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मध्य प्रदेश में प्रजातंत्र की अवधारणा बदल चुकी है, जहाँ पब्लिक को मालिक माना जाता था, वहाँ अब परिभाषा बदल गई है। हाल ही में नागौद क्षेत्र में सड़क की मांग को लेकर बच्चों ने आंदोलन किया। लेकिन, फर्जी आश्वासन के सिवा कुछ नहीं मिला। आज तक एक ट्रॉली मुरम तक नहीं पड़ी। यह घटना ग्राम छुलहा में घटी, जो पंचायत गिनजारा के अंतर्गत आता है। यह पूरा मामला रैगांव विधानसभा क्षेत्र में है और जनपद पंचायत नागौद, सतना में स्थित है। मोदी यादव के राज में मूलभूत सुविधाओं से वंचित लोग अब फेल सरकार हटाओ, देश बचाओ का नारा बुलंद कर रहे हैं।
Kamlendra Kushwaha
मध्य प्रदेश में प्रजातंत्र की अवधारणा बदल चुकी है, जहाँ पब्लिक को मालिक माना जाता था, वहाँ अब परिभाषा बदल गई है। हाल ही में नागौद क्षेत्र में सड़क की मांग को लेकर बच्चों ने आंदोलन किया। लेकिन, फर्जी आश्वासन के सिवा कुछ नहीं मिला। आज तक एक ट्रॉली मुरम तक नहीं पड़ी। यह घटना ग्राम छुलहा में घटी, जो पंचायत गिनजारा के अंतर्गत आता है। यह पूरा मामला रैगांव विधानसभा क्षेत्र में है और जनपद पंचायत नागौद, सतना में स्थित है। मोदी यादव के राज में मूलभूत सुविधाओं से वंचित लोग अब फेल सरकार हटाओ, देश बचाओ का नारा बुलंद कर रहे हैं।
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- मैहर जिले के रामनगर विकास खण्ड के अमिलिया गांव में एक किसान के कुएं में मगरमच्छ दिखाई देने से हड़कंप मच गया। जैसे ही इस बारे में पता चला, बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर इकट्ठा हो गए। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम भी मौके पर पहुंच गई। हालांकि, कुएं में पानी भरा होने के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन नहीं किया जा सका। मगरमच्छ को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए कुएं का पानी खाली कराया जा रहा है, ताकि रेस्क्यू का कार्य शुरू किया जा सके। वन विभाग की पूरी टीम रेस्क्यू ऑपरेशन में लगी हुई है और मगरमच्छ के रेस्क्यू की तैयारी हो चुकी है। वन विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे कुएं के आसपास भीड़ न लगाएं और रेस्क्यू टीम के कार्य में सहयोग करें।2
- मैहर के भरौली में आयोजित RCCPL प्राइवेट लिमिटेड की क्षमता विस्तार (सेकेंड यूनिट) से संबंधित लोकसुनवाई में जिला पंचायत सदस्य जयंती तिवारी ने प्रभावित क्षेत्र के लोगों के हितों को प्राथमिकता देने की मांग की। इस सुनवाई में अपर कलेक्टर संजना जैन और मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी सुधांशु तिवारी भी मौजूद थे। जयंती तिवारी ने कहा कि कंपनी का सीएसआर (CSR) फंड प्रभावित गांवों के विकास पर खर्च किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी मांग की कि जिन किसानों की भूमि अधिग्रहित हुई है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर रोजगार दिया जाए। इसके अलावा, प्रदूषण नियंत्रण के प्रभावी और पारदर्शी उपाय सुनिश्चित किए जाएं। तिवारी ने जोर देकर कहा कि औद्योगिक विकास के साथ-साथ जनहित और पर्यावरण संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए।1
- बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के धमोखर बफर क्षेत्र के जंगल में एक बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर बाघिन का खराब 'रेडियो कॉलर' सुरक्षित रूप से हटा दिया गया है। इस व्यापक अभियान में 60 से अधिक सदस्यों की टीम और 4 प्रशिक्षित हाथियों की मदद ली गई। रेस्क्यू के बाद बाघिन का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया और सब कुछ सामान्य पाए जाने पर उसे वापस उसके प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया गया है।1
