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राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री से सीधे अपील करते हुए मांग की है कि वर्ष 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) की अनिवार्यता से स्थायी रूप से मुक्त किया जाए। इस मांग के पीछे हजारों शिक्षकों में गहरा असमंजस और अनिश्चितता है, खासकर उन शिक्षकों में जो सालों से अपनी सेवाएं दे रहे हैं। संगठन ने स्पष्ट किया है कि उत्तर प्रदेश में 27 जुलाई 2011 से पहले हुई सभी शिक्षकों की नियुक्तियां उस समय के नियमों और तय मानकों के अनुसार ही की गई थीं। ऐसे में, दशकों की सेवा के बाद अब नए मानदंडों को पूर्व प्रभाव से लागू करना प्राकृतिक न्याय, समानता और विधिक निश्चितता के सिद्धांतों के पूरी तरह खिलाफ है। राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ उत्तर प्रदेश की मथुरा इकाई ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री को ज्ञापन भेजकर इस मुद्दे पर हस्तक्षेप की गुहार लगाई है, विशेष रूप से उन शिक्षकों के लिए जो 2010 से पहले और उत्तर प्रदेश में टीईटी लागू होने से पहले नियुक्त हुए थे। महासंघ का तर्क है कि 23 अगस्त 2010 को एनसीटीई (राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद) द्वारा जारी अधिसूचना और उसके बाद आए अदालती फैसलों ने लंबे समय से कार्यरत शिक्षकों के बीच असुरक्षा और असमंजस का माहौल पैदा कर दिया है। संगठन ने जोर देकर कहा है कि यदि सरकार इस संबंध में सकारात्मक और स्पष्ट दिशानिर्देश जारी करती है, तो इससे न केवल हजारों शिक्षकों को बड़ी राहत मिलेगी, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में भी स्थिरता आएगी। यह महत्वपूर्ण मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री तक पहुँचा दी गई है। अब देखना होगा कि शिक्षा मंत्रालय इस गंभीर मुद्दे पर क्या रुख अपनाता है, क्योंकि यह देश और राज्य के भविष्य को संवारने वाले हजारों शिक्षकों के करियर पर मंडरा रहे कथित संकट से जुड़ा है।

11 hrs ago
user_Manish Sharma Anb News
Manish Sharma Anb News
Local News Reporter मथुरा, मथुरा, उत्तर प्रदेश•
11 hrs ago

राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री से सीधे अपील करते हुए मांग की है कि वर्ष 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) की अनिवार्यता से स्थायी रूप से मुक्त किया जाए। इस मांग के पीछे हजारों शिक्षकों में गहरा असमंजस और अनिश्चितता है, खासकर उन शिक्षकों में जो सालों से अपनी सेवाएं दे रहे हैं। संगठन ने स्पष्ट किया है कि उत्तर प्रदेश में 27 जुलाई 2011 से पहले हुई सभी शिक्षकों की नियुक्तियां उस समय के नियमों और तय मानकों के अनुसार ही की गई थीं। ऐसे में, दशकों की सेवा

के बाद अब नए मानदंडों को पूर्व प्रभाव से लागू करना प्राकृतिक न्याय, समानता और विधिक निश्चितता के सिद्धांतों के पूरी तरह खिलाफ है। राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ उत्तर प्रदेश की मथुरा इकाई ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री को ज्ञापन भेजकर इस मुद्दे पर हस्तक्षेप की गुहार लगाई है, विशेष रूप से उन शिक्षकों के लिए जो 2010 से पहले और उत्तर प्रदेश में टीईटी लागू होने से पहले नियुक्त हुए थे। महासंघ का तर्क है कि 23 अगस्त 2010 को एनसीटीई (राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद) द्वारा जारी अधिसूचना और उसके बाद आए अदालती फैसलों ने लंबे समय से

