मध्य प्रदेश के सतना जिले के नागौद में प्रगतिशील लेखक संघ (प्रलेस) इकाई द्वारा आयोजित एक परिचर्चा गोष्ठी में मुंशी प्रेमचंद के साहित्य, सामाजिक सरोकारों और मानवीय मूल्यों पर गहन विमर्श हुआ। यह आयोजन प्रेमचंद की जयंती पखवाड़े के अंतर्गत अखंड ज्योति विद्यालय, इंदिरा नगर, नागौद में किया गया था। गोष्ठी के मुख्य अतिथि पद्मश्री बाबूलाल दाहिया ने अपने उद्बोधन में कहा कि प्रेमचंद ने अपेक्षाकृत अल्प जीवन में जो विराट साहित्य-संपदा रची, वह हिंदी साहित्य की अमूल्य धरोहर है। उन्होंने कहा कि प्रेमचंद की रचनाएँ केवल कथाएँ नहीं, बल्कि भारतीय समाज के नैतिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक यथार्थ का जीवंत दस्तावेज हैं। उनकी सहज भाषा, जीवन से जुड़े पात्र, गहरी मानवीय संवेदना और अंतर्निहित सामाजिक संदेश ही उनकी रचनाओं को कालजयी बनाते हैं। दाहिया ने 'नमक का दरोगा' और 'ईदगाह' जैसी कहानियों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रेमचंद का साहित्य मनोरंजन से कहीं आगे बढ़कर मूल्यबोध, सामाजिक चेतना और मानवीय नैतिकता का साहित्य है। यही कारण है कि उनकी रचनाएँ समय के साथ पुरानी नहीं होतीं। उन्होंने कहा कि यदि आज़ादी से पूर्व के भारत का वास्तविक सामाजिक चित्र देखना हो, तो उसे प्रेमचंद के साहित्य में सहजता से देखा जा सकता है। अध्यक्षीय उद्बोधन में रामलाल सिंह परिहार ने कहा कि प्रेमचंद को समझने के लिए उनके साहित्य को जीवनानुभवों के साथ जोड़कर पढ़ना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि उत्कृष्ट लेखन का आधार गंभीर अध्ययन और सतत पठन है। साहित्यकार समाज का पथप्रदर्शक होता है और प्रेमचंद इस परंपरा के सर्वश्रेष्ठ प्रतिनिधि हैं। विशिष्ट अतिथि विजयशंकर चतुर्वेदी ने कहा कि प्रेमचंद भारतीय जनजीवन के सबसे विश्वसनीय कथाकार हैं। उन्होंने किसान, स्त्री, श्रमिक और समाज के उपेक्षित वर्गों के संघर्ष को साहित्य में अमर कर दिया। उन्होंने प्रेमचंद के प्रसिद्ध कथन 'साहित्य का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज के आगे मशाल लेकर चलना है' का उल्लेख करते हुए कहा कि यह आज भी साहित्यकारों के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने कहा कि प्रेमचंद को सच्ची श्रद्धांजलि उनकी रचनाओं को नई पीढ़ी तक पहुँचाने और उनके साहित्यिक अवदान को संरक्षित रखने में निहित है। कालिका त्रिपाठी ने अपनी कविता के माध्यम से प्रेमचंद को श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए कहा कि उन्होंने समाज के उपेक्षित, वंचित और शोषित वर्गों को अपनी लेखनी का केंद्र बनाया। उनकी कहानियाँ आज भी सामाजिक विषमताओं, अन्याय और मानवीय संघर्ष की उतनी ही प्रामाणिक अभिव्यक्ति हैं, जितनी अपने समय में थीं। राजेंद्र सिंह परमार ने कहा कि हिंदी साहित्य में दलितों, किसानों और शोषित समाज के जीवन का जितना संवेदनशील एवं यथार्थपरक चित्रण प्रेमचंद ने किया, वह अप्रतिम है। रामहित त्रिपाठी ने कहा कि प्रेमचंद की रचनाएँ मनुष्य के भीतर मानवीय मूल्यों को जागृत करती हैं और सामाजिक उत्तरदायित्व का बोध कराती हैं। बालेंदु प्रभाकर मिश्र ने