- उचेहरा (सतना, म.प्र.): बिजली संकट को लेकर ब्लॉक कांग्रेस कमेटी उचेहरा ने विद्युत विभाग को ज्ञापन सौंपा है। क्षेत्र में अघोषित बिजली कटौती, लंबे समय से जले पड़े ट्रांसफार्मर और सड़कों व खेतों में लटकती खतरनाक तारों की समस्या से जूझ रही जनता और किसानों की परेशानी को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि बिजली विभाग की लापरवाही के कारण आम जनता और किसान बेहद परेशान हैं, जिससे खेती का काम ठप पड़ा है और जान-माल का खतरा बना हुआ है। ज्ञापन में उठाई गई मुख्य माँगों में शामिल हैं: गाँवों में लंबे समय से जले पड़े ट्रांसफार्मरों को तत्काल बदला जाए, सुचारू रूप से बिजली आपूर्ति और सही वोल्टेज सुनिश्चित किया जाए, लगभग 80% ट्रांसफार्मरों से जुड़ी पुरानी व जली हुई तारों को तुरंत बदला जाए, पोलों और पेड़ों पर लटक रही खतरनाक तारों का सुधार किया जाए और झाड़ियों की सफाई कराई जाए ताकि फॉल्ट न हो, शिकायत करने पर विभागीय कर्मचारियों द्वारा फोन न उठाने और ढिलाई बरतने के रवैये में सुधार किया जाए। कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने विद्युत विभाग को चेतावनी देते हुए स्पष्ट कहा कि यदि 3 दिनों के भीतर ज्ञापन में दी गई समस्याओं का निराकरण नहीं किया गया, तो उचेहरा विद्युत विभाग कार्यालय के सामने उग्र धरना-प्रदर्शन एवं आंदोलन किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी विभाग और प्रशासन की होगी। ज्ञापन प्राप्त करते हुए कनिष्ठ यंत्री (JE) ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं को आश्वस्त किया कि वे स्वयं किसान पृष्ठभूमि से आते हैं और समस्या की गंभीरता को समझते हैं। उन्होंने 2 दिनों के भीतर प्राथमिकता के आधार पर ट्रांसफार्मरों की मरम्मत कराने और विद्युत सप्लाई दुरुस्त करने का आश्वासन दिया। इस दौरान ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष मोतीलाल कुशवाहा, युवा कांग्रेस ब्लॉक उपाध्यक्ष निखिल कुशवाहा, शुभम कुशवाहा, कमलेश पाल, सुखेंद्र कुशवाहा, शिवपूजन त्रिवेदी, शीलभद्र कुशवाहा, रूपकुमार गौतम, रामबालक विश्वकर्मा सहित कई कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे।1
- मध्य प्रदेश के सतना जिले के नागौद में प्रगतिशील लेखक संघ (प्रलेस) इकाई द्वारा आयोजित एक परिचर्चा गोष्ठी में मुंशी प्रेमचंद के साहित्य, सामाजिक सरोकारों और मानवीय मूल्यों पर गहन विमर्श हुआ। यह आयोजन प्रेमचंद की जयंती पखवाड़े के अंतर्गत अखंड ज्योति विद्यालय, इंदिरा नगर, नागौद में किया गया था। गोष्ठी के मुख्य अतिथि पद्मश्री बाबूलाल दाहिया ने अपने उद्बोधन में कहा कि प्रेमचंद ने अपेक्षाकृत अल्प जीवन में जो विराट साहित्य-संपदा रची, वह हिंदी साहित्य की अमूल्य धरोहर है। उन्होंने कहा कि प्रेमचंद की रचनाएँ केवल कथाएँ नहीं, बल्कि भारतीय समाज के नैतिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक यथार्थ का जीवंत दस्तावेज हैं। उनकी सहज भाषा, जीवन से जुड़े पात्र, गहरी मानवीय संवेदना और अंतर्निहित सामाजिक संदेश ही उनकी रचनाओं को कालजयी बनाते हैं। दाहिया ने 'नमक का दरोगा' और 'ईदगाह' जैसी कहानियों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रेमचंद का साहित्य मनोरंजन से कहीं आगे बढ़कर मूल्यबोध, सामाजिक चेतना और मानवीय नैतिकता का साहित्य है। यही कारण है कि उनकी रचनाएँ समय के साथ पुरानी नहीं होतीं। उन्होंने कहा कि यदि आज़ादी से पूर्व के भारत का वास्तविक सामाजिक चित्र देखना हो, तो उसे प्रेमचंद के साहित्य में सहजता से देखा जा सकता है। अध्यक्षीय उद्बोधन में रामलाल सिंह परिहार ने कहा कि प्रेमचंद को समझने के लिए उनके साहित्य को जीवनानुभवों के साथ जोड़कर पढ़ना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि उत्कृष्ट लेखन का आधार गंभीर अध्ययन और सतत पठन है। साहित्यकार समाज का पथप्रदर्शक होता है और प्रेमचंद इस परंपरा के सर्वश्रेष्ठ प्रतिनिधि हैं। विशिष्ट अतिथि विजयशंकर चतुर्वेदी ने कहा कि प्रेमचंद भारतीय जनजीवन के सबसे विश्वसनीय कथाकार हैं। उन्होंने किसान, स्त्री, श्रमिक और समाज के उपेक्षित वर्गों के संघर्ष को साहित्य में अमर कर दिया। उन्होंने प्रेमचंद के प्रसिद्ध कथन 'साहित्य का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज के आगे मशाल लेकर चलना है' का उल्लेख करते हुए कहा कि यह आज भी साहित्यकारों