मधेपुरा में टीबी के खिलाफ 'मिशन 100 डेज' के तहत एक बड़ा अभियान चलाया जा रहा है, जिसका उद्देश्य टीबी मुक्त बिहार के लक्ष्य को हासिल करना है। इस अभियान के तहत स्वास्थ्य विभाग की टीमें गांव-गांव और घर-घर जाकर लोगों की स्क्रीनिंग और जांच कर रही हैं। अब तक जिले में 1 लाख 15 हजार से अधिक लोगों की जांच पूरी की जा चुकी है, जबकि विभाग ने कुल 1 लाख 84 हजार 629 लोगों की स्क्रीनिंग का लक्ष्य तय किया है। स्क्रीनिंग के दौरान अब तक कुल 2,693 टीबी मरीजों की पहचान की गई है, जिनका सरकारी अस्पतालों में पूरी तरह से नि:शुल्क इलाज चल रहा है। इन मरीजों को बेहतर पोषण के लिए डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से सीधे उनके बैंक खातों में ₹1,000 की सहायता राशि भेजी जा रही है। इसके साथ ही, 570 मरीजों को फूड बास्केट भी उपलब्ध कराया गया है। अभियान को प्रभावी बनाने के लिए स्वास्थ्य कर्मी पोर्टेबल एक्स-रे मशीनों के साथ गांवों में पहुंच रहे हैं। अब तक जिले में 14,330 लोगों का एक्स-रे किया जा चुका है और 10,700 स्पुटम सैंपल जांच के लिए एकत्र किए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग के जिला कार्यक्रम प्रबंधक प्रिंस कुमार के अनुसार, मधेपुरा में कुल 109 हाई-रिस्क गांवों को चिन्हित किया गया था, जिनमें से 94 गांवों में स्क्रीनिंग का काम पूरा हो चुका है और बचे हुए गांवों में टीमें लगातार काम कर रही हैं। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि यदि किसी को दो सप्ताह से अधिक समय से लगातार खांसी, बुखार, तेजी से वजन घटना, कमजोरी या रात में पसीना आने जैसी शिकायत हो, तो वे इसे नजरअंदाज न करें और नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराएं क्योंकि समय पर इलाज से टीबी पूरी तरह ठीक हो सकती है।
मधेपुरा में टीबी के खिलाफ 'मिशन 100 डेज' के तहत एक बड़ा अभियान चलाया जा रहा है, जिसका उद्देश्य टीबी मुक्त बिहार के लक्ष्य को हासिल करना है। इस अभियान के तहत स्वास्थ्य विभाग की टीमें गांव-गांव और घर-घर जाकर लोगों की स्क्रीनिंग और जांच कर रही हैं। अब तक जिले में 1 लाख 15 हजार से अधिक लोगों की जांच पूरी की जा चुकी है, जबकि विभाग ने कुल 1 लाख 84 हजार 629 लोगों की स्क्रीनिंग का लक्ष्य तय किया है। स्क्रीनिंग के दौरान अब तक कुल 2,693 टीबी मरीजों की पहचान की गई है, जिनका सरकारी अस्पतालों में पूरी तरह से नि:शुल्क इलाज चल रहा है। इन मरीजों को बेहतर पोषण के लिए डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से सीधे उनके बैंक खातों में ₹1,000 की सहायता राशि भेजी जा रही है। इसके साथ ही, 570 मरीजों को फूड बास्केट भी उपलब्ध कराया
गया है। अभियान को प्रभावी बनाने के लिए स्वास्थ्य कर्मी पोर्टेबल एक्स-रे मशीनों के साथ गांवों में पहुंच रहे हैं। अब तक जिले में 14,330 लोगों का एक्स-रे किया जा चुका है और 10,700 स्पुटम सैंपल जांच के लिए एकत्र किए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग के जिला कार्यक्रम प्रबंधक प्रिंस कुमार के अनुसार, मधेपुरा में कुल 109 हाई-रिस्क गांवों को चिन्हित किया गया था, जिनमें से 94 गांवों में स्क्रीनिंग का काम पूरा हो चुका है और बचे हुए गांवों में टीमें लगातार काम कर रही हैं। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि यदि किसी को दो सप्ताह से अधिक समय से लगातार खांसी, बुखार, तेजी से वजन घटना, कमजोरी या रात में पसीना आने जैसी शिकायत हो, तो वे इसे नजरअंदाज न करें और नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराएं क्योंकि समय पर इलाज से टीबी पूरी तरह ठीक हो सकती है।