कहा कि प्रेमचंद केवल कथाकार नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना के अग्रदूत थे। उन्होंने किसानों, श्रमिकों, दलितों और वंचित वर्गों की पीड़ा को साहित्य की मुख्यधारा में प्रतिष्ठित किया। अरुण पयासी ने कहा कि प्रेमचंद ने साहित्य को कल्पना के सीमित दायरे से निकालकर सामाजिक यथार्थ का दर्पण बनाया। उनका लेखन केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि वैचारिक जागृति और सामाजिक परिवर्तन का प्रभावी माध्यम है। पी.के. अहिरवार ने कहा कि प्रेमचंद का साहित्य केवल अध्ययन का विषय नहीं, बल्कि जीवन में आत्मसात किए जाने योग्य मूल्य-परंपरा है। उनके विचारों को व्यवहार में उतारना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। इस अवसर पर के. दाहिया, पुष्पेंद्र पाठक, सीताशरण परासर अमन त्रिपाठी तथा अनुपम दाहिया ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
मध्य प्रदेश के सतना जिले के नागौद में प्रगतिशील लेखक संघ (प्रलेस) इकाई द्वारा आयोजित एक परिचर्चा गोष्ठी में मुंशी प्रेमचंद के साहित्य, सामाजिक सरोकारों और मानवीय मूल्यों पर गहन विमर्श हुआ। यह आयोजन प्रेमचंद की जयंती पखवाड़े के अंतर्गत अखंड ज्योति विद्यालय, इंदिरा नगर, नागौद में किया गया था। गोष्ठी के मुख्य अतिथि पद्मश्री बाबूलाल दाहिया ने अपने उद्बोधन में कहा कि प्रेमचंद ने अपेक्षाकृत अल्प जीवन में जो विराट साहित्य-संपदा रची, वह हिंदी साहित्य की अमूल्य धरोहर है। उन्होंने कहा कि प्रेमचंद की रचनाएँ केवल कथाएँ नहीं, बल्कि भारतीय समाज के नैतिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक यथार्थ का जीवंत दस्तावेज हैं। उनकी सहज भाषा, जीवन से जुड़े पात्र, गहरी मानवीय संवेदना और अंतर्निहित सामाजिक संदेश ही उनकी रचनाओं को कालजयी बनाते हैं। दाहिया ने 'नमक का दरोगा' और 'ईदगाह' जैसी कहानियों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रेमचंद का साहित्य मनोरंजन से कहीं आगे बढ़कर मूल्यबोध, सामाजिक चेतना और मानवीय नैतिकता का साहित्य है। यही कारण है कि उनकी रचनाएँ समय के साथ पुरानी नहीं होतीं। उन्होंने कहा कि यदि आज़ादी से पूर्व के भारत का वास्तविक सामाजिक चित्र देखना हो, तो उसे प्रेमचंद के साहित्य में सहजता से देखा जा सकता है। अध्यक्षीय उद्बोधन में रामलाल सिंह परिहार ने कहा कि प्रेमचंद को समझने के लिए उनके साहित्य को जीवनानुभवों के साथ जोड़कर पढ़ना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि उत्कृष्ट लेखन का आधार गंभीर अध्ययन और सतत पठन है। साहित्यकार समाज का पथप्रदर्शक होता है और प्रेमचंद इस परंपरा के सर्वश्रेष्ठ प्रतिनिधि हैं। विशिष्ट अतिथि विजयशंकर चतुर्वेदी ने कहा कि प्रेमचंद भारतीय जनजीवन के सबसे विश्वसनीय कथाकार हैं। उन्होंने किसान, स्त्री, श्रमिक और समाज के उपेक्षित वर्गों के संघर्ष को साहित्य में अमर कर दिया। उन्होंने प्रेमचंद
