संभल में हसीना बेगम हॉस्पिटल के निदेशक सेठ कासिम और डॉक्टर तौसीफ अहमद के बीच चल रहा लंबा विवाद आखिरकार खत्म हो गया है। बताया जा रहा है कि यह विवाद कई दिनों तक जारी रहा और अस्पताल के हिसाब-किताब को लेकर दोनों पक्षों में मतभेद गहरे हो गए थे। यह मामला थाने से लेकर कचहरी तक पहुंच गया था, और डॉक्टर तौसीफ के खिलाफ एक केस भी दर्ज किया गया था। इस पूरे विवाद का सुखद अंत तब हुआ जब डॉक्टर तौसीफ अहमद अकेले सेठ कासिम के निवास पर पहुंचे। वहाँ दोनों ने बैठकर बातचीत की और सभी गलतफहमियों को दूर किया। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच एक समझौता भी लिखा गया, जिसमें यह तय किया गया कि भविष्य में इस तरह का कोई विवाद नहीं होगा। दोनों ने एक-दूसरे को गले लगाकर भाईचारे का संदेश दिया; सेठ कासिम ने डॉक्टर तौसीफ को छोटे भाई की तरह माफ कर दिया, और उनके रिश्ते फिर से सामान्य हो गए। डॉक्टर तौसीफ अहमद ने मीडिया के सामने आकर इस बात की पुष्टि की कि विवाद समाप्त हो गया है और उन्होंने अपनी गलती का एहसास किया है।
संभल में हसीना बेगम हॉस्पिटल के निदेशक सेठ कासिम और डॉक्टर तौसीफ अहमद के बीच चल रहा लंबा विवाद आखिरकार खत्म हो गया है। बताया जा रहा है कि यह विवाद कई दिनों तक जारी रहा और अस्पताल के हिसाब-किताब को लेकर दोनों पक्षों में मतभेद गहरे हो गए थे। यह मामला थाने से लेकर कचहरी तक पहुंच गया था, और डॉक्टर तौसीफ के खिलाफ एक केस भी दर्ज किया गया था। इस पूरे विवाद का सुखद अंत तब हुआ जब डॉक्टर तौसीफ अहमद अकेले सेठ कासिम के निवास पर पहुंचे। वहाँ दोनों ने बैठकर बातचीत की और सभी गलतफहमियों को दूर किया। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच एक समझौता भी लिखा गया, जिसमें यह तय किया गया कि भविष्य में इस तरह का कोई विवाद नहीं होगा। दोनों ने एक-दूसरे को गले लगाकर भाईचारे का संदेश दिया; सेठ कासिम ने डॉक्टर तौसीफ को छोटे भाई की तरह माफ कर दिया, और उनके रिश्ते फिर से सामान्य हो गए। डॉक्टर तौसीफ अहमद ने मीडिया के सामने आकर इस बात की पुष्टि की कि विवाद समाप्त हो गया है और उन्होंने अपनी गलती का एहसास किया है।
- संभल में हसीना बेगम हॉस्पिटल के निदेशक सेठ कासिम और डॉक्टर तौसीफ अहमद के बीच चल रहा लंबा विवाद आखिरकार खत्म हो गया है। बताया जा रहा है कि यह विवाद कई दिनों तक जारी रहा और अस्पताल के हिसाब-किताब को लेकर दोनों पक्षों में मतभेद गहरे हो गए थे। यह मामला थाने से लेकर कचहरी तक पहुंच गया था, और डॉक्टर तौसीफ के खिलाफ एक केस भी दर्ज किया गया था। इस पूरे विवाद का सुखद अंत तब हुआ जब डॉक्टर तौसीफ अहमद अकेले सेठ कासिम के निवास पर पहुंचे। वहाँ दोनों ने बैठकर बातचीत की और सभी गलतफहमियों को दूर किया। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच एक समझौता भी लिखा गया, जिसमें यह तय किया गया कि भविष्य में इस तरह का कोई विवाद नहीं होगा। दोनों ने एक-दूसरे को गले लगाकर भाईचारे का संदेश दिया; सेठ कासिम ने डॉक्टर तौसीफ को छोटे भाई की तरह माफ कर दिया, और उनके रिश्ते फिर से सामान्य हो गए। डॉक्टर तौसीफ अहमद ने मीडिया के सामने आकर इस बात की पुष्टि की कि विवाद समाप्त हो गया है और उन्होंने अपनी गलती का एहसास किया है।1
