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दरभंगा जिले के गोरा बौराम से माता रानी के प्रति श्रद्धा प्रकट करते हुए एक भावुक विनती की गई है। इस प्रार्थना में भक्त हाथ जोड़कर मां से बार-बार गुहार लगा रहा है कि मां उसकी पुकार सुन लें और उसका उद्धार कर दें।
Mukesh Kumar
दरभंगा जिले के गोरा बौराम से माता रानी के प्रति श्रद्धा प्रकट करते हुए एक भावुक विनती की गई है। इस प्रार्थना में भक्त हाथ जोड़कर मां से बार-बार गुहार लगा रहा है कि मां उसकी पुकार सुन लें और उसका उद्धार कर दें।
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- बिहार के दरभंगा में दुबई की टारगेट (TARGET) कंपनी में नौकरी पाने के इच्छुक लोगों के लिए बंपर भर्ती निकाली गई है। इस भर्ती के तहत चयनित होने वाले उम्मीदवारों को 925 से 1270 AED सैलरी दी जाएगी। इसके साथ ही कंपनी की तरफ से फ्री खाना और रहने की सुविधा भी मुहैया कराई जाएगी। इस नौकरी के लिए 25 जुलाई को डायरेक्ट इंटरव्यू का आयोजन किया जा रहा है।1
- दरभंगा जिले के गोरा बौराम से माता रानी के प्रति श्रद्धा प्रकट करते हुए एक भावुक विनती की गई है। इस प्रार्थना में भक्त हाथ जोड़कर मां से बार-बार गुहार लगा रहा है कि मां उसकी पुकार सुन लें और उसका उद्धार कर दें।1
- महंगे पेट्रोल और खराब होते इंजनों के बीच अब यह बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि क्या E20 पेट्रोल गाड़ियों का दुश्मन बन चुका है। एथेनॉल ब्लेंडिंग के असली सच को लेकर चिंता जताई जा रही है कि क्या इस ईंधन के इस्तेमाल से वाहन सचमुच कबाड़ में तब्दील हो रहे हैं। लोगों के मन में इस नए पेट्रोल के कारण इंजन को पहुंचने वाले नुकसान को लेकर गंभीर आशंकाएं पैदा हो रही हैं।1
- दरभंगा के सिंहवारा में 'सुरक्षित बच्चे, समृद्ध भारत' के तहत मानव व्यापार, बालश्रम, बाल विवाह एवं बंधुआ मजदूरी के उन्मूलन के लिए एक जन-जागरूकता कार्यशाला तथा शपथ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम के दौरान सिंहवारा के थानाध्यक्ष बसंत कुमार को सुना जा सकता है, जो इस उन्मूलन अभियान और जागरूकता पहल को लेकर अपनी बात रख रहे हैं।1
- हबीबुल्लाह ने स्पष्ट किया है कि दरभंगा जिला परिषद में किसी भी काम के लिए कोई कमीशन नहीं लिया जाता है। उन्होंने पूरा भरोसा जताया है कि डीडीसी (DDC) और अध्यक्ष के नेतृत्व में जनता का अधिक से अधिक विकास किया जाएगा।1
- दरभंगा के गौरा बौराम में इस बात को लेकर गहरी उलझन जताई जा रही है कि इंसान और उसकी समझ आखिर किस दिशा में जा रही है। सोनम वांचूक के धरने, शिक्षा और ऐसे ही कई अन्य मुद्दों को लेकर सवाल खड़ा किया गया है कि आखिर वे इसके जरिए क्या कहना चाहते हैं और इन सब बातों का वास्तविक मतलब क्या है।1
- दरभंगा के पोलो मैदान स्थित धरना स्थल पर सोमवार को देश भर में हो रहे पेपर लीक और शिक्षा व परीक्षा व्यवस्था में बढ़ते भ्रष्टाचार के विरोध में 'छात्र-युवा आक्रोश दिवस' मनाया गया। आइसा, आरवाईए और भाकपा (माले) के संयुक्त आह्वान पर आयोजित इस कार्यक्रम के जरिए दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन के प्रति एकजुटता व्यक्त की गई। इस कार्यक्रम का संचालन आइसा नेता मिथिलेश कुमार ने किया, जबकि अध्यक्षता आरवाईए के राज्य सह सचिव संदीप कुमार चौधरी ने की। प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने आरोप लगाया कि केंद्र और राज्य सरकारें शिक्षा व्यवस्था को सुधारने में विफल रही हैं। लगातार हो रहे पेपर लीक, नियुक्तियों में अनियमितता और भ्रष्टाचार के कारण लाखों छात्रों और युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है। आंदोलनकारियों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफे की मांग की। इसके साथ ही पेपर लीक मामलों की निष्पक्ष जांच कराने, दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने और परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी एवं जवाबदेह बनाने की मांग उठाई गई। वक्ताओं ने बताया कि दिल्ली में आइसा की नेत्री नेहा, मनीष सहित कई छात्र पिछले 22 दिनों से भूख हड़ताल पर आंदोलनरत हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने छात्रों की मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। इस धरना कार्यक्रम में भाकपा (माले) जिला सचिव बैद्यनाथ यादव, राज्य कमिटी सदस्य शनिचरी देवी, नेयाज अहमद, अभिषेक कुमार, आर.के. साहनी, संदीप कुमार चौधरी, ओणम सिंह, नंदलाल ठाकुर, अशोक पासवान, सबा रौशनी, कामेश्वर पासवान, बसंती देवी, गंगा मंडल, मोहम्मद शौकत, प्रो. कल्याण भारती, हरिश्चंद्र पासवान, धर्मेश यादव, उमेश साह, अमरजीत पासवान, जिला परिषद सदस्य सुमित्रा देवी, केशरी यादव, नागमणि यादव, प्रिंस राज सहित कई कार्यकर्ता और छात्र-युवा उपस्थित रहे।1
- इंसान की इंसानियत उसी दिन दम तोड़ देती है जब वह किसी दूसरे की लाचारी या मजबूरी का फायदा उठाकर खुद को बहुत चालाक और होशियार समझने लगता है। किसी की भी मजबूरी पर अपनी जीत का जश्न बिल्कुल नहीं मनाना चाहिए, क्योंकि वक्त कभी भी बदल सकता है और आज जो परिस्थिति किसी और के सामने है, कल वक्त हमारा भी कड़ा इम्तिहान ले सकता है। जीवन में हमेशा इंसानियत का रास्ता ही चुनना चाहिए, क्योंकि यही एक इंसान की सबसे बड़ी और सच्ची पहचान होती है।1