मध्य प्रदेश के विदिशा में एक चोरी हुए मोबाइल को खोजने में पुलिस को पूरे 6 साल लग गए, जहाँ यह मोबाइल 2021 में गुम हुआ था, उसकी FIR 2023 में दर्ज हुई और वह अंततः 2026 में जाकर बरामद हुआ। इस अवधि में सिविल लाइन थाने के पाँच थाना प्रभारी बदल गए, लेकिन कोई भी इस मोबाइल का पता नहीं लगा सका, जबकि पुलिस अधीक्षक ने 2023 में ही एक पत्र के माध्यम से चोरी हुए मोबाइल की लोकेशन भी बताई थी। फरियादी राजेंद्र अहिरवार, जिनका मोबाइल 2022 में चोरी हो गया था, इस पूरे 6 साल के दौरान लगातार थाने के चक्कर लगाते रहे। उन्होंने सिविल लाइन थाने में शिकायत दर्ज कराई और FIR की प्रति मांगी, लेकिन उन्हें दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए। जब राजेंद्र ने लोक सेवा प्रदाय गारंटी अधिनियम के तहत विभाग से जानकारी मांगी, तो वह भी नहीं दी गई, जिसके चलते तत्कालीन थाना प्रभारी पर 250 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से पेनाल्टी और 5 हजार रुपये का आवागमन शुल्क भी लगाया गया। राजेंद्र का यह भी आरोप है कि पुलिस ने आरोपी को छोड़ दिया है और उन्हें आज तक अपनी FIR और अपील से जुड़ी पूरी जानकारी नहीं मिली है, जबकि उनका मोबाइल कर्नाटक से बरामद हो गया है। हालाँकि, हाल ही में सिविल लाइन थाने में नियुक्त हुए थाना प्रभारी राजपाल सिंह जादौन ने उस मोबाइल को सिर्फ 7 दिनों के भीतर खोज निकाला, जिसे पूरा सिस्टम 2021 से ढूंढने में असमर्थ रहा था।
मध्य प्रदेश के विदिशा में एक चोरी हुए मोबाइल को खोजने में पुलिस को पूरे 6 साल लग गए, जहाँ यह मोबाइल 2021 में गुम हुआ था, उसकी FIR 2023 में दर्ज हुई और वह अंततः 2026 में जाकर बरामद हुआ। इस अवधि में सिविल लाइन थाने के पाँच थाना प्रभारी बदल गए, लेकिन कोई भी इस मोबाइल का पता नहीं
लगा सका, जबकि पुलिस अधीक्षक ने 2023 में ही एक पत्र के माध्यम से चोरी हुए मोबाइल की लोकेशन भी बताई थी। फरियादी राजेंद्र अहिरवार, जिनका मोबाइल 2022 में चोरी हो गया था, इस पूरे 6 साल के दौरान लगातार थाने के चक्कर लगाते रहे। उन्होंने सिविल लाइन थाने में शिकायत दर्ज कराई और FIR की प्रति मांगी, लेकिन उन्हें दस्तावेज उपलब्ध
नहीं कराए गए। जब राजेंद्र ने लोक सेवा प्रदाय गारंटी अधिनियम के तहत विभाग से जानकारी मांगी, तो वह भी नहीं दी गई, जिसके चलते तत्कालीन थाना प्रभारी पर 250 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से पेनाल्टी और 5 हजार रुपये का आवागमन शुल्क भी लगाया गया। राजेंद्र का यह भी आरोप है कि पुलिस ने आरोपी को छोड़ दिया है और
उन्हें आज तक अपनी FIR और अपील से जुड़ी पूरी जानकारी नहीं मिली है, जबकि उनका मोबाइल कर्नाटक से बरामद हो गया है। हालाँकि, हाल ही में सिविल लाइन थाने में नियुक्त हुए थाना प्रभारी राजपाल सिंह जादौन ने उस मोबाइल को सिर्फ 7 दिनों के भीतर खोज निकाला, जिसे पूरा सिस्टम 2021 से ढूंढने में असमर्थ रहा था।
- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से निकल रहे भारतीय जहाज़ों पर ड्रोन हमला करने की कोशिश की, जिसे उन्होंने "पूरी तरह अस्वीकार्य" बताया है। ट्रंप के अनुसार, इस कथित हमले को विफल कर दिया गया। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने बयान में यह स्पष्ट नहीं किया कि कौन से भारतीय जहाज़ निशाना बने थे। यह आरोप ऐसे समय सामने आया है जब होर्मुज क्षेत्र में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव काफी बढ़ा हुआ है, जिससे कई जहाज़ों की सुरक्षा को लेकर चिंताएँ बनी हुई हैं। अब तक ईरान की ओर से इस आरोप पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, और ट्रंप के इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।1
- बीना विधानसभा क्षेत्र की ऐरण ग्राम पंचायत वित्तीय अनियमितताओं और कथित घोटालों के आरोपों के कारण चर्चा का विषय बन गई है, जहाँ उपसरपंच जगपाल सिंह राजपूत ने ग्राम पंचायत के सरपंच अमान अहिरवार और सचिव मेहरबान सिंह पर शासकीय राशि के दुरुपयोग और विभिन्न मदों में अनियमित भुगतान के गंभीर आरोप लगाए हैं। उपसरपंच का दावा है कि पंचायत द्वारा गौशाला संचालन के नाम पर भूसा खरीदी में भारी अनियमितता की गई है, जहाँ बाजार में लगभग ₹400 प्रति क्विंटल की दर से उपलब्ध भूसे का भुगतान पंचायत द्वारा ₹1200 प्रति क्विंटल की दर से किया गया। आरोप है कि यह भुगतान सरपंच और सचिव की मिलीभगत से किया गया, जिसके अधिकांश बिल पंचायत कार्यालय व्यय और अन्य सामग्री के नाम पर चुकाए गए। इसके अतिरिक्त, उपसरपंच ने ऐरण महोत्सव के दौरान नदी घाट की पुताई के नाम पर लगभग ₹90 हजार का भुगतान किए जाने पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि पंचायत के विभिन्न वित्तीय अभिलेखों और 'पंचायत दर्पण पोर्टल' पर दर्ज जानकारी में कई विसंगतियाँ दिखाई दे रही हैं। आरोप यह भी हैं कि हितग्राहियों को दी जाने वाली सहायता राशि निर्धारित राशि से अधिक भुगतान की गई। साथ ही, पंचायत द्वारा ऐसे बिलों का भुगतान भी किया गया जिनके संबंध में आवश्यक खरीद अभिलेख एवं दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं। उपसरपंच ने सरपंच एवं सचिव पर फर्जी बिलों के माध्यम से मनरेगा योजना के तहत अपने रिश्तेदारों और करीबियों के खातों में राशि हस्तांतरित कराने का आरोप लगाया है। हालांकि, सरपंच ने सभी आरोपों को निराधार बताते हुए खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि पंचायत के सभी कार्य नियमानुसार और पारदर्शिता के साथ किए गए हैं तथा लगाए जा रहे आरोप राजनीतिक द्वेष से प्रेरित हैं। वहीं, इस मामले में जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) प्रदीप कुमार पाल ने कहा है कि मामला मीडिया के द्वारा उनके संज्ञान में आया है। उन्होंने आश्वस्त किया है कि शिकायत और आरोपों की जाँच कराई जाएगी तथा यदि किसी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। अब सभी की नजरें प्रस्तावित जाँच पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।1
