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बरेली पुलिस ने बरामद किए 411 गुम और चोरी हुए मोबाइल बरेली। जनपद पुलिस ने सितंबर 2026 में CEIR पोर्टल और सर्विलांस की मदद से बड़ी कार्रवाई करते हुए 411 गुम और चोरी हुए मोबाइल फोन बरामद किए हैं। बरामद मोबाइलों की अनुमानित कीमत करीब 82 लाख रुपये बताई गई है। पुलिस ने सभी मोबाइल उनके वास्तविक मालिकों को सौंप दिए। बरेली पुलिस ने बरामद किए 411 गुम और चोरी हुए मोबाइल बरेली। जनपद पुलिस ने सितंबर 2026 में CEIR पोर्टल और सर्विलांस की मदद से बड़ी कार्रवाई करते हुए 411 गुम और चोरी हुए मोबाइल फोन बरामद किए हैं। बरामद मोबाइलों की अनुमानित कीमत करीब 82 लाख रुपये बताई गई है। पुलिस ने सभी मोबाइल उनके वास्तविक मालिकों को सौंप दिए। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर आम जनता के गुम अथवा चोरी हुए मोबाइल फोन की बरामदगी के लिए प्रत्येक माह विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत सितंबर माह में विभिन्न थानों की पुलिस, साइबर टीम और जनपदीय सर्विलांस सेल ने संयुक्त रूप से भारत सरकार के CEIR (Central Equipment Identity Register) पोर्टल और तकनीकी सर्विलांस का उपयोग कर 411 मोबाइल बरामद किए। उत्कृष्ट कार्य करने वाली पुलिस टीमों को 1,500-1,500 रुपये नकद पुरस्कार और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। इनमें प्रेमनगर, कैंट, सुभाषनगर, सीबीगंज, सिरौली, शाही, आंवला, विशारतगंज, भमोरा, फरीदपुर, फतेहगंज पूर्वी, बिथरी चैनपुर, फतेहगंज पश्चिमी, भोजीपुरा, बहेड़ी, शीशगढ़, शेरगढ़, हाफिजगंज और क्योलड़िया की साइबर टीमें शामिल हैं। पुलिस के अनुसार जनवरी से सितंबर 2026 तक चलाए गए अभियान में अब तक 3,506 मोबाइल फोन बरामद किए जा चुके हैं, जिनकी अनुमानित कीमत करीब 7 करोड़ 1 लाख 20 हजार रुपये है। सितंबर में थाना सुभाषनगर से 42, बहेड़ी से 29, इज्जतनगर से 28, आंवला से 27, बारादरी से 23, कोतवाली से 20 और फरीदपुर से 19 मोबाइल बरामद किए गए। भोजीपुरा पुलिस ने भी 7 मोबाइल फोन बरामद किए।

2 hrs ago
user_जितेन्द्र पाल
जितेन्द्र पाल
Local News Reporter बरेली, बरेली, उत्तर प्रदेश•
2 hrs ago

बरेली पुलिस ने बरामद किए 411 गुम और चोरी हुए मोबाइल बरेली। जनपद पुलिस ने सितंबर 2026 में CEIR पोर्टल और सर्विलांस की मदद से बड़ी कार्रवाई करते हुए 411 गुम और चोरी हुए मोबाइल फोन बरामद किए हैं। बरामद मोबाइलों की अनुमानित कीमत करीब 82 लाख रुपये बताई गई है। पुलिस ने सभी मोबाइल उनके वास्तविक मालिकों को सौंप दिए। बरेली पुलिस ने बरामद किए 411 गुम और चोरी हुए मोबाइल बरेली। जनपद पुलिस ने सितंबर 2026 में CEIR पोर्टल और सर्विलांस की मदद से बड़ी कार्रवाई करते हुए 411 गुम और चोरी हुए मोबाइल फोन बरामद किए हैं। बरामद मोबाइलों की अनुमानित कीमत करीब 82 लाख रुपये बताई गई है। पुलिस ने सभी मोबाइल उनके वास्तविक मालिकों को सौंप दिए। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर आम जनता के गुम अथवा चोरी हुए मोबाइल फोन की बरामदगी के लिए प्रत्येक माह विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत सितंबर माह

में विभिन्न थानों की पुलिस, साइबर टीम और जनपदीय सर्विलांस सेल ने संयुक्त रूप से भारत सरकार के CEIR (Central Equipment Identity Register) पोर्टल और तकनीकी सर्विलांस का उपयोग कर 411 मोबाइल बरामद किए। उत्कृष्ट कार्य करने वाली पुलिस टीमों को 1,500-1,500 रुपये नकद पुरस्कार और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। इनमें प्रेमनगर, कैंट, सुभाषनगर, सीबीगंज, सिरौली, शाही, आंवला, विशारतगंज, भमोरा, फरीदपुर, फतेहगंज पूर्वी, बिथरी चैनपुर, फतेहगंज पश्चिमी, भोजीपुरा, बहेड़ी, शीशगढ़, शेरगढ़, हाफिजगंज और क्योलड़िया की साइबर टीमें शामिल हैं। पुलिस के अनुसार जनवरी से सितंबर 2026 तक चलाए गए अभियान में अब तक 3,506 मोबाइल फोन बरामद किए जा चुके हैं, जिनकी अनुमानित कीमत करीब 7 करोड़ 1 लाख 20 हजार रुपये है। सितंबर में थाना सुभाषनगर से 42, बहेड़ी से 29, इज्जतनगर से 28, आंवला से 27, बारादरी से 23, कोतवाली से 20 और फरीदपुर से 19 मोबाइल बरामद किए गए। भोजीपुरा पुलिस ने भी 7 मोबाइल फोन बरामद किए।

