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लोकेशन सतना सतना ईदगाह *नो-एंट्री को ठेंगा: सतना के ईदगाह चौक पर 'हैवी ट्रकों' का कब्जा, प्रशासन की चुप्पी से जनता बेहाल* शहर का व्यस्ततम इलाका ईदगाह चौक (अजमत मंजिल वाली गली) इन दिनों भारी वाहनों का अवैध अड्डा बन चुका है। 'नो-एंट्री' जोन होने के बावजूद यहाँ दिन भर भारी भरकम ट्रकों की धमाचौकड़ी मची रहती है, जिससे न केवल यातायात व्यवस्था चरमरा गई है, बल्कि आम नागरिकों और व्यापारियों का जीना मुहाल हो गया है। जिम्मेदारों की अनदेखी से नियमों का उल्लंघन बेरोकटोक जारी है। इस गंभीर समस्या पर प्रशासन की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है।देखना यह होगा कि क्या जिला प्रशासन और यातायात पुलिस इस पर कोई सख्त कार्रवाई करती है या जनता इसी तरह जाम के झाम में पिसती रहेगी।
रोहित कुमार पाठक
लोकेशन सतना सतना ईदगाह *नो-एंट्री को ठेंगा: सतना के ईदगाह चौक पर 'हैवी ट्रकों' का कब्जा, प्रशासन की चुप्पी से जनता बेहाल* शहर का व्यस्ततम इलाका ईदगाह चौक (अजमत मंजिल वाली गली) इन दिनों भारी वाहनों का अवैध अड्डा बन चुका है। 'नो-एंट्री' जोन होने के बावजूद यहाँ दिन भर भारी भरकम ट्रकों की धमाचौकड़ी मची रहती है, जिससे न केवल यातायात व्यवस्था चरमरा गई है, बल्कि आम नागरिकों और व्यापारियों का जीना मुहाल हो गया है। जिम्मेदारों की अनदेखी से नियमों का उल्लंघन बेरोकटोक जारी है। इस गंभीर समस्या पर प्रशासन की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है।देखना यह होगा कि क्या जिला प्रशासन और यातायात पुलिस इस पर कोई सख्त कार्रवाई करती है या जनता इसी तरह जाम के झाम में पिसती रहेगी।
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- मैहर। PWD मार्ग को निपटाने का बीड़ा उठाने का ढोल पीटने वाला अल्ट्राटेक प्रबंधन स्थानीय लोगों के पत्रों पर भी बेखबर बना रहा—या यूँ कहें, जानबूझकर अंधा! सूत्रों के मुताबिक उद्योग प्रबंधन के कुछ तथाकथित जिम्मेदार खुलेआम दंभ भरते फिर रहे हैं कि जिले के हर प्रशासनिक अधिकारी की निजी व्यवस्था हमारी है, महीना वेतन की तरह जाता है—तो ओवरलोड पत्थर परिवहन कैसे रोका जाए? वाह! कानून से ऊपर बैठा यह आत्मविश्वास किसकी शह पर? बताया जा रहा है कि पत्थर परिवहन करने वाली संस्था का सीधा रिश्ता अल्ट्राटेक से है। सवाल यह नहीं कि सड़कें टूट रहीं—सवाल यह है कि किसके संरक्षण में टूट रहीं। PWD मार्गों पर ओवरलोड ट्रकों का तांडव जारी है, और जिम्मेदारों की आंखों पर जैसे सीमेंट की परत जम गई हो।स्थानीय लोगों ने मैहर के जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से साफ अपील की है—अधिकारियों को वेतन और सुविधाएं सरकार देती है, किसी सीमेंट प्लांट का विश्रामगृह नहीं! जनता की सेवा की कसम खाई है तो कम से कम 50% तो निभा दीजिए। क्या इतना भी भारी है? इधर जनप्रतिनिधियों की कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्राम स्तर से लेकर बड़े मंचों तक—एक जैसी चुप्पी! क्या यह मौन सहमति है या सुविधाजनक विवशता?उधर उद्योग प्रबंधन के कुछ लोग अकड़ में कहते फिरते हैं कि प्रशासन और जनप्रतिनिधि हमारी उंगलियों पर नाचते हैं। अगर यह झूठ है तो खंडन क्यों नहीं? और अगर सच है तो शर्म किसे आनी चाहिए?जनहित की मांगें—सड़क सुरक्षा, ओवरलोड पर रोक, जवाबदेही—सब मैहर की धरती में ही दफन होती दिख रही हैं। अब सवाल सीधा है: मैहर प्रशासन ओवरलोड वाहनों को रोकने जाएगा या संरक्षण की हदें और बढ़ेंगी? कानून चलेगा या मैनेजमेंट? जनता देख रही है, इतिहास लिख रहा है—और जवाबदेही दरवाज़े पर दस्तक दे रही है।1