कार्यरत शिक्षकों के बीच असुरक्षा और असमंजस का माहौल पैदा कर दिया है। संगठन ने जोर देकर कहा है कि यदि सरकार इस संबंध में सकारात्मक और स्पष्ट दिशानिर्देश जारी करती है, तो इससे न केवल हजारों शिक्षकों को बड़ी राहत मिलेगी, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में भी स्थिरता आएगी। यह महत्वपूर्ण मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री तक पहुँचा दी गई है। अब देखना होगा कि शिक्षा मंत्रालय इस गंभीर मुद्दे पर क्या रुख अपनाता है, क्योंकि यह देश और राज्य के भविष्य को संवारने वाले हजारों शिक्षकों के करियर पर मंडरा रहे कथित संकट से जुड़ा है।

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    user_Pandit Rahul brijwasi
    Pandit Rahul brijwasi
    Mathura, Uttar Pradesh•
    53 min ago
  • मथुरा की राधे श्याम कॉलोनी से गौरव राजपूत ने तपन शर्मा नामक व्यक्ति के खिलाफ एक गंभीर शिकायत दर्ज कराई है। गौरव का आरोप है कि तपन सरकारी स्ट्रीट लाइट बंद करके अवैध गतिविधियों को अंजाम देता है, महिलाओं से छेड़खानी करता है, और हाल ही में उनके छोटे भाई पर हमला भी किया। गौरव और उनके परिवार ने तपन से अपनी जान का खतरा बताते हुए सख्त कार्रवाई की मांग की है। शिकायत के अनुसार, गौरव के घर के सामने मेन तिराहे पर लगी सरकारी स्ट्रीट लाइट को तपन शर्मा हर एक-दो दिन बाद बंद कर देता है। अंधेरे का फायदा उठाकर वह अपने दोस्तों के साथ गांजा व शराब का सेवन करता है और गांजे की बिक्री भी करता है। नशे की हालत में वह नग्न होकर पेशाब करता है और तिराहे पर रहने वाले लोगों की माँ-बहनों से छेड़खानी व गाली-गलौज करता है, जिससे कॉलोनी के सभी लोग बेहद परेशान हैं, लेकिन वह किसी की बात नहीं मानता। दिनांक 16/06/2026 को भी तपन ने स्ट्रीट लाइट बंद कर दी थी। जब गौरव उसे रोकने गए, तो तपन ने उनसे भी गाली-गलौज की। इसके बाद गौरव अपने घर चले गए, लेकिन तपन गौरव के छोटे भाई की कैंटीन में घुस गया और उससे पैटीज मांगने लगा। मना करने पर तपन ने गौरव के छोटे भाई को कई थप्पड़ मारे और वहां से चला गया। इसके बाद गौरव और उनका परिवार तपन के पीछे भागे, जिसके परिणामस्वरूप हाथापाई हुई, जिसमें तपन शर्मा के सिर में चोट आई। गौरव राजपूत का दावा है कि उनके परिवार में से किसी ने तपन के सिर पर वार नहीं किया; उनका मानना है कि चोट जमीन पर गिरने या तपन द्वारा खुद अपना सिर कहीं दीवार से टकराने से लगी होगी, जिसका उनके पास सबूत भी है। गौरव राजपूत ने बताया कि इन घटनाओं के बाद अब तपन शर्मा अपने दोस्तों के साथ मिलकर उन्हें और उनके परिवार को जान से मारने की साजिश रच रहा है। चूंकि गौरव और उनके बड़े भाई काम पर जाते हैं, घर पर केवल महिलाएं और छोटा भाई ही रह जाते हैं, जिससे उन्हें अपनी सुरक्षा को लेकर गंभीर खतरा महसूस हो रहा है। गौरव ने अधिकारियों से तपन शर्मा की बदतमीज़ी रोकने और उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। उन्होंने स्ट्रीट लाइट बंद करने, जबरन पैटीज लेने और अन्य बदतमीज़ियों के सबूत होने का दावा भी किया है।
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    मथुरा की राधे श्याम कॉलोनी से गौरव राजपूत ने तपन शर्मा नामक व्यक्ति के खिलाफ एक गंभीर शिकायत दर्ज कराई है। गौरव का आरोप है कि तपन सरकारी स्ट्रीट लाइट बंद करके अवैध गतिविधियों को अंजाम देता है, महिलाओं से छेड़खानी करता है, और हाल ही में उनके छोटे भाई पर हमला भी किया। गौरव और उनके परिवार ने तपन से अपनी जान का खतरा बताते हुए सख्त कार्रवाई की मांग की है।

