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बिहार के जोगबनी में बजरंग दल के संयोजक संजीव साह पर कथित फायरिंग की घटना सामने आई है, जिसमें वे नेता चौक पर बाल-बाल बच गए। इस मामले में दो नामजद आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। पुलिस अब पूरे मामले की जांच करने के साथ ही आरोपियों की गिरफ्तारी में जुट गई है।
CD News
बिहार के जोगबनी में बजरंग दल के संयोजक संजीव साह पर कथित फायरिंग की घटना सामने आई है, जिसमें वे नेता चौक पर बाल-बाल बच गए। इस मामले में दो नामजद आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। पुलिस अब पूरे मामले की जांच करने के साथ ही आरोपियों की गिरफ्तारी में जुट गई है।
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- बिहार के जोगबनी में बजरंग दल के संयोजक संजीव साह पर कथित फायरिंग की घटना सामने आई है, जिसमें वे नेता चौक पर बाल-बाल बच गए। इस मामले में दो नामजद आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। पुलिस अब पूरे मामले की जांच करने के साथ ही आरोपियों की गिरफ्तारी में जुट गई है।1
- बिहार के सहरसा में एक बांध टूट गया है। बांध टूटने की इस घटना के कारण कई घर पानी में बह गए हैं।1
- मधेपुरा जिले के कुमारखंड प्रखंड क्षेत्र में मानसून के आने के बाद भी कम बारिश होने के कारण धान की रोपाई का काम बेहद सुस्त चल रहा है। प्रखंड में इस बार कुल 13,999 हेक्टेयर भूमि में धान रोपाई का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, लेकिन 15 जुलाई तक महज 48 प्रतिशत खेतों में ही रोपाई पूरी हो सकी है। सामान्य तौर पर इस अवधि तक कम से कम 60 से 80 प्रतिशत खेतों में धान की रोपाई हो जानी चाहिए थी, पर मानसून के बदले रुख और नियमित अंतराल पर बारिश न होने से किसान काफी चिंतित हैं। खेतों में बिचड़ा पूरी तरह तैयार है, लेकिन बारिश की कमी और उमस व तेज धूप के कारण मिट्टी में नमी बेहद कम है। सिंचाई के लिए की गई वैकल्पिक व्यवस्थाएं भी दम तोड़ रही हैं; नहरों में पानी नहीं है और अधिकांश किसान नहर के पानी से वंचित हैं। इसके अलावा, हर जगह कृषि फीडर से बिजली नहीं पहुंच पाई है, और जहां बिजली आपूर्ति उपलब्ध भी है, वहां बिजली का सही लाभ किसानों को नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में किसान महंगाई की मार झेलते हुए मोटर और डीजल पंप सेट के सहारे जैसे-तैसे धान की रोपाई कर रहे हैं। परेशान किसानों ने पटवन के लिए सरकारी सहायता राशि प्रदान करने, सरकारी नलकूपों व बिजली व्यवस्था को दुरुस्त करने और नहरों में पानी उपलब्ध कराने की मांग की है। दूसरी ओर, कृषि विभाग के बीएओ दीपक कुमार और कृषि कोर्डिनेटर सुमन सौरभ ने भी पुष्टि की है कि क्षेत्र में अब तक केवल 48 प्रतिशत रोपाई ही संभव हो पाई है। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष पूरे प्रखंड क्षेत्र में 13,800 हेक्टेयर भूमि पर धान की खेती हुई थी। अधिकारियों का मानना है कि यद्यपि कम बारिश से काम प्रभावित हुआ है, फिर भी किसान धीरे-धीरे रोपाई के काम में जुट गए हैं और उम्मीद है कि 30 जुलाई तक काफी हद तक लक्ष्य हासिल कर लिया जाएगा।1
- Post by Guddu manjhi3
- मधेपुरा में टीबी के खिलाफ 'मिशन 100 डेज' के तहत एक बड़ा अभियान चलाया जा रहा है, जिसका उद्देश्य टीबी मुक्त बिहार के लक्ष्य को हासिल करना है। इस अभियान के तहत स्वास्थ्य विभाग की टीमें गांव-गांव और घर-घर जाकर लोगों की स्क्रीनिंग और जांच कर रही हैं। अब तक जिले में 1 लाख 15 हजार से अधिक लोगों की जांच पूरी की जा चुकी है, जबकि विभाग ने कुल 1 लाख 84 हजार 629 लोगों की स्क्रीनिंग का लक्ष्य तय किया है। स्क्रीनिंग के दौरान अब तक कुल 2,693 टीबी मरीजों की पहचान की गई है, जिनका सरकारी अस्पतालों में पूरी तरह से नि:शुल्क इलाज चल रहा है। इन मरीजों को बेहतर पोषण के लिए डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से सीधे उनके बैंक खातों में ₹1,000 की सहायता राशि भेजी जा रही है। इसके साथ ही, 570 मरीजों को फूड बास्केट भी उपलब्ध कराया गया है। अभियान को प्रभावी बनाने के लिए स्वास्थ्य कर्मी पोर्टेबल एक्स-रे मशीनों के साथ गांवों में पहुंच रहे हैं। अब तक जिले में 14,330 लोगों का एक्स-रे किया जा चुका है और 10,700 स्पुटम सैंपल जांच के लिए एकत्र किए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग के जिला कार्यक्रम प्रबंधक प्रिंस कुमार के अनुसार, मधेपुरा में कुल 109 हाई-रिस्क गांवों को चिन्हित किया गया था, जिनमें से 94 गांवों में स्क्रीनिंग का काम पूरा हो चुका है और बचे हुए गांवों में टीमें लगातार काम कर रही हैं। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि यदि किसी को दो सप्ताह से अधिक समय से लगातार खांसी, बुखार, तेजी से वजन घटना, कमजोरी या रात में पसीना आने जैसी शिकायत हो, तो वे इसे नजरअंदाज न करें और नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराएं क्योंकि समय पर इलाज से टीबी पूरी तरह ठीक हो सकती है।2
- अररिया जिले के जोगबनी में भाजपा कार्यकर्ता की ओर से सरकार से यह मांग की गई है कि दरगाहों, मस्जिदों और मदरसों के चंदे का हिसाब होना चाहिए, क्योंकि यह देश के हित में सही कदम होगा। कार्यकर्ता का कहना है कि सिर्फ एक वर्ग पर निशाना साधना संविधान के पूरी तरह खिलाफ है। उन्होंने यह भी कहा कि चोरी तो अल्लाह के घर में भी हुई है। उनका आरोप है कि भारत में मस्जिदों के पैसे का कोई हिसाब-किताब नहीं होता है। पिछले 70 सालों से मंदिरों की तरह न तो कोई टैक्स दिया जाता है और न ही पीड़ितों को दान या चंदा दिया जाता है। इसी कारण गरीब मुस्लिम समाज को अपना पेट भरने के लिए मंदिरों के भंडारे की आस लगानी पड़ती है।2
- सुपौल के छातापुर से एक बेहद गंभीर और आक्रोशित करने वाला बयान सामने आया है। इस बयान में सीधे तौर पर पिता पर आरोप लगाते हुए गहरा अविश्वास जाहिर किया गया है कि उसका बाप किसी दिन सिर्फ एक कुर्सी के लिए उसे भी कुर्बान कर देगा। कुर्सी के लिए अपनों की बलि चढ़ाने की इस आशंका वाले बयान में गहरा दर्द और तीखा गुस्सा साफ दिखाई दे रहा है।1