जुबान में कटुता और व्यवहार में तानाशाही, वर्दी का प्रभाव दिखाकर यह कैसी ईमानदारी निभाई जा रही है? जुबान में कटुता और व्यवहार में तानाशाही, वर्दी का प्रभाव दिखाकर यह कैसी ईमानदारी निभाई जा रही है? कहते हैं कि चोर को छोड़कर बेगुनाहों पर अत्याचार किए जाते हैं। अब तो ऐसा प्रतीत होता है कि कुछ पुलिसकर्मी अपनी मर्यादा और सीमाएँ भी भूलते जा रहे हैं। सरायइनायत पुलिस का यह कोई पहला मामला नहीं बताया जा रहा है। इससे पहले भी इस प्रकार की घटनाओं की चर्चा होती रही है। वर्तमान में जो वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, उसमें आधी रात को कुछ लोगों को अर्धनग्न अवस्था में ले जाते हुए दिखाया जा रहा है। प्रश्न यह उठता है कि यदि कोई अपराध हुआ भी था, तो ऐसा कौन-सा अपराध था कि उन्हें कपड़े पहनने का अवसर तक नहीं दिया गया? वीडियो में देखा जा सकता है कि पूरा परिवार दरोगा से निवेदन कर रहा है कि कम से कम उन्हें वस्त्र पहनने दिया जाए, परंतु उनकी बात पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। बाद में कुछ अधिवक्ताओं ने थाने पहुँचकर इस विषय में कारण जानने का प्रयास भी किया, किंतु थाना प्रभारी की ओर से कोई संतोषजनक उत्तर प्राप्त नहीं हुआ। अब यह वीडियो लगातार वायरल हो रहा है और लोग इस पूरे मामले की निष्पक्ष जाँच तथा दोषियों पर कार्रवाई की माँग कर रहे हैं, ताकि पीड़ितों को न्याय मिल सके और व्यवस्था में सुधार हो सके।
जुबान में कटुता और व्यवहार में तानाशाही, वर्दी का प्रभाव दिखाकर यह कैसी ईमानदारी निभाई जा रही है? जुबान में कटुता और व्यवहार में तानाशाही, वर्दी का प्रभाव दिखाकर यह कैसी ईमानदारी निभाई जा रही है? कहते हैं कि चोर को छोड़कर बेगुनाहों पर अत्याचार किए जाते हैं। अब तो ऐसा प्रतीत होता है कि कुछ पुलिसकर्मी अपनी मर्यादा और सीमाएँ भी भूलते जा रहे हैं। सरायइनायत पुलिस का यह कोई पहला मामला नहीं बताया जा रहा है। इससे पहले भी इस प्रकार की घटनाओं की चर्चा होती रही है। वर्तमान में जो वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, उसमें आधी रात को कुछ लोगों को अर्धनग्न अवस्था में ले जाते हुए दिखाया जा रहा है। प्रश्न यह उठता है कि यदि कोई अपराध हुआ भी था, तो ऐसा कौन-सा अपराध था कि उन्हें कपड़े पहनने का अवसर तक नहीं दिया गया? वीडियो में देखा जा सकता है कि पूरा परिवार दरोगा से निवेदन कर रहा है कि कम से कम उन्हें वस्त्र पहनने दिया जाए, परंतु उनकी बात पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। बाद में कुछ अधिवक्ताओं ने थाने पहुँचकर इस विषय में कारण जानने का प्रयास भी किया, किंतु थाना प्रभारी की ओर से कोई संतोषजनक उत्तर प्राप्त नहीं हुआ। अब यह वीडियो लगातार वायरल हो रहा है और लोग इस पूरे मामले की निष्पक्ष जाँच तथा दोषियों पर कार्रवाई की माँग कर रहे हैं, ताकि पीड़ितों को न्याय मिल सके और व्यवस्था में सुधार हो सके।
- रिपोर्ट केवला प्रसाद प्रयागराज जनपद के हंडिया क्षेत्र से एक बड़ी खबर सामने आई है। हंडिया तहसील कचहरी में प्रैक्टिस करने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता वशिष्ठ नारायण पांडे (60) अपने बेटे सत्यम पांडे (30) के साथ घर लौट रहे थे, तभी कनकपुर के पास एक ई रिक्शा से भीषण सड़क हादसा हो गया। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और आसपास के लोग तुरंत मदद के लिए दौड़ पड़े। मिली जानकारी के अनुसार वशिष्ठ नारायण पांडे और उनके पुत्र सत्यम पांडे हंडिया कचहरी से अपने घर मिदियुरा जा रहे थे। जैसे ही वे कनकपुर के पास पहुंचे, तभी अचानक दुर्घटना हो गई। टक्कर इतनी तेज थी कि दोनों सड़क पर गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के बाद स्थानीय लोगों ने तुरंत 108 एम्बुलेंस सेवा को सूचना दी। सूचना मिलते ही एम्बुलेंस मौके पर पहुंची और दोनों घायलों को तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र उपरदहा पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार शुरू किया। डॉक्टरों के अनुसार हादसे में पिता-पुत्र दोनों के दाहिने पैर में गंभीर चोटें आई हैं और हड्डियां टूट गई हैं। वहीं प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि दुर्घटना इतनी भीषण थी कि वरिष्ठ अधिवक्ता वशिष्ठ नारायण पांडे का दाहिना पैर कट गया। उनकी हालत को गंभीर देखते हुए डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद दोनों को बेहतर इलाज के लिए जिला अस्पताल रेफर कर दिया। हादसे की खबर मिलते ही हंडिया कचहरी के अधिवक्ताओं, परिचितों और क्षेत्रीय लोगों में चिंता का माहौल बन गया और कई लोग अस्पताल पहुंचने लगे। फिलहाल जिला अस्पताल में दोनों का इलाज जारी है और डॉक्टरों की टीम उनकी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। उधर पुलिस भी पूरे मामले की जानकारी जुटाने में लगी हुई है और हादसे के कारणों की जांच की जा रही है।1