शिकायत के अनुसार, गौरव के घर के सामने मेन तिराहे पर लगी सरकारी स्ट्रीट लाइट को तपन शर्मा हर एक-दो दिन बाद बंद कर देता है। अंधेरे का फायदा उठाकर वह अपने दोस्तों के साथ गांजा व शराब का सेवन करता है और गांजे की बिक्री भी करता है। नशे की हालत में वह नग्न होकर पेशाब करता है और तिराहे पर रहने वाले लोगों की माँ-बहनों से छेड़खानी व गाली-गलौज करता है, जिससे कॉलोनी के सभी लोग बेहद परेशान हैं, लेकिन वह किसी की बात नहीं मानता।

दिनांक 16/06/2026 को भी तपन ने स्ट्रीट लाइट बंद कर दी थी। जब गौरव उसे रोकने गए, तो तपन ने उनसे भी गाली-गलौज की। इसके बाद गौरव अपने घर चले गए, लेकिन तपन गौरव के छोटे भाई की कैंटीन में घुस गया और उससे पैटीज मांगने लगा। मना करने पर तपन ने गौरव के छोटे भाई को कई थप्पड़ मारे और वहां से चला गया। इसके बाद गौरव और उनका परिवार तपन के पीछे भागे, जिसके परिणामस्वरूप हाथापाई हुई, जिसमें तपन शर्मा के सिर में चोट आई। गौरव राजपूत का दावा है कि उनके परिवार में से किसी ने तपन के सिर पर वार नहीं किया; उनका मानना है कि चोट जमीन पर गिरने या तपन द्वारा खुद अपना सिर कहीं दीवार से टकराने से लगी होगी, जिसका उनके पास सबूत भी है।

गौरव राजपूत ने बताया कि इन घटनाओं के बाद अब तपन शर्मा अपने दोस्तों के साथ मिलकर उन्हें और उनके परिवार को जान से मारने की साजिश रच रहा है। चूंकि गौरव और उनके बड़े भाई काम पर जाते हैं, घर पर केवल महिलाएं और छोटा भाई ही रह जाते हैं, जिससे उन्हें अपनी सुरक्षा को लेकर गंभीर खतरा महसूस हो रहा है। गौरव ने अधिकारियों से तपन शर्मा की बदतमीज़ी रोकने और उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। उन्होंने स्ट्रीट लाइट बंद करने, जबरन पैटीज लेने और अन्य बदतमीज़ियों के सबूत होने का दावा भी किया है।
    user_GOURAV RAJPUT
    GOURAV RAJPUT
    मथुरा, मथुरा, उत्तर प्रदेश•
    8 hrs ago
  • राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री से सीधे अपील करते हुए मांग की है कि वर्ष 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) की अनिवार्यता से स्थायी रूप से मुक्त किया जाए। इस मांग के पीछे हजारों शिक्षकों में गहरा असमंजस और अनिश्चितता है, खासकर उन शिक्षकों में जो सालों से अपनी सेवाएं दे रहे हैं। संगठन ने स्पष्ट किया है कि उत्तर प्रदेश में 27 जुलाई 2011 से पहले हुई सभी शिक्षकों की नियुक्तियां उस समय के नियमों और तय मानकों के अनुसार ही की गई थीं। ऐसे में, दशकों की सेवा के बाद अब नए मानदंडों को पूर्व प्रभाव से लागू करना प्राकृतिक न्याय, समानता और विधिक निश्चितता के सिद्धांतों के पूरी तरह खिलाफ है। राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ उत्तर प्रदेश की मथुरा इकाई ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री को ज्ञापन भेजकर इस मुद्दे पर हस्तक्षेप की गुहार लगाई है, विशेष रूप से उन शिक्षकों के लिए जो 2010 से पहले और उत्तर प्रदेश में टीईटी लागू होने से पहले नियुक्त हुए थे। महासंघ का तर्क है कि 23 अगस्त 2010 को एनसीटीई (राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद) द्वारा जारी अधिसूचना और उसके बाद आए अदालती फैसलों ने लंबे समय से कार्यरत शिक्षकों के बीच असुरक्षा और असमंजस का माहौल पैदा कर दिया है। संगठन ने जोर देकर कहा है कि यदि सरकार इस संबंध में सकारात्मक और स्पष्ट दिशानिर्देश जारी करती है, तो इससे न केवल हजारों शिक्षकों को बड़ी राहत मिलेगी, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में भी स्थिरता आएगी। यह महत्वपूर्ण मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री तक पहुँचा दी गई है। अब देखना होगा कि शिक्षा मंत्रालय इस गंभीर मुद्दे पर क्या रुख अपनाता है, क्योंकि यह देश और राज्य के भविष्य को संवारने वाले हजारों शिक्षकों के करियर पर मंडरा रहे कथित संकट से जुड़ा है।
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    राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री से सीधे अपील करते हुए मांग की है कि वर्ष 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) की अनिवार्यता से स्थायी रूप से मुक्त किया जाए। इस मांग के पीछे हजारों शिक्षकों में गहरा असमंजस और अनिश्चितता है, खासकर उन शिक्षकों में जो सालों से अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