- सागर जिले की देवरी थाना पुलिस ने 24 घंटे के भीतर एक सनसनीखेज 'अपहरण' और फिरौती के मामले का पर्दाफाश किया है। इस खुलासे में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि एक बेटे ने गांजा तस्करी में हुए नुकसान की भरपाई करने के उद्देश्य से अपने ही अपहरण की झूठी साजिश रची और अपने पिता से ₹2 लाख की फिरौती मांगने लगा। पुलिस उपमहानिरीक्षक सागर रेंज श्री शशीन्द्र चौहान के मार्गदर्शन तथा पुलिस अधीक्षक सागर श्री अनुराग सुजानिया के नेतृत्व में जिले में अपराधों के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के तहत देवरी पुलिस को यह महत्वपूर्ण सफलता प्राप्त हुई है। दरअसल, 12 जून 2026 की रात फरियादी राजेश पिता प्रेम जाटव निवासी ग्राम डोंगर सलैया ने देवरी थाना में सूचना दी कि उनका 21 वर्षीय पुत्र पवन जाटव 09 जून को मित्र का जन्मदिन मनाने का कहकर घर से निकला था और वापस नहीं लौटा। इसी बीच, फरियादी के मोबाइल पर अज्ञात व्यक्तियों द्वारा कॉल कर उसके पुत्र का अपहरण करने तथा उसे छोड़ने के एवज में ₹2 लाख की फिरौती की मांग की गई, साथ ही रकम नहीं देने पर पुत्र की हत्या करने की धमकी भी दी गई। पुलिस जांच में यह ज्ञात हुआ कि पवन जाटव और बलजीत सिंह, सुनील पटेल के कहने पर अवैध रूप से गांजा लेने के लिए संबलपुर (ओडिशा) गए थे। वहां से लगभग 8 किलोग्राम गांजा प्राप्त कर वे ट्रेन से वापस लौट रहे थे। कटनी के पहले पुलिस चेकिंग की आशंका होने पर दोनों ने गांजे का पैकेट एवं पवन का मोबाइल ट्रेन से बाहर फेंक दिया। गांजा खरीदने के लिए राशि सुनील पटेल द्वारा ऑनलाइन माध्यम से भुगतान की गई थी। गांजा नष्ट हो जाने के कारण हुए आर्थिक नुकसान की भरपाई करने तथा खर्च की गई रकम वापस प्राप्त करने के उद्देश्य से सुनील पटेल, पवन जाटव, बलजीत सिंह, शुभम पटेल एवं अरविंद दुबे ने मिलकर यह सुनियोजित षड्यंत्र रचा। आरोपियों ने पवन के अपहरण की झूठी कहानी बनाई और उसके पिता को फोन कर ₹2 लाख की फिरौती मांगना शुरू कर दिया, जबकि फरियादी द्वारा केवल ₹30 हजार की व्यवस्था किए जाने के कारण आरोपी लगातार उन्हें गुमराह करते रहे। मामले की गंभीरता को देखते हुए थाना देवरी में अपराध क्रमांक 230/2026 धारा 140(2) बीएनएस के तहत अपराध पंजीबद्ध कर तत्काल जांच प्रारंभ की गई। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री लोकेश कुमार सिन्हा एवं नगर पुलिस अधीक्षक श्री ललित कश्यप के निर्देशन में थाना प्रभारी देवरी निरीक्षक हरिराम मानकर, उप निरीक्षक समरथ सीनम, थाना प्रभारी मोतीनगर निरीक्षक जसवंत सिंह राजपूत, सूचना संकलन तंत्र एवं साइबर टीम की संयुक्त टीम गठित कर तकनीकी एवं भौतिक साक्ष्यों के आधार पर सघन जांच की गई। पुलिस ने चितौरा टोल के पास एक ऑल्टो-800 कार क्रमांक MP-15-CA-7570 को चिन्हित कर उसमें सवार कथित अपहृत पवन जाटव सहित अरविंद दुबे, बलजीत सिंह एवं शुभम पटेल को अभिरक्षा में लिया। पूछताछ में सामने आए तथ्यों ने पूरे घटनाक्रम का चौंकाने वाला खुलासा कर दिया। पुलिस की सतर्कता, तकनीकी विश्लेषण एवं त्वरित कार्रवाई के चलते यह पूरी साजिश बेनकाब हो गई। पुलिस ने अरविंद दुबे, बलजीत सिंह, शुभम पटेल एवं पवन जाटव को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि मुख्य साजिशकर्ता सुनील पटेल फरार है, जिसकी तलाश के लिए पुलिस टीम लगातार दबिश दे रही है। प्रकरण में प्रयुक्त ऑल्टो कार, मोबाइल फोन एवं अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य जब्त कर लिए गए हैं। विवेचना के दौरान यह तथ्य भी सामने आया है कि बलजीत सिंह एवं फरार आरोपी सुनील पटेल पूर्व में एनडीपीएस