के प्रसिद्ध कथन 'साहित्य का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज के आगे मशाल लेकर चलना है' का उल्लेख करते हुए कहा कि यह आज भी साहित्यकारों के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने कहा कि प्रेमचंद को सच्ची श्रद्धांजलि उनकी रचनाओं को नई पीढ़ी तक पहुँचाने और उनके साहित्यिक अवदान को संरक्षित रखने में निहित है। कालिका त्रिपाठी ने अपनी कविता के माध्यम से प्रेमचंद को श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए कहा कि उन्होंने समाज के उपेक्षित, वंचित और शोषित वर्गों को अपनी लेखनी का केंद्र बनाया। उनकी कहानियाँ आज भी सामाजिक विषमताओं, अन्याय और मानवीय संघर्ष की उतनी ही प्रामाणिक अभिव्यक्ति हैं, जितनी अपने समय में थीं। राजेंद्र सिंह परमार ने कहा कि हिंदी साहित्य में दलितों, किसानों और शोषित समाज के जीवन का जितना संवेदनशील एवं यथार्थपरक चित्रण प्रेमचंद ने किया, वह अप्रतिम है। रामहित त्रिपाठी ने कहा कि प्रेमचंद की रचनाएँ मनुष्य के भीतर मानवीय मूल्यों को जागृत करती हैं और सामाजिक उत्तरदायित्व का बोध कराती हैं। बालेंदु प्रभाकर मिश्र ने कहा कि प्रेमचंद केवल कथाकार नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना के अग्रदूत थे। उन्होंने किसानों, श्रमिकों, दलितों और वंचित वर्गों की पीड़ा को साहित्य की मुख्यधारा में प्रतिष्ठित किया। अरुण पयासी ने कहा कि प्रेमचंद ने साहित्य को कल्पना के सीमित दायरे से निकालकर सामाजिक यथार्थ का दर्पण बनाया। उनका लेखन केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि वैचारिक जागृति और सामाजिक परिवर्तन का प्रभावी माध्यम है। पी.के. अहिरवार ने कहा कि प्रेमचंद का साहित्य केवल अध्ययन का विषय नहीं, बल्कि जीवन में आत्मसात किए जाने योग्य मूल्य-परंपरा है। उनके विचारों को व्यवहार में उतारना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। इस अवसर पर के. दाहिया, पुष्पेंद्र पाठक, सीताशरण परासर अमन त्रिपाठी तथा अनुपम दाहिया ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
- उचेहरा (सतना, म.प्र.): बिजली संकट को लेकर ब्लॉक कांग्रेस कमेटी उचेहरा ने विद्युत विभाग को ज्ञापन सौंपा है। क्षेत्र में अघोषित बिजली कटौती, लंबे समय से जले पड़े ट्रांसफार्मर और सड़कों व खेतों में लटकती खतरनाक तारों की समस्या से जूझ रही जनता और किसानों की परेशानी को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि बिजली विभाग की लापरवाही के कारण आम जनता और किसान बेहद परेशान हैं, जिससे खेती का काम ठप पड़ा है और जान-माल का खतरा बना हुआ है। ज्ञापन में उठाई गई मुख्य माँगों में शामिल हैं: गाँवों में लंबे समय से जले पड़े ट्रांसफार्मरों को तत्काल बदला जाए, सुचारू रूप से बिजली आपूर्ति और सही वोल्टेज सुनिश्चित किया जाए, लगभग 80% ट्रांसफार्मरों से जुड़ी पुरानी व जली हुई तारों को तुरंत बदला जाए, पोलों और पेड़ों पर लटक रही खतरनाक तारों का सुधार किया जाए और झाड़ियों की सफाई कराई जाए ताकि फॉल्ट न हो, शिकायत करने पर विभागीय कर्मचारियों द्वारा फोन न उठाने और ढिलाई बरतने के रवैये में सुधार किया जाए। कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने विद्युत विभाग को चेतावनी देते हुए स्पष्ट कहा कि यदि 3 दिनों के भीतर ज्ञापन में दी गई समस्याओं का निराकरण नहीं किया गया, तो