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Anoopshukla
- User4571Pilibhit, Uttar Pradesh👏4 hrs ago
More news from Hardoi and nearby areas
- Post by Anoopshukla1
- देशभक्ति के रंग में रंगा संडीला: भाकियू (इंडिया) ने निकाली भव्य तिरंगा रैली ■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■ संडीला, हरदोई। गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर भारतीय किसान यूनियन (इंडिया) द्वारा देशप्रेम की भावना को जन-जन तक पहुँचाने के उद्देश्य से सण्डीला कस्बे में एक भव्य 'तिरंगा रैली' का आयोजन किया गया। संगठन की महिला जिला अध्यक्ष रेखा दीक्षित के नेतृत्व में आयोजित इस रैली में किसानों और स्थानीय नागरिकों का भारी उत्साह देखने को मिला। इमलीयाबाग से शुरू हुआ देशभक्ति का कारवां :- यह रैली निर्धारित समय 11 बजे के बाद सुबह 11:30 बजे इमलीयाबाग से शुरू हुई। हाथों में तिरंगा थामे और देशभक्ति के गगनभेदी नारे लगाते हुए प्रदर्शनकारियों का जत्था मुख्य मार्ग से होता हुआ बस स्टॉप लखनऊ रोड पहुँचा। पूरे मार्ग के दौरान 'भारत माता की जय' और 'वंदे मातरम' के नारों से माहौल पूरी तरह देशभक्ति के रंग में सराबोर रहा। इसके बाद रैली पुनःबइमलीयाबाग पहुँचकर संपन्न हुई। भारी जनसमूह और अनुशासन की मिसाल - रैली की मुख्य विशेषता इसका अनुशासन और शांतिपूर्ण संचालन रहा। सहभागिता: पदयात्रा में 100 से अधिक लोग शामिल हुए, जिसमें युवा और बुजुर्गों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। पुलिस सुरक्षा: रैली की सुरक्षा को देखते हुए स्थानीय पुलिस बल तैनात रहा, जिससे यातायात और व्यवस्था सुचारू बनी रही। सालों से चली आ रही है परंपरा:- समापन के दौरान महिला जिला अध्यक्ष रेखा दीक्षित ने कहा कि भारतीय किसान यूनियन (इंडिया) हर वर्ष इसी हर्षोल्लास के साथ तिरंगा रैली निकालती है। उन्होंने बताया कि इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य युवाओं में राष्ट्रवाद की भावना को जागृत करना और देश की एकता का संदेश देना है। उन्होंने रैली को सफल बनाने के लिए स्थानीय प्रशासन, पुलिसकर्मियों और सभी कार्यकर्ताओं का आभार व्यक्त किया।1
- ब्रेकिंग न्यूज लखनऊ आज हाइकोर्ट बार काउंसलिंग का चुनाव किया गया निरस्त। लखनऊ हाइकोर्ट में बार काउंसलिंग के चुनाव के दौरान हंगामा। हाइकोर्ट परिसर में लगे अधिवक्ता एकता ज़िंदाबाद, न्यायपालिका मुर्दाबाद के नारे। हाइकोर्ट परिसर में चुनाव परिसर में अधिवक्ताओं ने की तोड़ फोड़। आज का चुनाव हुआ कैंसिल। खबर सूत्रों से1
- Post by Shiva Gautam1
- सत्ता नहीं, हक़ चाहिए! भीख नहीं, अधिकार चाहिए! 20 फ़ीसदी नहीं, 80 फ़ीसदी की सरकार चाहिए साथियों,आज ऐसे महान पुरुष की जयंती मनाने के लिए एकत्रित हुए हैं, जिसने जीवन भर सेवा को ही धर्म,और समानता को ही राजनीति माना। आज हम उस महापुरुष को याद कर रहे हैं जो खुद कभी मंच का भूखा नहीं रहा, लेकिन जिसने करोड़ों वंचितों को मंच पर खड़ा कर दिया। मैं बात कर रहा हूँ भारत रत्न, जननायक, समाजवादी चिंतक – कर्पूरी ठाकुर जी की। साथियों, जननायक कर्पूरी ठाकुर जी के विचारों पर आने से पहले मैं दो शब्द अपने देश और अपने समाज के बारे में कहना चाहता हूँ। हम एक ऐसे