गाजीपुर के भांवरकोल थाना क्षेत्र के शेरपुर खुर्द गांव में रविवार सुबह एक दर्दनाक हादसा हुआ, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। गांव निवासी अमरनाथ पाल के 15 वर्षीय पुत्र रोहित उर्फ पीयुष पाल की गंगा नदी में डूबने से मौत हो गई। जानकारी के मुताबिक, रोहित प्रतिदिन की तरह सुबह करीब 7 बजे अपनी भेड़ धोने के लिए गंगा किनारे गया था। बताया जा रहा है कि इसी दौरान वह अनजाने में गहरे पानी की ओर बढ़ गया और संतुलन बिगड़ने से नदी में डूबने लगा। आसपास मौजूद लोगों ने उसे बचाने का प्रयास किया, लेकिन जब तक मदद पहुंचती, तब तक काफी देर हो चुकी थी। काफी कोशिशों के बाद किशोर को पानी से बाहर निकाला गया, लेकिन उसकी सांसें थम चुकी थीं। घटना की खबर गांव में फैलते ही शोक की लहर दौड़ गई और मृतक के घर पर ग्रामीणों तथा रिश्तेदारों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और पूरे गांव में मातम का माहौल है, एक पल में हंसता-खेलता परिवार गहरे सदमे में डूब गया है।
गाजीपुर के भांवरकोल थाना क्षेत्र के शेरपुर खुर्द गांव में रविवार सुबह एक दर्दनाक हादसा हुआ, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। गांव निवासी अमरनाथ पाल के 15 वर्षीय पुत्र रोहित उर्फ पीयुष पाल की गंगा नदी में डूबने से मौत हो गई। जानकारी के मुताबिक, रोहित प्रतिदिन की तरह सुबह करीब 7 बजे अपनी भेड़ धोने के लिए गंगा किनारे गया था। बताया जा रहा है कि इसी दौरान वह अनजाने में गहरे पानी की ओर बढ़ गया और संतुलन बिगड़ने से नदी में डूबने लगा। आसपास मौजूद लोगों ने उसे बचाने का प्रयास किया, लेकिन जब तक मदद पहुंचती, तब तक काफी देर हो चुकी थी। काफी कोशिशों के बाद किशोर को पानी से बाहर निकाला गया, लेकिन उसकी सांसें थम चुकी थीं। घटना की खबर गांव में फैलते ही शोक की लहर दौड़ गई और मृतक के घर पर ग्रामीणों तथा रिश्तेदारों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और पूरे गांव में मातम का माहौल है, एक पल में हंसता-खेलता परिवार गहरे सदमे में डूब गया है।
- गाजीपुर के भांवरकोल थाना क्षेत्र के शेरपुर खुर्द गांव में रविवार सुबह एक दर्दनाक हादसा हुआ, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। गांव निवासी अमरनाथ पाल के 15 वर्षीय पुत्र रोहित उर्फ पीयुष पाल की गंगा नदी में डूबने से मौत हो गई। जानकारी के मुताबिक, रोहित प्रतिदिन की तरह सुबह करीब 7 बजे अपनी भेड़ धोने के लिए गंगा किनारे गया था। बताया जा रहा है कि इसी दौरान वह अनजाने में गहरे पानी की ओर बढ़ गया और संतुलन बिगड़ने से नदी में डूबने लगा। आसपास मौजूद लोगों ने उसे बचाने का प्रयास किया, लेकिन जब तक मदद पहुंचती, तब तक काफी देर हो चुकी थी। काफी कोशिशों के बाद किशोर को पानी से बाहर निकाला गया, लेकिन उसकी सांसें थम चुकी थीं। घटना की खबर गांव में फैलते ही शोक की लहर दौड़ गई और मृतक के घर पर ग्रामीणों तथा रिश्तेदारों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और पूरे गांव में मातम का माहौल है, एक पल में हंसता-खेलता परिवार गहरे सदमे में डूब गया है।1
- Post by Ajit Kumar1
- मऊ जनपद में 0 से 5 वर्ष तक के बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाने के लिए एक पल्स पोलियो अभियान शुरू किया गया है। स्वास्थ्य विभाग ने इस अभियान के तहत कुल 3 लाख 25 हजार बच्चों को पोलियो की दो बूंद पिलाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। 28 जून को बूथ दिवस के अवसर पर जिले भर के निर्धारित पोलियो बूथों पर पात्र बच्चों को पोलियो ड्रॉप पिलाई गई। स्वास्थ्य विभाग ने अभिभावकों से विशेष अपील की है कि वे अपने 0 से 5 वर्ष तक के सभी बच्चों को पोलियो की यह जीवनरक्षक दो बूंद अवश्य पिलाएं, ताकि कोई भी बच्चा इससे वंचित न रहे। जिला प्रशिक्षण अधिकारी डॉ. संजय गुप्ता ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि इस अभियान को सफल बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग की टीमें पूरी मुस्तैदी से कार्य कर रही हैं। उन्होंने पोलियो उन्मूलन के लिए सभी अभिभावकों का सहयोग बेहद आवश्यक बताया और कहा कि प्रत्येक पात्र बच्चे को पोलियो की खुराक अवश्य दिलाई जानी चाहिए।1
