ओंकारेश्वर में, खंडवा जिले के खालवा ब्लॉक की तीन ग्राम पंचायतों के सरपंचों को राज्यपाल द्वारा सिकलसेल एनीमिया की 100% स्क्रीनिंग करने के लिए सम्मानित किया गया। इस सम्मान समारोह के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी उपस्थित रहे। यह सम्मान स्वास्थ्य जागरूकता और सिकलसेल उन्मूलन अभियान में उनके उत्कृष्ट कार्य के लिए दिया गया। इन सरपंचों ने अपने-अपने गांवों में घर-घर जाकर सिकलसेल की स्क्रीनिंग करवाई और लोगों को बीमारी के प्रति जागरूक किया, जिसके परिणामस्वरूप उन्होंने 100% लक्ष्य हासिल किया। राज्यपाल ने सरपंचों को प्रशस्ति पत्र और सम्मान चिन्ह भेंट किए। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सरपंचों और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि खंडवा जिले की इन पंचायतों ने सिकलसेल मुक्त मध्य प्रदेश बनाने की दिशा में एक मिसाल पेश की है। मुख्यमंत्री ने आदिवासी अंचल में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता पर भी जोर दिया। सिकलसेल स्क्रीनिंग में 100% लक्ष्य प्राप्त करने से खंडवा जिले का मान बढ़ा है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि यह उपलब्धि सरपंचों की सक्रियता और ग्रामीणों के सहयोग से ही संभव हुई है। राज्यपाल ने अन्य पंचायतों से भी इस अभियान से प्रेरणा लेने और उसमें सक्रियता से जुड़ने का आह्वान किया।
ओंकारेश्वर में, खंडवा जिले के खालवा ब्लॉक की तीन ग्राम पंचायतों के सरपंचों को राज्यपाल द्वारा सिकलसेल एनीमिया की 100% स्क्रीनिंग करने के लिए सम्मानित किया गया। इस सम्मान समारोह के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी उपस्थित रहे। यह सम्मान स्वास्थ्य जागरूकता और सिकलसेल उन्मूलन अभियान में उनके उत्कृष्ट कार्य के लिए दिया गया। इन सरपंचों ने अपने-अपने गांवों में घर-घर जाकर सिकलसेल की स्क्रीनिंग करवाई और लोगों को बीमारी के प्रति जागरूक किया, जिसके परिणामस्वरूप उन्होंने 100% लक्ष्य हासिल किया। राज्यपाल ने सरपंचों को प्रशस्ति पत्र और सम्मान चिन्ह भेंट किए। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सरपंचों और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि खंडवा जिले की इन पंचायतों ने सिकलसेल मुक्त मध्य प्रदेश बनाने की दिशा में एक मिसाल पेश की है। मुख्यमंत्री ने आदिवासी अंचल में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता पर भी जोर दिया। सिकलसेल स्क्रीनिंग में 100% लक्ष्य प्राप्त करने से खंडवा जिले का मान बढ़ा है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि यह उपलब्धि सरपंचों की सक्रियता और ग्रामीणों के सहयोग से ही संभव हुई है। राज्यपाल ने अन्य पंचायतों से भी इस अभियान से प्रेरणा लेने और उसमें सक्रियता से जुड़ने का आह्वान किया।
- शाहपुर के अड़गांव में अज्ञात बदमाशों ने द्वेष और ईर्ष्या के कारण एक किसान की मेहनत पर वार करते हुए उसकी 30 क्विंटल केले की फसल काट डाली। इस घटना में किसान को लगभग 70 हजार रुपये का भारी नुकसान हुआ है, क्योंकि बदमाशों ने उसके करीब 120 केले के पौधों को पूरी तरह से बर्बाद कर दिया। पुलिस इस पूरे मामले की जांच में जुट गई है।1
