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Pramod kumar
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More news from बिहार and nearby areas
- समस्तीपुर नगर निगम वार्ड नंबर 46 के पार्षद प्रतिनिधि से जानिए खास रिपोर्ट स Samastipur..1
- पुल-पुलिया तक पहुंचा बाढ़ का पानी, जमालपुर-भागलपुर रेलखंड पर हाई अलर्ट, रेलवे ट्रैक के दोनों किनारे पानी,मालदा रेल मंडल ने मानसून पेट्रोलिंग किया तेज पुल-पुलिया तक पहुंचा बाढ़ का पानी, जमालपुर-भागलपुर रेलखंड पर हाई अलर्ट, रेलवे ट्रैक के दोनों किनारे पानी,मालदा रेल मंडल ने मानसून पेट्रोलिंग किया तेज1
- बेगूसराय।सिमरिया सिक्स। लाइन का अब सियासत दो महापुरुष के बीच हो रही है श्रीबाबू की प्रतिमा के लिए बीहट में जल उठीं मशालें मल्हीपुर सिक्सलेन गोलंबर पर आदमकद प्रतिमा की मांग सिमरिया सिक्स। लाइन का अब सियासत दो महापुरुष के बीच हो रही है श्रीबाबू की प्रतिमा के लिए बीहट में जल उठीं मशालें मल्हीपुर सिक्सलेन गोलंबर पर आदमकद प्रतिमा की मांग को लेकर सड़क पर उतरे लोग, गूंजा।‘श्रीबाबू की प्रतिमा कहां लगेगी? मल्हीपुर गोलंबर पर’ विश्वकर्मा चौक से फर्टिलाइजर रेलवे केबिन होते हुए बीहट बाजार तक निकला मशाल जुलूस; समिति ने कहा—जनजागरण अभियान अब और होगा व्यापक बेगूसराय/बीहट। बिहार केसरी डॉ. श्रीकृष्ण सिन्हा ‘श्रीबाबू’ की आदमकद प्रतिमा उनकी कर्मभूमि बेगूसराय में स्थापित करने की मांग अब जनआंदोलन का रूप लेती जा रही है।। बीहट की सड़कों पर दर्जनों जलती मशालों और तिरंगे के साथ निकला जुलूस इसी जनभावना का जोरदार प्रदर्शन रहा। बीहट नगर परिषद क्षेत्र के वार्ड संख्या-35 स्थित मल्हीपुर गांव के सिक्सलेन गोलंबर पर श्रीबाबू की आदमकद प्रतिमा स्थापित करने की मांग को लेकर निकले मशाल जुलूस में स्थानीय लोगों एवं विभिन्न सामाजिक संगठनों से जुड़े लोगों ने हिस्सा लिया। जुलूस के दौरान ‘श्रीबाबू अमर रहें’, ‘मल्हीपुर चौक पर श्रीबाबू की प्रतिमा लगाना होगा’, ‘श्रीबाबू की प्रतिमा कहां लगेगी—मल्हीपुर गोलंबर पर’ और ‘इंकलाब जिंदाबाद’ के नारों से बीहट की सड़कें गूंजती रहीं। हाथों में जलती मशालें और तिरंगा थामे प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट संदेश दिया कि श्रीबाबू की प्रतिमा स्थापना की मांग अब केवल एक मांग नहीं, बल्कि सम्मान, स्मृति और अपनी ऐतिहासिक विरासत को पुनर्स्थापित करने का अभियान बन चुकी है। मशाल जुलूस का नेतृत्व ‘बिहार केसरी’ श्रीबाबू प्रतिमा निर्माण समिति के संयोजक सह बेगूसराय नगर निगम के पूर्व उपमहापौर राजीव रंजन, सह। संयोजक, भीम आर्मी के पूर्व जिलाध्यक्ष एवं युवा अधिवक्ता विकास कुमार आजाद तथा क्षेत्रीय विकास मोर्चा के महासचिव शिवशंकर पासवान उर्फ फुलेना पासवान ने किया। विश्वकर्मा चौक से शुरू हुआ मशाल जुलूस राष्ट्रीय राजमार्ग के रास्ते फर्टिलाइजर रेलवे केबिन पहुंचा। वहां से जुलूस बीहट बाजार की ओर बढ़ा और चांदनी चौक पहुंचकर समाप्त हुआ। पूरे मार्ग में मशालों की रोशनी, तिरंगे और नारों ने माहौल को आंदोलनकारी बना दिया। ‘जिस धरती को औद्योगिक पहचान दिलाई, उसी धरती पर प्रतिमा क्यों नहीं?’ समिति के संयोजक राजीव रंजन ने कहा कि बिहार केसरी डॉ. श्रीकृष्ण सिन्हा बेगूसराय के औद्योगिक विकास के प्रमुख शिल्पकारों में रहे हैं। रिफाइनरी, थर्मल, फर्टिलाइजर और राजेंद्र सेतु जैसी विकास परियोजनाओं से जुड़ी उनकी विकास-दृष्टि ने बेगूसराय को औद्योगिक पहचान दिलाने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि जिस महापुरुष ने बेगूसराय के विकास की मजबूत आधारशिला रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, उनकी अपनी कर्मभूमि पर एक भी प्रमुख सार्वजनिक स्थल पर आदमकद प्रतिमा का न होना समाज के लिए आत्ममंथन का विषय है। राजीव रंजन ने कहा कि मल्हीपुर सिक्सलेन गोलंबर पर श्रीबाबू की प्रतिमा स्थापित कर उसे ‘स्टैच्यू ऑफ डेवलपमेंट’ के रूप में विकसित किया जाना चाहिए, ताकि बेगूसराय में प्रवेश करने वाली हर पीढ़ी अपने उस शिल्पकार को देख सके, जिसने इस क्षेत्र के औद्योगिक और सामाजिक विकास की कल्पना की थी। उन्होंने कहा कि प्रतिमा स्थापना की मांग को लेकर जनजागरण अभियान लगातार जारी रहेगा। ‘श्रीबाबू के योगदान को दल या विचारधारा की सीमा में बांधना इतिहास के साथ अन्याय’ युवा अधिवक्ता विकास कुमार आजाद ने कहा कि श्रीबाबू बिहार के इतिहास के ऐसे व्यक्तित्व हैं, जिनके योगदान का मूल्यांकन राजनीतिक सीमाओं से ऊपर उठकर किया जाना चाहिए। सामाजिक न्याय, समानता और विकास के लिए उनके संघर्ष को याद करते हुए उन्होंने कहा कि उनके प्रति रही सामूहिक उपेक्षा पर अब समाज को गंभीर आत्ममंथन करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि इतिहास को केवल पढ़ने की नहीं, बल्कि सही परिप्रेक्ष्य में समझने और आने वाली पीढ़ी तक पहुंचाने की जरूरत है। ‘कर्मभूमि के प्रवेश द्वार पर ही स्थापित हो श्रीबाबू की प्रतिमा’ क्षेत्रीय विकास मोर्चा के महासचिव शिवशंकर पासवान उर्फ फुलेना पासवान ने कहा कि श्रीबाबू आधुनिक बिहार के नवनिर्माण के प्रमुख शिल्पकार और सामाजिक न्याय के पुरोधा थे। उन्होंने सामाजिक भेदभाव और छुआछूत के खिलाफ महत्वपूर्ण संघर्ष किया तथा वंचित एवं दलित समाज के अधिकारों के लिए आवाज उठाई। उन्होंने कहा कि मल्हीपुर सिक्सलेन गोलंबर केवल एक चौराहा नहीं, बल्कि बेगूसराय में प्रवेश करने वाला प्रमुख मार्ग है। इसलिए यहां श्रीबाबू की आदमकद प्रतिमा स्थापित होना आने वाली पीढ़ियों के लिए एक जीवंत इतिहास-पाठ होगा। फुलेना पासवान ने कहा कि श्रीबाबू ने बिहार में उद्योग, शिक्षा, कृषि, सिंचाई, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली तथा सामाजिक न्याय आधारित विकास को नई दिशा दी। उनके योगदान को किसी राजनीतिक दल, विचारधारा या क्षेत्र की सीमा में बांधना उचित नहीं है। ‘सदियों तक प्रेरणा देता रहे स्टैच्यू ऑफ डेवलपमेंट’ निर्माण समिति के मुख्य प्रवक्ता एवं बहुजन एक्टिविस्ट विजय पासवान ने कहा कि श्रीबाबू महान स्वतंत्रता सेनानी, अखंड बिहार के प्रधानमंत्री एवं बिहार के प्रथम मुख्यमंत्री, आधुनिक बिहार के निर्माता तथा बेगूसराय के औद्योगिक विकास के स्वप्नदर्शी शिल्पकार थे। उन्होंने गढ़पुरा में अंग्रेजों के काले नमक कानून के खिलाफ नमक सत्याग्रह का नेतृत्व किया और स्वतंत्रता आंदोलन के साथ-साथ राष्ट्र एवं बिहार के नवनिर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि दलित-पिछड़े समाज सहित आम लोगों के बीच से उठी प्रतिमा स्थापना की यह आवाज अब दबने वाली नहीं है। लोकतांत्रिक तरीके से जनजागरण अभियान को गांव-गांव और समाज के हर वर्ग तक ले जाया जाएगा। ‘65 साल बाद भी प्रतिमा नहीं होना सामूहिक कृतघ्नता का उदाहरण’ निर्माण समिति के कोषाध्यक्ष जयंत कुमार पासवान ने कहा कि श्रीबाबू ने बेगूसराय के विकास के लिए अनेक उल्लेखनीय