकास की ओर ले जाने और जीवन में अपने देश के साथ चलने की प्रेरणा भी देता है।1
- रामनगरी अयोध्या में कल शाम 'प्रज्ञा गुप्ता द्वारा संचालित वॉइस फोर चेंज' ने निराश्रित और ज़रूरतमंद पशुओं के लिए एक विशेष भंडारे का आयोजन किया। पशुओं के प्रति करुणा, सह-अस्तित्व और सेवा की भावना को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित इस कार्यक्रम में गायों, कुत्तों, बंदरों और अन्य ज़रूरतमंद पशुओं को भोजन उपलब्ध कराया गया। इस भंडारे में कद्दू, खीरा, टमाटर, तरबूज, खरबूजा, केला, भुट्टा, साग, चना, टोस्ट और ब्रेड जैसी विभिन्न खाद्य सामग्री की व्यवस्था की गई, जिसमें क्रूरता-मुक्त भोजन सुनिश्चित करने का विशेष प्रयास किया गया ताकि एक जीव की भूख मिटाने के लिए किसी दूसरे जीव को पीड़ा न सहनी पड़े। इस अवसर पर प्रज्ञा गुप्ता ने बताया कि मनुष्य को तो किसी न किसी रूप में भोजन मिल जाता है, लेकिन बड़ी संख्या में पशु रोज़ाना भूख, प्यास और उपेक्षा का सामना करते हैं। उन्होंने कहा कि इस भंडारे का मुख्य उद्देश्य समाज का ध्यान उन मूक प्राणियों की ओर आकर्षित करना है जो अपनी पीड़ा व्यक्त नहीं कर सकते। प्रज्ञा गुप्ता ने ज़ोर देकर कहा कि "अयोध्या तभी सच्चे अर्थों में अयोध्या बनेगी, जब यहां कोई भी जीव भूखा न रहे। प्रत्येक जीव को पेट भर भोजन, पीने के लिए स्वच्छ जल और रहने के लिए सुरक्षित आश्रय उपलब्ध हो। दया, करुणा और सह-अस्तित्व ही भगवान श्रीराम की नगरी की वास्तविक पहचान होनी चाहिए।" इस आयोजन का लक्ष्य केवल पशुओं का पेट भरना ही नहीं, बल्कि सभी जीवों के प्रति करुणा, अहिंसा और संवेदनशीलता का संदेश देना भी था। इस पहल का उत्साहवर्धन करने के लिए राजलक्ष्मी त्रिपाठी, डॉ. अनामिका त्रिपाठी, डॉ. आलोक त्रिपाठी, बबीता गुप्ता, अमृता त्रिवेदी, सोनू त्रिपाठी सहित कई गणमान्य व्यक्तियों ने कार्यक्रम में सहभागिता की। दीपशिखा मौर्य, यशवंत गौतम, हरीश तिवारी, रौनक मौर्य, रश्मि गुप्ता, अर्शिता, पूजा रावत, राजेश सोनी, उमेश, आकांक्षा, नीलू लखमन, युवराज, मोहित खत्री, अलहाब हुसैन, पूजा सचान जैसे बड़ी संख्या में पशु प्रेमी और स्वयंसेवक भी उपस्थित रहे। Voice4Change ने इस आयोजन को सफल बनाने में सहयोग करने वाले विनय उत्तरानी, प्रिया हेमनानी, मनोज कुमार, राजीव मदान, विभा श्रीवास्तव, राहुल मल्होत्रा, सुमित दुबे और सर्वेश जी सहित सभी दानदाताओं और शुभचिंतकों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम के माध्यम से समाज से यह अपील भी की गई कि पशुओं के प्रति संवेदनशीलता केवल विशेष अवसरों तक सीमित न रहे, बल्कि प्रतिदिन अपने आसपास के मूक प्राणियों के लिए भोजन, पानी और देखभाल की व्यवस्था करने का प्रयास किया जाए। वॉइस फोर चेंज की संस्थापक प्रज्ञा गुप्ता ने भविष्य में भी पशु कल्याण, जन-जागरूकता और करुणा-आधारित सामाजिक अभियानों को निरंतर जारी रखने का संकल्प व्यक्त किया है।4
