_नीलगाय के शिकार मामले में दो आरोपी गिरफ्तार,न्यायिक अभिरक्षा में भेजे गए जेल_* *_दो हफ्ते पहले मिला था मृत नीलगाय का शव, जांच के बाद वन विभाग ने की कार्रवाई_* *_नीलगाय के शिकार मामले में दो आरोपी गिरफ्तार,न्यायिक अभिरक्षा में भेजे गए जेल_* *_दो हफ्ते पहले मिला था मृत नीलगाय का शव, जांच के बाद वन विभाग ने की कार्रवाई_* उमरिया । बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के धमोखर परिक्षेत्र अंतर्गत बीट बसकुटा में करीब दो सप्ताह पहले सामने आए नीलगाय के शिकार के मामले में वन विभाग ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। 07 अक्टूबर को मृत नीलगाय मिलने के बाद शुरू हुई जांच में जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर 23 अक्टूबर को दोनों आरोपियों को हिरासत में लिया गया।न्यायालय में पेश किए जाने के बाद उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया।पार्क प्रबंधन द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति की माने तो इसी माह 07 अक्टूबर 2026 को वन अमला नियमित गश्ती कर रहा था।सुबह करीब 6 बजे झिरिया हार के राजस्व क्षेत्र में एक पेड़ के नीचे घास से ढकी संदिग्ध वस्तु दिखाई दी।वनकर्मियों ने मौके पर पहुंचकर घास हटाई तो वहां नीलगाय मृत अवस्था में पड़ी मिली।घटना की सूचना तत्काल वरिष्ठ अधिकारियों को दी गई।मामले की गंभीरता को देखते हुए डॉग स्क्वाड बुलाकर छानबीन की गई और वन्यप्राणी स्वास्थ्य अधिकारी ने शव परीक्षण किया।घटना की परिस्थितियों की जांच और आरोपियों की पहचान के लिए विशेष टीम गठित की गई।इसके बाद वन विभाग ने साक्ष्यों के आधार पर नरेंद्र सिंह,पिता जगमोहन सिंह,निवासी घुन्सू तथा नागेश्वर सिंह,पिता मुकुट सिंह, निवासी सेहरा टोला,थाना कोतवाली उमरिया को गिरफ्तार किया।दोनों के विरुद्ध वन्यप्राणी संरक्षण अधिनियम,1972 की धारा 9, 39,50 एवं 51 के तहत कार्रवाई की गई है।इस मामले में फील्ड डायरेक्टर डॉ. अनुपम सहाय ने कहा कि बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व प्रबंधन वन्यजीवों की सुरक्षा और अवैध शिकार की रोकथाम के लिए लगातार निगरानी कर रहा है।वन्यजीव अपराधों में संलिप्त व्यक्तियों के विरुद्ध साक्ष्यों के आधार पर नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई की गई है।_
_नीलगाय के शिकार मामले में दो आरोपी गिरफ्तार,न्यायिक अभिरक्षा में भेजे गए जेल_* *_दो हफ्ते पहले मिला था मृत नीलगाय का शव, जांच के बाद वन विभाग ने की कार्रवाई_* *_नीलगाय के शिकार मामले में दो आरोपी गिरफ्तार,न्यायिक अभिरक्षा में भेजे गए जेल_* *_दो हफ्ते पहले मिला था मृत नीलगाय का शव, जांच के बाद वन विभाग ने की कार्रवाई_* उमरिया । बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के धमोखर परिक्षेत्र अंतर्गत बीट बसकुटा में करीब दो सप्ताह पहले सामने आए नीलगाय के शिकार के मामले में वन विभाग ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। 07 अक्टूबर को मृत नीलगाय मिलने के बाद शुरू हुई जांच में जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर 23 अक्टूबर को दोनों आरोपियों को हिरासत में लिया गया।न्यायालय में पेश किए जाने के बाद उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया।पार्क प्रबंधन द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति की माने तो इसी माह 07 अक्टूबर 2026 को वन अमला नियमित गश्ती कर रहा था।सुबह करीब 6 बजे झिरिया हार के राजस्व