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  • बरेली। दिव्य ज्योति जागृति संस्थान द्वारा रामलीला ग्राउंड, हार्टमैन कॉलेज रोड, बरेली में आयोजित सात-दिवसीय भगवान शिव कथा के चतुर्थ दिवस माता पार्वती के जन्मोत्सव को बड़ी धूमधाम से मनाया गया। कथा का वाचन करते हुए दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज जी के शिष्य डॉ. सरवेश्वर जी ने बताया कि महाराज हिमवान व महारानी मैना ने आदिशक्ति जगदंबिका की 27 वर्षों तक आराधना कर उन्हें पुत्री रूप में पाने का वरदान माँगा। उसी वर के फलस्वरूप माँ भवानी, पार्वती के रूप में महाराज हिमवान के घर कन्या बन जन्म लेकर आईं। स्वामी जी ने बताया कि यह भारतीय संस्कृति का कितना अद्भुत पक्ष है, जहाँ पुत्री के जन्म के लिए 27-27 वर्षों की लम्बी व घोर तपस्याएँ की जाती थीं। लेकिन एक आज का भारत है जहाँ नारी की दशा इतनी शोचनीय व दयनीय है कि बेटी के जन्म लेते ही माता-पिता के माथे पर चिंता की रेखाएँ खिंच जाती हैं। आज हर दिन नारी शोषण, बलात्कार, घरेलू हिंसा, दहेज उत्पीड़न की घटनाओं से समाचार पत्र अटे रहते हैं। चाहे वो दिल्ली का 'निर्भया कांड' हो या 'कोलकाता रेप कांड', ये सब दर्शाते हैं कि आज का समाज कितना गिर गया है जो नारी को केवल मात्र भोग की वस्तु मानता है। और इससे भी अधिक शोचनीय तो यह है कि आज की नारी भी स्वयं की गरिमापूर्ण शक्ति को भूल चुकी है। आज उसे यह समझना ही होगा कि वह अबला नहीं, सबला है। इसके लिए ज़रूरत है नारी को आत्मदर्शन प्राप्त कर अपने भीतर की सुप्त शक्ति को जागृत करने की। बाहरी सौंदर्य-परदर्शन तो छिछला है, नारी का वास्तविक सौंदर्य तो उसकी आत्मा में समाया है। ब्रह्मज्ञान द्वारा जब उसके भीतर आत्मा का दिव्य ओज पैदा होगा तो उसकी तेजस्विता के सामने सम्पूर्ण विश्व नत हो जाएगा। हर वासनापूर्ण दृष्टि दग्ध हो स्वाहा हो जाएगी और जगत उसकी पवित्रता को नमन करेगा। स्वामी जी ने बताया कि दिव्य ज्योति जागृति संस्थान आज 'संतुलन' प्रकल्प के अंतर्गत समाज में नारी को आत्मदर्शन की ब्रह्मविद्या प्रदान कर पुनः महिमामंडित पद पर आसीन करने के लिए कटिबद्ध है। इस अवसर पर शेर सिंह गंगवार, निशांत चौहान, धर्म प्रकाश, लाखन सिंह गंगवार, मुदित मिश्रा,खेमपाल साहू,राजेश मिश्रा,निकिता शुक्ला,सुमित गंगवार, भूप सिंह,कृष्ण वीर गंगवार,हरकेश सिंह, हरीश भट्ट,आदि उपस्थित रहे। इसके साथ साथ रोहिलखंड मेडिकल कॉलेज की ओर से मेडिकल कैंप भी लगाया गया है।
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    बरेली। दिव्य ज्योति जागृति संस्थान द्वारा रामलीला ग्राउंड, हार्टमैन कॉलेज रोड, बरेली में आयोजित सात-दिवसीय भगवान शिव कथा के चतुर्थ दिवस माता पार्वती के जन्मोत्सव को बड़ी धूमधाम से मनाया गया।
कथा का वाचन करते हुए दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज जी के शिष्य डॉ. सरवेश्वर जी ने बताया कि महाराज हिमवान व महारानी मैना ने आदिशक्ति जगदंबिका की 27 वर्षों तक आराधना कर उन्हें पुत्री रूप में पाने का वरदान माँगा। उसी वर के फलस्वरूप माँ भवानी, पार्वती के रूप में महाराज हिमवान के घर कन्या बन जन्म लेकर आईं। स्वामी जी ने बताया कि यह भारतीय संस्कृति का कितना अद्भुत पक्ष है, जहाँ पुत्री के जन्म के लिए 27-27 वर्षों की लम्बी व घोर तपस्याएँ की जाती थीं। लेकिन एक आज का भारत है जहाँ नारी की दशा इतनी शोचनीय व दयनीय है कि बेटी के जन्म लेते ही माता-पिता के माथे पर चिंता की रेखाएँ खिंच जाती हैं। आज हर दिन नारी शोषण, बलात्कार, घरेलू हिंसा, दहेज उत्पीड़न की घटनाओं से समाचार पत्र अटे रहते हैं। चाहे वो दिल्ली का 'निर्भया कांड' हो या 'कोलकाता रेप कांड', ये सब दर्शाते हैं कि आज का समाज कितना गिर गया है जो नारी को केवल मात्र भोग की वस्तु मानता है। और इससे भी अधिक शोचनीय तो यह है कि आज की नारी भी स्वयं की गरिमापूर्ण शक्ति को भूल चुकी है। आज उसे यह समझना ही होगा कि वह अबला नहीं, सबला है। इसके लिए ज़रूरत है नारी को आत्मदर्शन प्राप्त कर अपने भीतर की सुप्त शक्ति को जागृत करने की। बाहरी सौंदर्य-परदर्शन तो छिछला है, नारी का वास्तविक सौंदर्य तो उसकी आत्मा में समाया है। ब्रह्मज्ञान द्वारा जब उसके भीतर आत्मा का दिव्य ओज पैदा होगा तो उसकी तेजस्विता के सामने सम्पूर्ण विश्व नत हो जाएगा। हर वासनापूर्ण दृष्टि दग्ध हो स्वाहा हो जाएगी और जगत उसकी पवित्रता को नमन करेगा। स्वामी जी ने बताया कि दिव्य ज्योति जागृति संस्थान आज 'संतुलन' प्रकल्प के अंतर्गत समाज में नारी को आत्मदर्शन की ब्रह्मविद्या प्रदान कर पुनः महिमामंडित पद पर आसीन करने के लिए कटिबद्ध है। इस अवसर पर शेर सिंह गंगवार, निशांत चौहान, धर्म प्रकाश, लाखन सिंह गंगवार, मुदित मिश्रा,खेमपाल साहू,राजेश मिश्रा,निकिता शुक्ला,सुमित गंगवार, 
भूप सिंह,कृष्ण वीर गंगवार,हरकेश सिंह, हरीश  भट्ट,आदि उपस्थित रहे। इसके साथ साथ रोहिलखंड मेडिकल कॉलेज की ओर से मेडिकल कैंप भी लगाया गया है।
    user_Press reporter
    Press reporter
    Bareilly, Uttar Pradesh•
    46 min ago
  • *PS देवरनियां, बरेली – नैनीताल हाईवे पर डंपर में पीछे से मोटरसाइकिल टकराने की सूचना पर पुलिस कार्यवाही के संबंध में श्री अरुण कुमार सिंह, #COBahedi की बाइट।* *PS देवरनियां, बरेली – नैनीताल हाईवे पर डंपर में पीछे से मोटरसाइकिल टकराने की सूचना पर पुलिस कार्यवाही के संबंध में श्री अरुण कुमार सिंह, #COBahedi की बाइट।*