उचेहरा विद्युत विभाग कार्यालय के सामने उग्र धरना-प्रदर्शन एवं आंदोलन किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी विभाग और प्रशासन की होगी। ज्ञापन प्राप्त करते हुए कनिष्ठ यंत्री (JE) ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं को आश्वस्त किया कि वे स्वयं किसान पृष्ठभूमि से आते हैं और समस्या की गंभीरता को समझते हैं। उन्होंने 2 दिनों के भीतर प्राथमिकता के आधार पर ट्रांसफार्मरों की मरम्मत कराने और विद्युत सप्लाई दुरुस्त करने का आश्वासन दिया। इस दौरान ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष मोतीलाल कुशवाहा, युवा कांग्रेस ब्लॉक उपाध्यक्ष निखिल कुशवाहा, शुभम कुशवाहा, कमलेश पाल, सुखेंद्र कुशवाहा, शिवपूजन त्रिवेदी, शीलभद्र कुशवाहा, रूपकुमार गौतम, रामबालक विश्वकर्मा सहित कई कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे।1
- मध्य प्रदेश के सतना जिले के नागौद में प्रगतिशील लेखक संघ (प्रलेस) इकाई द्वारा आयोजित एक परिचर्चा गोष्ठी में मुंशी प्रेमचंद के साहित्य, सामाजिक सरोकारों और मानवीय मूल्यों पर गहन विमर्श हुआ। यह आयोजन प्रेमचंद की जयंती पखवाड़े के अंतर्गत अखंड ज्योति विद्यालय, इंदिरा नगर, नागौद में किया गया था। गोष्ठी के मुख्य अतिथि पद्मश्री बाबूलाल दाहिया ने अपने उद्बोधन में कहा कि प्रेमचंद ने अपेक्षाकृत अल्प जीवन में जो विराट साहित्य-संपदा रची, वह हिंदी साहित्य की अमूल्य धरोहर है। उन्होंने कहा कि प्रेमचंद की रचनाएँ केवल कथाएँ नहीं, बल्कि भारतीय समाज के नैतिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक यथार्थ का जीवंत दस्तावेज हैं। उनकी सहज भाषा, जीवन से जुड़े पात्र, गहरी मानवीय संवेदना और अंतर्निहित सामाजिक संदेश ही उनकी रचनाओं को कालजयी बनाते हैं। दाहिया ने 'नमक का दरोगा' और 'ईदगाह' जैसी कहानियों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रेमचंद का साहित्य मनोरंजन से कहीं आगे बढ़कर मूल्यबोध, सामाजिक चेतना और मानवीय नैतिकता का साहित्य है। यही कारण है कि उनकी रचनाएँ समय के साथ पुरानी नहीं होतीं। उन्होंने कहा कि यदि आज़ादी से पूर्व के भारत का वास्तविक सामाजिक चित्र देखना हो, तो उसे प्रेमचंद के साहित्य में सहजता से देखा जा सकता है। अध्यक्षीय उद्बोधन में रामलाल सिंह परिहार ने कहा कि प्रेमचंद को समझने के लिए उनके साहित्य को जीवनानुभवों के साथ जोड़कर पढ़ना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि उत्कृष्ट लेखन का आधार गंभीर अध्ययन और सतत पठन है। साहित्यकार समाज का पथप्रदर्शक होता है और प्रेमचंद इस परंपरा के सर्वश्रेष्ठ प्रतिनिधि हैं। विशिष्ट अतिथि विजयशंकर चतुर्वेदी ने कहा कि प्रेमचंद भारतीय जनजीवन के सबसे विश्वसनीय कथाकार हैं। उन्होंने किसान, स्त्री, श्रमिक और समाज के उपेक्षित वर्गों के संघर्ष को साहित्य में अमर कर दिया। उन्होंने प्रेमचंद के प्रसिद्ध कथन 'साहित्य का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज के आगे मशाल लेकर चलना है' का उल्लेख करते हुए कहा कि यह आज भी साहित्यकारों के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने कहा कि प्रेमचंद को सच्ची श्रद्धांजलि उनकी रचनाओं को नई पीढ़ी तक पहुँचाने और उनके साहित्यिक अवदान को संरक्षित रखने में निहित है। कालिका त्रिपाठी ने अपनी कविता के माध्यम से प्रेमचंद को श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए कहा कि उन्होंने समाज के उपेक्षित, वंचित और शोषित वर्गों को अपनी लेखनी का केंद्र बनाया। उनकी कहानियाँ आज भी सामाजिक विषमताओं, अन्याय और मानवीय संघर्ष की उतनी ही प्रामाणिक अभिव्यक्ति हैं, जितनी अपने समय में थीं। राजेंद्र सिंह परमार ने कहा कि हिंदी साहित्य में दलितों, किसानों और शोषित समाज के जीवन का जितना संवेदनशील एवं यथार्थपरक चित्रण प्रेमचंद ने किया, वह अप्रतिम है। रामहित त्रिपाठी ने कहा कि प्रेमचंद की रचनाएँ मनुष्य के भीतर मानवीय मूल्यों को जागृत करती हैं और सामाजिक उत्तरदायित्व का बोध कराती हैं। बालेंदु प्रभाकर मिश्र ने कहा कि प्रेमचंद केवल कथाकार नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना के अग्रदूत थे। उन्होंने किसानों, श्रमिकों, दलितों और वंचित वर्गों की पीड़ा को साहित्य की मुख्यधारा में प्रतिष्ठित किया। अरुण पयासी ने कहा कि प्रेमचंद ने साहित्य को कल्पना के सीमित दायरे से निकालकर सामाजिक यथार्थ का दर्पण बनाया। उनका लेखन केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि वैचारिक जागृति और सामाजिक परिवर्तन का प्रभावी माध्यम है। पी.के. अहिरवार ने कहा कि प्रेमचंद का साहित्य केवल अध्ययन का विषय नहीं, बल्कि जीवन में आत्मसात किए जाने योग्य मूल्य-परंपरा है। उनके विचारों को व्यवहार में उतारना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। इस अवसर पर के. दाहिया, पुष्पेंद्र पाठक, सीताशरण परासर अमन त्रिपाठी तथा अनुपम दाहिया ने भी अपने विचार व्यक्त किए।2
- मध्य प्रदेश के सतना जिले के मैहर में स्वामी नीलकंठ महाराज जी के ओइला आश्रम में गुरु महाराज की प्रतिमा खंडित किए जाने की घटना ने क्षेत्र में आक्रोश फैला दिया है। इस घटना के बाद, बड़ी संख्या में संत समाज और श्रद्धालु सोमवार को कलेक्ट्रेट पहुंचे और विरोध दर्ज कराया। उन्होंने कलेक्टर के नाम तहसीलदार को एक ज्ञापन सौंपा। यह घटना 25 जुलाई को हुई जब आश्रम में गुरु महाराज की प्रतिमा की प्राण-प्रतिष्ठा का कार्यक्रम आयोजित था। आरोप है कि कुछ असामाजिक तत्वों ने आश्रम पहुंचकर कार्यक्रम का विरोध किया और वहां मौजूद साधु-संतों के साथ अभद्रता की। उपद्रवियों ने प्रतिमा का हाथ का अंगूठा तोड़कर उसे खंडित कर दिया, जिससे प्राण-प्रतिष्ठा का धार्मिक कार्य बीच में ही रुक गया। साधु-संतों और स्थानीय निवासियों ने प्रशासन से दो मांगें की हैं: प्रतिमा खंडित करने वाले दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई और आश्रम की भूमि पर किए गए अवैध कब्जे को तत्काल मुक्त कराया जाए। प्रशासन ने ज्ञापन स्वीकार करते हुए मामले की निष्पक्ष जांच कराने और कानून व्यवस्था बनाए रखते हुए उचित दंडात्मक कार्रवाई का आश्वासन दिया है।1