क्षेत्र में एक पेड़ के नीचे घास से ढकी संदिग्ध वस्तु दिखाई दी।वनकर्मियों ने मौके पर पहुंचकर घास हटाई तो वहां नीलगाय मृत अवस्था में पड़ी मिली।घटना की सूचना तत्काल वरिष्ठ अधिकारियों को दी गई।मामले की गंभीरता को देखते हुए डॉग स्क्वाड बुलाकर छानबीन की गई और वन्यप्राणी स्वास्थ्य अधिकारी ने शव परीक्षण किया।घटना की परिस्थितियों की जांच और आरोपियों की पहचान के लिए विशेष टीम गठित की गई।इसके बाद वन विभाग ने साक्ष्यों के आधार पर नरेंद्र सिंह,पिता जगमोहन सिंह,निवासी घुन्सू तथा नागेश्वर सिंह,पिता मुकुट सिंह, निवासी सेहरा टोला,थाना कोतवाली उमरिया को गिरफ्तार किया।दोनों के विरुद्ध वन्यप्राणी संरक्षण अधिनियम,1972 की धारा 9, 39,50 एवं 51 के तहत कार्रवाई की गई है।इस मामले में फील्ड डायरेक्टर डॉ. अनुपम सहाय ने कहा कि बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व प्रबंधन वन्यजीवों की सुरक्षा और अवैध शिकार की रोकथाम के लिए लगातार निगरानी कर रहा है।वन्यजीव अपराधों में संलिप्त व्यक्तियों के विरुद्ध साक्ष्यों के आधार पर नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई की गई है।_
- नीलगाय के शिकार मामले में दो आरोपी गिरफ्तार,न्यायिक अभिरक्षा में भेजे गए जेल नीलगाय के शिकार मामले में दो आरोपी गिरफ्तार,न्यायिक अभिरक्षा में भेजे गए जेल दो हफ्ते पहले मिला था मृत नीलगाय का शव, जांच के बाद वन विभाग ने की कार्रवाई बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के धमोखर परिक्षेत्र अंतर्गत बीट बसकुटा में करीब दो सप्ताह पहले सामने आए नीलगाय के शिकार के मामले में वन विभाग ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। 07 अक्टूबर को मृत नीलगाय मिलने के बाद शुरू हुई जांच में जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर 23 अक्टूबर को दोनों आरोपियों को हिरासत में लिया गया।न्यायालय में पेश किए जाने के बाद उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया।पार्क प्रबंधन द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति की माने तो इसी माह 07 अक्टूबर 2026 को वन अमला नियमित गश्ती कर रहा था।सुबह करीब 6 बजे झिरिया हार के राजस्व क्षेत्र में एक पेड़ के नीचे घास से ढकी संदिग्ध वस्तु दिखाई दी।वनकर्मियों ने मौके पर पहुंचकर घास हटाई तो वहां नीलगाय मृत अवस्था में पड़ी मिली।घटना की सूचना तत्काल वरिष्ठ अधिकारियों को दी गई।मामले की गंभीरता को देखते हुए डॉग स्क्वाड बुलाकर छानबीन की गई और वन्यप्राणी स्वास्थ्य अधिकारी ने शव परीक्षण किया।घटना की परिस्थितियों की जांच और आरोपियों की पहचान के लिए विशेष टीम गठित की गई।इसके बाद वन विभाग ने साक्ष्यों के आधार पर नरेंद्र सिंह,पिता जगमोहन सिंह,निवासी घुन्सू तथा नागेश्वर सिंह,पिता मुकुट सिंह, निवासी सेहरा टोला,थाना कोतवाली उमरिया को गिरफ्तार किया।दोनों के विरुद्ध वन्यप्राणी संरक्षण अधिनियम,1972 की धारा 9, 39,50 एवं 51 के तहत कार्रवाई की गई है।इस मामले में फील्ड डायरेक्टर डॉ. अनुपम सहाय ने कहा कि बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व प्रबंधन वन्यजीवों की सुरक्षा और अवैध शिकार की रोकथाम के लिए लगातार निगरानी कर रहा है।वन्यजीव अपराधों में संलिप्त व्यक्तियों के विरुद्ध साक्ष्यों के आधार पर नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई की गई है।1
