मध्य प्रदेश के सबलगढ़ में पिछले 32 दिनों से जारी जनहित सत्याग्रह के बीच, निर्वाचित पार्षदों का एक प्रतिनिधिमंडल भोपाल पहुंचा। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर, नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय सहित अपर मुख्य सचिव संजय दुबे और नगरीय प्रशासन आयुक्त संकेत भांडवे जैसे वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात कर सबलगढ़ की बदहाल व्यवस्थाओं पर तत्काल हस्तक्षेप की मांग करते हुए एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। सत्याग्रह का नेतृत्व कर रहे पार्षद और भाजपा युवा मोर्चा जिला मंत्री मोहन रामजी लाल पचौरी ने बताया कि सबलगढ़ नगर में सफाई व्यवस्था, पेयजल संकट, अधूरे विकास कार्य, प्रशासनिक पारदर्शिता की कमी और नागरिक सुविधाओं से जुड़े महत्वपूर्ण विषय लंबे समय से उपेक्षित हैं। उन्होंने यह भी बताया कि बार-बार मांग करने के बावजूद कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं होने के कारण ही जनप्रतिनिधियों को यह जनहित सत्याग्रह शुरू करना पड़ा। ज्ञापन में इस बात पर भी जोर दिया गया कि नगरपालिका परिषद सबलगढ़ के अध्यक्ष के खिलाफ पूर्व में पारित राइट टू रिकॉल (अविश्वास) प्रस्ताव अभी शासन स्तर पर विचाराधीन है, जिससे परिषद और पी.आई.सी. की बैठकों का नियमित संचालन बाधित हुआ है। इसका सीधा असर विकास कार्यों, वित्तीय निर्णयों और जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर पड़ रहा है, जिससे आम जनता को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। पार्षदों ने मुख्यमंत्री एवं वरिष्ठ अधिकारियों से मांग की है कि नगरपालिका परिषद सबलगढ़ की कार्यप्रणाली की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। साथ ही, लंबित विकास कार्यों को शीघ्र गति देने, सफाई एवं पेयजल व्यवस्था में तत्काल सुधार सुनिश्चित करने और जनप्रतिनिधियों को प्रशासनिक अभिलेखों तथा निर्णयों की जानकारी उपलब्ध कराकर पारदर्शिता स्थापित करने की भी मांग की गई। पार्षद कैलाश चंद भगत और असरफ खान ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन किसी व्यक्ति या राजनीतिक दल के विरुद्ध नहीं, बल्कि नगर के हजारों नागरिकों के हितों की रक्षा के लिए है। उनका मानना है कि जब नगरवासी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हों, तो जनप्रतिनिधियों का दायित्व है कि उनकी आवाज शासन के सर्वोच्च स्तर तक पहुंचाई जाए। इस अवसर पर पार्षद मोहन रामजी लाल पचौरी ने दोहराया कि वे 32 दिनों से शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से सत्याग्रह कर रहे हैं, जिसका एकमात्र उद्देश्य सबलगढ़ की जनता को बेहतर सफाई व्यवस्था, नियमित पेयजल, पारदर्शी प्रशासन और विकास कार्यों का लाभ दिलाना है। उन्होंने विश्वास जताया कि प्रदेश के शीर्ष नेतृत्व के समक्ष वास्तविक स्थिति रखने के बाद जनता के हित में सकारात्मक और प्रभावी निर्णय अवश्य लिए जाएंगे। पार्षदों ने दृढ़ता से कहा कि जब तक नगरवासियों की प्रमुख समस्याओं के समाधान की दिशा में कोई ठोस और स्थायी कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका जनहित संघर्ष और सत्याग्रह निरंतर जारी रहेगा।