- Post by रंजना हडिया प्रयागराज मोबाइल नंबर,84169043591
- कोरांव तहसील में आज भी पुलिस विरोधी नारेबाजी के साथ अधिवक्ताओ ने बन्द कराया ताला1
- अमवा माफी ब्रिज के नीचे एम्बुलेंस और कार में टक्कर, सभी सुरक्षित गोपीगंज थाना क्षेत्र के अमवा माफी ब्रिज के नीचे शनिवार को एम्बुलेंस और अर्टिका कार के बीच टक्कर हो गई। हादसे में दोनों वाहनों को नुकसान पहुंचा, हालांकि किसी के घायल होने की सूचना नहीं है। जानकारी के अनुसार अर्टिका कार में सवार चालक सीवलाल, प्रमिला देवी और रीना देवी निवासी हिराचक डेहरिया बाल-बाल बच गए। वहीं एम्बुलेंस चालक राकेश कुमार और ईएमटी रबी भी पूरी तरह सुरक्षित हैं। घटना की सूचना मिलने पर 112 पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों पक्षों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन किसी भी पक्ष ने समझौता करने से इनकार कर दिया। इसके बाद पुलिस दोनों वाहनों और संबंधित लोगों को आगे की कार्रवाई के लिए थाने ले गई।2
- मेजा, प्रयागराज। विकासखंड उरूवा के मेजा रोड बाजार से सिरसा मार्ग पर सड़क किनारे खड़ा सूखा महुआ का पेड़ दुर्घटना को दावत देता नजर आ रहा है। लंबे समय से पेड़ पूरी तरह सूखकर जर्जर स्थिति में खड़ा है, जिससे कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। इसके बावजूद संबंधित विभाग की ओर से इसे हटाने की दिशा में अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। इसको लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह मार्ग क्षेत्र का प्रमुख संपर्क मार्ग है, जहां से दिनभर दोपहिया, चारपहिया वाहनों के साथ भारी वाहन भी गुजरते हैं। सड़क के किनारे खड़ा यह सूखा महुआ का पेड़ किसी भी समय गिर सकता है, जिससे राहगीरों और वाहन चालकों की जान को खतरा बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार इस समस्या की ओर जिम्मेदार अधिकारियों का ध्यान दिलाया गया, लेकिन अब तक केवल आश्वासन ही मिला है। यमुनापार ट्रक एसोसिएशन के अध्यक्ष अखिलेश मिश्रा ने इस मामले में कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि क्षेत्र में वन विभाग की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है। उनका आरोप है कि वन विभाग की कथित मिलीभगत से हरे-भरे पेड़ों की कटाई लगातार जारी है, लेकिन जो पेड़ पूरी तरह सूखकर जर्जर हो चुके हैं और सड़क किनारे खड़े होकर दुर्घटना का कारण बन सकते हैं, उन्हें हटाने के लिए कोई पहल नहीं की जा रही है। उन्होंने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है कि विभाग की प्राथमिकता गलत दिशा में दिखाई दे रही है। अखिलेश मिश्रा ने कहा कि यदि समय रहते इस सूखे पेड़ को नहीं हटाया गया तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है और उसकी जिम्मेदारी संबंधित विभाग की होगी। उन्होंने बताया कि इस संबंध में वन क्षेत्राधिकारी अजय सिंह से शिकायत भी की गई है, लेकिन अब तक केवल कोरा आश्वासन ही मिला है। स्थानीय निवासी नंदन मिश्रा, दीपक शुक्ला, राजू केसरी, पंकज शुक्ला और धीरज शुक्ला ने भी वन विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रशासन को इस गंभीर समस्या पर तुरंत ध्यान देना चाहिए। ग्रामीणों ने मांग की है कि सड़क किनारे खड़े इस जर्जर सूखे पेड़ को जल्द हटवाया जाए, ताकि किसी संभावित दुर्घटना से पहले ही खतरे को टाला जा सके।1
- मेजा क्षेत्र के अछोला गांव नहर किनारे बना काली सड़क बना जर्जर प्राप्त जानकारी अनुसार गांव अंजोरा के नहर पटरी पर बनी काली सड़क बना लेकिन बहुत जल्द सड़क उधड़ कर मिट्टी में मिल गया। ग्रामीणों की मांग है कि अछोला गांव के नहर की पटरी बन काली सड़क को जल्द से जल्द बनवाया जाए जिससे आने-जाने में सुविधा हो।1
- Post by Raju Yadav1
- मेजा क्षेत्र में करोड रुपए की लागत से बनी पानी टंकी बना शो पीस ग्रामीणों में आक्रोश जानकारियां अनुसार अछोला गांव में करोड़ों रुपए की लागत से पानी की टंकी बनी लेकिन ग्रामीणों तक पानी नहीं पहुंच पाया जो की खंडहर हो गया ग्रामीणों का आरोप है कि इसका पैसा सब गमन कर लिया पानी की टंकी बना शोपीस। ग्रामीणों का आरोप है कि इतनी गर्मी में लोगों तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है यह बहुत दुर्भाग्य की बात है सरकार करोड़ों रुपए खर्च कर रहे लेकिन जमीनी स्तर पर देखा जाए तो सब खोखला है।1
- Post by Rohit kumar1