- अनूपपुर से शहडोल की ओर जा रहा कोयला लोड ट्रेलर सड़क किनारे बने एक कच्चे मकान की दीवार तोड़कर अंदर घुस गया। 🔴 शहडोल | बकहो से बड़ी खबर NH-43 पर नगर परिषद बकहो के काली मंदिर के पास बड़ा हादसा सामने आया। अनूपपुर से शहडोल की ओर जा रहा कोयला लोड ट्रेलर सड़क किनारे बने एक कच्चे मकान की दीवार तोड़कर अंदर घुस गया। हादसे में मकान क्षतिग्रस्त हो गया और ट्रेलर की चपेट में आने से 6 बकरियों की मौत हो गई। बताया जा रहा है कि ट्रेलर का टायर फटने से हादसा हुआ। चालक को मामूली चोट आई है। घर में रखा सामान मलबे में दब गया। सूचना मिलते ही अमलाई थाना प्रभारी भूपेंद्र मणि पांडे पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस हादसे की जांच कर रही है। 📺 ऐसी ही ताजा खबरों के लिए जुड़े रहें NEWS 24 PUBLIC TV के साथ।1
- _नीलगाय के शिकार मामले में दो आरोपी गिरफ्तार,न्यायिक अभिरक्षा में भेजे गए जेल_* *_दो हफ्ते पहले मिला था मृत नीलगाय का शव, जांच के बाद वन विभाग ने की कार्रवाई_* *_नीलगाय के शिकार मामले में दो आरोपी गिरफ्तार,न्यायिक अभिरक्षा में भेजे गए जेल_* *_दो हफ्ते पहले मिला था मृत नीलगाय का शव, जांच के बाद वन विभाग ने की कार्रवाई_* उमरिया । बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के धमोखर परिक्षेत्र अंतर्गत बीट बसकुटा में करीब दो सप्ताह पहले सामने आए नीलगाय के शिकार के मामले में वन विभाग ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। 07 अक्टूबर को मृत नीलगाय मिलने के बाद शुरू हुई जांच में जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर 23 अक्टूबर को दोनों आरोपियों को हिरासत में लिया गया।न्यायालय में पेश किए जाने के बाद उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया।पार्क प्रबंधन द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति की माने तो इसी माह 07 अक्टूबर 2026 को वन अमला नियमित गश्ती कर रहा था।सुबह करीब 6 बजे झिरिया हार के राजस्व क्षेत्र में एक पेड़ के नीचे घास से ढकी संदिग्ध वस्तु दिखाई दी।वनकर्मियों ने मौके पर पहुंचकर घास हटाई तो वहां नीलगाय मृत अवस्था में पड़ी मिली।घटना की सूचना तत्काल वरिष्ठ अधिकारियों को दी गई।मामले की गंभीरता को देखते हुए डॉग स्क्वाड बुलाकर छानबीन की गई और वन्यप्राणी स्वास्थ्य अधिकारी ने शव परीक्षण किया।घटना की परिस्थितियों की जांच और आरोपियों की पहचान के लिए विशेष टीम गठित की गई।इसके बाद वन विभाग ने साक्ष्यों के आधार पर नरेंद्र सिंह,पिता जगमोहन सिंह,निवासी घुन्सू तथा नागेश्वर सिंह,पिता मुकुट सिंह, निवासी सेहरा टोला,थाना कोतवाली उमरिया को गिरफ्तार किया।दोनों के विरुद्ध वन्यप्राणी संरक्षण अधिनियम,1972 की धारा 9, 39,50 एवं 51 के तहत कार्रवाई की गई है।इस मामले में फील्ड डायरेक्टर डॉ. अनुपम सहाय ने कहा कि बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व प्रबंधन वन्यजीवों की सुरक्षा और अवैध शिकार की रोकथाम के लिए लगातार निगरानी कर रहा है।वन्यजीव अपराधों में संलिप्त व्यक्तियों के विरुद्ध साक्ष्यों के आधार पर नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई की गई है।_2