कार्य किए। उनके विकास कार्यों से लाखों नौजवानों, मजदूरों, इंजीनियरों, तकनीशियनों और अन्य लोगों के लिए रोजगार एवं आजीविका के अवसर पैदा हुए। उन्होंने कहा कि यह बेहद दुखद और चिंताजनक है कि अपनी मृत्यु के छह दशक से अधिक समय बाद भी श्रीबाबू की कर्मभूमि बेगूसराय में किसी प्रमुख सार्वजनिक महत्व के स्थान पर उनकी एक भी आदमकद प्रतिमा स्थापित नहीं हो सकी है। जयंत पासवान ने कहा कि जिन्होंने बिहार और बेगूसराय के विकास के लिए अपना सर्वस्व समर्पित किया, उनके सम्मान के लिए समाज को अब खड़ा होना होगा। उन्होंने कहा कि मल्हीपुर सिक्सलेन गोलंबर पर स्थापित होने वाली प्रतिमा केवल पत्थर या धातु की प्रतिमा नहीं, बल्कि श्रीबाबू के त्याग, देशभक्ति, सादगी, ईमानदारी, दूरदर्शिता, कर्मठता और विकास-दृष्टि का प्रेरणा-स्थल होगी। गढ़पुरा से बीहट तक जुड़ी श्रीबाबू की विरासत गढ़पुरा नमक सत्याग्रह गौरव यात्रा समिति के राष्ट्रीय महासचिव राजीव कुमार, महासचिव रमेश महतो, सचिव मुकेश विक्रम यादव एवं डोमन महतो ने कहा कि श्रीबाबू का जीवन संघर्ष, त्याग और बिहार के विकास के प्रति समर्पण का प्रतीक है। बेगूसराय के औद्योगिक विकास में उनका योगदान ऐतिहासिक है। मल्हीपुर सिक्सलेन गोलंबर पर उनकी प्रतिमा स्थापित होने से जिले में प्रवेश करने वाली नई पीढ़ी को उनके जीवन और योगदान से परिचित होने का अवसर मिलेगा। इनकी रही भागीदारी मशाल जुलूस में नूरपुर के मुखिया प्रतिनिधि राजेश चौधरी एवं उनके पुत्र, राजवाड़ा के रितेश कुमार, बरौनी के कांग्रेस नेता संजय सिंह, असुरारी के रणजीत कुमार पटेल, बीहट के कमल वत्स, मनीष कुमार, बबलू पासवान, शशिभूषण सिंह, अशोक रजक, रितेश पासवान, मुकेश सिंह, संतोष कुमार, रजनीश कुमार, अमित कुमार, चंदन कुमार, पंकज साह, चुलबुल कुमार, रामशंकर सिंह, रंजन कुमार, शुभम कुमार सहित बड़ी संख्या में स्थानीय लोग एवं समिति के सदस्य शामिल हुए। बीहट में श्रीबाबू की प्रतिमा स्थापना की मांग को लेकर निकले मशाल जुलूस में हाथों में मशाल व तिरंगा लिए शामिल लोग तथा आगे बैनर के साथ प्रतिमा निर्माण समिति के सदस्य। अगर इसे और ज्यादा ‘लीड स्टोरी’ बनाना हो तो मेरी पहली पसंद की हेडलाइन: श्रीबाबू की प्रतिमा के लिए बीहट में जल उठीं मशालें ‘श्रीबाबू की प्रतिमा कहां लगेगी—मल्हीपुर गोलंबर पर’ के नारों से गूंजा बीहट यह हेडलाइन आपके उपलब्ध फोटो के दृश्य प्रभाव से भी सबसे अच्छी तरह मेल खाती है—मशालें तिरंगा बैनर भीड़ नारे, यानी खबर का पूरा आंदोलनकारी भाव एक ही फ्रेम में आ जाता ह3
- #ब्रेकिंगन्यूज : बाढ़ राहत के नाम पर बड़ा #घोटाला | सील पैक बोरे से चावल गायब | दोषी कौन? कारवाई होगा? शेयर जरूर करें । बेगूसराय । Mobile Tv News1
- बाढ़ पीड़ितों के बीच लगातार राहत पहुंचा रहे भोला सिंह, तीन शिविरों में बांटी खाद्य सामग्री और दवाइयां मोकामा में बाढ़ प्रभावित लोगों के बीच लगातार राहत पहुंचाने का काम जारी है। समाजसेवी भोला सिंह बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए लगातार राहत सामग्री लेकर शिविरों तक पहुंच रहे हैं। आज मोकामा प्रखंड कार्यालय स्थित राहत शिविर, सिद्धनाथ मंदिर राहत शिविर और सूर्य मंदिर के पास राहत शिविर में पहुंचकर बाढ़ पीड़ितों के बीच फल, खाने-पीने की सामग्री और जरूरी दवाइयों का वितरण किया गया। बाढ़ की इस मुश्किल घड़ी में राहत शिविरों में रह रहे जरूरतमंद लोगों के बीच पहुंचकर उनकी जरूरतों को समझना और आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराना, निश्चित तौर पर राहत का काम है। लगातार राहत पहुंचाने के इस प्रयास से बाढ़ प्रभावित परिवारों को काफी मदद मिल रही है। ऐसे समय में जरूरतमंदों के साथ खड़ा होना मानवता और सामाजिक जिम्मेदारी की मिसाल पेश करता है।1