- मधेपुरा में टीबी के खिलाफ 'मिशन 100 डेज' के तहत एक बड़ा अभियान चलाया जा रहा है, जिसका उद्देश्य टीबी मुक्त बिहार के लक्ष्य को हासिल करना है। इस अभियान के तहत स्वास्थ्य विभाग की टीमें गांव-गांव और घर-घर जाकर लोगों की स्क्रीनिंग और जांच कर रही हैं। अब तक जिले में 1 लाख 15 हजार से अधिक लोगों की जांच पूरी की जा चुकी है, जबकि विभाग ने कुल 1 लाख 84 हजार 629 लोगों की स्क्रीनिंग का लक्ष्य तय किया है। स्क्रीनिंग के दौरान अब तक कुल 2,693 टीबी मरीजों की पहचान की गई है, जिनका सरकारी अस्पतालों में पूरी तरह से नि:शुल्क इलाज चल रहा है। इन मरीजों को बेहतर पोषण के लिए डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से सीधे उनके बैंक खातों में ₹1,000 की सहायता राशि भेजी जा रही है। इसके साथ ही, 570 मरीजों को फूड बास्केट भी उपलब्ध कराया गया है। अभियान को प्रभावी बनाने के लिए स्वास्थ्य कर्मी पोर्टेबल एक्स-रे मशीनों के साथ गांवों में पहुंच रहे हैं। अब तक जिले में 14,330 लोगों का एक्स-रे किया जा चुका है और 10,700 स्पुटम सैंपल जांच के लिए एकत्र किए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग के जिला कार्यक्रम प्रबंधक प्रिंस कुमार के अनुसार, मधेपुरा में कुल 109 हाई-रिस्क गांवों को चिन्हित किया गया था, जिनमें से 94 गांवों में स्क्रीनिंग का काम पूरा हो चुका है और बचे हुए गांवों में टीमें लगातार काम कर रही हैं। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि यदि किसी को दो सप्ताह से अधिक समय से लगातार खांसी, बुखार, तेजी से वजन घटना, कमजोरी या रात में पसीना आने जैसी शिकायत हो, तो वे इसे नजरअंदाज न करें और नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराएं क्योंकि समय पर इलाज से टीबी पूरी तरह ठीक हो सकती है।2
- सहरसा जिले के सौर बाजार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में मरीजों के बेड पर चादर न मिलने की गंभीर समस्या बनी हुई है। इस अस्पताल में अमूमन पुराने और गंदे चादर बिछे रहते हैं या कई बार वे भी देखने को नहीं मिलते। इस बदहाली को लेकर पहले भी कई बार वरीय पदाधिकारियों से बात की गई, लेकिन उन्होंने हर बार सुधार की बात कहकर मामले को रफा-दफा कर दिया और समस्या जस की तस बनी रही। इसी बीच, बुधवार को जब अस्पताल प्रशासन को किसी वरीय पदाधिकारी के आने की सूचना मिली, तो आनन-फानन में सभी बेड पर नए चादर बिछा दिए गए। हालांकि, इस हड़बड़ी के बीच भी अस्पताल की एक और बड़ी खामी उजागर हो गई, जहां एक ही बेड पर दो-दो मरीज पड़े हुए दिखाई दिए। गनीमत यह रही कि कोई वरीय पदाधिकारी औचक निरीक्षण पर नहीं पहुंचे, अन्यथा अस्पताल प्रशासन पर बड़ी कार्रवाई होना तय था। अब देखना यह है कि इस घटना के बाद भी सीएचसी सौर बाजार के वरीय पदाधिकारी व्यवस्था में कोई सुधार लाते हैं या नहीं।1
- मधेपुरा जिले के कुमारखंड प्रखंड क्षेत्र में मानसून के आने के बाद भी कम बारिश होने के कारण धान की रोपाई का काम बेहद सुस्त चल रहा है। प्रखंड में इस बार कुल 13,999 हेक्टेयर भूमि में धान रोपाई का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, लेकिन 15 जुलाई तक महज 48 प्रतिशत खेतों में ही रोपाई पूरी हो सकी है। सामान्य तौर पर इस अवधि तक कम से कम 60 से 80 प्रतिशत खेतों में धान की रोपाई हो जानी चाहिए थी, पर मानसून के बदले रुख और नियमित अंतराल पर बारिश न होने से किसान काफी चिंतित हैं। खेतों में बिचड़ा पूरी तरह तैयार है, लेकिन बारिश की कमी और उमस व तेज धूप के कारण मिट्टी में नमी बेहद कम है। सिंचाई के लिए की गई वैकल्पिक व्यवस्थाएं भी दम तोड़ रही हैं; नहरों में पानी नहीं है और अधिकांश किसान नहर के पानी से वंचित हैं। इसके अलावा, हर जगह कृषि फीडर से बिजली नहीं पहुंच पाई