मध्य प्रदेश के सबलगढ़ में पिछले 32 दिनों से जारी जनहित सत्याग्रह के बीच, निर्वाचित पार्षदों का एक प्रतिनिधिमंडल भोपाल पहुंचा। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर, नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय सहित अपर मुख्य सचिव संजय दुबे और नगरीय प्रशासन आयुक्त संकेत भांडवे जैसे वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात कर सबलगढ़ की बदहाल व्यवस्थाओं पर तत्काल हस्तक्षेप की मांग करते हुए एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। सत्याग्रह का नेतृत्व कर रहे पार्षद और भाजपा युवा मोर्चा जिला मंत्री मोहन रामजी लाल पचौरी ने बताया कि सबलगढ़ नगर में सफाई व्यवस्था, पेयजल संकट, अधूरे विकास कार्य, प्रशासनिक पारदर्शिता की कमी और नागरिक सुविधाओं से जुड़े महत्वपूर्ण विषय लंबे समय से उपेक्षित हैं। उन्होंने यह भी बताया कि बार-बार मांग करने के बावजूद कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं होने के कारण ही जनप्रतिनिधियों को यह जनहित सत्याग्रह शुरू करना पड़ा। ज्ञापन में इस बात पर भी जोर दिया गया कि नगरपालिका परिषद सबलगढ़ के अध्यक्ष के खिलाफ पूर्व में पारित राइट टू रिकॉल (अविश्वास) प्रस्ताव अभी शासन स्तर पर विचाराधीन है, जिससे परिषद और पी.आई.सी. की बैठकों का नियमित संचालन बाधित हुआ है। इसका सीधा असर विकास कार्यों, वित्तीय निर्णयों और जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर पड़ रहा है, जिससे आम जनता को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। पार्षदों ने मुख्यमंत्री एवं वरिष्ठ अधिकारियों से मांग की है कि नगरपालिका परिषद सबलगढ़ की कार्यप्रणाली की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। साथ ही, लंबित विकास कार्यों को शीघ्र गति देने, सफाई एवं पेयजल व्यवस्था में तत्काल सुधार सुनिश्चित करने और जनप्रतिनिधियों को प्रशासनिक अभिलेखों तथा निर्णयों की जानकारी उपलब्ध कराकर पारदर्शिता स्थापित करने की भी मांग की गई। पार्षद कैलाश चंद भगत और असरफ खान ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन किसी व्यक्ति या राजनीतिक दल के विरुद्ध नहीं, बल्कि नगर के हजारों नागरिकों के हितों की रक्षा के लिए है। उनका मानना है कि जब नगरवासी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हों, तो जनप्रतिनिधियों का दायित्व है कि उनकी आवाज शासन के सर्वोच्च स्तर तक पहुंचाई जाए। इस अवसर पर पार्षद मोहन रामजी लाल पचौरी ने दोहराया कि वे 32 दिनों से शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से सत्याग्रह कर रहे हैं, जिसका एकमात्र उद्देश्य सबलगढ़ की जनता को बेहतर सफाई व्यवस्था, नियमित पेयजल, पारदर्शी प्रशासन और विकास कार्यों का लाभ दिलाना है। उन्होंने विश्वास जताया कि प्रदेश के शीर्ष नेतृत्व के समक्ष वास्तविक स्थिति रखने के बाद जनता के हित में सकारात्मक और प्रभावी निर्णय अवश्य लिए जाएंगे। पार्षदों ने दृढ़ता से कहा कि जब तक नगरवासियों की प्रमुख समस्याओं के समाधान की दिशा में कोई ठोस और स्थायी कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका जनहित संघर्ष और सत्याग्रह निरंतर जारी रहेगा।