संगठन ने स्पष्ट किया है कि उत्तर प्रदेश में 27 जुलाई 2011 से पहले हुई सभी शिक्षकों की नियुक्तियां उस समय के नियमों और तय मानकों के अनुसार ही की गई थीं। ऐसे में, दशकों की सेवा के बाद अब नए मानदंडों को पूर्व प्रभाव से लागू करना प्राकृतिक न्याय, समानता और विधिक निश्चितता के सिद्धांतों के पूरी तरह खिलाफ है। राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ उत्तर प्रदेश की मथुरा इकाई ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री को ज्ञापन भेजकर इस मुद्दे पर हस्तक्षेप की गुहार लगाई है, विशेष रूप से उन शिक्षकों के लिए जो 2010 से पहले और उत्तर प्रदेश में टीईटी लागू होने से पहले नियुक्त हुए थे।

महासंघ का तर्क है कि 23 अगस्त 2010 को एनसीटीई (राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद) द्वारा जारी अधिसूचना और उसके बाद आए अदालती फैसलों ने लंबे समय से कार्यरत शिक्षकों के बीच असुरक्षा और असमंजस का माहौल पैदा कर दिया है। संगठन ने जोर देकर कहा है कि यदि सरकार इस संबंध में सकारात्मक और स्पष्ट दिशानिर्देश जारी करती है, तो इससे न केवल हजारों शिक्षकों को बड़ी राहत मिलेगी, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में भी स्थिरता आएगी।

