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भागलपुर: विक्रमशिला सेतु के पिलर की सुरक्षा दीवार टूटी— 100 रुपए की योजना में जब 50 रुपए की लूट हो जाएगी, तो यही हाल होगा।
Prasant kishor ki sena
भागलपुर: विक्रमशिला सेतु के पिलर की सुरक्षा दीवार टूटी— 100 रुपए की योजना में जब 50 रुपए की लूट हो जाएगी, तो यही हाल होगा।
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- जमानत मिलने के बाद मोकामा विधायक अनंत सिंह एक बार फिर जनता के बीच सक्रिय हो गए हैं। पटना से मोकामा जाते समय बाढ़ पहुंचने पर उन्होंने बाबा परशुराम मंदिर में पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद लिया और क्षेत्र की खुशहाली की कामना की। पूजा के बाद अनंत सिंह जनता दर्शन कार्यक्रम के लिए आगे बढ़े। इस दौरान रास्ते भर समर्थकों ने गाजे-बाजे और फूल-मालाओं के साथ उनका जोरदार स्वागत किया। अनंत सिंह रोड शो करते हुए लोगों से मुलाकात कर रहे हैं और जनता का अभिवादन स्वीकार करते नजर आए।1
- संगठन पुनर्निर्माण के तहत जन सुराज के साथियों के साथ संवाद की कुछ झलकियां!! *दिनांक- 23 मार्च | स्थान- लखीसराय, शेखपुरा*1
- अनंत सिंह के स्वागत में पंडारक मे उमड़ा जन सैलाब1
- बेगूसराय में लगातार सुजीत को न्याय दिलाने की मांग को लेकर कैंडल मार्च निकाला जा रही है।1
- शेखपुरा - अनुमंडल पदाधिकारी प्रियंका कुमारी ने प्रेस वार्ता के दौरान बताया की ाज़िला में गैस की कोई कमी नहीं है. देखें मौक़े पर उन्होंने पत्रकारों से क्या कहे.1
- Post by India khabar Begusarai.3
- पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब सीधे आपके किचन तक पहुंच चुका है। LPG गैस के दामों में भारी बढ़ोतरी, सप्लाई में कमी और लंबी कतारों ने देशभर में संकट खड़ा कर दिया है। मार्च 2026 में घरेलू सिलेंडर ₹60 महंगा हो गया है, वहीं व्यावसायिक सिलेंडर में ₹144 तक की बढ़ोतरी देखी गई है। पटना, दिल्ली और मुंबई जैसे शहरों में हालात गंभीर हैं। इस संकट का सबसे ज्यादा असर बिहार के मजदूरों और छात्रों पर पड़ रहा है— 👉 सूरत और मुंबई से मजदूरों का पलायन शुरू 👉 पटना में छात्र गैस के अभाव में भूखे सोने को मजबूर 👉 छोटे उद्योग ठप, रोजगार पर संकट सरकार ने राहत के लिए सब्सिडी बढ़ाई है और कोटा में 20% इजाफा किया है, लेकिन जमीनी हालात अभी भी चिंताजनक हैं। क्या है इस संकट की असली वजह? क्या है सरकार का समाधान? और बिहार पर इसका कितना गहरा असर पड़ रहा है?1
- चैती छठ पर्व के तीसरे दिन मोकामा के विभिन्न छठ घाटों पर व्रतियों ने ढलते सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया। 36 घंटे के निर्जला व्रत के दौरान श्रद्धालु गंगा घाटों पर कमर तक पानी में खड़े होकर सूर्यदेव और माता छठी की पूजा करते हुए परिवार की सुख-समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करते नजर आए। आस्था के इस महापर्व के बीच मोकामा घाट और औंटा घाट की खतरनाक स्थिति चर्चा का विषय बनी रही। गंगा कटाव के कारण घाट काफी नीचे खिसक गए हैं, जिससे श्रद्धालुओं को करीब 50 फीट नीचे उतरकर अर्घ्य देना पड़ा। हालांकि प्रशासन द्वारा बैरिकेडिंग की गई थी और पुलिस व नगर परिषद की टीम मौके पर तैनात रही, फिर भी अस्थायी व्यवस्था के बीच श्रद्धालुओं को जोखिम उठाकर पूजा करनी पड़ी। घाटों पर पक्की सीढ़ियों, स्थायी संरचना और सुरक्षित पहुंच मार्ग की कमी साफ नजर आई। स्थानीय लोगों ने कहा कि हर वर्ष अस्थायी इंतजाम किए जाते हैं, लेकिन स्थायी समाधान नहीं होने से छठ जैसे बड़े पर्व में हादसे का खतरा बना रहता है।1