- सबलगढ़ नगरपालिका परिषद में व्याप्त जनसमस्याओं, प्रशासनिक अव्यवस्थाओं और विकास कार्यों में बाधाओं के विरोध में पिछले 32 दिनों से जारी जनहित सत्याग्रह को लेकर निर्वाचित पार्षदों का एक प्रतिनिधिमंडल भोपाल पहुंचा। इस प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर, नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, अपर मुख्य सचिव संजय दुबे, नगरीय प्रशासन आयुक्त संकेत भांडवे और विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात कर नगर की गंभीर स्थिति से अवगत कराया। पार्षदों ने एक विस्तृत ज्ञापन सौंपकर सबलगढ़ की बदहाल व्यवस्थाओं में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। सत्याग्रह का नेतृत्व कर रहे पार्षद और भाजपा युवा मोर्चा जिला मंत्री मोहन रामजी लाल पचौरी ने बताया कि सबलगढ़ में सफाई व्यवस्था, पेयजल संकट, अधूरे विकास कार्य, प्रशासनिक पारदर्शिता की कमी और नागरिक सुविधाओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषय लंबे समय से उपेक्षित हैं। उन्होंने कहा कि इन समस्याओं के समाधान के लिए बार-बार मांग करने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई न होने के कारण जनप्रतिनिधियों को यह जनहित सत्याग्रह का मार्ग अपनाना पड़ा। ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि नगरपालिका परिषद सबलगढ़ के अध्यक्ष के विरुद्ध पूर्व में पारित राइट टू रिकॉल (अविश्वास) प्रस्ताव शासन स्तर पर विचाराधीन है, जिससे परिषद और पी.आई.सी. की बैठकों का नियमित संचालन प्रभावित हुआ है। इसका सीधा असर विकास कार्यों, वित्तीय निर्णयों और जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर पड़ रहा है, जिसका खामियाजा नगर की आम जनता भुगत रही है। पार्षदों ने मुख्यमंत्री और वरिष्ठ अधिकारियों को सौंपे ज्ञापन में मांग की कि नगरपालिका परिषद सबलगढ़ की कार्यप्रणाली की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, लंबित विकास कार्यों को शीघ्र गति दी जाए, सफाई एवं पेयजल व्यवस्था में तत्काल सुधार सुनिश्चित किया जाए तथा जनप्रतिनिधियों को प्रशासनिक अभिलेखों एवं निर्णयों की जानकारी उपलब्ध कराकर पारदर्शिता स्थापित की जाए। पार्षद कैलाश चंद भगत और असरफ खान ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन किसी व्यक्ति या राजनीतिक दल के विरुद्ध नहीं, बल्कि नगर के हजारों नागरिकों के हितों की रक्षा के लिए किया जा रहा है। उन्होंने जोर दिया कि जब नगरवासी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हों, तब जनप्रतिनिधियों का दायित्व है कि उनकी आवाज शासन के सर्वोच्च स्तर तक पहुंचाई जाए। मोहन रामजी लाल पचौरी ने कहा कि वे 32 दिनों से शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से जनहित सत्याग्रह कर रहे हैं, जिसका उद्देश्य केवल सबलगढ़ की जनता को बेहतर सफाई व्यवस्था, नियमित पेयजल, पारदर्शी प्रशासन और विकास कार्यों का लाभ दिलाना है। उन्होंने प्रदेश के शीर्ष नेतृत्व के समक्ष नगर की वास्तविक स्थिति प्रस्तुत की है और विश्वास जताया है कि जनता के हित में सकारात्मक एवं प्रभावी निर्णय अवश्य लिए जाएंगे। पार्षदों ने दृढ़ता से कहा कि जब तक नगरवासियों की प्रमुख समस्याओं के समाधान की दिशा में ठोस एवं स्थायी कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका जनहित संघर्ष और सत्याग्रह निरंतर जारी रहेगा।1
- मुरैना जिले के कैलारस में नालियों की सफाई का अभाव एक बड़ी समस्या है, साथ ही यहां पक्की नालियों की भी कमी बनी हुई है।1