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    *PS देवरनियां, बरेली – नैनीताल हाईवे पर डंपर में पीछे से मोटरसाइकिल टकराने की सूचना पर पुलिस कार्यवाही के संबंध में श्री अरुण कुमार सिंह, #COBahedi की बाइट।*
*PS देवरनियां, बरेली – नैनीताल हाईवे पर डंपर में पीछे से मोटरसाइकिल टकराने की सूचना पर पुलिस कार्यवाही के संबंध में श्री अरुण कुमार सिंह, #COBahedi की बाइट।*
    user_Mohd Ahemad saifi
    Mohd Ahemad saifi
    बरेली, बरेली, उत्तर प्रदेश•
    1 hr ago
  • बरेली पुलिस ने बरामद किए 411 गुम और चोरी हुए मोबाइल बरेली। जनपद पुलिस ने सितंबर 2026 में CEIR पोर्टल और सर्विलांस की मदद से बड़ी कार्रवाई करते हुए 411 गुम और चोरी हुए मोबाइल फोन बरामद किए हैं। बरामद मोबाइलों की अनुमानित कीमत करीब 82 लाख रुपये बताई गई है। पुलिस ने सभी मोबाइल उनके वास्तविक मालिकों को सौंप दिए। बरेली पुलिस ने बरामद किए 411 गुम और चोरी हुए मोबाइल बरेली। जनपद पुलिस ने सितंबर 2026 में CEIR पोर्टल और सर्विलांस की मदद से बड़ी कार्रवाई करते हुए 411 गुम और चोरी हुए मोबाइल फोन बरामद किए हैं। बरामद मोबाइलों की अनुमानित कीमत करीब 82 लाख रुपये बताई गई है। पुलिस ने सभी मोबाइल उनके वास्तविक मालिकों को सौंप दिए। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर आम जनता के गुम अथवा चोरी हुए मोबाइल फोन की बरामदगी के लिए प्रत्येक माह विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत सितंबर माह में विभिन्न थानों की पुलिस, साइबर टीम और जनपदीय सर्विलांस सेल ने संयुक्त रूप से भारत सरकार के CEIR (Central Equipment Identity Register) पोर्टल और तकनीकी सर्विलांस का उपयोग कर 411 मोबाइल बरामद किए। उत्कृष्ट कार्य करने वाली पुलिस टीमों को 1,500-1,500 रुपये नकद पुरस्कार और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। इनमें प्रेमनगर, कैंट, सुभाषनगर, सीबीगंज, सिरौली, शाही, आंवला, विशारतगंज, भमोरा, फरीदपुर, फतेहगंज पूर्वी, बिथरी चैनपुर, फतेहगंज पश्चिमी, भोजीपुरा, बहेड़ी, शीशगढ़, शेरगढ़, हाफिजगंज और क्योलड़िया की साइबर टीमें शामिल हैं। पुलिस के अनुसार जनवरी से सितंबर 2026 तक चलाए गए अभियान में अब तक 3,506 मोबाइल फोन बरामद किए जा चुके हैं, जिनकी अनुमानित कीमत करीब 7 करोड़ 1 लाख 20 हजार रुपये है। सितंबर में थाना सुभाषनगर से 42, बहेड़ी से 29, इज्जतनगर से 28, आंवला से 27, बारादरी से 23, कोतवाली से 20 और फरीदपुर से 19 मोबाइल बरामद किए गए। भोजीपुरा पुलिस ने भी 7 मोबाइल फोन बरामद किए।
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    बरेली पुलिस ने बरामद किए 411 गुम और चोरी हुए मोबाइल

बरेली। जनपद पुलिस ने सितंबर 2026 में CEIR पोर्टल और सर्विलांस की मदद से बड़ी कार्रवाई करते हुए 411 गुम और चोरी हुए मोबाइल फोन बरामद किए हैं। बरामद मोबाइलों की अनुमानित कीमत करीब 82 लाख रुपये बताई गई है। पुलिस ने सभी मोबाइल उनके वास्तविक मालिकों को सौंप दिए। 
बरेली पुलिस ने बरामद किए 411 गुम और चोरी हुए मोबाइल
बरेली। जनपद पुलिस ने सितंबर 2026 में CEIR पोर्टल और सर्विलांस की मदद से बड़ी कार्रवाई करते हुए 411 गुम और चोरी हुए मोबाइल फोन बरामद किए हैं। बरामद मोबाइलों की अनुमानित कीमत करीब 82 लाख रुपये बताई गई है। पुलिस ने सभी मोबाइल उनके वास्तविक मालिकों को सौंप दिए। 
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर आम जनता के गुम अथवा चोरी हुए मोबाइल फोन की बरामदगी के लिए प्रत्येक माह विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत सितंबर माह में विभिन्न थानों की पुलिस, साइबर टीम और जनपदीय सर्विलांस सेल ने संयुक्त रूप से भारत सरकार के CEIR (Central Equipment Identity Register) पोर्टल और तकनीकी सर्विलांस का उपयोग कर 411 मोबाइल बरामद किए। 
उत्कृष्ट कार्य करने वाली पुलिस टीमों को 1,500-1,500 रुपये नकद पुरस्कार और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। इनमें प्रेमनगर, कैंट, सुभाषनगर, सीबीगंज, सिरौली, शाही, आंवला, विशारतगंज, भमोरा, फरीदपुर, फतेहगंज पूर्वी, बिथरी चैनपुर, फतेहगंज पश्चिमी, भोजीपुरा, बहेड़ी, शीशगढ़, शेरगढ़, हाफिजगंज और क्योलड़िया की साइबर टीमें शामिल हैं। 
पुलिस के अनुसार जनवरी से सितंबर 2026 तक चलाए गए अभियान में अब तक 3,506 मोबाइल फोन बरामद किए जा चुके हैं, जिनकी अनुमानित कीमत करीब 7 करोड़ 1 लाख 20 हजार रुपये है। 
सितंबर में थाना सुभाषनगर से 42, बहेड़ी से 29, इज्जतनगर से 28, आंवला से 27, बारादरी से 23, कोतवाली से 20 और फरीदपुर से 19 मोबाइल बरामद किए गए। भोजीपुरा पुलिस ने भी 7 मोबाइल फोन बरामद किए।
    user_जितेन्द्र पाल
    जितेन्द्र पाल
    Local News Reporter बरेली, बरेली, उत्तर प्रदेश•
    2 hrs ago