देश में रहते हैं जहाँ हम ईश्वर की पूजा करते हैं, भगवान को पूज्य मानते हैं, उनके नाम पर मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारे और गिरजाघर बनाते हैं। लेकिन क्या हमने कभी सोचा है कि जिन महापुरुषों को हम पूजते हैं वे किस पृष्ठभूमि से आए थे? श्रीकृष्ण जी गाय चराने वाले थे। हज़रत मोहम्मद साहब बकरी चराने वाले थे। ईसा मसीह फर्नीचर बनाने वाले कारीगर थे। संत कबीर दास जी कपड़ा बुनने वाले जुलाहे थे। लेकिन साथियों, आज हमारे समाज का दुर्भाग्य देखिए जो मेहनत का काम करता है, उसे छोटा समझा जाता है। जो गंदगी फैलाता है, उसे बड़ा आदमी माना जाता है। जो कूड़ा उठाता है, उसे नीचा दिखाया जाता है। और जो कूड़ा फैलाता है, वह समाज में सम्मान पाता है। क्या यही हमारे धर्म का संदेश है? क्या यही हमारे महापुरुषों की सीख है? नहीं साथियों, यही विषमता, यही अन्याय, यही पाखंड जननायक कर्पूरी ठाकुर जी को राजनीति में लाया। साथियों,कर्पूरी ठाकुर जी उस समाज से आए जहाँ गरीबी थी,जहाँ शोषण था, जहाँ पिछड़े और दलित लोगों की आवाज़ नहीं थी। लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। मैं आपको ले चलता हूँ 1978 में उस समय जब पिछड़ों को हक़ देने की बात करना राजनीतिक आत्महत्या माना जाता था,तब जननायक कर्पूरी ठाकुर जी बिहार के मुख्यमंत्री बने। और मुख्यमंत्री बनते ही उन्होंने वो काम किया जिसकी हिम्मत किसी में नहीं थी। उन्होंने अति पिछड़ा वर्ग को अलग पहचान दी, और 26 प्रतिशत आरक्षण वंचित, पीड़ित, शोषित समाज को देने का ऐतिहासिक निर्णय लिया। साथियों,उन्होंने सत्ता को सेवा का साधन बनाया, ना कि परिवार बढ़ाने का औज़ार। ना बंगला, ना बैंक बैलेंस, ना रिश्तेदारों की फौज बस एक ही सपना समान भारत, न्यायपूर्ण समाज। साथियों,आज संयुक्त जनादेश पार्टी जननायक कर्पूरी ठाकुर जी की उसी विचारधारा को आगे बढ़ा रही है। हम कहते हैं, राजनीति 10–15 परिवारों की बपौती नहीं है। राजनीति 80% मेहनतकश जनता की आवाज़ है।हम कहते हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य, न्याय और रोज़गार मुफ़्त और समान होना चाहिए। हम कहते हैं। जो खेत में हल चलाता है,जो सड़क साफ़ करता है,जो फैक्ट्री में पसीना बहाता है।वही इस देश का असली मालिक है। साथियों,जननायक कर्पूरी ठाकुर जी सिर्फ़ एक नेता नहीं थे, वह एक विचार थे, एक आंदोलन थे, एक क्रांति थे। साथियो! मेहनतकश भाइयों और बहनों!आज मैं आपसे भाषण देने नहीं आया हूँ, मैं आज हिसाब लेने आया हूँ! 75 साल से इस देश की सत्ता पर मुट्ठी भर लोग बैठे हैं। उन्होंने हमारी मेहनत से महल बनाए,और हमारे बच्चों को भूखा रखा! मैं पूछता हूँ ।जिस किसान ने देश को अनाज दिया, क्या उसे सम्मान मिला? जिस मजदूर ने इमारत खड़ी की, क्या उसे घर मिला?नहीं मिला! आज देश की राजनीति में 80 फ़ीसदी मेहनतकश समाज केवल वोटर है, और 20 फ़ीसदी लोग राजा बने बैठे हैं। संयुक्त जनादेश पार्टी इस गुलामी की राजनीति को तोड़ने आई है। अब मेहनतकश समाज खुद सत्ता चलाएगा! हम साफ़ कहते हैं 👉 हमारी पार्टी 80 फ़ीसदी मेहनतकश समाज को राजनीति, शिक्षा, स्वास्थ्य, न्याय और रोजगार दिलाकर रहेगी। यह कोई घोषणा नहीं, इंकलाब है! आज गरीब का बच्चा सरकारी स्कूल में पढ़कर भी पीछे रह जाता है। क्यों?