- भारतीय जनता पार्टी के युवा नेता और पिछड़ा वर्ग मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष रवि कुशवाहा ने अपने जन्मदिन के उपलक्ष्य में ग्रामीणों की सहायता की है। उन्होंने अपनी ग्राम पंचायत के ग्रामीणों को आर्थिक सहायता प्रदान करते हुए चेक वितरित किए।2
- आज सुबह टेट्रा तिराहे पर एक विशेष सफाई अभियान शुरू किया गया। इस अभियान के तहत, थाने के सामने जमा विशेष गंदगी को 'चाट के ट्रैक्टर' द्वारा इकट्ठा कर उसके निस्तारण की व्यवस्था की गई। यह पूरी सफाई व्यवस्था जनपद उपाध्यक्ष बजरंग सिंह जादौन के नेतृत्व में संचालित की गई।1
- हिमाचल प्रदेश में करोड़ों रुपये की चोरी का एक बड़ा मामला सामने आया है। इस घटना के संबंध में एक व्यक्ति को उस समय पकड़ा गया, जब वह चोरी का सोना नकली प्लास्टर में छिपाकर ले जा रहा था।1
- सरकार को खुली चेतावनी! कलेक्ट्रेट पर गरजे मंत्रालयिक कर्मचारी, बोले- अब आर-पार की लड़ाई होगी सरकार को खुली चेतावनी! कलेक्ट्रेट पर गरजे मंत्रालयिक कर्मचारी, बोले- अब आर-पार की लड़ाई होगी धौलपुर में पंचायती राज संस्थाओं के मंत्रालयिक कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर कलेक्ट्रेट पर जोरदार शक्ति प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने विभाग पर पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए एसडीएम को ज्ञापन सौंपा और साफ कहा कि यदि मांगों पर जल्द निर्णय नहीं हुआ तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने जॉब चार्ट, पदोन्नति, ग्रेड पे वृद्धि, स्थानांतरण नीति, हार्ड ड्यूटी अलाउंस सहित विभिन्न मांगों को लेकर जमकर नारेबाजी की और "स्वाभिमान बचाओ आंदोलन" को मजबूत करने का संकल्प लिया।2
- धौलपुर जिले के सबसे बड़े मेडिकल कॉलेज के सरकारी अस्पताल में बायोमेडिकल कचरा प्रबंधन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जहाँ मरीजों को स्वस्थ करने का दावा किया जाता है, वहीं अस्पताल परिसर में खुले में पड़ा कचरा लगातार संक्रमण को बढ़ावा दे रहा है। यह स्थिति जिला अस्पताल में इलाज के दौरान निकलने वाले बायोमेडिकल कचरे के सुरक्षित निस्तारण के दावों की पोल खोल रही है। खुले में पड़े इस कचरे से न सिर्फ स्वच्छता व्यवस्था की कमी उजागर होती है, बल्कि संक्रमण फैलने का खतरा भी बढ़ रहा है। यहाँ तक कि बेजुबान गायें भी इस कचरे में मुँह मार रही हैं और प्लास्टिक खा रही हैं। एक अन्य गंभीर पहलू यह है कि तीन दिन पूर्व हुई बारिश के कारण कचरे का संक्रमण पास के तालाब के पानी में मिल गया है, जिससे संक्रमण और तेज़ी से फैलने की संभावना है। नियमों के अनुसार, अस्पताल में पीले, लाल और सफेद रंग के बैगों में अलग-अलग प्रकार के बायोमेडिकल कचरे का संग्रह किया जाना चाहिए, और फिर उसका वैज्ञानिक तरीके से अधिकृत एजेंसी द्वारा निस्तारण होना चाहिए। लेकिन ये तस्वीरें स्पष्ट रूप से दर्शाती हैं कि व्यवस्था में बड़ी लापरवाही बरती जा रही है। अस्पताल आने वाले मरीजों और उनके परिजनों ने परिसर में फैली गंदगी और खुले में पड़े कचरे से संक्रमण फैलने का खतरा जताया है। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब कचरा प्रबंधन के लिए स्पष्ट नियम और व्यवस्था मौजूद है, तो फिर यह लापरवाही क्यों हो रही है? सभी की निगाहें अब इस पर टिकी हैं कि अस्पताल और जिला प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है और मरीजों की सुरक्षा के लिए कचरा प्रबंधन व्यवस्था को कितना दुरुस्त कर पाता है।2