यह महत्वपूर्ण मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री तक पहुँचा दी गई है। अब देखना होगा कि शिक्षा मंत्रालय इस गंभीर मुद्दे पर क्या रुख अपनाता है, क्योंकि यह देश और राज्य के भविष्य को संवारने वाले हजारों शिक्षकों के करियर पर मंडरा रहे कथित संकट से जुड़ा है।
    user_Manish Sharma Anb News
    Manish Sharma Anb News
    Local News Reporter मथुरा, मथुरा, उत्तर प्रदेश•
    11 hrs ago
  • मथुरा जनपद के व्यस्त मंडी चौराहे पर नगर निगम द्वारा जनता की सुविधा के लिए लाखों की लागत से बनाए गए एक सार्वजनिक शौचालय के ध्वस्तीकरण ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कुछ ही वर्षों पहले निर्मित इस सुविधा को अचानक ढहा दिया गया है, जिससे स्थानीय लोग अचंभित हैं और पूरे मामले पर सवाल उठा रहे हैं। जनता का कहना है कि यदि यह निर्माण गलत था तो इसे शुरू में बनाया ही क्यों गया था, और यदि यह सही था तो फिर इसे तोड़ा क्यों गया? लोग इसे सरकारी धन की खुली बर्बादी बता रहे हैं, क्योंकि उनके टैक्स का पैसा इस तरह बर्बाद हो रहा है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि विकास कार्यों में पारदर्शिता की कमी के चलते आम जनता के पैसे का दुरुपयोग किया जा रहा है। इसी पृष्ठभूमि में, जनता अब पुरजोर ढंग से मांग कर रही है कि इस ध्वस्तीकरण के पीछे के वास्तविक कारणों का खुलासा किया जाए और इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों से जवाबदेही तय की जाए। मंडी चौराहे पर बने इस सार्वजनिक शौचालय को किन वजहों से ढहाया गया, इसका स्पष्टीकरण स्थानीय लोग नगर निगम से जानना चाहते हैं।
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    मथुरा जनपद के व्यस्त मंडी चौराहे पर नगर निगम द्वारा जनता की सुविधा के लिए लाखों की लागत से बनाए गए एक सार्वजनिक शौचालय के ध्वस्तीकरण ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कुछ ही वर्षों पहले निर्मित इस सुविधा को अचानक ढहा दिया गया है, जिससे स्थानीय लोग अचंभित हैं और पूरे मामले पर सवाल उठा रहे हैं।

जनता का कहना है कि यदि यह निर्माण गलत था तो इसे शुरू में बनाया ही क्यों गया था, और यदि यह सही था तो फिर इसे तोड़ा क्यों गया? लोग इसे सरकारी धन की खुली बर्बादी बता रहे हैं, क्योंकि उनके टैक्स का पैसा इस तरह बर्बाद हो रहा है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि विकास कार्यों में पारदर्शिता की कमी के चलते आम जनता के पैसे का दुरुपयोग किया जा रहा है।

इसी पृष्ठभूमि में, जनता अब पुरजोर ढंग से मांग कर रही है कि इस ध्वस्तीकरण के पीछे के वास्तविक कारणों का खुलासा किया जाए और इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों से जवाबदेही तय की जाए। मंडी चौराहे पर बने इस सार्वजनिक शौचालय को किन वजहों से ढहाया गया, इसका स्पष्टीकरण स्थानीय लोग नगर निगम से जानना चाहते हैं।
    user_RPR NEWS TV
    RPR NEWS TV
    Court reporter Mathura, Uttar Pradesh•
    11 hrs ago
  • महावन तहसील की ग्राम पंचायत झरोदा के नगला बक्सा में एक जमीन विवाद सामने आया है, जहाँ बड़े भाई ने अपने छोटे भाई पर जमीन बेचकर उस पर कब्जा दिलाने का आरोप लगाया है। इस पूरे मामले को लेकर बड़े भाई ने सीधे एसडीएम से शिकायत की है। शिकायत मिलने के बाद, एसडीएम ने दोनों भाइयों से संबंधित जमीन के दस्तावेज प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
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    महावन तहसील की ग्राम पंचायत झरोदा के नगला बक्सा में एक जमीन विवाद सामने आया है, जहाँ बड़े भाई ने अपने छोटे भाई पर जमीन बेचकर उस पर कब्जा दिलाने का आरोप लगाया है। इस पूरे मामले को लेकर बड़े भाई ने सीधे एसडीएम से शिकायत की है। शिकायत मिलने के बाद, एसडीएम ने दोनों भाइयों से संबंधित जमीन के दस्तावेज प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
    user_Rajesh dabbu
    Rajesh dabbu
    महावन, मथुरा, उत्तर प्रदेश•
    14 hrs ago
  • मथुरा के वृंदावन स्थित आईओबी कॉलेज में प्रोफेसर सरला शर्मा पर एल.एल.बी. के छात्रों के साथ मारपीट और हाथापाई करने का आरोप लगा है। यह घटना वृंदावन मंदिर के सामने स्थित कॉलेज में हुई, जहां अत्यधिक भीड़ के कारण सुबह पेपर देने पहुंचे छात्रों को केंद्र तक पहुंचने में भी कठिनाई होती है। आरोप है कि कॉलेज के प्रिंसिपल खुद गायब रहते हैं, और प्रोफेसर सरला शर्मा अपनी महिला होने का फायदा उठाकर बच्चों के साथ गुंडागर्दी करती हैं। बताया गया है कि जिन छात्रों से मारपीट की गई, वे एल.एल.बी. के विद्यार्थी हैं और छोटे बच्चे नहीं हैं।
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    मथुरा के वृंदावन स्थित आईओबी कॉलेज में प्रोफेसर सरला शर्मा पर एल.एल.बी. के छात्रों के साथ मारपीट और हाथापाई करने का आरोप लगा है। यह घटना वृंदावन मंदिर के सामने स्थित कॉलेज में हुई, जहां अत्यधिक भीड़ के कारण सुबह पेपर देने पहुंचे छात्रों को केंद्र तक पहुंचने में भी कठिनाई होती है।