  • शुल्क में छूट लेने का आरोप, जांच की मांग* फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र बनाकर स्टांप * बरेली। फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र के आधार पर जमीन की खरीद-फरोख्त में स्टांप शुल्क में छूट लेकर राजस्व को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री को शिकायती पत्र भेजा गया है। शिकायतकर्ता ओम प्रकाश शर्मा, जिला महासचिव, पत्रकार सुरक्षा सेवा समिति, आल इंडिया, बरेली ने मामले की जांच कर कार्रवाई की मांग की है। शिकायती पत्र के अनुसार, सूरज पाल के नाम से दिव्यांग यूनिक आईडी UP1910419790192344 तथा उनकी पत्नी ममता के नाम से दिव्यांग यूनिक आईडी 1910419810107779 जारी होने का उल्लेख किया गया है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि दोनों ने वर्ष 2021-22 के दौरान फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र बनवाकर जमीन की खरीद-फरोख्त में स्टांप शुल्क की छूट का लाभ लिया, जिससे सरकारी राजस्व को करीब दस लाख रुपये का नुकसान होने की आशंका जताई गई है। शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि दोनों सामान्य रूप से स्वस्थ हैं और कथित तौर पर नियमित कार्य करते हैं। इसी आधार पर प्रमाण पत्रों की वास्तविकता की जांच की मांग की गई है। शिकायत में मांग की गई है कि दोनों प्रमाण पत्रों की मेडिकल बोर्ड से दोबारा जांच कराई जाए। यदि प्रमाण पत्र फर्जी पाए जाते हैं तो उन्हें निरस्त करते हुए संबंधित लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाए तथा जमीन की खरीद-फरोख्त में दी गई स्टांप शुल्क छूट और राजस्व नुकसान की भी जांच कराई जाए। शिकायतकर्ता ने मुख्यमंत्री से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई से अवगत कराने की मांग की है। नोट: उपरोक्त आरोप शिकायत पत्र में लगाए गए हैं। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि या संबंधित पक्ष का पक्ष इस दस्तावेज में उपलब्ध नहीं है।
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    शुल्क में छूट लेने का आरोप, जांच की मांग* फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र बनाकर स्टांप
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बरेली। फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र के आधार पर जमीन की खरीद-फरोख्त में स्टांप शुल्क में छूट लेकर राजस्व को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री को शिकायती पत्र भेजा गया है। शिकायतकर्ता ओम प्रकाश शर्मा, जिला महासचिव, पत्रकार सुरक्षा सेवा समिति, आल इंडिया, बरेली ने मामले की जांच कर कार्रवाई की मांग की है।
शिकायती पत्र के अनुसार, सूरज पाल के नाम से दिव्यांग यूनिक आईडी UP1910419790192344 तथा उनकी पत्नी ममता के नाम से दिव्यांग यूनिक आईडी 1910419810107779 जारी होने का उल्लेख किया गया है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि दोनों ने वर्ष 2021-22 के दौरान फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र बनवाकर जमीन की खरीद-फरोख्त में स्टांप शुल्क की छूट का लाभ लिया, जिससे सरकारी राजस्व को करीब दस लाख रुपये का नुकसान होने की आशंका जताई गई है।
शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि दोनों सामान्य रूप से स्वस्थ हैं और कथित तौर पर नियमित कार्य करते हैं। इसी आधार पर प्रमाण पत्रों की वास्तविकता की जांच की मांग की गई है।
शिकायत में मांग की गई है कि दोनों प्रमाण पत्रों की मेडिकल बोर्ड से दोबारा जांच कराई जाए। यदि प्रमाण पत्र फर्जी पाए जाते हैं तो उन्हें निरस्त करते हुए संबंधित लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाए तथा जमीन की खरीद-फरोख्त में दी गई स्टांप शुल्क छूट और राजस्व नुकसान की भी जांच कराई जाए।
शिकायतकर्ता ने मुख्यमंत्री से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई से अवगत कराने की मांग की है।
नोट: उपरोक्त आरोप शिकायत पत्र में लगाए गए हैं। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि या संबंधित पक्ष का पक्ष इस दस्तावेज में उपलब्ध नहीं है।
    user_द्वारिका प्रसाद साहू
    द्वारिका प्रसाद साहू
    Farmer बरेली, बरेली, उत्तर प्रदेश•
    7 hrs ago
  • गैंगस्टर एक्ट के वांछित को पुलिस ने मारी गोली, हुआ घायल साथी भी गिरफ्तार; दो तमंचे और बाइक बरामद बरेली के फरीदपुर थाना क्षेत्र में गुरुवार दोपहर पुलिस और बदमाशों के बीच मुठभेड़ हो गई। बीसलपुर रोड स्थित साठा पुलिया के पास पुलिस ने संदिग्ध बाइक सवारों को रोकने का प्रयास किया तो आरोप है कि उन्होंने पुलिस टीम पर फायरिंग कर दी। जवाबी कार्रवाई में गैंगस्टर एक्ट के मुकदमे में वांछित कासिम खां पैर में गोली लगने से घायल हो गया। पुलिस ने घायल कासिम को उपचार के लिए सीएचसी भेजा, जहां से उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। उसकी निगरानी के लिए दो पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। पुलिस के मुताबिक कासिम के पास से 315 बोर का तमंचा, एक जिंदा और एक खोखा कारतूस बरामद हुआ। वहीं पुलिस ने उसके साथी जाहिद अली खां को भी गिरफ्तार कर लिया। उसके कब्जे से तमंचा, कारतूस और मोटरसाइकिल बरामद हुई है। पुलिस के अनुसार दोनों के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। पूरे मामले में क्षेत्राधिकार फरीदपुर संदीप सिंह ने आज गुरुवार समय लगभग सुबह के 9:30 बजे जानकारी देते हुए बताया