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- वित्तरहित की तर्ज पर सांख्यिकी स्वयंसेवक को समायोजित करने की तैयारी? क्या सम्राट लगाएंगे अंतिम मुहर? वित्तरहित शिक्षकों के तर्ज पर सांख्यिकी स्वयंसेवकों को समायोजित करने की तैयारी? क्या सम्राट चौधरी अपने ही पूर्व के फैसले पर लगाएंगे अंतिम मुहर? योजना एवं विकास मंत्री भगवान सिंह कुशवाहा ने भी सांख्यिकी स्वयंसेवकों को दिए संकेत1
- बेगूसराय। पहुंचे पटना निरीक्षण करने। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के पूर्व प्रदेश महासचिव मोहम्मद शहजाद का एक बयान है इसमें उन्होंने बिहार में आई आपदा (बाढ़/सुखाड़) को लेकर केंद्र की एनडीए (NDA) सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बिहार के लिए विशेष बेगूसराय राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के पूर्व प्रदेश महासचिव मोहम्मद शहजाद का एक बयान है इसमें उन्होंने बिहार में आई आपदा (बाढ़/सुखाड़) को लेकर केंद्र की एनडीए (NDA) सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बिहार के लिए विशेष वित्तीय राहत पैकेज की मांग की है।उनके इस बयान के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:₹50,000 करोड़ के राहत कोष की मांग: मोहम्मद शहजाद का कहना है कि बिहार इस समय बेहद गंभीर आपदा से जूझ रहा है। ऐसे में प्रधानमंत्री को बिहार के लिए कम से कम 50,000 करोड़ रुपये का खजाना खोल देना चाहिए।चुनाव खर्च से उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार चुनाव के दौरान एनडीए गठबंधन द्वारा 120 हेलीकॉप्टर और 500 से 600 करोड़ रुपये खर्च किए जाने की योजनाएं बनती हैं। उसी तर्ज पर आपदा के समय भी बिहार की मदद के लिए बड़ा दिल दिखाना चाहिए।गरीबों और पीड़ितों की बदहाली: उन्होंने चिंता व्यक्त की कि बिहार के गरीब, मजलूम, बच्चे और बुजुर्ग बाढ़ या आपदा में बह रहे हैं। उनके घर नष्ट हो चुके हैं और उनके पास रहने के लिए जगह व खाने के लिए अनाज नहीं है। सरकार को तुरंत इसकी पूरी व्यवस्था करनी चाहिए।तेजस्वी यादव के पत्र का समर्थन: शहजाद ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने प्रधानमंत्री को इस संबंध में जो पत्र लिखा है, उस पर पीएम को तत्काल संज्ञान लेना चाहिए और राहत कार्य तेज करने चाहिए2
- एएसआई हत्याकांड में आठ दोषियों को उम्रकैद, तीन महिला समेत पांच पुरुषों को आजीवन कारावास मुंगेर: मुफस्सिल थाना क्षेत्र के नंदलालपुर स्थित एलआईसी कार्यालय के सामने होली के दिन वर्ष 2025 में डायल-112 के पुलिस पदाधिकारी सहायक अवर निरीक्षक (एएसआई) संतोष कुमार सिंह की हत्या के मामले में अदालत ने आठ दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इनमें तीन महिलाएं और पांच पुरुष शामिल हैं। अदालत ने सभी दोषियों पर 25-25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना नहीं देने पर पांच वर्ष के कठोर कारावास की सजा भुगतनी होगी। करीब डेढ़ साल बाद मामले में फैसला आया है। एडीजे चतुर्थ कुमारी मनीषा की अदालत ने 24 अगस्त को सुनवाई पूरी करने के बाद राजीव