- पाली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मरीजों की स्थिति हाल बेहाल बिरसिंहपुर पाली के स्वास्थ्य केंद्र का बुरा हाल मरीजों के लिए दवाइयों का अभाव हम बात कर रहे हैं पाली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का जो अपनी ही बेबसी का जिम्मेदार किसको ठहराए स्वयं नहीं जानता अगर डाक्टर साहब की बात करें तो डॉ. पुत्तू लाल सागर कभी-कभार आते हैं,और जो नय नवेले डाक्टर उपलब्ध है वो इतने एक्सपर्ट हैं की मैरिज की बीमारी सुनते ही मोबाइल में इलाज का तरीका और दवाईयां सर्च करने लगते हैं। अस्पताल में दबाईयां हैं तो ठीक वरना बाहर से दवाईयां लिख दी जाती है। अस्पताल का इतना बुरा हाल है कि महीनों से नहीं है रोल-बैंडेज,रोज 10से15पीस मार्केट से खरीदा जा रहा है। जो की पाली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के लिए पर्याप्त नहीं है।अगर रोल पट्टी और मलहम घट जाय तो मरीज अपने गांव बिना ड्रेसिंग के ही वापस चला जाता है।या तो फिर परिजन रोल पट्टी और मलहम खरीद कर लाते हैं तब कहीं गाव में ड्रेसिंग संभव हो पाती है हाथ पांव मोंच दर्द के लिए नहीं है क्रैक बैंडेज अधिकारी के दौरे पर ही दवाइयों और मूलभूत सुविधाओं से सजता है पाली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र। बिरसिंहपुर --पाली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की स्वास्थ्य व्यवस्थाएं भगवान भरोसे चल रही हैं। ग्रामीणों और मरीजों ने आरोप लगाया है कि यहां पदस्थ स्वास्थ्य कर्मचारी पुत्तू लाल सागर नियमित रूप से अस्पताल नहीं आते हैं, कभी-कभार ही ड्यूटी पर दिखाई देते हैं। इससे मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। *महीनों से नहीं है रोल-बैंडेज, पट्टी तक के लिए भटकते हैं मरीज* सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सबसे बुनियादी जरूरत रोल, बैंडेज और पट्टी ही महीनों से नहीं है। चोट लगने पर, एक्सीडेंट या छोटी सर्जरी के बाद मरीजों को बाहर मेडिकल स्टोर से पट्टी खरीदनी पड़ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि शासन लाखों रुपये दवाइयों के लिए भेजता है, लेकिन पाली अस्पताल में हमेशा दवाइयों का टोटा बना रहता है। रजिस्टर में दवाइयां चढ़ा दी जाती हैं, लेकिन स्टॉक में नहीं मिलतीं। *साहब आने वाले हैं, अस्पताल चमकाओ अभियान* स्थानीय लोगों ने सबसे बड़ा आरोप दिखावे को लेकर लगाया है। बताया गया कि जब कभी कलेक्टर, एसडीएम, सीएमएचओ विधायक मंत्री सांसद या जिला स्तर के अधिकारियों का दौरा होता है, तो एक दिन पहले ही पूरे स्टाफ को सूचना दे दी जाती है। दौरे वाले दिन पूरा स्टाफ तय ड्रेस में, टोपी और नेम प्लेट के साथ तैयार मिलता है। पूरे अस्पताल की साफ-सफाई, चादरें बदलना, कचरा हटाना और दवाइयों को सजाकर रख दिया जाता है। लेकिन जैसे ही अधिकारी जाते हैं, अगले दिन से फिर वही पुराना हाल हो जाता है। स्टाफ बिना ड्रेस के अस्पताल में दिखाई देते हैं, अस्पताल में गंदगी फैली नजर आती है, बेड पर गंदी चादरें होती है या फिर बेडशीट और तकिया न होतीही