है, और जहां बिजली आपूर्ति उपलब्ध भी है, वहां बिजली का सही लाभ किसानों को नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में किसान महंगाई की मार झेलते हुए मोटर और डीजल पंप सेट के सहारे जैसे-तैसे धान की रोपाई कर रहे हैं। परेशान किसानों ने पटवन के लिए सरकारी सहायता राशि प्रदान करने, सरकारी नलकूपों व बिजली व्यवस्था को दुरुस्त करने और नहरों में पानी उपलब्ध कराने की मांग की है। दूसरी ओर, कृषि विभाग के बीएओ दीपक कुमार और कृषि कोर्डिनेटर सुमन सौरभ ने भी पुष्टि की है कि क्षेत्र में अब तक केवल 48 प्रतिशत रोपाई ही संभव हो पाई है। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष पूरे प्रखंड क्षेत्र में 13,800 हेक्टेयर भूमि पर धान की खेती हुई थी। अधिकारियों का मानना है कि यद्यपि कम बारिश से काम प्रभावित हुआ है, फिर भी किसान धीरे-धीरे रोपाई के काम में जुट गए हैं और उम्मीद है कि 30 जुलाई तक काफी हद तक लक्ष्य हासिल कर लिया जाएगा।1
- सुपौल शहर में गुणवत्तापूर्ण प्रारंभिक शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में 'किड्स स्कूल' का भव्य शुभारंभ किया गया है। विद्यालय का उद्घाटन सुपौल सांसद दिलेश्वर कामत, विधायक रामविलास कामत, छातापुर विधायक नीरज कुमार बबलू, नगर परिषद अध्यक्ष राघवेंद्र झा राघव, जदयू नेता भगवान चौधरी तथा जिला उपाध्यक्ष हरेकांत झा ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर और फीता काटकर किया। इस उद्घाटन समारोह में बड़ी संख्या में अभिभावक, शिक्षाविद, सामाजिक कार्यकर्ता और गणमान्य लोग उपस्थित रहे। अतिथियों ने विद्यालय परिसर का निरीक्षण कर आधुनिक कमरों, आकर्षक शिक्षण वातावरण, खेल सामग्री और अन्य सुविधाओं की सराहना की। विद्यालय के चेयरमैन सौरभ ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि उनका उद्देश्य बच्चों को आधुनिक तकनीक के साथ बेहतर, संस्कारयुक्त और नैतिक शिक्षा उपलब्ध कराना है। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सांसद दिलेश्वर कामत ने कहा कि छोटे बच्चों के लिए बेहतर शिक्षण संस्थानों की स्थापना समय की आवश्यकता है। उन्होंने भरोसा जताया कि यह स्कूल बच्चों के व्यक्तित्व, रचनात्मक सोच और नैतिक मूल्यों के विकास पर गंभीरता से कार्य करेगा। इसके अलावा छातापुर विधायक नीरज कुमार बबलू, विधायक रामविलास कामत, पूर्व जिला अध्यक्ष भगवान चौधरी और जिला उपाध्यक्ष हरेकांत झा ने भी समारोह को संबोधित कर स्कूल प्रबंधन के इस प्रयास को सराहा। अंत में विद्यालय के चेयरमैन सौरभ ने सभी अतिथियों और अभिभावकों का आभार व्यक्त किया और यह समारोह बेहद उत्साह के माहौल में संपन्न हुआ।1
- बिहार के सहरसा में एक बांध टूट गया है। बांध टूटने की इस घटना के कारण कई घर पानी में बह गए हैं।1
- बिहार के सहरसा जिले के सौर बाजार स्थित बैजनाथपुर फ्लाईओवर पार करने के दौरान वाहन चालकों की लापरवाही के चलते लोग लगातार हादसों का शिकार हो रहे हैं। इस फ्लाईओवर पर दौड़ रहे वाहनों की गति पर नियंत्रण न रख पाने के कारण ही ये दुर्घटनाएं घटित हो रही हैं, जिससे वाहन चालकों की जान जोखिम में पड़ रही है।1
- सहरसा में मद्य निषेध विभाग ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए मिट्टी खोदकर 123 लीटर अवैध शराब बरामद की है। इस छापेमारी के दौरान विभाग ने मौके से दो तस्करों को रंगे हाथ गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है। इस पूरे मामले में एक हैरान करने वाला खेल सामने आया है, जहां एक तरफ जमीन के ऊपर पुलिस का पहरा था, वहीं दूसरी तरफ तस्करों ने जमीन के नीचे अपना 'शराब गोदाम' बना रखा था। विभाग की इस कार्रवाई से तस्करों के इस अनोखे तरीके का भंडाफोड़ हुआ है।1