- सतना जिले के ग्राम छुलहा में मानसून की बारिश के कारण 900 मीटर का कच्चा रास्ता पूरी तरह दलदल में तब्दील हो गया है। इस वजह से स्कूली बच्चों, बीमार बुजुर्गों और किसानों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने इस समस्या को लेकर अनोखे तरीके से विरोध प्रदर्शन किया है। उन्होंने इस कच्चे मार्ग पर 'बेशरम के पौधे' लगाकर प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के प्रति अपना गुस्सा जाहिर किया है। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बारिश के कारण यह रास्ता पूरी तरह कीचड़ और पानी से भर गया है, जिससे बच्चों को घुटनों तक कीचड़ से होकर गुजरना पड़ रहा है। इस समस्या को मुख्यमंत्री तक पहुँचाने के लिए सामाजिक कार्यकर्ताओं ने एक वीडियो सोशल मीडिया पर जारी किया था। ग्रामीणों का कहना है कि वे कई वर्षों से इस मार्ग को पक्का करवाने की माँग कर रहे हैं। उन्होंने सांसद, विधायक और कलेक्टर से भी गुहार लगाई, लेकिन हर बार उन्हें केवल आश्वासन ही मिला। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि झूठे आश्वासन दिए जाते हैं, लेकिन धरातल पर कोई काम नहीं होता। यह क्षेत्र मध्य प्रदेश शासन की राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी के रैगांव विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है। लगातार सामने आ रहे वीडियो और विरोध प्रदर्शनों के बाद स्थानीय जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) और प्रशासनिक अधिकारियों ने ग्रामीणों को जल्द से जल्द सड़क निर्माण कार्य शुरू कराने का दोबारा आश्वासन दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रजातंत्र में जनता के पास अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है, और वे अपनी इस मूलभूत आवश्यकता के लिए शांतिपूर्ण तरीके से प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास कर रहे हैं।1
- मध्य प्रदेश में प्रजातंत्र की अवधारणा बदल चुकी है, जहाँ पब्लिक को मालिक माना जाता था, वहाँ अब परिभाषा बदल गई है। हाल ही में नागौद क्षेत्र में सड़क की मांग को लेकर बच्चों ने आंदोलन किया। लेकिन, फर्जी आश्वासन के सिवा कुछ नहीं मिला। आज तक एक ट्रॉली मुरम तक नहीं पड़ी। यह घटना ग्राम छुलहा में घटी, जो पंचायत गिनजारा के अंतर्गत आता है। यह पूरा मामला रैगांव विधानसभा क्षेत्र में है और जनपद पंचायत नागौद, सतना में स्थित है। मोदी यादव के राज में मूलभूत सुविधाओं से वंचित लोग अब फेल सरकार हटाओ, देश बचाओ का नारा बुलंद कर रहे हैं।1
- ग्राम ककरा की आंगनवाड़ी में बच्चों को मिलने वाले पोषण आहार को लेकर ग्रामीणों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। आरोप है कि आंगनवाड़ी केंद्र में शासन द्वारा निर्धारित पोषण आहार उपलब्ध कराने की बजाय बच्चों को केवल नमक और पूड़ी परोसी जा रही है। ग्रामीणों के अनुसार, सरकार द्वारा आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से पोषण आहार योजना संचालित की जा रही है, लेकिन ग्राम ककरा में योजना के क्रियान्वयन को लेकर लापरवाही के आरोप सामने आए हैं। मामले में शिवम स्व-सहायता समूह की भूमिका पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि बच्चों को वास्तव में पौष्टिक आहार की जगह सिर्फ नमक-पूड़ी दी जा रही है तो यह बच्चों के स्वास्थ्य के साथ गंभीर लापरवाही है। ग्रामीणों ने महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों सहित जिला कलेक्टर से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने आंगनवाड़ी केंद्र का मौके पर निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति सामने लाने और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग उठाई है। ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों के पोषण से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की अनदेखी नहीं होनी चाहिए। अब देखना होगा कि प्रशासन इस शिकायत को कितनी गंभीरता से लेता है और जांच के बाद क्या कार्रवाई की जाती है।2
- सतना जिले की उचेहरा थाना पुलिस ने शनिवार और रविवार की दरमियानी रात अपराध नियंत्रण और लंबे समय से फरार चल रहे अपराधियों की धरपकड़ के लिए विशेष कॉम्बिंग गश्त अभियान चलाया। पुलिस की अलग-अलग टीमों ने क्षेत्र के विभिन्न इलाकों में दबिश देकर कुल 17 वारंटियों को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है। पकड़े गए आरोपियों में 3 से 15 वर्षों से फरार चल रहे 7 स्थायी वारंटी और 10 गिरफ्तारी वारंटी शामिल हैं। अभियान के दौरान सालों से पुलिस को चकमा दे रहे स्थायी वारंटियों पर शिकंजा कसा गया। इनमें भूरूहुरा निवासी राकेश यादव (15 वर्ष से फरार), मतरी निवासी राजमन सिंह (14 वर्ष से फरार), झुरखुलू निवासी पूरन लाल पटेल (12 वर्ष से फरार), सखौहा खुर्द निवासी महेश कोल (4 वर्ष से फरार), देवार निवासी श्रीराम लोधी (3 वर्ष से फरार) और गढ़ी टोला निवासी मधुसूदन पाण्डेय शामिल हैं। इसके अलावा पुलिस ने 10 ऐसे आरोपियों को भी दबोचा जिनके खिलाफ न्यायालय से गिरफ्तारी वारंट जारी थे। इनमें दो बार वारंट जारी हो चुके इटहा खोखरा निवासी गोकुल पाल सहित इटहा निवासी रामसजीवन पाल व रामविश्वास पाल, संजय नगर नई बस्ती निवासी अंकित वर्मा, बडखुरा निवासी साजन कछेर, महाराजपुर निवासी लल्लू यादव, खम्हरिया निवासी रामसुजन कोल व सरमन कोल और बसहा मोहल्ला निवासी करन बंशकार शामिल हैं। उचेहरा थाना पुलिस ने रात भर चले इस सघन अभियान के बाद सभी 17 आरोपियों को हिरासत में लेकर आवश्यक वैधानिक प्रक्रिया पूरी की और रविवार को उन्हें माननीय न्यायालय के समक्ष पेश कर दिया। पुलिस की इस त्वरित और सख्त कार्रवाई से क्षेत्र के असामाजिक तत्वों में हड़कंप मच गया है।1
- मध्य प्रदेश के सतना शहर में गुप्ता पैलेस पुष्कर्णी पार्क कांड के मास्टरमाइंड अमित खरे ने एक और संगीन अपराध को अंजाम दिया है। अमित खरे, जो स्मार्ट सिटी हॉस्पिटल, जबलपुर के संचालक हैं, ने सुनियोजित तरीके से पांच लोगों को डंपर से कुचलवाकर मौत के घाट उतार दिया। पुलिस ने इस कांड का खुलासा कर दिया है और अमित खरे को उसके साथियों के साथ जेल भेज दिया गया है। इससे पहले, अमित खरे पर फर्जी मेडिकल बनाने का आरोप था, जो गुप्ता पैलेस पुष्कर्णी पार्क कांड से जुड़ा था। अब इस नए खुलासे ने राज्य में सनसनी फैला दी है। पुलिस की तत्परता से मामले का पर्दाफाश हुआ और अपराधियों को सलाखों के पीछे पहुंचाया गया।1