एक्ट के प्रकरण में गाडरवारा जेल में एक साथ निरुद्ध रह चुके हैं। पुलिस इनकी आपराधिक पृष्ठभूमि एवं अन्य गतिविधियों की भी विस्तृत जांच कर रही है, साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि आरोपियों का नेटवर्क मादक पदार्थों की अवैध तस्करी से किस स्तर तक जुड़ा हुआ है। देवरी पुलिस की तत्परता और पेशेवर जांच के कारण 24 घंटे के भीतर पूरे मामले का खुलासा कर लिया गया तथा फरियादी परिवार को राहत प्रदान की गई। इस सराहनीय कार्य में थाना प्रभारी देवरी निरीक्षक हरिराम मानकर, उप निरीक्षक समरथ सीनम, आरक्षक लवकुश, समीर, इमरान, थाना प्रभारी मोतीनगर निरीक्षक जसवंत सिंह राजपूत व उनकी टीम, सूचना संकलन तंत्र के आरक्षक आशीष गौतम, मनीष तिवारी, प्रधान आरक्षक सौरभ रैकवार तथा आरक्षक हेमेन्द्र, साइबर सेल सागर की विशेष भूमिका रही।1
- मध्य प्रदेश में राज्यसभा सीटों के चुनाव के दौरान भारी राजनीतिक ड्रामा देखने को मिला है। भोपाल में हुई इस चुनावी हलचल के बीच, कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र जांच प्रक्रिया के दौरान खारिज कर दिया गया। इसके अलावा, राज्य की राजनीति उस समय और गरमा गई, जब कई कांग्रेस विधायकों के बेंगलुरु जाने की खबरें सामने आईं।1
- बीना पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए एक आरोपी भरत सेन को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। आरोपी भरत सेन पर चाकू की नोंक पर लूट की वारदात को अंजाम देने का आरोप है।1
- अशोकनगर ज़िले के मुंगावली में स्थित श्री सिद्धेश्वर महादेव मंदिर के प्रांगण में लगे हरे-भरे पेड़ों की कटाई का मामला सामने आया है। भक्तगण श्रद्धालुओं ने इस कार्रवाई का आरोप निर्माणधीन खाटु श्याम मंदिर की समिति के सदस्यों पर लगाया है। श्रद्धालुओं का कहना है कि यह कटाई बगैर किसी जन असुविधा के की जा रही है।1
- सागर जिले में पुलिस अधीक्षक श्री अनुराग सुजानिया के निर्देशन में चलाए जा रहे प्रभावी अभियान के तहत बीना पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने चाकू की नोक पर एक राहगीर से लूट की वारदात को अंजाम देने वाले आदतन अपराधी को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से लूटे गए ₹5000 नकद, पर्स, आधार कार्ड और पैन कार्ड समेत अन्य दस्तावेज बरामद किए हैं, साथ ही वारदात में इस्तेमाल किया गया चाकू भी जब्त कर लिया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह घटना 11 जून 2026 की रात लगभग 09:00 बजे हुई थी। फरियादी, जो मजदूरी का काम करता है, शास्त्री वार्ड से मुख्य मार्ग की ओर जा रहा था, तभी बंद गुल्ला ढाबा के पास आरोपी भरत सेन ने उसका रास्ता रोक लिया। आरोपी ने चाकू दिखाकर जान से मारने की धमकी दी और फरियादी की जेब से पर्स छीन लिया, जिसमें ₹5000 नकद के साथ आधार कार्ड, पैन कार्ड और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज थे। विरोध करने पर आरोपी ने फरियादी के साथ मारपीट भी की और धमकी देकर मौके से फरार हो गया। घटना की सूचना मिलते ही बीना थाना पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए अपराध क्रमांक 290/2026, धारा 309(6) भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत मामला दर्ज कर आरोपी की तलाश शुरू की। पुलिस टीम ने तेजी से कार्रवाई करते हुए आरोपी भरत पिता रामसेवक सेन (उम्र 53 वर्ष, निवासी बीना) की घेराबंदी कर उसे गिरफ्तार किया। पूछताछ में यह भी सामने आया कि गिरफ्तार आरोपी एक आदतन अपराधी है, जिसके खिलाफ थाना बीना में पहले से ही 10 आपराधिक प्रकरण दर्ज हैं। आरोपी को माननीय न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया, जहां से उसे न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया। बीना पुलिस की इस त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई से न केवल लूट की वारदात का शीघ्र खुलासा हुआ है, बल्कि अपराधियों को यह स्पष्ट संदेश भी गया है कि कानून व्यवस्था को चुनौती देने वालों के विरुद्ध सख्त और निर्णायक कार्रवाई जारी रहेगी। सागर पुलिस आमजन की सुरक्षा और अपराध नियंत्रण के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है।1
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- बीना में रेलवे ट्रैक के पास लहूलुहान हालत में मिली 14 साल की बच्ची की पहचान हो गई है। वह महाराष्ट्र के पुणे की रहने वाली अंशिका द्विवेदी है, जो अपने परिवार के साथ ट्रेन में सफर कर रही थी। बीना-आगासौद रेलवे ट्रैक के पास मिली इस बच्ची की हालत अब भी काफी नाजुक बनी हुई है। बुधवार की आधी रात को बीना-आगासौद रेलवे ट्रैक पर आईबीएच (IBH) सिग्नल के पास एक मालगाड़ी के लोको पायलट (ड्राइवर) ने बच्ची को गंभीर हालत में देखा था। उन्होंने सूझबूझ दिखाते हुए बच्ची को वहां से उठाया और बीना रेलवे स्टेशन पहुंचाया, जहां से उसे सिविल अस्पताल ले जाया गया। हालत ज्यादा खराब होने के कारण उसे तुरंत बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज (BMC) सागर रेफर कर दिया गया। बच्ची की पहचान भोपाल कंट्रोल रूम की मदद से हुई। बीना जीआरपी ने बच्ची को सागर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराने के बाद उसकी फोटो पहचान के लिए भोपाल कंट्रोल रूम भेजी थी। शुक्रवार को उसकी शिनाख्त पुणे निवासी अंशिका द्विवेदी के रूप में हुई, जिसके बाद जीआरपी ने तुरंत उसके परिवार को हादसे की खबर दी। परिजनों ने पुलिस को बताया कि अंशिका अपनी माँ के साथ ट्रेन नंबर 01407 हड़पसर एक्सप्रेस के एस-4 कोच में सफर कर रही थी। रात करीब 11 बजे वह टॉयलेट जाने का कहकर सीट से उठी थी, लेकिन उसके बाद वापस नहीं लौटी। परेशान परिवार ने इसकी शिकायत 'रेल मदद' ऐप पर भी दर्ज कराई थी। आशंका जताई जा रही है कि चलती ट्रेन से पैर फिसलने या संतुलन बिगड़ने के कारण वह नीचे गिर गई और गंभीर रूप से जख्मी हो गई। सागर अस्पताल के डॉक्टरों के मुताबिक, बच्ची अभी बेहोश है और बयान देने की स्थिति में नहीं है। अस्पताल के महिला प्रसूति विभाग की डॉक्टर ने शुरुआती बाहरी जांच के बाद यह साफ किया है कि बच्ची के साथ किसी भी तरह की कोई अप्रिय घटना नहीं हुई है। बीना जीआरपी थाना प्रभारी बीबीएस ठाकुर ने बताया कि बच्ची की पहचान होने के बाद उसके माता-पिता को जानकारी दे दी गई है, जो जल्द ही सागर पहुंचने वाले हैं। परिजनों के आने और बच्ची के होश में आने के बाद ही हादसे की असली वजह सामने आ पाएगी।1