- खंडवा जिले के भेसावा गांव में भीषण पेयजल संकट ने ग्रामीणों की परेशानी बढ़ा दी है, जहां लोग सुबह से शाम तक पानी की तलाश में भटकने को मजबूर हैं। हालात ऐसे हैं कि महिलाओं को घर के कामकाज छोड़कर सिर पर मटके और हाथों में बर्तन लेकर दूर-दूर तक पानी जुटाने जाना पड़ रहा है। ग्रामीणों के अनुसार, गांव में लंबे समय से पेयजल की समस्या बनी हुई है, लेकिन अब स्थिति और भी गंभीर हो गई है। गांव के हैंडपंप और अन्य जलस्रोत पर्याप्त पानी नहीं दे पा रहे हैं, जिसके कारण लोगों को एक अस्थायी जलस्रोत और मोटर पंप के सहारे पानी भरना पड़ रहा है। वीडियो में भी बड़ी संख्या में महिलाएं, पुरुष और बच्चे पानी के बर्तन लेकर कतार में खड़े दिखाई दे रहे हैं। पानी भरने के लिए लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है, और कई बार एक-दो बर्तन पानी के लिए भी काफी मशक्कत करनी पड़ती है। ग्रामीणों का कहना है कि भीषण गर्मी के बीच इस पेयजल संकट ने उनकी दैनिक दिनचर्या को बुरी तरह प्रभावित किया है, जिससे सबसे ज्यादा परेशानी महिलाओं और बुजुर्गों को उठानी पड़ रही है। ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल गांव में पर्याप्त पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है, चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में स्थिति और भी विकट हो सकती है।1
- हरदा जिले में जिला स्तरीय प्राकृतिक खेती कार्यशाला सह कृषक प्रशिक्षण सफलतापूर्वक सम्पन्न हो गया है। इस कार्यक्रम के तहत किसानों को प्राकृतिक खेती के विषय पर प्रशिक्षण प्रदान किया गया।1
- बुरहानपुर में गणेश उत्सव की तैयारियों के बीच प्रशासन और गणेश मंडलों के बीच गंभीर टकराव की स्थिति उत्पन्न हो गई है। प्रशासन ने प्रतिबंधित प्लास्टर ऑफ पेरिस (पीओपी) से बनी और निर्धारित 10 फीट से अधिक ऊंचाई वाली गणेश प्रतिमाओं पर कार्रवाई करते हुए कई बड़ी प्रतिमाएं जब्त की हैं। यह कार्रवाई मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के पर्यावरण संरक्षण संबंधी निर्देशों और जिला प्रशासन द्वारा जारी 10 फीट से ऊंची प्रतिमाओं पर रोक के तहत की गई है। तहसीलदार प्रवीण ओहरिया ने शिकायतें मिलने के बाद विभिन्न मूर्ति निर्माण स्थलों का निरीक्षण किया था कि प्रतिबंध के बावजूद पीओपी का उपयोग हो रहा है और 16 से 18 फीट तक ऊंची प्रतिमाएं बनाई जा रही हैं; जांच में नियम उल्लंघन पाए जाने पर यह कार्रवाई की गई। इस कार्रवाई के बाद मूर्तिकारों और गणेश मंडलों में भारी नाराजगी और आक्रोश फैल गया है। विरोध स्वरूप बड़ी संख्या में लोग कलेक्ट्रेट पहुंचे और कलेक्टर के नाम एक ज्ञापन सौंपकर प्रतिबंधों पर पुनर्विचार की मांग की। प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि गणेश उत्सव केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि एक वर्षों पुरानी सांस्कृतिक और सामाजिक परंपरा है, और बड़ी प्रतिमाएं इस पर्व का प्रमुख आकर्षण होती हैं। उन्होंने कहा कि अचानक की गई इस कार्रवाई से उत्सव की तैयारियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है और उन्होंने प्रशासन से धार्मिक भावनाओं तथा परंपराओं को ध्यान में रखते हुए आदेशों में राहत देने का आग्रह किया, ताकि उत्सव पहले की तरह भव्यता से मनाया जा सके। वहीं, जिला प्रशासन