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देश के अविराम विकास को बनाए रखने, सुरक्षा सुनिश्चित करने और नई पीढ़ियों के हित साधने के लिए बीजेपी को ही चुनने का आह्वान किया गया है। कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाते हुए उसे देशविरोधी और देशद्रोहियों का साथ देने वाली पार्टी बताया गया है, जो कथित तौर पर रात को तीन बजे कोर्ट खुलवाकर आतंकवादियों को जमानत दिलाती है।
दौलत राम शर्मा शास्त्री
देश के अविराम विकास को बनाए रखने, सुरक्षा सुनिश्चित करने और नई पीढ़ियों के हित साधने के लिए बीजेपी को ही चुनने का आह्वान किया गया है। कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाते हुए उसे देशविरोधी और देशद्रोहियों का साथ देने वाली पार्टी बताया गया है, जो कथित तौर पर रात को तीन बजे कोर्ट खुलवाकर आतंकवादियों को जमानत दिलाती है।
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- RLP प्रमुख हनुमान बेनीवाल ने एक गंभीर आरोप लगाया है कि उनकी पार्टी के 20 से 25 साल के युवाओं को गिरफ्तार किया जा रहा है और उनकी गाड़ियाँ भी जब्त की जा रही हैं। उन्होंने इसे युवाओं की आवाज़ दबाने का एक प्रयास बताया है। हनुमान बेनीवाल का कहना है कि युवा लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रख रहे हैं, लेकिन प्रशासन उनके खिलाफ सख्त कदम उठा रहा है और पार्टी कार्यकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। यह मामला अब राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है। पार्टी समर्थकों का कहना है कि युवाओं के साथ अन्याय हो रहा है, जबकि प्रशासन अपनी कार्रवाई को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक बता रहा है। यह घटना युवाओं पर हो रही कार्रवाई की उचितता और उनकी आवाज़ दबाने की कोशिश पर सवाल उठा रही है।1
- देश के अविराम विकास को बनाए रखने, सुरक्षा सुनिश्चित करने और नई पीढ़ियों के हित साधने के लिए बीजेपी को ही चुनने का आह्वान किया गया है। कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाते हुए उसे देशविरोधी और देशद्रोहियों का साथ देने वाली पार्टी बताया गया है, जो कथित तौर पर रात को तीन बजे कोर्ट खुलवाकर आतंकवादियों को जमानत दिलाती है।1
- माता-पिता का वृद्धाश्रमों में रहना समाज और परिवारों के लिए एक समस्या बनकर उभरा है। इस स्थिति को एक सामाजिक और पारिवारिक समस्या के रूप में देखा जा रहा है।1
- देश की राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर आज, 6 जून 2026 को, 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के बैनर तले एक बड़ा प्रदर्शन आयोजित किया गया। इस प्रदर्शन में युवाओं, छात्रों और अभिभावकों ने भाग लिया।1
- आज दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे युवा मीडिया और अंजना कश्यप द्वारा दिए गए एक बयान को लेकर गहरी नाराजगी व्यक्त कर रहे हैं। अंजना के इस बयान पर ऑनलाइन शिक्षकों और छात्रों में भी भारी गुस्सा है, और कई जाने-माने शिक्षकों ने इसके जवाब में कड़ा रुख अपनाया है। जंतर-मंतर पर युवाओं की अंजना कश्यप के खिलाफ यह नाराजगी स्पष्ट रूप से दिखाई पड़ी है।1
- जयपुर में प्रांतीय वैष्णव ब्राह्मण समाज द्वारा एक महिला अधिवेशन का आयोजन किया गया। इस अधिवेशन में बड़ी संख्या में महिलाओं ने भाग लिया, जहाँ समाज में फैली कुरीतियों को लेकर विस्तृत चर्चा की गई।1
- राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कांग्रेस अध्यक्ष पद को लेकर एक महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने खुलासा किया है कि वह कांग्रेस का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनना चाहते थे, लेकिन उन्हें इस पद तक पहुँचने से रोकने के लिए एक साजिश रची गई थी। गहलोत ने यह भी स्वीकार किया कि उस समय उन्हें मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ने का मोह था, हालांकि अब वह दौर बीत चुका है। गहलोत के इस बयान को राजस्थान कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति और वर्ष 2022 के कांग्रेस अध्यक्ष चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है। उस समय उनके कांग्रेस अध्यक्ष बनने की अटकलें काफी तेज़ थीं, लेकिन राजस्थान में नेतृत्व परिवर्तन से संबंधित राजनीतिक घटनाक्रम के बाद स्थिति पूरी तरह बदल गई थी। राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, गहलोत का यह बयान कांग्रेस के भीतर चले आ रहे पुराने शक्ति संघर्ष की याद दिलाता है। खास बात यह रही कि आमतौर पर शांत और संयमित रहने वाले गहलोत इस मुद्दे पर काफी भावुक और दबाव में दिखे, जिससे उनके मन की पीड़ा स्पष्ट रूप से झलकती दिखाई दी।1
- बीकानेर के ग्रामीण क्षेत्र में स्थित एक सरकारी स्कूल की बदहाल स्थिति ने शिक्षा व्यवस्था और बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्कूल भवन की हालत इतनी खराब है कि यदि इस समय ग्रीष्मकालीन अवकाश नहीं होता, तो कक्षा में पढ़ने वाले छात्रों की जान को खतरा हो सकता था। यह स्थिति तब है जब राजस्थान में पिछले वर्ष भी कई स्कूल भवन हादसों का शिकार हुए थे। सबसे दर्दनाक घटना झालावाड़ जिले के पिपलोद गांव में सामने आई थी, जहाँ स्कूल भवन का एक हिस्सा ढह जाने से सात बच्चों की मौत हो गई थी। इस भयावह हादसे के बाद राज्यभर में जर्जर स्कूल भवनों की जांच और मरम्मत के निर्देश जारी किए गए थे, और सरकार ने कई स्कूलों के लिए मरम्मत कार्यों के टेंडर भी निकाले थे। इसके बावजूद, बीकानेर के इस स्कूल की तस्वीरें और मौजूदा हालात यह दर्शाते हैं कि जमीनी स्तर पर अभी भी कई विद्यालय गंभीर जोखिम में हैं। मानसून शुरू होने से पहले ही यदि स्कूलों की यह स्थिति है, तो बरसात के मौसम में इन जर्जर भवनों में पढ़ने वाले हजारों बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता स्वाभाविक रूप से बढ़ जाती है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि बारिश से पहले सभी जर्जर स्कूल भवनों का सर्वे कराया जाए और आवश्यक मरम्मत या वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि किसी भी बड़े हादसे को टाला जा सके।1