जहानाबाद जिले के काको प्रखंड स्थित पिंजोरा गांव की शिखा कुमारी ने बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) की परीक्षा में सहायक अनुसंधान अधिकारी (एआरओ) के पद पर चयनित होकर पूरे इलाके और जिले का नाम रोशन किया है। सीमित संसाधनों और साधारण पारिवारिक पृष्ठभूमि से आने के बावजूद उनकी यह सफलता क्षेत्र के लिए प्रेरणा बन गई है। शिखा के पिता दयानंद कुमार गांव में निजी शिक्षक हैं, जबकि उनकी माता प्रतिमा कुमारी आंगनबाड़ी सेविका के रूप में कार्यरत हैं। सीमित आय के बावजूद, शिखा के माता-पिता ने उनकी शिक्षा में कोई कमी नहीं आने दी। उनकी मेहनत और परिवार के सहयोग के दम पर ही शिखा ने यह महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। शिखा बचपन से ही एक मेधावी छात्रा रही हैं, जिन्होंने अपनी प्रारंभिक और स्कूली शिक्षा जवाहर नवोदय विद्यालय, जहानाबाद से पूरी की। इसके बाद उन्होंने पटना विश्वविद्यालय के मगध महिला कॉलेज से स्नातक की डिग्री प्राप्त की। पढ़ाई के दौरान उन्हें विशेष रुचि हिंदी साहित्य में भी थी, जिसने उनके व्यक्तित्व और सोच को नई दिशा दी। परिवार में शुरू से ही शिक्षा का माहौल रहा है; उनके भाई विकास कुमार ने भी सिमुलतला आवासीय विद्यालय से पढ़ाई के बाद इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की और वर्तमान में इंजीनियर के तौर पर कार्यरत हैं। शिखा की इस सफलता की खबर मिलते ही पिंजोरा गांव में खुशी की लहर दौड़ गई, और ग्रामीणों तथा शुभचिंतकों ने उनके घर पहुंचकर बधाई दी। लोगों का कहना है कि शिखा ने न केवल अपने माता-पिता का सम्मान बढ़ाया है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्र की अन्य बेटियों के लिए भी एक नई मिसाल कायम की है। शिखा ने अपनी इस उपलब्धि का श्रेय अपने माता-पिता के त्याग, भाई के मार्गदर्शन और अपने गुरुजनों के सहयोग को दिया है। उनकी यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि दृढ़ संकल्प और कड़ी मेहनत से कोई भी बाधा बड़ी नहीं होती।
जहानाबाद जिले के काको प्रखंड स्थित पिंजोरा गांव की शिखा कुमारी ने बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) की परीक्षा में सहायक अनुसंधान अधिकारी (एआरओ) के पद पर चयनित होकर पूरे इलाके और जिले का नाम रोशन किया है। सीमित संसाधनों और साधारण पारिवारिक पृष्ठभूमि से आने के बावजूद उनकी यह सफलता क्षेत्र के लिए प्रेरणा बन गई है। शिखा के पिता दयानंद कुमार गांव में निजी शिक्षक हैं, जबकि उनकी माता प्रतिमा कुमारी आंगनबाड़ी सेविका के रूप में कार्यरत हैं। सीमित आय के बावजूद, शिखा के माता-पिता ने उनकी शिक्षा में कोई कमी नहीं आने दी। उनकी मेहनत और परिवार के सहयोग के दम पर ही शिखा ने यह महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। शिखा बचपन से ही एक मेधावी छात्रा रही हैं, जिन्होंने अपनी प्रारंभिक और स्कूली शिक्षा जवाहर नवोदय विद्यालय, जहानाबाद से पूरी की। इसके बाद उन्होंने पटना विश्वविद्यालय के मगध महिला कॉलेज से स्नातक की डिग्री प्राप्त की। पढ़ाई के दौरान उन्हें विशेष रुचि हिंदी साहित्य में भी थी, जिसने उनके व्यक्तित्व और सोच को नई दिशा दी। परिवार में शुरू से ही शिक्षा का माहौल रहा है; उनके भाई विकास कुमार ने भी सिमुलतला आवासीय विद्यालय से पढ़ाई के बाद इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की और वर्तमान में इंजीनियर के तौर पर कार्यरत हैं। शिखा की इस सफलता की खबर मिलते ही पिंजोरा गांव में खुशी की लहर दौड़ गई, और ग्रामीणों तथा शुभचिंतकों ने उनके घर पहुंचकर बधाई दी। लोगों का कहना है कि शिखा ने न केवल अपने माता-पिता का सम्मान बढ़ाया है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्र की अन्य बेटियों के लिए भी एक नई मिसाल कायम की है। शिखा ने अपनी इस उपलब्धि का श्रेय अपने माता-पिता के त्याग, भाई के मार्गदर्शन और अपने गुरुजनों के सहयोग को दिया है। उनकी यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि दृढ़ संकल्प और कड़ी मेहनत से कोई भी बाधा बड़ी नहीं होती।