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    गैंगस्टर एक्ट के वांछित को पुलिस ने मारी गोली, हुआ घायल साथी भी गिरफ्तार; दो तमंचे और बाइक बरामद

बरेली के फरीदपुर थाना क्षेत्र में गुरुवार दोपहर पुलिस और बदमाशों के बीच मुठभेड़ हो गई। बीसलपुर रोड स्थित साठा पुलिया के पास पुलिस ने संदिग्ध बाइक सवारों को रोकने का प्रयास किया तो आरोप है कि उन्होंने पुलिस टीम पर फायरिंग कर दी। जवाबी कार्रवाई में गैंगस्टर एक्ट के मुकदमे में वांछित कासिम खां पैर में गोली लगने से घायल हो गया।
पुलिस ने घायल कासिम को उपचार के लिए सीएचसी भेजा, जहां से उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। उसकी निगरानी के लिए दो पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। पुलिस के मुताबिक कासिम के पास से 315 बोर का तमंचा, एक जिंदा और एक खोखा कारतूस बरामद हुआ।
वहीं पुलिस ने उसके साथी जाहिद अली खां को भी गिरफ्तार कर लिया। उसके कब्जे से तमंचा, कारतूस और मोटरसाइकिल बरामद हुई है। पुलिस के अनुसार दोनों के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
पूरे मामले में क्षेत्राधिकार फरीदपुर संदीप सिंह ने आज गुरुवार समय लगभग सुबह के 9:30 बजे जानकारी देते हुए बताया
    user_बरेली की ताजा खबरें
    बरेली की ताजा खबरें
    Court reporter बरेली, बरेली, उत्तर प्रदेश•
    8 hrs ago
  • रामगंगा की खूबसूरती से सफारी की भीड़ तक... स्टीफन ऑल्टर ने बताया कॉर्बेट बचाने का रास्ता रामगंगा की खूबसूरती से सफारी की भीड़ तक... स्टीफन ऑल्टर ने बताया कॉर्बेट बचाने का रास्ता रामनगर,कॉर्बेट लिटरेचर फेस्टिवल में पहुंचे प्रसिद्ध लेखक स्टीफन ऑल्टर ने कॉर्बेट और उत्तराखंड के जंगलों को लेकर कई महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं,ऑल्टर ने जहां रामगंगा की खूबसूरती को बेमिसाल बताया, वहीं बढ़ते पर्यटन, सफारी में वाहनों की भीड़, मानव-वन्यजीव संघर्ष और जंगलों में बढ़ते कचरे पर चिंता जताई,उन्होंने कहा कि पर्यटन जरूरी है, लेकिन प्रकृति की अपनी एक क्षमता है और उसका सम्मान करना होगा, इसी दौरान उन्होंने जिम कॉर्बेट की चर्चित किताब Man-Eaters of Kumaon से लेकर कॉर्बेट के भारत छोड़कर केन्या जाने तक की कहानी पर भी अपनी बात रखी. कॉर्बेट लिटरेचर फेस्टिवल... जहां किताबों के पन्नों से निकलकर कॉर्बेट का जंगल, उसका इतिहास और वन्यजीव संरक्षण सीधे संवाद का हिस्सा बना,प्रसिद्ध लेखक स्टीफन ऑल्टर ने कहा कि जिम कॉर्बेट की किताब Man-Eaters of Kumaon आज भी लोगों को जंगल और वन्यजीवों से जोड़ने का काम कर रही है, 1940 के दशक में प्रकाशित यह किताब दशकों बाद भी पढ़ी जा रही है और इसकी लाखों प्रतियां बिक चुकी हैं,प्रसिद्ध लेखक स्टीफन ऑल्टर=ने कहाँ किताब सिर्फ रोमांच और शिकार की कहानियां नहीं है। इसके भीतर जंगल, बाघ और वन्यजीव संरक्षण की समझ भी छिपी है. उन्होंने बताया कि किशोरावस्था में जब उन्होंने पहली बार यह किताब पढ़ी, तब उन्हें इसमें शिकार और रोमांच ज्यादा आकर्षित करता था, लेकिन आज उसी किताब को देखने पर उसमें छिपा संरक्षण का संदेश ज्यादा महत्वपूर्ण दिखाई देता है. और यही बात आज के कॉर्बेट से भी जुड़ती है,ऑल्टर ने कहा कि वन्यजीव संरक्षण के लिए पर्यटन जरूरी है, लेकिन पर्यटन की भी एक प्राकृतिक सीमा होनी चाहिए,किसी बाघ या दूसरे वन्यजीव के दिखाई देते ही उसके पीछे 10-20 सफारी गाड़ियों का पहुंच जाना न तो वन्यजीव के लिए उचित है और न ही पर्यटकों के अनुभव के लिए. उन्होंने गुजरात के गीर फॉरेस्ट का उदाहरण देते हुए सफारी के लिए निर्धारित रूट सिस्टम की जरूरत बताई,उनका कहना था कि यदि पर्यटक को किसी वन्यजीव को अपेक्षाकृत शांत माहौल में देखने का अवसर मिले तो अनुभव कहीं बेहतर होगा, लेकिन जब एक जानवर के आसपास वाहनों और पर्यटकों की भीड़ जमा हो जाती है तो वन्यजीव दर्शन एक तमाशे में बदलने लगता है. स्टीफन ऑल्टर ने उत्तराखंड में बढ़ते पर्यटन को लेकर भी अपनी चिंता साझा की,उन्होंने बद्रीनाथ और गंगोत्री जैसे धार्मिक स्थलों से लेकर नेशनल पार्क और टाइगर रिजर्व तक... हर जगह पर्यटकों की संख्या वहां की क्षमता के मुताबिक तय करने की जरूरत बताई. मसूरी और नैनीताल का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि हाल में छुट्टियों के दौरान 15 मिनट का सफर तय करने में उन्हें चार घंटे लग गए,यानी पर्यटन बढ़े... लेकिन इतना