नहीं है और मरीजों द्वारा तकिया या चादर मांगने पर बदसलूकी आम बात है। ग्रामीणों का कहना है कि यह यह सब साफ सफाई दवाइयां का स्टॉक डॉक्टर का टाइम से मिलना सिर्फ अधिकारियों को दिखाने का नाटक है। *पाली क्षेत्र की 70 हजार आबादी प्रभावित* बिरसिंहपुर पाली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर पाली नगर सहित 44 से ज्यादा ग्राम पंचायतों के लगभग 50.000 हजार लोग निर्भर हैं। यहां रोजाना 150 से 200 मरीज ओपीडी में आते हैं, लेकिन डॉक्टर और स्टाफ की लापरवाही के कारण उन्हें जिला अस्पताल उमरिया या शहडोल रेफर कर दिया जाता है। गरीब आदिवासी मरीजों के पास न तो पैसे हैं और न ही साधन, मजबूरी में झोलाछाप डॉक्टरों के पास जाना पड़ता है। जिसके कारण संपूर्ण पाली क्षेत्र में झोलाछाप डॉक्टरों का बोलबाला है। *जांच की मांग* ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर उमरिया और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी से मांग की है कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पाली का औचक जांच कराई जाए, दवा स्टॉक और उपस्थिति रजिस्टर का मिलान किया जाए। विशेष रूप से कर्मचारी और डाक्टर पुत्तू लाल सागर की उपस्थिति और दवाइयों की कमी की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए। ग्रामीणों ने यह भी मांग की है कि जांच बिना पूर्व सूचना के की जाए, तभी अस्पताल की असली हकीकत सामने आ पाएगी। अगर समय रहते व्यवस्था मांग की है1
- उमरिया में ‘बाबा महाकाल’ का तांडव! डंडे लेकर विवाद करते कर्मचारी, आखिर किसका संरक्षण? चपहा में रेत परिवहन पर बवाल, सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल; थाना प्रभारी ने माना, कंपनी की निगरानी चौकी का सरकारी दस्तावेजों में पंजीयन नहीं उमरिया। नाम बाबा महाकाल और काम को लेकर उठते गंभीर सवाल! उमरिया जिले में रेत ठेका कंपनी ‘बाबा महाकाल’ से जुड़े कर्मचारियों का विवाद अब चर्चा का विषय बन गया है। कोतवाली थाना क्षेत्र के चपहा में रेत परिवहन को लेकर हुए विवाद का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में कुछ लोग हाथों में डंडे लेकर विवाद करते दिखाई दे रहे हैं। इस घटनाक्रम ने जिले में रेत कारोबार की निगरानी, कंपनी के कर्मचारियों की भूमिका और जिम्मेदार विभागों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या रेत परिवहन की निगरानी के नाम पर कोई भी कंपनी अपनी अलग व्यवस्था खड़ी कर सकती है? क्या उसके कर्मचारी खुद ही विवाद का हिस्सा बनेंगे और फिर भी व्यवस्था पर सवाल नहीं उठेंगे? जिला मुख्यालय के नजदीक चपहा में सामने आया यह मामला प्रशासनिक निगरानी की हकीकत पर सवाल खड़ा कर रहा है। डंडे लेकर विवाद, कानून का डर कहां? जानकारी के अनुसार, बुधवार सुबह करीब आठ बजे चपहा में रेत परिवहन को लेकर विवाद हुआ। वायरल वीडियो में कुछ लोग हाथों में डंडे लेकर बहस और विवाद करते नजर आते हैं। वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, इसलिए इसमें दिखाई दे रहे लोगों की भूमिका और विवाद की पूरी परिस्थितियों की जांच जरूरी है। लेकिन इतना जरूर है कि यदि रेत परिवहन को लेकर विवाद की स्थिति बनती है, तो उसका निपटारा कानून के दायरे में होना चाहिए। किसी भी कंपनी के कर्मचारी को कानून