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- सनसनीखेज मामला नपुंसक बताकर छोड़ा, तीस वर्ष बाद दूसरी संतान को फरियादी के सिर मढ़ने का आरोप DNA जांच और सुरक्षा की मांग खबर/मैहर, मध्यप्रदेश मैहर जिले के ग्राम पोड़ी निवासी एक व्यक्ति ने कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक से गुहार लगाते हुए एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने रखा है फरियादी रंगनाथ सेन (पिता जीवन सेन) ने आरोप लगाया है कि उनके साथ षड्यंत्र रचकर किसी अन्य की संतान को उनकी संतान बताया जा रहा है और डरा-धमकाकर उनकी संपत्ति हड़पने की कोशिश की जा रही है *क्या है पूरा मामला* रंगनाथ सेन, जो मां शारदा प्रबंध समिति के नाऊवाड़ा में कार्यरत हैं,बचपन का विवाह और अलगाव बाल्यावस्था में उनका विवाह 'घोखा बाई' से हुआ था कुछ समय बाद, शारीरिक संबंध न बन पाने की बात कहकर घोखा बाई ने ग्राम पंचायत में बैठक बुलवाई और प्रार्थी को 'नपुंसक' बताते हुए सामाजिक रीति-रिवाज से 'छोड़-छुट्टी' (तलाक) कर ली तीस साल के बाद नया मोड़ प्रार्थी का दावा है कि अलगाव के लगभग 30 वर्ष बाद, घोखा बाई के जीजा शम्भू सेन और उनके परिवार ने एक लड़की (सोना उर्फ मोना) को प्रार्थी की संतान बताकर पेश किया धमकी और जबरन वसूली आरोप है कि शम्भू सेन, कमला सेन और बबलू सेन ने जान से मारने की धमकी देकर प्रार्थी को डराया, जिसके डर से प्रार्थी ने अपनी 3 बिस्वा जमीन बेचकर उन्हें नकद राशि भी दी *प्रार्थी के मुख्य तर्क* वैज्ञानिक आधार फरियादी का कहना है कि जब उनके और घोखा बाई के बीच कभी शारीरिक संबंध ही नहीं बने, और अलगाव के 2 साल बाद बच्ची का जन्म हुआ, तो वह उनकी संतान कैसे हो सकती है षड्यंत्र फरियादी ने आरोप लगाया है कि आरोपीगण शैक्षणिक दस्तावेजों में फर्जी तरीके से उनका नाम पिता के रूप में दर्ज करवाकर उनकी चल-अचल संपत्ति पर कब्जा करना चाहते हैं DNA टेस्ट की मांग न्याय की गुहार लगाते हुए फरियादी ने जिला प्रशासन से मांग की है कि उक्त लड़की का DNA टेस्ट कराया जाए ताकि सच सामने आ सके *कड़े कदम की चेतावनी* फरियादी रंगनाथ सेन ने आवेदन में स्पष्ट किया है कि वे लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित हो रहे हैं और उन्हें जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि इस मामले की निष्पक्ष जांच नहीं हुई और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई, तो वे पुलिस अधीक्षक कार्यालय के सामने आत्महत्या करने को मजबूर होंगे *कानूनी सलाह और अगला कदम (आपके लिए सुझाव)* (1)दस्तावेजों का संग्रह: ग्राम पंचायत में हुए उस पुराने सामाजिक समझौते (छोड़-छुट्टी के कागज) की कॉपी सुरक्षित रखें जहाँ प्रार्थी को नपुंसक बताकर अलग होने की बात कही गई थी (2)DNA टेस्ट के लिए आवेदन: आप न्यायालय के समक्ष धारा 125 CrPC (या नए कानून के तहत) या सिविल सूट के दौरान DNA टेस्ट की मांग कर सकते हैं। वैज्ञानिक साक्ष्य ही इस मामले में सबसे मजबूत हथियार है (3)पुलिस में FIR: यदि आपको जान का खतरा है, तो धारा 351 (धमकी) और 308 (वसूली के लिए डराना) के तहत औपचारिक स्थानीय थाना को FIR दर्ज करना अनिवार्य है1
- सतना: कलेक्टर के आदेश बेअसर, बोर्ड परीक्षा के बीच 'शोर के सौदागरों' का तांडव सतना/बिरसिंहपुर: जिले में बोर्ड परीक्षाये शुरु हो चुकी है, लेकिन प्रशासन के शांतिपूर्ण परीक्षा कराने के दावों की हवा निकलती दिखाई दे रही है। एक तरफ कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 163 के तहत कड़े प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किए हैं, वहीं दूसरी ओर बिरसिंहपुर तहसील और सभापुर थाना क्षेत्र में इन नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। कागजों तक सीमित 'साइलेंस जोन' कलेक्टर के स्पष्ट निर्देश हैं कि परीक्षा केंद्रों के 200 मीटर के दायरे में किसी भी प्रकार का शोर या धरना-प्रदर्शन प्रतिबंधित रहेगा। साथ ही, म.प्र. कोलाहल नियंत्रण अधिनियम 1985 के तहत रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक लाउडस्पीकर और डीजे पर पूर्ण प्रतिबंध है। इसके बावजूद, सभापुर क्षेत्र में देर रात तक बज रहे 'कान फोड़ू' डीजे छात्रों की एकाग्रता भंग कर रहे हैं। प्रशासन की चुप्पी पर सवाल हैरानी की बात यह है कि आदेश का उल्लंघन करने पर धारा-223 (BNS) के तहत दंडात्मक कार्रवाई और डीजे जब्ती का प्रावधान है, फिर भी पुलिस और स्थानीय प्रशासन मौन है। छात्रों का कहना है कि शोर के कारण वे ठीक से रिवीजन नहीं कर पा रहे हैं। अब सवाल यह उठता है कि क्या प्रशासन केवल आदेश जारी करने तक सीमित रहेगा या इन "शोर के सौदागरों" पर सख्त कार्रवाई कर छात्रों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण मुहैया कराएगा?2