नहीं कि पर्यटक मंजिल से ज्यादा रास्ते में ही फंस जाए. लेकिन स्टीफन ऑल्टर के लिए कॉर्बेट सिर्फ जंगल और पर्यटन नहीं है,उन्होंने रामगंगा नदी और रामगंगा वैली की खूबसूरती का जिक्र करते हुए कहा कि इस तरह का प्राकृतिक सौंदर्य उन्हें देश में कहीं और नजर नहीं आता. वर्ष 1965 से इस इलाके को देखते आ रहे ऑल्टर ने कहा कि उस समय यहां बहुत कम लोग आते थे। जंगल शांत था... और आज पर्यटन बढ़ने के बावजूद रामगंगा और कॉर्बेट लैंडस्केप की खूबसूरती को बचाए रखना हमारी जिम्मेदारी है. इसके लिए सरकार ही नहीं... पर्यटन उद्योग और आम लोगों को भी अपनी भूमिका निभानी होगी। ऑल्टर ने जंगलों और नदियों में फेंके जा रहे प्लास्टिक और कचरे पर भी नाराजगी जताई,उन्होंने कहा कि चलती गाड़ी से सड़क या जंगल में कचरा फेंकने की आदत सिर्फ एक व्यक्ति की लापरवाही नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के प्रति भी गैर-जिम्मेदारी है. अब सवाल है अगर जंगल और नदी ही कूड़ेदान बन गए... तो फिर हम किस प्रकृति को देखने के लिए पर्यटन कर रहे हैं? इसी कॉर्बेट के इतिहास से जुड़ा एक और सवाल स्टीफन ऑल्टर की लेखनी का विषय बना। जिम कॉर्बेट भारत में पैदा हुए... कुमाऊं की धरती, जंगलों और यहां के लोगों से उनका गहरा रिश्ता रहा। लेकिन 1947 में वे भारत छोड़कर केन्या क्यों चले गए? ऑल्टर ने कॉर्बेट के जीवन के इसी अनछुए सवाल को अपनी रचनात्मकता का हिस्सा बनाया,उनकी किताब The Corbett Papers, जिसे उन्होंने अक्षय शाह के साथ संपादित किया, में कॉर्बेट की वसीयत, ऐतिहासिक दस्तावेज और उनसे जुड़े महत्वपूर्ण रिकॉर्ड शामिल हैं. वहीं कॉर्बेट के जीवन के उन हिस्सों को समझने के लिए, जहां ऐतिहासिक दस्तावेज कम हैं, ऑल्टर ने फिक्शन का सहारा लिया. कॉर्बेट का नैनीताल का बचपन... जंगल और प्राकृतिक इतिहास के प्रति उनका आकर्षण... परिवार से उनका रिश्ता... और भारत छोड़ने का फैसला—इन सबको उन्होंने कल्पनात्मक नजरिए से देखने की कोशिश की. कॉर्बेट ने शादी क्यों नहीं की? इस सवाल पर भी ऑल्टर ने उनकी मां और परिवार के प्रति जिम्मेदारियों को एक महत्वपूर्ण पहलू बताया। और दिलचस्प बात यह कि किताब प्रकाशित होने के बाद एक समीक्षक ने ऑल्टर की पूरी तरह काल्पनिक कहानी को कॉर्बेट की वास्तविक कहानी समझ लिया. कॉर्बेट की कहानी सिर्फ एक शिकारी की कहानी नहीं है... और न ही कॉर्बेट सिर्फ एक पर्यटन स्थल है। स्टीफन ऑल्टर का संदेश साफ है—अगर रामगंगा की खूबसूरती, जंगल की खामोशी और वन्यजीवों की दुनिया को आने वाली पीढ़ियों तक बचाना है, तो पर्यटन भी प्रकृति की क्षमता के मुताबिक होना चाहिए, शायद यही कॉर्बेट की किताबों और आज के कॉर्बेट के बीच सबसे बड़ा संबंध भी है.
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    रामगंगा की खूबसूरती से सफारी की भीड़ तक... स्टीफन ऑल्टर ने बताया कॉर्बेट बचाने का रास्ता

रामगंगा की खूबसूरती से सफारी की भीड़ तक... स्टीफन ऑल्टर ने बताया कॉर्बेट बचाने का रास्ता
रामनगर,कॉर्बेट लिटरेचर फेस्टिवल में पहुंचे प्रसिद्ध लेखक स्टीफन ऑल्टर ने कॉर्बेट और उत्तराखंड के जंगलों को लेकर कई महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं,ऑल्टर ने जहां रामगंगा की खूबसूरती को बेमिसाल बताया, वहीं बढ़ते पर्यटन, सफारी में वाहनों की भीड़, मानव-वन्यजीव संघर्ष और जंगलों में बढ़ते कचरे पर चिंता जताई,उन्होंने कहा कि पर्यटन जरूरी है, लेकिन प्रकृति की अपनी एक क्षमता है और उसका सम्मान करना होगा, इसी दौरान उन्होंने जिम कॉर्बेट की चर्चित किताब Man-Eaters of Kumaon से लेकर कॉर्बेट के भारत छोड़कर केन्या जाने तक की कहानी पर भी अपनी बात रखी.
कॉर्बेट लिटरेचर फेस्टिवल...
जहां किताबों के पन्नों से निकलकर कॉर्बेट का जंगल, उसका इतिहास और वन्यजीव संरक्षण सीधे संवाद का हिस्सा बना,प्रसिद्ध लेखक स्टीफन ऑल्टर ने कहा कि जिम कॉर्बेट की किताब Man-Eaters of Kumaon आज भी लोगों को जंगल और वन्यजीवों से जोड़ने का काम कर रही है, 1940 के दशक में प्रकाशित यह किताब दशकों बाद भी पढ़ी जा रही है और इसकी लाखों प्रतियां बिक चुकी हैं,प्रसिद्ध लेखक स्टीफन ऑल्टर=ने कहाँ किताब सिर्फ रोमांच और शिकार की कहानियां नहीं है। इसके भीतर जंगल, बाघ और वन्यजीव संरक्षण की समझ भी छिपी है.
उन्होंने बताया कि किशोरावस्था में जब उन्होंने पहली बार यह किताब पढ़ी, तब उन्हें इसमें शिकार और रोमांच ज्यादा आकर्षित करता था, लेकिन आज उसी किताब को देखने पर उसमें छिपा संरक्षण का संदेश ज्यादा महत्वपूर्ण दिखाई देता है.
और यही बात आज के कॉर्बेट से भी जुड़ती है,ऑल्टर ने कहा कि वन्यजीव संरक्षण के लिए पर्यटन जरूरी है, लेकिन पर्यटन की भी एक प्राकृतिक सीमा होनी चाहिए,किसी बाघ या दूसरे वन्यजीव के दिखाई देते ही उसके पीछे 10-20 सफारी गाड़ियों का पहुंच जाना न तो वन्यजीव के लिए उचित है और न ही पर्यटकों के अनुभव के लिए.