अपने हाथ में लेने का अधिकार नहीं है। यदि वीडियो में दिखाई दे रही गतिविधियों में मारपीट, धमकी या किसी अन्य अपराध की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए। चौकी का पंजीयन नहीं, फिर किस आधार पर चल रही व्यवस्था? इस पूरे मामले का सबसे गंभीर पहलू चपहा में कंपनी द्वारा बनाई गई कथित निगरानी चौकी है। कोतवाली थाना प्रभारी मदनलाल मरावी के अनुसार, रेत परिवहन को लेकर दोनों पक्षों की शिकायतें मिली हैं और जांच जारी है। उन्होंने यह भी बताया कि कंपनी की ओर से बनाई गई निगरानी चौकी का सरकारी कागजों में पंजीयन नहीं है। यह जानकारी कई सवाल खड़े करती है। यदि चौकी का पंजीयन नहीं है, तो उसकी वैधानिक स्थिति क्या है? वहां बैठने वाले कर्मचारियों को क्या अधिकार प्राप्त हैं? क्या वे केवल परिवहन पर नजर रखने के लिए तैनात हैं या वाहनों को रोकने और उनसे पूछताछ करने जैसी गतिविधियां भी करते हैं? इन सवालों का जवाब कंपनी और संबंधित विभाग को देना चाहिए। जब चौकी की वैधानिक स्थिति पर ही सवाल है, तो उसकी निगरानी और संचालन की जिम्मेदारी किसकी है? जिला खनिज अधिकारी की जवाबदेही कहां? रेत का कारोबार खनिज विभाग की निगरानी और निर्धारित नियमों के तहत संचालित होना चाहिए। ऐसे में जिला मुख्यालय के नजदीक कंपनी की कथित निगरानी चौकी के पंजीयन पर सवाल उठना जिला खनिज अधिकारी की जिम्मेदारी को भी सामने लाता है। क्या खनिज विभाग को इस चौकी की जानकारी थी? क्या विभाग ने मौके पर जाकर जांच की? क्या कंपनी को ऐसी व्यवस्था संचालित करने की अनुमति है? यदि अनुमति है, तो उसकी शर्तें क्या हैं? और यदि अनुमति नहीं है, तो अब तक क्या कार्रवाई की गई? इन सवालों पर विभाग की चुप्पी या जवाब देने में देरी जनता के संदेह को और बढ़ा सकती है। खनिज विभाग को स्पष्ट करना चाहिए कि कंपनी की निगरानी व्यवस्था किन नियमों के तहत संचालित हो रही है। केवल ठेका दे देना विभाग की जिम्मेदारी का अंत नहीं हो सकता। ठेकेदार और उससे जुड़े कर्मचारियों की गतिविधियों पर निगरानी रखना भी प्रशासनिक जवाबदेही का हिस्सा है। मुख्यालय के पास यह हाल, दूरस्थ इलाकों में कौन देखेगा? जब जिला मुख्यालय के आसपास ही रेत परिवहन को लेकर विवाद और कथित अपंजीकृत निगरानी चौकी का मामला सामने आ रहा है, तो दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में निगरानी की स्थिति को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। वहां यदि ग्रामीणों और कंपनी के कर्मचारियों के बीच विवाद होता है, तो उनकी शिकायत कौन सुनेगा और मौके पर कार्रवाई कौन सुनिश्चित करेगा? रेत परिवहन व्यवस्था का उद्देश्य नियमों के तहत कारोबार सुनिश्चित करना है, न कि ऐसी स्थिति पैदा करना जिसमें कंपनी के कर्मचारियों और आम लोगों के बीच टकराव हो। यदि किसी पक्ष ने नियम तोड़े हैं, तो कार्रवाई साक्ष्यों और कानून के आधार पर होनी चाहिए। अब पुलिस और खनिज विभाग को देना होगा जवाब फिलहाल पुलिस के अनुसार, दोनों पक्षों की शिकायतों की जांच जारी है। ऐसे में जांच में वायरल वीडियो, कथित निगरानी चौकी की स्थिति और विवाद में शामिल लोगों की भूमिका को स्पष्ट करना जरूरी है। दूसरी ओर, जिला खनिज अधिकारी को भी चौकी के पंजीयन और कंपनी की निगरानी व्यवस्था पर अपना पक्ष सामने रखना चाहिए। सवाल सीधा है: रेत का कारोबार नियमों से चलेगा या कंपनी की अपनी व्यवस्था से? उमरिया में सामने आए इस मामले में अब केवल जांच की बात पर्याप्त नहीं होगी। जनता यह जानना चाहती है कि चौकी किस आधार पर संचालित हो रही थी, विवाद की जिम्मेदारी किसकी है और नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर कार्रवाई कब होगी।1