- समाजवादी पार्टी के नेता मसूद आलम खान ने उत्तर प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री को एक पत्र लिखकर आगामी नीट परीक्षा के परीक्षार्थियों के लिए राज्य रोडवेज बसों में निःशुल्क यात्रा की व्यवस्था करने की मांग की है। यह मांग 21 जून को होने वाली परीक्षा के मद्देनजर की गई है, क्योंकि इससे पहले 3 मई को हुई नीट परीक्षा का पेपर लीक होने के कारण उसे रद्द कर दिया गया था। खान ने अपने पत्र में 3 मई के पेपर लीक की पूरी जिम्मेदारी नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) और भारत सरकार पर डाली है, और बताया है कि परीक्षा रद्द होने के कारण लाखों छात्र गहरे डिप्रेशन का सामना कर रहे हैं, जिससे कई होनहार बच्चों ने तो आत्महत्या तक कर ली है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि नीट के लगभग 90% छात्र गरीब और ग्रामीण परिवेश से आते हैं, जिनके लिए बार-बार परीक्षा सेंटर तक जाना, होटल में रुकना और बसों का भारी किराया वहन करना उनके परिवारों के लिए संभव नहीं है। पत्र में मुख्यमंत्री से दो प्रमुख मांगें की गई हैं: पहली, 20 जून से 21 जून तक सभी नीट परीक्षार्थियों के लिए उत्तर प्रदेश रोडवेज बसों में किराया पूरी तरह माफ किया जाए; और दूसरी, ग्रामीण व दूरदराज के मार्गों पर अतिरिक्त बसों का संचालन सुनिश्चित किया जाए ताकि कोई भी छात्र परीक्षा देने से वंचित न रह जाए। मसूद आलम खान ने मुख्यमंत्री से भावनात्मक अपील करते हुए कहा कि उनका एक फैसला लाखों छात्रों के भविष्य को बचा सकता है और देश का डॉक्टर बनने के उनके सपने को टूटने से रोक सकता है। यह पत्र #NEET_Students_के_साथ_न्याय, #FreeBusForNEET, #UP_CM_सुनो_पुकार और #SaveNEET_Aspirants जैसे हैशटैग के माध्यम से छात्रों के हक में न्याय और राहत की मजबूत मांग को सामने रखता है।3
- ‘जल है तो कल है’ के महत्वपूर्ण संदेश को उजागर करते हुए, तखतगढ़-सिंदरू बांध पर एक विशाल जल संरक्षण अभियान का आयोजन किया गया। इस पहल के तहत गंगा आरती की गई और बड़ी संख्या में लोगों ने श्रमदान भी किया, जिसका उद्देश्य जल के महत्व पर जोर देना है।1
- अयोध्या के हैरिंग्टनगंज ब्लॉक के बसवार खुर्द गाँव में सरकार की महत्वाकांक्षी जल संचय और 'अमृत सरोवर' जैसी योजनाएँ विफल होती दिख रही हैं। लाखों रुपये की लागत से बना एक 'आदर्श तालाब' सरकारी तंत्र की घोर लापरवाही और भ्रष्टाचार का शिकार हो गया है। मौजूदा स्थिति यह है कि तालाब पूरी तरह से सूख चुका है, जिसके कारण प्यासे मवेशी और पक्षी पानी की तलाश में दर-दर भटकने को मजबूर हैं। ग्रामीणों ने सीधे तौर पर ग्राम प्रधान और संबंधित अधिकारियों को इस दुर्दशा के लिए जिम्मेदार ठहराया है। उनका आरोप है कि तालाब की सफाई में न केवल कोताही बरती गई, बल्कि उसकी बाउंड्री से अवैध रूप से मिट्टी भी निकाल ली गई, जिसे वे जल स्रोत के अस्तित्व के साथ खिलवाड़ मानते हैं। हालांकि, ग्राम प्रधान स्वामीनाथ ने मिट्टी निकालने के आरोप को तकनीकी रूप से नकारते हुए इसे 'दूसरे नंबर' (गाटा संख्या) का मामला बताया है। वहीं, ग्राम सचिव मिथिलेश के पास भी इस बात का कोई स्पष्ट जवाब नहीं है कि तालाब में पानी क्यों नहीं रुक रहा और उसकी नियमित सफाई क्यों नहीं हुई। उन्होंने जांच कराकर पानी भरवाने का आश्वासन तो दिया है, लेकिन ग्रामीण इसे केवल सरकारी खानापूर्ति मान रहे हैं और उन पर भरोसा नहीं कर रहे हैं। एक ओर भूजल स्तर लगातार गिर रहा है, तो दूसरी ओर जिम्मेदार अधिकारी 'जांच' और 'दूसरे नंबर' की दलीलें देकर अपनी गर्दन बचाने की कोशिश में लगे हैं। ग्रामीणों ने अब जिला प्रशासन से अपील की है कि इन 'आदर्श तालाबों' के लिए आवंटित फंड और उनकी वर्तमान स्थिति की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए, ताकि दोषी सचिव और प्रधान के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई सुनिश्चित हो सके।3