उन्होंने गुजरात के गीर फॉरेस्ट का उदाहरण देते हुए सफारी के लिए निर्धारित रूट सिस्टम की जरूरत बताई,उनका कहना था कि यदि पर्यटक को किसी वन्यजीव को अपेक्षाकृत शांत माहौल में देखने का अवसर मिले तो अनुभव कहीं बेहतर होगा, लेकिन जब एक जानवर के आसपास वाहनों और पर्यटकों की भीड़ जमा हो जाती है तो वन्यजीव दर्शन एक तमाशे में बदलने लगता है.
स्टीफन ऑल्टर ने उत्तराखंड में बढ़ते पर्यटन को लेकर भी अपनी चिंता साझा की,उन्होंने बद्रीनाथ और गंगोत्री जैसे धार्मिक स्थलों से लेकर नेशनल पार्क और टाइगर रिजर्व तक... हर जगह पर्यटकों की संख्या वहां की क्षमता के मुताबिक तय करने की जरूरत बताई.
मसूरी और नैनीताल का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि हाल में छुट्टियों के दौरान 15 मिनट का सफर तय करने में उन्हें चार घंटे लग गए,यानी पर्यटन बढ़े... लेकिन इतना नहीं कि पर्यटक मंजिल से ज्यादा रास्ते में ही फंस जाए.
लेकिन स्टीफन ऑल्टर के लिए कॉर्बेट सिर्फ जंगल और पर्यटन नहीं है,उन्होंने रामगंगा नदी और रामगंगा वैली की खूबसूरती का जिक्र करते हुए कहा कि इस तरह का प्राकृतिक सौंदर्य उन्हें देश में कहीं और नजर नहीं आता.
वर्ष 1965 से इस इलाके को देखते आ रहे ऑल्टर ने कहा कि उस समय यहां बहुत कम लोग आते थे। जंगल शांत था... और आज पर्यटन बढ़ने के बावजूद रामगंगा और कॉर्बेट लैंडस्केप की खूबसूरती को बचाए रखना हमारी जिम्मेदारी है.
इसके लिए सरकार ही नहीं... पर्यटन उद्योग और आम लोगों को भी अपनी भूमिका निभानी होगी।
ऑल्टर ने जंगलों और नदियों में फेंके जा रहे प्लास्टिक और कचरे पर भी नाराजगी जताई,उन्होंने कहा कि चलती गाड़ी से सड़क या जंगल में कचरा फेंकने की आदत सिर्फ एक व्यक्ति की लापरवाही नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के प्रति भी गैर-जिम्मेदारी है.
अब सवाल है अगर जंगल और नदी ही कूड़ेदान बन गए... तो फिर हम किस प्रकृति को देखने के लिए पर्यटन कर रहे हैं?
इसी कॉर्बेट के इतिहास से जुड़ा एक और सवाल स्टीफन ऑल्टर की लेखनी का विषय बना।
जिम कॉर्बेट भारत में पैदा हुए... कुमाऊं की धरती, जंगलों और यहां के लोगों से उनका गहरा रिश्ता रहा। लेकिन 1947 में वे भारत छोड़कर केन्या क्यों चले गए?
ऑल्टर ने कॉर्बेट के जीवन के इसी अनछुए सवाल को अपनी रचनात्मकता का हिस्सा बनाया,उनकी किताब The Corbett Papers, जिसे उन्होंने अक्षय शाह के साथ संपादित किया, में कॉर्बेट की वसीयत, ऐतिहासिक दस्तावेज और उनसे जुड़े महत्वपूर्ण रिकॉर्ड शामिल हैं.
वहीं कॉर्बेट के जीवन के उन हिस्सों को समझने के लिए, जहां ऐतिहासिक दस्तावेज कम हैं, ऑल्टर ने फिक्शन का सहारा लिया.
कॉर्बेट का नैनीताल का बचपन... जंगल और प्राकृतिक इतिहास के प्रति उनका आकर्षण... परिवार से उनका रिश्ता... और भारत छोड़ने का फैसला—इन सबको उन्होंने कल्पनात्मक नजरिए से देखने की कोशिश की.
कॉर्बेट ने शादी क्यों नहीं की? इस सवाल पर भी ऑल्टर ने उनकी मां और परिवार के प्रति जिम्मेदारियों को एक महत्वपूर्ण पहलू बताया।
और दिलचस्प बात यह कि किताब प्रकाशित होने के बाद एक समीक्षक ने ऑल्टर की पूरी तरह काल्पनिक कहानी को कॉर्बेट की वास्तविक कहानी समझ लिया.
कॉर्बेट की कहानी सिर्फ एक शिकारी की कहानी नहीं है... और न ही कॉर्बेट सिर्फ एक पर्यटन स्थल है। स्टीफन ऑल्टर का संदेश साफ है—अगर रामगंगा की खूबसूरती, जंगल की खामोशी और वन्यजीवों की दुनिया को आने वाली पीढ़ियों तक बचाना है, तो पर्यटन भी प्रकृति की क्षमता के मुताबिक होना चाहिए, शायद यही कॉर्बेट की किताबों और आज के कॉर्बेट के बीच सबसे बड़ा संबंध भी है.