- नीलगाय के शिकार में दो आरोपी गिरफ्तार, जेल भेजे गए-दो सप्ताह पहले मिला था मृत नीलगाय का शव, जांच और साक्ष्यों के आधार पर वन विभाग की कार्रवाई। नीलगाय के शिकार में दो आरोपी गिरफ्तार, जेल भेजे गए दो सप्ताह पहले मिला था मृत नीलगाय का शव, जांच और साक्ष्यों के आधार पर वन विभाग की कार्रवाई आशुतोष त्रिपाठी/जनचिंगारी-उमरिया। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के धमोखर परिक्षेत्र अंतर्गत बीट बसकुटा में नीलगाय की संदिग्ध मौत के मामले में वन विभाग ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। 7 अक्टूबर को मृत नीलगाय का शव मिलने के बाद शुरू हुई जांच के क्रम में 23 अक्टूबर को दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया। पेड़ के नीचे घास से ढका मिला था शव पार्क प्रबंधन की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, 7 अक्टूबर 2026 को वन अमला नियमित गश्त पर था। सुबह करीब 6 बजे झिरिया हार के राजस्व क्षेत्र में एक पेड़ के नीचे घास से ढकी संदिग्ध वस्तु दिखाई दी। वनकर्मियों ने मौके पर पहुंचकर जांच की तो वहां नीलगाय मृत अवस्था में पड़ी मिली। सूचना तत्काल वरिष्ठ अधिकारियों को दी गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए डॉग स्क्वाड बुलाकर छानबीन की गई। वन्यप्राणी स्वास्थ्य अधिकारी ने मृत नीलगाय का शव परीक्षण किया। घटना की परिस्थितियों की जांच और आरोपियों की पहचान के लिए विशेष टीम गठित की गई। जांच के दौरान जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर वन विभाग ने कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया। वन्यप्राणी संरक्षण अधिनियम के तहत कार्रवाई गिरफ्तार आरोपियों की पहचान नरेंद्र सिंह, पिता जगमोहन सिंह, निवासी घुन्सू तथा नागेश्वर सिंह, पिता मुकुट सिंह, निवासी सेहरा टोला, थाना कोतवाली उमरिया के रूप में हुई है। दोनों के विरुद्ध वन्यप्राणी संरक्षण अधिनियम, 1972 की धारा 9, 39, 50 एवं 51 के तहत कार्रवाई की गई है। न्यायालय में पेश किए जाने के बाद उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया। वन्यजीवों की सुरक्षा पर प्रबंधन का जोर बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर डॉ. अनुपम सहाय के अनुसार, वन्यजीवों की सुरक्षा और अवैध शिकार की रोकथाम के लिए प्रबंधन लगातार निगरानी कर रहा है। वन्यजीव अपराधों में संलिप्त व्यक्तियों के विरुद्ध साक्ष्यों के आधार पर नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।2
- शहडोल 📍कलेक्टर श्री पार्थ जायसवाल ने धान पंजीयन के संबंध में दी जानकारी1