- जनपद संभल में 1978 के दंगों में दंगाइयों के हाथों जान गंवाने वाले रामशरण रस्तोगी के परिजनों ने सरकार द्वारा आवासीय पट्टा मिलने पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आभार व्यक्त किया है। यह आवंटन परिवार के लिए 48 साल की लंबी लड़ाई के बाद आया है, जिसे अब न्याय मिलने का एहसास हुआ है। रामशरण रस्तोगी की हत्या 29 मार्च 1978 को हुई थी, जब दंगाइयों की भीड़ ने उनकी दुकान में लूटपाट की और विरोध करने पर उन्हें चाकुओं से 109 बार गोद कर मार डाला। हत्या के बाद उनके शव को क्षत-विक्षत कर दुकान के तराजू और बाट से बांधकर एक कुएं में फेंक दिया गया था। इस मामले में उनके पुत्र सुभाष चंद्र रस्तोगी ने एफआईआर दर्ज कराई थी। मृतक के पौत्र कपिल रस्तोगी ने बताया कि 2005 में मुकदमे को लेकर मिली धमकियों के कारण परिवार को दिल्ली पलायन करना पड़ा था। पिछले वर्ष कपिल अपनी माता के साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिले थे, जहाँ मुख्यमंत्री ने संभल में 184 हिंदुओं की निर्मम हत्या का उल्लेख करते हुए इस मामले का संज्ञान लिया और परिवार के पुनर्वास के लिए भूमि उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया था। मुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद, प्रशासन ने अब मृतक की पुत्रवधू रुक्मन रस्तोगी को ग्राम शेरखां सराय बाहर चुंगी में 100 वर्ग मीटर भूमि का आवासीय पट्टा आवंटित कर दिया है। इस पट्टे का प्रमाण पत्र प्रदेश सरकार में सहकारिता राज्यमंत्री और जनपद के प्रभारी मंत्री जेपीएस राठौर ने मंडलायुक्त आनंजेन्य कुमार, जिलाधिकारी अंकित खंडेलवाल और पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार बिश्नोई की उपस्थिति में मृतक रामशरण रस्तोगी के परिजनों को सौंपा। इस अवसर पर भूमि पर कब्जा हस्तांतरित कर नींव की पहली ईंट भी प्रभारी मंत्री द्वारा रखी गई। कपिल रस्तोगी ने योगी सरकार और जिला प्रशासन की सराहना करते हुए कहा कि इस कदम से उन्हें लग रहा है कि अब उनके साथ न्याय हुआ है।4
- संभल के बबैना-अड्डा बहजोई रोड पर एक नए स्कूटी शोरूम का भव्य उद्घाटन किया गया। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि संभल के सपा सांसद रहे, जिन्होंने फीता काटकर शोरूम का विधिवत शुभारंभ किया। उद्घाटन समारोह में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और पार्टी कार्यकर्ता उपस्थित रहे। सांसद ने रिबन काटने के बाद यहाँ रखी गई नई स्कूटियों का निरीक्षण भी किया। शोरूम संचालक ने जानकारी दी कि उनके यहाँ सभी कंपनियों की इलेक्ट्रिक और पेट्रोल स्कूटी उपलब्ध होंगी, साथ ही ग्राहकों को फाइनेंस और सर्विस की सुविधा भी प्रदान की जाएगी। इस अवसर पर सांसद ने क्षेत्र में बढ़ते रोजगार के अवसरों पर अपनी खुशी व्यक्त की। सांसद ने कहा कि, "संभल बहजोई रोड बबैना जैसे गांव में इस तरह के शोरूम खुलना युवाओं के लिए अच्छी बात है। इससे लोगों को रोजगार भी मिलेगा और ग्राहकों को घर के पास ही सुविधा मिलेगी।" उन्होंने शोरूम संचालक को शुभकामनाएं देते हुए उनके कारोबार के खूब चलने की कामना की।2
- संभल जिले के घासीपुर में एक ज़मीन विवाद का मामला सामने आया है, जहाँ अधिकारियों पर अपने ही आदेशों का पालन न करने और भू-माफिया का साथ देने का आरोप है। शिकायत के अनुसार, वर्ष 2024 में बेदखली का आदेश होने के बावजूद, जिला संभल जेल के पास स्थित गाटा संख्या 510, जिसका रकबा 0.587 हेक्टेयर है, अभी तक भू-माफिया के कब्जे से मुक्त नहीं हुई है। आरोप है कि अधिकारी अपनी ज़िम्मेदारी नहीं निभा रहे हैं और भू-माफिया को लगातार संरक्षण दे रहे हैं, जिसके कारण ज़मीन पर अवैध कब्ज़ा बरकरार है।2