कुमार, रणवीर कुमार, राजू कुमार, गुड्डू कुमार, विकास कुमार, रेखा देवी, सरिता देवी और मौसम कुमारी को दोषी करार दिया था। सोमवार को सभी को उम्रकैद की सजा सुनाई गई। मामला 14 मार्च 2025 का है। दोपहर करीब 2:05 बजे नंदलालपुर स्थित एलआईसी कार्यालय के सामने दो पक्षों के बीच विवाद और मारपीट की सूचना पर एएसआई संतोष कुमार सिंह सिपाही दीपक कुमार के साथ पहुंचे थे। पुलिस ने मामला शांत करा दिया था। शाम करीब 7:30 बजे गश्ती के दौरान दोनों पक्षों को फिर विवाद करते देखा गया। संतोष कुमार सिंह एक पक्ष को समझाने के बाद दूसरे पक्ष के आंगन में पहुंचे। आरोप है कि वहां मौजूद आठों आरोपियों ने एकजुट होकर लोहे की रड, दबिया, हुक और लात-मुक्के से उन पर हमला कर दिया। गंभीर रूप से घायल संतोष कुमार सिंह को इलाज के लिए पटना के पारस अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी मौत हो गई। सिपाही दीपक कुमार की सूचना पर मुफस्सिल थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। राज्य की ओर से लोक अभियोजक संजय कुमार सिंह ने बताया कि सभी दोषी एक ही परिवार के सदस्य हैं। उन्होंने कहा कि मामले को त्वरित विचारण में रखा गया था। पुलिस की तत्परता और गवाहों की समय पर पेशी से सुनवाई पूरी कर मृतक के परिजनों को न्याय दिलाना संभव हुआ। एएसआई हत्याकांड में आठ दोषियों को उम्रकैद, तीन महिला समेत पांच पुरुषों को आजीवन कारावास मुंगेर: मुफस्सिल थाना क्षेत्र के नंदलालपुर स्थित एलआईसी कार्यालय के सामने होली के दिन वर्ष 2025 में डायल-112 के पुलिस पदाधिकारी सहायक अवर निरीक्षक (एएसआई) संतोष कुमार सिंह की हत्या के मामले में अदालत ने आठ दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इनमें तीन महिलाएं और पांच पुरुष शामिल हैं। अदालत ने सभी दोषियों पर 25-25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना नहीं देने पर पांच वर्ष के कठोर कारावास की सजा भुगतनी होगी। करीब डेढ़ साल बाद मामले में फैसला आया है। एडीजे चतुर्थ कुमारी मनीषा की अदालत ने 24 अगस्त को सुनवाई पूरी करने के बाद राजीव कुमार, रणवीर कुमार, राजू कुमार, गुड्डू कुमार, विकास कुमार, रेखा देवी, सरिता देवी और मौसम कुमारी को दोषी करार दिया था। सोमवार को सभी को उम्रकैद की सजा सुनाई गई। मामला 14 मार्च 2025 का है। दोपहर करीब 2:05 बजे नंदलालपुर स्थित एलआईसी कार्यालय के सामने दो पक्षों के बीच विवाद और मारपीट की सूचना पर एएसआई संतोष कुमार सिंह सिपाही दीपक कुमार के साथ पहुंचे थे। पुलिस ने मामला शांत करा दिया था। शाम करीब 7:30 बजे गश्ती के दौरान दोनों पक्षों को फिर विवाद करते देखा गया। संतोष कुमार सिंह एक पक्ष को समझाने के बाद दूसरे पक्ष के आंगन में पहुंचे। आरोप है कि वहां मौजूद आठों आरोपियों ने एकजुट होकर लोहे की रड, दबिया, हुक और लात-मुक्के से उन पर हमला कर दिया। गंभीर रूप से घायल संतोष कुमार सिंह को इलाज के लिए पटना के पारस अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी मौत हो गई। सिपाही दीपक कुमार की सूचना पर मुफस्सिल थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। राज्य की ओर से लोक अभियोजक संजय कुमार सिंह ने बताया कि सभी दोषी एक ही परिवार के सदस्य हैं। उन्होंने कहा कि मामले को त्वरित विचारण में रखा गया था। पुलिस की तत्परता और गवाहों की समय पर पेशी से सुनवाई पूरी कर मृतक के परिजनों को न्याय दिलाना संभव हुआ।1