- मध्य प्रदेश के सबलगढ़ में पिछले 32 दिनों से जारी जनहित सत्याग्रह के बीच, निर्वाचित पार्षदों का एक प्रतिनिधिमंडल भोपाल पहुंचा। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर, नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय सहित अपर मुख्य सचिव संजय दुबे और नगरीय प्रशासन आयुक्त संकेत भांडवे जैसे वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात कर सबलगढ़ की बदहाल व्यवस्थाओं पर तत्काल हस्तक्षेप की मांग करते हुए एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। सत्याग्रह का नेतृत्व कर रहे पार्षद और भाजपा युवा मोर्चा जिला मंत्री मोहन रामजी लाल पचौरी ने बताया कि सबलगढ़ नगर में सफाई व्यवस्था, पेयजल संकट, अधूरे विकास कार्य, प्रशासनिक पारदर्शिता की कमी और नागरिक सुविधाओं से जुड़े महत्वपूर्ण विषय लंबे समय से उपेक्षित हैं। उन्होंने यह भी बताया कि बार-बार मांग करने के बावजूद कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं होने के कारण ही जनप्रतिनिधियों को यह जनहित सत्याग्रह शुरू करना पड़ा। ज्ञापन में इस बात पर भी जोर दिया गया कि नगरपालिका परिषद सबलगढ़ के अध्यक्ष के खिलाफ पूर्व में पारित राइट टू रिकॉल (अविश्वास) प्रस्ताव अभी शासन स्तर पर विचाराधीन है, जिससे परिषद और पी.आई.सी. की बैठकों का नियमित संचालन बाधित हुआ है। इसका सीधा असर विकास कार्यों, वित्तीय निर्णयों और जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर पड़ रहा है, जिससे आम जनता को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। पार्षदों ने मुख्यमंत्री एवं वरिष्ठ अधिकारियों से मांग की है कि नगरपालिका परिषद सबलगढ़ की कार्यप्रणाली की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। साथ ही, लंबित विकास कार्यों को शीघ्र गति देने, सफाई एवं पेयजल व्यवस्था में तत्काल सुधार सुनिश्चित करने और जनप्रतिनिधियों को प्रशासनिक अभिलेखों तथा निर्णयों की जानकारी उपलब्ध कराकर पारदर्शिता स्थापित करने की भी मांग की गई। पार्षद कैलाश चंद भगत और असरफ खान ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन किसी व्यक्ति या राजनीतिक दल के विरुद्ध नहीं, बल्कि नगर के हजारों नागरिकों के हितों की रक्षा के लिए है। उनका मानना है कि जब नगरवासी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हों, तो जनप्रतिनिधियों का दायित्व है कि उनकी आवाज शासन के सर्वोच्च स्तर तक पहुंचाई जाए। इस अवसर पर पार्षद मोहन रामजी लाल पचौरी ने दोहराया कि वे 32 दिनों से शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से सत्याग्रह कर रहे हैं, जिसका एकमात्र उद्देश्य सबलगढ़ की जनता को बेहतर सफाई व्यवस्था, नियमित पेयजल, पारदर्शी प्रशासन और विकास कार्यों का लाभ दिलाना है। उन्होंने विश्वास जताया कि प्रदेश के शीर्ष नेतृत्व के समक्ष वास्तविक स्थिति रखने के बाद जनता के हित में सकारात्मक और प्रभावी निर्णय अवश्य लिए जाएंगे। पार्षदों ने दृढ़ता से कहा कि जब तक नगरवासियों की प्रमुख समस्याओं के समाधान की दिशा में कोई ठोस और स्थायी कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका जनहित संघर्ष और सत्याग्रह निरंतर जारी रहेगा।1