- जहानाबाद जिले के काको प्रखंड स्थित पिंजोरा गांव की शिखा कुमारी ने बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) की परीक्षा में सहायक अनुसंधान अधिकारी (एआरओ) के पद पर चयनित होकर पूरे इलाके और जिले का नाम रोशन किया है। सीमित संसाधनों और साधारण पारिवारिक पृष्ठभूमि से आने के बावजूद उनकी यह सफलता क्षेत्र के लिए प्रेरणा बन गई है। शिखा के पिता दयानंद कुमार गांव में निजी शिक्षक हैं, जबकि उनकी माता प्रतिमा कुमारी आंगनबाड़ी सेविका के रूप में कार्यरत हैं। सीमित आय के बावजूद, शिखा के माता-पिता ने उनकी शिक्षा में कोई कमी नहीं आने दी। उनकी मेहनत और परिवार के सहयोग के दम पर ही शिखा ने यह महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। शिखा बचपन से ही एक मेधावी छात्रा रही हैं, जिन्होंने अपनी प्रारंभिक और स्कूली शिक्षा जवाहर नवोदय विद्यालय, जहानाबाद से पूरी की। इसके बाद उन्होंने पटना विश्वविद्यालय के मगध महिला कॉलेज से स्नातक की डिग्री प्राप्त की। पढ़ाई के दौरान उन्हें विशेष रुचि हिंदी साहित्य में भी थी, जिसने उनके व्यक्तित्व और सोच को नई दिशा दी। परिवार में शुरू से ही शिक्षा का माहौल रहा है; उनके भाई विकास कुमार ने भी सिमुलतला आवासीय विद्यालय से पढ़ाई के बाद इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की और वर्तमान में इंजीनियर के तौर पर कार्यरत हैं। शिखा की इस सफलता की खबर मिलते ही पिंजोरा गांव में खुशी की लहर दौड़ गई, और ग्रामीणों तथा शुभचिंतकों ने उनके घर पहुंचकर बधाई दी। लोगों का कहना है कि शिखा ने न केवल अपने माता-पिता का सम्मान बढ़ाया है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्र की अन्य बेटियों के लिए भी एक नई मिसाल कायम की है। शिखा ने अपनी इस उपलब्धि का श्रेय अपने माता-पिता के त्याग, भाई के मार्गदर्शन और अपने गुरुजनों के सहयोग को दिया है। उनकी यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि दृढ़ संकल्प और कड़ी मेहनत से कोई भी बाधा बड़ी नहीं होती।1
- केंद्र सरकार और राज्य सरकार हरेक मोर्चे पर पूरी तरह से विफल हो गई हैं। युवा पीढ़ी नौकरी करने को तैयार है, लेकिन सरकारें उन्हें रोजगार उपलब्ध कराने में पूर्णतया असफल रही हैं। यह विफलता तब और गंभीर हो जाती है जब सरकार द्वारा आयोजित परीक्षाओं के प्रश्न पत्र लगातार लीक हो रहे हैं, जिससे युवाओं के भविष्य पर सीधा असर पड़ रहा है। #NEETPAPER जैसे मामलों का जिक्र करते हुए, यह स्पष्ट है कि रोजगार सृजन और परीक्षा पारदर्शिता दोनों ही क्षेत्रों में सरकारों का प्रदर्शन निराशाजनक है।1
- पटना के मसौढ़ी थाना क्षेत्र के तुलसीचक गांव में एक युवती के साथ सामूहिक दुष्कर्म की सनसनीखेज घटना सामने आई है, जिससे इलाके में दहशत और आक्रोश का माहौल है। पुलिस ने मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए नामजद दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। जानकारी के अनुसार, यह घटना 20 जून की रात करीब 9 बजे हुई, जब पीड़िता अपने घर से पश्चिम दिशा में शौच के लिए जा रही थी। रास्ते में पहले से मौजूद दो युवकों ने उसे पकड़ लिया। आरोप है कि दोनों आरोपियों ने युवती के हाथ-पैर बांध दिए और मुंह बंद कर उसे सुनसान स्थान पर ले गए। पीड़िता के लिखित आवेदन के मुताबिक, आरोपियों ने बारी-बारी से उसके साथ दुष्कर्म किया और विरोध करने पर मारपीट भी की। घटना को अंजाम देने के बाद उन्होंने पीड़िता को जान से मारने की धमकी दी, यदि उसने किसी को जानकारी दी। आरोपी फरार होने के बाद पीड़िता किसी तरह अपने घर पहुंची और परिजनों को पूरी घटना बताई, जिसके बाद परिजनों ने तत्काल पुलिस को सूचना दी। मसौढ़ी थाना पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पीड़िता के आवेदन के आधार पर मसौढ़ी थाना कांड संख्या-519/26 दर्ज किया। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित गंभीर धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की। कांड दर्ज होने के तुरंत बाद पुलिस ने छापेमारी कर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मनोज मांझी (पिता- लालचंद मांझी) और मिथलेश मांझी उर्फ भीम (पिता- स्वर्गीय सागर मांझी) के रूप में हुई है, जो दोनों तुलसीचक मुसहरी, थाना मसौढ़ी, जिला पटना के निवासी हैं। पुलिस ने दोनों आरोपियों को न्यायालय में प्रस्तुत करने के बाद न्यायिक हिरासत में भेज दिया है, जबकि मामले के अन्य पहलुओं और साक्ष्यों की जांच जारी है। इस घटना के सामने आने के बाद गांव में लोगों में आक्रोश व्याप्त है और ग्रामीण दोषियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। वहीं, पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की निष्पक्ष एवं त्वरित जांच की जा रही है और पीड़िता को हर संभव कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।1
- बिक्रम के अख्तियारपुर मंझौली में 36वीं बिहार स्टेट शूटिंग चैंपियनशिप का सफल आयोजन संपन्न हो गया है।1
- ग्राम पंचायत माली के समस्त युवा साथियों, नौजवान भाइयों, माताओं-बहनों, चाचा-चाची और सम्मानित बुद्धिजीवी वर्ग से एक विनम्र निवेदन किया गया है।1
- जहानाबाद जिले के काको थाना क्षेत्र में एक दर्दनाक सड़क हादसे में एक युवक की मौत हो गई। महमदपुर गांव के पास हुई इस घटना में एक तेज रफ्तार हाइवा ट्रक ने पैदल जा रहे युवक को पीछे से जोरदार टक्कर मार दी। मृतक की पहचान काको थाना क्षेत्र के पराधी गांव निवासी प्रिंस कुमार के रूप में की गई है। परिजनों के अनुसार, प्रिंस कुमार अपने घर से दवा लेने के लिए पैदल निकला था। इसी दौरान जहानाबाद की ओर से आ रही तेज रफ्तार हाइवा ने उसे पीछे से टक्कर मारी। टक्कर इतनी भीषण थी कि प्रिंस सड़क किनारे स्थित नहर में जा गिरा और गंभीर रूप से घायल हो गया। हादसे के तुरंत बाद, आसपास मौजूद स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे और घायल युवक को नहर से बाहर निकालकर इलाज के लिए सदर अस्पताल, जहानाबाद पहुंचाया। हालांकि, अस्पताल में डॉक्टरों ने जाँच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। युवक की मौत की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया और पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई। मृतक के चाचा अवधेश कुमार ने भी बताया कि प्रिंस कुमार दवा लेने जा रहा था, तभी तेज रफ्तार हाइवा ने उसे पीछे से टक्कर मार दी, जिससे वह नहर में गिर गया और उसकी जान नहीं बचाई जा सकी। घटना की सूचना मिलने के बाद स्थानीय थाना पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जाँच शुरू कर दी है। पुलिस हादसे के कारणों की पड़ताल कर रही है और हाइवा चालक की पहचान कर उसके खिलाफ आगे की कार्रवाई में जुटी हुई है। इस दुखद हादसे ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा और तेज रफ्तार वाहनों पर नियंत्रण को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।1
- दलित समाज से संबंधित कुछ लोगों ने कबीर साहेब के मठ मंदिर को एक आवासीय आश्रम में परिवर्तित करने की इच्छा व्यक्त की है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया है कि वे गरीब हैं और उनके पास आश्रम बनाने के लिए पर्याप्त धन नहीं है, जिसके कारण उन्होंने मदद की गुहार लगाई है।1