क्योंकि शिक्षा भी व्यापार बना दी गई है! हम कहते हैं ।शिक्षा बिकेगी नहीं, बँटेगी! आज अस्पताल अमीरों के लिए हैं, गरीब के लिए श्मशान है! हम कहते हैं इलाज पर ताला नहीं, दलालों पर ताला लगेगा! न्याय?गरीब को तारीख मिलती है,अमीर को फैसला!हम इस न्याय व्यवस्था को बदलकर रख देंगे! रोजगार की बात करो तो युवा की डिग्री मज़ाक बन चुकी है! हम कहते हैं। खैरात नहीं, रोजगार चाहिए!अब सुन लो हमारी सबसे बड़ी घोषणा,जो सत्ता के ठेकेदारों को हिला देगी! 👉 संयुक्त जनादेश पार्टी सत्ता में आई तो हर जाति का मुख्यमंत्री बनेगा! 👉 छह-छह महीने तक सत्ता समाज में घूमेगी! 👉 अब कोई जाति मालिक नहीं बनेगी, सब बराबर होंगे! जो लोग कहते हैं यह संभव नहीं है, मैं उनसे पूछता हूँ — जब मुख्यमंत्री कुर्सी कुछ परिवारों में घूम सकती है, तो समाज में क्यों नहीं? हम जाति की राजनीति नहीं करते, हम जाति के शोषण की राजनीति खत्म करते हैं! आज मैं जनता से पूछता हूँ क्या आप अपने बच्चों को नौकर बनते देखना चाहते हैं, या हुक्म चलाते देखना चाहते हैं? अगर हुक्म चलाना है, तो सत्ता बदलनी पड़ेगी! व्यवस्था बदलनी पड़ेगी! अब जनता जाग चुकी है! अब वोट देकर चुप बैठने का ज़माना खत्म हो गया है! मैं साफ़ कहता हूँ — जो मेहनतकश समाज के हक़ में नहीं, वह सत्ता में रहने का हक़दार नहीं! शाहजहांपुर,पीलीभीतकी धरती से आज हम ऐलान करते हैं 👉 80 फ़ीसदी मेहनतकश समाज राज करेगा!1
- Rampur Salempur patola post kakori jila Lucknow Uttar Pradesh3
- उन्नाव में बैंक कर्मियों की एक दिवसीय सांकेतिक हड़ताल सार्थक संवाददाता उन्नाव सोमेंद्र नाथ पांच दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था लागू करने की मांग तेज, कार्य प्रभावित उन्नाव। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) के बैनर तले सोमवार को जनपद उन्नाव में बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों ने एक दिवसीय सांकेतिक हड़ताल कर जोरदार प्रदर्शन किया। हड़ताल में नौ बैंक संगठनों से जुड़े कर्मचारी और अधिकारी शामिल हुए, जिसके कारण जिले के सभी सरकारी एवं निजी बैंकों का कामकाज प्रभावित रहा। हड़ताली कर्मचारियों ने सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए कहा कि पांच दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था लागू करने का मामला लंबे समय से वित्त मंत्रालय में लंबित पड़ा है, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। यूनियन नेताओं ने बताया कि 12वें बाइपारटाइट समझौते में इस मुद्दे पर सकारात्मक पहल का आश्वासन दिया गया था, परंतु उसे लागू करने में देरी की जा रही है। कर्मचारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि वे पहले ही ग्राहकों की सुविधा के लिए प्रतिदिन 40 मिनट अतिरिक्त कार्य करने पर सहमति जता चुके हैं, फिर भी उनकी मुख्य मांगों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र ही मांगों को नहीं माना गया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। बैंक कर्मियों की हड़ताल से नकद लेनदेन, चेक क्लीयरेंस और अन्य बैंकिंग सेवाओं पर असर पड़ा, जिससे ग्राहकों को असुविधा का सामना करना पड़ा।1
- Post by Anoopshukla1