के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने कहा कि प्रेमचंद को सच्ची श्रद्धांजलि उनकी रचनाओं को नई पीढ़ी तक पहुँचाने और उनके साहित्यिक अवदान को संरक्षित रखने में निहित है। कालिका त्रिपाठी ने अपनी कविता के माध्यम से प्रेमचंद को श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए कहा कि उन्होंने समाज के उपेक्षित, वंचित और शोषित वर्गों को अपनी लेखनी का केंद्र बनाया। उनकी कहानियाँ आज भी सामाजिक विषमताओं, अन्याय और मानवीय संघर्ष की उतनी ही प्रामाणिक अभिव्यक्ति हैं, जितनी अपने समय में थीं। राजेंद्र सिंह परमार ने कहा कि हिंदी साहित्य में दलितों, किसानों और शोषित समाज के जीवन का जितना संवेदनशील एवं यथार्थपरक चित्रण प्रेमचंद ने किया, वह अप्रतिम है। रामहित त्रिपाठी ने कहा कि प्रेमचंद की रचनाएँ मनुष्य के भीतर मानवीय मूल्यों को जागृत करती हैं और सामाजिक उत्तरदायित्व का बोध कराती हैं। बालेंदु प्रभाकर मिश्र ने कहा कि प्रेमचंद केवल कथाकार नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना के अग्रदूत थे। उन्होंने किसानों, श्रमिकों, दलितों और वंचित वर्गों की पीड़ा को साहित्य की मुख्यधारा में प्रतिष्ठित किया। अरुण पयासी ने कहा कि प्रेमचंद ने साहित्य को कल्पना के सीमित दायरे से निकालकर सामाजिक यथार्थ का दर्पण बनाया। उनका लेखन केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि वैचारिक जागृति और सामाजिक परिवर्तन का प्रभावी माध्यम है। पी.के. अहिरवार ने कहा कि प्रेमचंद का साहित्य केवल अध्ययन का विषय नहीं, बल्कि जीवन में आत्मसात किए जाने योग्य मूल्य-परंपरा है। उनके विचारों को व्यवहार में उतारना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। इस अवसर पर के. दाहिया, पुष्पेंद्र पाठक, सीताशरण परासर अमन त्रिपाठी तथा अनुपम दाहिया ने भी अपने विचार व्यक्त किए।2
- मैहर में आज छात्रों का आक्रोश सड़कों पर फूट पड़ा। NSUI जिलाध्यक्ष अजिर बिहारी द्विवेदी की अगुवाई में हजारों युवाओं की उग्र भीड़ ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) कार्यालय को चारों तरफ से घेर लिया। इस घेराव में भारी भीड़ दिखी और पुलिस-प्रशासन मूकदर्शक बना रहा। सरकार की तानाशाही नीतियों और छात्र विरोधी रवैये के खिलाफ उग्र हुए कार्यकर्ताओं ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की पुरजोर मांग की। NSUI जिलाध्यक्ष अजिर बिहारी द्विवेदी ने सरकार को सीधे शब्दों में ललकारा और कहा, 'छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करने की हिम्मत अब कोई न करे! अगर हमारी माँगें नहीं मानी गईं और अत्याचार बंद नहीं हुआ, तो यह उग्र आंदोलन सरकार की नींव हिलाकर रख देगा। हम ईंट से ईंट बजा देंगे, लेकिन छात्रों का हक़ छीनने नहीं देंगे!' BJP दफ़्तर के बाहर घंटों तक चले इस उग्र घेराव और प्रचंड नारेबाजी से माहौल पूरी तरह गरमा गया है। युवाओं का यह रौद्र रूप देखकर साफ है कि छात्र अब आर-पार के मूड में हैं। बड़ा सवाल यह है कि क्या अंधी-बहरी सरकार इन युवाओं का जलजला देखकर जागेगी, या फिर यह ज्वाला पूरे प्रदेश को अपनी ज़द में लेगी?1
- मैहर में NSUI जिलाध्यक्ष अजिर बिहारी द्विवेदी के नेतृत्व में छात्र हितों से जुड़े मुद्दों को लेकर एक विशाल धरना प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शनकारियों ने भारतीय जनता पार्टी कार्यालय का घेराव किया और अपनी मांगों को लेकर जोरदार आवाज बुलंद की। इस दौरान, NSUI जिलाध्यक्ष अजिर बिहारी द्विवेदी ने स्पष्ट किया कि छात्रों के साथ किसी भी प्रकार का अत्याचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और छात्र हितों की लड़ाई पूरी मजबूती के साथ लड़ी जाएगी। प्रदर्शन के दौरान, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग भी उठाई गई। अब बड़ा सवाल यह है कि क्या सरकार छात्रों की आवाज सुनेगी और प्रदर्शनकारियों की मांगों पर कोई ठोस कदम उठाएगी? इस प्रदर्शन से स्पष्ट है कि छात्र संगठन किसी भी अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने से पीछे नहीं हटेंगे।1