और पुलिस ने स्पष्ट किया है कि यह निर्णय पर्यावरण संरक्षण और जनसुरक्षा को ध्यान में रखकर लिया गया है। पुलिस अधीक्षक आशुतोष बागड़ी के अनुसार, पिछले वर्षों में बड़ी प्रतिमाओं के परिवहन, स्थापना और विसर्जन के दौरान कई दुर्घटनाएं और कानून-व्यवस्था संबंधी चुनौतियां सामने आई थीं, जिसके कारण इस बार पहले से ही स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि जिले में 10 फीट से अधिक ऊंचाई वाली प्रतिमाओं को न तो स्थापित करने की अनुमति मिलेगी और न ही उन्हें अन्य जिलों या राज्यों में भेजा जा सकेगा। हालांकि, प्रशासन ने गणेश मंडलों का ज्ञापन स्वीकार कर लिया है और मामले पर विचार करने की बात कही है।1
- कन्नौद पीडब्ल्यूडी विभाग के एसडीओ दरियाव सिंह परमार का एक सड़क हादसे में निधन हो गया है।1
- जनपद पंचायत कन्नौद की ग्राम पंचायत इकलेरा में पंचायत सचिव और सहायक सचिव की मनमानी के कारण ग्रामीण पिछले दो माह से भारी परेशानी का सामना कर रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार, पंचायत भवन में विगत दो माह से ताले लगे हुए हैं, जिसके चलते परिसर में बड़े पैमाने पर घास उग आई है और जहरीले जीव जंतुओं का खतरा बना रहता है। इस स्थिति के कारण ग्रामीणों को कई समस्याओं से जूझना पड़ रहा है, विशेषकर छात्रों को। शासकीय और अशासकीय विद्यालय खुलने के बाद छात्रों को जाति और निवासी प्रमाण पत्रों की आवश्यकता पड़ रही है, लेकिन पंचायत भवन बंद होने से उन्हें ये प्रमाण पत्र बनवाने में दिक्कत आ रही है। ग्रामीणों ने बताया कि जब उन्होंने ग्राम पंचायत सचिव से इस बारे में बात की, तो उन्होंने यह कहते हुए पल्ला झाड़ लिया कि “आप कहीं भी शिकायत करो, मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता, पंचायत मेरी मनमर्जी से चलेगी।” ग्रामीणों ने जनपद पंचायत कन्नौद के सीईओ से भी संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया। शासन के स्पष्ट निर्देश हैं कि पंचायत भवन नियमित रूप से खुलना चाहिए और सचिव व सहायक सचिव को वहां बैठकर ग्राम वासियों की समस्याओं का समाधान करना चाहिए। अपनी मनमर्जी के कारण ग्रामीणों को परेशान करने वाले सचिव के खिलाफ अब ग्राम इकलेरा के ग्रामीण कलेक्टर की जनसुनवाई में शिकायत करने की बात कह रहे हैं।1
- बैतूल जिले की चिचोली तहसील के ग्राम कहुपानी में ग्रामीणों ने सड़क किनारे गोबर, खाद और कचरा डालने से फैल रही भीषण गंदगी पर चिंता जताई है। ग्रामीणों के अनुसार, गाँव के भीतर ही सड़क किनारे इस तरह कचरा जमा होने से गंदगी फैल रही है, जिसके कारण अन्य बीमारियों का सामना करना पड़ता है। इस समस्या के समाधान के लिए ग्रामीणों ने ग्रामीण विकास विभाग से निवेदन किया है कि वे स्वच्छ भारत अभियान के तहत तत्काल कार्रवाई करें, ताकि गाँव में गंदगी फैलने से रोक लगाई जा सके और ग्रामीणों को बीमारियों से बचाया जा सके। उन्होंने इस समस्या के शीघ्र समाधान हेतु पुनः अपील की है।4
- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ओंकारेश्वर में आयोजित सिकल सेल सम्मेलन से एक महत्वपूर्ण संदेश दिया है। उन्होंने स्वस्थ भारत के निर्माण पर बल देते हुए देश को सिकल सेल मुक्त बनाने के लिए एक व्यापक जनआंदोलन शुरू करने का सशक्त आह्वान किया है।1