आरोप है कि कॉलेज के प्रिंसिपल खुद गायब रहते हैं, और प्रोफेसर सरला शर्मा अपनी महिला होने का फायदा उठाकर बच्चों के साथ गुंडागर्दी करती हैं। बताया गया है कि जिन छात्रों से मारपीट की गई, वे एल.एल.बी. के विद्यार्थी हैं और छोटे बच्चे नहीं हैं।
    user_Deepak Kumar
    Deepak Kumar
    Court reporter मथुरा, मथुरा, उत्तर प्रदेश•
    17 hrs ago
  • मथुरा में गोकुल रेस्टोरेंट के पास सीमेंट और बजरी से भरी एक ट्रैक्टर ट्रॉली पलट गई। इस घटना के कारण सड़क पर लंबा जाम लग गया, जिससे यातायात बाधित हुआ।
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    मथुरा में गोकुल रेस्टोरेंट के पास सीमेंट और बजरी से भरी एक ट्रैक्टर ट्रॉली पलट गई। इस घटना के कारण सड़क पर लंबा जाम लग गया, जिससे यातायात बाधित हुआ।
    user_Police Ki Aawaz News
    Police Ki Aawaz News
    मथुरा, मथुरा, उत्तर प्रदेश•
    19 hrs ago
  • उत्तर प्रदेश के मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर में दान की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठे हैं। फलाहारी महाराज ने इस संबंध में मुख्यमंत्री को एक पत्र लिखकर केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) से जाँच कराने की मांग की है। उन्होंने विशेष रूप से दान-पात्र खोलने की प्रक्रिया पर चिंता जताई है और पिछले 15 वर्षों के दान का पूरा हिसाब सार्वजनिक करने की मांग की है। अपने पत्र में, फलाहारी महाराज ने मंदिर के दान से प्राप्त धनराशि का उपयोग गरीबों के लिए एक अस्पताल बनाने का भी सुझाव दिया है। उनकी मुख्य मांग मंदिर में दान संबंधी सभी गतिविधियों में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।
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    उत्तर प्रदेश के मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर में दान की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठे हैं। फलाहारी महाराज ने इस संबंध में मुख्यमंत्री को एक पत्र लिखकर केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) से जाँच कराने की मांग की है। उन्होंने विशेष रूप से दान-पात्र खोलने की प्रक्रिया पर चिंता जताई है और पिछले 15 वर्षों के दान का पूरा हिसाब सार्वजनिक करने की मांग की है।

अपने पत्र में, फलाहारी महाराज ने मंदिर के दान से प्राप्त धनराशि का उपयोग गरीबों के लिए एक अस्पताल बनाने का भी सुझाव दिया है। उनकी मुख्य मांग मंदिर में दान संबंधी सभी गतिविधियों में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।
    user_Pandit Rahul brijwasi
    Pandit Rahul brijwasi
    Mathura, Uttar Pradesh•
    2 hrs ago
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