- 370.97 लाख से छात्राओं के लिए बन रहा छात्रा वास या मौत का घर बन रहे 370.97 लाख के बालक छात्रावास बच्चों के लिए आवास या मौत का घर छात्राओं और छात्रो के लिए बन रहे भवन निर्माण से पहले ही भ्रष्टाचार, टेडे पिलर मिट्टी में दफन अवैध मुरुम से कर दी फिलिंग *बिरसिंहपुर पाली, उमरिया जिले की सबसे बड़ी शैक्षणिक परियोजनाओं में से एक, बिरसिंहपुर पाली के एकलव्य स्कूल के पास लोक निर्माण विभाग / PIU द्वारा बन रहे 50 सीटर बालक छात्रावास निर्माण में काम शुरू होने से पहले ही बड़ा भ्रष्टाचार सामने आया है स्वीकृत वर्ष 2025-26 और स्वीकृत राशि 370.97 लाख रुपये वाले इस छात्रावास के बेस में ही घोर लापरवाही बरती गई है। पिलर को ही मिट्टी में दफना दिया, सिंचाई कैसे होगी नियमानुसार पिलर और कॉलम बनने के बाद उसकी 21 दिन तक लगातार पानी से तराई (सिंचाई) करना अनिवार्य है, तभी कंक्रीट में मजबूती आती है। लेकिन यहां ठेकेदार ने केशर, टस्ट और पिलर बनाते ही उसे जेसीबी से निकली मिट्टी और मुरुम से ढकवा दिया। ग्रामीणों का आरोप है कि जब पिलर ही मिट्टी में दफन हो गए तो उनकी तराई कैसे हो पाएगी? इससे पूरी बिल्डिंग की उम्र और गुणवत्ता पर सवाल खड़ा हो गया है। यह सीधे-सीधे लाखों रुपये के भवन के साथ खिलवाड़ है। *जेसीबी से लेवलिंग में पिलर टेढ़े हुए:* दूसरी सबसे बड़ी लापरवाही यह कि बेस के चारों तरफ बराबर करने के लिए ठेकेदार ने भारी भरकम जेसीबी मशीन चला दी। जेसीबी के धक्के से कई पिलर मौके पर ही टेढ़े हो गए हैं। मौके की फोटो में साफ दिख रहा है कि पिलर अपनी जगह से खिसक गए हैं। ऐसे टेढ़े पिलर पर 2 मंजिला छात्रावास बनाना बच्चों की जान से खिलवाड़ है। अवैध मुरुम से फिलिंग, प्रशासन बना मूकदर्शक सबसे बड़ा मामला अवैध उत्खनन का है। ठेकेदार ने बाहर से मुरुम खरीदने के बजाय छात्रावास से महज 50 मीटर की दूरी पर शासकीय खाता नंबर 582/1 ग्राम बरबसपुर की जमीन से 916.5 घन मीटर मुरुम का अवैध खनन करा लिया। 23/10/2026 को एसडीएम से शिकायत के बाद तहसीलदार, खनिज विभाग और कार्यपालिक मजिस्ट्रेट मौके पर पहुंचे। मौके पर दो ट्रैक्टर क्रमांक MP54A 6751 और MP18AB 3009 और एक जेसीबी MP54A8682 मुरुम खोदे हुए ठूली हुई मुरूम रंगे हाथों पकड़ी गई। ठेकेदार के मुंशी, जेसीबी मालिक और ट्रैक्टर मालिक प्रेमा नायक ने पंचनामे में कबूल भी किया कि मुरुम इसी छात्रावास की फिलिंग के लिए खोदी जा रही है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि मौके पर मौजूद तहसीलदार ने कहा कि हम केवल पंचनामा बना सकते हैं, खाली गाड़ियों की जप्ती नहीं बना सकते। जबकि नियमानुसार अवैध खनन में लगी जेसीबी और ट्रैक्टरों पर खनिज अधिनियम के तहत 2 से 5 लाख तक का जुर्माना और FIR का प्रावधान है। केवल पंचनामा बनाकर छोड़ देना, पाली तहसील में ठेकेदारों को खुला संरक्षण देने जैसा है। *पाली तहसील में ठेकेदारों का पुराना खेल:* स्थानीय लोगों का आरोप है कि पाली तहसील में यह कोई नया मामला नहीं है। हर बड़े ठेके में ठेकेदार इसी तरह शासकीय जमीन से अवैध मुरुम, गिट्टी खोदकर अपना काम पूरा कर चले जाते हैं और बाद में बिल पूरा पास करा लेते हैं। खनिज, राजस्व,PIU और PWD विभाग की मिलीभगत से किसी भी ठेकेदार पर आज तक बड़ी कार्रवाई नहीं हुई है। अब सवाल यह है कि क्या कलेक्टर उमरिया और लोक निर्माण विभाग के कार्यपालन यंत्री इस 370.97 लाख के छात्रावास की गुणवत्ता की जांच कराएंगे? क्या टेढ़े पिलरों को तोड़कर दोबारा बनाया जाएगा? और क्या अवैध मुरुम खनन पर ठेकेदार से रॉयल्टी वसूल कर उसकी गाड़ियां जप्त की जाएंगी?3