- बीजेपी के नेता नितिन गडकरी पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं कि उन्हें जल के महत्व की जानकारी नहीं है, जिसके कारण उन्होंने देश की जनता की जान की परवाह किए बिना, अपने बेटे का व्यापार बढ़ाने के लिए इथेनोल तैयार करने वाली एक कंपनी की फाइल पर जनता से बिना सलाह लिए हस्ताक्षर कर दिए। आरोप के अनुसार, यह फैसला देश में पानी की किल्लत को बढ़ावा देने और पानी को खत्म करने के लिए पर्याप्त साबित होगा। आरोप है कि नितिन गडकरी को देश की चिंता नहीं है, बल्कि उन्हें केवल अपने बेटे का व्यवसाय ही दिख रहा है। इसमें यह भी कहा गया है कि जल जीवन है, लेकिन इसकी वास्तविक कीमत केवल एक गरीब और आम आदमी ही समझ सकता है।1
- चंदौली जिले में नहर की खुदाई का काम शुरू न होने पर किसान नेता दीनानाथ श्रीवास्तव ने एक महत्वपूर्ण बयान दिया है। यह बयान नहरों की खुदाई में हो रही देरी को लेकर आया है।1
- बलिया जिलाधिकारी के निर्देश पर अग्निशमन विभाग ने जिले भर के कोचिंग सेंटरों के खिलाफ एक बड़ा चेकिंग अभियान चलाया, जिसमें बेहद चौंकाने वाला और डराने वाला सच सामने आया है। इस जांच में पता चला है कि जिले में चल रहे सभी कोचिंग सेंटरों में से सिर्फ एक के पास ही फायर विभाग का अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) है, जबकि बाकी सभी कोचिंग संस्थान बिना किसी सुरक्षा मानक के अवैध रूप से संचालित हो रहे हैं। इस अभियान के दौरान बलिया फायर ब्रिगेड की अपनी एक गंभीर कमजोरी भी उजागर हुई है। विभाग इस समय ड्राइवरों की भारी कमी से जूझ रहा है। मुख्य अग्निशमन अधिकारी (CFO) भारतेन्दु जोशी के अनुसार, विभाग के पास कुल 10 बड़ी गाड़ियाँ, 2 फायर बुलेट और 4 वाटर मिस्ट उपलब्ध हैं, लेकिन इन सभी वाहनों को चलाने के लिए मात्र 3 ड्राइवर ही तैनात हैं। ऐसे में यह गंभीर सवाल खड़ा होता है कि यदि शहर में कोई बड़ा अग्निकांड या अन्य हादसा होता है, तो संसाधनों के बावजूद अग्निशमन विभाग समय रहते कैसे प्रभावी ढंग से प्रतिक्रिया दे पाएगा। फिलहाल, अवैध रूप से संचालित हो रहे इन कोचिंग सेंटरों पर जल्द ही कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।1
- बक्सर जिले में हम पार्टी के जिलाध्यक्ष ने भारत तिवारी हत्याकांड को लेकर खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने इस मामले में अपनी राय व्यक्त की है।1
- गाजीपुर के मोहम्मदाबाद (यूसुफपुर) की नवीन मंडी में आयोजित उत्तर प्रदेश प्रादेशिक खरवार सभा की महत्वपूर्ण बैठक में खरवार समाज ने सरकार को कड़ा अल्टीमेटम दिया है। सभा के मुख्य अतिथि कुंदन खरवार ने आरोप लगाया कि वर्ष 2018 से उत्तर प्रदेश में खरवार जनजाति के जाति प्रमाण पत्र जारी नहीं किए जा रहे हैं। इस स्थिति के कारण हजारों छात्र शिक्षा, छात्रवृत्ति, सरकारी नौकरियों और आरक्षण के संवैधानिक अधिकार से वंचित हो रहे हैं, जिससे समाज में गहरा रोष व्याप्त है। कुंदन खरवार ने सरकार को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि यदि अगले 90 दिनों के भीतर जाति प्रमाण पत्र जारी नहीं किए गए, तो गाजीपुर से लेकर लखनऊ तक एक बड़ा चक्का जाम और जनआंदोलन शुरू किया जाएगा। बैठक में समाज को एकजुट और संगठित करने पर भी विशेष जोर दिया गया ताकि अपनी मांगों को प्रभावी ढंग से उठाया जा सके। इस बैठक में चार महत्वपूर्ण प्रस्ताव भी पारित किए गए हैं। इनमें 15 दिनों के भीतर जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपना, हर ब्लॉक स्तर पर 11 सदस्यीय संघर्ष समिति का गठन करना, प्रमाण पत्र से वंचित लोगों का विस्तृत डेटा एकत्र करके हाईकोर्ट में याचिका दायर करना और संगठन को जिला से ब्लॉक स्तर तक मजबूत करना शामिल है। बैठक का समापन "जय खरवार, जय आदिवासी, जय संविधान, जय भारत" के उद्घोष के साथ हुआ, जो समाज के दृढ़ संकल्प को दर्शाता है।1