    user_UP NEWS 18 BHARAT
    UP NEWS 18 BHARAT
    Journalist patrakaar बरेली, बरेली, उत्तर प्रदेश•
    21 hrs ago
  • असद में तेज बारिश के साथ गिरे ओले, मौसम ने ली अचानक करवट संवाददाता: आयुष मिश्रा असद, मीरगंज (बरेली)। असद क्षेत्र में अचानक मौसम बदलने से तेज बारिश के साथ ओलावृष्टि हुई। आसमान में घने बादल छा गए और कुछ ही देर में तेज बारिश शुरू हो गई। बारिश के साथ गिरे ओलों से लोगों को हैरानी हुई और जनजीवन कुछ समय के लिए प्रभावित रहा। कई लोग सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने को मजबूर हुए। मौसम में आई इस अचानक तब्दीली से तापमान में गिरावट दर्ज की गई और लोगों को गर्मी से राहत मिली।
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    असद में तेज बारिश के साथ गिरे  ओले, मौसम ने ली अचानक करवट संवाददाता: आयुष मिश्रा
असद, मीरगंज (बरेली)। असद क्षेत्र में अचानक मौसम बदलने से तेज बारिश के साथ ओलावृष्टि हुई। आसमान में घने बादल छा गए और कुछ ही देर में तेज बारिश शुरू हो गई। बारिश के साथ गिरे ओलों से लोगों को हैरानी हुई और जनजीवन कुछ समय के लिए प्रभावित रहा। कई लोग सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने को मजबूर हुए। मौसम में आई इस अचानक तब्दीली से तापमान में गिरावट दर्ज की गई और लोगों को गर्मी से राहत मिली।
    user_Ayush Mishra
    Ayush Mishra
    Court reporter बरेली, बरेली, उत्तर प्रदेश•
    23 hrs ago
  • फरीदपुर में पुलिस मुठभेड़, गैंगस्टर एक्ट का वांछित घायल पुलिस की जवाबी कार्रवाई में कासिम के पैर में लगी गोली, दूसरा आरोपी गिरफ्तार; तमंचे, कारतूस और बाइक बरामद फरीदपुर में पुलिस मुठभेड़, गैंगस्टर एक्ट का वांछित घायल पुलिस की जवाबी कार्रवाई में कासिम के पैर में लगी गोली, दूसरा आरोपी गिरफ्तार; तमंचे, कारतूस और बाइक बरामद फरीदपुर। थाना फरीदपुर पुलिस ने गुरुवार को मुठभेड़ के दौरान गैंगस्टर एक्ट में वांछित चल रहे आरोपी कासिम खां को पैर में गोली लगने के बाद गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने मौके से एक अन्य आरोपी जाहिद अली खां को भी गिरफ्तार किया है। दोनों के कब्जे से अवैध तमंचे, कारतूस और एक मोटरसाइकिल बरामद की गई है। पुलिस के अनुसार, 22 अगस्त 2026 को थाना फरीदपुर में मु0अ0सं0 629/26 के तहत धारा 2/3(1) गैंगस्टर एक्ट में पांच नामजद आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। इसमें मेवा शर्फापुर निवासी कासिम खां पुत्र गुल खां वांछित चल रहा था। गुरुवार 8 अक्टूबर को करीब दोपहर 12 बजे मुखबिर की सूचना पर फरीदपुर पुलिस ने बीसलपुर रोड स्थित साठा पुलिया के पास संदिग्ध मोटरसाइकिल सवारों की घेराबंदी की। पुलिस के मुताबिक, रोकने का प्रयास करने पर बाइक सवारों ने पुलिस टीम पर फायरिंग कर दी। जवाबी कार्रवाई में कासिम खां के पैर में गोली लग गई। घायल आरोपी को उपचार के लिए सीएचसी फरीदपुर ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उसे जिला अस्पताल बरेली रेफर कर दिया गया। उसकी निगरानी के लिए दो पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। पुलिस ने कासिम के कब्जे से 315 बोर का एक तमंचा, एक जिंदा कारतूस और एक खोखा कारतूस बरामद किया। वहीं दूसरे आरोपी जाहिद अली खां पुत्र जान मोहम्मद निवासी मेवा शर्फापुर को गिरफ्तार किया गया। उसके कब्जे से 315 बोर का एक तमंचा, जिसकी नाल में कारतूस फंसा हुआ था, एक जिंदा कारतूस और मोटरसाइकिल बरामद हुई। पुलिस ने बरामदगी के आधार पर संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर अग्रिम विधिक कार्रवाई शुरू कर दी है। घटना के संबंध में फील्ड यूनिट को भी सूचना दी गई है।
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    फरीदपुर में पुलिस मुठभेड़, गैंगस्टर एक्ट का वांछित घायल

पुलिस की जवाबी कार्रवाई में कासिम के पैर में लगी गोली, दूसरा आरोपी गिरफ्तार; तमंचे, कारतूस और बाइक बरामद
फरीदपुर में पुलिस मुठभेड़, गैंगस्टर एक्ट का वांछित घायल
पुलिस की जवाबी कार्रवाई में कासिम के पैर में लगी गोली, दूसरा आरोपी गिरफ्तार; तमंचे, कारतूस और बाइक बरामद
फरीदपुर। थाना फरीदपुर पुलिस ने गुरुवार को मुठभेड़ के दौरान गैंगस्टर एक्ट में वांछित चल रहे आरोपी कासिम खां को पैर में गोली लगने के बाद गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने मौके से एक अन्य आरोपी जाहिद अली खां को भी गिरफ्तार किया है। दोनों के कब्जे से अवैध तमंचे, कारतूस और एक मोटरसाइकिल बरामद की गई है।
पुलिस के अनुसार, 22 अगस्त 2026 को थाना फरीदपुर में मु0अ0सं0 629/26 के तहत धारा 2/3(1) गैंगस्टर एक्ट में पांच नामजद आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। इसमें मेवा शर्फापुर निवासी कासिम खां पुत्र गुल खां वांछित चल रहा था।
गुरुवार 8 अक्टूबर को करीब दोपहर 12 बजे मुखबिर की सूचना पर फरीदपुर पुलिस ने बीसलपुर रोड स्थित साठा पुलिया के पास संदिग्ध मोटरसाइकिल सवारों की घेराबंदी की। पुलिस के मुताबिक, रोकने का प्रयास करने पर बाइक सवारों ने पुलिस टीम पर फायरिंग कर दी। जवाबी कार्रवाई में कासिम खां के पैर में गोली लग गई। घायल आरोपी को उपचार के लिए सीएचसी फरीदपुर ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उसे जिला अस्पताल बरेली रेफर कर दिया गया। उसकी निगरानी के लिए दो पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं।
पुलिस ने कासिम के कब्जे से 315 बोर का एक तमंचा, एक जिंदा कारतूस और एक खोखा कारतूस बरामद किया। वहीं दूसरे आरोपी जाहिद अली खां पुत्र जान मोहम्मद निवासी मेवा शर्फापुर को गिरफ्तार किया गया। उसके कब्जे से 315 बोर का एक तमंचा, जिसकी नाल में कारतूस फंसा हुआ था, एक जिंदा कारतूस और मोटरसाइकिल बरामद हुई।
पुलिस ने बरामदगी के आधार पर संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर अग्रिम विधिक कार्रवाई शुरू कर दी है। घटना के संबंध में फील्ड यूनिट को भी सूचना दी गई है।
    user_जितेन्द्र पाल
    जितेन्द्र पाल
    Local News Reporter बरेली, बरेली, उत्तर प्रदेश•
    3 hrs ago
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