- बदायूं में बृहस्पतिवार को न्यायालय सुरक्षा में तैनात 52 वर्षीय दरोगा मेघश्याम गौतम का शव उनके किराए के कमरे में फंदे से लटका मिला। मथुरा निवासी दरोगा शहर के सिविल लाइंस कोतवाली थाना क्षेत्र की मधुबनी कॉलोनी में किराए के कमरे में रहते थे। पुलिस ने प्रारंभिक जांच में इस घटना को आत्महत्या बताया है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर आवश्यक कार्रवाई शुरू की। सीओ सिटी रजनीश उपाध्याय ने बताया कि अब तक की जांच में दरोगा के आत्महत्या करने की पुष्टि हुई है। वहीं, एसएसपी अंकिता शर्मा ने भी घटना स्थल का जायजा लिया। पुलिस ने यह भी बताया कि आत्महत्या के कारणों का पता परिजनों के आने और उनसे बातचीत के बाद ही चल पाएगा।1
- उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर स्थित एक पुलिस चौकी में दारोगा जी ने एक प्रेमी जोड़े का ब्याह करवा दिया। जानकारी के अनुसार, रोहन और प्रियंका नामक यह जोड़ा हाल ही में अपने घर से भाग गया था, क्योंकि उनके परिवार वाले उनकी शादी के लिए राजी नहीं थे। घरवालों द्वारा मुकदमा दर्ज कराए जाने के बाद पुलिस दोनों को पकड़कर लाई थी। हालाँकि, पुलिस चौकी में दोनों ने साथ ही रहने पर अपनी दृढ़ता व्यक्त की। इसके बाद, चौकी इंचार्ज ने पहल करते हुए दोनों परिवारों को इस शादी के लिए रजामंद किया। आखिरकार, पुलिस चौकी के भीतर ही उनका 'गंधर्व विवाह' संपन्न कराया गया।1
- संभल से सपा सांसद जिया उर रहमान बर्क ने गाजियाबाद में हुए असद एनकाउंटर पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। एक ऑटोमोबाइल शोरूम का फीता काटकर उद्घाटन करने गाजियाबाद पहुंचे सांसद बर्क ने स्पष्ट कहा कि बुलडोजर की कार्रवाई या एनकाउंटर करना न्याय नहीं है; उनके अनुसार, जो भी सजा होनी चाहिए, वह केवल कोर्ट के माध्यम से ही दी जानी चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह असद की तरफदारी नहीं कर रहे, और भले ही असद की बहन के साथ छेड़छाड़ हुई हो या कोई और घटना हुई हो, सजा का प्रावधान न्यायालय से ही होना चाहिए। सांसद बर्क ने सरकार पर नीट पेपर लीक और इंटर की सीबीएसई मार्किंग को लेकर भी हमला बोला। उन्होंने मांग की कि दोषियों को बचाया नहीं जाना चाहिए, बल्कि उन पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। सीजेपी द्वारा प्रदर्शन करने के सवाल पर सांसद ने कहा कि भारत के संविधान में सभी को अपने मुद्दों पर बात रखने का अधिकार है। इसके अतिरिक्त, देश में पेट्रोल-डीजल के संकट का जिक्र करते हुए उन्होंने ऑटोमोबाइल शोरूम स्वामी को शुभकामनाएं दीं और सलाह दी कि डीजल-पेट्रोल बचाने के लिए इलेक्ट्रॉनिक वाहनों का उपयोग किया जाना चाहिए।1
- उत्तर प्रदेश के अमरोहा जनपद में दबंगों के हौसले बुलंद दिख रहे हैं। हसनपुर कोतवाली क्षेत्र के डगरोली गाँव में एक युवक को सरेआम बेल्टों से बेरहमी से पीटा गया है। घटना के दौरान, दबंगों ने युवक पर तमंचा तानकर उसे जान से मारने की भी धमकी दी। इस पूरे मामले का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।1